Monday, December 27, 2010

फोर लेन विवाद

अपने ही प्रस्ताव से लागत की आड़ लेकर क्यों मुकर रहा है भूतल परिवहन मन्त्रालय?

फ्लाई ओवर बनाने का पहला विकल्प दिया था कोर्ट में :बी.ओ.टी.में बन रही हैं सड़क : लागत का पैसा टोल टेक्स से जनता से किया जायेगा वसूल : मन्त्रालय को ठेकेदारों को दिये जाने वाले हर्जाने की करना चाहिये चिन्ता

सिवनी। उत्तर दक्षिण गलियारे के विवाद में सरकार ना जाने क्यों लागत की चिता कर रही हैं। सरकार ठेकेदारों को देने वाले हर्जाने की राशि कम करने पर ध्यान देना चाहिये जो कि सरकार को ही देना होगा।

उल्लेखनीय हैं कि प्रधानमन्त्री स्विर्णम चतुZभुज योजना के अंर्तगत निर्माणाधीन उत्तर दक्षिण गलियारे के तहत लखनादौन से खवासा तक जिले में लगभग 106 कि.मी. फोर लेन सड़क निर्माण का काम हो रहा था। केन्द्र सरकार के भूतल परिवहन मन्त्रालय के अंर्तगत राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण के नियन्त्रण में यह काम प्रारंभ हुआ था। यह समूचा कार्य बी.ओ.टी. योजना के तहत हो रहा था जिसमें ठेकेदार को खुद सड़क बना कर टोल टेक्स वसूल करना था और फिर उसे निर्धारित समयावधि के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण को हस्तातरित कर देना था। इसमें सरकार की कोई लागत नहीं लगनी थी और पूरी वसूली जनता से टोल टेक्स के द्वारा की जानी थी।

इस काम को करने वाली दोनों निर्माण ऐजेिन्सयों ने तेजी से अपना काम किया और जिस हिस्से की मंजूरी वन एवं पर्यावरण विभाग से नहीं मिली थी उसे छोड़कर बाकी पूरा काम निर्धारित समयावधि से काफी पहले ही पूरा कर लिया था। इसी बीच एक एन.जी.ओ. ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी जो कि विचाराधीन हैं।

केन्द्र शासन के दो विभागों,भूतल परिवहन एवं वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय में एक राय ना बनने के कारण मामला आज भी लंबित हैं। संप्रग शासन काल के पहले कार्यकाल में कोर्ट में जो जवाब प्रस्तुत किया गया था उसमें विवादास्पद 9 कि.मी. में पहले विकल्प के रूप में फ्लाई ओवर बनाने का प्रावधान किया गया था। जिस पर वन एवं पर्यावरण विभाग पहले सहमत नहीं हुआ था। लेकिन नागरिकों के ऐतिहासिक आन्दोलन और जनमंच के इंटरवीनर बनने के बाद जब मामले का दूसरा पक्ष न्यायालय के सामने आया और कोर्ट ने जब आम सहमति बनाने के निर्देश दिये तो वन विभाग फ्लाई ओवर के विकल्प पर सहमत हो गया लेकिन ना जाने क्यो अपने ही द्वारा सुझाये गये विकल्प पर अब भूतल परिवहन मन्त्रालय ही सहमत नहीं हैं। उनके द्वारा तर्क दिया जा रहा हैं कि 900 करोड़ रुपये के फ्लाई ओवर के बजाय 300 करोड़ रुपये से वर्तमान के रोड़ के चौड़ी करण से ही काम चल सकता हें तो 900 करोड़ रुपये क्यों खर्च किये जाये। वन एवं पर्यावरण विभाग भी इसी परियोजना के एक अन्य हिस्से की अनुमति जबरन ही अटकाये हुये हैं जबकि वह हिस्सा कोर्ट में विवादास्पद भी नहीं हैं। यदि यही काम निपट जाता तो कम से कम एक ठेकेदार का काम पूरा हो जाता और सरकार को देने वाला हर्जाना कुछ तो कम होता।

इस मामले में सहज ही यह सवाल उठ खड़ा होता हैं कि जब रोड बनाने का पूरा काम बी.ओ.टी.के तहत हो रहा हैं तो भूतल परिवहन मन्त्रालय को लागत की क्यों चिन्ता करनी चाहिये अन्त में टोल टेक्स के द्वारा जनता से ही वसूल किया जाना हैं। जबकि सरकार के होने वाले विलंब के कारण भू तल परिवहन मन्त्रालय को कों लगभग 37 लाख रुपये प्रति दिन के हिसाब से हर्जाना देना होगा जो कि अब तक 320 करोड़ रुपये हो चुका हैं।

जानकार लोगों का मानना हैं कि जब सिवनी के नागरिक जनमंच के नाम से इंटरवीनर बने थे उस समय हालात यह थे कि सिवनी नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं 7 एक षड़यन्त्र के तहत बन्द कर दिये जाने की कगार पर था।लेकिन कोर्ट में दूसरे पक्ष के सामने आने के बाद अब यह तो सुनिचित सा लगता हैं कि वह षड़यन्त्र अब सफल नहीं हो पायेगा।

Friday, December 24, 2010

राहुल से न्याय की उम्मीद है लोगों को

सिवनी। आपके आश्वस्त करने से सब तरफ से निराश होचुके लोगों के मन में फोर लेन मामले में न्याय मिलने की आशा जा गई है। सुप्रीम कोर्ट में अगली सनुवायी 17 जनवरी 2011 को होने वाली हैं। अत: आप शीघ्र ही उचित कार्यवाही करने का कष्ट करें।

उक्ताशय केी बात इंका नेता आशुतोष वर्मा ने राहुल गांधी को भेजे एक ई मेल में कही हैं। इसके साथ ही कुछ आवश्यक दस्तावेज भी भेजे हैं। इंका नेता ने अपने पत्र में लिखा हें कि आपने अपने मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के प्रवास के दौरान जिले से गुजरने वाले फोर लेन मामले में लोगों को आश्वस्त किया था कि आप इस मामले को देखेंगें। इससे सब तरफ से निराश हो चुके लोगों के मन में न्याय मिलने की एक आशा केी किरण जाग गई हैं।

अपने पत्र में इंका नेता आशुतोष ने आगे लिखा हैं कि आपको मैंने स्वयं भी इससे सम्बंधित सभी दस्तावेज भी सिवनी हेलीपेड पर आपके अवलोकनार्थ दिये थे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि प्रधानमन्त्री स्विर्णम चतुZभुज योजना के तहत श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाने वाला नार्थ साउथ गलियारा सिवनी जिले से होकर गुजर रहा हैं। जिले में लगभग 105.58 कि.मी. सड़क बनना हैं जिसमे से लगभग 86 कि.मी. सड़क बन चुकी हैं। वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिये जाने के कारण मामला लंबित हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं जिसका क्रमांक 202/95 के आई.ए. क्र.1124/09 हैं। एन.एच.ए.आई. ने अपने जवाब में प्रथम आप्शन के रूप में एलीवेटेड हाइ वे का प्रस्ताव किया था जिस पर अब वह स्वयं 900 करोड़ रूपये की राशि लगने के कारण सहमत नही हैं जबकि वन विभाग इस विकल्प के लिये सहमत हैं। इस कारण कोर्ट में आम राय नहीं बन पा रही हैं। जिससे निर्णय लंबित हैं।

इंका नेता आशुतोष वर्मा ने आगे उल्लेख किया हैं कि इस विलंब के कारण केन्द्र सरकार को निर्माण करने वाले ठेकेदार को करोड़ों रुपयों की क्षति पूर्ति देनी होगी जिसके विस्तृत विवरण एवं गणना के अनुसार जिले में कार्यरत रोड़ बनाने वाली दोनों कंपनियो को कुल 105.58 कि.मी. रोड़ बनाना था जिसमें से वे निघाZरित समयावधि के पहले ही लगभग 63 कि.मी. रोड़ बना चुके हैं और शासन द्वारा बाधा मुक्त भूमि ना मिलने के कारण 38.5 कि. मी. रोड़ का निर्माण नहीं कर पा रहें हैं। इसके कारण दोनो ही कंपनियां टोल टैक्स की वसूली भी प्रारंभ नहीं कर पा रहीं हैं। इस आधार पर यदि दोनों कंपनियां पूरे 105.58 कि. मी. पर हर्जाने की मांग करती हैं तो इस भूमि का कुल क्षेत्रफल 633.58 हेक्टेयर होता हें जिस पर 6 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाने की राशि 38 लाख 8 सौ 80 रु. प्रतिदिन होती हैं। इस हिसाब से 31 दिसम्बर 2010 तक की राशि 320 करोड़ 74 लाख 77 हजार 8 सौ रु. होती हैं जो केन्द्र शासन को देय होगी।

इंका नेता वर्मा ने अपने पत्र के अन्त में राहुल गांधी से अनुरोध किया हें कि वे शीष्र ही समुचित कार्यवाही कर जिले के लोगो को न्याय दिनाने का कष्ट रकें।















Wednesday, December 22, 2010

शिवराज का डंपर कांड़

फिर से मुद्दा बनाने के पहले कांग्रेस की हरवंश कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने क्या जरूरी नहीं?

राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा कांग्रेस नेः न्याय रैली के बाद कई मौकों पर हरवंश के बगलगीर दिखी शिवराज सरकारःजांच में हरवंश ने शिवराज को दोषी पाया या नहीं?ः जांच रिपोर्ट का खुलासा अब तक क्यों नही?

सिवनी । कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के डंपर कांड़ को एक बार फिर उछाल कर दिल्ली पहुचा दिया हैं। कांग्रेस आला कमान ने इस मामले की जांच के लिये प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं इंकर विधायक हरवंश सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। राजनैतिक हल्कों में इस कांड़ को फिर से मुद्दा बनाने के पहले हरवंश कमेटी की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग उठ रही हैं। हालांकि इस कमेटी के गठन के बाद कई मामलों में शिवराज सरकार हरवंश सिंह की बगलगीर बन कर खड़ी दिखी हैं और आज वे विधानसभा उपाध्यक्ष के संवैधानिक पद पर हैं।

कुछ साल पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और उनकी पत्नी साधना सिंह डंपर खरीदी के मामले में विवाद में उलझ गये थे। मामले ने इतना अधिक तूल पकड़ा कि प्रदेश के लोकायुक्त के यहां अपराध पंजीबद्ध होकर जांच में ले लिया गया था। हालात यह हैं कि यह मामला आज भी जांच में हैं और न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं किया जा सका हैं। इस पर यह आरोपित किया जा रहा हैं कि मुख्यमंत्री का मामला होने के कारण जांच में विलंब हो रहा हैं।

इस प्रकरण की जांच के लिये कांग्रेस आला कमान एक जांच कमेटी बनायी थी। इस कमेटी का अध्यक्ष सिवनी जिले के केवलारी क्षेत्र के इंका विधायक और प्रदेश इंका के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को बनाया गया था। उस दौरान अखबारों में यह समाचार प्रमुखता से छपा था कि सोनिया गांधी ने एक महत्वपूर्ण कार्य उन्हें सौंपा हैं। प्रदेश में इस समिति की अगुवायी में आंदोलन भी हुये। हरवंश सिंह के गृहनगर में भी इंका नेता राजकुमार खुराना के एक डंपर पर सवार होकर इंकाइयों ने औपचारिकता पूरी कर ली थी।

लेकिन कुछ ही समय बाद आमानाला सिंचाई परियोलना के लोर्कापण को लेकर तत्कालीन भाजपा सांसद नीता पटेरिया की गाड़ी पर किये गये पथराव और उनके ड्रायवर और पुत्र पर किये गये हमले को लेकर बंड़ोल थाने में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर हरवंश सिंह सहित कुछ अन्य इंकाइयों के विरुद्ध जान से मारने के प्रयास जैसे संगीन अपराध की धारा 307 सहित कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज हो गया। इसके विरोध मेंहरवंश सिंह ने जबलपुर संभाग के इंकाइयों को इकट्ठा कर जंगी प्रदर्शन किया था जिसमे बीसों हजार लोगों ने भाग लिया था। वैसे तो इस रैली का नाम न्याय रैली रखा गया था लेकिन बताया जाता हें कि कांग्रेस आला कमान के सामने हरवंश सिंह ने इसे शिवराज के डंपर कांड़ के विरोध में किया गया संभागीय प्रर्दशन बताया था।

इस प्रदर्शन के बाद ना तो आज तक शिवराज सरकार ने कोर्ट में इसमामले में चालान पेश किया हैं और ना ही खात्मा लगाया हें। लोगों का मानना हैं कि सरकार ने हरवंश सिंह को यह अवसर उपलब्ध कराया हैं कि इस आधार पर वे उच्च न्यायालय से अपने आप को दोष मुक्त करा लें। ऐसा भी विदित हुआ हें कि उन्होंने इस हेतु हाई कोर्ट में मामला पेश भी कर दिया हैं। इसी तरह एक अन्य ग्राम आमानाला के जमीन घोटाले में भी कोर्ट के दो दो बार आदेश दिये जाने के आद भी धोखाधड़ी का मामला हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ दर्ज नहीं किया था। कोर्ट की फटकार के बाद बमुश्किल पुलिस ने मामला दर्ज किया था। बीते दिनो में ऐसे ही कई अवसर आयें हैं जब प्रदेश की शिवराज सरकार हरवंश सिंह के बगलगीर बन कर खड़ी नजर आयी हैं। और तो और 2008 का चुनाव जीतने के बाद शिवराज सिंह के दूसरे कार्यकाल में हरवंश सिंह विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर सर्व सम्मति से निर्वाचित हो चुके हैं।

डंपर कांड़ के लिये कांग्रेस द्वारा गठित हरवंश कमेटी ने इस मामले में शिवराज सिंह और उनकी पत्नी को दोषी पाया हैं या नहीं? उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट आला कमान को सौंपी हैं या नहीं? यह जांच अभी पूरी हुयी भी हैं या नहीं? इन तमाम प्रश्नों का कोंई खुलासा नहीं हुआ हैं।

हाल ही में प्रदेश कांग्रेस ने अपने सांसदों और विधायकों के साथ राष्ट्रपति जी को ज्ञापन सौंप कर इसकी सी.बी.आई. जांच कराने की मांग की हैं।सियासी हल्कों में चर्चा हैं कि इसके पहले हरवंश सिंह कमेटी की रिपोर्ट सामने आना चाहिये ताकि यह उजागर हो सके कि कांग्रेस की इस समिति ने मुख्यमंत्री को दोषी पाया भी हैं या नहीं?





क्या केवलारी के आदिवासियों को हरवंश के भरोसे छोड़ दिया है शिवराज ने?

सिवनी। प्रदेश व्यापी अपनी वनवासी सम्मान यात्रा पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान का जिले में आगमन हुआ। आपने लखनादौन विस क्षेत्र के घंसौर ब्लाक के केदारपुर तथा लखनादौन विकास खंड़ मुख्यालय तथा बरघाट विस क्षेत्र के ग्राम सुकतरा का दौरा किया और आदिवासी भाइयों के भले के लिये कई घोषणायें भी की हैं। लेकिन केवलारी विस क्षेत्र के आदिवासियों कर कोई भी सुध नहीं ली हैं। जबकि इस क्षेत्र में भी घनौरार एवं छपारा आदिवासी विकाखंड़ तथा सिवनी और केवलारी विकाखंड़ के कई आदिवासी इलाके आते हैं जहां की सुध लेना शिवराज ने जरूरी नहीं समझा जबहिक पड़ोसी जिले छिंदवाड़ाके सामान्य विस क्षेत्र के खांमरपानी के आदिवासियों के द्वार पर बाकायदा दस्तक दी हैं। भाजपायी और इंकाई हल्कों में जब इस बात की चर्चा चली तो दोनो ही तरफ से यह कहने में किसी ने संकोच नहीं दिखाया कि केवलारी के आदिवासियों को विस उपाध्यक्ष एवं क्षेत्रीय इंका विधायक हरवंश सिंह के भरोसे छोड़ दिया हैं शिवराज ने।



चुनाव में जनता ने और अब शिवराज ने भी अनाथ छोड़ दिया केवलारी के भजपाइयों को

सिवनी। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान से केवलारी विस क्षेत्र के भाजपाइयों के एक जत्थे ने मुलाकात कर यह रोना रोया कि उनकी बात कोई भी अधिकारी नहीं सुनते हैं ब्लकि सभी इंका विधायक हरवंश सिंह की बात सुनते हैं और उन्हें ही तव्वजो देते हैं। इस पर शिवराज ने कहा कि मैने तो आप लोगों से भाजपा को जिताने की बात की थी लेकिन आपने जिताया नहीं। अब हरवंश सिंह विधानसभा के उपाध्यक्ष बन गये हें तो सब उनकी बात तो सुनेंगें ही। यह टका सा जवाब सुनकर सभी भाजपायी भौंचक रह गये। पहले तो जनताने और कुछ भाजपा नेताओं ने उन्हें अनाथ छोड़ दिया और सरकार बनने पर प्रदेश के मुखिया ने भी उन्हें अनाथ छोड़ दिया हैं।

Sunday, December 19, 2010

दो साल में दूसरी बार विकास के लियेयोजना बनाने की बात कह मंचासीन भाजपा नेताओं की तालियां बटोर ले गये शिवराज

हाल ही में लगभग दो साल बाद एक बार फिर जब जिले के विकास की बात उठी तो मुख्यमन्त्री जी ने फिर मंच से योजना बनाने के निर्देश देते हुये पैसे की कमी नहीं आने देने की बात कर दी। मंच पर बैठे भाजपा के उन तमाम नेताओं ने इस बार भी ताली बजाई जिन्होंने दो साल पहले पालेटेकनिक के मंच से ताली बजायी थी। प्रदेश भाजपा महिलामोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया पर मुख्यमन्त्री की पत्नी और उपाध्यक्ष साधना सिंह के भारी पड़ने के समाचार सुर्खियों में रहें। वैसे सामान्य तौर पर देखा जाये तो यह एक साधारण सी बात हैं।लेकिन भाजपा हमेशा अपने आप को सबसे अलग होने का दावा करती हैं जहां व्यक्ति नहीं संगठन और संगठन का पद ही सम्मान पाने का अधिकारी होता हैं। ऐसा लगता हैं कि सबसे अलग होने का भाजपा का दावा सत्ता सुन्दरी की चकाचौंध में कहीं गुम होकर रह गया हैं। एक तो वर्तमान में महेश मालू जिलाध्यक्ष हैं तो दूसरे हीरा आसवानी जिले के निर्वाचित अध्यक्ष हैं। महेश मालू अपना कार्यकाल समाप्त मान चुके हैं और हीरा आसवानी अपने कार्यकाल की अभी शुरुआत हुयी नहीं मानते हैं। शिवराज जी आपके राज में तो आडवानी जी की नसीहत के खिलाफ भ्रष्टाचारियों को सजा देने के बजाय संगठन में प्रदेशस्तर पर पद देकर नवाजा जा रहा हैं। डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को अपनी ही सरकार से सर्वाजनिक मंच से बार बार एक ही मांग करनी पड़ रही हें और सरकार के मुखिया शिवराज सिंह हैं कि सभा में घोषणा करके तालियां तो बजवा लेते हैं लेकिन फिर नतीजा वही ढाक के तीन पात के समान ही रहता हैं। यह मांग हैं सिंचाई विभाग की कांचना मंड़ी जलाशय की जिससे क्षेत्र की लगभग 6 हजार एकड़ भूमि सिंचित होना हैं।

घोषणाओं से ही बहला जाते हैं शिव की नगरी को शिवराज -एक समय था जब मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान नगर के पालेटेकनिक कॉलेज के परिसर में आये थे। उनकी पत्नी साधना सिंह जी भी उनके साथ थीं। उस दौरान नगर विकास के लिये मांग उठी तो शिवराज सिंह ने मंच से शहर की सम्पूर्ण योंजना बनाने के लिये कलेक्टर को निर्देश दिये थे कि एक माहीने के अन्दर योजना बनाये सरकार एक मुश्त पैसा देगी। हाल ही में लगभग दो साल बाद एक बार फिर जब जिले के विकास की बात उठी तो मुख्यमन्त्री जी ने फिर मंच से योजना बनाने के निर्देश देते हुये पैसे की कमी नहीं आने देने की बात कर दी। उनकी पत्नी साधना जी इस बार भी साथ थीं। मंच पर बैठे भाजपा के उन तमाम नेताओं ने इस बार भी ताली बजाई जिन्होंने दो साल पहले पालेटेकनिक के मंच से ताली बजायी थी। ऐसी ही किसी आम सभा में शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने मेडिकल कॉलेज देने की घोषणा भी की थी। घोषणा के बाद जिला कलेक्टर ने जिले में इस हेतु एक कमेटी भी गठित की थी। लेकिन किसी ने भी आज तक इस बात की सुधि ही नहीं ली हैं कि उस मेडिकल कालेज का क्या हुआ र्षोर्षो वैसे भी शिवराज ने शिव की नगरी को हमेशा हताश ही किया हैं। ना तो अपने मन्त्रीमंड़ल में तीन तीन भाजपा विधायक होने के बाद भी किसी को मन्त्री बनाया,ना ही भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त होने के बाद भी उसेसंभाग का दर्जा मिलने दिया, सिवनी लोक सभा और जिले की एक विधानसभा समाप्त हो गई, फोर लेन मामले में सभाओं में गरजने वाले शिवराज कमलनाथ और जयराम रमेश से बात करते वक्त उसे भूल जाते हैं। इतना सब कुछ करने बाद भी यदि जनता लोकसभा,चार में से तीन विधानसभा और नपा अध्यक्ष का चुनाव जिता देती हैं तो भला कुछ करने की जरूरत ही क्या हैंर्षोर्षो रहा सवाल भाजपा नेताओं का तो वे भी मंच पर घोषणा होने मात्र से ताली बजाकर सन्तुष्ट हो जाते ळें तो फिर चिन्ता करने की तो कोई बात ही नहीं रह जाती हैं ?

नीता पर साधना भारी: सबसे अलग दिखने का भाजपायी दावा खोखला साबित हुआ -बीते दिनों भोपाल से प्रकाशित एक समाचार सिवनी के राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। सिवनी की विधायक नीता पटेरिया प्रदेशभाजपा की महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं और मुख्यमन्त्री की पत्नी साधना सिंह उपाध्यक्ष हैं। समाचार का सार यह था कि जहां देखो वहां हर राजनैतिक कार्यक्रमों नीता पर साधना भारी पड़ रहीं हैं। वैसे सामान्य तौर पर देखा जाये तो यह एक साधारण सी बात हैं और इसका कोई समाचार भी नहीं बनता क्योंकि आजकल ऐसा ही हो रहा हैं। लेकिन भाजपा हमेशा अपने आप को सबसे अलग होने का दावा करती हैं जहां व्यक्ति नहीं संगठन और संगठन का पद ही सम्मान पाने का अधिकारी होता हैं। लेकिन एक महिला संगठन में प्रदेश प्रमुख की यह गत देखकर तो ऐसा लगता हैं कि सबसे अलग होने का भाजपा का दावा सत्ता सुन्दरी की चकाचौंध में कहीं गुम होकर रह गया हैं।

जिले में कांग्रेस के हाल बेहाल तो क्या बदहाल हो गये हैं-जिले में कांग्रेस के हाल भी बेहाल हैं। ऐसी अजीब स्थिति शायद पहले कभी नहीं रहीं। एक तो वर्तमान में महेश मालू जिलाध्यक्ष हैं तो दूसरे हीरा आसवानी जिले के निर्वाचित अध्यक्ष हैं।हीरा आसवानी का अधिकृत घोषणा अभी तक नहीं हुई हैं।महेश मालू अपना कार्यकाल समाप्त मान चुके हैं और हीरा आसवानी अपने कार्यकाल की अभी शुरुआत हुयी नहीं मानते हैं। ऐसे में कांग्रेस कौन चलायेर्षोर्षो यह एक यक्ष प्रश्न सामने खड़ा हो गया हैं। जिस जिले में आजादी से लेकर कांग्रेस की सरकार रहते तक हमेशा मन्त्री रहें हों यदि उस जिले में कांग्रेस को अपने दिवंगत नेताओं की जयन्तियां और पुण्यतिथियां मनाने के लिये जगह ना मिले या आफिस खोलने की गुहार करना पड़े तो इससे शर्मनाक बात भला और क्या हो सकती हैंर्षोर्षो

शिवराज के राज में पदों से नवाजा जा रहा हैं भ्रष्टाचारियों को-भाजपा के शीर्ष नेता आडवानी ने भोपाल में गौरव दिवस पर मुख्यमन्त्री को सीख दी थी कि भ्रष्टाचार से समझोता नहीं करना। बस क्या था फिर शिवाराज भी अपने सभी भाषणों में भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ने की बात कहते दिखते हैं। नये तो जब पकड़ें जायेंगें तब छोड़ने या ना छोड़ने का सवाल पैदा होगा लेकिन शिवाराजजी यह तोबता दें कि जो पुराने पकड़े जा चुके हैं और जिन पर आरोप भी सिद्ध हो चुके हैं उन्हें आपकी सरकार कब दंड़ित करेगी। एक छोटा सा उदाहरण तो सिवनी शहर का ही हैं। दुगनी कीमत पर घटिया सड़के बनाने का आरोप इंका नेता आशुतोष वर्मा ने लगाया था। जिनमें से एक एस.पी.बंगले से राकेशपाल के पंप तक की भी हैं।नपा के कागजों में तो यह ठेका सुखदेव पटेल ने लिया था लेकिन यह सभी जानते हैं कि इसका काम भाजपा नेता पवन बंसल और समीर अग्रवाल ने बनायी थी। कई जाचों मेंआरोप प्रमाणितभी हो गये हैं। सरकार ने नपा अध्यक्ष,उपाध्यक्षऔर सी.ण्म.ओ. को तथा जिला कलेक्टर के यहां से पार्षदों को नोटिस भी जारी किये गये। लेकिन लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी नतीजा सिफर ही हैं। यह भी एक ओपन सीक्रेट हैं कि इन भाजपा नेताओं को पहले तत्कालीन भाजपा विधायक नरेशदिवाकर तथा पालिका अध्यक्ष पार्वती जंघेंला का संरक्षण प्राप्त था तो आज भी इन्हें भाजपा विधायक नीता पटेरिया और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी का संरक्षण प्राप्त हैं। और तो और पवन बंसल तो राजेश त्रिवेदी के साथ युवा मोर्चे की प्रदेश कार्यकारिणी में भी शामिल हो गये हैं। शिवराज जी आपके राज में तो आडवानी जी की नसीहत के खिलाफ भ्रष्टाचारियों को सजा देने के बजाय संगठन में प्रदेश स्तर पर पद देकर नवाजा जा रहा हैं।

शिवराज के रज में पदों से नवाजा जारहा हैं भ्रष्टाचारियों को-बरघाट विस क्षेत्रसेचार बार विधायक और भाजपा सरकार में तीन विभाग के मन्त्री रहे डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को अपनी ही सरकार से सर्वाजनिक मंच से बार बार एक ही मांग करनी पड़ रही हें और सरकार के मुखिया शिवराज सिंह हैं कि सभा में घोषणा करके तालियां तो बजवा लेते हैं लेकिन फिर नतीजा वही ढाक के तीन पात के समान ही रहता हैं। यह मांग हैं सिंचाई विभाग की कांचना मंड़ी जलाशय की जिससे क्षेत्र की लगभग 6 हजार एकड़ भूमि सिंचित होना हैं। इस बार भी सुकतरा में शिवराज सिंह ने मंच से यह घोषणा कर दी हैं कि इस योजना में जितना भी पैसा लगना हैं वह एक मुश्त इस साल के बजट में रख दिया जायेगा। अब देखना यह हैं कि डॉ. बिसेन को अगली बार फिर मांग करनी पड़ती है या नहीं?

Wednesday, December 15, 2010

क्या आपने डामर रोड़ में धूल उड़ते और पानी सिंचते देखा हैंर्षोर्षो

संजय तिवारी ने की नयी रोड़ बनाने की मांग



क्या आपने कभी डामर की सड़क पर धूल उड़ते और इससे बचने के लिये पानी सिंचते कही देखा है? यदि नहीं तो यह नजारा आपको नगर पालिका दिखा सकती हैं।

जी हां ऐसा नजारा आपको एस.पी. बंगले के सामने से राकेश पाल के पेट्रोल पंप तक वाली रोड़ में दिख सकता है। यह आज से तीन साल पहले नगर पालिका ने इस रोड़ को 89 प्रतिशत अधिक की दर पर बनवाया था। पहली ही बरसात में इस रोड़ के घटिया काम की पोल खुल गई थी। इसमें हुये भ्रष्टाचार की शिकायत हुयी थी जिन पर राज्य सरकार स्तर से कार्यवाही अभी भी लंबित हैं। सड़क बनाने वाले ठेकेदारों पर तब भी तत्कालीन भाजपा विधायक एवं पालिका अध्यक्ष का संरक्षण प्राप्त था और आज भी विधायक एवं पालिका अध्यक्ष का संरक्षण प्राप्त हैं।

तब से लेकर आज तक इस सड़क पर धूल उड़ती देखी जा सकती हैं। जब कोई वी.आई.पी. इस सड़क से गुजरने वाला होता हैं तो पालिका अपनी करनी को छिपाने के लिये इस सड़क पर पानी सींच देती हैं तो कुछ समय के लिये धूल उड़ना बन्द हो जाती हैं।

हाल ही में हुये प्रभारी मन्त्री के कार्यक्रम में फोर लेन बचाने के लिये गठित किये गये गैर राजनैतिक संगठन जनमंच के संजय तिवारी ने मन्त्री जी से मिलकर किसानों,उनसे सम्बंधित व्यापारियों को मंड़ी से होने वाली तकलीफो और वहां की अनियमितताओंं तथा उक्त रोड़ को फिर से नयी बनाने की मांग की हैं। संजय तिवारी ने इस सयड़क को फिर से बनवाने की मांग तो की हैं लेकिन लगभग दुगनी कीमत पर घटिया काम करने वाले ठेकेदारों और पालिका के तकनीकी स्टाफको दंड़ित करने की मांग करना उचित नहीं समझा। इस बात की क्या गारंटी हैं कि मन्त्री जी यदि फिर ये पैसा देकर इस सड़क ाके नयी बनवादें तो वो काम घटिया नहीं होगा?





Monday, December 13, 2010

सदी के महानाय्ाक अमिताभ पेंच नेशनल पार्क में रुके दो दिन

सिवनी । एन.डी. टीव्ही द्वारा बाघों के

संरक्षण की दिशा में चलाय्ो जा रहे एक विशेष अभिय्ाान टाइगर

कन्जर्वेशन अंतर्गत पेंच पार्क में आय्ाोजित कायर््ाक्रम में

शामिल होने अभिनय्ा के शहंशाह, महानाय्ाक अमिताभ बच्चन का

11 दिसम्बर को दोपहर 2.40 पर पेंच आगमन हुआ। महानाय्ाक को देखने

टुरिय्ाा गेट पर सिवनी एवं नागपुर जिले के लोगों का

ताँता सुबह 10 बजे से ही लग गय्ाा था। जब महानाय्ाक टुरिय्ाा

गेट पहुंचे और कार से उतरकर होटल जाने के लिय्ो दूसरी कार

में बैठे , इस दौरान ही दर्शकों को उनकी एक झ्ालक देखने

मिली।

इस सदी के महानाय्ाक अमिताभ बच्चन 11 दिसंबर

को मुंबई से हवाई जहाज द्वारा दोपहर 12 बजे नागपुर

पहुँचे जहाँ से वे कार द्वारा नेशनल पार्क पेंच के लिय्ो

रवाना हुय्ो। अमिताभ दोपहर करीब 2.40 मिनिट पर पेंच पार्क

का प्रवेश स्थल टुरिय्ाा गेट पहुँचे। श्री बच्चन टुरिय्ाा गेट से

पेंच पार्क स्थित ताज ग्रुप की होटल बागवान की ओर रवाना

हो गय्ो। बताय्ाा जाता है कि श्री बच्चन एन.डी.टीव्ही द्वारा होटल

बागवान(ताज ग्रुप)में आय्ाोजित टाइगर कन्जर्वेशन कायर््ाक्रम

में शामिल होंगे। इस कायर््ाक्रम में वे पेंच टाइगर रिजर्व

क्षेत्र्ा अंतर्गत रहने वाले ग्रामीणजनों को प्रसारण के

माध्य्ाम से वन्य्ा प्राणिय्ाों विशेषकर बाघों को संरक्षित

करने के लिय्ो समझ्ााईश देंगे एवं य्ाह भी समझ्ााने का प्रय्ाास

करेंगे कि य्ादि उनके रहवासी इलाके के आसपास टाइगर का बसेरा

है तो वे रहवासी क्षेत्र्ा टाइगर के लिय्ो छोड दें, ताकि राष्ट्रीय्ा

धरोहर को संजोय्ो रखने में उनका भी य्ाोगदान बना रहे। श्री

बच्चन के संदेश को प्रसारण के माध्य्ाम से एन.डी. टीव्ही द्वारा

पेंच पार्क के वन ग्रामों एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों

में विशेष व्य्ावस्था की गई है। य्ाह सीधा प्रसारण बागवान

होटल पेंच पार्क के एक कमरे में बनाय्ो गय्ो स्टुडिय्ाो से

होगा। य्ाह सीधा प्रसारण रात्र्ाि 11 बजे तक चलेगा, इसके बाद

श्री बच्चन होटल में ही रात्र्ाि विश्राम करेंगे। सूत्र्ाों से प्राप्त

जानकारी अनुसार महानाय्ाक अमिताभ कल प्रातः पेंच पार्क का

भ्रमण भी करेंगे। श्री बच्चन के इस आगमन को लेकर पेंच

नेशनल पार्क सिवनी मप्र, महाराष्ट्र एवं जिला प्रशासन द्वारा

सुरक्षा की दृष्टि से वृहद तैय्ाारिय्ाां की गई हैं। बताय्ाा जाता

है कि श्री बच्चन 13 दिसंबर को नागपुर होते हुय्ो मुंबई को

रवाना हो गये हैं।।



एन.डी.टी.वी. के बाघ संरक्षण कार्यक्रम से उठे चंद सवाल

सिवनी। पेंच नेधनल पार्क में आनन फानन में हुये अभिताब बच्चन के कार्यक्रम से लोगों के मन में चंद सवाल उठ खड़े हुये हैं

0 क्या फोर लेन मामले में सुप्रीम कोर्ट में 17 जनवरी को होने वाले संभावित निर्णय से इसके आयोजन का कोई सरोकार हैं?

0 क्या नेशनल हाई वे से लगभग तीस किलो मीटर पेंच पार्क में आयोजित इस बाघ संरक्षण कार्यक्रम को मुद्दा बनाया जा सकता हें?

0 क्या अभिताब जैसे महानायक का कार्यक्रम पेंच पार्क में ही करना जरूरा था जबकि राज्य सरकार अपनी घोषणा के बाद भी मोगली महोत्सव इस वर्ष पेंच पार्क में आयोजित नहीं कर ही हैं?

0 क्या बाघ संरक्षण के लिये आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में ही फिल्मी शेर को ज्रगल का शेर ना दिख पाना इनके संरक्षण में सरकारी लापरवाही का प्रमाण नहीं हैं?

0 क्या पेंच में कागजों पर दिखायी जा रही बाघों की संख्या सही है? यदि सही हैं तो फिर एक भी शेर का ना दिखना क्या संकेत देता है?

0 इस नेशनल पार्क का नाम प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी नेशनल पार्क शासन द्वारा रखा गया हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दायर मामले में पेंच टाइगर रिर्जव की बात कही गयी हैं क्या इसीलिये नेशनल पार्क का सही नाम कहीं भी नहीं लिया गया हैं?

Sunday, December 12, 2010

जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं जरूरत इसमें हो रहे भ्रष्टाचार में कमी लाने की जिसकी कोई सीमा नहीं है

जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की हैं जिसके लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होगें। भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों या वर्गों में पकड़ नही रहती उन जगहों पर भले ही तव्वजो मिल जाये लेकिन पकड़ बनते ही संघीय प्ष्ठ भूमि के नेताओं से उन्हें विस्थापित कर दिया जाता हैं। ऐसा ही कुछ जिले में स्व. महेश शुक्ला के साथ प्रदेश में स्व. पोर्ते,नेताम और भूरिया के साथ हुआ। अब लगता हैं कांग्रेस से भाजपा मे आये जिलें के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह के खिलाफ भी घोषित एवं अघोषित भाजपाइयों ने मोर्चा खोल दिया हैं। अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल। पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था।

जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की-

जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिह ने जिला योजना समिति की बैठक में इस बात का विश्वास दिलाया हैं कि जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं आने दी जायेगी। जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के विकास में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से इतना पैसा आ रहा हैं कि खर्च करते नहीं बन रहा हैं और जो खर्च हो रहा हैं उसमें भी इतना अधिक भ्रष्टाचार हैं कि काम की गुणवत्ता तो जैसे कहीे गुम ही गई हैं। तारीफ की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार के जो मामले प्रमाणित भी हो रहें हैं उनके खिलाफ प्रदेश सरकार से कार्यवाही में इतनी अधिक हीला हवाली हो रही हैं कि आज तक ाकेई भी भ्रष्टाचारी दंड़ित नहीं हो पाये हैं। इसीलिये मन्त्री जी जरूरत हैं तो भ्रष्टाचार में मी लाने की पैसे की तो कोई कमी हैं ही नहीं। और भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होंगें क्योंकि हर भ्रष्टाचारी को सत्ता शिखर के किसी ना किसी गुबन्द का संरक्षण प्राप्त हैं।

दूसरे दलों से आये नेता भाजपा में खप नहीं पाते हैं-

भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों में पकड़ नहीं रहती उन क्षेत्रों में पकड़ बनाने के लिये भाजपा में भले ही दूसरे दलों से आये नेताओं को तव्वजो मिल जाये और उन्हें मन्त्री तक बना दिया जाये लेकिन जैसे ही वे क्षेत्र भाजपा मय हो जाते हैं तो ऐसे नेताओं को दर किनार कर संघीय पृष्ठ भूमि को बिठाल दिया जाता हैं। इसका उदाहरण तो सिवनी जिले में ही मौजूद हैं। कांग्रेस से भाजपा में गये स्व. पं. महेश शुक्ला को ना केवल भसापा ने जिले का अध्यक्ष बनाया ब्लकि सिवनी विधानसभा से 90 में टिकिट भी दिया जहां उन्होंने कांग्रेस के हरवंश सिंह को हराया और मन्त्री भी बने। दूसरी बार फिर वे 93 में सिवनी से लड़े और कांग्रेस के आशुतोष वर्मा को हराकर विधायक बने। सन 1977 की जनता आंधी में इस क्षेत्र से कांग्रेस जीती थी। लेकिन जैसे ही भाजपा को लगा कि अब इस क्षेत्र में पकड़बन गई तो संघी पृष्ठभूमि के नेरश दिवाकर को टिकिट देकर उन्हें दरकिनार कर दिया गया। ऐसा ही कुछ हाल कांग्रेस से भाजपा में गये प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब एवं आदिवासी नेता अशोक टेकाम और कमल मर्सकोले का हैं। वैसे तो अशोक टेकाम सहकारी बैंक के अध्यक्ष और कमल मर्सकोले आदिवासी क्षेत्र बनने के बाद बरघाट से पहले विधायक हैं। लेकिन वास्तविकता तो यही हैं कि इन दोनों आदिवासी नेताओं के खिलाफ पुराने भाजपायी ही खोले हुये हैं। ऐसा ही कुछ हाल जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह का भी हैं। वे भी कांग्रेस में सांसद थे। कांग्रेस से भाजपा में आकर वे विधायक बने और उन्हें मन्त्री इसलिये बनाया गया हैं क्योंकि महाकौशल क्षेत्र में आदिवासी दिग्गज फग्गन सिंह कुलस्ते के कारण भाजपा के गिरते ग्राफ को आदिवासियों में थामना था। लेकिन उनके पिछले दौरे से ऐसा लगता हैं कि जिले में घोषित और अघोषित भाजपाइयों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं।अब यह आगे किस सीमा तक जायेगार्षोर्षो इस बारे में अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे भी कांग्रेस से भाजपा में गये आदिवासी नेताओं का हश्र अच्छा नहीं रहा हें चाहे वे स्व. भंवर सिंह पोर्ते रहें हो या अरविन्द नेताम हों या दिलीप सिंह भूरिया हों उन्हें कभी सत्ता के शीर्ष तक नहीं पहुचने दिया गया हैं।

क्रिकेट की पिच के साथ ही राजनीति में दिखा फिरकी गेन्दबाजी का कमाल -

अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। हुआ यूं कि नगर पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष राजिक अकील के खिलाफ राजनैतिक प्रतिशाोध के कारण फर्जी मुकदमें दर्ज करने का आरोप लगाते हुये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ कांग्रेसी सड़को पर उतरे और सभी के खिलाफ जमकर नारे बाजी भी की थी। जिसमें महेश मालू,हीराआसवानी,आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू,स हित कई कांग्रसी शामिल थे। लेकिन चन्द दिनों बाद ही संभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता के फायनल मैंच के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि राजेश त्रिवेदी और अध्यक्षता राजिक अकील तथा समापन समारोह में मुख्य अतिथि कलेक्टर मनोहर दुबे और अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार थे। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्षके रूप में राजकुमार पप्पू खुराना के सभी अतिथियों का माला पहना कर स्वागत भी किया। धन्य हैं आमन्त्रण देने और स्वीकार करने वाले तथा धन्य हैं माला पहनाने और पहनने वाले। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल।

भव्य थिगड़ोत्सव के बाद भी थिगड़े नहीं लगवा पाये हरवंश -

पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। इनमें सिवनी,बण्डोल,छपारा आदि बायपास रोउ़ बन जाने के बाद खराब हो चुके पराने मार्गों में थिगड़े लगाकर याने पेच वर्क के बाद सरफेस रिनीवल की बात कही गई थी जिसमें आधा पैसा ठेकेदार को भी लगाना था। सभी जगह आयोजन हुये और कांग्रेस नेताओं ने हरवंश सिंह और कमलनाथ का इस थिगड़ोत्सव में आभार व्यक्त किया। शहर वालों ने भी सोचा कि चलो फोर लेन का मामला जब तक कोर्ट में लटका हैं तब तक चलने में सुविधा तो रहेगी। वास्तविकता यह हैं कि लखनादौन से नागपुर तक जाने वाले फोरलेन मार्ग में जब से कानूनी विवाद छिड़ा हैं तब से ही इन सड़कों का रख रखाव विभाग ने बन्द कर दिया हैं। अब हालात यह हैं कि कोर्ट के आदेश के बिना भी काम तो पूरा रुक गया हैं लेकिन रखरखाव भी ना होने से सड़क में गìों के बजाय वाहन चालक गìों में सड़क ढूंढ़ते ढूंढ़ते परेशान हो रहे हैं। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। फोर लेन रोड़ में कोर्ट में नये नये अड़ंगें डलने के बाद थिगड़े भी ना लगने से लोग अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैंऔर आभार व्यक्त करने वाले कांग्रसी बगले झांकते देखे जा सकते हैं।



जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं जरूरत इसमें हो रहे भ्रष्टाचार में कमी लाने की जिसकी कोई सीमा नहीं है

जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की हैं जिसके लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होगें। भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों या वर्गों में पकड़ नही रहती उन जगहों पर भले ही तव्वजो मिल जाये लेकिन पकड़ बनते ही संघीय प्ष्ठ भूमि के नेताओं से उन्हें विस्थापित कर दिया जाता हैं। ऐसा ही कुछ जिले में स्व. महेश शुक्ला के साथ प्रदेश में स्व. पोर्ते,नेताम और भूरिया के साथ हुआ। अब लगता हैं कांग्रेस से भाजपा मे आये जिलें के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह के खिलाफ भी घोषित एवं अघोषित भाजपाइयों ने मोर्चा खोल दिया हैं। अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल। पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था।

जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की-

जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिह ने जिला योजना समिति की बैठक में इस बात का विश्वास दिलाया हैं कि जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं आने दी जायेगी। जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के विकास में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से इतना पैसा आ रहा हैं कि खर्च करते नहीं बन रहा हैं और जो खर्च हो रहा हैं उसमें भी इतना अधिक भ्रष्टाचार हैं कि काम की गुणवत्ता तो जैसे कहीे गुम ही गई हैं। तारीफ की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार के जो मामले प्रमाणित भी हो रहें हैं उनके खिलाफ प्रदेश सरकार से कार्यवाही में इतनी अधिक हीला हवाली हो रही हैं कि आज तक ाकेई भी भ्रष्टाचारी दंड़ित नहीं हो पाये हैं। इसीलिये मन्त्री जी जरूरत हैं तो भ्रष्टाचार में मी लाने की पैसे की तो कोई कमी हैं ही नहीं। और भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होंगें क्योंकि हर भ्रष्टाचारी को सत्ता शिखर के किसी ना किसी गुबन्द का संरक्षण प्राप्त हैं।

दूसरे दलों से आये नेता भाजपा में खप नहीं पाते हैं-

भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों में पकड़ नहीं रहती उन क्षेत्रों में पकड़ बनाने के लिये भाजपा में भले ही दूसरे दलों से आये नेताओं को तव्वजो मिल जाये और उन्हें मन्त्री तक बना दिया जाये लेकिन जैसे ही वे क्षेत्र भाजपा मय हो जाते हैं तो ऐसे नेताओं को दर किनार कर संघीय पृष्ठ भूमि को बिठाल दिया जाता हैं। इसका उदाहरण तो सिवनी जिले में ही मौजूद हैं। कांग्रेस से भाजपा में गये स्व. पं. महेश शुक्ला को ना केवल भसापा ने जिले का अध्यक्ष बनाया ब्लकि सिवनी विधानसभा से 90 में टिकिट भी दिया जहां उन्होंने कांग्रेस के हरवंश सिंह को हराया और मन्त्री भी बने। दूसरी बार फिर वे 93 में सिवनी से लड़े और कांग्रेस के आशुतोष वर्मा को हराकर विधायक बने। सन 1977 की जनता आंधी में इस क्षेत्र से कांग्रेस जीती थी। लेकिन जैसे ही भाजपा को लगा कि अब इस क्षेत्र में पकड़बन गई तो संघी पृष्ठभूमि के नेरश दिवाकर को टिकिट देकर उन्हें दरकिनार कर दिया गया। ऐसा ही कुछ हाल कांग्रेस से भाजपा में गये प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब एवं आदिवासी नेता अशोक टेकाम और कमल मर्सकोले का हैं। वैसे तो अशोक टेकाम सहकारी बैंक के अध्यक्ष और कमल मर्सकोले आदिवासी क्षेत्र बनने के बाद बरघाट से पहले विधायक हैं। लेकिन वास्तविकता तो यही हैं कि इन दोनों आदिवासी नेताओं के खिलाफ पुराने भाजपायी ही खोले हुये हैं। ऐसा ही कुछ हाल जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह का भी हैं। वे भी कांग्रेस में सांसद थे। कांग्रेस से भाजपा में आकर वे विधायक बने और उन्हें मन्त्री इसलिये बनाया गया हैं क्योंकि महाकौशल क्षेत्र में आदिवासी दिग्गज फग्गन सिंह कुलस्ते के कारण भाजपा के गिरते ग्राफ को आदिवासियों में थामना था। लेकिन उनके पिछले दौरे से ऐसा लगता हैं कि जिले में घोषित और अघोषित भाजपाइयों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं।अब यह आगे किस सीमा तक जायेगार्षोर्षो इस बारे में अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे भी कांग्रेस से भाजपा में गये आदिवासी नेताओं का हश्र अच्छा नहीं रहा हें चाहे वे स्व. भंवर सिंह पोर्ते रहें हो या अरविन्द नेताम हों या दिलीप सिंह भूरिया हों उन्हें कभी सत्ता के शीर्ष तक नहीं पहुचने दिया गया हैं।

क्रिकेट की पिच के साथ ही राजनीति में दिखा फिरकी गेन्दबाजी का कमाल -

अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। हुआ यूं कि नगर पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष राजिक अकील के खिलाफ राजनैतिक प्रतिशाोध के कारण फर्जी मुकदमें दर्ज करने का आरोप लगाते हुये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ कांग्रेसी सड़को पर उतरे और सभी के खिलाफ जमकर नारे बाजी भी की थी। जिसमें महेश मालू,हीराआसवानी,आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू,स हित कई कांग्रसी शामिल थे। लेकिन चन्द दिनों बाद ही संभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता के फायनल मैंच के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि राजेश त्रिवेदी और अध्यक्षता राजिक अकील तथा समापन समारोह में मुख्य अतिथि कलेक्टर मनोहर दुबे और अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार थे। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्षके रूप में राजकुमार पप्पू खुराना के सभी अतिथियों का माला पहना कर स्वागत भी किया। धन्य हैं आमन्त्रण देने और स्वीकार करने वाले तथा धन्य हैं माला पहनाने और पहनने वाले। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल।

भव्य थिगड़ोत्सव के बाद भी थिगड़े नहीं लगवा पाये हरवंश -

पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। इनमें सिवनी,बण्डोल,छपारा आदि बायपास रोउ़ बन जाने के बाद खराब हो चुके पराने मार्गों में थिगड़े लगाकर याने पेच वर्क के बाद सरफेस रिनीवल की बात कही गई थी जिसमें आधा पैसा ठेकेदार को भी लगाना था। सभी जगह आयोजन हुये और कांग्रेस नेताओं ने हरवंश सिंह और कमलनाथ का इस थिगड़ोत्सव में आभार व्यक्त किया। शहर वालों ने भी सोचा कि चलो फोर लेन का मामला जब तक कोर्ट में लटका हैं तब तक चलने में सुविधा तो रहेगी। वास्तविकता यह हैं कि लखनादौन से नागपुर तक जाने वाले फोरलेन मार्ग में जब से कानूनी विवाद छिड़ा हैं तब से ही इन सड़कों का रख रखाव विभाग ने बन्द कर दिया हैं। अब हालात यह हैं कि कोर्ट के आदेश के बिना भी काम तो पूरा रुक गया हैं लेकिन रखरखाव भी ना होने से सड़क में गìों के बजाय वाहन चालक गìों में सड़क ढूंढ़ते ढूंढ़ते परेशान हो रहे हैं। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। फोर लेन रोड़ में कोर्ट में नये नये अड़ंगें डलने के बाद थिगड़े भी ना लगने से लोग अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैंऔर आभार व्यक्त करने वाले कांग्रसी बगले झांकते देखे जा सकते हैं।





Tuesday, November 2, 2010


दिवाली पर ऐसा कुछ करने का संकल्प ले जा ेराम राज की ओर ले जाये

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व हैं दीपावली। अंधकार से आशय उस अंधेरे से नहीं हैं जो कि बिजली का बटन दबाते ही टयूब लाइट की रोशनी से समाप्त हो जाता हैं और ना ही उजाले का यह आशय हैं जो कि टयूब लाइट से निकलने वाला प्रकाश होता हैं। अंधकार से आशयसामाजिक बुराइयों से हैं और प्रकाश का आशय हैं सदगुण।

आज से 63 साल पहले हमारा देश गुलामी के अंधेरे से मुक्त हो गया हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि इन सालों में अंधकार तो गहन होता गया हैं लेकिन प्रकाश की रोशनी कमजोर पड़ती जा रही हैं। आज सामाजिक बुराइयों को साधन बनाकर खुद को इतना अधिक प्रकाशवान कर लेते हैं कि वे समाज के आदर्श बन जाते हैं और उनका अनुसरण करने में लोगों को संकोच तक नहीं होता हैं। भ्रष्टाचार समाज में शिष्टाचार का रूप लेता जा रहा हैं। अत्याचार पर रोक लगाने का जिन कंधों पर दायित्व हैं वे परदे के पीछे उनके संरक्षक की भूमिका में दिखते हैं। अधिकार संपन्न लोग अपनी सनक में कुछ भी करते देखे जा सकते हैंं। इन अंधकारों में गुणव्यक्ति कहीं खो गयाहैं जिसे देश में कभी गुणों के कारण सम्मान मिला करता था।

रावण बुराइयों और अत्याचार का प्रतीक था जिसका सदगुणों के प्रतीक राम ने वध यिा था और ऋषि मुनियों तथा मानव मात्र को अत्याचार से छुटकारा दिलया था। यह विजय प्राप्त करके राम जब अयोध्या वापस आये थे तब अयोध्यावासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था जिसे हम आज भी दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। दीप जलाकर,फटाके फोड़ कर और मां लक्ष्मी की पूजन करने मात्र से दिवाली मनाने का उद्देश्य पूरा नहीं होता हैं। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि जिन आर्दशों और सदगुणों के माध्यम से राम ने रावण का वध किया था उन आदशोZं को अंगीकार करें और सामाजिक बुराइयों के रूप स्थापित होते जा रहे रावण राज के अन्त की दिशा में अपने कदम बढ़ायें। अन्यथा हर साल रावण का पुतला तो हम जलाते रहेंगें लेकिन आसुरी शक्तियां देश में फलती फूलती रहेंगी और राम राज का सपनी देखने वाले इस भारत वर्ष में राम ना जाने कहां गुम हो जायेंगें।

इस दिवाली पर हम ऐसा कुछ कर गुजरने का संकल्प ले जो कि हमें राम राज की ओर ले जाये यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं।

दिवाली पर ऐसा कुछ करने का संकल्प ले जा राम राज की ओर ले जाये

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व हैं दीपावली। अंधकार से आशय उस अंधेरे से नहीं हैं जो कि बिजली का बटन दबाते ही टयूब लाइट की रोशनी से समाप्त हो जाता हैं और ना ही उजाले का यह आशय हैं जो कि टयूब लाइट से निकलने वाला प्रकाश होता हैं। अंधकार से आशयसामाजिक बुराइयों से हैं और प्रकाश का आशय हैं सदगुण।

आज से 63 साल पहले हमारा देश गुलामी के अंधेरे से मुक्त हो गया हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि इन सालों में अंधकार तो गहन होता गया हैं लेकिन प्रकाश की रोशनी कमजोर पड़ती जा रही हैं। आज सामाजिक बुराइयों को साधन बनाकर खुद को इतना अधिक प्रकाशवान कर लेते हैं कि वे समाज के आदर्श बन जाते हैं और उनका अनुसरण करने में लोगों को संकोच तक नहीं होता हैं। भ्रष्टाचार समाज में शिष्टाचार का रूप लेता जा रहा हैं। अत्याचार पर रोक लगाने का जिन कंधों पर दायित्व हैं वे परदे के पीछे उनके संरक्षक की भूमिका में दिखते हैं। अधिकार संपन्न लोग अपनी सनक में कुछ भी करते देखे जा सकते हैंं। इन अंधकारों में गुणव्यक्ति कहीं खो गयाहैं जिसे देश में कभी गुणों के कारण सम्मान मिला करता था।

रावण बुराइयों और अत्याचार का प्रतीक था जिसका सदगुणों के प्रतीक राम ने वध यिा था और ऋषि मुनियों तथा मानव मात्र को अत्याचार से छुटकारा दिलया था। यह विजय प्राप्त करके राम जब अयोध्या वापस आये थे तब अयोध्यावासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था जिसे हम आज भी दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। दीप जलाकर,फटाके फोड़ कर और मां लक्ष्मी की पूजन करने मात्र से दिवाली मनाने का उद्देश्य पूरा नहीं होता हैं। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि जिन आर्दशों और सदगुणों के माध्यम से राम ने रावण का वध किया था उन आदशोZं को अंगीकार करें और सामाजिक बुराइयों के रूप स्थापित होते जा रहे रावण राज के अन्त की दिशा में अपने कदम बढ़ायें। अन्यथा हर साल रावण का पुतला तो हम जलाते रहेंगें लेकिन आसुरी शक्तियां देश में फलती फूलती रहेंगी और राम राज का सपनी देखने वाले इस भारत वर्ष में राम ना जाने कहां गुम हो जायेंगें।

इस दिवाली पर हम ऐसा कुछ कर गुजरने का संकल्प ले जो कि हमें राम राज की ओर ले जाये यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं।

Wednesday, October 13, 2010

जो जितना बड़ा हैं उस पर उतना बडा़ थू

ऐसा क्या हो गया जिस पर पूरे जिले में बवाल मच गया हैं। एक समारोह हुआ जैसे कई होते हैं। उस समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह थे। समारोह था केन्द्रीय भू तल परिवहन मन्त्रालय के अंर्तगत बनने वाली फोर लेन, जिसका काम दो साल से रुका पड़ा हैं,के जिला मुख्यालय सहित कुछ कस्बों के बाय पास बन जाने से जर्जर हो चुके पुराने मार्ग के सतही नवीनीकरण का। याने इन स्थानों के बड़े बड़े गïे़े भरना और सतह का नवीनीकरण करना।

कार्यक्रम क्या हुआ कि राजनीति के क्षेत्र में श्रेय लेने की ओछी राजनीति का खेल शुरू हो गया। समारोह के मुख्य अतिथि हरवंश सिंह ने श्रेय लिया कि यह काम कमलनाथ ने उनके पत्र के आधार पर किया हैं। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस श्रेय लेने की झूठी राजनीति कर रही हैं। जिला कार्यसमिति के सदस्य भोजराज मदने की उच्च न्यायालय में लगायी गई याचिका के कारण यह राशि केन्द्र ने मंजूर की हैं। फोर लेन बचाने के लिये गठित गैर राजनैतिक जनमंच ने कहा कि उनके सदस्य भोजराज मदने की याचिका के कारण यह राशि मिली हैं।

फोर लेन मामले के सुप्रीम कोर्ट में जाने और अटकने को लेकर कांग्रेस वैसे ही कटघरे में खड़ी हैं। कोर्ट में भू तल परिवहन मन्त्रालय और वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय एक राय नहीं दे पा रहे हैं। यदि जिले के कांग्रेस के नेतृत्व में इतना दम हैं तो इस मामले में भी पत्र लिखकर मामले को सुलझवादे तो सारी जनता उन्हें सर आंखों पर बैठाने के लिये तैयार बैठी हैं। यही कारण हैं कि राहुल गांधी के सिवनी दौरे में पूरे समय फोर लेन का मामला ही छाया रहा जिसे सुलझाने के लिये वे कुछ ही दिनों पहले जिले की जनता को आश्वस्त करके गये हैं। लेकिन ऐसे चौचलों से तो कांग्रेस की भद्द ही पिट रही हैं।

अब सवाल उठता हैं भाजपा का। श्रेय लेने में वो पीछे नहीं हैं। अब भोजराज मदने उसे अपने कार्यकत्ताZ दिखने लगे हैं जबकि कुछ ही महीनों पहले जिला भाजपा ने उन्हें अनुशासनहीनता के लिये नोटिस थमाया था। जिसके जवाब पर भाजपा अभी तक कोई निर्णय नहीं कर पायी हैं। भाजपा में गुटबन्दी ऐसी हावी हैं कि उसने अपने ही नपा अध्यक्ष का उल्लेख करना जरूरी नहीं समझा जो कि एक प्रतिनिधि मंड़ल के साथ कमलनाथ से दिल्ली में मिले थे और शहर के अन्दर के रोड़ आदि का प्राकल्लन सौंप कर आये थे और राशि स्वीकृत करने की मांग की थी। जबकि कमलनाथ ने अपने हरवंश सिंह को लिखे पत्र में यह उल्लेख किया हैं कि अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी उनसे यह मांग की थी। आज भी एन.एच.ए.आई. की फाइल में फोर लेन के काम रुकने को कोई आधार हैं तो वह हैं जिला कलेक्टर का वह पत्र जिसमें उन्होंने पेड़ कटाई की दी गई अनुमति निरस्त कर दी थी। भाजपा आपनी प्रदेश सरकार से आज तक यह पत्र निरस्त नहीं करा पायी हैं। उनका तर्क हैं कि यदि यह पत्र निरस्त भी हो जायेगा तो काम शुरू नहीं हो पायेगा क्योंकि फाइल केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मन्त्री के यहां अनुमति के लिये लंबित हैं। तो क्या यह मान लिया जाये कि नाम में राम जुड़े रहने के कारण भाजपा जयराम रमेश पर मेहरबान हैं।

श्रेय लेने की होड़ में जनमंच का भी आना सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक हैं। यह बात सही हैं कि श्री मदने जनमंच के ना केवल एक आधार स्तंभ हें वरन कोषाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने जबलपुर नागपुर रोड़ की जर्जर हालत को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दर्ज की हैं और मांग की हैं कि इसे सरकार तत्काल सुधारे। उनकी याचिका पर सुनवायी अभी जारी हैं। पक्षकारों को नोटिस भी कोर्ट ने जारी कर दिये हैं। ऐसे में फेसला आने पर जब कोर्ट यदि मांग किये गये पूरे मार्ग को सुधारने के निर्देश सरकार को देती तो कुछ कहना ठीक था। क्योंकि जन मंच तो फोर लेन बचाने के लिये नागरिकों द्वारा गठित एक गैर दलीय और गैर राजनैतिक मंच हैं जिसे श्रेय लेने की तो जरूरत ही नहीं हैं क्योंकि पूरी जनता यह जानती हें कि आज यदि फोर लेन बचने की संभावना जो पुर्नजीवित हुयी हैं वह जनमंच के कारण ही हुयी हैं।

जहां तक आवागमन में असुविधा का सवाल हैं तो यह बात जरूर हैं कि सिवनी से जबलपुर या नागपुर जाना दूभर हो गया हैं। यह पूरा का पूरा मार्ग पहले एन.एच. 7 कहलाता था। लेकिन इस रोड का लखनादौन से नागपुर तक का हिस्सा नार्थ साउथ कॉरीडोर में चला गया हैं जिसमे फोर लेन निर्माण का कार्य एन.एच.ए.आई. करा रही हैं तथा लखनादौन से जबलपुर तक का मार्ग नेशनल हाई वे तहत हैं। दोनों ही भूतल परिवहन मन्त्रालय के अंर्तगत आते हैं। कोई भी सूरमा यदि इस पूरी सड़क के गïे भराने के लिये ही कमलनाथ से पैसे ले आते तो नागरिक खुद ही सिर पर साफा पहना कर और एक बोथरी तलवार देकर उनका नागरिक अभिनन्दन कर देते। लेंकिन क्या कहा जाये इस श्रेय लेने की राजनीति का? जब लोगों ने हरवंश सिंह पर यह आरोप लगाना शुरू किया कि वे खुद इस छोटे से कार्य की शुरूआत कराने के लिये दवाब बना रहें हैं तो हरवंश सिंह ने खुद कमलनाथ का वह पत्र प्रेस कांफें्रस में बांट दिया जिसमे उन्होंने लिखा था कि हरवंश सिंह जाकर काम की शुरुआत करें।

इस काम के हो जाने से यदि जन सुविधा की बात देखी जाये तो सिवनी से नागपुर या जबलपुर जाने वाले किसी भी यात्री को गïे में गाड़ी कूदने से लगने वाले एक भी दचके में कमी नहीं आयेगी। क्योंकि जहां जहां ये काम होना हैं वहां के बाय पास मार्ग शुरू हो चुके हैं। जिनका उपयोग लोग कर रहें हैं। हां शहर और उन गांवाके कुछ लोगों को जरूर यह सुविधा मिलेगी कि वे अपने पुराने मार्ग पर भी कुछ दिनों तक सतही नवीनीकरण होने के कारण अच्छे से चल सकेंगें।

अब ऐसे छोटे छोटे कामों के लिये भी बड़ों बड़ों में भी ऐसी श्रेय लेने की राजनैतिक होड़ लग जाये तो इसे बस यही कह सकते हैं कि जो जितना बड़ा हैं उस पर उतना बडा़ थू।

Monday, October 11, 2010

प्रदेश महिला मोर्चे में रानी बघेल की नियुक्ति मचायेगी भाजपायी राजनीति में बवाल

प्रदेशाध्यक्ष नीता पटेरिया ने की कार्यकारिणी की घोषणा : मुख्यमन्त्री की पत्नी सहित कई दिग्गजों के परिजन शामिल

सिवनी। प्रदेश भाजपा की महिला मोर्चे की कार्यकारिणी की धोषणा जिले की भाजपायी राजनीति में बवाल खड़ा कर सकती हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से भाजपा में जाने वाली तथा बाद में भाजपा से निष्कासित नेत्री रानी बघेल के प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किये जाने से भाजपायी भौंचक हैं। जिस समिति में मुख्यमन्त्री की पत्नी साधना सिंह प्रदेश के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के परिजनों के साथ यह नियुक्ति उचित नहीं ठहरायी जा रही हैं। प्रदेश की अध्यक्ष नीता पटेरिया केे सिवनी जिले से होने कारण इस नियुक्ति से उनके विरोधियों के हाथ में एक अच्छा मसाला लग गया हैं। जिला भाजपा के अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी इस बात की पुष्टि की हैं कि रानी बघेल को अभी वापस नहीं लिया गया हैं।

प्रदेश भाजपा के महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया ने प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी हैं। इसमें जिले की वरिष्ठ महिला नेत्री सुशीला चौरसिया के साथ ही युवा महिला नेत्री रानी बघेल को भी शामिल किया गया हैं।इस नियुक्ति को जिले के भाजपाइयों ने आश्चर्य के साथ देखा हैं।

उल्लेखनीय हैं कि रानी बघेल ने कांग्रेस से पहला जनपद चुनाव जीता था। लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान केवलारी क्षेत्र के पलारी कस्बे में मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली थी। इसके जब भाजपा ने उन्हें जनपद चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी नहीं बनाया तो वे बागी होकर चुनाव लड़ ली थीं। इस कारण जिला भाजपा ने रानी बघेल को निष्कासित कर दिया था। उसके बाद भी उनकी नियुक्ति अनुशासित कहलाने वाली भाजपा के लिये विचारणीय प्रश्न हैं। भले ही प्रदेश में दूसरी पार्टियों से भाजपा में आकर काम और पदों के इन्तजार में बड़े बड़े नेता रास्ता देख रहें हों लेकिन सिवनी जिले में ऐसा नहीं हैं। ब्लकि यहान्तो निष्कासित नेताओं को भी पदों से नवाजा जा रहा हैं।

प्रदेश महिला मोर्चे की कार्यकारिणी में मुख्यमन्त्री शिवराजसिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के अलावा सहकारिता मन्त्री गौरी शंकर बिसेन की पत्नी रेखा बिसेन सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के परिजन शामिल हैं ऐसी परिस्थिति में एक निष्कासित भाजप नेत्री का उनके साथ बैठकों में बैठना कैसा लगेगार्षोर्षो यह एक विचारणीय प्रश्न हैं। महिला मोर्चे केी प्रदेश अध्यक्ष चूंकि जिले की विधायक नीता पटेरिया हें इसलिये इस नियुक्ति को भाजपायी गुटबन्दी से जोड़कर देखा जा रहा हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी इस बात की पुष्टि की हैं कि रानी बघेल को अभी तक भाजपा में वापस नहीं लिया गया हैं।



राहुल गांधी की मंड़ली के युवा नेताओं में अपनी पैठ बनाना तो दूर उन्हें पहचानते तक नहीं हैं हरवंश सिंह

राहुल का दौरा क्यों? सियासी हल्कों में चर्चा-बीते दिनों कांग्रेस के भावी कर्णधार राहुल गांधी का ना सिर्फ सिवनी का दौरा हुआ वरन काफी प्रयासों के बाद भी उनका रात्रि विश्राम का कार्यक्रम भी नहीं बदल पाया। जिले के आला नेतृत्व के लिये यह दौरा काफी चौंकाने वाला था। पहले तो प्रदेश में सिवनी जिले का चयन और फिर उसमें लखनादौन में कार्यक्रम और जिला मुख्यालय में रात्रि विश्राम क्यों हुआर्षोर्षो इसे लेकर जिले के कांग्रेंसी हल्कों सहित विपक्ष में चर्चायें जारी हैं। सियासी हल्कों में जारी चर्चाओं को यदि सही माना जाये तो इस तथ्य पर विश्वास करना पड़ेगा कि पिछले लंबे असेZ से कभी कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले जिले में पिछले 15.20 सालों से कांग्रेस की दुर्गति क्यों हो रही है? वे यह जानना चाहते थे। लंबे समय से इस बाबत शिकायतें प्रप्त हो रहीं थीं। प्रदेश के इस दौरे ज्यादातर वे ही जिले शामिल किये गये थे जहां से कांग्रेस लंबे समय से हार रही हैं। गांधी परिवार के लिये सिवनी जिले का एक विशेष महत्व हैं। इन्दिरा गांधी 1977 एवं 1979 में सिवनी आयीं थीं। 1980 की लोकसभा और विधानसभा की पाचों सीटें कांग्रेस जीती थी। फिर देश के प्रधानमन्त्री बनने के बाद 1985 के विस चुनाव में जब स्व. राजीव जी ने जब कांग्रेस के वोट बैंक आदिवासी वर्ग पर पकड़ बनाये रखने के प्रयास किये थे तब भी उन्होंने लखनादौन को ही चुना था। इस चुनाव में भी कांग्रेस ने जिले की पाचों सीटें जीती थीं। इसके बाद दिसम्बर 2002 में श्रीमती सोनया गांधी लखनादौन आयीं थीं लेकिन 2003 के विस चुनाव में ना केवल जिले की दोनों आदिवासी सीटें, लखनादौन और घंसौर कांग्रेस हार गई थी वरन दो सामान्य सीटें बरघाट एवं सिवनी भी हार गये थे। जिले में सिर्फ हरवंश सिंह की केवलारी सीट भर जीते थे। अगले 2008 के चुनाव में भी हरवंश सिंह चुनाव जीते थे लेकिन 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केवलारी से हार गई थी। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि राहुल गांधी ने भी लखनादौन का चयन इसलिये किया था क्योंकि 77 की जनता लहर और 90 की राम लहर में भी कांग्रेस का अजेय गढ़ रहने वाली कांग्रेस पिछले दो चुनावों से क्यों हार रही हैं र्षोर्षो राहुल गांधी, गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं जिन्होंने कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिये जिले का दौरा किया हैं।

क्या राहुल की मण्डली के नेताओं को पहचानते भी नहीं हैं हरवंश?जिले के एकमात्र कांग्रेस विधायक और विस उपध्यक्ष हरवंश सिंह राहुल गांधी के कार्यक्रम में कटे कटे से रहे। उन्हें वो तव्वजो नहीं मिली जिसके वे आदी हो चुके थे। राहुल गांधी की तो छोड़ो उनकी अन्तरंग मंड़ली में भी हरवंश सिंह की धुसपैठ तो दूर उन्हें वे पहचानते तक नहीं हैं। कोई यदि इस बात को बताता तो शायद ही जिले का कोई कांग्रेसी इस बात पर विश्वास करता। लेकिन लखनादौन हेलीपेड पर इसे कई लोगों ने साक्षात देखा हैं। एक प्रत्यक्षदशीZ के अनुसार हेलीकाफ्टर से उतर कर जब राहुल गांधी पब्लिक में मिलने लगे थे तब कुर्ते पाजामा पहने राहुल के साथ आये एक युवा नेता एक कोने में जब गुफ्तगू कर रहे थे तो हरवंश सिंह भी तपाक से उनकी ओर लपके और उन्हें कनिष्क जी कनिष्क जी कहकर बुलाने लगे। तीन चार बुलाने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्हें यह बताया गया कि ये कनिष्क जी ब्लकि जितेन्द्र सिंह जी हैं जो कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव हैं और राहुल जी से संबन्द्ध हैं। इतना ही नहीं वरन जितेन्द्र सिंह जी राजस्थान से निर्वाचित लोक सभा सदस्य भी हैं जिन्होंने हरवंश सिंह की इस हरकत के बाद उनसे बात करना भी उचित नहीं समझा। गांधी परिवार में अपनी पैठ का रुतबा बताकर अपने विरोधियों को चमकाते रहने वाले हरवंश की यह गत देखकर कांग्रेसियों के अलावा युवक इंकाइयों में तो चटखारे लेकर तरह तरह की चर्चायें होते देखीं जा सकतीं हैं।

कांग्रेसियों के ही षड़यन्त्र का शिकार होते रहें हैं महाकौशल के आदिवासी इंका नेता -लखनादौन के वन विद्यालय में राहुल गांधी विशेष तौर पर 18 से 35 आयु वर्ग के आदिवासी युवकों से मिलना चाहते थे। वे यह भी जानना चाहते थे कि आदिवासी वर्ग क्यों कांग्रेस से कट कर गौंड़वाना गणतन्त्र पार्टी की ओर आकषिZत हुआ। हरवंश सिंह उनके परिजन यह बात भली भान्ति समझते थे कि कहीं आदिवासी युवकों ने उनके द्वारा आदिवासी नेताओं का उपयोग कर कैसे दर किनार किया जाता थार्षोर्षो इसकी पोल ना खोल दें। वरन इस सूची में स्व. वसन्तराव उइके से लेकर मेहतलाल बरकड़े तक के नाम शामिल हैं। जिले की कांग्रेसी राजनीति में हरवंश सिंह का कोई विकल्प ना होने के कारण शोषण होने के बावजूद भी इनकी यह मजबूरी हैं कि वे इनके साथ ही बनें रहें। फिर भी कोई पोल ना खोल दे इस डर से राहुल गांधी के आनें से पहले तक रजनीश सिंह इसी पण्डाल में बने रहे तथा युवकों को समझाते रहें कि खिलाफ में कुछ नहीं बोलना हैं। इसी बीच पंड़ाल में किसी युवक ने जोर से चिल्ला कर कहा कि रजनीश मरावी को तो बाहर करो। तब कहीं जाकर कार्यक्रम के युवा इंका के प्रभारी ने उन्हें पंड़ाल से बाहर करवाया। महाकौशल अंचल के कई वरिष्ठ आदिवासी कांग्रेसी नेता हरवंश सिंह से प्रताड़ित होकर चुनाव हार चुके हैं। इनमें श्रीमती उर्मिला सिंह,जो कि आज हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल हैं, प्रेम नारायण ठाकुर,जो आज छिन्दवाड़ा जिले में भाजपा से विधायक हैं,बालाघाट जिले के स्व. गनपत सिंह उइके, मंड़ला जिले के स्व. छोटेलाल उइके, दयाल सिंह तुमराची आदि कई नेता शामिल हैंजो कि इनके षड़यन्त्र का शिकार हाकर काल के गाल में समा गयें हैं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं सन 1996 के लोक सभा चुनाव में सिवनी लोकसयभा क्षेत्र से केन्द्रीय मन्त्री कु. विमला वर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले आदिवासी नेता शोभाराम भलावी ने 45 हजार वोट लेकर कांग्रेस को हरवा दिया था। इस चुनाव में हरवंश सिंह पर भलावी को मदद करने के आरोप लगे थे जो बाद मे भलावी को पुरुस्कृत कराने से प्रमाणित भी हो गये थे। पुरुस्कृत कराने का कारण यह था कि भलावी ने इस चुनाव में हरवंश सिंह के विधानसभा क्षेत्र केवलारी से 12 हजार वोट ले लिये थे। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि इसी चुनावके बाद यह आभास हुआ कि आदिवासी यदि लामबन्द हो जायें तो कांग्रेस को हराया जा सकता हैं। इसी आधार पर गौंड़वाना गणतन्त्र पार्टी ने समूचे महाकौशल क्षेत्र में कांग्रेस को भारी चुनौती दी और कांग्रेसी क्षत्रपों ने ही अपनी ही पार्टी के आदिवासी नेताओं को निपटाने के लिये उन्हें रसद भी उपलब्ध करायी इसीलिये 2003 के विस चुनाव में जबलपुर संभाग में गौगपा तीन सीटें जीत गईं थी और कई सीटों पर कांग्रेस की हार का कारण बन गई थी। अब जब राहुल गांधी इसी बात का पतालगाने आ रहें तो भला रसद पहुचाने वाले इंका नेता तो हलाकान होंगें ही।



Thursday, October 7, 2010

कुंभलकर से लेकर राहुल तक ने नज़र अन्दाज किया हरवंश को?


सिवनी। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी का दौरा हरवंश सिंह की गांधी परिवार में पैठ के बारे में बहुत कुछ कह गया हैं। राष्ट्रीय युवा इंका द्वारा लखनादौन कार्यक्रम के लिये नियुक्त प्रभारी नितिन कुंभलकर ने बुलाने पर बैठक में आने से मना कर दिया। राहुल के लखनादौन कार्यक्रम के दौरान हरवंश सिंह को रेस्ट हाउस में समय काटना पड़ा। वन विद्यालय में छिपा कर रखे गये सेवादल के कार्यकत्ताZओं को रजनीश के सामने बेइज्जत करके निकाला गया और वे बेचारे राहुल को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दे पाये। कई सालों बाद सिर्कट हाउस के बाहर के बन्द गेट पर हरवंश को खड़ा रहना पड़ गया। जिला इंका प्रवक्ता हरवंश सिंह की भाट गिरी छोड़कर कांग्रेस की सेवा करें तो राहुल गांधी के प्रवास के बाद कांग्रेस मजबूत हो सकती हैं वरना नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात सरीखा ही निकलेगा।

कई बार अपमानित हुये हरवंश

जिले के कांग्रेस के महाबली माने जाने वाले नेता हरवंश सिंह ने यह मायाजाल फैला रखा था कि गांधी परिवार में उनकी किचिन तक पहुंच हैं। इसके प्रमाण में अक्सर वे इस बात की दुहाई देते थे कि जिले के कई नेताओं ने प्रमाण सहित उनकी शिकायतें की फिर भी इसी कारण कोई भी उनका बाल तक बांका नहीं कर पाया। जिले में कांग्रेस लगातार रसातल में जाती रही लेकिन किसी ने भी महाबली से कुछ नहीं पूछा।लेकिन राहुल गांधी के जिले के इस दौरे ने इस माया जाल को तहस नहस कर दिया हैं। राहुल के दो दिवसीय प्रवास में कई ऐसे अवसर आये जब उन्हें अपमानित होना पड़ा वरना अभी तक तो वे ही अपने विरोधी कांग्रेस नेताओं को अपमानित करते रहें हैं।

बुलाने पर भी नहीं आये कुंभलकर

चैन्नई से लौटते ही हरवंश सिंह ने यह दिखाने के प्रयास प्रारंभ कर दिये थे कि राहुल गांधी के सारे कार्यक्रम का भार उनके ही कंधों पर हैं। लेकिन राहुल का यह दौरा युवक कांग्रेस के चुनाव को लेकर था जिसे वे अपने ही तरीके से आयोजित कराते हैं। युवा इंका ने नितिन कुंभलकर को लखनादौन कार्यक्रम का प्रभारी बनाया था। जिस दिन जिले के कांग्रेसियो की बैठक हरवंश ने लखनादौन में रखी उसी दिन से ग्रहण लगना शुरू हो गया था। उनके बुलाने और राजा बघेल के अनुरोध के बाद भी श्री कुंभलकर ने बैठक में आने से इंकार कर दिया और यह खबर भेज दी कि वे उन्हें प्राप्त निर्देशों के अनुसार ही कार्यक्रम करेंगें।

राहुल के साथ कार्यक्रम में जा नहीं पाये हरवंश

लखनादौन हेलीपेड पर काफी समय इन्तजार कर बमुश्किल एस.पी.जी. द्वारा प्रवेश दिये जाने के बाद हरवंश सिंह फिर यह हिम्मत नहीं जुटा पाये कि वन विद्यालय में हो रहे राहुल गांधी के कार्यक्रम में प्रवेश पाने की कोशिश करें। हेलीपेड से लौट कर वे सीधे रेस्ट हाउस पहुचें और वहीं उन्होंने लगभग दो घंटे का समय का काटा। जितनी देर राहुल गांधी युवकों से मिलते रहे उतनी देर 35 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी नेता को प्रवेश नहीं दिया गया। इस दौरान उनके चेहरे पर दिख रहा खिंचाव उनकी दास्तान खुद ही कह रहा था।

अनधिकृत प्रवेश :बेइज्जती से निकाले गये सेवादल कार्यकत्ताZ

पिछले दो दिनों से हरवंश सिंह इस बात के प्रयास में लगे थे कि सेवादल प्रमुख उनके पुत्र रजनीश सिंह के नेतृत्व में राहुल गांधी को सेवादल से गार्ड आफ आनर दिलाया जाये जैसा कि मन्त्री रहते हुये उन्होंने सिवनी और मंड़ला में सोनिया गांधी को दिलवाया था। उसी की एलबम आाज तक नेताओं को दिखायी जाती हैं। वैसे 2003 के विस चुनाव के पहले लगे सेवादल के शिवरों के बाद रजनीश के नेतृत्व कांग्रेस सेवा दल ने कांग्रेस की कोई सेवा नहीं की हैं सिवाय गार्ड आफ देने के। बताया जाता हैं कि हरवंश सिंह ने स्थानीय प्रशासनिक अमले से भी इस बाबद मदद की गुहार लगायी थी लेकिन उन्होंने भी एस.पी.जी. की बात कह कर मामले को टाल दिया था। फिर भी इस बात की दाद देनी पड़ेगी कि सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुये तीस चालीस सेवादल के कार्यकत्ताZओं को यूनीफार्म में एक गोदाम में छिपा कर रख दिया गया था। जैसे ही एस.पी.जी. को इस बात का पता लगा कि कुछ अनधिकृत लोग परिसर में हैं तो उन्हें कालर पकड़ कर बाहर निकाला गया और रजनीश सिंह को उन्हें बाहर छोड़कर आने की नसीहत बहुत सख्ती के साथ दी गई। इससे मायूस होकर दूसरे दिन राहुल को भी वही गार्ड आफ आनर देने वाले एलबम को दिखाने का प्रयास किया गया जिसमें उन्होंने कोई रुचि नही दिखायी।

सिर्कट हाउस के गेट के बाहर खड़े रहे हरवंश

कई सालों से सिर्कट हाउस में गार्ड आफ आनर लेने के आदी हो चुके हरवंश सिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उन्हें सिर्कट हाउस के बाहर वाले बन्द गेट पर खड़े रहकर इन्तजार करना पड़ेगा। गांधी परिवार के राजनैतिक उत्तराधिकारी राहुल गांधी के कार्यक्रम में उन्हें यह दिन भी देखना पड़ गया। दूसरे दिन सुबह जब हरवंशसिंह के आग्रह पर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी की पहल पर जिला इंका का प्रतिनिधि मंड़ल राहुल से मिलने वाला था तब श्री सिंह को बाहर इन्तजार करना पड़ा। कांग्रेस के इस पन्द्रह सदस्यीय डेलीगेशन में वैसे तो पप्पू खुराना,,प्रसन्न मालू,संजय भारद्वाज और जकी अनवर को शामिल कर लिया गया था लेकिन हरंवश सिंह ने इस डेलीगेशन में वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा का नाम नहीं जुड़ने दिया। जिले की प्रमुख समस्या फोर लेन के सम्बंध में हरवंश सिंह ने राहुल गांधी को विस्तार से जानकारी दी कि क्यों यह काम अटका पड़ा हैं।

भाटगिरी के बजाय कांग्रेस हित देखें प्रवक्ता

इतना सब कुछ सबके द्वारा देखने के बाद भी जिला इंका प्रवक्ता ओमप्रकाश तिवारी द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में हरवंश सिंह को महिमा मंड़ित किये जाने की तो दाद ही देना पड़ेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने इस कार्यक्रम के प्रभारी के रूप में जबलपुर के इंका नेता आलोक मिश्रा को भेजा था जो कि तीन दिन तक सिवनी में रहे। पचौरी के निर्देश पर उन्होंने सभी में समन्वय बनाने का प्रयास किया। इसके बाद भी सब कुछ के लिये हरवंश सिंह को श्रेय देना और समन्वय बनाने के प्रदेश अध्यक्ष पचौरी और आलोक मिश्रा के प्रयासों का उल्लेख तक ना करना भाटगिरी नहीं तो भला और क्या कही जा सकती हैं? बेंहतर होगा कि प्रवक्ता यह सब करने के बजाय कांग्रेस के गुणगान गायें तो राहुल के दौरे का कुछ लाभ भी जिले में मिल सकता हैं वरना नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही निकलेगा।

दैनिक यशोन्नति सिवनी

8 अक्टूबर 2010

Wednesday, September 29, 2010

अमन चैन के लिये

अपराधियों में धर्म या मजहब तलाशना बन्द करें

अपराध अपराध होता हैं। गुनाह गुनाह होता हैं। अपराधी अपराधी होता हैं। गुनहगार गुनहगार होता हैं।दंगाई दंगाई होता हैं। इनका कोई धर्म या मजहब नहीं होता। इनके ना तो परवरदिगार होते हैं और ना ही भगवान होते हैं। ये ना तो पूजा में विश्वास करते हैं और ना ही इबादत में। इनके ना तो कोई पूजा स्थल होते हैं और ना ही इबादतगाह होते हैं। समाज और राजनेता इनमें यदि धर्म और मजहब तलाशना बन्द कर दे और अपराधियों को सिर्फ अपराधी, गुनहगारों को सिर्फ गुनहगार तथा दंगाइयों को सिर्फ दंगाई मानकर चले तो ज्यादातर फसादों का तो वैसे ही खात्मा हो जायेगा।

आज समस्या इसी बात की हैं कि इन तत्वों में समाज और राजनेता धर्म और मजहब को तलाशने लगे हैं। राजनेता अपनी सुविधा और लाभ के लिये ऐसे तत्वों को संरक्षण देकर बवाल खड़ा करने में भी कोई संकोच नहीं करते हैं। यही मूल कारण है कि जब देखो तब सांप्रदायिक दंगों की आग में कई शहर कई बार धधक जाते हैं और आग जब लगती हैं तो वह यह नहीं देखती कौन आग लगाने वाले धर्म या मजहब का हैं और कौन दूसरे मजहब या धर्म का हैंर्षोर्षो वह अपनी चपेट में सबको समेट लेती हैं और सब कुछ जलाकर खाक कर देती हैं।

स्वामी विवेकानन्द जी ने यह कहा है कि इस देश में कोई भी बड़ा सामाजिक,आर्थिक या राजनैतिक परिवर्तन धर्म के माध्यम से ही सम्भव हैं। इसे मूल मन्त्र मानकर कई राजनेताओं ने धर्म और राजनीति का घालमेल कर दिया हैं। राजनीति यदि धर्म के नियन्त्रण में रहे तो ठीक हैं लेकिन होने यह लगा हें कि राजनेता धर्मावलंबी लोगों की घार्मिक भावनायें भड़का कर अपनी राजनीति चमकाने में लग जातेे हैं। फिर वे ये भी नहीं देखते कि जिस जगह मन्दिर या मिस्जद बनाने की बात कर रहें हैं वह जगह ही मानव मात्र के खून से रंग गई हैं। आदमी के खून से लाल हुयी ऐसी जमीन पर बनी इमारत में ना तो भगवान का वास होगा और ना ही परवरदिगार का। और भला होगा भी कैसे र्षोर्षो जिन्हें पूजा या इबादत करना हैं जब उनका ही खून उसे बनाने के लिये बहा हों तो भला भगवान या खुदा उसे कैसे माफ कर सकते हैं र्षोर्षो

Þईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवानß आजादी के छ: दशक बाद भी बापू की लाइनों की देश को जरूरत हैं। आज आवश्यक्ता इस बात की हैं कि धर्म या मजहब का नियन्त्रण धर्माचार्यों और मौलवियों के हाथों में रहे और प्रजातन्त्र में शासन चलाने का काम राजनेताओं के नियन्त्रण में रहे। इन दोनों में घालमेल ना हो। साथ यह भी आवश्यक हैं कि अपराधियों और गुनहगारों में धर्म और मजहब को तलाशने तथा उस आधार पर संरक्षण देने का काम भी बन्द हो। प्रशासनिक अमला भी इन आपराधिक तत्वों के नियन्त्रण में राजनैतिक हस्तक्षेप को बरदाश्त ना करें और कड़ाई से कार्यवाही करें। ऐसा सब कुछ हो जाये तो आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सदभाव देश में हमेशा बना रहेगा।

सम सामयिक टिप्पणी हस्ताक्षर

विदज ातनजकमअ10

Monday, September 27, 2010

संगठन चुनाव के नाम पर जिले में मात्र हरवंश सिंह के केवलारी क्षेत्र में मजबूत कांग्रेस को ही और मजबूत करने का काम किया गया है

प्रभात झॉ के कार्यक्रम में केवलारी का जुड़ना एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि वैसे तो डॉ. बिसेन ने अच्छा चुनाव लड़ा था लेंकिन हमारी ही कुछ कसर रह गई। लेकिन इस बार आपको कोई चूक नहीं करना हैं। वैसे शायद प्रभात झॉ जी इस तथ्य वाकिफ ही होंगें कि इंका भाजपा की नूरा कुश्ती में ही केवलारी सीट भाजपा हारती आ रही हैं बदले में उसे शेष सभी सीटों पर जीत दिलायी जाती हैं। कांग्रेस के संगठन चुनावों के नाटक का समापन हो गया हैं। विगत दिनों कांग्रेस के जिला निर्वाचन अधिकारी वालुजकर सिवनी दोबारा आये थे। जिला प्रतिनिधियों की सूची गोपनीय रखी गई थी। इसको मीडिया को भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। बैठक में पहुंचे वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और संजय भारद्वाज आदि ने इस बात पर आपत्ति उठायी कि जिला प्रतिनिधियों की सूची को गोपनीय क्यों रखा गयार्षोर्षो चुनाव के नाम पर औपचारिकता करके किसी नेता की मनमानी थोपी जा रही हैं। अयोध्या विवाद पर आने वाले फैसले को लेकर जिले में अमन चैन बनाये रखने के लिये ऐतिहात के तौर पर कई कार्य किये गये। जिले के प्रशासनिक अमले के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। विगत 23 सितम्बर को प्रशासन की पहल पर जिले के सभी घर्म गुरुओं,राजनैतिक दलों के नेता,सामाजिक कार्यकत्ताZ और प्रशानिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से शान्ति मार्च का आयोजन किया।



प्रभात झा के दौरे में केवलारी का रहना चर्चित- लंबे समय बाद जिले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झॉ का नगरागमन हुआ। उन्होंने जिले के सभी मंड़लों के कार्यकत्ताZओं से तीन सम्मेलनों में मुलाकात की और उन्हें मार्गदर्शन दिया। सिवनी,केवलारी और लखनादौन में उनकें सम्मेलन हुये। प्रभात झॉ के कार्यक्रम में केवलारी का जुड़ना एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। उल्लेखनीय हैं कि केवलारी क्षेत्र कांग्रेस के हरवंश सिंह विधायक हैं जो इन दिनो विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर आसीन हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि विस उपाध्यक्ष रहते हुये भी जब हरवंश सिंह ने कांग्रेस के निर्णय के साथ सदन के बहिष्कार का निर्णय लिया था और यह बयान दिया था कि पार्टी मेरे लिये पहले हैं और उपाध्यक्ष पद बाद मे हैं। तब सदन के अन्दर और बाहर भारी बवाल मचा था। नये प्रदेशाध्यक्ष बन प्रभात झॉ ने पूर्व मुख्यमन्त्री कैलाश जोशी और कप्तान सिंह के साथ राज्यपाल से भेंट कर श्री हरवंश सिंह के संवैधानिक पद पर रहते हुये सदन के बहिष्कार को आपत्तिजनक बताते हुये आवयक कार्यवाही करने की मांग की थी। लेकिन भाजपा की गुटबाजी और इंका भाजपा की नूरा कुश्ती के चलते हरवंश सिंह के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुयी थी। इसलिये प्रभात झॉ के जिले के दौरे में केवलारी के सम्मलिम होने को लेकर तरह तरह की अटकलें लगायी जा रहीं हैं। उनके इस प्रवास में भाजपा के केवलारी से रहे पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन भी साथ थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि वैसे तो डॉ. बिसेन ने अच्छा चुनाव लड़ा था लेंकिन हमारी ही कुछ कसर रह गई। लेकिन इस बार आपको कोई चूक नहीं करना हैं और पिछले चार बार बदला लेकर इस बार यह सीट जीतना ही हैं। वैसे शायद प्रभात झॉ जी इस तथ्य वाकिफ ही होंगें कि इंका भाजपा की नूरा कुश्ती में ही केवलारी सीट भाजपा हारती आ रही हैं बदले में उसे शेष सभी सीटों पर जीत दिलायी जाती हैं। भाजपा यदि सन 1993 के पहले चुनाव से लेकर आज तक की अपनी हार की समीक्षा करे तो सारे तथ्य वैसे ही उजागर हो जायेंगें लेकिन सब कुछ ओपन सीक्रेट की तरह साफ हैं फिर भी आज तक अनुशासन के जानी जाने वाली भाजपा ने कभी भी किसी के भी खिलाफ भीतरघात के आरोप में कोई कार्यवाही करना उचित नहीं समझा।

केवलारी क्षेत्र को केन्द्र बना कर हुये इंका के चुनाव- कांग्रेस के संगठन चुनावों के नाटक का समापन हो गया हैं। विगत दिनों कांग्रेस के जिला निर्वाचन अधिकारी वालुजकर सिवनी दोबारा आये थे। उन्होंने मालू भवन में एक बैठक में भाग लिया। इस बैठक में प्रवेश नियन्त्रित किया गया था। केवल पासधारी लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। जिला प्रतिनिधियों की सूची गोपनीय रखी गई थी। इसको मीडिया को भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। बैठक में पहुंचे वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और संजय भारद्वाज आदि ने इस बात पर आपत्ति उठायी कि जिला प्रतिनिधियों की सूची को गोपनीय क्यों रखा गयार्षोर्षो चुनाव के नाम पर औपचारिकता करके किसी नेता की मनमानी थोपी जा रही हैं। जिले के एकमात्र विधायक हरवंश सिंह के विश्वास पात्र हीरा आसवानी के नाम पर आम सहमति की बात की गई। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि व्यवहार कुशल व्यवसायी हीरा आसवानी की केवलारी विधानसभा क्षेत्र में शुगर मिल रही हैं एवं पिछले तीन चुनावों से वे पलारी के आस पास के पोलिंग बूथों का प्रभार कुशलता के साथ सम्भालते रहें हैं। जिले में कांग्रेस संगठन के चुनाव ही मात्र केवलारी विधानसभा क्षेत्र जीतने के ही हिसाब से कराये गये हैं जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं जहां से वे चार बार से चुनाव जीत रहें हैं। पिछले पांच चुनावों से सिवनी और बरघाट एवं दो बार से लखनादौन क्षेत्र में कांग्रेस हारती आ रही हैं। लेकिन इन क्षेत्रों को जीत कर कांग्रेस को मजबूत करने के कोई प्रयास संगठन चुनावों में नहीं किये गये है।सिवनी,बरघाट और लखनादौन क्षेत्रसे भी जिन नेताओं का चयन किया गया हें उनमें से अधिकांश हरवंश सिंह के पसन्दीदा उम्मीदवार ना आने पर अपने क्षेत्र में भीतरघात और केवलारी में हरवंश सिंह का चुनावी काम करते रहे हैं। अधिकांश प्रदेश प्रतिनिधियों और जिला प्रतिनिधियों का चयन इसी आधार पर किया गया हैं। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में सम्पूर्ण केवलारी ब्लाक के अलावा सिवनी ग्रामीण,छपारा एवं धनोरा ब्लाक के कुछ हिस्से आते है।इन तीनों ब्लाकों के प्रदेश प्रतिनिधि केवलारी क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। इसी तरह इन तीन ब्लाकों के 18 जिला प्रतिनिधियों में से 13 जिला प्रतिनिधि केवलारी क्षेत्र के निवासी हैं जबकि इन तीन ब्लाकों में सिवनी एवं लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़े हिस्से शामिल हैं। इस तरह यह तो कहा ही जा सकता हैं कि इन संगठन चुनावों से जिले में कांग्रेस मजबूत नहीं होगी और सोनिया और राहुल की मंशा पर पानी फेर दिया गया है ैंऔर संगठन चुनाव के नाम पर जिले में मात्र केवलारी में मजबूत कांग्रेस को ही और मजबूत करने का काम किया गया हैं।।

अयोध्या विवाद:शान्ति मार्च का हुआ असर- अयोध्या विवाद पर आने वाले फैसले को लेकर जिले में अमन चैन बनाये रखने के लिये ऐतिहात के तौर पर कई कार्य किये गये। जिले के प्रशासनिक अमले के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। विगत 23 सितम्बर को प्रशासन की पहल पर जिले के सभी घर्म गुरुओं,राजनैतिक दलों के नेता,सामाजिक कार्यकत्ताZ और प्रशानिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से शान्ति मार्च का आयोजन किया जो कि शहर के भेरौगंज इलाके से शुरू होकर विभिन्न इलाकों का भ्रमण करते हुये स्थानीय थाने के सामने वाले उर्दू स्कूल में समाप्त हुआ। शान्ति मार्च के समापन के अवसर पर उपस्थित धर्म गुरुओं,प्रमुख नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने शान्ति और अमन चैन बनाये रखने की अपील की थी। जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक ने जिले ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर शान्ति बनाये रखने की अपील की थी। सभी कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को जिला पुलिस अधीक्षक शपथ भी दिलाते थे। इन सब प्रयासों से जिले में एक वातावरण बन गया था। सभी आश्वस्त दिख रहें थे कि बीते कुछ सालों में जिले के अमन चैन और शान्ति के स्विर्णम इतिहास पर लगे बदनुमा दागों को धो लेंगें। लेकिन 24 सितम्बर को होने वाला फैसला टल गया। अब 28 सित. को सुप्रीम कोर्ट में पेशी रहेगी जिसके बाद ही कुछ तय हो पायेगा। वैसे यही उम्मीद की जा रही है कि जिले में अमन चैन बना रहेगा।

Monday, September 20, 2010

अमन चैन के लिये

अपराधियों में धर्म या मजहब तलाशना बन्द करें

अपराध अपराध होता हैं। गुनाह गुनाह होता हैं। अपराधी अपराधी होता हैं। गुनहगार गुनहगार होता हैं।दंगाई दंगाई होता हैं। इनका कोई धर्म या मजहब नहीं होता। इनके ना तो परवरदिगार होते हैं और ना ही भगवान होते हैं। ये ना तो पूजा में विश्वास करते हैं और ना ही इबादत में। इनके ना तो कोई पूजा स्थल होते हैं और ना ही इबादतगाह होते हैं। समाज और राजनेता इनमें यदि धर्म और मजहब तलाशना बन्द कर दे और अपराधियों को सिर्फ अपराधी, गुनहगारों को सिर्फ गुनहगार तथा दंगाइयों को सिर्फ दंगाई मानकर चले तो ज्यादातर फसादों का तो वैसे ही खात्मा हो जायेगा।

आज समस्या इसी बात की हैं कि इन तत्वों में समाज और राजनेता धर्म और मजहब को तलाशने लगे हैं। राजनेता अपनी सुविधा और लाभ के लिये ऐसे तत्वों को संरक्षण देकर बवाल खड़ा करने में भी कोई संकोच नहीं करते हैं। यही मूल कारण है कि जब देखो तब सांप्रदायिक दंगों की आग में कई शहर कई बार धधक जाते हैं और आग जब लगती हैं तो वह यह नहीं देखती कौन आग लगाने वाले धर्म या मजहब का हैं और कौन दूसरे मजहब या धर्म का हैंर्षोर्षो वह अपनी चपेट में सबको समेट लेती हैं और सब कुछ जलाकर खाक कर देती हैं।

स्वामी विवेकानन्द जी ने यह कहा है कि इस देश में कोई भी बड़ा सामाजिक,आर्थिक या राजनैतिक परिवर्तन धर्म के माध्यम से ही सम्भव हैं। इसे मूल मन्त्र मानकर कई राजनेताओं ने धर्म और राजनीति का घालमेल कर दिया हैं। राजनीति यदि धर्म के नियन्त्रण में रहे तो ठीक हैं लेकिन होने यह लगा हें कि राजनेता धर्मावलंबी लोगों की घार्मिक भावनायें भड़का कर अपनी राजनीति चमकाने में लग जातेे हैं। फिर वे ये भी नहीं देखते कि जिस जगह मन्दिर या मिस्जद बनाने की बात कर रहें हैं वह जगह ही मानव मात्र के खून से रंग गई हैं। आदमी के खून से लाल हुयी ऐसी जमीन पर बनी इमारत में ना तो भगवान का वास होगा और ना ही परवरदिगार का। और भला होगा भी कैसे र्षोर्षो जिन्हें पूजा या इबादत करना हैं जब उनका ही खून उसे बनाने के लिये बहा हों तो भला भगवान या खुदा उसे कैसे माफ कर सकते हैं र्षोर्षो

Þईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवानß आजादी के छ: दशक बाद भी बापू की लाइनों की देश को जरूरत हैं। आज आवश्यक्ता इस बात की हैं कि धर्म या मजहब का नियन्त्रण धर्माचार्यों और मौलवियों के हाथों में रहे और प्रजातन्त्र में शासन चलाने का काम राजनेताओं के नियन्त्रण में रहे। इन दोनों में घालमेल ना हो। साथ यह भी आवश्यक हैं कि अपराधियों और गुनहगारों में धर्म और मजहब को तलाशने तथा उस आधार पर संरक्षण देने का काम भी बन्द हो। प्रशासनिक अमला भी इन आपराधिक तत्वों के नियन्त्रण में राजनैतिक हस्तक्षेप को बरदाश्त ना करें और कड़ाई से कार्यवाही करें। ऐसा सब कुछ हो जाये तो आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सदभाव देश में हमेशा बना रहेगा।



सम सामयिक टिप्पणी
 आशुतोष वर्मा

अंबिका सदन,

16 शास्त्री वार्ड,

सिवनी (म.प्र.) 480661

मो. 09425174640