Monday, February 20, 2012

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


हरवंश सिंह की उपस्थिति में एक इंका नेता बैठक में राहुल गांधी के विरोध में बोलते रहा और सभी चुपचाप सुनते रहे
अब इसे क्या कहा जाये? कुछ समझ में नहीं आता लेकिन इतना तो कह ही सकते हैं कि पांच बार से लगातार विधानसभा का चुनाव भाजपा को जिताने का खामियाजा ही इस रूप में किसानों को चुकाना पड़ा हैं।कांग्रेस की बैठक में जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह कर उपस्थिति में एक इंका नेता भाषण सुर्खियों मेंबना हुआ हैं।इस भाषण की चर्चा के साथ कई इंका नेता चटखारे लेकर यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि जिले में हरवंश सिंह के अलावा कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता की आलोचना की जा सकती है। पूरे देश में जहां कांग्रेसजन  राहुल गांधी में अपना भविष्य देख रहें हैं वहीं सिवनी में जिले के कांग्रेसी नेताओं की उपस्थिति में उनकी आलोचना होना और सभी का चुप रह जाना अत्यधिक आश्चर्य का विषय हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बसोरी सिंह दोनों कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह और नर्मदा प्रजापति के क्षेत्र मे चुनाव हारे थे और जिले के लखदौन क्षेत्र ने उन्हें इतनी भारी बढ़त दिलायी थी।लेकिन इसके बाद भी जिताने वाले आदिवासी क्षेत्र के साथ एक आदिवासी नेता का ऐसा सौतेला व्यवहार सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।लेकिन इस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने कभी लाल बत्ती का सुख देखा ही नहीं था। भाजपा प्रत्याशी के रूप में केवलारी से पिछलाचुनाव लड़नेवाले डॉ. बिसेन को लाल बत्ती मिलने से पिछले 36 साल से एपेक्षित भाजपा कार्यकर्त्ताओं में एक विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। “ 
राहुल गांधी की ही आलोचना हो गयी पहली बैठक में-अब इसे क्या कहा जाये? कुछ समझ में नहीं आता लेकिन इतना तो कह ही सकते हैं कि पांच बार से लगातार विधानसभा का चुनाव भाजपा को जिताने का खामियाजा ही इस रूप में किसानों को चुकाना पड़ा हैं। हाल ही में जिले के किसान भारी ओला वृष्टि के कारण परेशान हैं। सिवनी विधानसभा के छिंदवाड़ा जिले की सीमा से लगे गांव पीपरडाही से लेकर बम्होड़ी तक की पट्ठी बुरी तरह प्रभावित हुयी हैं। लेकिन जब किसानपुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा नियुक्त जिले के पालनहार प्रभारी मंत्री नाना भाऊ जब ओला पीड़ितों की सुध लेने आये तो उनके जारी शासकीय कार्यक्रम में रास्ते में ही पड़ने वाले इन गांवों का दौरा शामिल नहीं था। वे सिवनी सर्किट हाउस में रुक कर केवलारी विधानसभा क्षेत्र के धनोरा विकासखंड़ के हिस्से में हुयी ओला वृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का मुआयना करेंगें। यहां यह उल्लेखनीय है कि केवलारी विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं जहां वे पहले ही दौरा कर चुके हैं। जबकि सिवनी भाजपा के प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया का क्षेत्र हैं।   
राहुल गांधी की ही आलोचना हो गयी पहली बैठक में-कांग्रेस की बैठक में जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह कर उपस्थिति में एक इंका नेता भाषण सुर्खियों मेंबना हुआ हैं।इस भाषण की चर्चा के साथ कई इंका नेता चटखारे लेकर यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि जिले में हरवंश सिंह के अलावा कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता की आलोचना की जा सकती हैं जिसे सभी कांग्रेसी मौन रह कर सुनते रहतें हैं। बताया जा रहा है कि नव गठित जिला कांग्रेस कमेटी की पहली बैठक में कुछ बातें बड़ी ही रोचक रहीं। सबसे पहले तो हुआ यह कि जब हरवंश सिंह बैठक में पहुचे तब उन्होंने अपने ब्रीफ केस से निकाल कर उपस्थित सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को बैठक का ऐजेन्डा वितरित किया। साथ ही सभी पदाधिकारियों की एक सूची भी भी बांटी। इससे पहले किसी भी इंका नेता को यह नहीं मालूम था कि बैठक का ऐजेन्डा क्या हैं? और किन विषयों पर चर्चा की जाना हैं? इसके बाद सभी ने अपना अपना परिचय दिया। इसके बाद नेताओं के भाषणों का दौर हुआ। इसी क्रम में जब धनौरा ब्लाक के नेता और नव नियुक्त महामंत्री मुकेश जैन ने अपना भाषण शुरू किया तो सभी भौंचक रह गये। पहले तो उन्होंने पिछले लंबे समय से कांग्रेस की निष्क्रियता  पर बोलते हुये कांग्रेस के मोर्चा संगठनों को भी आड़े हाथों लिया और यह सवाल दागा कि जो नेता मोर्चा संगठनों में नकारा साबित हो चुके हैं उन्हें फिर पदों पर क्यों बिठाया गया? यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ेसवादल दल के अध्यक्ष पद पर रजनीश सिंह पिछले लगभग दस सालों से जमे हुये हैं और हाल ही में उन्हें जिला कांग्रेस का महामंत्री बनाया गया हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसे ही नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया हैं। मोर्चा संगठनों की आलोचना करते करते मुकेश जैन ने युवक कांग्रेस के वर्तमान स्वरूप पर बात करते हुये कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल दागते हुये उनकी आलोचना भी की तो सभी भौंचक रह गये लेकिन हरवंश सिंह को चुप चाप सुनते देख सभी चुप ही रहे। पूरे देश में जहां कांग्रेसजन  राहुल गांधी में अपना भविष्य देख रहें हैं वहीं सिवनी में जिले के कांग्रेसी नेताओं की उपस्थिति में उनकी आलोचना होना और सभी का चुप रह जाना अत्यधिक आश्चर्य का विषय हैं। बैठक में युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक राजा बघेल सहित सभी प्रदेश प्रतिनिधि भी शामिल थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि परिसीमन के बाद के  बाद हरवंश सिंह के केवलारी विस क्षेत्रमें धनोरा ब्लाक का एक हिस्सा भी शामिल हो गया हैं जिसमें मुकेश जैन भी अपना प्रभाव रखतें हैं। इसके अलावा एक तथ्य और उल्लेखनीय है कि संगठन चुनाव में मुकेश जैन कोधनौरा ब्लाक कांग्रेस कमेटी का र्निविरोध अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन जब ब्लाक अध्यक्षों की घोषणा हुयी तो उनके स्थान पर तिवड़ी लाल उइके को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। हालांकि अब उन्हें जिले का महामंत्री बना दिया गया हैं लेकिन एक दर्जन महामंत्रियों में शामिल किये जाने से शायद नागवार गुजर रहा हैं।
बसोरी का सौतेला व्यवहार चर्चित-सिवनी जिले की दो विधानसभा क्षेत्रों के सांसद हैं कांग्रेस के बासेरी सिंह मरकाम। ये विस क्षेत्र हैं केवलारी और लखनादौन। केवलारी से इंका विधायक हरवंश सिंह हैं तो लखनादौन से भाजपा की शशि ठाकुर हैं। मंड़ला संसदीय क्षेत्र में ही नरसिंहपुर जिले का गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र आता हैं जहां से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति मंत्री हैं जो कि दस साल तक कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। सांसद बसोरी सिंह ने अभी तक के अपने कार्यकाल में सांसद निधि से जो राशि वितरित की हैं उसके आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं। उन्होंने केवलारी क्षेत्र में 62 लाख  गोटेगांव में 48 लाख और लखनादौन क्षे़त्र में 14 लाख रु. अब तक दिये हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं मंड़ला लोकसभा क्षेत्र में 6 भाजपा के विधायक हैं और कांग्रेस के दो हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बसोरी सिंह दोनों कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह और नर्मदा प्रजापति के क्षेत्र में चुनाव हारे थे और जिले के लखदौन क्षेत्र ने उन्हें इतनी भारी बढ़त दिलायी थी कि वे सीधे पहुंचने में कामयाब हो गये। लेकिन इसके बाद भी जिताने वाले आदिवासी क्षेत्र के साथ एक आदिवासी नेता का ऐसा सौतेला व्यवहार सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। 
बिसेन को लाल बत्ती मिलने से छत्तीस सालों से उपेक्षि भाजपाइयों में उत्साह -प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी केा एक लाल बत्ती और दे दी हैं।जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया हैं। पदभार ग्रहण करते समय जिले की केवलारी और बरघाट क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण नेता शामिल हुये थे। इसके अलावा प्रदेश के वित्त मंत्री राधव जी,सांसद सुमित्रा महाजन,पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित कई प्रदेश के कई कद्दावर भाजपा नेता भी मौजूद थे। डॉ. बिसेन की इस नियुक्ति से जिले के भाजपायी और विशेषकर केवलारी क्षेत्र के कार्यकर्त्ताओं में भारी उत्साह हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि केवलारी क्षेत्र के कांग्रेस के कार्यकर्त्ता तो बीते बीसों साल से उत्साहित रहते रहे हैं। पहले क्षेत्र की विधायक विमला वर्मा लगभग 23 साल मंत्री रहीं। फिर 19993 से 2003 तक हरवंश सिंह मंत्रीमंड़ल में रहे और फिर 2008 से विस उपाध्यक्ष के रूप में लाल बत्तीधारी हैं। लेकिन इस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने कभी लाल बत्ती का सुख देखा ही नहीं था। भाजपा प्रत्याशी के रूप में केवलारी से पिछलाचुनाव लड़नेवाले डॉ. बिसेन को लाल बत्ती मिलने से पिछले 36 साल से एपेक्षित भाजपा कार्यकर्त्ताओं में एक विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। 

Monday, February 13, 2012

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


खेत के सवाल का जवाब खलिहान से देने की आदी हो चुकी भाजपा अब लोगों में मजाक का विषय बनते जा रही है
जिला कांग्रेस की पहली बैठक में कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था और अभी जिला इंका का महामंत्री बनाया गया हैं। इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं। इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब देकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। भाजपा ने सुजीत जैन और इंका ने हीरा आसवानी को जिले का अध्यक्ष बनाया ा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं  और वो भी हरवंश सिंह के। नपं लखनादौन और मंड़ी चुनावों में दोनों की मिशन 2013 के पहले अग्नि परीक्षा हो जावेगी।
रजनीश की ताजपोशी के बाद भवन का संकल्प एक बार फिर लिया गया-बीते पंद्रह सालों बिन हरवंश सब सून की तर्ज पर चलने की आदी हो गयी है जिले में कांग्रेस। पिछले जनवरी माह में जिले की कांग्रेस कमेटी की बैठक रखी गयी थी लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के उपलब्ध ना होने के कारण वह स्थगित कर दी गयी थी। यह बैठक 11 फरवरी को संपन्न हुयी। इस पहली बैठक में जिला कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। हालांकि निवर्तमान अध्यक्ष महेश मालू  भी कांग्रेस भवन बनाने की पहल करना चाहते थे लेकिन ना जाने क्यों वे अपने कार्यकाल में शुरूआत नहीं कर सके। अब एक बार फिर यह पहल प्रारंभ की गयी है। हालांकि आज से दस साल पहले भवन बनाने की बात शुरू हुयी थी। उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसका भूमि पूजन उसी दिन किया था जिस दिन तत्कालीन मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल के कार्यकाल में मंड़ी की आधारशिला रखी थी। मंड़ी तो सालों पहले बन गयी लेकिन कांग्रेस भवन में एक ईंट तक नहीं जुड़ पायी। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था। तब सेवादल के सभी शिवरों में कांग्रेस भवन का एक माडल कार्यकर्त्ताओं को दिखाया गया था। उस वक्त हरवंश सिंह प्रदेश के एक ताकतवर मंत्री थे। अब एक बार फिर भवन बनाने की पहल हुयी हैं और अभी नवगठित जिला इंका में रजनीशसिंह को महामंत्री बनाया गया हैं। राजनैतिक विश्लेषकों  का ऐसा मानना है कि कांग्रेस में रजनीश की ताजपोशी और कांग्रेस भवन की बात में चोली दामन का साथ हैं। चाहे बात जो भी हो लेकिन जिले के कांग्रेसजनों की यह तीव्र इच्छा हैं कि जिले में कांग्रेस का अपना भवन हो। यह इच्छा उस समय से और तीव्र हो गयी हैं जब सालों बाद जमीन मिलने के बाद भी जिला भाजपा का भवन तो लगभग बन कर तैयार है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिला इंका को भवन के लिये जमीन जो तत्कालीन अध्यक्ष हाजी मोहीत खॉन के कार्यकाल में ही मिल गयी थी। लेकिन यदि आज भी देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर कांग्रेस का भवन बन जाये तो यह एक प्रशंसनीय बात ही होगी लेकिन यदि जैसा खेल 2003 के विस चुनाव के पहले खेला गया था वैसा ही यदि 2013 के चुनाव के पहले खेला जा रहा हैं तो यह एक दुर्भाग्य पूर्ण बात ही होगी। मुसाफिर की तो यही कामना है कि कांग्रेा का भी अपना भवन जल्दी बन ही जाये।
अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी -इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम कर अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं और जनहित का मामला जस का तस छूट जाता हैं। एक बात और है कि विज्ञप्तिवीर और छपास के रोगी होने का आरोप भी जो लगाते है वे खुद ये भूल जाते हैं इस क्षेत्र में तो वे खुद परमवीर चक्र लेने के अधिकारी हैं। प्रदेश के सत्तारूढ़ दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का यह रवैया किसी भी कीमत पर उचित नहीं कहा जा सकता हैं। जिले के विेकास और लंबित योजनाओं पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना तो ठीक है लेकिन इसके हल के लिये भी ठोस प्रयास करना चाहिये। अन्यथा हालात तो जस के तस रह जायेंगें भले ही नेताओं की छवि चमक या बिगड़ जाये।
अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी -इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। कई बार आंकड़ों और तथ्यों की जानकारी के आभाव में भाजपा मजाक का विषय बन जाती हैं। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब दकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। पूछे गये सवालों पर जवाब ना होने के कारण भाजपा मामले को कहीं ओर घुमाने में विश्वास करने लगी हैं। इस कारण भले ही सवाल जवाब का सिलसिला तो चलते रहता है लेकिन आम लोगों के बीच में भाजपा मजाक का पात्र बन कर रह जाती हैं। जिले में कई गुटों में बंटी भाजपा का नेतृत्व इस कारनामे पर अंकुश लगाने में भी सफल नहीं हो पा रहा हैं।
वरिष्ट,कनिष्ट और घनिष्ट चर्चित हैं इंका और भाजपा में-प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। पहले भाजपा ने संगठन चुनावों में युवा सुजीत जैन को जिले का अध्यक्ष निर्वाचित किया और उसके बाद कांग्रेस ने भी हीरा आसवानी के रूप में युवा नेतृत्व दिया। लेकिन भाजपा और और इंका में एक फर्क दिखायी दे रहा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। उनसे उम्रदराज नेता पार्टी में अपनी मनमानी करते देखे जा सकते हैं। कोई चाचा तो बड़े भाई के रूप में हमेशा हावी होने की कोशिश करते रहतें हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं और वे भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के। इसलिये इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी अपेक्षाकृत रूप से अधिक सुविधाजनक स्थिति में हैं। उन्हें जो कुछ भी देखना हैं वह केवल घनिष्टता । और सभी विस उपाध्यक्ष हरवंशसिंह के घनिष्ट हैं दूसरे किसी अन्य नेता के हैं ही नहीं। जबकि भाजपा के संगठन की कमेटी में ही कई वरिष्ट नेताओं का सीधा और प्रभावशाली दखल हैं। इस सबकें चलते अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजर होने वाले लखनादौन नगर पंचायत और जिले के मंड़ी चुनावों पर लगी हुयी हैं। भाजपा में इन दिनों जिले के नाम पर नरेश दिवाकर, डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन एवं इंद्रेश गजभियेके पास लाल बत्ती हैं तो कांग्रेस के पाले में इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल के पास लाल बत्ती हैं। वहीं विधायक नीता पटेरिया भी प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं। इंका और भाजपा की कमान संभालने वाले जिले के तमाम नेताओं के लिये मिशन 2013 से पहले  के पहले यह एक मिनी परीक्षा रहेगी और इस पर ही आगे के परिणाम निर्भर करेंगें।            

Tuesday, February 7, 2012

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

कभी बुआ भतीजावाद का रोना रोने वाले कांग्रेसी अब पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं

लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते दिख रही हैं। कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब देखना यह है कि चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं? जिले में कांग्रेस की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हैं।

जिला इंका की जम्बो जेट कार्य.घोषित-लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। हालांकि आज से लगभग 18 महीने पहले जिले में हुये कांग्रेस के कथित चुनाव के बाद जैसा अखबारों में प्रकाशित हुआ था उससे बहुत कुछ अलग इस घोषित समिति में दिखा। इस घोषित समिति में चुनावी साया स्पष्ट दिखायी दे रहा हैं। वैसे जब कहीं ओर चुनावी साया दिखने की बात होती हैं तो किसी भी जिले के सभी विस क्षेत्रों की बात होती हैं लेकिन सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते जिला इंका की घोषणा में दिख रही हैं। इस जम्बो जेट कार्यकारिणी में कांग्रेस संविधान के निर्वाचन के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ और मन माफिक संख्या में पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गयी हैं। जिला इंका में 1कोषाध्यक्ष,9उपाध्यक्ष,11महामंत्री,17 संगठन सचिव,13 कार्य. सदस्य एवं 7 स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाये गये हैं।

बहुत निरीह दिखे महाबली कहलाने वाले हरवंश-कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। लेकिन यह भी शाश्वत सत्य है कि आदमी खुद अपने आप को सबसे अच्छा और सच्चा पहचानता हैं। यही बात हरवंश सिंह पर भी लागू होती हें। भले ही वे केवलारी विस क्षेत्र से चार चुनाव लगातार जीत चुकें हो लेकिन वे जानते हैं कि ये सब कैसे हुआ हैं? इंकाई हल्कों में कई दिनों से 1/14 का समीकरण चल रहा था। एक इंका नेता को जिला इंका में रोकने के लिये 14 नेताओं ने संयुक्त रूप से दवाब अनाया था कि यदि इसे शामिल किया गया तो हम सभी समूहिक रूप से त्यागपत्र दे देंगें। मजे की बात यह थी कि ये सभी 14 इंका नेता परिसीमन के पहले वाले केवलारी विस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते थे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में हरवंश सिंह पूरे पुराने केवलारी क्षेत्र से चुनाव हार गये थे लेकिन परिसीमन में जोड़े गये नये क्षेत्रों ने उनकी लाज रख ली थी और वे चुनाव जीत गये थे। लेकिन पांचवी पारी खेलने के लिये डरे हुये हरवंश सिंह ने 14 नेताओं को नाराज करने का जाखिम लेना उचित नहीं समझा और बीच का रास्ता निकाल लिया।जिस इंका नेता का विरोध था उसे छोड़ा तो नहीं लेकिन सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य ही बनाया और उन 14 नेताओं में अधिकांश को पदों से नवाज कर खुश करने का प्रयास कर लिया है। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं।

पिता पुत्रवाद पर थिरक रहें हैं कांग्रेसी-जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जी हां बात हो रही है जब जिले की वरिष्ठतम कांग्रेस नेत्री कुमारी विमला वर्मा का सक्रिय राजनीति में जलवा में था। उन्हीं की अगुलियां पकड़ कर आज के इंकाई पुरोधा हरवंश सिंह ने राजनीति शुरू की थी। बरघाट के एक कार्यक्रम में हरवंश सिंह पर उनकी उपस्थिति में ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा था तब से विमला वर्मा ने उनसे किनारा कर लिया था और यहीं से हरवंश सिंह ने समानान्तर राजनीति करना शुरू की थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के रहमो करम से वे राजनीति में आगे बढ़ते गये। उस दौरान हरवंश सिंह और उनके संगी साथी विमला वर्मा पर कोई और आरोप ना लगा पाने के कारण भाई भतीजेवाद का आरोप लगाया करते थे।इससमय तकआशुतोष वर्मा भी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हो चुके थे और उन्हीं के कारण ये आरोप लगाये जाते थे और कांग्रेस के हाल बेहाल होने की बात कही जाती थी। हालंकि आशुतोष वर्मा छात्र राजनीति से कांग्रेस की राजनीति में आये थे और सन 1977 में उस वक्त कांग्रेस में इंदिरा जी के साथ रहे जब हरवंश सिंह इंदिरा जी को छोड़ कर कांग्रेस अर्स की कमान संभाल रहे थे। आज वो ही कांग्रेसी पिता पुत्रवाद की राजनीति याने हरवंशसिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह की जिला में महामंत्री पद की ताज पोशी पर राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। इसे ही तो कहते हैं वक्त के घूमते पहिये का कमाल।

डॉ. बिसेन को भी मिली लाल बत्ती-जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। इसके पहले सरकार ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का अध्यक्ष नियुक्त कर केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। इसी तरह जिले के ही इंद्रेश गजभिये भी केबिनेट मेंत्री का दर्जा प्राप्त निगम के अध्यक्ष हैं। सिवनी की अंतिम सांसद रही विधायक नीता पटेरिया पहले ही प्रदेश की महिला मोर्चे की अध्यक्ष बन चुकीं हैं। इस तरह अब शिव की नगरी सिवनी से चार भाजपा नेता ऐसे हो गयें जो प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. बिसेन मुख्यमंत्री उमा भारती और बाबूलाल गौर की केबिनेट में कबीना मंत्री थे लेकिन शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें मंत्री नहीं बनाया था। मुख्यमंत्री ने यह सब कवायत करके जिले की भाजपायी राजनीति में गुटीय एवं जातीय संतुजन बनाने का प्रयास तो कर लिया हैं लेकिन अपने किये गये वायदों को पूरा करने में यदि वे कामयाब नहीं हुये तो उसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। इसीलिये अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजरें इस पर टिकी हुयीं हैं कि शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं?

सब कुछ मंशानुसार-इस सप्ताह पूरे जिले में कांग्रेस संगठन की जिला और ब्लाक इकाइयों के गठन की घोषणा हो रही हैं। जिले की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हें। एक विज्ञप्ति में यदि तीन ब्लाकों की घोषणा की गयी है तो तीन बार यही उल्लेख किया गया हैं। प्रदेश कांग्रेस के मिशन 2013 के अनुसार अब देखना यह है कि चुनावी परिणाम कांग्रेस की मंशानुसार आते हैं या हरवंश सिंह की मंशानुसार?

Monday, January 16, 2012

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

इंका और भाजपा ने टेंकरों पर विज्ञप्ति का खेल तो खूब खेला लेकिन नेताओं बचाने शिकायत नहीं की गयी

बीते दो सप्ताह से सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायक नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया के कारनामे चर्चित रहें। अटल जी जन्म दिन पर आरती की थाली से रूपये उठाने का नीता का मामला चर्चित रहा तो कुछ ही दिन बाद कालेज के ऐनुवल डे में नरेश द्वारा सुनाया गया एस.एम.एस। कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने नीता प्रकरण में तो विज्ञप्ति जारी कर नीता और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया लेकिन नरेश के मामले में सभी ने चुप्पी साध ली हैं।विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अटल जी के जन्म दिन पर विधायक निधि से बांटें गयें टेंकर विवादों में तो बहुत रहें लेकिन इंका और भाजपा दोनों ने ही किसी की भी शिकायत करना जरूरी नहीं समझा। प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जिले में कांग्रेजनों ने 9 जनवरी को जेल भरो आंदोलन किया जिसे एक सफल आंदोलन माना जा रहा है जिसमें हजारों कांग्रेसियों ने गिरफ्तारी दी हैं। दूसरे ही दिन भाजपा का लोकतंत्र बचाओ मौन धरना दिया गया। इसमें जितने नेता बोल सकते थे उन सबने खूब बोला लेकिन मौन धरने के निर्देशों का पालन भी किया गया लेकिन केवल उनने जो भाषण नहीं दे सकते थे। गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की केवलारी की आम सभा भी अजीबो गरीब रही।पहले तो केवलारी के उस.डी.एम. ने सभा की अनुमति दे दी फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि दी गयी परमीशन रद्दकर दी गयी लेकिन इसके बाद भी पूरी शानो शौकत से सभा हो भी गयी।

नरेश पर इंका की चुप्पी हरवंश से नूरा कुश्ती का प्रमाण -बीते दो सप्ताह से सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायक नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया के कारनामे चर्चित रहें। अटल जी जन्म दिन पर आरती की थाली से रूपये उठाने का नीता का मामला चर्चित रहा तो कुछ ही दिन बाद कालेज के ऐनुवल डे में नरेश द्वारा सुनाया गया एस.एम.एस. कि,“सीता के वनवास जाने में भी बहुत बड़ी सीख है, घर में तीन तीन सास हों तो जंगल ही ठीक हैं।“ कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने नीता प्रकरण में तो विज्ञप्ति जारी कर नीता और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया लेकिन नरेश के मामले में सभी ने चुप्पी साध ली हैं। हालांकि दोनों ही भाजपा नेता प्रदेश के महत्वपूर्ण नेता हैं। नीता तो प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं तो नरेश महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष हैं। वैसे नरेश दिवकार के पहले चुनाव से ही इंका और भाजपा में हरवंश नरेश नूरा कुश्ती के जो आरोप लगना शुरू तो वे अभी तक जारी हैं और समय समय पर उसकी पुष्टि के प्रमाण भी मिलते रहते हैं। पिछले कई सालों से जिले के कांग्रेस के सभी पदाधिकारी हरवंश समर्थक ही बनते आये हैं इसलिये सब कुछ उनके इशारों पर ही होता हैं। कोई भी अपने मन से कुछ नहीं कर सकता हैं। इसीलिये नरेश के राजनैतिक रूप से ज्यादा व्यापक और महत्वपूर्ण राजनैतिक मुद्दे पर जिला इंका सहित सभी चुप रहे। प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जेल भरो आंदोलन के दौरान इंका नेता आशुतोष वर्मा ने अपने संबोधन में जरूर इस मामले पर ना केवल नरेश और भाजपा को आड़े हाथों लिया वरन स्वयं ही मंच और जिला कांग्रेस की तरफ से इसकी घोर निंदा कर दी जबकि वे जिला इंका के कार्यकारिणी सदस्य तक नहीं हैं। हरवंश नरेश की यह नूरा कुश्ती और ना जाने क्या क्या गुल खिलायेगी? यह तो भविष्य ही बतायेगा।

टेंकरों पर राजनीति तो हुयी पर शिकायत नहीं-विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अटल जी के जन्म दिन पर विधायक निधि से बांटें गये टेंकर खूब विवादों में रहे। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने एक दूसरे पर विज्ञप्ति के माध्यम से तो बहुत आरोप लगाये लेकिन इस बात का भी ख्याल रखा कि कोई भी नेता इसमें फंस ना पाये। इसलिये ना तो कांग्रेस ने नीता पटेरिया के मंहगें टेंकरों की कोई शिकायत लिखित में की और ना ही भाजपा ने क्रय एवं भंडारण नियमों की अनदेखी की हरवंश सिंह के टेंकरों की शिकायत की हैं। इस तरह से इंका और भाजपा ने एक दूसरे पर विज्ञप्ति के माध्यम से आरोप लगाकर अखबारों की सुर्खियां तो बटोर ली लेकिन किसी भी नेता को जांच के कठघरे में लाने से भी परहेज किया। इंका और भाजपा दोनों ही पार्टियों के युवा जिला अध्यक्ष हीरा आसवानी और सुजीत जैन के नेतृत्व में राजनीति का खेल भी हो गया और किसी का कुछ बिगड़ा भी नहीं।शायद इसी खेल को आज कल राजनीति में कूट नीति कहते हैं।

सफल रहा कांग्रेस का जेल भरो आंदोलन -प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जिले में कांग्रेजनों ने 9 जनवरी को जेल भरो आंदोलन किया। कई दिनों बाद जिले के कांग्रेसियों में उत्साह दिखा। वैसे भी पिछले आठ साल से ऐसा कोई आंदोलन नहीं हुआ था जो विपक्ष में रहने वाली पार्टी के कार्यकर्त्ताओं में जोश भरने के लिये जरूरी होता हैं। वैसे तो इस कार्यक्रम की कमान भी जिले के इकलौते विधायक हरवंश सिंह के ही हाथों में थी लेकिन इस आंदोलन में वैसा सैलाब नहीं उमड़ा जो कि शहर वालों ने इल्ली और न्याय रैली में देखा था। हरवंश सिंह के नेतृत्व में जिले में इल्ली प्रकोप से क्षतिग्रस्त हुयी सोयाबीन की फसल के लिये ये रैली निकाली गयी थी और न्याय रैली उस वक्त निकली थी जब तत्कालीन सांसद नीता पटेरिया की पहल पर हरवंश सिंह एवं उनके साथियों के खिलाफ घारा 307 का प्रकरण दर्ज हुआ था। हालांकि आज तक उस प्रकरण का चालान शिवराज सरकार कोर्ट में पेश नहीं कर पायी हैं। लेकिन ऐसी ऐतिहासिक रैली अब तक नहीं निकल पायी हैं। लेकिन जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी और नगर इंकाध्यक्ष इमरान पटेल के कार्यकाल का यह पहला आंदोलन था। हालांकि जिला कांग्रेस के इस जेल भरो आंदोलन को एक सफल आंदोलन ही माना जायेगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी देकर प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ शंखनाद किया हैं। यदि यही वातावरण चुनाव तक बना रहा और भीतरघात की पुनरावृत्ति नहीं हुयी तो जिले में कांग्रेस की हालत में सुधार आ सकता हैं।

भाजपा के मौन धरने में जम कर हुयी भाषणबाजी -कांग्रेस के आंदोलन के दूसरे ही दिन जिला भाजपा ने भी प्रदेश के निर्देश पर लोकतंत्र बचाओ का धरना दिया। हालांकि यह मौन धरना था लेकिन जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष्र प्रभात झा ही आधा घंटा भी मौन नहीं रह पाये तो भला सिवनी के भाजपायी कैसे पीछे रह सकते थे। भाजपा नेताओं भीषण भाषणबाजी की और बाकायदा विज्ञप्ति भी जारी कर कांग्रेस की केन्द्र सरकार के खिलाफ आरोप लगाये गये। जितने नेता बोल सकते थे उन सबने खूब बोला लेकिन मौन धरने के निर्देशों का पालन भी किया गया लेकिन केवल उनने जो भाषण नहीं दे सकते थे।

गौगपा की केवलारी में सभा संपन्न -गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की केवलारी की आम सभा भी अजीबो गरीब रही। पहले तो केवलारी के उस.डी.एम. ने सभा की अनुमति दे दी फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि दी गयी परमीशन रद्दकर दी गयी लेकिन इसके बाद भी पूरी शानो शौकत से सभा हो भी गयी। इस सभा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरा सिंह मरकाम भी आये थे। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा से आदिवासी भाइयों को बचने की सलाह देते हुये कहा कि दोनों ही समाज के शोषक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गौंड़ राजवंशों के शासन काल में ना तो चोरी होती थी और ना ही कोई भिखारी दिखता था लेकिन आज क्या हालात है? यह सभी देख रहें हैं। उन्होंने एक नक्शे की चर्चा भी जो कि क्षेत्रीय विधायक द्वारा गांवों में दिखाया जा रहा हैं कि उनके द्वारा नहरों की लाइनिंग का काम प्रस्तावित कर दिया है जो कि शीघ्र ही चालू होने वाला हैं।आपने यह भी कहा कि ऐसेही पिछले चुनावों में पेंच की नहरों के लिये चूने की लाइनें डल गयीं थीं और वे चुनाव तो जीत गये थे लेकिन पेंच का काम अभी भी लटका पड़ा हैं। गौंड़वाना गणतंत्र पार्टी की सभा में अच्छी खासी उपस्थिति आदिवासी वोटरों के मिजाज को दिखा रही थी।

Monday, January 9, 2012

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

आरती की थाली में रखे दो सौ रुपयेउठाने पर लेकर ऐसा बवाल मचा कि पूरे जिले की राजनीति में भू चाल आ गया

प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया ने अटल जी के जन्मदिन पर आयोजन रखा था। कार्यक्रम में भारतमाता की आरती उतारने और दीप प्रज्जवलित करने के बाद मुख्यअतिथि नाना भाऊ ने थाली में दो सौ रुपये रखे जो उनके पीछे चल रहीं आयोजक विधायक नीता पटेरिया ने उठाकर अपनी स्वेटर की जेब में रख लिये। इसके प्रसारित होते ही प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया ने इसे एक पारिवारिक घटना के हास्य विनोद के क्षण बताया। नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने नीता को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि अपने सांसद रहते हुये मैडम परसेन्टेज के नाम से मशहूर हो चुकी नीता पटेरिया ने पूजा की थाली से नोट उठाकर पुरोहित का हक छीन लिया। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने कहा है कि जिनमें सत्य उजागर करने का साहस नहीं होता वे बदनाम करने की साजिश करतें हैं। जिला कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि यह भाजपा का पारिवारिक कार्यक्रम था तो भाजपा को यह खुलासा भी करना चाहिये कि वीडियोग्राफी किसने करायी और उसमें छेड़छाड़ किसने की है?नेहरू युवक केन्द्र के कार्यक्रम का उदघाटन इंका विधायकहरवंश ने एवं समापनमविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकरद्वारा किया जाना भी राजनैतिक हल्कों में चर्चित हो गया हैं।

अटल जी के जन्म दिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर मचा बवाल-क्रिसमस याने 25 दिसम्बर के दिन मिशन स्कूल मैदान में अटल जी जम्न दिन ऐसा मना कि उसकी सुर्खियां नये साल के आयोजन तक बनी रहीं।उल्लेखनीय है कि प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया ने अटल जी के जन्मदिन पर आयोजन रखा था। इसमें कार्यकर्त्ताओं के सम्मान और भोज के साथ ही 26 टेंकरों का भी वितरण किया गया था। आयोजन के मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री नाना भाऊ मोहाड़ थे।कार्यक्रम में भारतमाता की आरती उतारने और दीप प्रज्जवलित करने के बाद मुख्यअतिथि नाना भाऊ ने थाली में दो सौ रुपये रखे जो उनके पीछे चल रहीं आयोजक विधायक नीता पटेरिया ने उठाकर अपनी स्वेटर की जेब में रख लिये। यह सब एक पत्रकार में वीडियो कैमरे में कैद हो गया। एक दिन बाद से ही आग की तरह फैली यह खबर मीडिया की ऐसी सुर्खी बनी ना केवल पूरे प्रदेश वरन कई अन्य प्रदेशों में भी छा गयी। इसके प्रसारित होते ही प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया ने इसे एक पारिवारिक घटना के हास्य विनोद के क्षण बताया और कहा कि जब नाना भाऊ ने यह रुपये रखे तब मैंने उनसे कहा कि मैं इस कार्यक्रम की आयोजक हूं अतः इन पर मेरा अधिकार बनता है और मैंने रुपये उठाकर अपनी जेब में रख लिये। उन्होंने यह भी कहा कि नाना भाऊ ने मुझसे कहा कि आप तो मेरी बड़ी बहन है ताई हैं। इतना कहने के बाद उन्होंने मेरे पैर भी पड़े। नीता पटेरिया ने यह भी कहा एक पारिवारिक घटना को समाचार बनाकर एक महिला का जिस तरह अपमान किया गया उससे मैं बहुत अधिक दुखी हॅूं। इस घटना पर विज्ञप्ति जारी करते हुये नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने नीता को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि अपने सांसद रहते हुये मैडम परसेन्टेज के नाम से मशहूर हो चुकी नीता पटेरिया ने पूजा की थाली से नोट उठाकर पुरोहित का हक छीन लिया। इमरान पटेल ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा से भी सवाल पूछ डाला कि क्या वे नीता पटेरिया से त्यागपत्र लेने का साहस दिखायेंगें। नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने भी एक बयान जारी कर इसे भाजपा का असली चेहरा बताया और कहा कि भाजपा की महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष की इस करनी से उसकी सुचिता की पोल खुल गयी हैं। अखबारों में यह भी प्रकाशित हुआ कि जब मामला प्रदेष स्तर पर पहुंच गया तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने नीता पटेरिया का ढ़ाढ़स बंधातें हुये यह कहा कि आप निष्ंिचत रहे राजनैतिक जीवन में तो यह सब होते रहता हैं।नगर इंकाध्यक्ष के बयान पर संज्ञान लेते हुये जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने कहा है कि जिनमें सत्य उजागर करने का साहस नहीं होता वे बदनाम करने की साजिश करतें हैं। मुद्दा विहीन कांग्रेस निराधार मामले में नीता पटेरिया को बदनाम कर रहीं हैं। किसी पार्टी के निजी कार्यक्रम में टीका टिप्पणी करना और उनके मामलों दखल देना गलत है लेकिन कांग्रेस ऐसा कर रही हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन की विज्ञप्ति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी और सिवनी विस क्षेत्र के पूर्व इंका प्रत्याशीगण आशुतोश वर्मा,राजकुमार पप्पू खुराना एवं प्रसन्न माले तथा पूर्व मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल के संयुक्त नामों से जारी विज्ञप्ति में भाजपा और नीता पटेरिया पर कई आरोप चस्पा किये। कांग्रेस की इस विज्ञप्ति में यह भी सवाल उठाया गया कि हास्य विनोद यदि किया गया तो आखिर किसके साथ? भारतमाता के या जिन अटल जी का जन्मदिन मना रहें थे उनके साथ। यह भी कहा गया कि यह मामला भाजपा की अंर्तकलह का मामला है जिसमें भाजपा कांग्रेस को जबरन लपेट रही हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि यह भाजपा का पारिवारिक कार्यक्रम था तो भाजपा को यह खुलासा भी करना चाहिये कि वीडियोग्राफी किसने करायी और उसमें छेड़छाड़ किसने की है? इसके जवाबमें नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने कहा कि कांग्रेस अपने नेताजिन्हें श्रीमान 420 का खिताब मिल चुका है वे अपने ऊपर लगे 420 के आरोपों सहित अन्यआरोपों सेकैसे बरी हुये? जिले की राजनीति में टेंकरों और जन्मदिन का है ना यह विचित्र संयोग। लेकिन दोनों में फर्क इतना है कि हरवंश सिंह ने खुद के जन्मदिन पर यह कारनामा किया था लेकिन नीता पटेरिया ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर यह सौगात बांटी हैं। लेकिन दोनों ही कार्यक्रमों में एक बात की समानता यह भी हैं कि दोनों ही नेताओं ने सौगात बांटने के लिये विधायक निधि का ही उपयोग किया हैं। अब यह सही है या गलत? यह तो जनता जनार्दन ही तय करेगी। नीता समर्थक भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि जिसने आयोजन में स्वयं लाखों रुपये खर्च किये हों वो भला दो सौ रुपये चुरायेगा क्या? मामला हंसी मजाक का ही था जिसे जबरन विघ्नसंतोषी नेताओं ने तूल दे दिया। भाजपायी दबी जुबान से यह कहने में भी कोई संकोच नहीं कर रहें है कि भाजपा के ही एक गुट विशेष के लोगों ने इसे तूल दिया हैं।

हरवंश द्वारा उदघाटन एवं नरेश द्वारा समापन किया जाना चर्चित-भारत शासन के मानव संसाधन विभाग के अंर्तगत आने वाले नेहरू युवक केन्द्र का एक कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने किया जबकि समापन महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर ने किया। सालों से दोनों नेताओं के बीच नूरा कुश्ती के आरोप इंका और भाजपा दोनों ही पार्टियों में चर्चित रहें हैं। फिर ऐसे में केन्द्र सरकार के एक विभाग द्वारा भाजपा नेता नरेश दिवाकर को समापन समारोह में मुख्य अतिथि बनाना खास चर्चित हो गया हैं। चर्चा का एक मुख्य कारण यह भी है कि अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में सिवनी ब्लाक के एक भवन का लोकार्पण हरवंश सिंह ने किया और प्रदेश की भाजपा सरकार के नुमांइदों ने संबंधित पंचायत सचिव को दंड़ित कर डाला। ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक हैं कि हरवंश समर्थक इंका नेता जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह चंदेल को भी समापन समारोह में मुख्य अतिथि बना सकने को विकल्प रहते हुये भाजपा नेता नरेश दिवाकर का चयन क्यों किया गया?

और अंत में-मातृ भाषा गौरव जागरण के कार्यक्रम में अंग्रेजी भाषा से परहेज कर मातृ भाषा का उपयोग करने की सीख देने वाली संस्था द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति में जारी करने वाले ने स्वयं अंग्रेजी में हस्ताक्षर किये थे। आखिर इसे ही तो कहते हैं कि पर उपदेश सहज बहुतेरे।



राम के नाम पर वोट बटोरने वाली भाजपा के नेता नरेश दिवाकर द्वारा माता सीता के वनवास पर सुनाया मेसेज चर्चित

विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी तीनों ही भाजपा नेता हैं। सभी शहर के विकास के लिये गंभीर और प्रयासरत हैं। लेकिन नीता और नरेश पालिका को ऐजेन्सी बनाने सें कतराते हैं। महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर द्वारा पी.जी. कालेज के कार्यक्रम में सीता के वनवास को लेकर सुनाया गया एक एस.एम.एस. सुर्खियों में छाया हुआ हैं। मेसेज सुनाने के पहले नरेश ने यह भी कहा था कि हर कविता या दोहे का कोई ना कोई मतलब होता हैं। ब्राम्हण समाज की युवा शाखाा की ओर से इसे अपमानजनक बताते हुये मांग की गयी कि नरेश सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। नरेश ने माफी ना मांग कर ठेस पहुंची हो तो खेद व्याक्त किया हैं। भाजपा तो राम का नाम लेकर दो सीटों से देश की सत्ता तक पहुंच गयी। भाजपा भातीय संस्कृति की ध्वज वाहक बनने का दावा करती हैं और उसके वरिष्ठ नेता सीता के वनवास और उनके त्याग का मजाक उड़ाने वाले मेसेज पढ़कर सुनाते हैं। इस मामले में सवाल यह उठता है कि अभी तो प्रदेश सरकार से वन विभाग का प्रस्ताव ही केन्द्र सरकार को नहीं भेजा गया हैं। यह बात मुख्यमंत्री को इस प्रतिनिधि मंड़ल नेबतायी ही नहीं या बताने का साहस नहीं जुटा पायी।वैसे भी मुख्यमंत्री पिछले दो साल में चौथी बार ऐसा आश्वासन देकर गये हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा हैं।

पालिका को ऐजेन्सी बनाने से परहेज किया नीता नरेश ने-विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी तीनों ही भाजपा नेता हैं। सभी शहर के विकास के लिये गंभीर और प्रयासरत हैं। विधायक नीता पटेरिया ने नगर पालिका को विधायक निधि से पांच टेंकर दिये। मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर ने शहर की सबसे अधिक बहुचर्चित घटिया सड़क,एस.पी.बंगले से सर्किट हाउस, बनाने के लिये तीस लाख रु. दिये लेकिन दोनों ने ही नगर पालिका को ऐजेन्सी बनाने से परहेज किया। जबकि पालिका में भी भाजपा का ही अध्यक्ष हैं। भाजपाइयों में चर्चित हैं कि ये दोनों ही नेता पालिका के भ्रष्टाचार से डरे हुये हैं। जबकि यदि देखा जाये तो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के आरोप आज भला किस पर नहीं लग रहें हैं।

नरेश द्वारा सीता माता को लेकर सुनाये गये मेसेज से मचा बवाल-भाजपा नेताओं की हरकतें इन दिनों राजनैतिक हल्कों में सुर्खियों में बनीं हुयी हैं। अभी विधायक नीता पटेरिया के आरती की थाली से रुपये उठाने की घटना की चर्चा खत्म भी नहीं हुयी थी कि महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर द्वारा पी.जी. कालेज के कार्यक्रम में सीता के वनवास को लेकर सुनाया गया एक एस.एम.एस. सुर्खियों में छाया हुआ हैं। अपने भाषण के अंत में उन्होंने जा कहा उसका अक्षरशः उल्लेख हम कर कर रहें हैं। दिवकार ने कहा कि,“एनुवल डे का कार्यक्रम हैं। चार लाइनें मुझे याद आ रहीं हैं। यदि आप सबकी अनुमति हो तो वो चार लाइनें सुनाकर अपनी बात को विराम दूंगा। याद आ गयी मुझे। जितने भी कवितायें और दोहे होते हैं उसके पीछे कोई ना कोई मतलब होता हैं। मुझे आज एक एस.एम.एस. आया वो एस.एम.एस. इच्छा हुयी आपको पढ़कर सुना दूॅं। सीता के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख है। सीता मां वनवास गयीं थी। सीता के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख हैं। घर में जब तीन तीन सास हों तो जंगल ही ठीक है।बहुत बहुत धन्यवाद।“ इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में आने के बाद मामला चर्चित हो गया हैं। ब्राम्हण समाज की युवा शाखा की ओर से इसे अपमानजनक बताते हुये मांग की गयी कि नरेश सार्वजनिक रूप से माफी मांगें नहीं तो आंदोलन किया जायेगा। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि सीता माता को भारतीय समाज एक आदर्श मानता हैं और उन पर ऐसा घटिया जोक सुनाना निंदनीय हैं। कुछ अखबारों में प्रकाशित इस विज्ञप्ति के साथ ही नरेश दिवाकर का तो खेद व्यक्त करता हूं के शीर्षक से समाचार भी छपा कि मैंने भगवान राम और सीता के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गयी वरन मेरे द्वारा मोबाइल में आये एक एस.एम.एस. विद्यार्थियों को सुनाया गया था। मेरे द्वारा उक्त मेसेज का उललेख करने से किसी को भी कोई ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिये खेद व्यक्त करता हॅूं। मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता सभी के लिये वंदनीय हैं। उनके बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता हूॅं। दस साल तक विधायक रहने वाले और आज कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त एक वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता से ऐसी उम्मीद तो कतई नहीं की जा सकती कि वो मोबाइल पर आये एक ऐसे मेसेज को पढ़कर विद्यार्थियों को सुनाये। संघ की पृष्ठ भूमि वाले दिवाकर ने इसी आधार पर बहुत कुछ हासिल किया हैं। भाजपा तो राम का नाम लेकर दो सीटों से देश की सत्ता तक पहुंच गयी। भाजपा के कार्यकर्त्ताओं का गला यह नारा लगा लगा कर फट जाता है कि कसम राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनायेंगें। भाजपा भातीय संस्कृति की ध्वज वाहक बनने का दावा करती हैं और उसके वरिष्ठ नेता सीता के वनवास और उनके त्याग का मजाक उड़ाने वाले मेसेज पढ़कर सुनाते हैं। मेसेज सुनाने के पहले नरेश ने यह भी कहा था कि हर कविता या दोहे का कोई ना कोई मतलब होता हैं। इस दोहे का मतलब तो यही निकलता हैं कि सीता माता तीन सासों से परेशान होकर ही जंगल गयीं थीं। इस बार यह मेसेज मीडिया में आने और बा्रम्हण समाज द्वारा विरोध के कारण नरेश ने खेद तो व्यक्त कर दिया पर साथ्र ही यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने यह मेसेज पढ़कर सुनाया था। लेकिन माफी तब भी नहीं मांगी। यहां एक बात यह भी उल्लेखनीय हैं नरेश दिवाकर ने एम.एल.बी.गर्ल्स स्कूल के वार्षिक उत्सव में 28 नवम्बर को यही मेसेज पढ़कर विद्यालय की छात्राओं को सुनाया था। लेकिन तब वहां मीडिया ना होने के कारण मामला छिपा रहा तो नरेश ने चुप्पी साधी रही। अभी भी यदि यह मीडिया में ना आता तो आगे और कई कार्यक्रमों में वे ये मेसेज शायद सुनाते रहते। वैसे भी मोबाइल पर आने वाले मेसेज के बारे में तो कुछ कहना ही बेकार है। कई तो इतने गंदे मेसेज भी आते हैं कि उन्हें तुरंत मिटाने मे ही भलाई रहती हैं। किसी युवा नेता से तो ऐसे लड़कपन की उम्मीद भी की जा सकती है लेकिन नरेश दिवाकर जैसें एक वरिष्ठ एवं परिपक्व भाजपा नेता द्वारा यह मेसेज सुनाया जाना कहां तक उचित है? साथ ही एक सवाल यह भी उठ खड़ा होता है कि माता सीता का अपमान करने वाली भाजपा और उसके नेता भला राम भक्त कैसे हो सकतें हैं?

फोर लेन के लिये चौथी बार शिवराज के दिया आश्वासन-जिला भाजपा का एक प्रतिनिधि मंड़ल मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के निर्देश पर छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिला। भाजपा नेताओं ने जिले की फोर लेन मामले में उनसे चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय भू तल परिवहन मंत्री जोशी से मिलकर शीघ्र ही समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया। इस मामले में सवाल यह उठता है कि अभी तो प्रदेश सरकार से वन विभाग का प्रस्ताव ही केन्द्र सरकार को नहीं भेजा गया हैं। यह बात मुख्यमंत्री को इस प्रतिनिधि मंड़ल नेबतायी ही नहीं या बताने का साहस नहीं जुटा पायी।वैसे भी मुख्यमंत्री पिछले दो साल में चौथी बार ऐसा आश्वासन देकर गये हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा हैं। फोर लेन को लेकर पिछले कुछ महीनों से और भी कई मंेचों से प्रयास जारी हो गये हैं। ऐसा लगता है कि फोर लेन के मामले का जल्द ही कोई निपटारा होने जा रहा हैं इसलिये अब श्रेय लेने चक्कर में हर कोई प्रयास करते दिखना चाह रहा हैं ताकि सेहरा उसके सिर पर बंध सके। जबकि आज जरूरत इसबात की है कि पिछली बार तरह इस बार भी प्रदेश वाइल्ड लाइफ बोर्ड से कोई नकारात्मक कमेंट ना जाये। इसके लिये संयुक्त प्रयास किये जाने चाहिये। प्रदेश सरकार से जब प्रस्ताव केन्द्र सरकार कासे चला जायेगा तब वहां से प्रयास कर जल्दी ही काम शुरू कराने की काशिश की जाना चाहिये। अन्यथा सब कुछ राजनीति का एक खेल बन कर ही हर जायेगा।

Monday, December 19, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

फोर लेन के मुद्दे को सिर्फ राजनैतिक हथियार बना कर राजनीति करने की छूट जनता किसी को भी नहीं दे सकती

इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की यह संयुक्त यात्रा सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है आई.डबल्यू .ई. योजना -इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। बी.ओ.टी. याने बिल्ट,आपरेट और ट्रांसफर। लगाओ, चलाओ और वापस करो। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इसका फुल फार्म इनवेस्ट,विन और अर्न याने लगाओ, जीतो और कमाओ। जिस तरह से आज निर्वाचित जनप्रतिनिधि काम कर रहें हैं उससे आम आदमी के मन में यह धारणा काम करने लगी हैं कि अब कोई जनसेवा करने के लिये जन प्रतिनिधि नहीं बनता वरन जीतते ही वह धन सेवा में जुट जाता हैं। जैसे जैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया गया वैसे वैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण हुआ हो या नहीं लेकिन भ्रष्टाचार विकेन्द्रीकरण जरूर होता जा रहा हैं। इसलिये आज जहां देखो वहां भ्रष्टाचार का रोना रोते लोग दिख जाते हैं। अब इसका कारण क्या है? इस पर लोग अलग अलग बातें कहते दिखते हैं। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि महंहगें चुनावों और पार्टी के द्वारा थोपी जाने वाली आर्थिक मांगों का रोना रोते हें तो वहीं दूसरी ओर जब लोग “आजई बनिया कालई सेठ“ होते जनप्रतिनिधियों को देखतें हैं तो उन्हें ये सारे तर्क बेमानी लगतें हैं। भ्रष्टाचार मिटाने का दावा तो सभी करतें हैं लेकिन इसकी शुरुआत कहां से करें? यह कोई भी नहीं बता पाता हैं। राजनीति में तो अब भ्रष्टाचार को बेशर्मी से शिष्टाचार कहने से कोई नहीं चूक रहा हैं। इस संबंध में तो गायत्री परिवार की यही मंत्र काम आ सकता हैं कि “हम सुधरेंगें,जग सुधरेगा“। यदि हमने खुद ना सुधरने की कसम खा ली है तो फिर जग के सुधरने की बात करना ही बेमानी होगा।

पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की दिल्ली यात्रा सुर्खियों में -नगरपालिका का प्रतिनिधिमंड़ल दिलली से लौटकर आ गया हैं। दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ द्वारा नगर निगम,नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था जिसमें जलकर्म सभापति राजा पराते , कांग्रेस पार्षद दल के नेता शफीक खान के अलावा इंका पार्षद इब्राहिम खान का समावेश था। इस यात्रा के दौरान इस प्रतिनिधि मंड़ल ने अलग से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से भेंट कर शहर की समस्याओं से अवगत कराया और शहर में रेल्वे ओवर ब्रिज के साथ सीवर लाइन तथा सड़कों के लिये अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने की मांग भी की हैं।बताया जाता है कि इस दिल्ली यात्रा में पालिका के पूर्व अनुभवियों की टीम भी गयी थी जिसके फोटो भी अखबारों की सुर्खी बनी थी। लेकिन इस टीम का कहीं विज्ञप्ति में उल्लेख नहीं किया गया हैं। लोगों का कयास हैं कि पुरानी अनुभवी टीम ने पर्दे के पीछे कोई कारगर भूमिका निभायी होगी। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम ने क्या गुल खिलाये हैं और इसका शहर को कितना और क्या लाभ होगा? यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा। पालिका की योजनाओं को जब तक प्रदेश सरकार अपनी सिफारिश के साथ केन्द्र सरकार को नहीं भेजेगी तब तक राशि मिलने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता हैं। शहर के लोगों की तो यही अपेक्षा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रोड़ शो करके भाजपा के लिये वोट मांगें थे उसी तरह जल्दी ही प्रदेश सरकार योजनाओं को दिल्ली भेजे और दलीय भावनासे परे हट कर कांग्रेस के लोग केन्द्र से राशि दिलवायें ताकि स्वर्णिम मध्यप्रदेश की परिकल्पना के अनुसार स्वर्णिम शहर भी बन सकें। वैसे तो पालिका की युवा टीम से शहर के लोगों को बहुत उम्मीदें हैं।

फोर लेन सिर्फ राजनीति करने की छूट किसी को भी नहीं-फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने एक प्रतिनिधि मंड़ल दिल्ली ले जा कर भू तल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी, पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन और शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से भेंट कर मसले को जल्दी निपटाने का मांग की थी। उसके बाद दिल्ली से भोपाल आये वन विभाग के अधिकारी राजेश गोपाल सहित एनएचएआई के अधिकारियों की हरवंश सिंह से उनके ही बंगले भी हुयी भेंट के समाचार भी अखबारों में छपे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की सीईसी के सदस्य के रूप में राजेश गोपाल के प्रदेश सरकार के मुख्यसचिव को भेजे गये पत्र के आधार पर ही फोर लेन का काम पूरे जिले में रुक गया था। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ कुरई घाट का 8.9 कि.मी. का हिस्सा ही विचाराधीन था जिस पर भी कोर्ट ने स्टे नहीं दिया था।इसके बाद हरवंश समर्थकों का दावा है कि दिल्ली में हरवंश सिंह ने वन एवं पर्यावरण विभाग और तथा एनएचएआई के अधिकारियोंकी संयुक्त बैठक कर पूरे मामले में सर्वमान्य हल निकाल लिया हैं और जल्दी ही पूरा रुका हुआ काम शुरू हो जावेगा। लेकिन जानकार लोगों का दावा है कि एनएचएआई का नया प्रस्ताव अभी जिले में ही वन विभाग के पास विचाराधीन है जिस पर परीक्षण किया जा रहा हें। फिर यह प्रदेश के वाइल्ड लाइफ बोर्ड के भोपाल जायेगा और वहां नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मामला दिल्ली भेजा जायेगा जहां अंतिम स्वीकृति के बाद ही काम शुरू हो पायेगा। दूसरी तरफ भाजपा यह दावा कर रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इसे पूरा कराने की पूरी कोशिश कर रहें हैं। शिवराज सिंह ने भी सिवनी के कुछ लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलाने की बात एक साल पहले कही थी। लेकिन ना तो ले जाने वाले दिल्ली ले गये और ना ही जाने वालों ने कभी शिवराज से यह जानने की जरूरत महसूस की कि वे उन्हें कब दिल्ली ले जायेंगें। और मामला अखबारों की सुर्खियां भर बन कर रह गया। बीते दिनों जिले से बहुत कुछ छिना हैं। लेकिन मिला कुछ भी नहीं हैं।इससे दुखी जिले के लोगों ने फोर लेन के संघर्ष में ऐतिहासिक बंद कर एक मिसाल कायम की थी। लेकिन तब मामला कोर्ट में लंबित होने कारण केन्द्र और राज्य सरकार के पास यह बहाना था कि चाहते हुये भी हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अब जबकि मार्च 2011 में कोर्ट ने आपत्तिकर्त्ता की याचिका खारिज कर दी हैं तब इस विलंब के लिये किसी के भी पास कोई बहाना नहीं हैं। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी यदि मामला अभी जिले में लंबित है तो इसके लिये भला जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती हैं? बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

Monday, December 12, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

शिवराज और सरकार के खिलाफ विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने की अनुमति नहीं दी जाती है?

नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है।यह भी चर्चित है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। कुलस्ते ने कांग्रेस और राष्ट्रीय नेतृत्व पर जम हर निशाने साधे लेकिनइस पर कांग्रेस की चुप्पी चर्चा में हैं। पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं।प्रदेश अध्यक्ष मौर्य ने इंका और भाजपापर निशाना साधते हुये कहा कि दोनों की करनी एक ही है। गौगपा ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की है। एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं।

जिले में कुलस्ते की आदिवासी सम्मान यात्रा चर्चित-नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है। नये मंड़ला संसदीय क्षत्र में नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव एवं सिवनी जिले की लखनादौन एवं केवलारी विस सीट के अलावा मंड़ला जिले की पांचः विस सीटें आती हैं। यह भी एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। जिले की लखनादौन विस सीट से कुलस्ते को भारी मतों से हारना पड़ा था। इसके साथ ही वे अपने गृह जिले मंड़ला की पांचों विस सीटों से भी चुनाव हार गये थे। गोटेगांव के बाद कुलस्ते की यात्रा ने लखनादौन एवं केवलारी क्षेत्र में आयोजित सम्मान समारोहों में हिस्सा लिया। कुलस्ते ने कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय नेतृत्व को कठघरे मे खड़ा करते हुयें कई आरोप लगाये और कहा कि कांग्रेस आदिवासी और दलितों को बिकाऊ समझती हैं। हमें समय आने पर बता देना है कि हम बिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के लिये कांग्रेस ने हमें प्रलोभन दिया और जब हमने ादन में उसे उजागर किया तो हमें ही जेल में डालकर सरकार ने प्रजातंत्र का अपमान किया हैं। जिसका बदला हम लेकर रहेंगें। इन सब आरोपों पर कोंग्रेस की चुप्पी भी कम रहस्यमय नहीं हें। वैसे भी पूर्व में यह आरोप लगते रहें हैं कि हरवंश और कुलस्ते के बीच परिसीमन के समय से ही नूरा कुश्ती चलती रही हैं। जिला भाजपा द्वारा जिले में आयोजन की भारी तैयारियां की गयी थी। उनके इस आयोजन में जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायक नीता पटेरिया, शशि ठाकुर,कमल मर्सकोले, मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर,पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक टेकाम सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुये। भाजपा के सभी नेताओं ने संप्रग सरकार और कांग्रेस पर जमकर निशाने साधे और उसे प्रजातंत्र का हत्यारा बताया और यह भी कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार को हर जगह बढ़ावा दे रही हैं। कुछ जगह जनता और आदिवासियो की नगण्य उपस्थिति भी अखबारों की सुर्खी बनी रहीं हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चित रहा कि जिला भाजपा का इस आयोजन के दौरान फील्ड मेनेजमेंट से कहीं अच्छा मीडिया मेनेजमेंट रहा हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चित है कि आदिवसी सम्मान यात्रा में जिले के आदिवासी विस क्षेत्र बरघाट और आदिवासी बाहुल्य वाली सिवनी विस क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में कुलस्ते ने अपना कार्यक्रम क्यों नहीं रखा? भाजपा के आदिवासी नेता कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र तक ही इस अभियान को सीमित रखा इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जारी हैं।

इंका भाजपा का विज्ञप्ति युद्ध शवाब पर -पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। जहां एक ओर प्रेम तिवारी हरवंश सिंह की कारगुजारियों पर आक्रमण कर रहें हैं तो दूसरी ओर इमरान पटेल ने नीता पटेरिया पर निशाना साधना शुरू कर दिया हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भाजपायी गुटबाजी में प्रेम तिवारी विधायक नीता पटेरिया के खेमें के माने जाते हैं। इसीलिये नगर इंकाध्यक्ष ने नीता को कठघरे में खड़ा करने की योजना बना रखी हैं। इस विज्ञप्ति युद्ध में आरोपों के पूरे जवाब देने के बजाय सुविधानुसार जवाब देने और अपनी ओर से सवाल भी दागने से भी कोई नहीं चूक रहा हैं।

बसपा ने भी दी जिले में राजनैतिक दस्तक -बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आई.एस.मौर्य ने इस विशाल आम सभा में कांग्रेस और भाजपा को जम कर कोसा और कहा कि इन दोनों दलों की करनी में कोई फर्क नहीं हें। दोनों ही दलों की सरकारों ने दलितों को छला है और अपनी तिजोरियां भरी हैं। बहन मायावती ने जब इन वर्गों के उत्थान के लिये कड़ी मेहनत शुरूकी है तो वे दोनों दलों की आंखों में खटकने लगी हैं। हमें आदिवासियों और दलितों के उत्थान के लिये उनके शैक्षणि,आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिये काम करना हें तभी बाबा साहेब का सपना साकार होगा।

शिवराज के खिलाफ तो आंदोलन कर सकते हो पर हरवंश के खिलाफ नहीं -गौगपा ने विस उपाध्यक्ष और केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में आयोजित किये जाने और शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की हें। गौगपा ने इसके अलावा 12 अन्य बिन्दुओं पर भी जांच की मांग की हैं। गौगपा के प्रवक्ता विवेक डहेरिया ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर यह आरोप लगाये थे कि छपारा जनपद पंचायत के सी.ओ. ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन पर शासकीय आयोजन किया और शासकीय धनराशि खर्च की है जो कि अनुचित हैं। इस अवसर पर विधायक निधि से पंचायतों को बांटे गये टंेकरो पर से लिखे हुये इस वाक्य को मिटाने की मांग की है जिसमें यह लिखा हुआ है कि हरवंश सिंह के जन्म दिन पर ये टेंकर दिये गये हैं। गौगपा प्रवक्ता ने एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन इंका विधायक हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और इंका विधायक हरवंश के बीच सांठ गांठ के आरोप इंका और भाजपा में तो लगते ही रहें हैं लेकिन अब गौगपा ने भी इसी ओर इशारा करते हुये प्रशासन और सरकार को कठघरें में खडा़ किया है। लेकिन कहीं भी और कोई भी ऐसे आरोप लगाते रहें लेकिन उससे किसी को भी फर्क नहीं पड़ता हैं। सियासत सियासत के तरीके से चलती जिसमें आरोप लगाने से आज कल कुछ नहीं होता क्योंकि नूरा कुश्ती नेताओं की सुविधा के हिसाब से होती हैं इसमें पार्टियों का ख्याल रखना जरूरी नहीं होता हैं।