Tuesday, March 29, 2011

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

क्या भाजपा द्वारा बाकोवर देने वाली तीस विधानसभा सीटों में हरवंश सिंह की केवलारी भी शामिल है?

जिला भाजयुमो द्वारा शहीद दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम की जिला भाजपा द्वारा जारी एवं अखबारों में प्रकाशित विज्ञप्ति को पढ़ कर ऐसा लगा कि मानो शहीदों की याद कराना और शहीद दिवस मनाना तो एक रस्म अदायगी थी। इस मौके का लाभ लेते हुये तमाम भाजपा नेताओं ने ना सिर्फ कांग्रस पर राजनैतिक हमला बोला वरन अधिकांश समय भाजपा नेता भ्रष्टाचार पर भाषण झाड़ते रहे। सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार पर सबसे ज्यादा प्रवचन विधायक नीता पटेरिया और पूर्व विधायक नरेश दिवाकर ने दिये। जिसे पढ़कर पठकों ने ना केवल मजा लिया वरन कुछ तो यह कहने से भी नहीं चुके कि सूपा बोले तो बोले छलनी भी बोल रही हैं। मुख्यमन्त्री और प्रदेश भाजपा ने पहले कांग्रेस से हारी हुयी सीटों को चििन्हत कर उन्हें जीतने के लिये पर्यवेक्षक नियुक्त किये लेकिन उज्जैन में हुयी कार्यकारिणी की बैठक में दो सौ सीटें जीतने का लक्ष्य बना बनाया और तीस सीटें अभी से छोड़ दी हैं। भाजपा द्वारा छोड़ी गई इन सीटों को लेकर कांग्रेसी हल्कों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहें है।समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिये जारी किये गये निर्देशों को लेकर राजनीति शुरू हो गई हैं।सबसे पहले जिला पंचायत उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया और फिर हरवंश सिंह ने मामला उठाया लेकिन इस पूरे मामले में जिला भाजपा की चुप्पी किसान पुत्र मुख्यमन्त्री को ही कठघरे में खड़ा कर देती हैं।

शहीद दिवस पर भ्रष्टाचार के खिलाफ खूब बोले नीता और नरेश-बीते दिनों जिला भाजयुमो ने शहीद दिवस पर श्रृद्धाञ्जली कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें शहीदों को याद कर उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लेना था। जिला भाजपा कार्यालय में जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन,विधायकनीतापटेरिया,पूर्व विधायक नरेशदिवाकर,जिला भाजयुमो के नवनियुक्त अध्यक्ष नवनीत सिंह की उपस्थिति में शहीद दिवस मनाया गया।इस कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकत्ताZओं को सभी वरिष्ठ नेताओ ने सम्बोधित किया। इस कार्यक्रम की जिला भाजपा द्वारा जारी एवं अखबारों में प्रकाशित विज्ञप्ति को पढ़ कर ऐसा लगा कि मानो शहीदों की याद कराना और शहीद दिवस मनाना तो एक रस्म अदायगी थी। इस मौके का लाभ लेते हुये तमाम भाजपा नेताओं ने ना सिर्फ कांग्रस पर राजनैतिक हमला बोला वरन अधिकांश समय भाजपा नेता भ्रष्टाचार पर भाषण झाड़ते रहे। सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार पर सबसे ज्यादा प्रवचन विधायक नीता पटेरिया और पूर्व विधायक नरेश दिवाकर ने दिये। जिसे पढ़कर पठकों ने ना केवल मजा लिया वरन कुछ तो यह कहने से भी नहीं चुके कि सूपा बोले तो बोले छलनी भी बोल रही हैं। अपने ही कार्यकत्ताZओं के सामने ऐसे नेताओं को ऐसे उपदेश देना शोभा नहीं देता क्योंकि आम आदमी से ज्यादा तो कार्यकत्ताZ अपने नेता के बारे में जानता है। शहीदों को कांग्रेस द्वारा आतंकवादी बनाने की बात भी कही गई। जिला भाजपा को ऐसे आरोप लगाने से कोई रोक तो नहीं सकता लेकिन ऐसेमहान क्रान्तिकारियों के शहीद दिवस पर ऐसे राजनैतिक आरोप लगाकर जिला भाजपा और उसके नेता उससे भी बड़ा पाप कर रहें हैं। शहीद दिवस पर कांगेस कार्यालय में भी श्रृद्धाञ्जली कार्यक्रम आयोजित हुआ लेकिन उसमें ना तो भाजपा पर कोई रानजैतिक आरोप लगाये गये और ना ही प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार और उसके लगभग एक दर्जन मन्त्रियों पर लोकायुक्त में चल रहे भ्रष्टाचार के मामलो की चर्चा की गई थी। मुसाफिर तो यही सलाह मुफ्त में देनाचाहता हैं कि कांच के घर में रहने वालों को दूसरों के घरों में पत्थर नही फेंकने चाहिये। अब यह तो जिला भाजपा पर निर्भर करता हें कि वे इस सलाह को माने या ना मानें।

प्रदेश भाजपा द्वारा छोड़ी गई तीस सीटों को लेकर चर्चायें जारी हैं-मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा पिछले कई महीनों से हेट्रिक बनाने की योजना बनाने और उस पर अमल करने में जुटे हुये हैं। इस सिलसिले में आज से कुछ महीने पहले यह तय किया था कि भाजपा उन सभी सीटों को जीतने की रणनीति बनायेगी जो सीटें वो इस चुनाव में कांग्रेस से हारी थी। इसके लिये उसने विधानसभावार प्रभारी भी नियुक्त किये थे। प्रभारियोंकी जो सूची जारी हुयी थी उसे लेकर भी राजनैतिक क्षेत्रों में आश्चर्य व्यक्त किया गया था। कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं के क्षेत्रों में जो पर्यवेक्षक नियुक्त किये थे उनका राजनैतिक कद बहुत बौना था। उदाहरण के लिये विधानसभा उपध्यक्ष हरवंश सिंह के केवलारी विधानसभा क्षेत्र में विधायक जयसिंह मरावी को प्रभारी बनाया गया था। प्रभारी बनने के बाद से वे आज तक केवलारी क्षेत्र में नहीं आये हैं। इसे लेकर मुख्यमन्त्री के सुकतरा प्रवास के दौरान क्षेत्र के भाजपाइयों ने शिकायत भी की थी जिसे मुख्यमन्त्री ने यह कह कर टाल दिया था कि यदि आप चुनाव में भाजपा को जिता देते तो यह नौबत ही नहीं आती। यह तो रहा प्रभारियों का आलम। अब हाल ही में उज्जैन में आयोजित प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी में भाजपा ने यह तय किया हैं कि वो 200 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चलेगी। वैसे तो यह बात सही हैं कि कोई भी राजनैतिक दल प्रदेश की सभी सीटें नहीं जीतती लेकिन दो साल पहले से ऐसा भी नहीं किया जाता कि कई सीटे छोड़ देने की मांसकिता बनायी जाये। प््राद्रेश भाजपा के इस निर्णय से यह बात साफ हो जाती हैं कि भाजपा ने अभी से तीस सीटें छोड़ देने का मन बना लिया हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का ऐसा मानना हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं हैं कि प्रदेश के कांग्रेस के दिग्गजों के चुनिन्दा समर्थक विधायकों के लिये अभी से वाकोवर देने की रणनीति बना ली हैं ताकि आसानी से तीसरी पारी खेली जा सके। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि परदे के पीछे खेले जा रहे इस खेल में कुछ भाजपायी लोकसभा सीटों की भी सौदेबजी करने की योजना हो। वैसे भी प्रदेश में यह कोई नई बातनहीं हैं जब भाजपा और कांग्रेस के चुनिन्दा नेताओं के बीच ऐसे राजनैतिक सौदे ना हुये हों। अब तो सभी को इस बात की उत्सुकता हैं कि वे कौन सी तीस सीटें हैं जिन्हें भाजपा ने अभी से छोड़ दिया हैं। भाजपा को चाहिये कि वो इस बात का खुलासा करें। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चा हैं कि ऐसी सौदेबाजी करने में माहिर नेताओं ने अपनी जुगाड़ जरूर जमा ली होगी।सियासी हल्कों में यह भी चर्चा जोरों पर हैं कि कहीं इन तीस सीटों में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह की केवलारी सीट भी तो शामिल नहीं हैंर्षोर्षोइसका खुलासा तो दो साल बाद टिकिट बटने पर ही होगा तब तक लोग शायद यह भूल भी जायेंगें कि कभी ऐसा कुछ लिखा गया था।

गेहूं खरीदी का मामला उठाने में अनिल के फालोअर बन गये हरवंश -समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिये जारी किये गये निर्देशों को लेकर राजनीति शुरू हो गई हैं। सबसे पहले जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया ने बयान जारी करे इस बात पर आपत्ति उठायी कि सिंचित और जमीन के लिये गेहूं की उपज लेने की जो सीमायें निर्धारित की गईं हैं वे कम हैं। निर्धारित मात्रा से कहीं अधिक उपज किसान पैदा करता हें। इसके बाद जिले के इकलौते कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह ने भी एक पत्र कलेक्टर को लिख कर इसे निरस्त करने की मांग की। इस पत्र को उन्होंने अखबारों में भी भेजा। कांग्रेस ने तो इस सम्बन्ध में पहल की लेकिन किसान पुत्र मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की अपनी पार्टी भाजपा की जिला शाखा ने इस सम्बन्ध में कोई बयान भी जाराी करना उचित नहीं समझा जबकि छोटे से छोटे मामले में जिला भाजपा का बयान जारी होना आम बात हो गई हैं। सिर्फ राजनैतिक बयान जारी करने और अपने ही मुंह से अपने आप को किसानों का हितैषी बताने से कोई किसानों का हित चिन्तक नही हो जाता हैं वरन उसे उनके हितों की चिन्ता भी करनी पड़ती हैं। ऐसा पता चला हैं कि ये निर्देश निरस्त तो नहीं होंगें लेकिन इनमें संशोधन होकर सिंचित जमीन की निर्धारित मात्रा बढ़ा दी जायेगी। जिससे उचित मात्रा में किसानो की उपज खरीदी जा सके।









Tuesday, March 22, 2011

political news

नीता बनीं मन्त्री : नरेश ने छोड़ी भाजपा

भोपाल। मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह ने अपने मन्त्री मंड़ल का विस्तार कर उसमें जिले की भाजपा विधायक एवं प्रदेश महिलामोर्चे की अध्यक्ष श्रीमती नीता पटेरिया महिला एवं बाल विकास विभाग का कबीना मन्त्री बनाया है। पार्टी के इस निर्णय से खफा होकर सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर ने भाजपा से स्तीफा दे दिया हैं। नीता को मन्त्री बनाये जाने पर जिला इंका के निवर्तमान होने वाले वर्तमान अध्यक्ष महेश मालू ने कहा हैं कि जिले में गंगा तो जरूर बहेगी लेकिन वो विकास के बजाय भ्रष्टाचार की होगी।सुजीत ने इसे महिला के प्रति पार्टी का सम्मान बतायाहैं।

संघ के विभिन्न संगठनों जैसे भारतीय किासन संघ, राज्य कर्मचारी संघ आदि से परेशान मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह ने अचानक ही अपने बिना किसी से सलाह किये मन्त्री मंड़ल में फेर बदल करने का निर्णय ले डाला हैं। इस भारी फेर बदल में उन्होंने बाबूलाल गौर, कैलाश विजय वर्गीय और विजय शाह को मन्त्री मंड़ल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया हैं। जिन पांच मन्त्रियों को शामिल किया गया हैं उनमें प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी की विधायक नीता पटेरिया को केबिनेट मन्त्री के रूप में महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रभार सौम्पा गया हैं। भाजपायी हल्कों में चर्चा हैं कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वैंकया नायडू से नीता बार बार शिकायत करतीं थीं कि चार सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाया गया था और उनको छोड़ सभी सांसदों को कबीना मन्त्री बना दिया गया हैं। इसी दवाब के चलते शिवराज ने आखिर उनकी तमन्ना पूरी कर ही दी हैं।

नरेश ने छोड़ी भाजपा

पटेरिया के गृह जिले में उनके मन्त्री बनने की व्यापक प्रतिक्रिया हुयी हैं। भाजपा ने जिस नरेश दिवाकर की टिकिट भ्रष्टाचार के आरोपो के चलते काट दी थी और आज तक उन्हें लालबत्ती नहीं दी थी वे नीता पटेरिया को लालबत्ती मिलने से बौखला गये हें। उन्होंने आज हॉटल अमन में प्रेस कांफ्रेंस में अपने इस निर्णय की घोषणा करते हुये कहा कि मेरे पूरे परिवार ने आजीवन संघ की सेवा की हैं। मैंने भी दो बार विधायक रहते हुये पार्टी की निष्ठा से सेवाकी है। इसके बाद भी भ्रष्टाचार के छोटे मोटे आरोपों के चलते मेरी टिकिट काट दी। जब मैडम परसेण्टेज कहलाने वाली नीता जी पटेरिया को ही मन्त्री बनाना था तो भला मैं क्या बुरा थार्षोर्षोएक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बात सही हैं कि भावावेश में मैंने विस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे फार्म भर दिया था लेकिन बाद में ना केवल फार्म उठा लिया था वरन नीता जी के चुनाव का ंसचालन भी मैंने ही करके उन्हे जिताया था। उसका इनाम देने के बजाय पार्टी ने मुझे चिढ़ाने लिये नीता को मन्त्री बनाया हैं जो सहन करने लायक नहीं हैं इसलिये मैं भाजपा छोड़ रहा हूंं।

अब बहेगी भ्रष्टाचार की गंगा: महेश मालू

मन्त्री मंड़ल में नीता पटेरिया को शामिल करने पर जब प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के पिछले छ: महीने से निवर्तमान होने वाले वर्तमान अध्यक्ष महेश मालू से प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में हमेशा से ही अन्तर रहा हें। भ्रष्टाचार से लड़ने की बात करने वाली भाजपा क्या ऐसे भ्रष्ट लोंगो को मन्त्री बना कर प्रदेश से भ्रष्टाचार मिटायेगी।जिले में विकास की गंगा तो हरवंश भैया के राज में बही थी अब तो विकास के बजाय भ्रष्टाचार की गंगा बहेगी। जब हरवंश सिंह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में उनसे पूछा गया तो वे चिढ़क कर बोले क्या तुम्हें किसी ने कुछ सिखाकर भेजा हेै । मैं इस सवाल का कोई जवाब नहीं दूंगा।

महिला को सम्मान दिया भाजपा ने:सुजीत जैन

इस विस्तार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने कहा हैं कि भाजपा ने नारी शक्ति का हमेशा से सम्मान किया हैं।इसी परम्परा को निभाते हुये शिवराज जी ने नीता जी को मन्त्री बनाया हैं। इस बारे में जब कांग्रेस की प्रतिक्रिया की ओर उनका ध्यानाकषिZत कराया गया तो वे बोले कि महेश काका का तो ऐसा ही रहता हैं। उनका गोल गोल दूसरे का हाफ साइट। हरवंश सिंह के बारे उनका कुछ भी ना बोलना उनका अनुभव हैं । आखिर वे चालीस साल से राजनीति में हैं। उन्होंने यही सोचा होगा कि जो बात सबको मालूम है उसके बारे खुद बोलकर अपना मुंह भला क्यों खराब करेर्षोर्षो उनका अनुभव सीखने लायक है।

शपथग्रहण चौबीस मार्च को

भंग की तरंग में पांच दिन तक मदहोश रहने के बाद रंग पंचमी के दिन 24 मार्च को लालपरेड़ गा्रउण्ड पर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया है।

Monday, March 21, 2011

holi ki seoni ki dairy

सभी ने किसी ना किसी बहाने मुसाफिर के साथ होली खेलने से मना कर दिया यह भी नहीं पूछा कि पिचकारी में क्या भरा ह?

कलम के बजाय पिचकारी थामी मुसाफिर ने-हाथ में कलम पकड़ कर साल भर सियासी सफरनामें की जानकारी देने वाले मुसाफिर ने इस हफ्ते हाथ में कलम के बजाय पिचकारी पकड़ कर अधिकारियो नेताओ और पत्रकारों के साथ होली खेलने का मन बना डाला हैं। होली की पिचकारी लेकर सबसे पहले पहुंच गया कांग्रेस की वरिष्ठ नेता विमला वर्मा के यहां। उन्होंने हुरियारे से रंग डालने को मना किया और कहा कि मैंने तो जिले के लोगों के साथ बहुत होली खेली और बहुत कुछ सौगातें भी दी लेकिन अब मन भर गया हैं क्योंकि आज के नेता कुछ लाना तो दूर जो था उसे भी सहेज की नहीं रख पाये। होली खेलने की तमन्ना लिये मुसाफिर जब सांसद बसोरी सिंह के यहां पहुंचा और बड़ी रेल लाइन में हुयी उपेक्षा पर बात की तो उन्होंने कहा कि मैं क्यों यह सब करूं। इसजिले के कांग्रेसी जिस हरवंश सिंह के कहने पर सब कुछ करते हैं उसके केवलारी क्षेत्र से तो मैं हार गया था। अब क्या आलोक वाजपेयी,चित्रलेखा नेताम, आनन्द तिवारी या राजेश्वरी उइके के कहने से यह सब कर डालूं। हां यदि महामहिम उर्मिला सिंह ही कुछ कहें तो जरूर सोच सकता हूं। जब दूसरे सांसद से होली खेलने के.डी. भाऊ के यहां पहुचां तो वे बालाघाट जिले के छ: विधानसभा वालों के रंग में मस्त थे जब मुसाफिर ने कहा कि मैं सिवनी जिले से होली खोलने आया हूंं तो भाऊ चिढ़ कर बोले बो कि छ: वालों से फुरसत मिलेगी तब तुम दो वालों को देखूंंगा।

होली खेलने को ना मिलने से हताश हुरियारा कांग्रेस के विधायक हरवंश सिंह के यहां जब पिचकारी लेकर पहुंचा तो उन्होंने कहा कि भैया मैं तो सबका मन रखता हूंं तो भला तुम्हें कैसे मना कर सकता हूंं। तुम जरूर मुझ पर रंग डालों पर यह भी तो देख लो कि लोंगों ने इतनी कालिख पोत दी हैं कि इस पर भला तुम्हारा कोई रंग चढ़ेगा भी या नहीं।

इस पर भी मुसाफिर ने हिम्मत नहीं हारी और वो पहुच गया विधायक नीता पटेरिया के यहां। नीता जी ने तुरन्त कहा कि भैया लाल रंग लाये हो या नहीं। मैं जनपद सदस्य,जिला पंचायत सदस्य,सांसद रह चुकीं हूंं और अब विधायक हंूं। बस अब तो मन्त्री बनकर लाल बत्ती की तमन्ना बाकी हैं इसलिये यदि लाल रंग लाये हो तो होली खेल लो। हुरियारे ने जी भी कर होली खेली और आगे बढ़ गया विधायक कमल मर्सकोले के यहां। देखा कि भैया तो अपने ही रंग में रंगे हुये हैं। उन्होंनेे तपाक से कहा कि भैया मैं तो अल्ला मियां की गया हूंं जो देखो वही मुझ पर रंग डाल देता हैं अब तुम भी डाल दो। उनकी सादगी देखकर मुसाफिर भी मस्त हो गया और भंग की एक बरफी मुंह में दबा कर आगे बढ़ गया। इसके बाद वो पहुंच गया सीधे लखनादौन की विधायक शशि ठाकुर के यहां। उसने देखा कि यहां का तो जलवा ही कुछ और हैं ।विधायक जी के यहां खुद ही होली मिलन का कार्यक्रम का चल रहा था। मुसाफिर ने जग उनसे यह कहा कि क्या आप पर भी लाल रंग ही डालूं तो उन्होंने कहा कि क्योंर्षोर्षो जब यह बताया कि नीता जी ने लालबत्ती के लिये लाल रंग ही पसन्द किया था तो वो बोलीं कि हम तो सीधे सादे आदिवासी हैं रंगों का फर्क नहीं जानते।कोई भी रंग हो क्या फर्क पड़ता हैं।

पिचकारी लेकर जब कलेक्टर के बंगले की ओर बढ़ा तो देख कि जिले का पूरा सरकारी अमला भंग की तरंग में मस्त था। जब कलेक्टर मनोहर दुबे की तरफ पिचकारी तानी तो वे कहने लगे कि भाई ठहर जा अभी तो हमें पाला तुषार से निपटने दें अपन पंचमी को होली खेल लेंगें। मुसाफिर ने सोचा कि लगे हाथ नये आये कप्तान से होली खेल ली जाये। जैसे ही एस.पी. आर.के.जैन के पास पहुचा तो वे बोले यार अभी तो पुराना बगरोना निपटाने से ही फुरसत नहीं मिल पा रही हैं। होली क्या खेलेंर्षोर्षो लौटते में जिला पंचायत के सी.ओ. राकेश सिंह मिल गये। जब उनसे होली खेलने आगे बढ़ा तो वे बोले खूब खेल लो होली मैंने तो कइयों के रंगों को वैसे ही बदरंग कर दिया हैं तुम्हारा रंग भी मुझ पर चढ़ने वाला नही हैं।

खुशी खुशी हुरियारा भाजपा कार्यालय में होली खेलने पहुंचा तो देखा कि सुजीत जैन के साथ नरेश दिवाकर,वेदसिंह ठाकुर,प्रमोद जैन, सन्तोष अग्रवाल,नरेन्द्र टांक,राकेश पाल,अशोक टेकाम, प्रदीप पटेल, प्रहलाद सनोड़िया, मूर्ति,श्रीकान्त अग्रवाल सभी रंग खेलने में मस्त थे कि इतने में पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी अपने साथ गणों रवीन्द्र अग्रवाल,रूपा सेठ,सन्तोष चौरसिया और मनोज नाना कोे लेकर पहुंच गये। जब सबने राजेश पर रंग डालने का कोशिश की तो उन्होंने कहा कि रहने दो यह दिखावा मैं सब जानता हूंं कि मेरे चुनाव में किसने क्या किया हैं। अब अरविन्द जी मैनन प्रदेश के प्रभारी हो गये हैं तो यह प्रेम जता रहे हो। कार्यालयसे ही कुछ दूरी पर पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन अपनी पिचकारी ताने खड़े थे और यह देख रहे थे कि कब यह यह सब नाटक खत्म हो और कब वे अपनी पिचकारी से सब को रंगों से तर बतर कर डाले।

भाजपा के यह रंग ढ़ंग देख कर मुसाफिर जिला इंका अध्यक्ष महेश मालू को अपने रंग में रंगने जब पहुंचा तो वे तिलमिलाकर बोले कि भाई अपना तो कार्यकाल खत्म हो गया हैं अब दूसरी जगह देखो। जब वो हीरा आसवानी के पास पहुंचा तो वहां ओ.पी.तिवारी और जे.पी.एस.तिवारी भी बैठे थे। उन्होंने यह कह कर रंग डालने से मना कर दिया कि अपनाा तो अभी कार्यकाल शुरू ही नहीं हुआ हैं। वापसी में कुछ कांग्रेसियों का दल होली खेलते दिखा जिसमें मो. समी अंसारी,दिलीप बघेल, इमरान पटेल,राजाा बघेल,सन्तोष पञ्जवानी,मो. पाशा होली के रंगों में रंगे हुये थे जब मुसाफिर ने उनसे होली खेलने की बात की तो कहा कि ठहरो पहले यह बताओ कि ठाकुर साहब के साथ होली खेल कर आये हो या नहीं क्यों कि अभी बहुत कुछ उनके रंग में रंगना बाकी हैं नहीं तो अगली होली तुम्हारे साथ पक्की हैं।

होली के तरह तरह के रंगों को ेदेखता हुआ जब हुरियारा आगे बढ़ा तो देखा कि एक जगह आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू,सञ्जय भरद्वाज,जकी अनवर,डी.वी.नायर,लल्लू बघेल, देवीसिह चौहान,पिट्टू बघेल,रामगोपाल बब्बा सोनी,राजेन्द्र मिश्रा,अनन्त यादव, सुनील बघेल,सुबोध मालू, सञ्जय बघेल, मजहर अली, प्रदीप राय,योगेन्द्र सोनी सभी गम गलत कर रहे थे। जैसे ही मुसाफिर ने उनसे हरा रंग डालने की इजाजत मांगी तो सभी उस पर चिल्ला पड़े कि अब तू भी हरा रंग लेकर ही यहां आया हैं। सारा लाल रंग बर्रा में उड़ेल आया होगा। अबे हम भी यह जानते हें कि हरा हरावे लाल जितावे। यदि डालना हैं तो लाल रंग डाल वरना रफू चक्कर हो जा।

भंग की तरंग में मुसाफिर पहुच गया जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल के यहां। वहीं जिला कांग्रेस के महामन्त्री असलम भाई और जिपं के उपाध्यक्ष अनिल चौरसिया बैठे हुये थे। जब उन पर रंग डालने की बात हुयी तो वे बोले रंग तो तुम खूब डालो और चाहे लाल डालो या हरा पर इतना याद रखना कि साहब को यह पता नहीं चलना चाहिये कि हमने तुम्हारे साथ भी होली खेली हैं।

नेताओं और अधिकारियों की होली का रंग ढ़ंग देखने के बाद मुसाफिर ने मीडिय़ा की ओर रुख किया और यह देखना चाहा कि उनकी भंग की तरंग क्या गुल खिला रही हैं। सबसे पहले उसे इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रशान्त शुक्ला,तिलक जाटव,राजेश स्थापक,सुनील और काबिज मिल गये। उन्होंने हाथ में पिचकारी देखत ही कहा कि अरे तुम क्या होली खलेगो हम तो रोज कैमरे से होली खेलते हैं। फोटो तो सभी की खींचते हें लेकिन दिखाते उसकी ही हैं जिसे दिखाना होता हैं। एक दिन की होली तुम्हें ही मुबारक हो। प्रिण्ट मीडिया के संवाद कुञ्ज के कार्यालय में जब पहुंचा तो मञ्जु भाभी,क्षितिज और हिमांशु ने तपाक से कहा कि भंग की ठंड़ाई में यदि रंग घोल कर लाये हो ठीक वरना अपना रास्ता देख।रास्ते से लौटते में सुदूरसन्देश के आफिस में जब पहुंचा तो अशोक आहूजा ने तपाक से कहा कि कलमुंहे तुझसे क्या होली खेलूंगा तुझे ही आना था तो कम से कम फगुआ गाने वालों की टीम लेकर आ जाता। इसी तर्ज में जब वो युगश्रेष्ठ कार्यालय में पहुंचा तो विजय छांगवानी और सन्दीप छांगवानी वहां बैठे भांग की ठंड़ाई घोण्ट रहे थे। जब मुसाफिर ने उससे होली खेलने की कोशि की तो वे तुरन्त ही बोल उठे कि सबसे होली खेल कर हमने देख ली हैं अब तो खुद आपस में ही होली खेलेंगें।शाम होते दलसागर के आफिस में जब पहुचा तो प्रमोद शर्मा,और मगन मासाब आपस में बैठ कर हिसाब कर कर रहें थे कि कब कितनी लाये और कितनी खाली की। खाली से हिसाब मेल नहीं खा रहा था। जैसे ही मुसाफिर वहां पहुंचा तो बोले कि खाली

पीली होली से क्या फायदार्षोर्षोकुछ लाया क्यार्षोर्षो

यशोन्नति कार्यालय का आलम ही कुछ और था।राजेश अग्रवाल और मनोजमर्दन त्रिवेदी में लहसुन प्याज और बिना लहसुन प्याज को लेकर भंग की तरंग में चर्चा चल रही थी। मुसाफिर बिना पूछे ही वहां से खिसक लिया कि कहीं यह ना पूछ लें कि बिना लहसुन प्याज का रंग है या नहीं।

स्थानीय प्रेस से थक हार जब वो लौट रहा था तभी एक जगह जिले के वरिष्ठ पत्रकारगण आनन्द खरे, दिनेश किरण जैन,आर.के.विश्वकर्मा,हरीश रावलानी,,सन्तोष उपाध्याय,ओम दुबे,अभय निगम ,सूर्यप्रकाश विश्वकर्मा,तारेश अग्रवाल,राजेन्द्र गुप्ता,आदि सभी अपनी अपनी पिचकारी से एक दूसरे को रंगने में लगे थे और मालिकों और पाठकों के बीच कैसे जी रहें हैं इसका रोना रो रहे थे। इतने में पिचकारी थामे मुसाफिर को फट पड़े कि ऐसे में भी तुझे हमारे ही साथ होली खेलने की पड़ी हैं।

घूमते फिरते हुरियारा एक्सप्रेस आफिस में पहुंच गया। वहां वाहिद कुरैशी,फिरोज भाई लप्पा, रामदास,जिब्राइल कुरैशी बैठे बैठे अपनी अपनी हांक रहे थे। भंग का रंग जब सब पर चढ़ कर बोलने लगा तो मन का मलाल भी निकला कि क्या करें अब चाचा को भी देखना पड़ता हैं और सनद भैया को भी।लोग कुछ भी बोले हैं तो मददगार ही। मुसाफिर को देखते ही बोले कि अब तुम नयी मुसीबत मत खड़ी करो और हमे होली खेलने दो।

इन सबसे से बेखबर सञ्जय सिंह,अवधेश तिवारी,रामेन्द्र श्रीवास्तव,अयोध्या विश्वकर्मा और पुष्पराज दुबे होली के दिन तर हो रहे थे। मुसफिर को देख बोले कि भाई अपन तो अपने रंग में रंगे रहते हैं तुम्हें भी इसी रंग में रंगना हैं तो आओ और तुम भी तर हो जाओ वरना भाड़ में जाओ।

इधर से लौटते में दिल्ली से आये लिमटी खरे टकरा गये। उन्हें देख मुसाफिर खुश हो गया कि दिल्ली का तर माल कुछ मिलेगा पर वो तो बहुत नाराज थे कि दिल्ली में कभी सिवनी का नाम हुआ करता था अब नाम ही मिट गया हैं। ऐसे में अब क्या होली खेलें।

आखिर में लौटते काली चौक के पास द्वारका श्रीवास्तव,आशुतोष तिवारी और विनोद मिल गये जो दर्पण में अपना रंगा चेहरा देख कर खुश हो रहे थे। मुसाफिर जब आया तो उसे भी उस रंग में रंग डाला और कहा कि अब तू भी दर्पण में अपना चेहरा देख और घर जा।

दिन भर का थका हारा मुसाफिर जब घर पहुंचा तो सोचने लगा कि नेता,अधिकारी पत्रकार सभी ने किसी ना किसी बहाने उससे होली खेलने से मना कर दिया। अब मुसाफिर भला उन्हे क्या बताता कि बड़ी रेल लाइन, लोकसभा सीट समाप्त होने,सम्भाग ना बन पाने, फोर लेन के मामले में अड़चनें और ढ़ेर सारे सरकारी दफ्तर चले जाने से निराश होकर मुसाफिर ने इस साल पिचकारी में विकास का रंग भरा था और चाहता था कि सब मिल जुल कर कुछ करें लेकिन नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात निकला और यह होली भी वैसी ही खाली चली गई।ÞमुसाफिरÞ

Tuesday, March 8, 2011

मीड़िया ने सार्थक पहल कर सुप्रीम कोर्ट को सरकार को विलंब के कारण तीन सौ तिरतालीस करोड़ रु. हर्जाना देने का खुलासा कर जल्द मामले के निपटारे की लगायी गुहार

सिवनी। फोर लेन विवाद में जिले की मीडिया ने सार्थक पहल करते हुये भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजकर अवगत कराया हैं कि केन्द्र सरकार को विलंब के कारण 1 मार्च 2011 तक 342 करोड़ रूपये हजौना ठेकेदारों को देया हो गया हैं जों किे 38 लाख 8 सौ रु. प्रतिदिन के हिसाब से बढ़ता ही जायेगा। भू तल परिवहन मन्त्रालय कोर्ट में अपने ही दिये गये फ्लायी ओवर के विकल्प से अब लरगत की अरड़ लेकर मुकर रहा हैं जबकि योजना बी.ओ.टी. में बन रही हैं।आपसी सहमति बनाने के लिये कोर्ट एक साल से भी अधिक का समय दे चुकी हैं लेकिन आम सहमति नहीं बन पा रही हैं अत: कोर्ट शीघ्र मामले का निराकरण कर एक राष्ट्रीय परियोजना के पूर्ण होने में हो रहे विलंब को समाप्त कराने का कष्ट करें।

मीडिया द्वाराप्रेषित आवेदन में उल्लेख किया गया है कि समूचे देश में चारों महानगरो और चारों दिशाओं को न्यूनतम लंबाई के मार्गों को जोड़कर ईंधन एवं समय की बचत के लिये प्रधानमन्त्री स्विर्णम चतुर्भुज योजना के तहत एक्सप्रेस हाई वे बनाये जा रहे हैं। इसके तहत कन्याकुमारी से काश्मीर तक बनने वाला चार हजार कि. मी. लंबा उत्तर दक्षिण कॉरीडोर मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से होकर नागपुर से कन्याकुमारी तक बन रहा हैं। यह मार्ग मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में कुरई विकासखंड़ में स्थित पेंच नेशनल पार्क की सीमाओं के बाहर से जा रहा हैं। जिले में यह कॉरीडोर मार्ग लगभग 105.58 कि.मी. बनना हैं जिसमें से 67 किलोमीटर बन चुका हैं और मात्र 38.50 किलो मीटर बनना शेष हैं।

इस कारीडोर के निर्माण को रोकने के लिये एक एन.जी.ओं. वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंड़िया दिल्ली द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उक्त याचिका आई.ए.क्र. 1124/09 पेश की गई हैं जो कि विचाराधीन हैं। इस याचिका के जवाब में संप्रग शासनकाल के प्रथम कार्यकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण ने शपथ पत्र के साथ जो जवाब दिया था उसमें प्रथम आप्शन के रूप में फ्लाई ओवर(एलीवेटेड हाई वे) और आप्शन दो में वर्तमान एन.एच. के चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया था। जिस पर वन एवं पर्यावरण विभाग सहमत नहीं था।

आवेदन में यह भी बताया गया है कि सी.ई.सी. की रिपोर्ट के बाद सिवनी के नागरिकों की ओर से इंटरवीनर बनने का आवेदन लगाया गया। इस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एमाइकस क्यूरी श्री साल्वे को यह निर्देश दिया कि वे सी.ई.सी. और एन.एच.ए.आई. के साथ बैठक कर एलीवेटेड हाई वे सहित अन्य विकल्प तलाशने का प्रयास करें। एक बैठक के बाद एन.एच.ए.आई. ने 9 अक्टूबर 2009 को एक शपथ पत्र देकर बैठक में सी.ई.सी. द्वारा आप्शन दो के बारे में सुझाये गये संशोधनों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी हैं लेकिन आप्शन एक के बारे में शपथपत्र में कुछ भी नहीं कहा हैं। इसके बाद संप्रग शासन के दूसरे कार्यकाल में दिनांक 6 नवम्बर 2009 को श्री साल्वे ने कोर्ट में जो अपना नोट प्रस्तुत किया है उसमें यह उल्लेख किया है कि एन.एच.ए.आई. आप्शन एक, जो कि एलीवेटेट हाइ वे का था, के लिये सहमत नहीं हैं क्योंकि उसमें लगभग 900 करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। कोर्ट में एन.एच.ए.आई. द्वारा स्वयं के सुझाये गये प्रस्ताव पर अब असहमत होना समझ से परे हैं। जबकि ईंधन और समय की बचत के मूल मन्त्र को लेकर बनायी जा रही परियोजना में निर्माण लागत का प्रश्न उठाना ही नहीं चाहिये। वैसे भी यह परियोजना बी.ओ.टी. योजना के अंर्तगत बनायी जा रही है।

मीडिया द्वारा प्रेषित इस आवेदन में स्थानीय संपादकों श्रीमती मंजुला कौशल,संवाद कुंज, अशोक आहूजा,सुदूर सन्देश, विजय छांगवानी,युग श्रेष्ठ, मनोज मर्दन त्रिवेदी, यशोन्नति, प्रमोद शर्मा, दलसागर, के अलावा संभाग एवं प्रदेश स्तर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों के जिला प्रतिनिधि जिनमें दिनेश किरण जैन, भास्कर,आनन्द खरेू नवभारत, ओम दुबे हितवाद, संजय सिंह जनपक्ष, आर.के.विश्वकर्मा नई दुनिया, वाहिद कुरैशी, एक्सपेस, हरीश रावलानी, लोकमत समाचार, सन्तसेष उपाध्याय, पत्रिका, सूर्यप्रकाश विश्वकर्मा, राज एक्सप्रेस, अभय निगम, हरि भूमि, के अलावा टी.वी. चैनल के प्रशान्त शुक्ला, साधना, तिलक जाटव, सहारा समय, सुनील हंर्चारिया, ई.टी.वी.,काबिज खॉन टी.वी.99 चैनल के द्वारा प्रेषित आवेदन में आगे बताया गया हैं कि इस सम्बंध में कृपया जिला कलेक्टर सिवनी के संलग्न पत्र क्र./9025/रीडर-अपर कले./08 दिनांक 19/12/2008 का अवलोकन करने का कष्ट करें जो कि मध्यप्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव वन विभाग एवं प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को संबोधति हैं।इस पत्र में विस्तृत विवरण देते हुये बताया गया हैं कि राज्य शासन की अनुशंसा की प्रत्याशा में पेड़ कटाई प्रतिबंधित कर दी गई हैं। इस पत्र में यह भी उल्लेख किया गया गया है कि केन्द्रीय साधिकार समिति के सदस्य डॉ. राजेश गोपाल ने 18 एवं 19 नवम्बर 2008 को जब कोर्ट के निर्देश पर विवादास्पद स्थल का भ्रमण किया था तो उसकी सूचना ना तो जिला कलेक्टर को दी गई थी और ना ही स्थानीय वन विभाग और प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर एन.एच.ए.आई.को गई थी। ऐसी परिस्थिति में जनमत का आकलन करना या आम आदमी को होने वाली असुविधाओं के बारे में विचार करना तो सम्भव था ही नहीं। इस पत्र में जिला कलेक्टर ने यह भी उल्लेख किया था कि रोके गये मार्ग में कई पुलियां अत्यन्त कमजोर हैं जिनसे दुघZटनायें होने की संभावना से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति भी बन सकती हैं।

आवेदन में यह भी बताया गया हैं कि इसी पत्र में एक सबसे महत्वपूर्ण तथ्य का भी उल्लेख किया हैं कि,Þ चूंकि रोक लग जाने पर ये बाधामुक्त भूमि उपलब्ध नहीं करा पायेंगे। जिससे भारतीय राष्ट्रीय राज मार्ग प्राधिकरण को प्रोजेक्ट में देरी होने पर अपने कंशसेनर को प्रतिदिन करीब 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा देना होगा जिससे उन पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ेगा।ंß बी.ओ.टी. योजना के तहत बनाये जाने इस मार्ग की जिले में लंबाई 105.58 कि.मी. हैं। जिसका लगभग 37.5 कि. मी. क्षेत्र का काम बाधा मुक्त भूमि उपलब्ध नहीं करा पाने के कारण रुका पडा़ हैं। विवादास्पद पेंच पार्क के बाजू के हिस्से के अलावा छपारा के पास भी 9.24 कि.मी. मार्ग का निमार्ण भी वन विभाग की अनुमति नहीं होने से रुका पड़ा हैं। इस मार्ग की भूमि की चौड़ाई 60 मीटर हैं। इसके कारण टोल टैक्स की वसूली भी प्रारंभ नहीं हो पा रहीं हैं। इस आधार पर यदि दोनों कंपनियां पूरे 105.58 कि. मी. पर हर्जाने की मांग करती हैं तो इस भूमि का कुल क्षेत्रफल 633.58 हेक्टेयर होता हें जिस पर 6 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाने की राशि 38 लाख 8 सौ 80 रु. होती हैं। इस हिसाब से 1 मार्च 2011 तक की कुल राशि 343 करोड़ 17 लाख 29 हजार 7 सौ 20 रु. होती हैं जो शासन द्वारा ठेकेदार को देय होगी।

पत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि इस राष्ट्रीय परियोजना का मूल मन्त्र ईंधन और समय की बचत का है। लेकिन इसमें निर्माण में हो रहे अनावश्यक विलंब के कारण जहां एक ओर शासन को अरबों रूपयों का चूना लग रहा हैं वहीं दूसरी ओर इस विलंब के कारण राष्ट्र को क्षति उठानी पड़ रही हैं। माननीय न्यायालय ने भू तल परिवहन मन्त्रालय और वन एवं पर्यवरण मन्त्रालय को एक राय बनाने के लिये लगभग एक वर्ष से अधिक का समय दिया लेकिन वे इसमें अभी तक सफल नहीं हो पायें हैं।

अन्त में आववेदकगणों के द्वारा माननीय न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस मामले का शीघ्र निराकरण करने का कष्ट करें।

Tuesday, March 1, 2011

रामटेक सिवनी गोटेगांव रेल परियोजना का वित्त पोषण प्रधानमन्त्री रेल विकास योजना से होगा : ममता

सिवनी। रेल बजट में यदि सांसदों की लापरवाही नहीं होती तो इस बार पैसा मिल सकता था।सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपर्क परियोजनाओं का वित्त पोषण प्रधानमन्त्री रेल विकास योजनाओं की निधि से किया जायेगा। इसमें रामटेक बरास्ते सिओनी गोटेगांव रेल मार्ग भी शामिल हैं। अमान परिवर्तन के लिये छिन्दवाड़ा नैनपुर मंड़ला फोर्ट का काम बारहवीं पंच वषीZय योजना में प्रारंभ किया जायेगा।

संसद में रेल बजट करते हुये रेल मन्त्री ममता बेनर्जी ने वैसे जिले को कुछ नहीं दिया लेकिन विस्तृत जानकारी मिलने पर यह भी खुलासा हुआ हैं कि जिले की दोनो परियोजनाओ के रास्ते पूरी तरह से बन्द भी नहीं हो गये हैं। जहां तक छिन्दवाड़ा नैनपुर मंड़ला गेज परिवर्तन का मामला तो यह तो केन्द्र सरकार द्वारा लिये निर्णय में आता हैं जिसमें सभी छोटी लाइनों को बड़ी रेल लाइन में अदलने का उल्लेख था। नागपुर छिन्दवाड़ा नैनपुर जबलपुर मार्ग में अमान परिवर्तन का मामला हैं तो जबलपुर नैनपुर और छिन्दवाड़ा नागपुर का अमान परिवर्तन का काम प्रारंभ हैं। चूंकि सिवनी बीच में हैं इसलिये इसमेंविलंब होसकता हैं लेकिन बनना तो तय हैं।

जिले की महत्वाकांक्षी रामटेक सिवनी गोटेगांव नयी रेल परियोजना के लिये पिछले वर्ष 2010-2011 के रेल बजट में ममता बेनर्जी ने बिन्दु क्रमांक 102 में सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपंकत्ताZ सम्बंधी प्रस्ताव सर्वे अद्यतन करने के लिये प्रस्तुत किये थे उस सूची में रामटेक गोटेगांव बरास्ते सिवनी का नाम क्रमांक 92पर था जिसके बारे में यह कहा गया था कि सर्वे पूरा कर इन परियोजनाओं को योजना आयोग के समक्ष भेजा जायेगा। इस साल के रेल बजट में रेल मन्त्री ने बिन्दु क्रमांक 108 में कहा हैं कि Þसामाजिक रूप से वांछनीय सभी 114 पीरयोजनाओं को, जिनका हाल ही में सर्वेक्षण किया गया है,को 12 वीं योजना में शामिल किया जायेगा और इसका वित्त पोषण प्रस्तावित प्रधानमन्त्री रेल विकास योजना के माध्यम से किया जायेगा। Þरेल मन्त्री की इस घोषणा से जिले की इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के शीघ्र प्रारंभ होने की आशा बढ़ गई हैं।