Wednesday, June 30, 2010

criminal case registered against Th. Harbans Singh, Dy. Speaker of M.P.Vidhansabha on the instructions of the court

विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह,उनके पुत्र एवं एक अन्य के खिलाफ पंजीबद्ध हुआ धोखाधड़ी का अपराध
राजनैतिक हल्कों में हलचल:नगर भाजपा अध्यक्ष ने मांगा स्तीफा: आला नेताओं की चुप्पी चर्चाओं में

भोपाल। कोर्ट द्वारा बार बार दिये गये निर्देश के बाद पुलिस ने विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह, उनके पुत्र रजनीश सिंह एवं नियाज अली के विरुद्ध भां.दं.वि. की धारा 420,120(बी),506,294 के अंर्तगत मामला कायम कर जांच में ले लिया हैं।मामले के राजनैतिक होने एवं पुलिस की लचर कार्यवाही के चलते मामला चर्चित हो गया था। जिला पुलिस अधीक्षक ने कायमी की पुष्टि की हैं। नगर भाजपा अध्यक्ष ने हरवंश सिंह से नैतिकता के आधार पर स्तीफा मांगा हैं।भाजपा के शाीर्षस्थ नेताओं की चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चित हैं।प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह एवं उनके पुत्र रजनीश सिंह का नाम एक जमीन खरीदी के मामले में शामिल होने पर प्रदेश में बहुचचिZत हुआ आमानाला जमीन काण्ड न्यायालय के आदेश के बाद हरवंश सिंह और रजनीश सिंह पर आपराधिक प्रकरण दजZ होने के बाद एक बार फिर प्रदेश की सुर्खियों में छा गया है। उल्लेखनीय है कि 18 मई को न्याियक दण्डाधिकारी लखनादौन के समक्ष थाना धनौरा की पुलिस चौकी सुनवारा अन्तर्गत ग्राम आमानाला निवासी मो. शाह द्वारा धारा 156/3 दण्ड संहिता अन्तर्गत इस आशय का एक परिवाद पेश किया गया कि उनकी खानदानी शामिल शरीक जमीन जिसका वह स्वयं भी हकदार है उसकी बग्ौैर जानकारी के उसके भाई नियाज अली ने सुनियोजित षडयन्त्र रचकर बेच दी तथा इस खरीदी में रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह भी शामिल हैं। परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि उसके भाई नियाज अली, हरवंश Çसह, रजनीश सिंह ने विरोध जताने पर ना केवल उसके साथ गाली गलौच की वरन जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना की रिपोर्ट पुलिस चौकी सुनवारा में करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसीलिये न्यायालय की शरण लेनी पडी, एवं निवेदन किया कि न्यायालय आरोपियों के विरूद्Ëा धारा 420, 506, 294 एवं 120(बी) भादवि अन्तर्गत अपराध पंजीबद्Ëा करने के निर्देश दे। यहां यह उल्लेखनीय है कि परिवाद दायर होने की और न्यायालय द्वारा निर्देश देने के बाद ठा. हरवंश Çसह द्वारा खरीदी में शामिल होने के इस आरोप का बकायदा खण्डन भी जारी कर समाचार पत्रों में प्रकाशित कराया गया था।
इस परिवाद पर प्रथम श्रेणी न्याियक मजिस्ट्रेट ए एस सिसोदिया लखनादौन ने सुनवाई व दण्ड संहिता 156(3) के तहत थाना धनौरा पुलिस को निर्देश दिया कि वह तीनों आरोपियों के विरूद्Ëा अपराध पंजीबद्Ëा कर जांच प्रतिवेदन 28 जून को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। 28 जून को न्यायालय में जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया उसमें आरोपी क्रमांक 1 नियाज अली के विरूद्Ëा प्रतिवेदन पेश कर धारा 294, 323, 506 अन्तर्गत अपराध पंजीबद्Ëा करना बताया गया, जबकि आरोपी क्रमांक 2 रजनीश सिंह, एवं क्रमांक 3 हरवंश सिंह का कोई उल्लेख इस प्रतिवेदन में नहीं किया गया ना ही इनके खिलाफ कोई मामला कायम किया गया।
पुलिस चौकी सुनवारा द्वारा प्रस्तुत इस प्रतिवेदन पर न्यायालय ने तुरन्त संज्ञान लिया और थाना धनौरा प्रभारी को कोर्ट के निर्देश का पालन ना करने पर फटकार लगाई तथा पुन: न्यायालय ने मो. शाह द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रतिवाद पर थाना धनौरा प्रभारी को आरोपी नियाज अली, रजनीश सिंह, हरवंश सिंह के विरूद्Ëा दण्ड संहिता 156(3)अन्तर्गत मामला पंजीबद्Ëा करने के निर्देश दिये तथा यह फटकार लगाई कि इस दण्ड संहिता अन्तर्गत न्यायालय द्वारा जिन जिन व्यक्ति के विरूद्Ëा मामला पंजीबद्Ëा करने के निर्देश दिये जाते हैं उसके विरूद्Ëा मामला पंजीबद्Ëा किया ही जाना चाहिये वह दोषी है या नहीं यह अन्वेषण के बाद पुलिस द्वारा प्रषित किये जाने वाले प्रतिवेदन में पुलिस न्यायालय को बता सकती हें लेकिन निर्णय कोर्ट ही करेगा। न्यायालय ने थाना प्रभारी को 28 जुलाई 2010 तक तीनों आरोपियों के विरूद्Ëा अन्वेषण रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया।
पुलिस चौकी सुनवारा प्रभारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन की खबर जब जिला एवं प्रदेश के राजनैतिक हल्कों एवं पि्रंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को लगी तो आमानाला जमीन काण्ड एक बार फिर चचाZ में आ गया। पुलिस की इस कार्यवाही पर तरह तरह की चचाZयें व्याप्त हो गईं। साथ ही न्यायालय के निर्देश के बावजूद पुलिस चौकी प्रभारी के प्रतिवेदन को लेकर यह कयास लगाये जाने लगा कि अब न्यायालय के निर्देश भी राजनैतिक दबाव के सामने बेमानी से हो गये हैं।
गत 28 जून को न्यायालय द्वारा थाना प्रभारी धनौरा के डी गौतम को लगायी फटकार तथा राजनैतिक हल्कों और पि्रंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में व्याप्त चचाZओं के बाद थाना प्रभारी धनौरा ने आरोपी क्र. 1 नियाज अली, 2 रजनीश सिंह एवं 3 हरवंश सिंह के विरूद्Ëा धारा 420, 120(बी), 294, 506 का प्रकरण कायम कर लिया गया है। प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह एवं उनके ज्येष्ठ पुत्र ठा. रजनीश सिंह के विरूद्Ëा दजZ इस प्रकरण की भनक लगते ही आमानाला जमीन काण्ड एक बार फिर प्रदेश की सुर्खियों में छा गया है।जिला पुलिस अधीक्षक सिवनी डॉ. रमनसिंह सिकरवार ने मामले के पंजीबद्ध किये जो की पुष्टि प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया में कर दी हैं। पेशी के दिन 28 जून 2010 को कोर्ट से जांच के लिये समय लेने के बाद उसी दिन याने 28 जून को मामले के पंजीबद्ध किये जाने की पुष्टि की गई हैं। जबकि कोर्ट के निर्देश के बाद भी पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर कोर्ट को सूचित करने के बजाय समय मांगा था।सिवनी के नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने एक बयान जारी करके नैतिकता के आधार पर हरवंश सिंह से विधानसभा उपाध्यक्ष के पद से स्तीफा दने की मांग की हैं। तिवारी ने विस अध्यक्ष,मुख्यमन्त्री और नेता प्रतिपक्ष से भी आग्रह किया है कि वे हरवंश सिंह से स्तीफा ले लें। इस मामलेे में आला भाजपा नेताओं की चुप्पी राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं।
मालगुजार ने खैरात में फकीर को दी थी जमीन
भोपाल। बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में विवादित जमीन के बारे में बताया जाता हैं कि यह जमीन अंजनिया के मालगुजार मरहूम जनाब फेलकूस मोहम्मद खॉन ने विक्रेता के पूर्वजों को, जो कि फकीर थे, खैरात में जमीन दी थी। अपनी मेहनत के कमा कर उन फकीरों ने मालगुजार से कुछ और जमीन बाद में खरीदी थी। मालगुजार द्वारा खैरात में फकीर को दी गई जमीन बिक्री के विवाद में जिले के इकलौते इंका विधायक ठा. हरवंश सिंह का नाम आने से लोगों के बीच तरह तरह की चर्चायें व्याप्त हैं।
धारा 420 का पहला आरोप नहीं हैं हरवंश सिंह पर
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हरवंश पर धोखा दने के आरोप लगने का यह कोई पहला मामला नहीं हैं। आज से 26 साल पहले पिछड़े वर्ग की एक विधवा महिला ने अपने वकील हरवंश सिंह पर जमीन हड़प लेेने का अरोप लगाते धारा 420 के तहम परिवाद पत्र प्रस्तुत किया था।सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने बकोड़ा सिवनी सहकारी समिति के आदिवासियों को डीजल पंप सप्लायी ना कर धोखा दने के आरोप को सही पाते था सिवनी को फर्म के पार्टनर हरवंश सिहं के विरुद्ध धारा 420 का मामला दर्ज कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे।प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री सुन्दरलाल पटवा ने झूठे शपथपत्र देकर प्रदेश के जिन मन्त्रियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगयाी थी उनमें भी हरवंश सिंह शामिल थे। माननीय उच्च न्यायालय ने भी सरकार को जांच कर कार्यवाही रिने के निर्देश दिये थे।इंका विधायक हरवंश सिंह के विरुद्ध वर्तमान धोखाधड़ी का मामला न्यायलय के निर्देश पर कायम किया गया हैं।
बाजार मूल्य से आधी कीमत पर खरीदी गई हैं जमीन
भोपाल। घंसौर तहसील के ग्राम आमानाला पटवारी हल्का नंबंर 54/41 की 10.47 हेक्टेयर याने लगभग 21 एकड़ विवादित जमीन की रजिस्ट्री सादक सिवनी निवासी रवि नारायण शर्मा के नाम हुयी हें। उन्होंने यह जमीन विक्रेता नियाज अली एवं अन्य से 4 लाख 50 हजार रुपये में खरीदी हैं। इस जमीन का बैनामा 21 जनवरी 2010 को लखनादौन में हुआ हैं। इस जमीन का कलेक्टर द्वारा निर्धारित कीमत 9 लाख 24 हजार रुपये है। बाजारू कीमत से लगभग आधी कीमत पर एक अनजान व्यक्ति शर्मा के नाम जमीन के बैनाम को हो जाने से तरह तरह की चर्चाओ में एक चर्चा यह भी हें कि कहीं यह बेनामी सौदा तो नहीं हैं।

Saturday, June 26, 2010

important news ragarding dy speaker of m.p. vidhan sabha mr. harbans singh

आमानाला जमीन घोटाला
हरवंश और रजनीश के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध ना करने पर पुलिस को कोर्ट की फटकार
आरोपियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर 28 जून को अन्तिम प्रतिवेदन देने के थाने को निर्देश

सिवनी। बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में कोर्ट ने दिये गये निर्देशों का पालन ना करने पर पुलिस को फटकार लगायी है। अदालत में प्रतिवादी मो. शाह ने एक प्रतिवाद पत्र पेश कर आरोपी नियाज अली,रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह के विरुद्ध भा.दं.वि. की 420,506,294 तथा 120 बी. के तहत मामला पंजीबद्ध करने का अनुरोध किया था जिस पर न्यायालय ने दं.प्र.सं की धारा 156(3) के तहत धनोरा पुलिस को कार्यवाही कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिये निर्देशित किया था। लेकिन पुलिस ने आरोपी नियाज अली के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया जिस पर लखनादौन के प्रथम श्रेणी न्यायायिक मजिस्ट्रेट श्री ए.एस.सिसोदिया ने कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी आरोपियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर जांच करके प्रतिवेदन 28 जून को कोर्ट में पेश करने के निर्देश पुन: पुलिस को दिये हैं। पुलिस चौकी प्रभारी की इस अवैधानिक कार्यवाही पर आला पुलिस अधिकारियों की चुप्पी कई सन्देहों को जन्म दे रही हैं।
मामला संक्षेप में
उल्लेखनीय हैं कि थाना धनौरा के अंर्तगत आने वाले ग्राम आमानाला निवासी मो. शाह ने अदालत में 18 मई 2010 को एक प्रतिवाद पत्र पेश किया था। इसमें प्रतिवादी ने आरोप लगाया था कि उसके भाई नियाज अली ने उसकी शामिल शरीक खानदानी जमीन षडयन्त्र पूर्वक आरोपियों को बेच दी हैं। उसने यह भी आरोपित किया था कि उसके भाई एवं रजनीश सिंह तथा हरवंश सिंह ने उसे गाली गलौच कर जान से मारने की धमकी भी दी हैं। उसने यह भी लिखा था कि उसने थाने में सूचना दी थी फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसलिये कोर्ट आरोपियों के विरुद्ध भा.द.वि. की धारा 420,506,294 और 120(बी) के तहत अपराध दर्ज कर कार्यवाही करने के निर्देश दे।अपराध दर्ज करने कोर्ट ने दिये निर्देश इस प्रतिवाद पर संज्ञान लेते हुये माननीय न्यायाधीश ने दं.प्र.सं की धारा 156(3) के तहत कार्यवाही कर धनौरा पुलिस को एक महीने बाद 18 जून को कोर्ट में अन्तिम प्रतिवेदन पेश करने के निर्देश जारी किये थे। यह मामला धनौरा थाने की पुलिस चौकी सुनवारा के अंर्तगत आता था अत: चौकी प्रभारी एस.एस.ठाकुर ने प्रतिवेदन पेश कर उसमें यह उल्लेख किया कि आरोपी नियाज अली के विरुद्ध धारा 294,323,506 के अंर्तगत अ.क्र. 79/2010 दर्ज कर लिया गया हैं एवं जांच जारी हैं तथा आरोपी क्र. 2 रजनीश सिंह एवं आरोपी क्र.3 हरवंश सिंह के विरुद्ध कोई कथन परिवादी या किसी साक्ष्य ने नहीं किये हैं। रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह के विरुद्ध प्रथम दृष्टया जांच में कोई अपराध नहीं पाये जाने के कारण अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यदि कोर्ट दं.प्र.सं. की धारा 156(3) के तहत कोई आदेश जारी करती हैं तो वह मेन्डेटरी होता हैं। जिसका पालन चौकी प्रभारी ठाकुर ने नहीं किया।
कोर्ट के आदेश का पालन नही किया पुलिस ने
कोर्ट में प्रतिवेदन प्रस्तुत होने के बाद फरियादी के कथन भी रिकार्ड कराये गये। माननीय न्यायाधीश ने अपने आदेश दिनांक 18 जून 2010 को आदेश पत्रिका में लिखा हैं कि पश्चातक्रम में अन्तिम प्रतिवेदन का अवलोकन करने पर यह समझ में आया कि थाना धनौरा द्वारा न्यायालीन आदेश के अनुसार सभी आरोपी गणों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर अन्वेषण उपरान्त विधिवत अन्तिम प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी लिखा हैं कि थाना धनौरा द्वारा मात्र एक आरोपी नियाज अली के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया हैं। अत: यह समझ में आता हैं कि आरक्षी केन्द्र धनौरा द्वारा विधिवत न्यायालीन आदेश का अनुपालन नहीं किया गया हैं। इसलिये ये अन्तिम प्रतिवेदन प्रतीत नही होता हैं। कोर्ट ने परिवादी के पूर्व में लिये गये कथन निरस्त करते हुये थाना प्रभारी को पुन: निर्देशित किया है कि परिवाद के आधार पर सभी अभियुक्त गणों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर अन्वेषण उपरान्त अन्तिम प्रतिवेदन 28 जून को कोर्ट में पेश करें।
इंका विधायक के आरोपी होने से चर्चित हुआ कांड़
प्रकरण में आरोपी के रूप में जिले के केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह एवं उनके पुत्र रजनीश सिंह आरोपों के घेरे में थे इसलिये मीडिया ने इसे गम्भीरता से लेते हुये प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद इंका विधायक हरवंश सिंह ने बाकायदा खंड़न जारी किया था जिसे सभी प्रमुख समाचार पत्रों ने छापा था। समाचार और खंड़न के प्रकाशन के बाद लोगों की निगाहें इसी पर लगीं थीं कि कैसे इस मामले का निपटारा होता हैं।
पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता हुयी सन्दिग्ध
न्यायालय के आदेश में जिस तरह पुलिस को लताड़ा गया हैं उससे पुलिसिया कार्यवाही सन्देह के घेरे में आ गई हैं। जिले के मशहूर फौजदारी अधिवक्ताओं का यह कथन भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं कि कोर्ट यदि दं.प्र.सं.की धारा 156(3) के अंर्तगत आदेश देती हें तो वह मेन्डेटरी होता हैं और इसकी सुप्रीम कोर्ट की नजीरें भी हैं। इस पुलिसिया कार्यवाही को लेकर भी तरह तरह की चर्चायें हैं। कहीं यह कहा जा रहा हैं कि नेताओं को बचाने के लिये यह कार्यवाही चौकी प्रभारी ने अपने स्तर पर ही कर दी होगी क्योंकि यदि यह जानकारी सख्त मिजाज जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. रमनसिंह सिकरवार को लगी होती तो ऐसा हो ही नहीं सकता था। लेकिन ऐसा कहने वालों की भी कमी नहीं हैं कि एक छोटा कर्मचारी इतना बड़ा निर्णय खुद नहीं ले सकता।उसने जरूर जिले के आला अफसरों को विश्वास में लेकर ही यह किया होगा। तभी तो पिछले लगभग दस दिनों से जिले का आला पुलिस अधिकारी चुप हैं अन्यथा ऐसा विधि विपरीत प्रतिवेदन प्रस्तुत करनें वाले चौकी प्रभारी के खिलाफ अभी तक कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही हो चुकी होती। अब इस मामले में सच्चायी क्या हैं यह तो 28 जून को ही स्पष्ट हो पायेगा लेकिन इस प्रकरण ने पुलिस प्रशासन के निष्पक्षता के दावों को जरूर सन्दिग्ध बना दिया हैं।
दैनिक यशोन्नति सिवनी
27 जून 2010 में प्रकाशित

Saturday, June 19, 2010

नेजे पे भी बुलन्द रहा,कट के सर मेरा ।
लेकिन झुका ना झूठे,खुदाओं के सामने ।।

जिले में युवक कांग्रेस में हुयी नयी नियुक्तियों में बधाई के विज्ञापनों के दौर चालू हैं। पिछले दस पन्द्रह से ऐसा माना जाता था कि कांग्रेस में हर एक नियुक्ति में एक नेता हरवंश सिंह के ही आशीZवाद से ही हुआ करती थीं। लेकिन इन नियुक्तियों से एक बात का जरूर खुलासा हुआ हैं कि कुछ और नेता ऐसे हैं जिनके आशीZवाद से भी नियुक्तियां हो सकती हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में पिछले दिनों महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम एक ज्ञापन सौंपकर पुलिस और प्रशासनिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई हैं। नपा चुनाव के बाद से राजनैतिक प्रतिशोध के शिकार हो रहे नपा के अध्यक्ष पद के पूर्व इंका प्रत्याशी संजय भारद्वाज ने झुकने के बजाय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना उचित समझा हैं। प्रदेश के वनमन्त्री सरताज सिंह ने विगत दिनों तेन्दूपत्ता के लाभांश का वितरण किया। मंच पर आरोप प्रत्यारोप के हल्के फुलके दौर भी चले। मंच पर बैठे नेताओं का मानना हैं कि संवैधानिक पद पर रहते हुये भी हरवंश सिह ने जिस तरह का उदबोधन दिया उसका जवाब यदि वैसे ही मन्त्री सरताज सिंह देते तो शासकीय कार्यक्रम का यह मंच राजनैतिक आरोपों प्रत्यारोपों का मंच बन रह जाता जिसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं।
औरों के भी आशीZवाद से हुयी नियुक्तियंा युवा इंका में -
जिले में युवक कांग्रेस में हुयी नयी नियुक्तियों में बधाई के विज्ञापनों के दौर चालू हैं। पिछले दस पन्द्रह से ऐसा माना जाता था कि कांग्रेस में हर एक नियुक्ति में एक नेता हरवंश सिंह के ही आशीZवाद से ही हुआ करती थीं। लेकिन इन नियुक्तियों से एक बात का जरूर खुलासा हुआ हैं कि कुछ और नेता ऐसे हैं जिनके आशीZवाद से भी नियुक्तियां हो सकती हैं। ये दोनो ही जिला युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार उर्फ पप्पू खुराना तथा राजा बघेल हैं। बधायी के विज्ञापन से ही यह साफ हो जाता हें कि कौन किस नये आशीZवाद से इस पद तक पहुचा हैं। फर्क रहता हैं तो सिर्फ फोटों का। एक सेट में हरवंश से शुरू होकर राजा बघेल पर समाप्त होतीं हैं क्योंकि इस गुट की कांग्रेस तो हरवंश से शुरू होकर वहीं समाप्त हों जाती हैं। दूसरे सेट में राहुल गांधी,कमलनाथ से शुरू होकर फोटो का सिलसिला पप्पू खुराना पर समाप्त होता हैं। खैर यह सब तो कांग्रेस में होता रहता हैं। लेकिन अब देखना यह हैं कि लंबे समय तक अध्यक्ष पद पर नियुक्त रह कर काफी खोजबीन करने के बाद उन्होंने जो अपनी जम्बो जेट कार्यकारिणी बनायी हैं उससे कांग्रेस को जरूर ही मजबूती मिलेगी और विपक्ष में आयोजित होने वाले आन्दोलनों में अच्छी खासी संख्या युवकों की दिखायी देगी। लेकिन अब भी यदि हाल वही बेढंगा रहा तो फिर नये और पुराने तरीके में कोई फर्क नहीं दिखायी देने वाला हैं।
जिला इंका ने ज्ञापन सौप आन्दोलन की दी चेतावनी-
जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में पिछले दिनों महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम एक ज्ञापन सौंपकर पुलिस, प्रशासनिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई हैं। इसके पूर्व भी नपा अध्यक्ष पद के पूर्व इंका प्रत्याशी संजय भारद्वाज ने एक विज्ञप्ति जारी कर इसका उल्लेख किया था। जिला इंका ने अपने ज्ञापन में इस बात का उल्लेख किया है कि पहले तो अधिकारियों ने नपा चुनाव में कांग्रेस की सुनिश्चित जीत में पलीता लगाया और अब राजनैतिक प्रतिशोध के चलते कांग्रेस के प्रत्याशी संजय भारद्वाज को पुलिस और प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा हैं तथा उनके व्यवसाय में उन्हें परेशान किया जा रहा हैं। वैसे एक बात तो सत्य हैं कि नपा अध्यक्ष के चुनाव के परिणाम से सभी भौंचक रह गये थे। इंका प्रत्याशी और कांग्रेस का भौंचक रहना तो ठीक ही था लेकिन शहर का मतदाता भी इस परिणाम से अचंभित तो जरूर था। और तो और जीतने वाली भाजपा और उसके अधिकांश नेता भी इस परिणाम से भौंचक रह गये थे कि ऐसा रिजल्ट कैसे आ गयार्षोर्षो लगभग सभी राजनैतिक दल,मीडिया और राजनैतिक विश्लेषक भी यह मान रहे थे कि कांग्रेस यह चुनाव जीत रही हैं। परिणाम आने के बाद विश्लेषकों का यह भी मानना रहा कि इस चुनाव में मुख्यमन्त्री के फ्लाप रोड शो और उसके भारी भरकम प्रचार प्रसार तथा संघ के नेता विशेष के कोटे से आयी टिकिट के कारण येन केन प्रकारेण चुनाव जीतने की रणनीति बनायी गई जिसमें शासकीय अमले की भूमिका का भी निर्णायक योगदान रखा गया। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि मुख्यमन्त्री के रोड़ शो के दौरान ही इंका प्रत्याशी सहित कुछ इंका नेताओं के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया। जागरूक मतदाता संघ ने मुख्यमन्त्री से कुछ सवालों के जवाब पूछने वाले बड़े बड़े फ्लेक्स शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाये थे जिन्हें पुलिस मुख्यमन्त्री के आने के पहले निकाल रही थी इसे लेकर लोगों का विवाद हुआ था। मतगणना के दौरान ही कुछ अधिकारी तो इतने अधिक प्रसन्न और अति उत्साहित दिखायी दे रहे थे कि मानो वे ही चुनाव जीत रहें हों। समय समय पर इंका प्रत्याशी के निर्वाचन अभिकत्ताZ ने इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग का ध्यानाकषिZत भी कराया था। इंकाइयों का दावा हैं कि इस चुनाव के बाद पालिका के भ्रष्टाचार से सम्बंधित कुछ दस्तावेज जब संजय भारद्वाज नें सूचना के अधिकार के तहत निकालने के लिये आवेदन लगाया तभी से उनके व्यवसाय को टारगेट बना कर उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा। ÞरुटीनÞ व्यवस्थाओं से अलग चाहे जब तरह तरह के हुक्म फरमाये जाने लगे। कानूनन जो सुविधा शहर के अन्य लायसेंसियों को दी गई वह औपचारिकतायें पूरी होने बाद भी उन्हें नहीं दी गईं। कहा तो यहां तक जा रहा हैं कि बार बार यह सन्देश भेजे जा रहे थे कि भ्रष्टाचार पुराण बन्द कर दो। लेकिन संजय भारद्वाज ने अन्याय के खिलाफ झुकने के बजाय संघंर्ष का रास्ता अिख्तयार किया । बताया जा रहा हैं कि इन तमाम बातों को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा कर न्याय की गुहार लगायी हैं। शायद ऐसे ही अवसरों के लिये देश की मशहूर शायरा श्यामा सिंह सबा ने यह शेर लिखा है कि,
नेजे पे भी बुलन्द रहा,
कट के सर मेरा।
लेकिन झुका ना झूठे,
खुदाओं के सामने।।
जिला कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपकर यह चेतावनी भी दी हैं कि यदि सरकार उचित कार्यवाही नहीं करती हैं तो कांग्रेस आन्दोलन करने को मजबूर हो जायेगी।
वनमन्त्री ने संग्राहकों को बांटे लाभांश के चैक-
प्रदेश के वनमन्त्री सरताज सिंह ने विगत दिनों तेन्दूपत्ता के लाभांश का वितरण किया। भारी बारिश के बीच भी कांग्रेस संस्कृति में ही वाहनों पर ढ़ोकर लाये गये ग्रामीण कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस अवसर पर मंच पर कांग्रेस शासनकाल के वन मन्त्री हरवंश सिंह और भाजपा के सरकार के वन मन्त्री रहे डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन भी मौजूद थे। जब हरवंश सिंह बोनस बाटा करते थे तो भाजपा नेता उदाहरण देकर बताया करते थे कि जितना मिला नहीं उससे ज्यादा आने जाने में खर्च हो गया। इस बार भी विस उपाध्यक्ष एवं इंका सरकार के वनमन्त्री रहे हरवंश सिंह ने अपनी सरकार का बखान किया तो नीता पटेरिया ने अपनी सरकार का बखान किया। उमा सरकार में वन मन्त्री के रूप में डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन द्वारा हरे तेदूपत्ता की बनायी गई नीति के कारण संग्राहक मजदूरों को अधिक लाभ मिलने लगा हैं यह दावा भी भाजपायी करते हैं। लेकिन कुल मिलाकर ऐसा लगता हैं कि सरकारें बदलती हैं तो मन्त्री भले ही बदल जायें लेकिन करनी में बदलाव नहीं आता और जिसके भले का दावा सरकारें करतीं हैं वह निरीह चुपचाप अपने भले का दावा तो सुनता रहता हैं लेकिन उसका भला कहां हो रहा हैंर्षोर्षो यह खुद उसे ही पता नहीं चलता हैं। मंच पर बैठे नेताओं का मानना हैं कि संवैधानिक पद पर रहते हुये भी हरवंश सिह ने जिस तरह का उदबोधन दिया उसका जवाब यदि वैसे ही मन्त्री सरताज सिंह देते तो शासकीय कार्यक्रम का यह मंच राजनैतिक आरोपों प्रत्यारोपों का मंच बन रह जाता जिसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं।

Sunday, June 13, 2010

जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानन्द जी ने कहा कि हमारे भगवान और भगवती को जिले का पूरा ध्यान हेभले ही राजनेताओं ने इसे भुला दिया हो
जिले की भाजपायी राजनीति से सम्बंधित तीन नेताओं को प्रभात झा ने अपनी टीम में जगह दी हैं। इनमें पूर्व केन्द्रीय मन्त्री प्रहलाद पटेल एवं विधायक द्वय श्रीमती शशि ठाकुर को कार्यकारिणी सदस्य और नीता पटेरिया को प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया हैं।प्रदेश के चार सांसदों में से सिर्फ नीता को मन्त्री ना बना कर ऐसा सौतेला व्यवहार महिला हितेषी मुख्यमन्त्री की छवि बनाने वाले मुख्यमन्त्री शिवराज मामा ने क्यों कियार्षोर्षो यह लोगों की समझ से परे हैं। जिला युवक कांग्रेस शहर और गा्रमीण के अध्यक्षो की नियुक्ति हुये काफी समय हो गया था। ऐसा लगने लगा था कि मानो दोनों के बीच अपनी कार्यकारिणी ना बनाने की प्रतियेगिता चल रही थी। फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि कार्यकारिणी बनाने की ऐसी होड़ मची कि कुछ ही दिनों के अन्तर में दोनों की ही कार्यकारिणी अखबारों में छप गईं।महाराजश्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि भले ही इस जिले के राजनीतिज्ञों की उदासीनता और इस जिले के प्रति उनके मन में उपजे भाव के चलते यहां का संसदीय क्षेत्र समाप्त हो गया हो, यहां बनने वाली चतुष्गामी सड़क का मामला अटक गया हो या फिर बड़ी रेल लाइन जो श्रीधाम (गोटेगांव) से रामटेक तक घोषित होने के बाद भी भुला दी गई हो ,किन्तु हमारे भगवान और भगवती राजनेताओं की तरह नहीं हैं उन्हें इस जिले के हितो का पूरा पूरा ध्यान हैं।
शिवराज मामा का नीता के साथ सौतेला व्यवहार क्यों -
जिले की भाजपायी राजनीति से सम्बंधित तीन नेताओं को प्रभात झा ने अपनी टीम में जगह दी हैं। इनमें पूर्व केन्द्रीय मन्त्री प्रहलाद पटेल एवं विधायक द्वय श्रीमती शशि ठाकुर को कार्यकारिणी सदस्य और नीता पटेरिया को प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया हैं। प्रदेश के चार सांसदों को भाजपा ने विधायक बनाया था जिनमें से तीन को तो शिवराज ने मन्त्री बना लिया लेकिन ना जाने क्यों नीता पटेरिया मन्त्री नहीं बन पायीं हैं। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष बनने के बाद अब बची कुची संभावनायें भी भाजपायी समाप्त ही मान रहें हैं।ऐसा सौतेला व्यवहार महिला हितेषी मुख्यमन्त्री की छवि बनाने वाले मुख्यमन्त्री शिवराज मामा ने क्यों कियार्षोर्षो यह लोगों की समझ से परे हैं। लेकिन नीता का प्रदेश स्तर का पदाधिकारी बनना भी अखबारों की सुर्खियां बन रहा। समाचार पत्रों में छपा कि यह समाचार कि नीता के अध्यक्ष बनने के समाचार को सुनते ही कार्यकत्ताZओं ने खुशी मनायी और फटाके फोड़े। याने फटाके फोड़ने वाले नीता जी के पास अभी भी बचे हैं। वरना लोगों को तो उस दिन की भी याद हैं कि जब दो बार लगातार विधायक चुने गये नरेश दिवाकर की टिकिट काटकर नीता पटेरिया को टिकिट देने का समाचार आया था तो शहर के ना जाने किन किन लोगों ने और कहां कहां कितने फटाक फोड़े थे और चुनाव जीतने तक यह जोश बना भी रहा था। लेकिन उसके बाद से फटाके फोड़ने वाले कई नेताओं के दिल ही फट गये थे। कुछ के दिल तो चुनाव जीतने के बाद ही फट गये तो कुछ के संगठन चुनाव के बाद तो कुछ के नगरपालिका चुनाव के बाद फट गये थे। उनकी रक्षात्मक राजनैतिक पाली और समर्थकों के समर्थन में खुलका कर ना आने से लोग निराश हो चले थे। तो कई तो यह कहने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे थें कि मैडम मन्त्री बनने के लिये अपने किसी भी समर्थक के लिये किसी से लड़ना ही नहीं चाहती हैं और अपना विरोध नहीं बढ़ाना चाहती हैं। इसी भावना को रोकने के लिये फिर वे नगर भाजपा अध्यक्ष पद के लिये अपने समर्थक प्रेम तिवारी के लिये ऐसे अड़ी कि उन्हें बनवाकर ही छोड़ा। अभी जिले की कार्यकारिणी घोषित नहीं हुयी हैं अब यह तो जिले की कार्यकारिणी की घोषणा से ही पता चलेगा कि किसकी कितनी चली हैं
युवा इंका की शहर एवं ग्रामीण कार्यकारिणी घोषित -
जिला युवक कांग्रेस शहर और गा्रमीण के अध्यक्षो की नियुक्ति हुये काफी समय हो गया था। ऐसा लगने लगा था कि मानो दोनों के बीच अपनी कार्यकारिणी ना बनाने की प्रतियेगिता चल रही थी। फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि कार्यकारिणी बनाने की ऐसी होड़ मची कि कुछ ही दिनों के अन्तर में दोनों की ही कार्यकारिणी अखबारों में छप गईं। यह प्रतियोगता भी मजेदार ही रही।कार्यकारिणी बनाने वाली प्रतियोगिता में नगर अध्यक्ष देवीसिंह चौहान जीते तो ना बनाने वाली प्रतियोगिता में ग्रामीण अध्यक्ष रंजीत यादव की जीत हुयी क्योंकि उन्होंने बाद में बनाायी। दोनों ही कार्यकारिणी में सौं सौ से ज्यादा ही नेताओं को उपकृत किया गया हैं। वैसे भी विपक्ष के दौर में ऐसा होना जरूरी भी हैं क्योंकि आन्दोलनों में लोगों की पार्टी को जरूरत होती हैं। लेकिन पिछला अनुभव इस बारे में अच्छा नहीं हैं। लंबी चौड़ी कार्यकत्ताZओं और पदाधिकारियों की फौज होने के बाद भी लोग कम ही आते हैं। पहले तो ऐसा हुआ करता था कि नेता कार्यकत्ताZओं को पद देकर उपकृत करते थे और कार्यकत्ताZ डट कर पार्टी का काम कर इस उपकार का बदला चुकाते थे। अब तो कांग्रेस में मानो ऐसा हो गया कि कार्यकत्ताZ बाडभ् में पद लेकर नेताओं को उपकृत कर उन्हें अपनी कार्यकारिणी बनाने का मौका देकर उन्हें उपकृत करता हैं ताकि वे बिना कार्यकारिणी बनाये ही भूतपूर्व ना हो जायें। इसलिये ही जिले में कांग्रेस की ऐसी गत बन गई हैं कि जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।
जगतगुरू की चिन्ता ने नेताओं को खड़ा किया कठघरे में -
हाल ही में जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती महाराज के गनेशगंज की धर्म सभा में दिये गये प्रवचनों के समाचार राजनैतिक क्षेत्रों में काफी चर्चित हैं। महाराजश्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि भले ही इस जिले के राजनीतिज्ञों की उदासीनता और इस जिले के प्रति उनके मन में उपजे भाव के चलते यहां का संसदीय क्षेत्र समाप्त हो गया हो, यहां बनने वाली चतुष्गामी सड़क का मामला अटक गया हो या फिर बड़ी रेल लाइन जो श्रीधाम (गोटेगांव) से रामटेक तक घोषित होने के बाद भी भुला दी गई हो ,किन्तु हमारे भगवान और भगवती राजनेताओं की तरह नहीं हैं उन्हें इस जिले के हितो का पूरा पूरा ध्यान हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं 4 जनवरी 1996 को देश के तत्कालीन प्रधानमन्त्री पी.व्ही.नरसिंहाराव ने महाराजश्री की उपस्थिति में उनकी तपोस्थली झाोतेश्वर में तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद और केन्द्रीय मन्त्री कु. विमला वर्मा की मांग पर श्रीधाम से रामटेक तक नयी बड़ी रेल लाइन बनाने की घोषणा की थी।तत्काल ही उसका ट्रेफिक सर्वे भी हो गया था। लेकिन उसके बाद से आज तक इस दियाा में सरकार ने कोई कारगर पहल नहीं की जबकि जिले में चले पत्र लिखो अभियान के तहत महाराजश्री ने स्वयं पत्र लिखकर इस अभियान को अपना आशीZवाद दिया था। लेकिन गुरू इच्छा को दरकिनार कर दूसरी मांग उठाने वाले चेलों की भी कमी नहीं रहीं हैं।अपने आप को महाराजश्री का अनन्नय भक्त बताने कुछ चेले तो ऐसे भी हैं जो इन तीनों ही चीजों के लिये दोषी हैं जिनसे महाराश्री का मन दुखी हैं। महाराज श्री की यह पीड़ा की अभिव्यक्ति अत्यन्त ही ध्यान देने योग्य हैं। आज के और इसके पहले भी इस जिले के अधिकांश जनप्रतिनिधि रहें नेताओं को महाराजश्री का आशीZवाद प्राप्त रहें हैं फिर चाहे वे कांग्रेस के हों या भाजपा के हों। कभी किसी ने महाराज को अपना बताने के लिये अपने यहां यज्ञ करवाया हो या किसी ने महाराजश्री की शोभा यात्रा में पैदल चल कर अपने आप को उनका भक्त बताया हो, या फिर अपने घर बुलाकर पादुका पूजन करवाया हो,या फिर भरी धर्म सभा में महाराजश्री के प्रति अपनी अगाध श्रृद्धा का बखान किया हो। आज ऐसे तमाम नेताओं को अपना स्वयं ही मूल्यांकन करना चाहिये कि महाराजश्री ने जिले की जिन तीन चीजों के जाने का या अभी तक ना बन पाने का दु:ख व्यक्त किया हैं उसके लिये वे कितने दोषी हैंर्षोर्षो हर नेता को अपने गरेबां में झांक कर देखना चाहिये कि जिन चीजों के ना आने से गुरू का दिल द्रवित हुआ हैं उसके लिये वे कितने दोषी हैं। अभी भी वक्त हैं कि वे इसके लिये प्राश्चित कर लें और गुरू इच्छा के अनुरूप जो हो सकता हैं उसके लिये प्रयास कर लें अन्यथा वे अपने आप को पाखंड़ी राजनैतिक चेले की उपमा मिलने से बचा नहीं पायेंगें।

Saturday, June 5, 2010

नाम ना आये पर काम हो जाये की तर्ज पर क्या कुछ भाजपा नेता संगठन मन्त्री पर साध रहें हैं निशाना
इंका में दावे के साथ यह कहा जा रहा हैं कि इस बार पार्टी जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में प्रदेश के बाहर के नेताओं को भेजेगी इस लिये कोई भेदभाव या मनमानी नहीं होगी। लेकिन वास्तविकता तो कुछ और ही हैं पिछले बार भी दिल्ली के श्री मित्तल चुनाव अधिकारी थे और उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये इंका नेता आशुतोष वर्मा को नामांकन पत्र भी नहीं दिया था। नगर कांग्रेस के उपाध्यक्ष जकी अनवर ने सिंचाई विभाग के फर्जी ड्राफ्ट कांड़ को उठाकर एक हलचल पैदा कर दी हैैं।जिले में कांग्रेस की नकेल हरवंश सियंह के हाथों में आयी हें तब से कोई भी पदाधिकारी भ्रष्टाचार के मामले नहीं उठाता था। कांग्रेस में यह डर बना रहता था कि कहीं पलट वार में जिला इंका के सर्वे सर्वा पर खुद ही पलटवार ना किये जाने लगे। भाजपा संगठन और उसके संविधान के जानकारों के अनुसार संगठन के अध्यक्ष को अपने निर्वाचन के तीस दिन के अन्दर अपनी कार्यकारिणी की घोषणा करना आवश्यक होता हैं अन्यथा उनके निर्वाचन पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाता हैं। कुछ भाजपा नेता तो इसे मुद्दा बना कर नव निर्वाचित भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन की ही छुट्टी कराने की योजना बनाने में जुट गये हैं।वैसे तो इस मामले में यह प्रचारित हैं कि ये मुस्लिम भाजपा नेता तो मोहरा बना दिया गया हैं। असली निशाना तो जिला संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी पर साधने की चर्चायें हैं। बाजार में आयी एक फोन वार्ता की आडियों सी.डी. भी इन दिनों बाजार में चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। इस सी.डी. में जिला संगठन मन्त्री के उल्लेख होने का दावा भी भाजपा नेताओं का ही एक वर्ग कर रहा हैं।
इंका में वर्तमान से बड़े की तलाश जारी है-
जिला भाजपा के चुनाव होने के बाद इन दिनों कार्यकारिणियों के गठन का काम चल रहा हैं। जिला कार्यकारिणी अभी भी नहीं बन पायी हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस में चुनाव की हलचलें सुनायी दे रहीं हैं। दावे के साथ यह कहा जा रहा हैं कि इस बार पार्टी जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में प्रदेश के बाहर के नेताओं को भेजेगी इस लिये कोई भेदभाव या मनमानी नहीं होगी। लेकिन वास्तविकता तो कुछ और ही हैं पिछले बार भी दिल्ली के श्री मित्तल चुनाव अधिकारी थे और उन्होंने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये इंका नेता आशुतोष वर्मा को नामांकन पत्र भी नहीं दिया था और जब प्रेस ने पूछा था तो कह दिया कि वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं थे इसलिये फार्म नहीं दिया था। जब प्रेस ने पूछा कि यह तो स्क्रूटनी का मामला था तो वह कुछ भी नहीं कह पाये थे। अब फिर यही कहा जा रहा हें कि अन्य प्रदेश के नेता यहां आयेंगें तो सब ठीक ठाक रहेगा। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि क्या कितना ठीक रहता हैंर्षोर्षो वैसे भी अखबारों अब यह भी आने लगा हैं कि जिले के अध्यक्ष क्या सब कुछ डुबोकर ही जायेंगें। वैसे यदि देखा जाये तो डुबाने को अब बचा ही क्या हैंर्षोर्षो लोकसभा,विधानसभा और नपा सभी में तो लुटिया डूब ही चुकी हैं बमुश्किल जिला पंचायत हाथ में बची हें वो भी विद्रोही अनिल चोरसिया से गल बहियां करके जिनने स्वयं हरवंश सिंह के खिलाफ 2003 में चुनाव लड़ा था और जो उन्हें कुनैन की गोली की तरह लगते थे लेकिन जिला पंचायत चुनाव में तो हरवंश सिंह के लिये इस बार वे ही सबसे स्वादिष्ट स्वीट डिश बन गये थे। वैसे मंड़ी को डुबोने का पूरा मौका हाथ में था लेकिन सरकार ने चुनाव आगे बढ़ाकर यह ख्वाब अधूरा ही रह जाने दिया हैं। इसके बाद भी हरवंश सिंह की कार्यप्रणाली को जानने वालों का दावा हैं कि जब तक वर्तमान से बड़े की तलाश पूरी नहीं हो जायेगी तब तक वर्तमान ही भविष्य बना रहेगा। भले ही पार्टी का कुछ भी क्यों ना हो जाये
इंका नेता जकी अनवर की पहल प्रशंसनीय:सिविनी पुलिस सुस्त-
नगर कांग्रेस के उपाध्यक्ष जकी अनवर ने सिंचाई विभाग के फर्जी ड्राफ्ट कांड़ को उठाकर एक हलचल पैदा कर दी हैं। वैसे जबसे कांग्रेस की नकेल हरवंश सियंह के हाथों में आयी हें तब से कोई भी पदाधिकारी भ्रष्टाचार के मामले नहीं उठाता था। कांग्रेस में यह डर बना रहता था कि कहीं पलट वार में जिला इंका के सर्वे सर्वा पर खुद ही पलटवार ना किये जाने लगे। लेकिन यह बहुत ही प्रशंसनीय कार्य जकी अनवर ने किया हैं। यह मामला सिर्फ सिवनी तक ही सीमित नहीं होगा। इस मामले के प्रमुख आरोपी ठेकेदार जैन प्रदेश के ताकतवर मन्त्री अनूप मिश्रा के चहेते ठेकेदार थे। अनूप मिश्रा पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी वाजपेयी के भांजे हैं। सिंचाई विभाग के जानकारो ं का मानना हैं कि समूचे प्रदेश में जैन के ऐसे कई घपले मिलेंगें क्योंकि किसी जमाने में सिंचाई विभाग का दफ्तर ही उनके घर से चलता था। एडवोकेट जकी अनवर ने शिकायत भेजने के साथ ही सिवनी पुलिस थाने में रपट भी लिखायी हैं। लेकिन अभी तक जो भी कार्यवाहियां हुयीं हें उनमें सिवनी पुलिस ने कोई भी कार्यवाही नहीं की हैं। वैसे भी जकी साहब यह तो जानते ही हैं कि सिवनी पुलिस बिना कोर्ट के निर्देश के कार्यवाही करने की आदी ही नहीं रह गई हैं। चाहे मामला लड़की की गुमशुदगी पर पिता की रपट का हो या फिर किसी अल्पसंख्यक को धमकी देने का हो। एक मामले में हाईकोर्ट के तो दूसरे माले में लखनादौन कोर्ट के निर्देश पर ही सिवनी जिले की पुलिस ने कार्यवाही की हैं। इसलिये यदि सिचाई विभाग के मामले में भी जकी अनवर साहब कुछ पुलिसिया कार्यवाही कराना चाहते हैं तो कोई ऐसी हिकमत निकालें कि कोर्ट में मामला पेश हो और कोर्ट निर्देश करे तभी तो कुछ कार्यवाही होगी वरना नतीजा वही ढाक के तीन पात के समान होगा।
जिला भाजपा की कार्यकारिणी ना बनना क्या मुद्दा बनेगा-
भाजपा संगठन और उसके संविधान के जानकारों के अनुसार संगठन के अध्यक्ष को अपने निर्वाचन के तीस दिन के अन्दर अपनी कार्यकारिणी की घोषणा करना आवश्यक होता हैं अन्यथा उनके निर्वाचन पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाता हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी जी भी ठीक तीसवें दिन ही अपनी कार्यकारिणी की घोषणा कर पाये थे। प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा भी 8 मई को निर्वाचित हुये थे। 8 जून तक उनकी कार्यकारिणी की भी घोषणा होने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन भी अभी तक अपनी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं कर पाये हैं जबकि उनका निर्वाचन अप्रेल के तीसरे सप्ताह में ही हो गया था। यह इस बात का प्रमाण हैं कि भाजपा में गुटबाजी इतनी अधिक हैं कि उस पर किसी का भी काबू नहीं रह गया हैं। हर नेता अपने समर्थकों को जिले में पदाधिकारी बनाने के लिये अड़ा हुआ हैं। कुछ भाजपा नेता तो इसे मुद्दा बना कर नव निर्वाचित भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन की ही छुट्टी कराने की योजना बनाने में जुट गये हैं।
क्या त्यागी पर सध रहा है निशाना-
नाम ना आये पर काम हो जाये की तर्ज पर कुछ भाजपा नेता इन दिनों काम कर रहें हैंं।जिला भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के विरुद्ध नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा लेने का मामला दर्ज हो गया था। उन्होंने कुछ कांग्रेस नेताओं पर उन्हें फंसाने का आरोप भी लगाया था। वैसे तो इस मामले में यह प्रचारित हैं कि ये मुस्लिम भाजपा नेता तो मोहरा बना दिया गया हैं। असली निशाना तो जिला संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी पर साधने की चर्चायें हैं। बाजार में आयी एक फोन वार्ता की आडियों सी.डी. भी इन दिनों बाजार में चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। इस सी.डी. में जिला संगठन मन्त्री के उल्लेख होने का दावा भी भाजपा नेताओं का ही एक वर्ग कर रहा हैं। कुछ भाजपा नेता तो इस निशाने को साधने के लिये बाकायदा योजना बना कर अमल कर रहें हैं। कई नेताओं की यह शिकायत भी कोई गोपनीय रह गई हैं कि श्री त्यागी ने कभी भी सभी को साथ लेकर चलने के बजाय एक गुट विशेष का ही साथ दिया हैं। इस स्थानीय राजनीति के चलते उनके दुश्मनों की भी कमी नहीं हैं। कुछ भाजपा नेता तो यह भी दावा कर रहें हैं कि पूर्व भाजपा अध्यक्ष सुदर्शन बाझल भी इन्हीं आरोपों के चलते दोबारा जिला भाजपा के अध्यक्ष नहीं बन पाये वरना उनकी एक बार तो ताजपोशी हो ही सकती थी। जिला भाजपा की यह गुटबन्दी अब इतनी अधिक घातक हो चुकी हैं कि पार्टी के अपने दुश्मन को निपटाने के लिये भाजपायी कांग्रेसियों का सहारा लेने से भी नहीं चूक रहें हैं। वैसे जिले के लिये यह कोई नयी बात नहीं हैं। भाजपाइयों का ऐसा ही उपयोग जिले के इंकाई आका पिछल दस साल से करते आ रहें आ रहें हैं। लेकिन अब ऐसा भाजपा में भी होने लगना जरूर चर्चा का विषय बन गया हैं। अब इन सब बातों का क्या हश्र होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

Wednesday, June 2, 2010

शिव राज में मन्त्री विहीन शिव की नगरी अब प्रभारी अधिकारीमय होती जा रही है
सिवनी। शिव के राज में मन्त्री विहीन रहने वाली शिव की नगरी अब अधिकारी विहीन भी होती जा रही हैं। जाने वाले अधिकारी तो चले जातें हैं लेकिन आने वाले आते ही नहीं हैं। अधिकांश विभागों में ना केवल कई कई पद रिक्त पड़े हुये हैं वरन प्रभारी अधिकारियों का जो जलवा इस जिले में हैं शायद वो कहीं और नहीं होगा।
प्रदेश में भाजपा सरकार का नेतृत्व जबसे मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह के हाथों में आया हैं तब सें ही शिव की नगरी सिवनी को वो सम्मान नहीं मिल पा रहा हैं जो पहले मिला करता था।कांग्रेस शासन काल में तो अधिकांश समय दो मन्त्री ही रहा करते थे। दिग्गी राजा के दूसरे कार्यकाल के अन्तिम दिनों में तों जिले में सात सात लालबत्ती घूमा करती थीं। शिवराज सिंह जब मुख्यमन्त्री बने थे तो जिले के पांच विधायकों में से तीन विधायक भाजपा के थे। नये परिसीमन के बाद वर्तमान में जिले के चार विधायकों में से तीन विधायक भाजपा के हैं। इनमें एक शिक्षित युवा आदिवासी विधायक हैं तो दूसरी शिक्षित आदिवासी महिला विधायक हैं तो तीसरी ब्राम्हण समाज की विधि स्नातक महिला विधायक हैं जो कि सांसद भी रह चुकीं हैं। प्रदेश के चारों सांसदों में से विधायक बनी नीता पटेरिया ही एकमात्र शेष बचीं हैं जिन्हें शिवराज ने मन्त्री नहीं बनाया हैं। अन्य तीन गौरीशंकर बिसेन,रामकृष्ण कुसमारिया और सरताज सिंह तीनों ही कबीना मन्त्री बनाये जा चुकें हैं।
मन्त्री नहीं बनने का दर्द तो शिव की नगरी सिवनी झेल ही रही थी लेकिन शिव राज में अब तो अशिकारी विहीन भी होती जा रही हैं। जिले के अधिकांश विभागों का नेतृत्व या तो प्रमोटी अधिकारी कर रहें हैं या फिर प्रभारी अधिकारी जुगाड़ जमा कर बैठे हुये हैं। डॉ. रमनसिंह सिकरवार इस जिले के पहले नॉन आई.पी.एस. पुलिस अधीक्षक हैं। जिले में आठ उप जिलाध्यक्षों के पद हैं जो वर्तमान में तो सभी भरे हुयें हैं लेकिन एस.डी.एम.जैन तथा अतिरिक्त कलेक्टर अलका श्रीवास्तव का तबादला हो चुका हैं और उनके बदले किसी की नियुक्ति नहीं हुयी हैं। सिंचाई विभाग में मुख्य अभियन्ता से लेकर अनुविभागीय अधिकारी तक अधिकांश प्रभारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग में तो प्रभारी सी.एम.ओ. डॉ.पटेरिया,जो कि भाजपा विधायक नीता पटेरिया के पति हैं, के स्थान पर डॉ. चौहान प्रभारी बन कर आ चुके हैं। इस विभाग में अधिकांश पद खाली पड़े हैं। जिससे स्वास्थ्य सेवायें चरमरा गईं हैं।
आबकारी और वन विभाग में कमान अधिकांश प्रमोटी अधिकारियों के हाथों में हैं। लोक निर्माण और ग्रामीण यान्त्रिकी विभाग में कार्यपालन यन्त्री तो नियमित हैं लेकिन एस.डी.ओ. के पद पर प्रभारी अधिकारी की परंपरा बदस्तूर जारी हैं। शायद ही जिले में कोई भी कॉलेज ऐसा होगा जिसमें पढ़ाने वालों के सभी पद भरे होंगें। सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग ऊषा सिंह तो ऐसी बहुचर्चित अधिकारी रहीं जिन्हें पूरी भाजपा भी हटा नहीं पायी थी और जब वे गईं तो अपने मन से ही गई और कई दिनों तक उनसे चार्ज लेने वाले को इन्तजार करना पड़ा। ऐसा लगता हैं कि शिवराज शिव की नगरी सिवनी के लिये मन्त्री तो मन्त्री अधिकारी भी प्रभारी देकर ही काम चलाना चाहते हैं। ऐसी परिस्थिति में मतदाता अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहा हैं।
विभिन्नता में एकता ही भारत की विशेषता हैं : जातिगत आधार पर जनगणना कराना घातक होगा : आशुतोष
अलग अलग धर्मों को मानने वाले,अलग अलग भाषाओं को बोलने वाले,विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न जातियों के लोग दुनिया के जिस देश में एक होकर रहते हैं उसे ही भारत कहते हैं। विभिन्नता में एकता ही देश की विशेषता हैं। देश को आजाद करते वक्त अंग्रेजों ने फूट के जो बीज बोकर गये थे हालांकि वो बहुत अधिक फले फूले तो नहीं लेकिन आज भी देश के अन्दर ऐसे प्रयास करने वालों की कमी नहीं हैं फर्क है तो सिर्फ इतना कि तरीके बदल गये हैं।
देश की राजनैतिक सत्ता पर शार्ट कट से काबिज होने के राजनीतिज्ञों के प्रयासों ने देश की इन विशेषताओं को समय समय पर खंड़ित करने की कोशिशें की हैं। कभी क्षेत्रीयता के आधार पर राजनैतिक दल बनाये गये तो कभी जातीय आधार पर राजनैतिक ध्रुवीकरण किया गया और फिर सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर उन्हें भी समेटने के प्रयास किये गये जिनके खिलाफ नफरत पैदा कर जाति को एकत्रित किया गया था। भाषा के आधार पर भी राजनैतिक दलों को चलाने की कोशिशें की गईं तो कभी प्रथृक राज्य बनाने की मांगें उठी।कभी मंड़ल के नाम पर राजनीति की गई तो कभी कमंड़ल के नाम पर। हिन्दू मुसलमान के नाम पर राजनीति करने के प्रयास तो आजादी मिलने के बाद से ही चालू हो गये थे। इन सब हथकंड़ों से एक सीमित वर्ग और क्षेत्र के मतदाता को आसानी से ज्यादा प्रभावित किया जा सकता हैं क्योंकि इसमें राष्ट्रीय स्तर की सोच की आवश्यक्ता ही नहीं रहती हैं। इसीलिये आजादी के बरद अभी तक देश के कई प्रदेशों में क्षेत्रीय दलो को सत्ता पाने में सफलता मिल गई हैंं भले ही उन दलों का पंजीयन राष्ट्रीय हो लेकिन प्रभाव क्षेत्र क्षेत्रीय ही रहा हैं। अंर्तप्रान्तीय विवादों और किसी राष्ट्रीय समस्या पर ऐसे संकुचित विचार के राजनैतिक दल और राजनेता राष्ट्रीयता को क्षेत्रीयता की तुलना में खड़ा करके उसे बौना साबित करने के प्रयास करते हैं।
हिन्दू और मुसलमान के बीच राजनीति करने वालों को जब हिन्दुओं में ही अगड़ो और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच राजनीति करना ज्यादा सुविधाजनक लगा तो वे इससे भी नहीं चूके। और बाद में तो स्थिति यहां तक बन गईं कि पिछड़े वर्ग में भी जिस प्रदेश में जिस जाति विशेष का बहुमत दिखा तो बाकी पिछड़ी जातियों को छोड़ पिछड़ों के मसीहा बनने वाले नेताओ ने उस जाति विशेष के नेता बनने में कोई संकोच नहीं किया।
अभी 2010 में देश में जनगणना का काम जारी हैं। जात पात और अगड़ों पिछड़ों की राजनीति करने वाले नेताओं का एक बड़ा वर्ग जातिगत आधार पर जनगणना कराने के लिये सरकार पर दबाव बना रहा हैं। केन्द्र सरकार भी इस मामले में दो फाड़ हैं। इसलिये इस समय यह एक ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दा बन गया हैं कि जातिगत आधार पर जनगणना होनी चाहिये कि नहींर्षोर्षो वर्तमान में मतदाता सूची में काफी मेहनत करने के बाद सिर्फ मुस्लिम मतदाताओं की निश्चित संख्या निकाली जा सकती हैं वो भी नामों में उजागर दिखते अन्तर के कारण। इसी में हाय तौबा मची रहती हैं। जिन क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता निर्णायक स्थिति में होते हैं उन क्षेत्रों में यह गिनती का खेल टिकिट मिलने के पहले से शुरू हो जाता हैं। पार्टियों के मुस्लिम नेता इस संख्या को बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं ताकि टिकिट मिल जाये और ना मिले तो भी मुस्लिमों को लामबन्द करके सबक सिखाया जा सके। मुस्लिम वोटरों का बटवारा कर चुनाव जीतने की रणनीति बनाने वाले दल भी इस संख्या के अनुसार इन मतों के विभाजन और अपने जीतने का ताना बाना बुनने लगते हैं। यदि जातिगत आधार पर जनगणना करायी जाती हैं तो हर जाति के नागरिकों की संख्या साफ साफ दिखने लगेगी और अभी जो काम राजनैतिक दल अनुमान से करके जातिगत सन्तुलन बिठालने का काम करते हैं उन्हें और अधिक सुविधा मिल जायेगी। ऐसा होने से जातिवाद का जहर इस बुरी तरह से फैल जायेगा कि समाज को एक जुट रख पाना मुश्किल हो जावेगा। ऐसे में देश के प्रजातन्त्र को बहुजन हिताय बहुजन सुखाय से सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की ओर ले जाने के प्रयासों पर कुठाराघात हो जायेगा और हम एक बार फिर उस आदम युग की ओर अग्रसित हो जायेंगें जहां जात पात के हिसाब से ही सम्मान मिला करता था।
जात पात के असर को काम करने के लिये बाबू जयप्रकाश नारायण ने देश में अपील की थी कि लोग अपना सरनेम लिखना बन्द कर दें। देश के लाखों युवकों ने उस दौरान सरनेम लिखना बन्द भी कर दिया था। लेकिन यह कितनी अफसोसजनक बात हैं कि जयप्रकाश जी के आन्दोलन से नेता बने ऐसे तमाम राजनेता ही आज जातिगत आधार पर जनगणना कराने की मांग कर रहें हैं। मेरा अपना तो यह मानना हैं कि सरकार को यह मांग सिरे से नकार देना चाहिये और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की ओर देश के प्रजातन्त्र को आगे बढ़ाने का काम जारी रखना चाहिये।
आशुतोष वर्मा
16 शास्त्ऱी वार्ड
सिवनी म.प्र.
मो. 09425174640