Monday, February 20, 2012

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


हरवंश सिंह की उपस्थिति में एक इंका नेता बैठक में राहुल गांधी के विरोध में बोलते रहा और सभी चुपचाप सुनते रहे
अब इसे क्या कहा जाये? कुछ समझ में नहीं आता लेकिन इतना तो कह ही सकते हैं कि पांच बार से लगातार विधानसभा का चुनाव भाजपा को जिताने का खामियाजा ही इस रूप में किसानों को चुकाना पड़ा हैं।कांग्रेस की बैठक में जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह कर उपस्थिति में एक इंका नेता भाषण सुर्खियों मेंबना हुआ हैं।इस भाषण की चर्चा के साथ कई इंका नेता चटखारे लेकर यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि जिले में हरवंश सिंह के अलावा कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता की आलोचना की जा सकती है। पूरे देश में जहां कांग्रेसजन  राहुल गांधी में अपना भविष्य देख रहें हैं वहीं सिवनी में जिले के कांग्रेसी नेताओं की उपस्थिति में उनकी आलोचना होना और सभी का चुप रह जाना अत्यधिक आश्चर्य का विषय हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बसोरी सिंह दोनों कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह और नर्मदा प्रजापति के क्षेत्र मे चुनाव हारे थे और जिले के लखदौन क्षेत्र ने उन्हें इतनी भारी बढ़त दिलायी थी।लेकिन इसके बाद भी जिताने वाले आदिवासी क्षेत्र के साथ एक आदिवासी नेता का ऐसा सौतेला व्यवहार सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं।लेकिन इस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने कभी लाल बत्ती का सुख देखा ही नहीं था। भाजपा प्रत्याशी के रूप में केवलारी से पिछलाचुनाव लड़नेवाले डॉ. बिसेन को लाल बत्ती मिलने से पिछले 36 साल से एपेक्षित भाजपा कार्यकर्त्ताओं में एक विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। “ 
राहुल गांधी की ही आलोचना हो गयी पहली बैठक में-अब इसे क्या कहा जाये? कुछ समझ में नहीं आता लेकिन इतना तो कह ही सकते हैं कि पांच बार से लगातार विधानसभा का चुनाव भाजपा को जिताने का खामियाजा ही इस रूप में किसानों को चुकाना पड़ा हैं। हाल ही में जिले के किसान भारी ओला वृष्टि के कारण परेशान हैं। सिवनी विधानसभा के छिंदवाड़ा जिले की सीमा से लगे गांव पीपरडाही से लेकर बम्होड़ी तक की पट्ठी बुरी तरह प्रभावित हुयी हैं। लेकिन जब किसानपुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा नियुक्त जिले के पालनहार प्रभारी मंत्री नाना भाऊ जब ओला पीड़ितों की सुध लेने आये तो उनके जारी शासकीय कार्यक्रम में रास्ते में ही पड़ने वाले इन गांवों का दौरा शामिल नहीं था। वे सिवनी सर्किट हाउस में रुक कर केवलारी विधानसभा क्षेत्र के धनोरा विकासखंड़ के हिस्से में हुयी ओला वृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का मुआयना करेंगें। यहां यह उल्लेखनीय है कि केवलारी विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं जहां वे पहले ही दौरा कर चुके हैं। जबकि सिवनी भाजपा के प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया का क्षेत्र हैं।   
राहुल गांधी की ही आलोचना हो गयी पहली बैठक में-कांग्रेस की बैठक में जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह कर उपस्थिति में एक इंका नेता भाषण सुर्खियों मेंबना हुआ हैं।इस भाषण की चर्चा के साथ कई इंका नेता चटखारे लेकर यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि जिले में हरवंश सिंह के अलावा कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता की आलोचना की जा सकती हैं जिसे सभी कांग्रेसी मौन रह कर सुनते रहतें हैं। बताया जा रहा है कि नव गठित जिला कांग्रेस कमेटी की पहली बैठक में कुछ बातें बड़ी ही रोचक रहीं। सबसे पहले तो हुआ यह कि जब हरवंश सिंह बैठक में पहुचे तब उन्होंने अपने ब्रीफ केस से निकाल कर उपस्थित सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को बैठक का ऐजेन्डा वितरित किया। साथ ही सभी पदाधिकारियों की एक सूची भी भी बांटी। इससे पहले किसी भी इंका नेता को यह नहीं मालूम था कि बैठक का ऐजेन्डा क्या हैं? और किन विषयों पर चर्चा की जाना हैं? इसके बाद सभी ने अपना अपना परिचय दिया। इसके बाद नेताओं के भाषणों का दौर हुआ। इसी क्रम में जब धनौरा ब्लाक के नेता और नव नियुक्त महामंत्री मुकेश जैन ने अपना भाषण शुरू किया तो सभी भौंचक रह गये। पहले तो उन्होंने पिछले लंबे समय से कांग्रेस की निष्क्रियता  पर बोलते हुये कांग्रेस के मोर्चा संगठनों को भी आड़े हाथों लिया और यह सवाल दागा कि जो नेता मोर्चा संगठनों में नकारा साबित हो चुके हैं उन्हें फिर पदों पर क्यों बिठाया गया? यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ेसवादल दल के अध्यक्ष पद पर रजनीश सिंह पिछले लगभग दस सालों से जमे हुये हैं और हाल ही में उन्हें जिला कांग्रेस का महामंत्री बनाया गया हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसे ही नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया हैं। मोर्चा संगठनों की आलोचना करते करते मुकेश जैन ने युवक कांग्रेस के वर्तमान स्वरूप पर बात करते हुये कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल दागते हुये उनकी आलोचना भी की तो सभी भौंचक रह गये लेकिन हरवंश सिंह को चुप चाप सुनते देख सभी चुप ही रहे। पूरे देश में जहां कांग्रेसजन  राहुल गांधी में अपना भविष्य देख रहें हैं वहीं सिवनी में जिले के कांग्रेसी नेताओं की उपस्थिति में उनकी आलोचना होना और सभी का चुप रह जाना अत्यधिक आश्चर्य का विषय हैं। बैठक में युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक राजा बघेल सहित सभी प्रदेश प्रतिनिधि भी शामिल थे। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि परिसीमन के बाद के  बाद हरवंश सिंह के केवलारी विस क्षेत्रमें धनोरा ब्लाक का एक हिस्सा भी शामिल हो गया हैं जिसमें मुकेश जैन भी अपना प्रभाव रखतें हैं। इसके अलावा एक तथ्य और उल्लेखनीय है कि संगठन चुनाव में मुकेश जैन कोधनौरा ब्लाक कांग्रेस कमेटी का र्निविरोध अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन जब ब्लाक अध्यक्षों की घोषणा हुयी तो उनके स्थान पर तिवड़ी लाल उइके को अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। हालांकि अब उन्हें जिले का महामंत्री बना दिया गया हैं लेकिन एक दर्जन महामंत्रियों में शामिल किये जाने से शायद नागवार गुजर रहा हैं।
बसोरी का सौतेला व्यवहार चर्चित-सिवनी जिले की दो विधानसभा क्षेत्रों के सांसद हैं कांग्रेस के बासेरी सिंह मरकाम। ये विस क्षेत्र हैं केवलारी और लखनादौन। केवलारी से इंका विधायक हरवंश सिंह हैं तो लखनादौन से भाजपा की शशि ठाकुर हैं। मंड़ला संसदीय क्षेत्र में ही नरसिंहपुर जिले का गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र आता हैं जहां से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति मंत्री हैं जो कि दस साल तक कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। सांसद बसोरी सिंह ने अभी तक के अपने कार्यकाल में सांसद निधि से जो राशि वितरित की हैं उसके आंकड़े भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं। उन्होंने केवलारी क्षेत्र में 62 लाख  गोटेगांव में 48 लाख और लखनादौन क्षे़त्र में 14 लाख रु. अब तक दिये हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं मंड़ला लोकसभा क्षेत्र में 6 भाजपा के विधायक हैं और कांग्रेस के दो हैं। कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बसोरी सिंह दोनों कांग्रेस विधायक हरवंश सिंह और नर्मदा प्रजापति के क्षेत्र में चुनाव हारे थे और जिले के लखदौन क्षेत्र ने उन्हें इतनी भारी बढ़त दिलायी थी कि वे सीधे पहुंचने में कामयाब हो गये। लेकिन इसके बाद भी जिताने वाले आदिवासी क्षेत्र के साथ एक आदिवासी नेता का ऐसा सौतेला व्यवहार सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। 
बिसेन को लाल बत्ती मिलने से छत्तीस सालों से उपेक्षि भाजपाइयों में उत्साह -प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी केा एक लाल बत्ती और दे दी हैं।जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया हैं। पदभार ग्रहण करते समय जिले की केवलारी और बरघाट क्षेत्र के सभी महत्वपूर्ण नेता शामिल हुये थे। इसके अलावा प्रदेश के वित्त मंत्री राधव जी,सांसद सुमित्रा महाजन,पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित कई प्रदेश के कई कद्दावर भाजपा नेता भी मौजूद थे। डॉ. बिसेन की इस नियुक्ति से जिले के भाजपायी और विशेषकर केवलारी क्षेत्र के कार्यकर्त्ताओं में भारी उत्साह हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि केवलारी क्षेत्र के कांग्रेस के कार्यकर्त्ता तो बीते बीसों साल से उत्साहित रहते रहे हैं। पहले क्षेत्र की विधायक विमला वर्मा लगभग 23 साल मंत्री रहीं। फिर 19993 से 2003 तक हरवंश सिंह मंत्रीमंड़ल में रहे और फिर 2008 से विस उपाध्यक्ष के रूप में लाल बत्तीधारी हैं। लेकिन इस क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने कभी लाल बत्ती का सुख देखा ही नहीं था। भाजपा प्रत्याशी के रूप में केवलारी से पिछलाचुनाव लड़नेवाले डॉ. बिसेन को लाल बत्ती मिलने से पिछले 36 साल से एपेक्षित भाजपा कार्यकर्त्ताओं में एक विशेष उत्साह देखा जा रहा हैं। 

Monday, February 13, 2012

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


खेत के सवाल का जवाब खलिहान से देने की आदी हो चुकी भाजपा अब लोगों में मजाक का विषय बनते जा रही है
जिला कांग्रेस की पहली बैठक में कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था और अभी जिला इंका का महामंत्री बनाया गया हैं। इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं। इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब देकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। भाजपा ने सुजीत जैन और इंका ने हीरा आसवानी को जिले का अध्यक्ष बनाया ा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं  और वो भी हरवंश सिंह के। नपं लखनादौन और मंड़ी चुनावों में दोनों की मिशन 2013 के पहले अग्नि परीक्षा हो जावेगी।
रजनीश की ताजपोशी के बाद भवन का संकल्प एक बार फिर लिया गया-बीते पंद्रह सालों बिन हरवंश सब सून की तर्ज पर चलने की आदी हो गयी है जिले में कांग्रेस। पिछले जनवरी माह में जिले की कांग्रेस कमेटी की बैठक रखी गयी थी लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के उपलब्ध ना होने के कारण वह स्थगित कर दी गयी थी। यह बैठक 11 फरवरी को संपन्न हुयी। इस पहली बैठक में जिला कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। हालांकि निवर्तमान अध्यक्ष महेश मालू  भी कांग्रेस भवन बनाने की पहल करना चाहते थे लेकिन ना जाने क्यों वे अपने कार्यकाल में शुरूआत नहीं कर सके। अब एक बार फिर यह पहल प्रारंभ की गयी है। हालांकि आज से दस साल पहले भवन बनाने की बात शुरू हुयी थी। उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसका भूमि पूजन उसी दिन किया था जिस दिन तत्कालीन मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल के कार्यकाल में मंड़ी की आधारशिला रखी थी। मंड़ी तो सालों पहले बन गयी लेकिन कांग्रेस भवन में एक ईंट तक नहीं जुड़ पायी। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था। तब सेवादल के सभी शिवरों में कांग्रेस भवन का एक माडल कार्यकर्त्ताओं को दिखाया गया था। उस वक्त हरवंश सिंह प्रदेश के एक ताकतवर मंत्री थे। अब एक बार फिर भवन बनाने की पहल हुयी हैं और अभी नवगठित जिला इंका में रजनीशसिंह को महामंत्री बनाया गया हैं। राजनैतिक विश्लेषकों  का ऐसा मानना है कि कांग्रेस में रजनीश की ताजपोशी और कांग्रेस भवन की बात में चोली दामन का साथ हैं। चाहे बात जो भी हो लेकिन जिले के कांग्रेसजनों की यह तीव्र इच्छा हैं कि जिले में कांग्रेस का अपना भवन हो। यह इच्छा उस समय से और तीव्र हो गयी हैं जब सालों बाद जमीन मिलने के बाद भी जिला भाजपा का भवन तो लगभग बन कर तैयार है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिला इंका को भवन के लिये जमीन जो तत्कालीन अध्यक्ष हाजी मोहीत खॉन के कार्यकाल में ही मिल गयी थी। लेकिन यदि आज भी देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर कांग्रेस का भवन बन जाये तो यह एक प्रशंसनीय बात ही होगी लेकिन यदि जैसा खेल 2003 के विस चुनाव के पहले खेला गया था वैसा ही यदि 2013 के चुनाव के पहले खेला जा रहा हैं तो यह एक दुर्भाग्य पूर्ण बात ही होगी। मुसाफिर की तो यही कामना है कि कांग्रेा का भी अपना भवन जल्दी बन ही जाये।
अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी -इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम कर अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं और जनहित का मामला जस का तस छूट जाता हैं। एक बात और है कि विज्ञप्तिवीर और छपास के रोगी होने का आरोप भी जो लगाते है वे खुद ये भूल जाते हैं इस क्षेत्र में तो वे खुद परमवीर चक्र लेने के अधिकारी हैं। प्रदेश के सत्तारूढ़ दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का यह रवैया किसी भी कीमत पर उचित नहीं कहा जा सकता हैं। जिले के विेकास और लंबित योजनाओं पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना तो ठीक है लेकिन इसके हल के लिये भी ठोस प्रयास करना चाहिये। अन्यथा हालात तो जस के तस रह जायेंगें भले ही नेताओं की छवि चमक या बिगड़ जाये।
अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी -इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। कई बार आंकड़ों और तथ्यों की जानकारी के आभाव में भाजपा मजाक का विषय बन जाती हैं। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब दकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। पूछे गये सवालों पर जवाब ना होने के कारण भाजपा मामले को कहीं ओर घुमाने में विश्वास करने लगी हैं। इस कारण भले ही सवाल जवाब का सिलसिला तो चलते रहता है लेकिन आम लोगों के बीच में भाजपा मजाक का पात्र बन कर रह जाती हैं। जिले में कई गुटों में बंटी भाजपा का नेतृत्व इस कारनामे पर अंकुश लगाने में भी सफल नहीं हो पा रहा हैं।
वरिष्ट,कनिष्ट और घनिष्ट चर्चित हैं इंका और भाजपा में-प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। पहले भाजपा ने संगठन चुनावों में युवा सुजीत जैन को जिले का अध्यक्ष निर्वाचित किया और उसके बाद कांग्रेस ने भी हीरा आसवानी के रूप में युवा नेतृत्व दिया। लेकिन भाजपा और और इंका में एक फर्क दिखायी दे रहा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। उनसे उम्रदराज नेता पार्टी में अपनी मनमानी करते देखे जा सकते हैं। कोई चाचा तो बड़े भाई के रूप में हमेशा हावी होने की कोशिश करते रहतें हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं और वे भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के। इसलिये इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी अपेक्षाकृत रूप से अधिक सुविधाजनक स्थिति में हैं। उन्हें जो कुछ भी देखना हैं वह केवल घनिष्टता । और सभी विस उपाध्यक्ष हरवंशसिंह के घनिष्ट हैं दूसरे किसी अन्य नेता के हैं ही नहीं। जबकि भाजपा के संगठन की कमेटी में ही कई वरिष्ट नेताओं का सीधा और प्रभावशाली दखल हैं। इस सबकें चलते अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजर होने वाले लखनादौन नगर पंचायत और जिले के मंड़ी चुनावों पर लगी हुयी हैं। भाजपा में इन दिनों जिले के नाम पर नरेश दिवाकर, डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन एवं इंद्रेश गजभियेके पास लाल बत्ती हैं तो कांग्रेस के पाले में इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल के पास लाल बत्ती हैं। वहीं विधायक नीता पटेरिया भी प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं। इंका और भाजपा की कमान संभालने वाले जिले के तमाम नेताओं के लिये मिशन 2013 से पहले  के पहले यह एक मिनी परीक्षा रहेगी और इस पर ही आगे के परिणाम निर्भर करेंगें।            

Tuesday, February 7, 2012

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

कभी बुआ भतीजावाद का रोना रोने वाले कांग्रेसी अब पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं

लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते दिख रही हैं। कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब देखना यह है कि चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं? जिले में कांग्रेस की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हैं।

जिला इंका की जम्बो जेट कार्य.घोषित-लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। हालांकि आज से लगभग 18 महीने पहले जिले में हुये कांग्रेस के कथित चुनाव के बाद जैसा अखबारों में प्रकाशित हुआ था उससे बहुत कुछ अलग इस घोषित समिति में दिखा। इस घोषित समिति में चुनावी साया स्पष्ट दिखायी दे रहा हैं। वैसे जब कहीं ओर चुनावी साया दिखने की बात होती हैं तो किसी भी जिले के सभी विस क्षेत्रों की बात होती हैं लेकिन सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते जिला इंका की घोषणा में दिख रही हैं। इस जम्बो जेट कार्यकारिणी में कांग्रेस संविधान के निर्वाचन के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ और मन माफिक संख्या में पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गयी हैं। जिला इंका में 1कोषाध्यक्ष,9उपाध्यक्ष,11महामंत्री,17 संगठन सचिव,13 कार्य. सदस्य एवं 7 स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाये गये हैं।

बहुत निरीह दिखे महाबली कहलाने वाले हरवंश-कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। लेकिन यह भी शाश्वत सत्य है कि आदमी खुद अपने आप को सबसे अच्छा और सच्चा पहचानता हैं। यही बात हरवंश सिंह पर भी लागू होती हें। भले ही वे केवलारी विस क्षेत्र से चार चुनाव लगातार जीत चुकें हो लेकिन वे जानते हैं कि ये सब कैसे हुआ हैं? इंकाई हल्कों में कई दिनों से 1/14 का समीकरण चल रहा था। एक इंका नेता को जिला इंका में रोकने के लिये 14 नेताओं ने संयुक्त रूप से दवाब अनाया था कि यदि इसे शामिल किया गया तो हम सभी समूहिक रूप से त्यागपत्र दे देंगें। मजे की बात यह थी कि ये सभी 14 इंका नेता परिसीमन के पहले वाले केवलारी विस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते थे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में हरवंश सिंह पूरे पुराने केवलारी क्षेत्र से चुनाव हार गये थे लेकिन परिसीमन में जोड़े गये नये क्षेत्रों ने उनकी लाज रख ली थी और वे चुनाव जीत गये थे। लेकिन पांचवी पारी खेलने के लिये डरे हुये हरवंश सिंह ने 14 नेताओं को नाराज करने का जाखिम लेना उचित नहीं समझा और बीच का रास्ता निकाल लिया।जिस इंका नेता का विरोध था उसे छोड़ा तो नहीं लेकिन सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य ही बनाया और उन 14 नेताओं में अधिकांश को पदों से नवाज कर खुश करने का प्रयास कर लिया है। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं।

पिता पुत्रवाद पर थिरक रहें हैं कांग्रेसी-जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जी हां बात हो रही है जब जिले की वरिष्ठतम कांग्रेस नेत्री कुमारी विमला वर्मा का सक्रिय राजनीति में जलवा में था। उन्हीं की अगुलियां पकड़ कर आज के इंकाई पुरोधा हरवंश सिंह ने राजनीति शुरू की थी। बरघाट के एक कार्यक्रम में हरवंश सिंह पर उनकी उपस्थिति में ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा था तब से विमला वर्मा ने उनसे किनारा कर लिया था और यहीं से हरवंश सिंह ने समानान्तर राजनीति करना शुरू की थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के रहमो करम से वे राजनीति में आगे बढ़ते गये। उस दौरान हरवंश सिंह और उनके संगी साथी विमला वर्मा पर कोई और आरोप ना लगा पाने के कारण भाई भतीजेवाद का आरोप लगाया करते थे।इससमय तकआशुतोष वर्मा भी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हो चुके थे और उन्हीं के कारण ये आरोप लगाये जाते थे और कांग्रेस के हाल बेहाल होने की बात कही जाती थी। हालंकि आशुतोष वर्मा छात्र राजनीति से कांग्रेस की राजनीति में आये थे और सन 1977 में उस वक्त कांग्रेस में इंदिरा जी के साथ रहे जब हरवंश सिंह इंदिरा जी को छोड़ कर कांग्रेस अर्स की कमान संभाल रहे थे। आज वो ही कांग्रेसी पिता पुत्रवाद की राजनीति याने हरवंशसिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह की जिला में महामंत्री पद की ताज पोशी पर राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। इसे ही तो कहते हैं वक्त के घूमते पहिये का कमाल।

डॉ. बिसेन को भी मिली लाल बत्ती-जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। इसके पहले सरकार ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का अध्यक्ष नियुक्त कर केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। इसी तरह जिले के ही इंद्रेश गजभिये भी केबिनेट मेंत्री का दर्जा प्राप्त निगम के अध्यक्ष हैं। सिवनी की अंतिम सांसद रही विधायक नीता पटेरिया पहले ही प्रदेश की महिला मोर्चे की अध्यक्ष बन चुकीं हैं। इस तरह अब शिव की नगरी सिवनी से चार भाजपा नेता ऐसे हो गयें जो प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. बिसेन मुख्यमंत्री उमा भारती और बाबूलाल गौर की केबिनेट में कबीना मंत्री थे लेकिन शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें मंत्री नहीं बनाया था। मुख्यमंत्री ने यह सब कवायत करके जिले की भाजपायी राजनीति में गुटीय एवं जातीय संतुजन बनाने का प्रयास तो कर लिया हैं लेकिन अपने किये गये वायदों को पूरा करने में यदि वे कामयाब नहीं हुये तो उसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। इसीलिये अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजरें इस पर टिकी हुयीं हैं कि शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं?

सब कुछ मंशानुसार-इस सप्ताह पूरे जिले में कांग्रेस संगठन की जिला और ब्लाक इकाइयों के गठन की घोषणा हो रही हैं। जिले की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हें। एक विज्ञप्ति में यदि तीन ब्लाकों की घोषणा की गयी है तो तीन बार यही उल्लेख किया गया हैं। प्रदेश कांग्रेस के मिशन 2013 के अनुसार अब देखना यह है कि चुनावी परिणाम कांग्रेस की मंशानुसार आते हैं या हरवंश सिंह की मंशानुसार?