Monday, December 19, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

फोर लेन के मुद्दे को सिर्फ राजनैतिक हथियार बना कर राजनीति करने की छूट जनता किसी को भी नहीं दे सकती

इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की यह संयुक्त यात्रा सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है आई.डबल्यू .ई. योजना -इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। बी.ओ.टी. याने बिल्ट,आपरेट और ट्रांसफर। लगाओ, चलाओ और वापस करो। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इसका फुल फार्म इनवेस्ट,विन और अर्न याने लगाओ, जीतो और कमाओ। जिस तरह से आज निर्वाचित जनप्रतिनिधि काम कर रहें हैं उससे आम आदमी के मन में यह धारणा काम करने लगी हैं कि अब कोई जनसेवा करने के लिये जन प्रतिनिधि नहीं बनता वरन जीतते ही वह धन सेवा में जुट जाता हैं। जैसे जैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया गया वैसे वैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण हुआ हो या नहीं लेकिन भ्रष्टाचार विकेन्द्रीकरण जरूर होता जा रहा हैं। इसलिये आज जहां देखो वहां भ्रष्टाचार का रोना रोते लोग दिख जाते हैं। अब इसका कारण क्या है? इस पर लोग अलग अलग बातें कहते दिखते हैं। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि महंहगें चुनावों और पार्टी के द्वारा थोपी जाने वाली आर्थिक मांगों का रोना रोते हें तो वहीं दूसरी ओर जब लोग “आजई बनिया कालई सेठ“ होते जनप्रतिनिधियों को देखतें हैं तो उन्हें ये सारे तर्क बेमानी लगतें हैं। भ्रष्टाचार मिटाने का दावा तो सभी करतें हैं लेकिन इसकी शुरुआत कहां से करें? यह कोई भी नहीं बता पाता हैं। राजनीति में तो अब भ्रष्टाचार को बेशर्मी से शिष्टाचार कहने से कोई नहीं चूक रहा हैं। इस संबंध में तो गायत्री परिवार की यही मंत्र काम आ सकता हैं कि “हम सुधरेंगें,जग सुधरेगा“। यदि हमने खुद ना सुधरने की कसम खा ली है तो फिर जग के सुधरने की बात करना ही बेमानी होगा।

पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की दिल्ली यात्रा सुर्खियों में -नगरपालिका का प्रतिनिधिमंड़ल दिलली से लौटकर आ गया हैं। दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ द्वारा नगर निगम,नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था जिसमें जलकर्म सभापति राजा पराते , कांग्रेस पार्षद दल के नेता शफीक खान के अलावा इंका पार्षद इब्राहिम खान का समावेश था। इस यात्रा के दौरान इस प्रतिनिधि मंड़ल ने अलग से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से भेंट कर शहर की समस्याओं से अवगत कराया और शहर में रेल्वे ओवर ब्रिज के साथ सीवर लाइन तथा सड़कों के लिये अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने की मांग भी की हैं।बताया जाता है कि इस दिल्ली यात्रा में पालिका के पूर्व अनुभवियों की टीम भी गयी थी जिसके फोटो भी अखबारों की सुर्खी बनी थी। लेकिन इस टीम का कहीं विज्ञप्ति में उल्लेख नहीं किया गया हैं। लोगों का कयास हैं कि पुरानी अनुभवी टीम ने पर्दे के पीछे कोई कारगर भूमिका निभायी होगी। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम ने क्या गुल खिलाये हैं और इसका शहर को कितना और क्या लाभ होगा? यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा। पालिका की योजनाओं को जब तक प्रदेश सरकार अपनी सिफारिश के साथ केन्द्र सरकार को नहीं भेजेगी तब तक राशि मिलने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता हैं। शहर के लोगों की तो यही अपेक्षा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रोड़ शो करके भाजपा के लिये वोट मांगें थे उसी तरह जल्दी ही प्रदेश सरकार योजनाओं को दिल्ली भेजे और दलीय भावनासे परे हट कर कांग्रेस के लोग केन्द्र से राशि दिलवायें ताकि स्वर्णिम मध्यप्रदेश की परिकल्पना के अनुसार स्वर्णिम शहर भी बन सकें। वैसे तो पालिका की युवा टीम से शहर के लोगों को बहुत उम्मीदें हैं।

फोर लेन सिर्फ राजनीति करने की छूट किसी को भी नहीं-फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने एक प्रतिनिधि मंड़ल दिल्ली ले जा कर भू तल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी, पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन और शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से भेंट कर मसले को जल्दी निपटाने का मांग की थी। उसके बाद दिल्ली से भोपाल आये वन विभाग के अधिकारी राजेश गोपाल सहित एनएचएआई के अधिकारियों की हरवंश सिंह से उनके ही बंगले भी हुयी भेंट के समाचार भी अखबारों में छपे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की सीईसी के सदस्य के रूप में राजेश गोपाल के प्रदेश सरकार के मुख्यसचिव को भेजे गये पत्र के आधार पर ही फोर लेन का काम पूरे जिले में रुक गया था। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ कुरई घाट का 8.9 कि.मी. का हिस्सा ही विचाराधीन था जिस पर भी कोर्ट ने स्टे नहीं दिया था।इसके बाद हरवंश समर्थकों का दावा है कि दिल्ली में हरवंश सिंह ने वन एवं पर्यावरण विभाग और तथा एनएचएआई के अधिकारियोंकी संयुक्त बैठक कर पूरे मामले में सर्वमान्य हल निकाल लिया हैं और जल्दी ही पूरा रुका हुआ काम शुरू हो जावेगा। लेकिन जानकार लोगों का दावा है कि एनएचएआई का नया प्रस्ताव अभी जिले में ही वन विभाग के पास विचाराधीन है जिस पर परीक्षण किया जा रहा हें। फिर यह प्रदेश के वाइल्ड लाइफ बोर्ड के भोपाल जायेगा और वहां नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मामला दिल्ली भेजा जायेगा जहां अंतिम स्वीकृति के बाद ही काम शुरू हो पायेगा। दूसरी तरफ भाजपा यह दावा कर रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इसे पूरा कराने की पूरी कोशिश कर रहें हैं। शिवराज सिंह ने भी सिवनी के कुछ लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलाने की बात एक साल पहले कही थी। लेकिन ना तो ले जाने वाले दिल्ली ले गये और ना ही जाने वालों ने कभी शिवराज से यह जानने की जरूरत महसूस की कि वे उन्हें कब दिल्ली ले जायेंगें। और मामला अखबारों की सुर्खियां भर बन कर रह गया। बीते दिनों जिले से बहुत कुछ छिना हैं। लेकिन मिला कुछ भी नहीं हैं।इससे दुखी जिले के लोगों ने फोर लेन के संघर्ष में ऐतिहासिक बंद कर एक मिसाल कायम की थी। लेकिन तब मामला कोर्ट में लंबित होने कारण केन्द्र और राज्य सरकार के पास यह बहाना था कि चाहते हुये भी हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अब जबकि मार्च 2011 में कोर्ट ने आपत्तिकर्त्ता की याचिका खारिज कर दी हैं तब इस विलंब के लिये किसी के भी पास कोई बहाना नहीं हैं। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी यदि मामला अभी जिले में लंबित है तो इसके लिये भला जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती हैं? बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

Monday, December 12, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

शिवराज और सरकार के खिलाफ विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने की अनुमति नहीं दी जाती है?

नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है।यह भी चर्चित है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। कुलस्ते ने कांग्रेस और राष्ट्रीय नेतृत्व पर जम हर निशाने साधे लेकिनइस पर कांग्रेस की चुप्पी चर्चा में हैं। पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं।प्रदेश अध्यक्ष मौर्य ने इंका और भाजपापर निशाना साधते हुये कहा कि दोनों की करनी एक ही है। गौगपा ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की है। एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं।

जिले में कुलस्ते की आदिवासी सम्मान यात्रा चर्चित-नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है। नये मंड़ला संसदीय क्षत्र में नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव एवं सिवनी जिले की लखनादौन एवं केवलारी विस सीट के अलावा मंड़ला जिले की पांचः विस सीटें आती हैं। यह भी एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। जिले की लखनादौन विस सीट से कुलस्ते को भारी मतों से हारना पड़ा था। इसके साथ ही वे अपने गृह जिले मंड़ला की पांचों विस सीटों से भी चुनाव हार गये थे। गोटेगांव के बाद कुलस्ते की यात्रा ने लखनादौन एवं केवलारी क्षेत्र में आयोजित सम्मान समारोहों में हिस्सा लिया। कुलस्ते ने कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय नेतृत्व को कठघरे मे खड़ा करते हुयें कई आरोप लगाये और कहा कि कांग्रेस आदिवासी और दलितों को बिकाऊ समझती हैं। हमें समय आने पर बता देना है कि हम बिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के लिये कांग्रेस ने हमें प्रलोभन दिया और जब हमने ादन में उसे उजागर किया तो हमें ही जेल में डालकर सरकार ने प्रजातंत्र का अपमान किया हैं। जिसका बदला हम लेकर रहेंगें। इन सब आरोपों पर कोंग्रेस की चुप्पी भी कम रहस्यमय नहीं हें। वैसे भी पूर्व में यह आरोप लगते रहें हैं कि हरवंश और कुलस्ते के बीच परिसीमन के समय से ही नूरा कुश्ती चलती रही हैं। जिला भाजपा द्वारा जिले में आयोजन की भारी तैयारियां की गयी थी। उनके इस आयोजन में जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायक नीता पटेरिया, शशि ठाकुर,कमल मर्सकोले, मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर,पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक टेकाम सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुये। भाजपा के सभी नेताओं ने संप्रग सरकार और कांग्रेस पर जमकर निशाने साधे और उसे प्रजातंत्र का हत्यारा बताया और यह भी कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार को हर जगह बढ़ावा दे रही हैं। कुछ जगह जनता और आदिवासियो की नगण्य उपस्थिति भी अखबारों की सुर्खी बनी रहीं हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चित रहा कि जिला भाजपा का इस आयोजन के दौरान फील्ड मेनेजमेंट से कहीं अच्छा मीडिया मेनेजमेंट रहा हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चित है कि आदिवसी सम्मान यात्रा में जिले के आदिवासी विस क्षेत्र बरघाट और आदिवासी बाहुल्य वाली सिवनी विस क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में कुलस्ते ने अपना कार्यक्रम क्यों नहीं रखा? भाजपा के आदिवासी नेता कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र तक ही इस अभियान को सीमित रखा इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जारी हैं।

इंका भाजपा का विज्ञप्ति युद्ध शवाब पर -पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। जहां एक ओर प्रेम तिवारी हरवंश सिंह की कारगुजारियों पर आक्रमण कर रहें हैं तो दूसरी ओर इमरान पटेल ने नीता पटेरिया पर निशाना साधना शुरू कर दिया हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भाजपायी गुटबाजी में प्रेम तिवारी विधायक नीता पटेरिया के खेमें के माने जाते हैं। इसीलिये नगर इंकाध्यक्ष ने नीता को कठघरे में खड़ा करने की योजना बना रखी हैं। इस विज्ञप्ति युद्ध में आरोपों के पूरे जवाब देने के बजाय सुविधानुसार जवाब देने और अपनी ओर से सवाल भी दागने से भी कोई नहीं चूक रहा हैं।

बसपा ने भी दी जिले में राजनैतिक दस्तक -बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आई.एस.मौर्य ने इस विशाल आम सभा में कांग्रेस और भाजपा को जम कर कोसा और कहा कि इन दोनों दलों की करनी में कोई फर्क नहीं हें। दोनों ही दलों की सरकारों ने दलितों को छला है और अपनी तिजोरियां भरी हैं। बहन मायावती ने जब इन वर्गों के उत्थान के लिये कड़ी मेहनत शुरूकी है तो वे दोनों दलों की आंखों में खटकने लगी हैं। हमें आदिवासियों और दलितों के उत्थान के लिये उनके शैक्षणि,आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिये काम करना हें तभी बाबा साहेब का सपना साकार होगा।

शिवराज के खिलाफ तो आंदोलन कर सकते हो पर हरवंश के खिलाफ नहीं -गौगपा ने विस उपाध्यक्ष और केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में आयोजित किये जाने और शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की हें। गौगपा ने इसके अलावा 12 अन्य बिन्दुओं पर भी जांच की मांग की हैं। गौगपा के प्रवक्ता विवेक डहेरिया ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर यह आरोप लगाये थे कि छपारा जनपद पंचायत के सी.ओ. ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन पर शासकीय आयोजन किया और शासकीय धनराशि खर्च की है जो कि अनुचित हैं। इस अवसर पर विधायक निधि से पंचायतों को बांटे गये टंेकरो पर से लिखे हुये इस वाक्य को मिटाने की मांग की है जिसमें यह लिखा हुआ है कि हरवंश सिंह के जन्म दिन पर ये टेंकर दिये गये हैं। गौगपा प्रवक्ता ने एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन इंका विधायक हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और इंका विधायक हरवंश के बीच सांठ गांठ के आरोप इंका और भाजपा में तो लगते ही रहें हैं लेकिन अब गौगपा ने भी इसी ओर इशारा करते हुये प्रशासन और सरकार को कठघरें में खडा़ किया है। लेकिन कहीं भी और कोई भी ऐसे आरोप लगाते रहें लेकिन उससे किसी को भी फर्क नहीं पड़ता हैं। सियासत सियासत के तरीके से चलती जिसमें आरोप लगाने से आज कल कुछ नहीं होता क्योंकि नूरा कुश्ती नेताओं की सुविधा के हिसाब से होती हैं इसमें पार्टियों का ख्याल रखना जरूरी नहीं होता हैं।

Monday, December 5, 2011

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पेंच को लेकर नीता के सवाल पर सदन में मंत्री का जवाब और सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा में अंतर को लेकर शुरू हो गयीं हैं चर्चायें

भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक लगाया गया प्रश्न और सिचायी मंत्री का जवाब जन चर्चा में बना हुआ हें।इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी। जिसे टाला जा रहा हैं।सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदर सिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने जरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। एफ.डी.आई. के विरोध में जिला भाजपा द्वारा समर्थन देने बाद भी उसकी दोरही भूमिका चर्चित हैं। ना तो कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला और ना ही उन्होंने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही बंद रखे।ऐसा क्यों हुआ इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें सियासी हल्कों में जारी हैं।

पेंच को लेकर सदन के अंदर और बाहर के बयान हुये चर्चित -विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक प्रश्न लगाया गया था। इस प्रश्न का जवाब देते हुये जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि प्रदेश सरकार इस योजना को चालू रखे हुयी हैं। लेकिन यह योजना कब तक पूरी होगी? इस सवाल का जवाब वे यह कहकर टाल गये कि भू अधिग्रहण के मामलों में विलंबहोने के कारण यह नहीं बताया जा सकता कि येयोजना कब तक पूरी होगी। विधानसभा में लगाये गये प्रश्न को लेकर भी कुछ सवाल खड़े हो गये हैं। पहला सवाल तो यह है कि नीता पटेरिया ने यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि क्या प्रदेश सरकार ने लागत बढ़ने के कारण बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था या नहीं? यह सर्वविदित हैं कि प्रमुख सचिव आर.एस.जुलानिया ने एक वीडियो कांसफ्रेसिंग में यह निर्देश दिये थे किप्रदेश सरकार ने इस योजना को बंद करने के निर्देश केन्द्र को भेज दिये हैं। इसनिर्देश के बाद ही मुख्य अभियंता के कार्यालय से दूसरी तिमाही के लिये आवंटित राशि में से 20 सितम्बर 2011 तक खर्च की गयी 327 करोड़ रु. की राशि के बाद शेष बची एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि समर्पण करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी जिसे प्रमुख सचिव ने प्रमुखअभियंता सिंचायीको अग्रेषित कर दिया था और प्रमुख अभियंता ने मुख्यअभियंता सिचायी को भेज दिया था। जिसपर मुख्य अभियंता ने यह जवाबदेदिया था इस कार्यालय से केन्द्र सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया हैं। यहां यह विशेषरूप से उल्लेखनीय हैं किकेन्द्र सरकार को कोई भी प्रस्ताव प्रदेश सहकार से ही भेजा जाता हैं मुख्यअभियंता ऐसा कोई प्रस्ताव सीधे केन्द्र सरकार को भेज ही नहीं सकते हैं। यह सवाल उठनाभी स्वभाविक ही हैं कि यदि प्रदेश सरकार की इस योजना को बंद करने की कोई योजना नहीं थी तो फिर मुख्य अभियंता के कार्यालय से स्वीकृत राशि में 1 करोड़ 22 लाख रुपये सरेंडर करने का प्रस्ताव शासन को क्यों भेजा गया?यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अपनी रथ यात्राकेदौरान जब पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी छिंदवाड़ा आये थे और मंच से पेंच परियोजना बंद की बात उठी थी तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दहाड़ कर कहा था कि कोई भी माई का लाल इस परियोजना को बंद नहीं करा सकताऔर यह योजना 2013 तक पूरी कर ली जायेगी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ पर अड़ंगे लाने का आरोप भी लगाया था। लेकिन जब विधानसभा में उनकी ही पार्टी की विधायक नीता पटेरियाने इस योजना के पूरे होने के बारे सवाल पूछा तो सदन के अंदर उनकी ही सरकार के मंत्री अवधि बताने को यह कह कर टाल गये कि भू अर्जन के मामलों में विलंब होने के कारण यह अवधि नहीं बतायी जा सकती। प्रदेश में भाजपा सरकार का यह आठवां साल हैं लेकिन सरकार के पास इय बात भी कोई जवाब नहीं हैं कि उनकी सरकार का प्रशासनिक अमला इन आठ सालों में भी भूअर्जन के मामले निपटाक्यों नहीं पाये? सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदरसिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं।

हर हाल में केवलारी विधानसभा जीतने की बात कर गये मेनन -प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री अरविंद मैनन का दौरा सियायी हल्कों में चर्चित हैं। वैसे तो यह दौरा वोट फार नोट कांड़ में फंसे भाजपा नेता फग्गन सिंह कुलस्ते के लखनादौर और केवलारी प्रवास को लेकर था लेकिन बताते हैं कि मेनन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस बार पार्टी को चारों सीटों पर विजय मिलनी चाहिये। वैसे भी जिले में तीन सीटें तो भाजपा के पास हैं ही सिर्फ केवलारी सीट से इंका के हरवंश सिंह विधायक है जो किविस उपाध्यक्ष हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। वैसे भाजपायी हल्कों में सन 1993 के चुनाव से ही यह चर्चा आम रही हैं कि केवलारी में हर चुनावमें भाजपा को भाजपा ही हराती हैं। यह बात अलग है कि हर बार चेहरे बदल जाते हैं। कुछ दिनोंपहले केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन नेजरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। अब यह तो खोज का विषय है कि वे खुद खामोश हो गयें हैं या उन्हें खामोश करा दिया हैं? यदि ऐसा ही रहा तो मेनन जी की जीतने की बात एक बार फिर धरी की धरी रह जायेगी। हां ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। इंका और भाजपा के बीच सुविधा का संतुलन दसों सालों से चलते आ रहा हैं जो कि अगली बार रुकेगा इसकी संभावना कम ही दिख रही हैं।

बंद को लेकर भाजपा की भूमिका चर्चित-एफ.डी.आई.याने खुरदा व्यापार में विदेशी निवेश को लेकर बंद में भाजपा की दोहरी भूमिका चर्चित है। व्यापारियों द्वारा आहूत बंद को जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन जैन ने भाजपा का समर्थन घोषित किया था। लेकिन सिवनी में ना तो बंद सफल रहा और ना ही समर्थन देने के बाद कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला।और तो और भाजपायियों के व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह ऐसे खुले रहे मानो वे केन्द्र सरकार की इसनीति के समर्थन में हों और मजबूरी में उन्होंने बंद का कागजी समर्थन दिया हो। भाजपा के व्यापारिक प्रकोष्ठ ने जरूर बंद के दूसरे दिन कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री जरूर कर ली थी। अब ऐसा क्यों हुआ? इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जरूर राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं।

Monday, November 14, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

वन मंत्री सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार कोई भाजपा नेता नहीं ब्लकि इंका विधायक हरवंश सिंह ही दिखे

तेदूं पत्ता बोनस कार्यक्रम के लिये आये प्रदेश के वन मंत्री सरताज सिंह का दौरा भी राजनैतिक क्षेत्रों में विवादित होकर रह गया हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश के बर्रा स्थित निवास में सरताज सिंह का भोजन कार्यक्रम विवाद में रहा। नीता पटेरिया को छोड़कर भाजपा के सभी जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का अघोषित बहिष्कार कर दिया था। सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार भी किसी भाजपा नेता के बजाय सिर्फ हरवंश सिंह ही दिखे और कांई नहीं। ऐसे में यदि नूरा कुश्ती के चर्चे आम तो भला क्या गलत है? जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन भी 11 11 11 के विशेष दिन पड़ा तो इसका आयोजन भी विशेष रहा। शासन द्वारा दी जाने वाली विधायक निधि से हरवंश सिंह ने अपने केवलारी क्षेत्र में पड़ने वाली 21 पंचायतों को टेंकर दिये। यह सही है कि राजशाही के दौरान राजा अपना या अपने बच्चों का जन्म दिन मनाते थे औा अपने खजाने से अपनी जनता को खैरात बांटा करते थे। लेकिन लोक शाही में एक लोक सेवक द्वारा शासकीय आयोजन कर सरकारी पैसे से टेंकर बांटना कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं।

क्षेत्रीय भाजपा विधायक शशि ठाकुर भी बोनस वितरण कार्यक्रम में रहीं अनुपस्थित-तेदूं पत्ता बोनस कार्यक्रम के लिये आये प्रदेश के वन मंत्री सरताज सिंह का दौरा भी राजनैतिक क्षेत्रों में विवादित होकर रह गया हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश के बर्रा स्थित निवास में सरताज सिंह का भोजन कार्यक्रम विवाद में रहा। हालांकि हरवेश सिंह ने इंकाइयों के साथ साथ भाजपाइयों को भी भेाज में आमंत्रित किया था लेकिन अधिकांश भाजपाइयों ने इसमें शरीक होना उचित नहीं समझा। जिले के भाजपा नेताओं का आरोप हैं कि वन मंत्री ने भाजपा के नेताओं और जन प्रतिनिधियों को कोई तव्वजोनहीं दी। जिला भाजपा के संगठन के साथ ही जन प्रतिनिधियों को भी उचित महत्व नहीं दिया गया। क्षेत्रीय भाजपा विधायक शशि ठाकुर के स्थान पर विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह से अध्यक्षता कराना उन्हें रास नहीं आया और लखनादौन में रहते हुये भी उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होना उचित नहीं समझा। इसी तरह महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर जिन्हें कि कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त हैं उन्हें विशिष्ट अतिथिबनाना और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त हरवंश सिंह से अध्यक्षता कराना भी उनके समर्थकों को रास नहीं आया और वे लखनादौन ना रुक कर सीधे जबलपुर चले गये। क्षेत्रीय सांसद रहते हुये भी इंका के बसोरी सिंह मरकाम एवं भाजपा के के.डी.देशमुख का तो नाम ही कार्ड से गोल कर दिया गया था। भाजपा विधायक कमल मर्सकोले एवं भाजपा के ही नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने भी कार्यक्रम किनारा कर लिया था। पूर्व वन मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसन, जिन्होंने नई तेदूं पत्ता नीति बनायी थी जिसे लेंकर भाजपा कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुये अपने आपको आदिवासियों का बड़ा हितैषी बताती हैं उन्हें भी कारर्यक्रम में दर किनार कर दिया गयश। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि बिसेन ही हरवंश सिंह के खिलाफ भाजपा की ओर से केवलारी से चुनाव लड़े थे। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन सहित संगठन के सभी पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का अघोषित बहिष्कार कर दिया। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी की विधायक नीता पटेंरिया जरूर कार्यक्रम में सम्मलित हुयी जिस पर मीडिया ने 63 और 36 के आंकड़े का सवाल उठाते हुये समाचार भी प्रकाशित हुये जिसका प्रतिवाद करते हुये नीता पटेरिया ने यह सफाई भी दी कि उनके हरवंश सिंह से संबंध 36 के थे, हैं और रहेंगें। ऐसा नहीं हैं कि भाजपा के सात साल के कार्यक्रम में यह कोई पहला मौका हें जब भाजपाइयों को यह लगा हो कि आज भी उनकी सरकार नहीं हैं। पहले भी कई बार ऐसे अघोषित बहिष्कार भाजपाई कर चुके हें लेकिन बार बार इसकी पुनरावृत्ति होने से सियासी हल्कों में तरह तरह के सवाल उठना स्वभाविक हैं। वैसे भी इंका विधायक हरवंश और भाजपा के बीच नूरा कुश्ती के समाचार कोई नये हें। गोदे में इंका की ओर से तो एक ही पहलवान हरवंश सिंह रहते लेकिल समय समय पर भाजपा की ओर के पहलवान बदलते रहतें हैं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि सरताज सिंह जब नरसिंहपुर होशंगाबाद लोस क्षेत्र से चुनाव लड़ा करते थे तब इंका प्रत्याशी रामेश्वर नीखरा और स्व. अर्जुन सिंह के चुनाव संचालकों ने कई इंका नेताओं पर चुनाव में भीतरघात करने के आरोप लगाये थे। भीतरघात करने के माहिर नेता पार्टी में इन आरोपों से बच भले ही गयें हों लेकिन जीतने वाला तो उनका एहसान मानता ही हैं। सरताज सिंह के इस कार्यक्रम के बारे में अब यह बात लोगो की समझ से परे है कि भाजपा और इंका के आदिवासी नेताओं की अनुपस्थिति के बाद भी प्रदेश की शिवराज सरकार अपने आप को आदिवासियों का शुभचिंतक भला कैसे बता पायेगी? जबकि उनके वन मंत्री सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार भी किसी भाजपा नेता के बजाय सिर्फ हरवंश सिंह ही दिखे और कांई नहीं। ऐसे में यदि नूरा कुश्ती के चर्चे आम तो भला क्या गलत है? भाजपायी हल्कों में यह भी चर्चा है कि जिला संगठन और अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी तत्काल ही सारी जानकारी प्रदेश के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी हैं। अब देखना यह है कि प्रदेश भाजपा का आलकमान इस मामले में वन मंत्री के खिलाफ कोई कार्यवाही करता हैं या फिर चुप रह कर हरवंश और भाजपाइयों की नूरा कुश्ती जारी रहने के पुख्ता होने का प्रमाण देता हैं।

जन्मदिन पर विधायक निधि से बंटे टेंकर-जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन भी 11 11 11 के विशेष दिन पड़ा तो इसका आयोजन भी विशेष रहा। शासन द्वारा दी जाने वाली विधायक निधि से हरवंश सिंह ने अपने केवलारी क्षेत्र में पड़ने वाली 21 पंचायतों को 65 हजार रु. की लागत वाले 4 हजार लीटर की क्षमता वाले टेंकरों की चाबी सौंपी। उनकी योजना है कि अपने क्षेत्र की हर ग्राम पंचायत को सांसद एवं विधायक निधि से चुनाव के पहले टेंकरों से लैस कर दिया जाये। विकास कार्यों के लिये विधायक निधि से पैसा देना कोई गलत बात नहीं हैं। लेकिन राजा महाराजाओं जैसे अपने जन्म दिन पर आयोजन कर शासकीय राशिसे खैरात की भांति टेंकर बांटने को लेकर विवाद चल पड़ा हैं। यह सही है कि राजशाही के दौरान राजा अपना या अपने बच्चों का जन्म दिन मनाते थे औा अपने खजाने से अपनी जनता को खैरात बांटा करते थे। लेकिन लोक शाही में एक लोक सेवक द्वारा शासकीय आयोजन कर सरकारी पैसे से टेंकर बांटना कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं। इस मामले में मीडिया में हल चल मची और इसे विधायक निधि का दुरुपयोग बताया गया लेकिन भाजपा सहित अन्य दलों की इस मामले में चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चित हैं। जरा जरा सी बात गज गज भर की विज्ञप्तियां जारी करने वाले प्रवक्तागण ना जाने क्यों चुप बैठे हैं? इस मामले को कहीं किसी लेबल पर उठाया जायेगा या नहीं ? इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं हैं। छपारा ब्लाक का एक बड़ा हिस्सा सिवनी विस क्षेत्र में भी आता हैं जिसकी विधायक प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया हैं वे इस मामले को उठाती हैं या नहीं? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में उत्सुकता हैं क्योंकि सरताज सिंह के कार्यक्रम में उनकी अकेली उपस्थिति को लेकर सवाल उठाये गये थे जिनके जवाब देने का यह एक अवसर हैं।













Monday, November 7, 2011

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जोशी के बारे में हरवंश के बहुचर्चित भाषण के कारण क्या फोर लेन की गेंद जोशी ने नाथ के पाले में डाल दी?

क्या छिंदवाड़ा में जोशी के लिये दिये गये हरवंश सिंह के चर्चित भाषण ने ही फोर लेन की मांग को दरकिनार करवा दिया? और जोशी ने बात कमलनाथ के पाले में डालकर मुक्ति पा ली। कमलनाथ को कातिल बताने वालों को उनके दरबार में ले जाकर हरवंश सिंह ने नाथ को खुश करने का जो प्रयास किया उसके कारण कमलनाथ एक बार फिर जिले में विवादित बना दिये गये हैं। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी विधायकनीता पटेरिया के समर्थक माने जाने वाले नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी की इंका विधायक हरवंश सिंह के मामले में अपनाये गये तीखे तेवर सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फलाने नेता के आर्शीवाद से और फलाने नेता की अनुशंसा से पद मिलने पर बधायी छपने का चलन तो आज कल हर पार्टी में आम हो गया हैं। ऐसे में गीता सिंह को प्रदेश कांग्रेस का महामंत्री बनाये जाने पर इंकाइयों की चुप्पी के तरह तरह के अर्थ लगाये जा रहें हैं। प्रदेश और जिले के स्थापना दिवस समारोहों में बुलाये गये नेता और पहुचने वाले नेताओं की ओर यदि गौर फरमायें तो कुछ नये समीरकरण स्थापित होते भी दिख रहें हैं। नीता अतिथि बननेे पर भी नहीं पहुचीं जबकि नरेश बिना अतिथि बनाये ही पहुंच गये थे जबकि समारोह के मुख्य अतिथि हरवंश सिंह थे।

फोर लेन का हरवंशी खेल चर्चित-“ दादा ठाकुर हरवंश सिंह बड़े मेहनती, जमीनी,किसानों के हितेषी और पट (बैल जोड़ी दौड़ प्रतियोगिता)के शौकीन नेता हैं। हालांकि वे एक बार 1990 में सिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गये थे थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पट के विशेषज्ञ की तरह दान बदल कर केवलारी से चुनाव लड़े और आज हमारे सामने विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में यहां मौजूद हैं।“ किसी सार्वजनिक सभा में इंका विधायक हरवंश सिंह का कोई समर्थक यदि ऐसा भाषण देने के बाद अपनी मांग रखे तो आप ही सोचिये कि उसकी मांग का क्या हश्र होगा ? जोश की शान में कुछ इसी अंदाज में कसीदे गढ़ते हुये इंका विधायक हरवंश सिंह ने छिंदवाड़ा की आम सभा में भाषण दिया था। उल्लेखनीय है कि श्री सी.पी.जोशी राजस्थान में विस चुनाव केवल एक वोट से हार गये थे और उसके बाद सांसद बनने के बाद भू तल परिवहन मंत्री के रूप में छिंदवाड़ा आये थे जहां सिवनी के इंकाइयों का एक जत्था फोर लेन की समस्या को लेकर गया हुआ था। अपने भाषण की ऐसी शुरूआत करने के बाद हरवंश सिंह ने जिले की फोर लेन की बात रखी और जोशी ने बात कमलनाथ के पाले में डालकर मुक्ति पा ली। किसी की यह भी हिम्मत नहीं थी कि वेा यह बता सकता कि फोर के कातिल के रूप में जिले की जनता कमलनाथ को ही जवाबदार मानती हैं। उनसे ही समय लेकर आने की बात से जिले में कांग्रेस के खिलाफ ही संदेश जायेगा और कमलनाथ एक बार फिर विवाद में आ जायेंगें। फोर लेन विवाद में लंबे अर्से तक चुप्पी साधने वाले जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का सुप्रीम कोर्ट से मामला निपटने के लंबे समय बाद आयी सक्रियता को लेकर राजनैतिक हल्कों में तरह तरह की चर्चायें जारी हैं। इस मामले में प्रारंभ से ही सक्रिय रहें इंका नेता आशुतोष वर्मा का इस प्रतिनिधि मंड़ल में ना जाना भी चर्चित हैं। नागरिक मार्चे के नेताओं को भी हरवंश सिंह ने ले जाने का प्रयास किया था जो कि सफल नहीं हो पाया। दूसरी ओर कमलनाथ को फोरलेन का कातिल बताने वाले जनमंच के बचे खुचे नेताओं और लखनादौन के मुनमुन राय का छिंदवाड़ा जाकर ज्ञापन देना भी चर्चित हैं। इंकाई हल्कों में जारी चर्चाओं पर यदि विश्वास किया जाये तो ये मानना पड़ेगा कि कमलनाथ के यहां अपने गिरते ग्राफ से चिंतित हरवंश ने नाथ को खुश करनें के लिये यह राजनैतिक खेल खेला और यह बताने की कोशिश की है कि जनमंच के जो लोग आपको फोर लेन का कातिल बताने पर तुले हुये थे उन सबको आपके दरबार में हाजिर कर दिया हूॅं। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि कमलनाथ के यहां अपना ग्राफ बढ़ाने के चक्कर में हरवंश सिंह ने कमलनाथ को एक बार फिर जिले में विवादित बनाने का काम भी कर डाला हैं। फोर लेन का मामला तो सुप्रीम कोर्ट की न्यायायिक बाधा समाप्त हो जाने के बाद हल होना ही हैं लेकिन इसकी प्रक्रिया में कुछ समय और लग सकता हैं। साथ ही वन एवं पर्यावरण विभाग के यहां से अपना प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिये भू तल परिवहन मंत्रालय तो लगा ही है और प्रयास वहां करने की जरूरत हैं। लेकिन इस सबके बाद भी छिंदवाड़ा गये इंकाइयों को इस बात जवाब देना मुश्किल हो रहा हैं कि आखिर वहां उन्हें हासिल क्या हुआ?

प्रेम तिवारी की बयानबाजी चर्चित-प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी विधायकनीता पटेरिया के समर्थक माने जाने वाले नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी की इंका विधायक हरवंश सिंह के मामले में अपनाये गये तीखे तेवर सियासी हल्कों में चर्चित हैं। पहले पेंच परियोजना और अब फोर लेन मामले को लेकर उनके प्रकाशित बयानों पर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। पिछले कई बरसों से इंका नेता हरवंश सिंह के साथ किजला भाजपा के आला नेताओं की नूरा कु श्ती के चर्चे दोनो ही पार्टी के कार्यकर्त्ता तक आपस में करते रहते हैं। ऐसी चर्चाओं के चलते यदि तीखी बयानबाजी चालू हो जाये तो उसके चर्चे होना स्वभाविक ही हैं। अब यह तो समय ही बतायेगा कि प्रेम की इस बयान बाजी को नीता की स्वीकृति है या नहीं? या कहीं कुछ दवाब बनाने के लिये वे ऐसी बयानबाजी करवा रहीे हैं। इंका प्रवक्ता ओमप्रकाश तिवारी की विज्ञप्ति में इस बात के स्पष्ट उल्लेख के बाद कि जिला भाजपा अध्यक्ष और भाजपा के सुलझे हुये कुछ नेताओं की लताड़ के बाद भी प्रेम तिवारी ऐसी बचकाना विज्ञप्तियां जारी करना बंद नहीं कर रहें हैं। इन सब गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि इंका और भाजपा के नेताओं के बीच नूरा कुश्ती का दौर पहले की तरह अब भी जारी है फर्क है तो सिर्फ इतना कि पहले के दौर औ अब के दौर में कुछ पात्र बदलते जरूर दिख रहें हैं।

गीता के प्रदेश कांग्रेस महामंत्री बनने पर इंकाइयों की चुप्पी क्यों?-पूर्व कांग्रेस विधायक स्व. ठा. दीप सिंह की प्रपोत्र बहू,विधायक स्व. ठा. सत्येन्द्र सिंह की पुत्र वधू और विधायक स्व. रणधीर सिंह की पत्नी श्रीमती गीता सिंह को प्रदेश कांग्रेस में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर नवाजा गया। लेकिन आज के दौर में जैसे किसी की किसी वार्ड स्तर के पद पर भी नियुक्ति होंती होती हैं तो जैसी विज्ञापनों और बधाइयों के दौर चालू हो जाते हैं वैसा दौर गीता की नियुक्ति के बाद कांग्रेस में नहीं दिखा। जिस परिवार की तीन पीड़ियों ने जिले में कांग्रेस के लिये काम किया हो उसकी ऐसी उपेक्षा समझ से परे हैं। वरना फलाने नेता के आर्शीवाद से और फलाने नेता की अनुशंसा से पद मिलने पर बधायी छपने का चलन तो आज कल हर पार्टी में आम हो गया हैं। ऐसे में इंकाइयों की इस चुप्पी के तरह तरह के अर्थ लगाये जा रहें हैं।

स्थापना दिवस समारोह मे स्थापित होते दिख रहे हैं नये राजनैतिक समीकरण -प्रदेश और जिले के स्थापना दिवस समारोहों में बुलाये गये नेता और पहुचने वाले नेताओं की ओर यदि गौर फरमायें तो कुछ नये समीरकरण स्थापित होते भी दिख रहें हैं। जिला मुख्यालय के मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह थे जबकि विशिष्टि अतिथि नीता पटेरिया थीं। लेकिन समारोह में हरवंश सिंह के साथ नीता पटेरिया के बजाय महाकौशल विकास प्राधिकरण के केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर उस समारोह में शामिल हुये जबकि वे अतिथि भी नहीं बनाये गये थे। इसी तरह नपा द्वारा आयोजित स्थापना दिवस समारोह में नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने नरेश दिवाकर का नाम अतिथि के रूप में प्रकाशित करा दिया था जबकि नरेश का दो दिन का नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा प्रवास का कार्यक्रम पहले ही घोषित हो चुका था। लेकिन एक दूसरे को फूंटी आंख ना सुहाने वाले दोनों भाजपा नेता समारोह में एक साथ दिखे। इन सबको देखकर राजनैतिक विश्लेषकों का ऐसा माना है कि स्थापना दिवस पर आयोजित इन समारोहों में स्थापना दिवस के ये कार्यक्रम जिले की राजनीति में भविष्य में स्थापित होने वाले नये राजनैतिक समीकरणों का पूर्वाभास तो नहीं हैं?



Sunday, October 23, 2011

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सामाजिक मूल्य बदलें बिना क्या भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत हो सकता है?ै

बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्यौहार। आततायी रावण का वध करके जब भगवान राम अयोध्या वापस आये थे तो अयोध्यावासियों ने घी के दिये जला कर भगवान राम का स्वागत किये थे। इसे ही दिवाली के रूप में मनाते हैं। आज देश में सबसे बड़ी बुराई भ्रष्टाचार रूपी रावण है। इस बात से किसी को इंकार नहीं हैं। इसे खत्म होना ही चाहिये।

इसे खत्म कर सकने का दावा कई लोग कर रहें हैं लेकिन हर एक का यह मानना हैं कि सिवाय मेरे तरीके के कोई और तरीका कारगर हो ही नहीं सकता। अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल को,बाबा रामदेव विदेश से कालाधन वापस लाने को तो आडवानी रथ यात्रा और सरकार अपने तरीकों को इस रावण को मारने का सबसे का अचूक हथियार मान रही हैं। भ्रष्टाचार रूपी रावण को मारने के लिये राम बनने को तो कई लोग तैयार हैं लेकिन उसकी नाभि में अमृत है यह राज शायद कोई जानता ही नहीं हैं तो भला इसका अंत कैसे होगा?

भ्रष्टाचार को रोकने के लिये कई कानून आज भी लागू हैं। कई राज्यों में लोकायुक्त भी नियुक्त किये गये हैं। इनका आलम यह है कि आज भी मध्यप्रदेश में लोकायुक्त द्वारा की गयी 170 सिफारिशें लंबित पड़ी हैं जिनमें से कुछ तो दस साल से लंबित हैं लेकिन सरकार ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की हैं। वास्तव में जरूरत हैं तो कानूनों को सख्ती से लागू करने की हैं।

समाज में होने वाल बदलावों का असर हर क्षेत्र में होता हैं चाहे वह प्रशासनिक क्षेत्र हो या राजनैति क्षेत्र हो या व्यापारिक क्षेत्र हो। भारतीय समाज में पहले गुणों पर आधारित मूल्य हुआ करते थे और ऐसे व्यक्ति ही समाज में सम्मान पाते थे। लेकिन अब पैसे और पावर पर आधारित मूल्य हो गये हैं और समाज सम्मान भी उन्हीं को दे रहा हैं और वह यह भी नहीं सोच रहा हैं कि ये पैसा और पावर कैसे प्राप्त किया गया है? समाज में रहने वाला हर व्यक्ति यह चाहता है कि उसे भी सम्मान मिले और सम्मान पाने के लिये वह वो सब कुछ करने को तैयार रहता है जिससे उसे सम्मान मिले। इसलिये आज मूल आवश्यक्ता इस बात की हैं सामाजिक मूल्यों के आधार बदले जायें अन्यथा भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत कोई भी नहीं कर पायेगा क्योंकि यही उसकी नाभि का अमृत बना हुआ हैं। सामाजिक मूल्य बदले,भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत हो यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं।

Tuesday, October 11, 2011

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शिवराज से सांठ गांठ के आरोप के चलते पार्टी में अपने घटते राजनैतिक कद से परेशान हरवंश अब शासकीय समारोहों से भी कन्नी काटने लगें हैं

इस सप्ताह कई कारणों से सबसे अधिक चर्चित राजनैतिक व्यक्तित्व जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाधयक्ष हरवंश सिंह का रहा हैं। सड़कों के गड्डे में बेशर्म की झाड़ी रोपने वाले आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस ने सभी बड़े नेताओं को अलग अलग शहरों में नेतृत्व करने भेजा उसमें हरवंश सिंह का नाम कहीं नहीं था। फिर अब प्रदेश इंका की जंबों जेट कार्यकारिणी में उनका नाम ही गोल हो गया। शिवराज से सांठगांठ के आरोपों के चलते हरवंश सिंह अब शासकीय समारोहों से भी किनारा काटने लगे हैं। इन सब वजहों से वे इतने परेशान हो गये हैं कि उन्होंने जिला इंका के कार्यालय के उदघाटन की प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं होने दी। जिले की महत्वाकांक्षी पेंच सिंचायी परियोजना को लेकर एक बार फिर किसानों की भावनाओं से खेलने का दौर चालू हो गया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने शिवराज से बात करने और इसे तेजी से चालू रखने के निर्देश का हवालादिया तो इंका विधायक हरवंश सिंह ने इंका कार्यालय के उदघाटन के दौरान पेंच के लिये किये गये अपने प्रयासों का हवाला दिया और मुख्यमंत्री से बात करने की बात भी बतायी। अब एक किसान संघंर्ष समितिके नाम से आंदोलन चलाने की बात की जा रही हैं जो कहने को तो गैर राजनैतिक बतायी जा रही हैं लेकिन प्रकाशित नामों में अधिकांश नाम भाजपा नेताओं के ही हैं। जिले में बड़ी लाइन अभी आयी हो या ना आयी हो लेकिन रेल का खेल जारी हैं।

शिवराज से सांठ गांठ के आरोपो से इंका में कद गिर रहा है हरवंश का?-इस सप्ताह कई कारणों से सबसे अधिक चर्चित राजनैतिक व्यक्तित्व जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाधयक्ष हरवंश सिंह का रहा हैं। सड़कों के गड्डे में बेशर्म की झाड़ी रोपने वाले आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस ने सभी बड़े नेताओं को अलग अलग शहरों में नेतृत्व करने भेजा उसमें हरवंश सिंह का नाम कहीं नहीं था। फिर अब प्रदेश इंका की जंबों जेट कार्यकारिणी में उनका नाम ही गोल हो गया। शिवराज से सांठगांठ के आरोपों के चलते हरवंश सिंह अब शासकीय समारोहों से भी किनारा काटने लगे हैं। इन सब वजहों से वे इतने परेशान हो गये हैं कि उन्होंने जिला इंका के कार्यालय के उदघाटन की प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं होने दी। कांतिलाल भूरिया के अध्यक्ष बनने के बाद अक्सर ऐसे समाचार छपा करते थे कि हरवंश सिंह अब रिमोट से प्रदेश में कांग्रेस चलायेंगें। उन्हें पहला झटका तब लगा जब प्रदेश इंकाध्यक्ष ने सड़कों के गड्डों में बेशर्म की झाड़ियां रोपने का प्रदेश स्तरीय आंदोलन में सभी बड़े नेताओं को बड़े शहरो में नेतृत्व करने के लिये नियुक्त किया। इसमें हरवंश का नाम कहीं नहीं था ब्लकि जबलपुर में भूरिया ने स्वयं कमान संभाल कर राजनैतिक संकेत दे दिये थे। इस बारें में इंका नेताओं में यह चर्चा रही कि या तो अब प्रदेश कांग्रेस हरवंश को बड़ा नेता नहीं मानती या फिर लालबत्ती बचाने के चक्कर में वे खुद इससे दूर रह क्योंकि यह आंदोलन प्रदेश सरकार और शिवराज सिंह के खिलाफ था।तब हरवंश समर्थकों ने यह तर्क दिया था कि वे चूंकि संवैधानिक पद पर है इसलिये आंदोलन से दूर रहे। लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि जब मंत्री गौरीशंकर बिसेन के विरुद्ध आदिवासियों को अपमानित करने के लिये जब लखनादौन में आंदोलन किया गया था तब हरवंश सिंह उसमें क्यों शामिल हुये थे? और इस पर प्रदेश की भाजपा और शिवराज सरकार क्यों चुप रह गयी थी? इसके बाद अब जब भूरिया की टीम घोषित हुयी तो प्रदेश के 150 नेताओं में भी हरवंश सिंह का कहीं नाम नहीं था। ना तो वे कार्यकारी अध्यक्ष बने और ना ही प्रभारी महामंत्री बन पाये। इस तरह प्रदेश के संगठन में हरवंश सिंह की उपेक्षा एक बड़ी राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने पूरे प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत धूम धाम से की हैं। इसमें सभी विधायकों को अपने अपने क्षेत्र में मुख्य अतिथि बनाया गया था। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को भी केवलारी में मुख्य अतिथि बनाया गया था। लेकिन पार्टी के अंदर शिवराज से सांठ गांठ के आरोपों के चलते उन्होंने अपने ही विस क्षेत्र में इस कार्यक्रम में सम्मलित होना उचित नहीं समझा। जबकि इस कार्यक्रम में हरवंश के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़ने वाले डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन शामिल हुये थे। इसी सप्ताह उन्होंने कांग्रेस के परिर्वतित कार्यालय का उदघाटन किया। मुख्य अतिथि रहते हुये भी हरवंश सिंह ने सबसे पहले अपना भाषण दिया और कांग्रेस भवन,पेंच योजना, फोर लेन और छिंदवाड़ा नैनपुर बड़ी रेल लाइन के आंदोलन के समर्थन में भी खुल कर भाषण दिया। इस कार्यक्रम में भी वरिष्ठ कांग्रसियों को अपमानित करने में कोई परहेज नहीं किया गया और उठाये जाने वाले सवालों के जवाबों से बचने के लिये हरवंश सिंह ने खुद ही पहले भाषण देकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद कई नेताओं ने भाषण देने से ही मना कर दिया और जिनने बोला उनने भी कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाये लेकिन उन्हें सवालों के कोई जवाब नहीं मिल पाये। कार्यक्रम स्थल के करीब और इंका नेता मो. समी अंसारी के घर पर भी पूर्व मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल और हरवंश के बीच हुयी झड़प भी कांग्रेसियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। इन सब बातों का खुलासा ना हो कि हरवंश सिंह ने क्या क्या अपने भाषण में कहा इसलिये जिला इंका ने प्रेस विज्ञप्ति भी बहुत लेट और सोच विचार कर जारी की जिसमें विवादास्पद हो सकने वाले मुद्दों को छुपा लिया गया हैं। कुल मिलाकर पार्टी में भाजपा से सांठ गांठ के आरोपों में चलते कांग्रेस में अपने गिरते हुये कद से परेशान हरवंश अब इस आरोप से मुक्ति पाने की कोशिशों में लगे हुये हैं ताकि और अधिक राजनैतिक नुकसान ना हो सके।

पेंच के पेंच उलझाते ही जा रहे हैं इंका और भाजपा नेता-जिले की महत्वाकांक्षी पेंच सिंचायी परियोजना को लेकर एक बार फिर किसानों की भावनाओं से खेलने का दौर चालू हो गया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने शिवराज से बात करने और इसे तेजी से चालू रखने के निर्देश का हवालादिया तो इंका विधायक हरवंश सिंह ने इंका कार्यालय के उदघाटन के दौरान पेंच के लिये किये गये अपने प्रयासों का हवाला दिया और मुख्यमंत्री से बात करने की बात भी बतायी। किसानों की एक समिति पहले ही ज्ञापन सौंप कर सरकार से इसे चालू रखने की मांग कर चुकी हैं। अब एक किसान संघंर्ष समितिके नाम से आंदोलन चलाने की बात की जा रही हैं जो कहने को तो गैर राजनैतिक बतायी जा रही हैं लेकिन प्रकाशित नामों में अधिकांश नाम भाजपा नेताओं के ही हैं। इस पूरे मामले में सबसें हास्यासपद बात तो यह हैं कि नीता पटेरिया और हरवंश सिंह ने शिवराज से बात करने और पेंच योजना को चालू रखने की चर्चा की बात कही हैं उससे ऐसा प्रतीत होता हैं कि मानो मुख्यमंत्री को यह मालूम ही नहीं हैं कि उनकी सरकार ने पेंच योजना को बंद करने का प्रस्ताव अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को भेज दिया हैं। विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया अपनी वीडियों कान्फ्रेन्स में इसका खुलासा भी कर चुके हैं जिसके समाचार अखबारों में छप चुके हैं। इस योजना को लेकर लंबे समय तक इंका नेता हरवंश सिंह राजनैतिक रोटी सेंक चुके हैं अब भाजपा की विधायक नीता पटेरिया और अन्य नेता भी ऐसा ही कुछ करना चाह रहें हैं। यदि भाजपा नेता ईमानदारी से यह चाहते हैं कि पेंच योजना बंद ना हो तो वे अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री पर दवाब बनायें कि प्रदेश सरकार इस योजना को बंद करने के प्रस्ताव को वापस ले। इसके लिये उन्हें किसानों के आंदोलन करने की क्या आवयक्ता हैं?और यदि उनकी ही पार्टी उनकी बात नहीं सुनती हैं और वे सही में किसानों का भला चाहते हैं तो इसके लिये उन्हें शिवराज और उनकी सरकार को कठघरें में खड़ा करना पड़ेगा जो कि भाजपा में रहते संभव नहीं हो पायेगा।इंका और भाजपा तथा सभी नेताओं से इस परिस्थिति में यह अनुरोध तो किया ही जा सकता हैं कि वे किसानों के जख्मों पर यदि मरहम नहीं लगा सकते हों तो तो ना लगायें कम से कम नमक तो ना छिड़के।

जिले मे रेल का खेल भी जारी है-जिले में बड़ी लाइन को लेकर भी खेल जारी हैं। छिंदवाड़ा नैनपुर का शिलान्यास कमलनाथ कर चुके हैं। तीस करोड़की राशि भी मिल गयी हैं। लेकिन संघर्ष जारी हैं और हरवंश सिंह ने अपने भाषण में खुमान सिंह के संघर्ष का ना केवल समर्थन किया वरन सभी को साथ देने का आव्हान भी किया। इसी तरह रामटेक गोटेगांव नई लाइन की रेल अभी पटरी पर तो ठीक से चढ़ी नहीं हैं लेकिन अगर इस बजट में चढ़ गयी तो हम नीचे ना रह जायें की इसी तर्ज पर इसमें भी खेल शुरू हो गये हैं। मुसाफिर तो यही चाहता हैं कि भले ही सारे नेता ए.सी.कोच में चढ़ जायें लेकिन कम से कम इस लाइन को बनवा तो दें।

Monday, October 3, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

फोर लेन की तरह पेंच में भी यदि शिवराज ने खेल खेला और नीता भी जनमंच के नेताओं की तरह चुप रहीं तो जनता कभी माफ नहीं करेगी

एक ही गाड़ी पर सवार होकर नरेश और राजेश जबलपुर में आयोंजित अरविंद मैनन की बैठक में शामिल होने गये। बाहुबली वाली रोड़ के लिये नरेश ने 40 लाख रुपये तो दिये लेकिन यह पैसा नपा के बजाय लोनिवि को देने की सिफारिश की है लेकिन पिछली दुगनी लागत में बनी घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को भी संरक्षण भी तो नरेश का ही था। मैनन जी यदि आपको के.डी. भाऊ के गांव की मिट्टी देखने से कोई राज पता चले तो कम से कम क्षेत्र के मतदाताओं को जरूर बता देना। मैनन ने श्रीमती बिसेन को क्या समझाइश दी और उसका कितना असर गौरी भाऊ पर दिखेगा? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे है। भाजपा द्वारा मंड़ला में आयोजित की गयी आक्रोश रैली पर सवाल उठाते हुये राकपा के महासचिव भारत प्रेमचंदानी ने कहा है कि इससें यह साबित हो गया है कि भाजपा को न्यायापालिका में कोई विश्वास नहीं हैं। यदि पेंच के मामले में शिवराज ने प्रमुख सचिव को जो निर्देश दिये उस पर पालन शुरू हो जाता हैं तो वास्तव में शिवराज और नीता पटेरिया बधायी के पात्र हैं। लेकिन यदि कुछ नहीं होता हें तो जनमंच के बचेखुचे नेताओं की तरह यदि नीता भी चुप्पी साधे रहतीं हैं तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

नरेश और राजेश एक साथ गये बैठक में -देखने वालों के लिये यह एक सुखद क्षण था जब एक ही पार्टी के दो धुर विराधी नेता एक ही गाड़ी में सवार होकर पार्टी की मीटिंग में शामिल होने जबलपुर के लिये रवाना हुये। जी हां यह नजारा लोगों ने देखा अब्बास भाई के प्रट्रोल पंप पर जहां मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एक ही गाड़ी पर सवार थे और जा रहे थे संगठन मंत्री अरविंद मैनन की बैठक में जो जबलपुर में थी। इसके बाद ही यह पता चला कि नरेश दिवाकर ने महाकौशल विकास प्राधिकरण से पेट्रोल पंप से एस.पी. बंगले की रोड़ बनवाने के लिये 40 लाख रुपये की राशि भी दे दी हैं। लेकिन उन्होंने नगरीय क्षेत्र में रोड़ बनाने के लिये नगर पालिका के बजाय लोक निर्माण विभाग को ऐजेन्सी बनाने का सुझाव दिया हैं। इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चायें शुरू हो गयीं है। यह बात सही है कि नपा ने यह सड़क इतनी घटिया बनायी थी कि भाजपा सरकार को अपनी ही पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष पार्वती जंघेला को ना केवल चुनाव लड़ने के लिये अपात्र घोषित करना पड़ा था ब्लकि तीन लाख रुपये की रिकवरी भी निकाली थी जिस पर पालिका ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं शुरू की हैं। लेकिन यह भी एक उजागर बात है कि इस सड़क को बनाने वाले भाजपायी बेनामी ठेकेदारों को तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर का ही खुला संरक्षण प्राप्त था। अब नरेश जी को यह भी ध्यान रखनाहोगा कि लोनिवि विभाग द्वारा जिसे ठेकेदार नियुक्त किया जायेगा वह भी पहले जैसा ही कोई ना बन जाये वरना ये 40 लाख रुपये भी बेकार ही चले जायेंगें और नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही निकलेगा। बात जो कुछ भी हो लेकिन एक बात तो साफ हो गयी है कि मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर भाजपा के नेतृत्व वाली नपा को भ्रष्ट मानने लगे हैं। सच को स्वीकार करना भी एक प्रशंसनीय कार्य माना जा रहा हैं। ं

के.डी. के गांव की मिट्टी देखना चाहते है मैनन-पिछले दिनों एक रोचक समाचार छपा जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मैनन ने बालाघाट सिवनी के भाजपा सांसद के.डी.देशमुख के गांव की मिट्टी देखने की इच्छा जाहिर की हैं। यह प्रसंग कैसे और क्यों आया?यह तो समाचार में खुलासा नही किया गयाहैं लेकिन इसने लोगों में उत्सुकता पैदा कर दी हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा? अब भला मैनन जी को यह कौन बताये कि क्षेत्र के मतदाता भी उन्हें वोट देकर पछता रहें और यह जानना चाह रहें हैं कि के.डी. भाऊ आखिर किस मिट्टी के बने हैं? जीतने के बाद क्षेत्र के हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रहते हैं। मैनन जी यदि आपको के.डी. भाऊ के गांव की मिट्टी देखने से कोई राज पता चले तो कम से कम क्षेत्र के मतदाताओं को जरूर बता देना।

गौरी को छोड़ उनके घर पहुंचे मैनन- केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन को बालाघाट के भाजपा कार्यालय में ही छोड़कर अरविंद मैनन उनके घर चले गये और वहां उन्होंने श्रीमती रेखा बिसेन से चर्चा की जिसकी सुर्खी भी अखबारों में बनी और यह आशंका व्यक्त की गयी है कि मैनन ने हाल ही के गौरी भाऊ के विवादों के बारे में चर्चा की हैं। मैनन ने श्रीमती बिसेन को क्या समझाइश दी और उसका कितना असर गौरी भाऊ पर दिखेगा? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मैनन द्वारा के.डी. के गांव की मिट्टी देखनेकी बात भी कही थी तो कहीं इसी को लेकर श्रीमती बिसेन को उन्होंने कोई भविष्य का राजनैतिक इशारा तो नहीं किया है? सच क्या है? यह तो वक्त आने पर ही पता लगेगा।

क्या भाजपा को न्यायपालिका पर विश्वास नहीं है?- फग्गन सिंह कुलस्ते के प्रकरण में भाजपा द्वारा मंड़ला में आयोजित की गयी आक्रोश रैली पर सवाल उठाते हुये राकपा के महासचिव भारत प्रेमचंदानी ने कहा है कि इससें यह साबित हो गया है कि भाजपा को न्यायापालिका में कोई विश्वास नहीं हें। पैसा लेकर सवाल पूछने के आरोपी रहे कुलस्ते को संप्रग सरकार ने नहीं वरन न्यायपालिका ने जेल भेजा हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि तीन करोड़ रुपये में सेकुलस्ते ने सदन में सिर्फ एक करोड़ ही दिखाये थे शेष दो करोड़ रुपये कहां गये? वैसे तो राकपा नेता द्वारा उठाये गये दोनो सवाल सही हैं लेकिन क्या भाजपा इन सवालों का जवाब देगी? वास्तविकता तो यह हैं कि भाजपा को भी कुलस्ते से कोई लेना देना नहीं हैं। तभी तो उन्हें कभी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष तक नहीं बनने दिया गया। वास्तव में इंका में भूरिया की ताजपोशी के बाद भाजपा आदिवासी वोट बेंक में लग सकने वाली सेंध से परेशान थी इसलिये उसनें कुलस्ते मुद्दे की आड़ में आदिवासियों में एक बार फिर पैठ बनाने का प्रयास किया है।

पेंच में भी यदि खेल हुआ तो जनता माफ नहीं करेगी- प्रदेश सरकार के पेच योजना के बंद करने के प्रस्ताव से हल चल मची हुयी हैं। अंत्योदय मेले में जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल ने इस मामले को उठाया था लेकिन मुख्य अतिथि अजक मंत्री विजयशाह ने इस पर कुछ भी बोलना उचित नहीं समझा। लेकिन इस मेले के दो दिन बाद ही भाजपा विधायक नीता पटेरिया के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिलने का समाचार प्रमुखता से छपा और उसमें यह उल्लेख भी किया गया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि हर हाल में पेंच का पानी किसानों के खेत तक पहुंचेगा। इसमें यह भी उल्लेख था कि शिवराज ने प्रमुख सचिव जुलानिया को तेजी काम चालू रखने के निर्देश दिये हैं। इस समाचार की कतरन संलग्न करते हुये इंका नेता आशुतोष वर्मा ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखकर कहा है कि जब प्रदेश के मुखिया ने ही सचिव को तेजी से काम चालू रखने के निर्देश दे दियेहैं तो फिर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना को बंद करने के लिये केन्द्र को भेजा गया प्रस्ताव ही औचित्यहीन हों गया हैं। अतः इसे मंजूर ना किया जाये। इंका नेता ने अपने पत्र में यह भी बताया हैं कि वास्तव में केन्द्र से मंजूरी मिलने के पहले ही इस योजना को प्रदेश सरकार ने बंद कर दिया हैं और दूसरी तिमाही के लिये आवंटित राशि में से शेष बचे 112 लाख रुपये सरेन्डर करने का प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया गया हैं। मुख्यमंत्री ने तो सिवनी की सभा में यह दहाड़ भी लगायी थी कि सूर्य चाहे पूर्व की जगह पश्चिम से निकल जाये लेकिन फोरलेन सिवनी से ही जायेगी। उन्होंने तो जनमंच के नेताओं को भी दो बार आश्वस्त किया था कि वे उन्हें साथ ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलवायेंगें। लेकिन आज तक नतीजा सिफर ही हैं। यह बात अलग है कि इस बात पर जनमंच के नेता भी मौन साधे हुये हैं। कहीं इसी तर्ज पर तो पेंच का पानी किसानों के ख्ेातों तक नहीं पहुचने वाला है?यदि ऐसा हुआ तो फिर भगवान ही मालिक है।लेकिन यदि शिवराज ने प्रमुख सचिव को जो निर्देश दिये उस पर पालन शुरू हो जाता हैं तो वास्तव में शिवराज और नीता पटेरिया बधायी के पात्र हैं। लेकिन यदि कुछ नहीं होता हें तो जनमंच के बचेखुचे नेताओं की तरह यदि नीता भी चुप्पी साधे रहतीं हैं तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।



Wednesday, September 28, 2011

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पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांव पेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया

पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांवपेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया हैं।पूर्व केन्द्रीय मंत्री विमला वर्मा ने केिन्द्रीय एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिह ने प्रदेश के सिंचायी मंत्री को पत्र लिखा हैं। प्रदेश महिला र्मोचे की अध्यक्ष एवं क्षेत्री विधायक नीता पटेरिया की चुप्पी चर्चित हैं। समूचे महाकौशल के विकास की जवाबदारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सौंपी हैं। जिसे महाकौशल क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी शिवराज ने नरेश को सौंपी हैं उसी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना के विनाश की जानकारी नरेश को दी या नहीं़? इंजीनियर प्रसन्न मालू के मित्र ट्रूबा इंजीनियरिंग के संचालक सुनील डंडीर ने निःशुल्क निर्धन छात्रों को श्क्षिा देने का प्रशंसनीय कार्य किया जा रहा है। जिले में इंकाई राजनीति का आलम यदि नहीं सुधरा तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी पलीत होने से कोई नहीं रोक सकता हैं। कांग्रेस को इन चुनावों से सबक लेकर हालात सुधारना चाहिये अन्यथा हुछ ही समय बाद होने वाले नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में भी जीतना मुश्किल हो जायेगा।

पेंच को लेकर फिर राजनैतिक पेंच शुरू-पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांवपेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया हैं। पिछले साल से पैसों की कमी नहीं होने से ऐसा लग रहा था कि अब इस काम में तेजी आयेगी। इस परियोजना के लिये सिंचाई विभाग ने एक कार्यपालन यंत्री कार्यालय तथा पांच सब डिवीजन भी हाल ही में खोले थे। लेकिन कानून एवं व्यवस्था एवं आंदोलन पर नियंत्रण ना कर पाने के कारण प्रदेश सरकार ने पेंच परियोजना को बंद करने का प्रस्ताव अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को भेज दिया हैं। छिदवाड़ा और सिवनी जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने वाली इस योजना को बंद करने के प्रस्ताव से किसानों में आक्रोश फैल रहा हैं। इस योजना को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्माने लगी हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह की चुप्पी को लेकर जब हमने सवाल उठाये तासे उन्होंने प्रदेश के सिंचाई मंत्री को एक पत्र लिखकर अखबारों में प्रकाशित कराया। राजनैतिक हल्कों में यह चर्चित है कि जिस प्रदेश सरकार ने अपनी अनुशंसा के साथ इसे बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र की कांग्रेस सरकार के पास भेजा हैं उसे ही पत्र हरवंश सिंह ने क्यों लिखा? उन्हें कांग्रेस की केन्द्र सरकार से इस बारे में पहल करनी चाहिये थी। जिले की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कु. विमला वर्मा,जिन्होंने इस जिले को विकास की कई बड़ी बड़ी सौगातें दी थी, ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार के इस तुगलकी प्रस्ताव को स्वीकार ना करने का अनुरोध किया हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुये किसान आंदोलन को नियंत्रित ना कर पाने तथा ठेकेदारों को बाधा मुक्त साइट उपलब्ध ना कराने को लेकर भी आरोप लगाये हैं जिसके कारण योजना की लागत बढ़ रही हैं जिसे आधार बना कर प्रदेश सरकार इसे बंद करने का प्रस्ताव भेज रही हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक नीता पटेरिया की चुप्पी राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। लोगों में ता यह भी चर्चा है कि नतिा शिवराज अनबन के चलते क्षेत्र को यह खामियाजा भुगतना ही ना पड़ जाये।

विकास की जवाबदारी देने वाले नरेश को विनाश की बात बतायी या नहीं शिवराज ने?-समूचे महाकौशल के विकास की जवाबदारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सौंपी हैं। महाकौशल क्षेत्र में ही वह सिवनी विस क्षेत्र भी आता हैं जहां से नरेश दस साल तक विधायक रहें हैं एवं एक बार फिर विधायक बनने का सपना संजोये हुये हैं। इस विधान सभा क्षेत्र के लिये पेंच एक जीवन दायनी परियोजना हैं। जिले में सबसे अधिक लाभ इसी विस क्षेत्र के किसानों को मिलने वाला हैं। अब इस योजना को शिवराज सरकार ने बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेज दिया हैं। नरेश ने भी विज्ञप्ति जारी कर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालने की बात कही है। सियासी हल्कों में यह चर्चा जोरों पर है कि जिसे महाकौशल क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी शिवराज ने नरेश को सौंपी हैं उसी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना के विनाश की जानकारी नरेश को दी या नहीं़? नरेश के प्राधिकरण के अध्यक्ष बनने के बाद विकास जो कुछ होगा वह तो भविष्य के गर्त में हैं लेकिन यदि प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस योजना को बंद करने का प्रस्ताव वापस नही लिया तो विनाश की शुरुआत तो हो ही जायेगी।

प्रसन्न मालू की प्रशंसनीय पहल-सिवनी विस क्षेत्र के पूर्व इंका प्रत्याशी एवं इंका नेता प्रसन्न मालू के कार्य का पशंसा हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि इंजीनियर प्रसन्न मालू के मित्र ट्रूबा इंजीनियरिंग के संचालक सुनील डंडीर ने निःशुल्क निर्धन छात्रों को श्क्षिा देने का प्रशंसनीय निर्णय लिया था। इससे जिले के 18 छात्रों को इंजीनियर बनने का अवसर मिला हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। इस काम की जिनती भी तारीफ की जाये वह कम हैं। जिले के विभिन्न तबकों में इस काम की तारीफ भी की जा रही हैं। लेकिन अब जरूरत इस बात की भी पड़ सकती है कि प्रसन्न मालू को छात्रों के चयन करने में सावधानी बरतनी चाहिये। ऐसा ना हो कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिये लोग जेक लगवाने लगे और अपात्र छात्र पात्र छात्रों का हक मारने लगे। किसी भी निर्धन लेकिन प्रतिभाशाली छात्र को पैसे के आभाव में उच्च तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाना र्दुभाग्य पूर्ण होता हैं। उन्हें यह अवसर दिलाना मानवता के हिसाब से से एक अच्छा काम है जो कि किया जा रहा हैं। आज के दौर में किसी राजनैतिक व्यक्ति द्वारा ऐसे सामाजिक काम करते देखा जाना एक मुश्किल काम ही होता हैं।इसलिये प्रसन्न मालू को एक बार फिर बधायी और शुभकामनायें।

छात्र संघ चुनावों में कांग्रेस की हुयी मिट्टी पलीत -जिले के कालेजों में हुये छात्र संघों के चुनाव कांग्रेस के लिये फिर निराशा जनक ही रहें हैं। जिला मुख्यालय के सबसे बड़े पी.जी. कालेज में कांग्रेस को समता मंच से हार का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के विस क्षेत्र के मुख्यालय के केवलारी कालेज में कांग्रेस को भाजपा से मात खानी पड़ी हैं। हालांकि केवलारी क्षेत्र के हरवंश सिंह के गृह ब्लाक छपारा और सिवनी के डी.पी.चर्तुवेदी कॉलेज में कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया हैं। जिले के कई कॉलेजों में तो कांग्रेस अपने नामांकन पत्र भी दाखिल नहीं कर पायी। बरघाट में विरोध स्वरूप इंका समर्थक छात्रों ने शिवराज सिंह का पुतला भी फंूक डाला है।इन चुनाव परिणामों को लेकर इंकाइयों में यह चर्चा जोरों पर हैं कि आखिर यह चुनाव कांग्रेस क्यों हारी? कुछ इंकाइयों का दावा है कि छात्रसंघ चुनावों की बागडोर संभाहलने वाले हरवंश समर्थक युवा नेता आजकल उच्च स्तरीय इंकाई राजनीति में व्यस्त हो गयें हैं इस कारण इन चुनावों मेें कांग्रेस की यह गत बन गयी हैं। धन बल और सत्ता बल के भरोसेे चुनाव जीतने के आदी हो चुके इन इंका नेताओं को इस बार इस कमी ने ही चुनावों में पराजय का सामना करने को मजबूर कर दिया। हालांकि हाल ही में जिला एन.एस.यू.आई. की कमान छात्र नेता अंशुल अवस्थी को सौंपी गयी थी लेकिन वे कम समयमें पुराने हालात बदल सकने में नाकाम रहें। छात्र राजनीति में भी कोई विकल्प तैयार नहीं करने की रणनीति ने कांग्रेस को धराशायी करा दिया हें। जिले में इंकाई राजनीति का आलम यदि नहीं सुधरा तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी पलीत होने से कोई नहीं रोक सकता हैं। कांग्रेस को इन चुनावों से सबक लेकर हालात सुधारना चाहिये अन्यथा हुछ ही समय बाद होने वाले नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में भी जीतना मुश्किल हो जायेगा।







पेंच योजना बंद करने के पहले जन प्रतिनिधियों को क्या विश्वास में नहीं लिया शिवराज ने?

सिवनी। छिदवाड़ा और सिवनी जिले के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण सिचायी एवं विद्युत परियोजना पेंच को बंद करने का प्रस्ताव लेने के पहले प्रदेश सरकार के मुख्यिा शिवराजसिंह चौहान ने जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया? यह यक्ष प्रश्न आज लोगों के बीच उठ खड़ा हुआ है।

छिंदवाड़ा जिले के सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ,प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह,बालाघाट सिवनी क्षेत्र के सांसद के.डी.देशमुख,प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया,महाकौशल विकास प्राधिकरण के केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर और दोनों जिलों के विधायक गण जैसे महत्वपूर्ण और कद्दावर जन प्रतिनिधियों को विश्वास में लिये बिना ही प्रदेश सरकार ने पेंच परियोजना को बंद करने का निर्णय आखिर कैसे ले लिया? और यदि विश्वास में लेने के बाद यह निर्णय लिया गया हैं तो फिर सरकार और जन प्रतिनिधियाों दोनों से ही क्या यह अपेक्षा नहीं की जाना चाहिये कि वे इस बात का खुलासा करें? इन सवालों का खुलासा जल्दी ही होना चाहिये अन्यथा किसानों के जिस आंदोलन से बचने के लिये सरकार इसे बंद कर रही हैं उससे कहीं बड़ा आंदोलन वे किसान भी कर सकते हें जो इस योजना से लाभान्वित होने वाले हैं।

Friday, August 26, 2011

samyik teep

क्या संसद में भी हर सांसद को वो ही बोलना चाहिये जो अन्ना जी चाहते हैं? फिर बहस का तो सवाल ही नहीं उठता। अन्ना सीधे सीधे यह क्यों नहीं कह देते कि सभी सांसद चुपचाप मेरे लोकपाल बिल के पक्ष में हाथ उठाकर वोट डालें और पास करा दें नहीं तो अपना घर घिरवायें। राहुल गांधी कुछ बोल नहीं रहें थे तो भी आपत्ति थी और जब संसद में अपने विचार रखे तो कोप का भाजन बनना पड़ा। क्या अन्ना जी यही सच्चा लोकतंत्र हैं?

samyik teep

ऐसा कैसे हो सकता है कि अन्ना अपने लोकपाल को संपूर्ण मानकर उसके समानान्तर भ्रष्टाचार खत्म करने के अन्य लोगों के विचारों को सिरे से नकार रहें है। ताजा उदाहरण है राहुल गांधी के विचारों से असहमत होने पर उन्होंने अपने समर्थकों को उनके घर का घेराव करने भेज दिया।  याने उनके ही लोकपाल को मानो नहीं तो भुगतो।क्या आपको ऐसा नहीं लगता लोकतंत्र के सबसे बड़े हिमायती होने का दावा करने वाले अन्ना लोकतंत्र से ही शक्ति पाकर सबसे ज्यादा लोकतंत्र का दमन कर रहें हैं।   

Thursday, August 25, 2011

samyik teep

प्रजातंत्र में संसद सर्वाैच्च हैं। संसद ने प्रधानमंत्री की पहल पर जन लोकपाल बिल पेश कर उस पर बहस कराने का स्वागत किया हैं। स्पीकर सहित संसद ने अन्ना जी से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया हैं। संसद के आग्रह को स्वीकार कर प्रजातंत्र के सजग प्रहरी अन्ना जी को अनशन क्या समाप्त नहीं कर देना चाहिये? उनके स्वास्थ्य की समूचे राष्ट्र को चिंता है। देश और युवा पीढ़ी ने अथाह समर्थन दिया है। संसद के आग्रह को स्वीकार ना करना क्या जनसमर्थन का दुरुपयोग नहीं है

Tuesday, August 23, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

महिला मोर्चे की प्रदेशाध्यक्ष नीता पटेरिया के जिले में भ्रष्टाचार की आरोपी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चित











अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली में भारी तादाद में युवकों छात्रों के अलावा जिले में अन्ना की कमान संभाहलने वाले राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल के साथ भाजपा नेता नरेन्द्र ठाकुर एवं प्रवीण भारद्वाज सहित कई भाजपा कार्यकर्त्ता भी शामिल थे। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है। शिवराज के उपवास स्थगित होने की याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जाखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती। मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी थीै या फिर कुछ और? इसे लेकर स्तीफा वापस होने के बाद भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं।मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी हैं। अन्ना के आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके।









अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली-पूरे देश में इस वक्त अन्ना हजारे और लोकपाल बिल को लेकर सड़क से लेकर सदन तक तक धूम मची हुयी है। जिले में भी अन्ना की गिरफ्तारी से अभी तक प्रर्दशन और अनशन जारी हैं। अन्ना समर्थकों द्वारा 16 अगस्त को चार बजे शाम को गांधी चौक से विशाल रैली निकाली जिसमें युवकों छात्रों की भागीदारी भारी तादाद में रही। इस रैली में अन्ना समर्थकों की कमान संभाहलने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा इस रैली में भाजपा नेता प्रवीण भारद्वाज, नरेन्द्र ठाकुर के साथ भाजपा के कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे। वकीलों ने मोटर सायकिल रैली के रूप में भागीदारी की थी।









र्पावती की उपस्थिति में अन्ना के समर्थन में भाजपा का धरना चर्चित-इसके बाद जिला भाजपा ने भी अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में एक दिवसीय धरना दिया।यह धरना जिला कलेक्टरेट के प्रतिबंधित क्षेत्र में हुआ जिसे लेकर ही भाजपा आरोपों के कठघरे में आ गयी हैं। इस धरने में जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन के साथ ही पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,विधायक शशि ठाकुर,अशोक टेकाम सहित भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्त्ता मौजूद थे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चित उपस्थिति पूर्व पालिका अध्यक्ष और महिला मोर्चे की अध्यक्ष पार्वती जंघेला की रही जिन्हें प्रदेश की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाकर उनसे तीन लाख रुपये की रिकवरी उवं उन्हें पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिये अयाग्य घोषित किया था। उल्लेखनीय है कि दुगनी लागत में घटिया सड़कों के मामले की शिकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने की थी जिसे चार साल तक सरकार ने लटकायें रखा लेकिन पुख्ता प्रमाणों के चलते अंततः कार्यवाही करनी ही पड़ी थी। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है।









धरने में उपस्थिति को लेकर नरेश और हरवंश की तुलना हो रही है -भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन के समर्थन में जिला भाजपा द्वारा दिये गये धरने में हाल ही में केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कर लाल बत्तीधारी बने नरेश दिवाकर की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। जबकि विस उपाध्यक्ष के संवैधानिक पद पर राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त करने वाले हरवंश सिंह अपनी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश सरकार के विरोध में होने वाले धरना प्रर्दशनों में बेधड़क शामिल होते हैं। हालांकि नियम तो यही कहता हैं कि मंत्री या दर्जा प्राप्त मंत्री किसी भी सरकार विरोधी आंदोलन या धरने में शामिल नहीं हो सकते। लेकिन आजकल इस नियम पर कड़ाई से पालन कोई नहीं करता हैं। यदि संवैधानिक पद पर बैठे हरवंश के आंदोलनों पर जब जिला भाजपा चुप रहती हैं तो भला नरेश के शामिल होने पर जिला इंका कोई आपत्ति कैसे कर सकती हैं। भाजपाइयों के बीच में यह चर्चा भी दबी लुबान चल रही हैं कि शायद नरेश जी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का वह उपवास प्रकरण याद आ गया था जिसमें राजभवन से उपवास स्थल पर पहुंचते ही शिवराज ने मंचासीन किसी भी भाजपा नेता को बताये बिना माइक पर अपने उपवास के समाप्त होने की घोषणा कर दी थी। यहां यह उल्लेखनीय हैं राजभवन में मुख्यमंत्री को साफ साफ बता दिया गया था कि यदि आप उपवास पर बैठेंगें तो आपकी कुर्सी जा सकती हैं। शायद यह याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जोखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती।









श्रीकांत के स्तीफे के कारणों की लेकर शुरू हुयी अटकलें समाप्त-भाजपा के मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल का त्यागपत्र इन दिनों सियासी हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देते हुये एक आम कार्यकर्त्ता के रूप में पार्टी की सेवा करते रहने की बात कही हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि आज से लगभग 11 साल पहले तत्कालीन जिला भाजपा अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने उन्हें मीडिया प्रभारी बनाया था। उसके बाद चक्रेश जैन, प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब, वेदसिंह ठाकुर,सुदर्शन बाझल के समय भी वे अपने पद बने रहे थे। जिला भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी उन्हें इसी पद पर बनाये रखा था। उनके कार्यकाल के एक साल बाद मीडिया प्रभारी के पद से श्रीकांत ने स्तीफा क्यों दिया था? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह की चर्चायें चल रहीं थीं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि हाल ही में सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सरकार ने लाल बत्ती देकर महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया हैं। मीडिया प्रभारी के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी है या फिर कुछ और? कुछ भाजपायी तो यह भी कहते देखे जा रहें हैं कि श्रीकांत अग्रवाल को हटाने की योजना बन चुकी थी इसलिये उन्होंने हटाये जाने के बजाय खुद ही हट जाना बेहतर समझा और इसलिये त्यागपत्र दे दिया था। इसे लेकर अलग अलग लोंगों की अलग अलग मान्यतायें हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि भाजपा नेताओं द्वारा उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा था। और अंततः उनका स्तीफा वापस हो गया हैं। इसी दौरान मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी थी जिन्हें अंत में निराशा ही हाथ लगी। लागों में इस स्तीफे के कारणों को लेकर अभी भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं।









अन्ना के आंदोलन को हाई जैक करने की भाजपायी कोशिश प्रारंभ?-संघ और भाजपा के चिंतक अन्ना हजारे के आंदोलन को हाई जैक करने की योजना बनाने में जुट गये हैं। इनका यह मानना हैं कि अन्ना के आंदोलन से कांग्रेस को नुकसान तो हो रहा हें लेकिन अन्ना चूंकि चुनावी राजनीति से दूर रहने की बात कह रहें हें इसलिये चुनावी राजनीति में इस नुकसान का लाभ कोई उठाने की स्थिति में नहीं हैं। संघ और भाजपा के रणनीतिकारों ने उज्जैन में तीन दिन के मंथन शिविर में इस ऐलेन्डे पर गुप्त चर्चा की हैं। इस आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके। परदे के पीछे रहकर अन्ना को समर्थन देने वाली भाजपा और संघ अब खुलकर राजनैतिक लाभ लेने के लिये खुद कमान संभाहलने की योजना बना रहें हैं।







Saturday, August 13, 2011

Artical On Independance Day Of India

भ्रष्टाचार के मामले में कानून के दायरे के बजाए लागू करने के कारगर तरीके की चिता जरूरी है

आज का दिन भारत वर्ष की स्वतंत्रता का दिन हैं। सैकड़ों सालों की गुलामी और हजारों लोगों की शहादत के बाद देश को आजादी मिली थी। गांधी ने आजाद देश की एक कल्पना की थी जिसमें आजादी का लाभ समाज के अंतिम छोर के उस व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक था जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हैं। आज हम आजादी की 64 वीं सालगिरह मना रहें है। हम गांधी जी के सपनों के भारत हिसाब से देश का आकलन करें तो हम पाते हैं कि गांधीं के अंतिम छोर के आदमी की बात तो सभी राजनैतिक दल करने लगें हैं लेकिन वास्तव में आम आदमी की चिंता नेताओं को नहीं हैं। समाज के पिछड़े और दलित आदिवासी वर्ग के हितों की बात करने वाले ये नेता उनके विकास की बात तो छोड़ो उनके मान सम्मान तक को अपने अपने राजनैतिक हित साधने का मुद्दा बनाने में भी संकोच नहीं करते हैं। राजनीति समाज के हर हिस्से में इस कदर हावी हो चुकी है कि सभी समाजसेवी कहलाने वाले भी अपने आप को राजनीति से परे नहीं रख पा रहें हैं। आज हर एक की यह फितरत हो गई है कि आम आदमी जिन चीजों से प्रताडित हो उसे मुद्दा बनाओ और अपनी रोटी सेकों। आज ऐसा ही कुछ देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर हो रहा हैं। लोकपाल बिल के मामले को लेकर तरह तरह के तर्क वितर्क चल रहें हैं। प्रधानमंत्री, न्यायाधीश,संसद में सांसदों का आचरण और समूचे शासकीय अमले को इसके दायरे में लाने की बात की जा रही हैं।़ इसका आशय क्या यह नहीं है कि ऐसी मांग करने वालों का यह मानना हैं कि देश की विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका सभी भ्रष्टाचार के मामले में संदिग्ध हैंर्षोर्षो और यदि सच्चायी यही हैं तो फिर इस देश में किसी दूध से धुले लोकपाल को कहां तलाश किया जाएगार्षोर्षो आज भी देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई कानून बने हुए हैं। लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई कारगर रोक नहीं लग पा रही हैं। देखा जाए तो आज जरूरत इस बात की है कि इन कानूनोेंं को लागू करने वाली ऐजेसिंया पहले तो खुद ईमानदार हों और फिर भ्रष्टाचारी को दंड़ देने के कारगर उपाय करें। भ्रष्टाचार की शिकायत यदि भ्रष्टाचार से ही साबित नहीं हो पाएगी तो कोई भी कानून भला कहां और कैसे भ्रष्टाचार को रोक पाएगार्षोर्षो इसलिए किसी भी कानून के दायरे की चिंता करने के बजाए आज चिंता इस बात की करना जरूरी है कि इन कानूनों को कारगर तरीके से लागू करने के उपाय किए जाए और भ्रष्टाचारियों पर सख्ती से कार्यवाही करने का संकल्प लिया जाए वरना हमेशा ही ऐसे आंदोलन होते रहेगें और मुद्दे जस के तस रह जाएंगें।

Sunday, July 10, 2011

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

जैन नेताओं को उपकृत करने की बात पता चलते ही नरेश को रोकने नीता ने भोेपाल में डेरा डालकर क्या पत्ता कटवा दिया?











हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने बाद घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षोकांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं।सासंद के.डी.देशमुख सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।









नरेश को रोकने नीता डटी रहीं भोपाल में -विधायक नीता पटेरिया प्रदेश के दौरे के नाम पर प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीं रहीं। लोगों को अंदाज नहीं हो पाया कि वे ऐसा क्यों कर रहीं हैंर्षोर्षो हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। सिवनी के नीता और नरेश दोनों ही लाल बत्ती के प्रबल दावेदार हैं। नीता पूर्व सांसद हैं और एक मात्र वे ही विधायक बने सांसदोंं में बचीं हैं जिन्हें मंत्री नहीं बनाया गया हैं।दूसरी ओर नरेश दिवाकर ऐसेहैं जिनकी टिकिट काट कर नीता को दी गई थी और पार्टी ने नीता को जीतने के बाद से उन्हें उपकृत नहीं किया हैं। लेकिन दोनो ही नेताओं यह होड़ लगी हैं कि पहले लाल बत्ती उन्हें मिले वरना बाद में दूसरे को मिल जाय इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। इसलिए मौका आते ही दोनो एक दूसरे के खिलाफ जुट जातें हैं और नतीजा सिफर ही निकलता हैं।योजना आयोग में बाबूलाल जैन की नियुक्ति से अब नरेश की राह और मुश्किल हो जाएगी क्योंकि पहले भी काफी जैन नेताओं को भाजपा लाल बत्ती से नवाज चुकी हैं।









कितने परिपक्व साबित होगें हीरा आसवानी? -निर्वाचन के नौ महीने बाद आखिर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में हीरा आसवानी की ताजपोशी हो ही गई। इस दौरान वर्तमान और भावी अध्यक्ष के बीच जैसी तना तनी चली वह किसी से छिपी नहीं हैं। कार्यक्रमों का कौन इंतजाम करें और कौन अध्यक्ष बन कर बैठा रहें? यही खेल इन नौ महीनों में चलता रहा हैं।जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के अत्यंत विश्वास पात्रों में गिने जाने वाले इंका नेताओं में हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने से यह माना जा रहा हैं कि भाजपा का नेतृत्व युवा सुजीत जैन के हाथों में सौंपे जाने के बाद युवा को ही कांग्रेस की कमान सौंपने के उद्देश्य से यह नियुक्ति की गई हैं। वैसे तो हीरा आसवानी को संगठन का लंबा अनुभव हैं और वे हरवंश समर्थक नेताओं की तरह अन्य इंका नेताओं में अछूत भी नहीं माने जाते हैं। लेकिन फिर भी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हरवंश सिंह से उन्हें काम करने में कितनी छूट मिल पाती हैं। यदि जितनी चाबी भरी राम ने की तर्ज पर ही काम चला तो पिछले अध्यक्ष महेश मालू के कार्यकाल से इनका कार्यकाल कुछ अलग नहीं होगा। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षो और कब अपने महामंत्रियों की घोषणा कर पाते हैं क्यों कि सुरेश पचौरी के कार्यकाल में ही घोषित हो चुके ब्लाक इंका अध्यक्ष अब तक अपने महामंत्रियों की घोषणा नहीं कर पाएं हैं?









विज्ञापन में छपी एक फोटो इंकाइयों में चर्चित- नव नियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी के आभार और बधायी के विज्ञापनों में एक विज्ञापन इंकाइयों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ हैं। कांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। कुछ इंका नेताओं का यह दावा हैं कि एक इंका नेता ने अपनी फोटो का मोह त्याग कर ये कारनामा कर दिखाया हैं। वैसे हमेशा से सुर्खियों रहने वाले इंका नेताओं में ये भी एक माने जाते थे लेकिन लंबे समय से गुमनामी में रहना उनही नियति बन चुकी हैं? या किसी सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैर्षोर्षो इसे लेकर लोगों का अलग अलग मत हैं। वास्तविकता चाहे जो भी हो लेकिन हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने के विज्ञापनों ने चर्चाओं का एक मुद्दा तो दे ही दिया हैं।









इशारों को अगर समझो राज को राज रहने दो-सासंद के.डी.देशमुख लगभग हर सोमवार को सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके जब भी कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में गांव गांव में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। निर्माण कार्यों में भी भ्रष्टाचार की बात वे कभी कभी करते हैं लेकिन अवैध शराब के धंधें की चिंता हैं कि उनका पिंड़ ही नहीं छोड़ रही हैं। भाजपायी हल्कों में इस बात को लेकर बहुत सी चर्चाएं जारी हैं।कुछ भाजपा नेता तो यह तक कहते पाए जा रहें हैं कि या तो शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग भाऊ का इशारा ही नहीं समझ पा रहा हैं या फिर समझ कर भी जानबूझ कर अनजान बना हुआ हैं? कुछ नेता तो गाने के ये बोल बोल कर मजा ले रहें हैं कि Þइशारों को अगर समझो,राज को राज रहने दोÞ। अब इसमें राज क्या हैं और इशारा क्या है? येभाजपा नेता ही जाने लेकिन ऐसी चर्चाएं किसी भी जनप्रतिनिधि की सेहत के लिए अच्छभ् नहीं होतीं हैं।









सुरेंद्र की जीत से गर्माएगी भाजपायी गुटबंदी-अभिभाषक संघ के चुनाव में सुरेंद्र शुक्ला के अध्यक्ष चुने जाने से भाजपा की स्थानीय गुटबंदी में तेजी आने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। सिवनी के दो जन प्रतिनिधियों के बीच खिंची तलवारें तो जगजाहिर ही हैं। विधायक नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी कई मौकों पर एक दूसरे के सामने खड़े नज़र आए हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।यहां यह उल्लेखनीय हैं कि राजेश त्रिवेदी भी आगे विधानसभा की टिकिट के दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। यदि नीता पटेरिया दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर जाना चाहेंगी तो ऐसी परिस्थिति में नीता विकल्प के रूप में सुरेंद्र शुक्ला का नाम अड़ा सकतीं हैं। यहां महेश शुक्ला का नाम उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता हैं। राजेश के अरविंद मैनन से संबंध उनके दावे को पुख्ता कर सकते हैं। ऐसी हालात में जब दो ब्राम्हण नेता आमने सामने होंगें तो इस खींचातानी में विकल्प के रूप में नीता पटेरिया अपने विश्वस्त ब्राम्हण नेता प्रेम तिवारी को सामने कर निर्णायक स्थिति बना सकतीं हैं। यहां यह भी दावा किया जा रहा हैं कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र में ब्राम्हणों की निर्णायक संख्या को देखते हुए अगली टिकिट भी ब्राम्हण नेता को ही देना भाजपा की मजबूरी होगी। इसका कारण यह बताया जा रहा हैं कि पूरे जिले के ब्राम्हणों ने नीताको जिता कर यह सोचा था कि भाजपा उन्हें मंत्री बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद यदि सिवनी की टिकिट भी ब्राम्हण को देने के बजाय किसी और को दी गई तो जिले भर के ब्राम्हण मतदाताओं की नाराजगी भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। हालांकि यह सब कुछ बहुत दूर की बातें हैं लेकिन दूर की कौड़ी चलने वाले इन सारे समीकरणों पर पैनी नज़र रखें हुए हैं।