Monday, December 19, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

फोर लेन के मुद्दे को सिर्फ राजनैतिक हथियार बना कर राजनीति करने की छूट जनता किसी को भी नहीं दे सकती

इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की यह संयुक्त यात्रा सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है आई.डबल्यू .ई. योजना -इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। बी.ओ.टी. याने बिल्ट,आपरेट और ट्रांसफर। लगाओ, चलाओ और वापस करो। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इसका फुल फार्म इनवेस्ट,विन और अर्न याने लगाओ, जीतो और कमाओ। जिस तरह से आज निर्वाचित जनप्रतिनिधि काम कर रहें हैं उससे आम आदमी के मन में यह धारणा काम करने लगी हैं कि अब कोई जनसेवा करने के लिये जन प्रतिनिधि नहीं बनता वरन जीतते ही वह धन सेवा में जुट जाता हैं। जैसे जैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया गया वैसे वैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण हुआ हो या नहीं लेकिन भ्रष्टाचार विकेन्द्रीकरण जरूर होता जा रहा हैं। इसलिये आज जहां देखो वहां भ्रष्टाचार का रोना रोते लोग दिख जाते हैं। अब इसका कारण क्या है? इस पर लोग अलग अलग बातें कहते दिखते हैं। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि महंहगें चुनावों और पार्टी के द्वारा थोपी जाने वाली आर्थिक मांगों का रोना रोते हें तो वहीं दूसरी ओर जब लोग “आजई बनिया कालई सेठ“ होते जनप्रतिनिधियों को देखतें हैं तो उन्हें ये सारे तर्क बेमानी लगतें हैं। भ्रष्टाचार मिटाने का दावा तो सभी करतें हैं लेकिन इसकी शुरुआत कहां से करें? यह कोई भी नहीं बता पाता हैं। राजनीति में तो अब भ्रष्टाचार को बेशर्मी से शिष्टाचार कहने से कोई नहीं चूक रहा हैं। इस संबंध में तो गायत्री परिवार की यही मंत्र काम आ सकता हैं कि “हम सुधरेंगें,जग सुधरेगा“। यदि हमने खुद ना सुधरने की कसम खा ली है तो फिर जग के सुधरने की बात करना ही बेमानी होगा।

पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की दिल्ली यात्रा सुर्खियों में -नगरपालिका का प्रतिनिधिमंड़ल दिलली से लौटकर आ गया हैं। दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ द्वारा नगर निगम,नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था जिसमें जलकर्म सभापति राजा पराते , कांग्रेस पार्षद दल के नेता शफीक खान के अलावा इंका पार्षद इब्राहिम खान का समावेश था। इस यात्रा के दौरान इस प्रतिनिधि मंड़ल ने अलग से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से भेंट कर शहर की समस्याओं से अवगत कराया और शहर में रेल्वे ओवर ब्रिज के साथ सीवर लाइन तथा सड़कों के लिये अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने की मांग भी की हैं।बताया जाता है कि इस दिल्ली यात्रा में पालिका के पूर्व अनुभवियों की टीम भी गयी थी जिसके फोटो भी अखबारों की सुर्खी बनी थी। लेकिन इस टीम का कहीं विज्ञप्ति में उल्लेख नहीं किया गया हैं। लोगों का कयास हैं कि पुरानी अनुभवी टीम ने पर्दे के पीछे कोई कारगर भूमिका निभायी होगी। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम ने क्या गुल खिलाये हैं और इसका शहर को कितना और क्या लाभ होगा? यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा। पालिका की योजनाओं को जब तक प्रदेश सरकार अपनी सिफारिश के साथ केन्द्र सरकार को नहीं भेजेगी तब तक राशि मिलने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता हैं। शहर के लोगों की तो यही अपेक्षा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रोड़ शो करके भाजपा के लिये वोट मांगें थे उसी तरह जल्दी ही प्रदेश सरकार योजनाओं को दिल्ली भेजे और दलीय भावनासे परे हट कर कांग्रेस के लोग केन्द्र से राशि दिलवायें ताकि स्वर्णिम मध्यप्रदेश की परिकल्पना के अनुसार स्वर्णिम शहर भी बन सकें। वैसे तो पालिका की युवा टीम से शहर के लोगों को बहुत उम्मीदें हैं।

फोर लेन सिर्फ राजनीति करने की छूट किसी को भी नहीं-फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने एक प्रतिनिधि मंड़ल दिल्ली ले जा कर भू तल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी, पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन और शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से भेंट कर मसले को जल्दी निपटाने का मांग की थी। उसके बाद दिल्ली से भोपाल आये वन विभाग के अधिकारी राजेश गोपाल सहित एनएचएआई के अधिकारियों की हरवंश सिंह से उनके ही बंगले भी हुयी भेंट के समाचार भी अखबारों में छपे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की सीईसी के सदस्य के रूप में राजेश गोपाल के प्रदेश सरकार के मुख्यसचिव को भेजे गये पत्र के आधार पर ही फोर लेन का काम पूरे जिले में रुक गया था। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ कुरई घाट का 8.9 कि.मी. का हिस्सा ही विचाराधीन था जिस पर भी कोर्ट ने स्टे नहीं दिया था।इसके बाद हरवंश समर्थकों का दावा है कि दिल्ली में हरवंश सिंह ने वन एवं पर्यावरण विभाग और तथा एनएचएआई के अधिकारियोंकी संयुक्त बैठक कर पूरे मामले में सर्वमान्य हल निकाल लिया हैं और जल्दी ही पूरा रुका हुआ काम शुरू हो जावेगा। लेकिन जानकार लोगों का दावा है कि एनएचएआई का नया प्रस्ताव अभी जिले में ही वन विभाग के पास विचाराधीन है जिस पर परीक्षण किया जा रहा हें। फिर यह प्रदेश के वाइल्ड लाइफ बोर्ड के भोपाल जायेगा और वहां नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मामला दिल्ली भेजा जायेगा जहां अंतिम स्वीकृति के बाद ही काम शुरू हो पायेगा। दूसरी तरफ भाजपा यह दावा कर रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इसे पूरा कराने की पूरी कोशिश कर रहें हैं। शिवराज सिंह ने भी सिवनी के कुछ लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलाने की बात एक साल पहले कही थी। लेकिन ना तो ले जाने वाले दिल्ली ले गये और ना ही जाने वालों ने कभी शिवराज से यह जानने की जरूरत महसूस की कि वे उन्हें कब दिल्ली ले जायेंगें। और मामला अखबारों की सुर्खियां भर बन कर रह गया। बीते दिनों जिले से बहुत कुछ छिना हैं। लेकिन मिला कुछ भी नहीं हैं।इससे दुखी जिले के लोगों ने फोर लेन के संघर्ष में ऐतिहासिक बंद कर एक मिसाल कायम की थी। लेकिन तब मामला कोर्ट में लंबित होने कारण केन्द्र और राज्य सरकार के पास यह बहाना था कि चाहते हुये भी हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अब जबकि मार्च 2011 में कोर्ट ने आपत्तिकर्त्ता की याचिका खारिज कर दी हैं तब इस विलंब के लिये किसी के भी पास कोई बहाना नहीं हैं। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी यदि मामला अभी जिले में लंबित है तो इसके लिये भला जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती हैं? बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।

Monday, December 12, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

शिवराज और सरकार के खिलाफ विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने की अनुमति नहीं दी जाती है?

नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है।यह भी चर्चित है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। कुलस्ते ने कांग्रेस और राष्ट्रीय नेतृत्व पर जम हर निशाने साधे लेकिनइस पर कांग्रेस की चुप्पी चर्चा में हैं। पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं।प्रदेश अध्यक्ष मौर्य ने इंका और भाजपापर निशाना साधते हुये कहा कि दोनों की करनी एक ही है। गौगपा ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की है। एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं।

जिले में कुलस्ते की आदिवासी सम्मान यात्रा चर्चित-नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है। नये मंड़ला संसदीय क्षत्र में नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव एवं सिवनी जिले की लखनादौन एवं केवलारी विस सीट के अलावा मंड़ला जिले की पांचः विस सीटें आती हैं। यह भी एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। जिले की लखनादौन विस सीट से कुलस्ते को भारी मतों से हारना पड़ा था। इसके साथ ही वे अपने गृह जिले मंड़ला की पांचों विस सीटों से भी चुनाव हार गये थे। गोटेगांव के बाद कुलस्ते की यात्रा ने लखनादौन एवं केवलारी क्षेत्र में आयोजित सम्मान समारोहों में हिस्सा लिया। कुलस्ते ने कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय नेतृत्व को कठघरे मे खड़ा करते हुयें कई आरोप लगाये और कहा कि कांग्रेस आदिवासी और दलितों को बिकाऊ समझती हैं। हमें समय आने पर बता देना है कि हम बिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के लिये कांग्रेस ने हमें प्रलोभन दिया और जब हमने ादन में उसे उजागर किया तो हमें ही जेल में डालकर सरकार ने प्रजातंत्र का अपमान किया हैं। जिसका बदला हम लेकर रहेंगें। इन सब आरोपों पर कोंग्रेस की चुप्पी भी कम रहस्यमय नहीं हें। वैसे भी पूर्व में यह आरोप लगते रहें हैं कि हरवंश और कुलस्ते के बीच परिसीमन के समय से ही नूरा कुश्ती चलती रही हैं। जिला भाजपा द्वारा जिले में आयोजन की भारी तैयारियां की गयी थी। उनके इस आयोजन में जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायक नीता पटेरिया, शशि ठाकुर,कमल मर्सकोले, मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर,पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक टेकाम सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुये। भाजपा के सभी नेताओं ने संप्रग सरकार और कांग्रेस पर जमकर निशाने साधे और उसे प्रजातंत्र का हत्यारा बताया और यह भी कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार को हर जगह बढ़ावा दे रही हैं। कुछ जगह जनता और आदिवासियो की नगण्य उपस्थिति भी अखबारों की सुर्खी बनी रहीं हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चित रहा कि जिला भाजपा का इस आयोजन के दौरान फील्ड मेनेजमेंट से कहीं अच्छा मीडिया मेनेजमेंट रहा हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चित है कि आदिवसी सम्मान यात्रा में जिले के आदिवासी विस क्षेत्र बरघाट और आदिवासी बाहुल्य वाली सिवनी विस क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में कुलस्ते ने अपना कार्यक्रम क्यों नहीं रखा? भाजपा के आदिवासी नेता कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र तक ही इस अभियान को सीमित रखा इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जारी हैं।

इंका भाजपा का विज्ञप्ति युद्ध शवाब पर -पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। जहां एक ओर प्रेम तिवारी हरवंश सिंह की कारगुजारियों पर आक्रमण कर रहें हैं तो दूसरी ओर इमरान पटेल ने नीता पटेरिया पर निशाना साधना शुरू कर दिया हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भाजपायी गुटबाजी में प्रेम तिवारी विधायक नीता पटेरिया के खेमें के माने जाते हैं। इसीलिये नगर इंकाध्यक्ष ने नीता को कठघरे में खड़ा करने की योजना बना रखी हैं। इस विज्ञप्ति युद्ध में आरोपों के पूरे जवाब देने के बजाय सुविधानुसार जवाब देने और अपनी ओर से सवाल भी दागने से भी कोई नहीं चूक रहा हैं।

बसपा ने भी दी जिले में राजनैतिक दस्तक -बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आई.एस.मौर्य ने इस विशाल आम सभा में कांग्रेस और भाजपा को जम कर कोसा और कहा कि इन दोनों दलों की करनी में कोई फर्क नहीं हें। दोनों ही दलों की सरकारों ने दलितों को छला है और अपनी तिजोरियां भरी हैं। बहन मायावती ने जब इन वर्गों के उत्थान के लिये कड़ी मेहनत शुरूकी है तो वे दोनों दलों की आंखों में खटकने लगी हैं। हमें आदिवासियों और दलितों के उत्थान के लिये उनके शैक्षणि,आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिये काम करना हें तभी बाबा साहेब का सपना साकार होगा।

शिवराज के खिलाफ तो आंदोलन कर सकते हो पर हरवंश के खिलाफ नहीं -गौगपा ने विस उपाध्यक्ष और केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में आयोजित किये जाने और शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की हें। गौगपा ने इसके अलावा 12 अन्य बिन्दुओं पर भी जांच की मांग की हैं। गौगपा के प्रवक्ता विवेक डहेरिया ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर यह आरोप लगाये थे कि छपारा जनपद पंचायत के सी.ओ. ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन पर शासकीय आयोजन किया और शासकीय धनराशि खर्च की है जो कि अनुचित हैं। इस अवसर पर विधायक निधि से पंचायतों को बांटे गये टंेकरो पर से लिखे हुये इस वाक्य को मिटाने की मांग की है जिसमें यह लिखा हुआ है कि हरवंश सिंह के जन्म दिन पर ये टेंकर दिये गये हैं। गौगपा प्रवक्ता ने एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन इंका विधायक हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और इंका विधायक हरवंश के बीच सांठ गांठ के आरोप इंका और भाजपा में तो लगते ही रहें हैं लेकिन अब गौगपा ने भी इसी ओर इशारा करते हुये प्रशासन और सरकार को कठघरें में खडा़ किया है। लेकिन कहीं भी और कोई भी ऐसे आरोप लगाते रहें लेकिन उससे किसी को भी फर्क नहीं पड़ता हैं। सियासत सियासत के तरीके से चलती जिसमें आरोप लगाने से आज कल कुछ नहीं होता क्योंकि नूरा कुश्ती नेताओं की सुविधा के हिसाब से होती हैं इसमें पार्टियों का ख्याल रखना जरूरी नहीं होता हैं।

Monday, December 5, 2011

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पेंच को लेकर नीता के सवाल पर सदन में मंत्री का जवाब और सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा में अंतर को लेकर शुरू हो गयीं हैं चर्चायें

भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक लगाया गया प्रश्न और सिचायी मंत्री का जवाब जन चर्चा में बना हुआ हें।इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी। जिसे टाला जा रहा हैं।सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदर सिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने जरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। एफ.डी.आई. के विरोध में जिला भाजपा द्वारा समर्थन देने बाद भी उसकी दोरही भूमिका चर्चित हैं। ना तो कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला और ना ही उन्होंने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही बंद रखे।ऐसा क्यों हुआ इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें सियासी हल्कों में जारी हैं।

पेंच को लेकर सदन के अंदर और बाहर के बयान हुये चर्चित -विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक प्रश्न लगाया गया था। इस प्रश्न का जवाब देते हुये जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि प्रदेश सरकार इस योजना को चालू रखे हुयी हैं। लेकिन यह योजना कब तक पूरी होगी? इस सवाल का जवाब वे यह कहकर टाल गये कि भू अधिग्रहण के मामलों में विलंबहोने के कारण यह नहीं बताया जा सकता कि येयोजना कब तक पूरी होगी। विधानसभा में लगाये गये प्रश्न को लेकर भी कुछ सवाल खड़े हो गये हैं। पहला सवाल तो यह है कि नीता पटेरिया ने यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि क्या प्रदेश सरकार ने लागत बढ़ने के कारण बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था या नहीं? यह सर्वविदित हैं कि प्रमुख सचिव आर.एस.जुलानिया ने एक वीडियो कांसफ्रेसिंग में यह निर्देश दिये थे किप्रदेश सरकार ने इस योजना को बंद करने के निर्देश केन्द्र को भेज दिये हैं। इसनिर्देश के बाद ही मुख्य अभियंता के कार्यालय से दूसरी तिमाही के लिये आवंटित राशि में से 20 सितम्बर 2011 तक खर्च की गयी 327 करोड़ रु. की राशि के बाद शेष बची एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि समर्पण करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी जिसे प्रमुख सचिव ने प्रमुखअभियंता सिंचायीको अग्रेषित कर दिया था और प्रमुख अभियंता ने मुख्यअभियंता सिचायी को भेज दिया था। जिसपर मुख्य अभियंता ने यह जवाबदेदिया था इस कार्यालय से केन्द्र सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया हैं। यहां यह विशेषरूप से उल्लेखनीय हैं किकेन्द्र सरकार को कोई भी प्रस्ताव प्रदेश सहकार से ही भेजा जाता हैं मुख्यअभियंता ऐसा कोई प्रस्ताव सीधे केन्द्र सरकार को भेज ही नहीं सकते हैं। यह सवाल उठनाभी स्वभाविक ही हैं कि यदि प्रदेश सरकार की इस योजना को बंद करने की कोई योजना नहीं थी तो फिर मुख्य अभियंता के कार्यालय से स्वीकृत राशि में 1 करोड़ 22 लाख रुपये सरेंडर करने का प्रस्ताव शासन को क्यों भेजा गया?यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अपनी रथ यात्राकेदौरान जब पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी छिंदवाड़ा आये थे और मंच से पेंच परियोजना बंद की बात उठी थी तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दहाड़ कर कहा था कि कोई भी माई का लाल इस परियोजना को बंद नहीं करा सकताऔर यह योजना 2013 तक पूरी कर ली जायेगी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ पर अड़ंगे लाने का आरोप भी लगाया था। लेकिन जब विधानसभा में उनकी ही पार्टी की विधायक नीता पटेरियाने इस योजना के पूरे होने के बारे सवाल पूछा तो सदन के अंदर उनकी ही सरकार के मंत्री अवधि बताने को यह कह कर टाल गये कि भू अर्जन के मामलों में विलंब होने के कारण यह अवधि नहीं बतायी जा सकती। प्रदेश में भाजपा सरकार का यह आठवां साल हैं लेकिन सरकार के पास इय बात भी कोई जवाब नहीं हैं कि उनकी सरकार का प्रशासनिक अमला इन आठ सालों में भी भूअर्जन के मामले निपटाक्यों नहीं पाये? सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदरसिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं।

हर हाल में केवलारी विधानसभा जीतने की बात कर गये मेनन -प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री अरविंद मैनन का दौरा सियायी हल्कों में चर्चित हैं। वैसे तो यह दौरा वोट फार नोट कांड़ में फंसे भाजपा नेता फग्गन सिंह कुलस्ते के लखनादौर और केवलारी प्रवास को लेकर था लेकिन बताते हैं कि मेनन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस बार पार्टी को चारों सीटों पर विजय मिलनी चाहिये। वैसे भी जिले में तीन सीटें तो भाजपा के पास हैं ही सिर्फ केवलारी सीट से इंका के हरवंश सिंह विधायक है जो किविस उपाध्यक्ष हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। वैसे भाजपायी हल्कों में सन 1993 के चुनाव से ही यह चर्चा आम रही हैं कि केवलारी में हर चुनावमें भाजपा को भाजपा ही हराती हैं। यह बात अलग है कि हर बार चेहरे बदल जाते हैं। कुछ दिनोंपहले केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन नेजरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। अब यह तो खोज का विषय है कि वे खुद खामोश हो गयें हैं या उन्हें खामोश करा दिया हैं? यदि ऐसा ही रहा तो मेनन जी की जीतने की बात एक बार फिर धरी की धरी रह जायेगी। हां ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। इंका और भाजपा के बीच सुविधा का संतुलन दसों सालों से चलते आ रहा हैं जो कि अगली बार रुकेगा इसकी संभावना कम ही दिख रही हैं।

बंद को लेकर भाजपा की भूमिका चर्चित-एफ.डी.आई.याने खुरदा व्यापार में विदेशी निवेश को लेकर बंद में भाजपा की दोहरी भूमिका चर्चित है। व्यापारियों द्वारा आहूत बंद को जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन जैन ने भाजपा का समर्थन घोषित किया था। लेकिन सिवनी में ना तो बंद सफल रहा और ना ही समर्थन देने के बाद कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला।और तो और भाजपायियों के व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह ऐसे खुले रहे मानो वे केन्द्र सरकार की इसनीति के समर्थन में हों और मजबूरी में उन्होंने बंद का कागजी समर्थन दिया हो। भाजपा के व्यापारिक प्रकोष्ठ ने जरूर बंद के दूसरे दिन कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री जरूर कर ली थी। अब ऐसा क्यों हुआ? इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जरूर राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं।