Sunday, January 23, 2011

Artical On Republic Day Of India

गण चुस्त और तंत्र निष्पक्ष हो विकास का संकल्प लें तभी सफल होगा गणतंत्र

समूचे भारत वर्ष में उल्लास के साथ आज गणतंत्र दिवस की 61 वीं सागिरह मनायी जा रही है। आज के दिन ही हमने अपने संविधान को स्वीकार किया था। इन 61 सालों में देश के विकास के बारे में यदि दृष्टि डाली जाये तो ना तो यह कहना सही होगा कि हमने कुछ भी हासिल नहीं किया है और ना ही यह कहना सही होगा कि हमने सब कुछ पा लिया है। हां विकास की गति पर जरूर मतभेद हो सकते है।

इन 61 सालों के प्रजातांत्रिक सफर में गण याने आम आदमी तो लगभग गौण हो चुका है। इसका स्थान गण के द्वारा चुने गये जन प्रतिनिधयों ने ले लिया जो कि उनका ध्यान पांच साल में सिर्फ एक बार एक महीने के लिये चुनाव के समय रखते हैं और फिर उन्हें आपने हाल पर छोड़ देते है। ये जन प्रतिनिधि ही केन्द्र और राज्यों में सरकार चलाते है। इन्हीं पर देश के विकास और आम आदमी के भले के लिये योजनायें बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने का दायित्व भी रहता है।

हमारे गणतंत्र का दूसरा महत्वपूर्ण अंग तंत्र है। आज कल यह आम शिकायत सुनी जाती है कि तंत्र अनियंत्रित होते जा रहा है। उसे अपनी मनमानी करने से रोकने का दायित्व जिनका है कहीं कहीं तो वे खुद ही उनके पिछलग्गू बने दिखायी देते है। तंत्र के इस कथन की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि आज के दौर में सत्ता दल का राजनैतिक हस्तक्षेप प्रशासनिक अमले पर इतना अधिक रहता हैं कि वे चाहकर भी निष्पक्ष और निर्भीक होकर भी काम नहीं कर सकते हंै। कोई भी जनप्रतिनिधि जब एक बार अपने राजनैतिक हित साधने के लिये तंत्र का उपयोग कर लेता हैं तो फिर उसे उसकी गलतियों की अन देखी तो करनी ही पड़ेगी। और शायद यही तंत्र के अनियंत्रित होने का मूल कारण है।

किसी भी समस्या को हल करने के लिये गण को तंत्र का साथ देने और तंत्र को त्वरित निराकरण के प्रयास करने आवश्यक होते हैं। आज महंगायी सबसे बड़ी समस्या हैं। हालांकि विश्व स्तरीय आर्थिक मंदी और अंर्तराष्ट्रीय बाजार की उथल पुथल ने दुनिया के साथ ही देश को भी हिला कर रख दिया है। लेकिन इतना कह देने मात्र से सरकार के कत्र्तव्यों की इतिश्री नहीं हो जाती है। और ना ही केन्द्र और राज्य सरकार एक दूसरे पर दोषारोेपण़ करके बच सकतीं है। यह बात भी सही हैं कि देश में उपभोक्ता की क्रय शक्ति भी बढ़ी हैं लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकारें अपने अपने द्वारा वसूल किये जाने वाले टेक्सों के कितनी कमी करके लोगों को महंगायी से राहत दिला सकती है इस पर विचार किया जाना समय की मांग है।

गण चुस्त और दुरुस्त रहें तथा तंत्र पूरी मुस्तेदी से देश के विकास और आम आदमी की खुशहाली के लिये संकल्पित हो और देश को एक बार फिर अपने स्वर्णिम मुकाम पर पहुंचायें यही गणतंत्र दिवस की 61 वीं सालगिरह पर हमारी शुभकामनायें हैं।

आशुतोष वर्मा

मो. 09425174640



Saturday, January 22, 2011

भाजपा की मान्यता रद्द करने चुनावआयो में भेजी गयी याचिका

सिवनी। शासन की योजनाओं से लाभ लेने वाले पात्र हितग्राहियों को समारोह पूर्वक भाजपा का सदस्य बनाने के लिये चलाये जा रहे अभियान को तत्काल बंद करने के निर्देश देने और इस आपराधिक निर्वाचन कृत्य को करने वाली भाजपा की राजनैतिक दल के रूप में प्रदान मान्यता को रद्द करने के लिये भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष एक याचिका पेश कर मांग की गयी है।

उक्ताशय की जानकारी देते हुये जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा ने प्रेस को बताया कि भाजपा द्वारा चलाये जा रहे अभियान और उसमें मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के आपत्तिजनक बयानों का हवाला देते हुये ये मांग की गयी हैं। इस याचिका में चुनाव आयोग को बताया गया हें कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पं. अटलबिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिन 25 दिसम्बर 2010 से मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी हितगा्रही सदस्यता अभियान चला रही हैं जो कि 25 जनवरी 2011 तक जारी रहेगा। पूरे प्रदेश में इस अभियान के तहत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों को एकत्रित कर उन्हें भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता प्रदान कर पांच रुपये की राशि भी ली जा रही हैं। शासन की योजनाओं के लाभ लेने के इच्छुक हितग्राहियों को प्रलोभन भी दिया जा रहा हैं कि पार्टी में आयें और योजनाओं का लाभ उठायें।

इंका नेता वर्मा ने बताया है कि याचिका में आगे यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ शासकीय योजनायें ऐसी भी हैं जिनके हितग्राही मतदाता नहीं हैं तो उनके अभिभावकों को सदस्य बनाने के संकल्प को इस अभियान में शामिल कर लिया गया हैं। इन योजनाओं में लाड़ली लक्ष्मी योजना हैं जिसमें जन्म लेने वाली कन्या को छः हजार रुपये का चेक दिया जाता हैं जिसकी राशि उस कन्या को व्यस्क होने पर मिलती है। दूसरी बालिका शिक्षा योजना हैं जिसके तहत स्कूल जाने वाली छात्राओं को सरकार की ओर से साइकिल दी जाती हैं। भाजपा के इस अभियान में हितग्राहियों, जो कि मतदाता नहीं हैं,उनके अभिभावकों को प्रलोभन दिया जा रहा हैं एवं पार्टी का सदस्य बनाया जा रहा है।

याचिका में यह भी उल्लेखित किया गया है कि भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोक सभा एवं विधानसभा चुनाव के लिये अभियान 2013 प्रारंभ कर चुकी हंै और इसके लिये रणनीति बना कर उस पर बाकायदा अमल भी शुरू कर दिया हैं। इसके तहत प्रदेश में हारी हुये विधानसभा क्षेत्रों के लिये प्रभारी नियुक्त कर दिये हैं जो कि चुनाव तक उन क्षेत्रों की देख रेख करेंगें। इसके बाद यह हितग्राही सदस्यता अभियान प्रारंभ किया गया हैं जो कि आगामी चुनाव से जुड़ी हुयी ही एक राजनैतिक गतिविधि हैं जिसमें शासन की योजनाओं से लाभान्वित होने वाले हितग्राहियों को सदस्य बनाया जा रहा है। प्रदेश में संचालित योजनायें ना केवल प्रदेश सरकार की है वरन कई योजनाओं की अधिकांश राशि केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। सरकार के पास पैसा जनता के द्वारा दिये गये टेक्स से प्राप्त होता हैं। इस पैसे से सरकारें गरीब और पिछड़े वर्ग के नागरिकों को विकास यात्रा में साथ साथ चलने के लिये विभिन्न योजनायें बनाती हैं। इन योजनाओं से लाभ लेने वाले पात्र हितग्राही पर सरकार चलाने वाले राजनैतिक दल का कोई उपकार नहीं होता हैं। लेकिन प्रदेश में सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी इसका दुरुपयोग कर हितग्राहियों का भाजपायीकरण रही हैं जो कि ना केवल अनुचित हैं वरन राजनैतिक दलों के लिये निर्धारित आदर्श आचरण संहिता का भी खुला उल्लंघन हैं।

इंका नेता ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया हैं कि इस अभियान की समारोह पूर्वक शुरुआत प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान एवं प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष प्रभात झा ने 25 दिसम्बर 2010 को जबलपुर में की थी जिसमे प्रशासिक मशीनरी का ख्ुाला दुरुपयोग कर हजारों हितग्राही एकत्रित कर पार्टी के सदस्य बनाये गये। मीडिया ने इस आयोजन को काफी कवरेज भी दिया है। नागपुर से प्रकाशित होने वाले लोकमत समताचार ने 26 दिसम्बर 2011 के अंक में “भाजपा में आओ,योजनाओं का लाभ उठाआ,े हितग्राही सदस्यता अभियान में शिवराज ने कहा“ शीर्षक से प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया गया हैं। इसी तरह प्रदेश के प्रमुख शहर सतना में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा के मुख्य आतिथ्य में हितग्राही सदस्यता अभियान में पांच हजार सदस्य बनाये गये। प्रदेश के एक प्रमुख समचार पत्र सांध्य प्रकाश भोपाल ने 27 दिस्बर 2010 को पहले पेज पर प्रकाशित किया। इसमें प्रदेश अध्यक्ष के हवाले से यह प्रकाशित हुआ हैं कि, “ पार्टी ने इस बार योजनाओं का लाभ लेने वाले करीब 10 लाख लोगों को पार्टी का सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया हैं।“ यहां यहउल्लेखनीय हैं कि पार्टी प्रत्येक सदस्य बनने वाले हितग्राही से पांच रुपये सदस्यता शुल्क ले रही हैं । इस तरह शासकीय योजनाओं का लाभ उठाने वाले पात्र हितग्राहियों से भी भारतीय जनता पार्टी द्वारा 50 लाख रुपये वसूलने का लक्ष्य रखा गया हैं। इसे किसी भी कीमत पर सही नहीं कहा जा सकता हैं।

इंका नेता ने आगे उल्लेख किया हैं कि आगामी 20 जनवरी 2011 को बालाघाट जिले में इसी अभियान के तहत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान एवं प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा का आगमन हो रहा हैं। इस सम्मेलन को सफल बनाने के लिये प्रभारी मंत्री नाना साहब मोखेड़ और पी.एच.ई. मंत्री गौरी शंकर बिसेन की उपस्थिति में भाजपा की बैठकों के समाचार प्रकाशित हुये हैं जिसमें हितग्राहियों और नाबालिक हितग्राहियों के अभिभावकों को सम्मेलन में लाने के गुर बताये गये हैं।

याचिका में इस बात का भी हवाला दिया गया हैं कि म.प्र. भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाये जा रहे इस असंवैधानिक और आदर्श आचरण संहिता का खुला उल्लंघन करने वाले इस अभियान को रोकने के निर्देश ना देकर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय समिति ने भी इस अभियान को अपनी मौन स्वीकृति देने का आपराधिक कृत्य किया हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित उल्लेखित समाचारों का ना तो शासन की ओर से तथा ना ही भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश या जिला स्तर पर कोई खंड़न जारी कर प्रतिवाद किया हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि अखबारों में प्रकाशित समाचार हैं जिन्हें साक्ष्य माना जाना विधि सम्मत होगा। प्रदेश भारतीय जनता पार्टी का यह अभियान ना तो विधि के अनुकूल हैं तथा ना ही राजनैतिक दलों के निर्धारित आदर्श आचार संहिता के अनुकूल हैं।

इंका नेता आशुतोष वर्मा ने याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त से अनुरोध किया हैं कि वे तत्काल ही भारतीय जनता पार्टी को हितग्राही सदस्यता अभियान बंद करने के निर्देश दें जो कि पूरे प्रदेश में 25 जनवरी 2011 तक चलने वाला हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जानबूझ कर ऐसे विधि विपरीत एवं आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन करने के इन प्रमाणिक आरोपों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की राजनैतिक दल के रूप में दी गयी मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही करने का कष्ट करें।



Wednesday, January 12, 2011

जिले का नक्सल प्रभावित घोषित होना

विकास में होगा सहायक या बाधक ?

काफी जद्दोजेहाद के बाद अन्तत: सिवनी जिला नक्सल प्रभावित जिला घोषित हो ही गया हैं और पच्चीस करोड़ रुपये की किश्त भी विकास कायेZं के लिये मंजूर हो गई हैं। पहले केन्द्र सरकार ने जो प्रस्ताव भेजे थे उनमें सिवनी जिला शामिल था। लेकिन ना जाने क्यों शिव की नगरी सिवनी के स्थान पर शिवराज सरकार ने सिंगरोली जिले को प्रस्तावित कर दिया था। केन्द्रीय मन्त्री कमलनाथ ने भी प्रधानमन्त्री से भेंट कर छिन्दवाड़ा जिले को शामिल करने की मांग की थी। लेकिन अन्त में सिवनी को शामिल कर ही लिया गया।

जिले को शामिल किये जाने के श्रेय लेने की कवायद भी शुरू हो गई हैं। जिला इंका प्रवक्ता को भले ही कांग्रेस के स्थापना दिवस के कार्यक्रम की विज्ञप्ति जारी करने की फुर्सत ना मिली हो लेकिन यह घोषणा होते ही उन्होंने बयान जारी कर सांसद बसोरी सिंह एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह का आभार मानने में देर नहीं लगायी। काश ऐसा होता रहता तो शायद सिवनी बहुत कुछ ना छिन पाता।

यह जिला नक्सल प्रभावित जिले में शामिल हो गया। हालांकि इस जिले में एस.पी. डी.एम. मित्रा के कार्यकाल में रूमाल टेंक के आस पास के इलाके में अन्य जिलों में दबिश बढ़ने के कारण नक्सलवादियों द्वारा शरणस्थली के रूप में प्रयोग करने की घटनायें जरूर सामने आयीं थीं लेकिन उसके बाद ऐसा कभी भी सुनने को नहीं मिला था कि कहीं कोई गतिविध पुलिस ने नोट की हों या कार्यवाही की हो।

अब सवाल यह उठता हैं कि यह जिले के विकास के लिये यह सहायक होगा या बाधकर्षोर्षो इस बारे में लोगों के अलग अलग विचार हो सकते हैं। कुछ लोगों का यह मानना है कि इससे आधार भूत विकास करने के लिये शासन से जो अतिरिक्त पैसा मिलेगा उससे तेजी से विकास होगा। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का यह भी मानना हैं कि इसके चलते जो अतिरिक्त अधिकार मिलेंगें उनके दुरुपयोग होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। इसके साथ ही सबसे ज्यादा विकास की संभावनायें उद्योगों की स्थापना से थी। वैसे यह जिला जीरो इण्डस्ट्री जिले में आज तक शामिल हैं। हमारे जन नेता और प्रशासनिक अधिकारी बिना नक्सल प्रभावित जिला घोषित हुये उद्योंगों को आर्कषिZत नहीं कर पाये तो भला अब उनसे क्या उम्मीद की जा सकती हैंर्षोर्षो जबकि पिछले कुछ सालों से समूचे प्रदेश में इण्डस्ट्री मीट आयोजित किये जा रहें है।

जहां तक सड़क,पानी,विभिन्न भवनों के लिये पैसे की बात हैं तो कई सालों से इसका कोई आभाव नहीं देखा गया। जिले में लगभग सभी राष्ट्रीय योजनायें लागू हैं। पर कैसी लागू हैं और कैसा काम हो रहा हैं र्षोर्षो यह किसी से छिपा नहीं है। हाल ही समाचार पत्रों में यह प्रकाशित हुआ था कि जिले की वाषिZक योजना के लिये लगभग 192 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुयी है। इस जिले के आठ में से चार ब्लाक आदिवासी ब्लाक हेै जिनके विकास के लिये अतिरिक्त राशि भी प्राप्त होती है। जिले में 6 सौ 45 पंचायतें है और लगभग 1500 गांव हैं। इस हिसाब से देखा जाये तो लगभग 30 लाख रुपये प्रत्येक ग्राम पंचायत को मिलेंगेंं।जो कि कोई कम राशि नहीं मानी जा सकती। वास्तव में पैसों की कमी नहीं हैं। लेकिन इस बात की जरूर जरूरत हैं कि इसमें हो रही बन्दर बाट पर नियन्त्रण किया जाये और भारी भ्रष्टाचार पर नियन्त्रण किया जाये।

अब यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा कि यह जिले के विकास में सहायक होगा या बाधकर्षोर्षो

Monday, January 10, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

पिछले पंद्रह सालों से कांग्रेस को हराने वालों पुरुस्कृत करने की हरवंशी संस्कृति आज भी बदस्तूर जारी है

प्रहलाद पटेल का स्वागत सत्कार पूरे झंके मंके के साथ हो गया। वैसे भी महाकौशल क्षेंत्र के एक दबंग भाजपा नेता माने जाते है। लेकिन भाजपा की गुटीय राजनीति के चलते सिवनी की सड़कों पर भी यह साफ साफ देखा गया। भाजपा के जिला प्रमुख से लेकर ऐसे तमाम चेहरे गायब थे जिन्हें भाजपा का पर्याय माना जाने लगा हैं। अब जो नहीं शामिल हुये वे आगे कैसे समन्वय बनायेंगें या उन्हें समन्वय बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी? यह अभी तो भविष्य की गर्त में ही हैं। कांग्रेस को हराने वालों को पुरुस्कृत करने की हरवंशी संस्कृति इस जिले में पिछले पंद्रह सालों से लगातार चल रही हैं और यह कब तक जारी रहेगी इसकी जानकारी कोई भविष्य वक्ता भी नहीं दे सकता हैं। दलों में गुट बंदी होना कोई नयी बात नहीं हैं। लेकिन जब चुनाव या अन्य मोर्चे पर किसी दूसरे राजनैतिक दल से लड़ने की बात होती थी तो अमूमन सभी नेता एक साथ हो जाते थे। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता था कि अपना स्वार्थ साधने के लिये कोई अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचाये और दूसरे दलों से तालमेल कर ले। अब ऊपर से लेकर नीचे तक भाजपाइयों और कांग्रेसियो के बीच नूरा कुश्ती के किस्से ना केवल सुने जाते हैं वरन दोंनों ही पार्टियों के कार्यकत्र्ता आम तौर पर चटखारे लेकर मजे लेते सरेआम देखा जा सकता है। इस सारे खेल में सबसे ताज्जुब और आश्चर्य की बात यह है कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले ऐसे नेता पार्टी मंच से कार्यकत्ताओं से पार्टी के लिये सब कुछ कुर्बान कर देने की अपील करने में भी जरा सा संकोच या शर्म नहीं महसूस करते है।

कई भाजपाइयों ने कन्नी काटी प्रहलाद से-

प्रहलाद पटेल का स्वागत सत्कार पूरे झंके मंके के साथ हो गया। भाजपा अध्यक्ष नितिन गड़करी द्वारा नव रचित असंगठित कामगार मजदूर संघ का उन्हें अध्यक्ष बनाया गया हैं। देश में चालीस करोड़ ऐसे मजदूर हैं जिनमें से दस प्रतिशत को रजिस्टर्ड कराने का लक्ष्य उन्हें दिया है। भाजपा ने भी मिशन 2013 के लिये अपने वोट बैंक में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रख गया हैं। यदि उस हिसाब से एक देखा जाये तो भाजपा नेतृत्व ने प्रहलाद पटेल पर बहुत बड़ा विश्वास व्यक्त उन्हें इतनी महती जवाबदारी दी हैं। अब यह उन पर निर्भर करेगा कि वे इस कसौटी पर कितना खरा उतरते है। वैसे भी महाकौशल क्षेंत्र के एक दबंग भाजपा नेता माने जाते है। सिवनी से दो बार, बालाघाट से से एक बार सांसद रहने वाले प्रहलाद कांग्रेसी दिगग्ज कमलनाथ के खिलाफ भी छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ चुके है। नरसिंहपुर जिले के वे रहने वाले हैं और जबलपुर की छात्र राजनीति से उन्होंने राजनीति प्रारंभ की थी। भाजपा में उन्हें एक जनाधार वाला नेता माना जाता है। लेकिन भाजपा की गुटीय राजनीति के चलते सिवनी की सड़कों पर भी यह साफ साफ देखा गया। भाजपा के जिला प्रमुख सुजीत जैन से लेकर ऐसे तमाम चेहरे गायब थे जिन्हें भाजपा का पर्याय माना जाने लगा हैं। पहले सांसद एवं वर्तमान विधायक नीता पटेरिया, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर,विधायक शशि ठाकुर,नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी नदारत थे। इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री डाॅ. ढ़ालसिंह बिसेन, बरघाट के विधायक कमल मर्सकोले, को आपरेटिव बैंक अध्यक्ष अशोक टेकाम जीप में साथ दिखायी दिये। लेकिन जिला भाजपा के कई उपाध्यक्ष,कोषाघ्यक्ष संतोष अग्रवाल सहित लगभग सभी मंड़ल अध्यक्षों की उपस्थिति रही। जिला भाजपा यह कहना था कि उन्हें कोई सूचना नहीं दी गयी थी। इसलिये उन्होंने ऐसा किया। कुछ वरिष्ठ एवं भूतपूर्व लेकिन महत्वपूर्ण भाजपा नेताओं ने तो यह स्वीकार करने में भी कोई संकोच नहीं किया कि उन्हें प्रदेश से दवाब हैं इसलिये वे निजी काम से बाहर चले गये थे। अब चाहे जो भी रहा हो इतना सब तीन पांच होने के बाद भी कार्यक्रम तो फीका रहा नहीं अब जो नहीं शामिल हुये वे आगे कैसे समन्वय बनायेंगें या उन्हें समन्वय बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी? यह अभी तो भविष्य की गर्त में ही हैं।

कांग्रेस को हराने वाले फिर हुये पुरुस्कृत-

लगभग छः माह के लंबे इंतजार के बाद जिलें में कांग्रेसियों को 9 नये ब्लाक अध्यक्ष मिल गये हैं। वैसे तो निर्वाचित हाने वाले जिन 9 अध्यक्षों के नाम ना केवल अखबारों में प्रकाशित हो गये थे वरन वरन यह दावा किया जा रहा था कि विधिवत चुनाव हुये हैं। उसी दौरान कई कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाये थे कि चुनाव के नाम पर जिले में हरवंश सिंह की मन मर्जी खोपी गयी हैं। इसकी गूंज दिल्ली तक उठी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। कहा गया कि प्रक्रिया पूरी हो चुकी हैं अब इसमें कुछ भी करना संभव नहीं हैं। लेकिन अब जब ब्लाक अध्यक्षों की सूची जारी हुयी तो एक बार सभी फिर भौंचक रह गये। तथाकथित चुनावों के बाद जब नाम छपे थे तब धनौरा ब्लाक से चुने गये अध्यक्ष के रूप में मुकेश जैन का नाम प्रकाशित हुआ था लेकिन अब जब आदेश जारी हुये तो तिवारी लाल उइके को धनौरा का अध्यक्ष घोषित किया गया हैं। इससे कम से कम एक बात तो प्रमाणित हो गयी हैं कि चुनाव के नाम पर सिर्फ धांधलियां ही की गयी हैं। अभी तक जिला इंका अध्यक्ष के नाम की धोषणा भी नहीं हुयी हैं जो कि अगले सप्ताह तक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस चयन में भी कांग्रेस को चुनाव हराने वालों को पुरुस्कृत करने की परंपरा को बाकायदा जारी रखा हैं। कुरई ब्लाक के अध्यक्ष पद पर अनिल भलावी की घोषणा हुयी हैं जो कि सिवनी विधानसभा चुनाव से 2003 में चुनाव लड़ चुके हैं और लगभग 12000 वोट ले चुके हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि तत्कालीन जिला इंका के महामंत्री स्व. विपतलाल सर्याम भी सिवनी विस से चुनाव लड़े थे और उन्होंने 31 सौ वोट लिये थे और कांग्रेस 15 हजार 3 सौ वोटो से चुनाव हार गयी थी। कांग्रेस को हराने वालों को पुरुस्कृत करने की हरवंशी संस्कृति इस जिले में पिछले पंद्रह सालों से लगातार चल रही हैं और यह कब तक जारी रहेगी इसकी जानकारी कोई भविष्य वक्ता भी नहीं दे सकता हैं।

नेताओं में सरे आम चल रहा है नूरा कुश्ती का खेल-

राजनैतिक दलों में गुट बंदी होना कोई नयी बात नहीं हैं। लगभग सभी दल इस राजरोग ग्रसित रहें हैं। गुटबंदी में अपनी ही पार्टी के नेता को नीचा दिखाना आम बात होती थी। इसके लिये सत्ता और संगठन में अपने लोगों को बिठाने की होड़ भी रहती थी लेकिन जब चुनाव या अन्य मोर्चे पर किसी दूसरे राजनैतिक दल से लड़ने की बात होती थी तो अमूमन सभी नेता एक साथ हो जाते थे। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता था कि अपना स्वार्थ साधने के लिये कोई अपनी ही पार्टी को नुकसान पहुंचाये और दूसरे दलों से तालमेल कर ले। लेकिन अब ऐसा करने में किसी बड़े से बड़े नेता को कोई परहेज नहीं होता हैं। जिसे आजकल नूरा कुश्ती के नाम से कार्यकत्र्ता चर्चा करते हैं। पहले जनसंघ जो कि अब भारतीय जनता पार्टी के नाम से अस्तित्व में है ऐसा दावा किया करती थी कि वे सबसे अलग हैं और उनमें ऐसा कोई राजरोग नहीं है।लेकिन अब ऊपर से लेकर नीचे तक भाजपाइयों और कांग्रेसियो के बीच नूरा कुश्ती के किस्से ना केवल सुने जाते हैं वरन दोंनों ही पार्टियों के कार्यकत्र्ता आम तौर पर चटखारे लेकर मजे लेते सरेआम देखा जा सकता है। ऐसे राज्यों में तो ये किस्से आम हैं जहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा दूसरे दल मुकाबले में नहीं हैं। ऐसे राज्यों में इनमें से ही किसी एक की सरकार परिवर्तन के नाम पर बनती रहना है। इसलिये अपने काले कारनामों को छिपाने और खुद अपना चुनाव जीतने के लिये अपनी ही पार्टी को अन्य क्षेत्र में नुकसान पहुंचा दोनों ही पार्टी के कई नेता मजे मार रहें हैं। लेकिन ऐसे नेताओं को एक बात खलती भी है जब ऐसे मामलों में सरे आम मुंह पर कोई बोलने लगे। प्रदेश की राजधानी से लेकर जिला मुख्यालय तक खुले आम ऐसे नूरा कुश्ती के मुकाबले चल रहें हैं और कुछ मजे ले रहें हैं तो कुछ “रेफरशिप” करके कभी इसको तो कभी उसको चित करार देकर अपना उल्लू सीधा कर रहें हैं। इस सारे खेल में सबसे ताज्जुब और आश्चर्य की बात यह है कि पार्टी के साथ गद्दारी करने वाले ऐसे नेता पार्टी मंच से कार्यकत्ताओं से पार्टी के लिये सब कुछ कुर्बान कर देने की अपील करने में भी जरा सा संकोच या शर्म नहीं महसूस करते है।









Monday, January 3, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

क्या प्रहलाद पटेल के भाजपा में पुन: स्थापित होने से महाकौशल के भाजपायी राजनैतिक समीकरणों में बदलाव आयेगा?

राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में पद लेकर राजनैतिक रूप से पुन: स्थापित हाने वाले पूर्व केन्द्रीय मन्त्री प्रहलाद पटेल की सक्रियता एवं नेतृत्व से मिलने महत्व के चलते महाकौशल की भाजपायी राजनीति में काफी हल चल मची हुयी हैं। अब देखना यही हैं कि जिले के भाजपा नेताओं में से कौन कौन किस किस बहाने से उनके कार्यक्रम से किनारा करता हैं और कौन कौन बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता हैं। लेकिन इतना तो तय है कि प्रहलाद पटेल के कारण भाजपायी समीकरणों में बदलाव अवश्य आयेगा। मुख्य अतिथि की आसन्दी से बोलते हुये मन्त्री बिसेन ने यह कहने में कोई संकोच नहीं किया उनसे जब कहीं गड़बड़ हो जाती हैं तो एक पड़ोसी के नाते हरवंश सिंह जी का उनको सहयोग मिलता हैंवैसे भी इस जिले में कांग्रेस और भाजपा नेताओं की नूरा कुश्ती के आरोप कोई नये नहीं हैं। पहले भी कई नेताओं पर हरवंश सिंह से सांठ गांठ के आरोप लगते रहें है। वकीलों के ही इस कार्यक्रम सम्भवत: हरवंश सिंह के विधानसभा उपाध्यक्ष बनने के बाद विधायक नीता पटेरिया पहली बार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन दिखीं। दोनों के चुनाव जीतने बाद ऐसा ना जाने क्या हो गया कि दोनों एक दूसरे को फिलहाल फूटी आंख नहीं सुहा रहें हैं। इसमें राजनीति तलाशने की गुजाइश नहीं मान रहें हैं। अब वारस्तविकता क्या हैंर्षोर्षो यह तो समय ही बतायेगा। सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव का नगर प्रवास हुआ। उनके इस एक दिवसीय प्रवास के दौरान नये बस स्टेन्ड के सामने आम सभा रखी गई थी। जिसमें उन्होंने इंका और भाजपा को जम कर कोसा।

प्रहलाद के कारण बदलेगे भाजपायी समीकरण-राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में पद लेकर राजनैतिक रूप से पुन: स्थापित हाने वाले पूर्व केन्द्रीय मन्त्री प्रहलाद पटेल की सक्रियता एवं नेतृत्व से मिलने महत्व के चलते महाकौशल की भाजपायी राजनीति में काफी हल चल मची हुयी हैं। वैसे तो इस अंचल में कई छत्रप ऐसे हैं जिन्हें छ़त्रप बनाने में ही प्रहलाद पटेल का हाथ था। हाल ही में बालाघाट जिले में हुये उनके शानदार प्रोग्राम ने एक अलग ही छाप छोड़ दी हैं। इसमें सोने में सुहागे का काम किया उनके प्रोटोकाल में हुयी चूक के कारण प्रदेश सरकार द्वारा किये गये एस.पी. के तबादले ने। अब 4 जनवरी को प्रहलाद पटेल का सिवनी आगमन हो रहा हैं। हालांकि जिला भाजपा द्वाराउनके प्रोग्राम की कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई हैं। उनके कार्यक्रम के बारे में विज्ञप्ति उनके कट्टर समर्थक एवंजिला भाजपा के उपाध्यक्ष सुदामा गुप्ता ने जारी की हैं। हालांकि बालाघाट जिले में जिले के संगठन ने उनसे किनारा कर लिया था लेकिन सिवनी के बारे में कहा जाता हैं कि यहां कोई ऐसी स्थिति बनने की संभावना नहीं हैंं।यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि प्रहलाद पटेल सिवनी लोकसभा क्षेत्र से चार बार चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें उन्हें दो बार जीत हासिल हुई हैं और दो बार वे चुनाव हारे हैं। इसके बाद वे बालाघाट से सांसद चुने गये थे और केन्द्रीय मन्त्री भी बने थे। इसलिये इन क्षेत्रों में उनकी काफी पकड़ मानी जाती हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में व्याप्त चर्चा के अनुसार अब अभी तक भाजपायी राजनीति में दरकिनार पड़े उनके समर्थकों के दिन फिरने में भी कोई समय नहीं लगने वाला हैं। अब देखना यही हैं कि जिले के भाजपा नेताओं में से कौन कौन किस किस बहाने से उनके कार्यक्रम से किनारा करता हैं और कौन कौन बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता हैं। लेकिन इतना तो तय है कि प्रहलाद पटेल के कारण भाजपायी समीकरणों में बदलाव अवश्य आयेगा।

पड़ोसी होने नाते हरवंश से सहयोग मिलने की बात कही गौरी भाऊ ने-जिला अधिवक्ता संघ के तत्वावधान में प्रदेश स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इस के समापन समारोह में मन्त्री गौरी शंकर बिसेन,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह एवं विधायक द्वय नीता पटेरिया और कमल मर्सकोले के अलावा नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी भी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि की आसन्दी से बोलते हुये मन्त्री बिसेन ने यह कहने में कोई संकोच नहीं किया उनसे जब कहीं गड़बड़ हो जाती हैं तो एक पड़ोसी के नाते हरवंश सिंह जी का उनको सहयोग मिलता हैं जबकि अध्यक्ष रोहाणी जी जरा सख्त मिजाज रहते हैं। वैसे भी नये परिसीमन के बाद हरवंश सिंह और गौरीशंकर बिसेन के क्षेत्र सीमायें और नजदीक आ गईं हैं। पिछले विस चुनाव के बाद केवलारी में जब भाजपा हारी थी तो कई कार्यकत्ताZओं ने खुलकर भीतरघात के आरोप भी लगाये थे जिसकी चपेट में कई बड़े नेता भी आ गये थे। वैसे भी इस जिले में कांग्रेस और भाजपा नेताओं की नूरा कुश्ती के आरोप कोई नये नहीं हैं। पहले भी कई नेताओं पर हरवंश सिंह से सांठ गांठ के आरोप लगते रहें है।

एक ही मंच पर काफी दिनों बाद दिखे हरवंश और नीता-वकीलों के ही इस कार्यक्रम सम्भवत: हरवंश सिंह के विधानसभा उपाध्यक्ष बनने के बाद विधायक नीता पटेरिया पहली बार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन दिखीं। इस बाबद एक स्थानीय अखबार ने टिप्पणी भी की हैं कि ऐसी क्या बात हैं कि वे इस मंच पर शामिल हुयीं। वैसे तो विस चुनाव के चलते तक कहीं कोई विरोध नहीं दिख रहा था जबकि दोनेां ही अलग अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे।ना तो हरवंश सिंह को सिवनी से कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे प्रसन्न मालू की कोई चिन्ता दिखी और ना ही नीता जी को केवलारी से भाजपा से चुनाव लड़ने वाले ढ़ालसिंह की कोई चिन्ता फिकर दिखी। फिर दोनों के चुनाव जीतने बाद ऐसा ना जाने क्या हो गया कि दोनों एक दूसरे को फिलहाल फूटी आंख नहीं सुहा रहें हैं। हालांकि इतने के बाद भी आमानाला कांड़ का चालान तो पेश नहीं ही हो सका हैं जिसमें हरवंश पर धारा 307 का आरोप लगा था। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं हैं कि नीता जी ने हरवंश सिंह के किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं फिर चाहे वो राष्ट्रीय कार्यक्रम हों या फिर प्रदेश का स्थापना दिवस समारोह हो। इस बात की परवाह किये बिना कि इसके परिणाम क्या होंगें र्षोर्षो वे अपने इस निर्णय पर अड़िग रहीं। इसीलिये लोग वकीलों के इस कार्यक्रम में,जिसकी अध्यक्षता हरवंश सिंह कर रहे थे ,वे क्यों शामिल हुयीर्षोर्षोइसके लोग कारण तलाश रहें हैं। कुछ लोग इसे अच्छे सम्बंधों के बनने की शुरुआत मान रहें हैं तो ज्यादातर लोगों का यह मानना हैं कि चूंकि वे स्वयं भी वकील रहीं हैं तथा इस आयोजन में उनके भी कई समर्थक सक्रिय रूप से शामिल थे इसलिये वे विशिष्ट अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में शरीक हुयीं थी। इसमें राजनीति तलाशने की गुजाइश नहीं मान रहें हैं। अब वारस्तविकता क्या हैंर्षोर्षो यह तो समय ही बतायेगा।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष ने इंका भाजपा को कोसा आम सभा में -कई दिनों बाद इंका और भाजपा के अलावा किसी अन्य दल की गतिविधियां दिखायी दी। मौका था सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव के नगर प्रवास का। उनके इस एक दिवसीय प्रवास के दौरान नये बस स्टेन्ड के सामने आम सभा रखी गई थी। सपा के जिला अध्यक्ष धर्मराज सिंह ठाकुर केवलारी विस क्षेत्र के पलारी इलाके के हैं। आप इस क्षेत्र में भारी संख्या मेंरहने वाले किरार समाज के हैं जो कि भाजपा के प्रति समर्पित मानी जाती हैं। श्री ठाकुर ने इंका के दिगग्ज हरवंश सिंह के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था। लेकिन चुनाव हारने के बाद गतिविधियां शून्य सी ही हो गईं थी। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के दौरे के दौरान ना केवल झंका मंका ठीक ठाक था वरन लोग भी जुटे थे। अपनी रणनीति के तहत सपा नेताओं ने कांग्रेस और भाजपा को बराबरी से कोसा लेकिन स्थानीय नेतृत्व को हाथ लगाने की जरूरत भी नहीं समझी। पड़ोसी जिले बालाघाट के लांजी क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने भी सभा को संबोधित किया। कुल मिलाकर कई दिनों बाद किसी तीसरे मोर्चे के राजनैतिक दल की उपस्थिति ठीक ठाक हीरही।वैसेभी बसपा,सपा,कम्युनिस्ट,राजद,जदयू आदि राजनैतिक दलों की उपयोगिता इस जिले में कांग्रेस को हराने और भाजपा को जिताने भर की हैं। जीत दर्ज करने लायक स्थिति बनाने में ना तो अभी तक इन राजनैतिक दलों ने और ना ही इनके आकाओं ने कोई कारगर प्रयास किया हैं। हां जीत सकने वाली सीटों के लिये रसद जुटाने के काम भले ही आ जायें तो यही बहुत हैं।

Saturday, January 1, 2011

जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज रामटेक गोटेगांव रेल लाइन के लिये प्रधानमन्त्री से चर्चा कर इस साल बजट में धनराशि आवंटित करने की जनापेक्षा से अवगत करायेंगें। इस हेतु परियोजना का विस्तृत विवरण तथा अब तक इसके लिये चलाये गये आन्दोलनों कह जानकारी भी महाराजश्री को दी गई हैं।

उक्ताशय की बात इंका नेता आशुतोष वर्मा ने प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में बतायी हें। इंका नेता वर्मा ने आगे उल्लेख किया है कि शंकराचार्य जी के नगर प्रवास के दौरान उन्होंने इस सम्बंध में विस्तार से चर्चा कर यह बताया कि पिछले रेल बजट में इस योजना के लिये सर्वे अपग्रेट करने के लिये राशि आवंटित की गई हैं। महाराज श्री से आग्रह किया गया हैं कि उनका आशीZवाद इस परियोजना को मिले ताकि उनकी तपोस्थली में देश के तत्कालीन प्रधानमन्त्री ने क्षेत्रीय सांसद एवं तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री कु. विमला वर्मा की मांग पर विशाल आमसभा में की गई घोषणा शीघ्र ही पूरी हो सके। रामटेक गोटेगांव नई रेल रेल लाइन की लंबाई 275 कि.मी. तथा लागत 528 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

उल्लेखनीय हैं कि इंका नेता आशुतोष वर्मा की पहल पर सन 2004 - 2005 का रेल बजट पेश होने के बाद जिले में पूरे साल भर सर्व दलीय और सर्व वर्गीय पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया था। जिसमें पूरे जिले से लगभग पच्चीस हजार नागरिकों ने संप्रग अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, प्रधानमन्त्री डॉ0 मनमोहन सिंह एवं रेल मन्त्री श्री लालू यादव को पोस्ट कार्ड लिखकर जनभागीदारी की थी। इसके अलावा जिले के सौ से अधिक राजनैतिक, सामाजिक, व्यापारिक, साहित्यिक, कर्मचारी, पत्रकार और जातीय संगठनों नें पत्र लिखकर सरकार से सौ करोड़ रूपये का प्रावधान करने की मांग की थी। इस अभियान में भागीदारी करते हुये जिले के सांसद विधायकों सहित विभिन्न स्थानीय निकायों के दो सौ सैन्तीस जनप्रतिनिधियों ने पत्र लिखकर बजट आवंटन की गुहार लगायी थी।

इंका नेता आशुतोष वर्मा ने आगे बताया हैं कि महाराजश्री ने प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह से चर्चाकर इससाल बजट आवंटन किये जाने की जनभावना से अवगत करायेंगें। महाराजश्री के निज सचिव स्वामी सुबुद्धानन्द जी को समस्त दस्तावेज एवं जानकारी भी दी गई हैं।