Monday, March 26, 2012

News on pench irrigation project

पेंच परियोजना में पक्के बांध का काम प्रारंभ नहीं

सिवनी। महत्वाकांक्षी पेंच सिंचायी परियोजना का काम अभी भी पूरी गति से प्रारंभ नहीं हो पा रहा हैं। बाम्हनवाड़ा गांव के किसानों के विरोध के चलते पक्के बांध का काम तो चालू ही नहीं हो पा रहा हैं। हालांकि कुछ दिनों पूर्व कच्चे बांध पर काम चालू हो जानें के समाचार हैं।

सिवनी और छिंदवाड़ा किजले की अति महत्वाकांक्षी पेंच परियोजना पर योजना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा के बाद भी काम ऐसी गति से प्रारंभ नहीं हो पाया हैं कि यह योजना 2013 तक पूरी हो जाये। 1286 करोड़ रु. की लागत से बनने वाली इस योजना से दोनों जिलो की 89378 हेक्टेयर जमीन सिंचिंत होगी। पिछले 29 सालों से यह पेच परियोजना राजनीति के दांव पेचों में उलझी पड़ी हें।

बीते दिनो जब प्रदेश सरकार के सचिव जुलानिया ने अपनी वीडियों कांसफ्रेसिंग में इसे बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेजने का जिक्र किया था तब नेताओं में हड़कंप मच गयी थी। प्रदेश सरकार ने इंकार किया था कि ऐसा कोई प्रस्ताव केन्द्र को नहीं भेजा गया हैं। इसे तेजी से प्रारंभ कर 2013 में पूरी करने की बात कही गयी थी। लेकिन हालात ऐसे नहीं दिख रहें हैं कि इस अवधि में यह योजना पूरी हो सके।

किसानों के विरोध के चलते पक्के बांध का काम अभी भी प्रारंभ नहीं हो पाया हैं जबकि इसका अनुबंध मे. एस.ई.डब्ल्यू. हैदराबाद से 25 अक्टू. 2010 में ही हो चुका हैं। ग्राम बाम्हनवाड़ा के किसान आज भी विरोध कर रहें हैं जिनके कारण पक्के बांध का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि इस गांव के प्रभावित किसानों की संख्या सिर्फ 12 हैं ।जिनका विरोध ना केवल काम शुरू नहीं करने दे रहा हैं ब्लकि बाधा मुक्त साइड उपलब्ध ना कराने के कारण सरकार को भारी हर्जाना भी देना होगा।

हालांकि सितम्बर 2008 में अनुबंध होने के बाद अब बमुश्किल कच्चे बांध का निर्माण कार्य शुरू हो गया हैं जिसे भी हैदराबाद की ही एक अन्य कंपनी कर रही हैं।यह सब हालात देखकर इतना तो कहा ही जा सकता है कि दिल्ली अभी दूर नहीं बहुत दूर है।

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बेचारे किसानों के लिये नेता तो सभी परेशान हैं लेकिन पिछले साल से ज्यादा कुछ मिलने की संभावना नहीं हैं

जिले में भी सपा ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने पर जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरण करके राजनैतिक पटल पर लंबे अर्से बाद अपनी उपस्थिति दर्ज की हैं। सपा,बसपा और गौगपा तीसरी पारी खेलने के लिये बेताब भाजपा के लिये संजीवनी का काम कर सकती हैं। भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के राज्यसभा के लियेे निर्विरोध निर्वाचित हो जाने से भाजपा के राजनैतिक समीकरणों में बदलाव आने की संभावनायें व्यक्त की जा रहीं हैं। अब जिले के तीन सांसद हो गये हैं लेकिन यदि कुलस्ते सिर्फ इन दो रेल परियोजनाओं को ही गति दिलवा दें तो जिले के विकास में उनका यह योगदान मील का पत्थर साबित हो सकता हैं। गेहूं खरीदी की मात्रा को लेकर राजनीति का खेल तेजी से जारी हैं। सबसे पहले जिला पंचायत के उपाध्यक्ष इंका नेता अनिल चौरसिया ने फिर विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अब वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिह बिसेन ने किसानों की चिंता की हैं। सूखी और सिंचिंत दोनों ही किस्म की खेती करने वाले किसानों से सरकार एक ही मानक स्तर पर खरीदी करेगी जो किसानों के हित में होगा या बिचौलियों के हित में? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

यू.पी.की जीत से सपां में उत्साह-उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों से समाजवादी पार्टी में उत्साह का वातावरण बन गया है। जिले में भी सपा ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने पर जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरण करके राजनैतिक पटल पर लंबे अर्से बाद अपनी उपस्थिति दर्ज की हैं। प्रदेश में इंका और भाजपा के अनावा और कोई राजनैतिक विकल्प ना होने के कारण इन दलों की सक्रियता के अलावा किसी भी अन्य पार्टी की सक्रियता नहीं के बराबर हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के हाल ही के चुनावों में सपा को मिली सफलता ने प्रदेश में भी राजनैतिक उम्मीदें जगा दी हैं। अब यह आगे सपा की राजनैतिक गतिविधियों पर ही निर्भर करेगा कि वे प्रदेश के राजनैतिक पटल पर अपनी कितनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा पातें हैं। वैसे इसके लिये आवयक संगठनात्मक ढ़ांचा अभी वैसा मजबूत नहीं है जैसा कि जरूरी है। सपा,बसपा और गौगपा तीसरी पारी खेलने के लिये बेताब भाजपा के लिये संजीवनी का काम कर सकती हैं।

अब तीन तीन सांसद हो गये हैं जिले में-भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के राज्यसभा के लियेे निर्विरोध निर्वाचित हो जाने से भाजपा के राजनैतिक समीकरणों में बदलाव आने की संभावनायें व्यक्त की जा रहीं हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते पहले तो वोट फार नोट के मामले में संकंट में फंसे थे और उसके बाद पिछले लोस चुनाव में वे इंका के बसोरी सिंह मसराम से चुनाव हार गये थे। उनके चुनाव परिणाम का सबसे रोचक तथ्य यह था कि वे लोकसभा क्षेत्र में आने वाले केवलारी और गोटेगांव क्षेत्र से चुनाव जीत गये थे जहां से कांग्रेस के हरवंश सिंह और नर्मदा प्रजापति विधायक हैं लेकिन शेष सभी उन छः क्षेत्रों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था जहां भाजपा के विधायक थे। कुलस्ते के दोबारा सांसद बन जाने से जिले की राजनीति में भी प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही हैं क्योंकि जिले की लखनादौन और केवलारी सीटें मंड़ला संसदीय क्षेत्र में ही आती हैं। इनमें केवलारी विस क्षेत्र ऐसा हैं जो कि इंका और भाजपा दोनों की राजनीति में निर्णायक भूमिका अदा करता हैं। पिछले अठारह सालों का इतिहास यह बताता है कि इंका भाजपा का तालमेल जिले के अन्य क्षेत्रों का राजनैतिक भविष्य तय करता हैं। इसमें कोई शक नहीं हैं कि कुलस्ते एक कद्दावर नेता है और राष्ट्रीय राजनैतिक परिदृश्य में भी उनकी प्रभावशाली उपस्थिति हैं। कुलस्ते की यह उपलब्धि इंका सांसद बसोरी सिंह के लिये परेशानी का सबब बन सकती हैं। लेकिन कुलस्ते के राजनैतिक कद का जिले को कोई लाभ होगा या नहीं ? यह अभी भविष्य की गर्त में हैं। वैसे भी जिले की फोर लेन, छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर गेज परिवर्तन और रामटेक गोटेगांव नई रेल परियोजना जैसी कई महत्वाकांक्षी विकास योजनायें दबंग राजनैतिक व्यक्तित्व के आभाव में अधूरी पड़ी हैं। रामटेक गोटेगांव रेल लाइन में भी गोटेगांव से लेकर छपारा तक का एक लंबा हिस्सा मंड़ला लोकसभा क्षेत्र में ही आता हैं। इसके अलावा कलबोड़ी से लेकर खवासा तक का हिस्सा बरघाट विस क्षेत्र में आता हैं जहां से उनके रिश्तेदार कमल मर्सकोले भाजपा के विधायक हैं। इसी तरह भोमा से लेकर मंड़ला फोर्ट तक का हिस्सा भी मंड़ला क्षेत्र में आता हैं जो कि गेज परिवर्तन की राह तक रहा हैं। वैसे कहने को तो अब जिले के तीन सांसद हो गये हैं लेकिन यदि कुलस्ते सिर्फ इन दो रेल परियोजनाओं को ही गति दिलवा दें तो जिले के विकास में उनका यह योगदान मील का पत्थर साबित हो सकता हैं।

गेहूं खरीदी केी मात्रा पर नेताओं में मचा घमासान -गेहूं खरीदी की मात्रा को लेकर राजनीति का खेल तेजी से जारी हैं। सबसे पहले जिला पंचायत के उपाध्यक्ष इंका नेता अनिल चौरसिया ने फिर विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अब वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिह बिसेन ने किसानों की चिंता की हैं। अनिल चौरसिया ने प्रति हेक्टेयर खरदी के लिये निर्धारित गेहूं की मात्रा पर आपत्ति उठायी थीं। फिर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने 20 मार्च को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी और कहा कि सरकार प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल गेहूं खरीदी का निर्णय ले। आपने यह भी उल्लेख किया कि पिछले वर्ष सरकार ने केवलारी मंड़ी में 35 एवं पलारी उप मंड़ी में 45 क्वि. प्रति हेक्टे. गेहूं खरीदा था किन्तु फिर भी पूरा गेहूं नहीं खरीदा जा सका था। अपने इसी पत्र में हरवंश सिंह ने यह भी लिखा था कि इस साल पानी अच्छा गिरा हैं इसलिये गेहूं की अच्छी फसल आयेगी। इस पत्र के आकड़ें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देते हैं। जब 35 और 45 क्वि. खरीदी के बाद भी पूरा गेहूं ना ले पाने की बात कही गयी है तो फिर ऐसा क्याकारण हैं कि एक विपक्ष के विधायक होने के बाद भी उन्होंने सिर्फ तीस क्वि. खरीदी को मांग क्यों उठायी ? क्या ऐसा तो नहीं कि सरकार तीस क्वि. के आदेश जारी करने जा रही हो और यह बात उन्हें पता लग गयी हो इसलिये ऐसा किया गया? या अपने ही पत्र के विरोधाभास का वे ध्यान नहीं रख पाये? बात जो कुछ भी हो लेकिन तीन दिन बाद ही उनका एक दूसरा पत्र मीडिया को जारी किया गया जिसमें असंिचत में 30 और सिंचिंत में 45 क्वि. प्रति हेक्टेयर की मांग फिर से उठायी गयी हैं। असिंचिेत जमीन में एक हेक्टेयर में तीस क्वि. गेहूं पैदा होने की बात पर भी किसान यह कहने से नहीं चूक रहें हैं कि ऐसी खेती खेतों में तो नहीं लेकिन कागजों पर जरूर हो सकती हैं जो कि कालेधन सफेद धन में बदलने के लिये चंद लोग किया करते हैं। इसके बाद प्रदेश के वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने एक बयान जारी कर किसानों से चिंता ना करने की बात कही और यह विश्वास दिलाया कि पिछले वर्ष के समान ही इस साल भी खरीदी की जायेगी। सरकार जल्दी ही संशोधित आदेश जारी कर देगी। यहां यह विशेषरूप से उल्लेखनीय हैं कि पिछले वर्ष बाद में संशोधित आदेश के अनुसार प्रदेश सरकार ने 35 से 45 क्वि. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खरीदी की थी जिसमें सिंचिंत और असचिंत भूमि के लिये कोई अलग से मानदंड़ तय नहीं किये गये थे। जबकि इस साल प्रदेश सरकार ने सिर्फ 16.5 क्वि. प्रति हेक्टे. के हिसाब से खरीदी करने के आदेश दिये हैं। जिले के बेचारे किसानों के लिये सभी नेता तो परेशान है लेकिन अंतिम तौर पर बाद में बस इतना ही होने की संभावना दिख रही हैं कि पिछले साल के हिसाब से ही खरीदी हो सकेगी। याने पर्याप्त पानी गिरने के बाद अच्छी फसल होने की संभावना के बाद भी किसान से सरकार एक क्विंटल भी अधिक गेहूं नहीं खरीदेगी। सूखी और सिंचिंत दोनों ही किस्म की खेती करने वाले किसानों से सरकार एक ही मानक स्तर पर खरीदी करेगी जो किसानों के हित में होगा या बिचौलियों के हित में? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

Monday, March 19, 2012

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


के.डी. और बसोरी द्वारा जिले की उपेक्षा के कारण इस साल भी रेल बजट में जिले को कोई सौगात नहीं मिली
बंद की सफलता से पूरे प्रदेश में कांग्रेसियों में उत्साह है वहीं भाजपा चिंतित हो गयी हैं। प्रदेश की महिलाओं के भाई और बच्चियों के मामा कहलाने वाले शिवराज सिंह की सरकार द्वारा एक विधवा गर्भवती महिला के साथ किये गये इस व्यवहार के कारण सियासी हल्कों में कई सवाल उठ खड़े हुये हैं। रेल बजट के बाद जिले के भाजपाइयों ने  रेल्वे स्टेशन में खड़ी रेल को रोक कर किराया वृद्धि पर अपना विरोध प्रगट किया और प्रदर्शन किया। भाजपा का यही आंदोलन यदि रेल बजट आने के पहले हो जाता तो हो सकता है कि जिले को बजट में कुछ सौगात मिल जाती। रेल बजट में जिले की उपेक्षा का दुख हर आदमी को हैं। लेकिन जिले के दोनों सांसद के.डी.देशमुख और बसोरी सिंह मसराम ने तो मानो इस जिले की कोई सुध ही ना लेने की ठान ली है।इंका नेता आशुतोष वर्मा ने जनप्रतिनिधियों सहित पंच परमेश्वरों की आवाज लोक सभा तक पहुंचाने का अभियान भी चलाया था। दोनों सांसदों सहित सभी विधायकों को पत्र लिखकर प्रयास करने का आग्रह किया गया था। लेकिन सांसद देशमुख और बसोरी सिंह के साथ ही इंका विधायक हरवंश सिंह ने भी इस अभियान से परहेज किया। रामटेक सिवनी गोटेगांव रेल परियोजना को मंजूरी मिलनाजिले के विकास के लिये आवश्यक है क्योंकि यह परियोजना बनने से दक्षिण भारत से उत्तर भारत को जाने वाले मुख्य रेल मार्ग में सिवनी आ जायेगा और कहीं और जाकर रेल मार्ग से जाने की आवश्यकता ही नहीं रह जायेगी। लेकिन दिल्ली में जिले की आवाज गुम हो जाने के कारण विलंब हो रहा हैं।   
बंद की सफलता से इंकाइयों में उत्साह -आई.पी.एस. अधिकारी नरेन्द्र कुमार की हत्या के विरोध कांग्रेस के बंद को जिले में भारी सफलता मिली है। जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी के नेतृत्व में मुख्यालय सहित सभी कस्बों में बंद सफल रहा। नगर में नगर इंकाध्यक्ष इमरान पटेल की अगुवायी में कांग्रेसजनों ने बंद को सफल बनाने के लिये प्रयास किये जिन्हें शत प्रतिशत सफलता मिली हैं। सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। पूरे प्रदेश में इस बंद की सफलता से जहां एक ओर कांग्रेस में उत्साह हैं तो वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार सकते में हैं। उसे ऐसे बंद की उम्मीद नही थी। हालांकि विस सत्र के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सी.बी.आई. जांच की घोषणा सदन में करने के बजायअपने कक्षमें की और यह कहा कि नरेन्द्र कुमार की पत्नी की मांग पर सरकार ने यह कदम उठाया है जबकि उनकी पत्नी द्वारा मांग करने के बाद सरकार द्वारा सहानुभूति पूर्वक विचार करने के बजाय उसके मंत्री उन्हें धमका तक रहे थे। मुख्यमंत्री द्वारा उनकी पत्नी कां मांग करने का उल्लेख सिर्फ इसलिये किया गया कि शिवराज सिंह यह संदेश नहीं देना चाहते थे कि कांग्रेस के बंद की सफलता के दवाब में सरकार ने यह फैसला लिया हैं। प्रदेश की महिलाओं के भाई और बच्चियों के मामा कहलाने वाले शिवराज सिंह की सरकार द्वारा एक विधवा गर्भवती महिला के साथ किये गये इस व्यवहार के कारण सियासी हल्कों में कई सवाल उठ खड़े हुये हैं। 
किराया वृद्धि के विरोध में भाजपा का प्रदर्शन-रेल बजट के बाद जिले के भाजपाइयों ने अध्यक्ष सुजीत जैन और नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी के नेतृत्व में रेल्वे स्टेशन में खड़ी रेल को रोक कर किराया वृद्धि पर अपना विरोध प्रगट किया और प्रदर्शन किया। इसके साथ ही रेल बजट में जिले के साथ किये गये सौतेले व्यवहार का आरोप भी लगाया और छिंदवाड़ा से नैनपुर गेज परिवर्तन के लिये बजट ना देने पर नाराजगी व्यक्त की हैं। जबकि दूसरी महतवाकांक्षी रामटेक सिवनी गोटेगांव रेल लाइन के लिये बजट आवंटन ना होने पर जिला भाजपा ने अपने ज्ञापन में चुप्पी साध ली जबकि इसके लिये सर्वदलीय अभियान चलाया था जिसमें भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की थी। भाजपा के विरोध के बाद रेल संघंर्ष समिति के अध्यक्ष खुमानसिंह ठाकुर ने विज्ञप्ति जारी कर यह दावा किया है कि गेज परिवर्तन के लिये 25 करोड़ रू. की राशि आवंटित की गयी हैं जिससे कुछ पुल बनाने के टेंड़र रेल्वे विभाग लगाने वाला हैं। भाजपा का यही आंदोलन यदि रेल बजट आने के पहले हो जाता तो हो सकता है कि जिले को बजट में कुछ सौगात मिल जाती। लेकिन रेल किराये की वृद्धि पर आयोजित किये गये इस आंदोलन का उद्देश्य की अलग था इसलिये पहले आयोजित नहीं हो पाया।
धन्य हैं के.डी.बसोरी और हरवंश-रेल बजट में जिले की उपेक्षा का दुख हर आदमी को हैं। लेकिन जिले के दोनों सांसद के.डी.देशमुख और बसोरी सिंह मसराम ने तो मानो इस जिले की कोई सुध ही ना लेने की ठान ली है। जिले की दो रेल परियोजनायें पिछले रेल बजट में थी। गेज परिवर्तन में छिंदवाड़ा से सिवनी नैनपुर को तीस करोड़ रुपये का आवंटन मिला था तो रामटेक सिवनी गोटेगांव रेल परियोजना उन 190 परियोजनाओं में शामिल थी जिन्हें रेल मंत्री ने 12 वीं पंच वर्षीय योजना में प्रारंभ करने को कहा था। इतना तो सभी जानते हैं कि बिना राजनैतिक प्रयासों के आज कल कुछ होता नहीं हैं। रामटेक वाली परियोजना के लिये इंका नेता आशुतोष वर्मा ने जनप्रतिनिधियों सहित पंच परमेश्वरों की आवाज लोक सभा तक पहुंचाने का अभियान भी चलाया था। दोनों सांसदों सहित सभी विधायकों को पत्र लिखकर प्रयास करने का आग्रह किया गया था। लेकिन सांसद देशमुख और बसोरी सिंह के साथ ही इंका विधायक हरवंश सिंह ने भी इस अभियान से परहेज किया। सांसद देशमुख ने तो सिवनी से बरघाट कटंगी और सिवनी से छपारा लखनादौन की नयी रेल लाइन की मांग भी कर डाली जिसे रेल मंत्री ने प्रारंभिक सर्वे की सूची में शामिल भी कर लिया हैं। सांसद की इस मांग से एक सहज सवाल यह उठ खड़ा हो रहा है कि जब सिवनी में ही ब्राडगेज नहीं हैं तो क्या सिवनी से बरघाट कट्रगी और छपाया लखनादौन तक क्या सांसद की छोटी लाइन डलवाना चाहते हैं? जब तक सिवनी बड़ी रेल लाइन से नहीं जुड़ता तब तक ऐसी मांग हास्यास्पद ही लगती हैं। सांसद देशमुख और बसोरी सिंह यदि उस रामटेक गोटेगांव रल लाइन के लिये प्रयास करते जिसके सभी सर्वे पूरे हो चुके हैं तो शायद इसबजट में रेल मंत्री की नजरे इनायत हो जाती। लेकिन ना जाने क्यों ण्ेसा किया गया? फिलहाल तो मालूम नहीं लेकिन आने वाले दिनों में इसका खुलासा भी हो ही जायेगा। हालांकि इस बजट की सर्वे वाली सूची में पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा की नरसिंहपुर सागर होते हुये खुजराहो तक के नये रेल मार्ग के सर्वे का प्रावधान भी किया गया हैं।
क्यों जरूरी है रामटेक गोटेगांव रेल लाइन की मंजूरी?-6जनवरी 1996 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री कु. विमला वर्मा की मांग पर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज की उपस्थिति में राटेक सिवनी गोटेगांव नयी रेल की घोषणा एक विशाल आम सभा में की थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेल्वे को इसमें नफा नुकसान नहीं देखना चाहिये क्योंकि यह पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों के लिये विकास के रास्ते खोलेगी। इसका ट्रेफिक सर्वे भी उसी समय हो गया था। 96 के चुनाव में कांग्रेस की सरकार नहीं बनी और सिवनी से भी प्रहलाद पटेल सांसद बन गये थे। 1999 के चुनाव में रामनरेश .िपाठी सांसद बन गये थे और केन्द्र में वाजपेयी के नेतृत्व में राजग सरकार बनी थी और प्रहलाद पटेल बालाघाट से सांसद बन गये थे। वे कुछ समय बाद केन्द्रीय मंत्री भी बन गये थे लेकिन तब उनकी प्राथमिकता बालाघाट कटंगी रेल लाइन हो गयी थी। पूरी पांच साल चलने वाली सरकार में त्रिपाठी ने कोई कारगर प्रयास नहीं किया। संप्रग सरकार के पहले रेल बजट में ही इसके डिटेल सर्वे का प्रावधान किया गया लेकिन सर्वे के आगे कोई उपलब्धि नहीं हुयी। पिछले रेल बजट में इसे बारहवीं पंच वर्षीय योजना में प्रारंभ करने की बात कही गयी थी लेकिन इस बजट में कुछ उपलब्धि नहीं मिली। जबकि छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर अमान परिर्वतन का नीतिगत फैसला लिया जा चुका है और पिछले बजट में इसके लिये 30 करोड़ रु. का प्रवाधान भी किया गया था। लेकिन रामटेक सिवनी गोटेगांव रेल परियोजना को मंजूरी मिलनाजिले के विकास के लिये आवश्यक है क्योंकि यह परियोजना बनने से दक्षिण भारत से उत्तर भारत को जाने वाले मुख्य रेल मार्ग में सिवनी आ जायेगा और कहीं और जाकर रेल मार्ग से जाने की आवश्यकता ही नहीं रह जायेगी। लेकिन दिल्ली में जिले की आवाज गुम हो जाने के कारण विलंब हो रहा हैं। हालांकि अब जिले में एक के बजाय दो सांसद हैं लेकिन अपने अपने जिले के छः विधानसभा क्षेत्र होने के कारण उनके लिये जिले का चुनावी महत्व नहीं हैं।ऐसे में आगे क्या हो पायेगा?यह कहना अभी संभव नहीं हैं।              

Tuesday, March 13, 2012

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छोटी छोटी बातों पर बड़ी बड़ी विज्ञप्ति जारी करने वाली जिला भाजपा की सांसद बसोरी के बयान पर चुप्पी चर्चित

सांसद बसोरी सिंह द्वारा हरवंश सिंह को अपना माई बाप तक कह डालने के मामले पर गौगपा के पूर्व विधायक रामगुलाम ने तो इसे मुद्दा बनाया लेकिन जिला भाजपा की चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चित हैं। कई गुटों में बंटी जिला भाजपा की इन हरकतों पर सवालिया निशान लग रहें हैं। जिला भाजपा अध्यक्षसुजीत जैन इन सब हालातों पर कैसे काबू कर पायेंगें? और जिला उभाजपा पर लगने वाले इन आरोपों से कैसे मुक्ति दिला पायेंगें? यह तो वक्त आने पर ही पता चल पायेगा। लंबे उहापोह के बाद जिले में कांग्रेस की कमेटिया तो घोषित हो गयीं हैं लेकिन अब तक प्रभारी महामत्रियों की घोषणा नहीं हो पायी हैं। जिले के लगभग सारे के सारे पदाधिकारी हरवंश सिंह के ही समर्थक हैं। इसके बाद भी जिले सहित सभी ब्लाकों में प्रभारी महामंत्री चुनने में हरवंश सिंह को ना जाने क्या परेशानी आ रही हैं? जबकि पहली बार जिला कांग्रेस में उनके पुत्र रजनीश सिंह भी महामंत्री बनाये गये हैं। जिला पंचायत की वन समिति के अध्यक्ष रामगोपाल जैसवाल इन दिनों सुर्खियों में बने हुये है। हाल ही में जिला भाजपा ने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर यह कहा है कि रामगोपाल भाजपा के सदस्य नहीं है और भाजपा कार्यकर्त्ता इनके कार्यक्रमों से दूरी बना कर रखें। यह बात अलग है कि जिला भाजपा ने जिला पंचायत चुनावों में अध्यक्ष पद के लिये रामगोपाल को ना केवल अपना प्रत्याशी घोषित किया था वरन वरिष्ट आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव के प्रभारी थे।

सियासी हल्कों में चर्चित है जिला भाजपा की चुप्पी -कार्यक्रम स्थल था धनोरा। केवलारी विस क्षेत्र की इस ब्लाक की पंचायतों को बटना था टेंकर। अतिथि थे मंड़ला के इंका सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं इंका विधायक हरवंश सिंह। भाषणों का दौर चला तो सांसद बसोरी सिंह राग दरबारी गाते गाते इतना भाव विभोर हो गये कि उन्होंने इंका विधायक हरवंश सिंह को अपना माई बाप तक कह डाला। अपनी रागदरबारी सुनने के आदी हो चुके हरवंश सिंह ने भी उम्र और राजनैतिक कद में छोटे होने के बावजूद भी बसोरी सिंह को ऐसा कहने से रोकने का कोई प्रयास नहीं किया। कार्यक्रम में उपस्थित गौगपा के पूर्व विधायक रामगुलाम उइके ने सांसद के इस कथन को आदिवासियों का अपमान बताया और इसे एक मुद्दा बनाया। लेकिन राजनैतिक हल्कों में आश्चर्य उस समय व्याप्त हो गया जब कि कांग्रेस की प्रमुख विरोधी पार्टी भाजपा ने इस मामले में अपनी चुप्पी साध ली। एक लंबा समय बीत जाने के बाद भी जिला भाजपा का इस मामले में मौन रहना कई संदेहों को जन्म दे रहा हैं। तारीफ का बात तो यह हैं अखबारों की सुर्खी बनने के बाद भी ना तो इंका सांसद ने और ना ही इंका विधायक ने इस बात का कोई खंड़न किया हैं कि बसोरी सिंह ने उन्हें अपना माई बाप कहा हैं। इतना ही नहीं इसी कार्यक्रम में जिला इंकाध्यक्ष ने सिवनी की भाजपा विधायक नीता पटेरिया पर भी टेंकर बनवाने में कमीशन बाजी का भी खुले आम आरोप लगाया था जबकि तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर के टेंकर कांड़ में जिला इंका ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी थी। राष्ट्रय मुद्दों से लेकर छोटी छोटी बातों पर बड़ी बड़ी विज्ञप्ति जारी करने की आदी जिला भाजपा इस मामले में आखिर क्यों मौन रह गयी? इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहें हैं। क्या इसलिये कि यह मामला केवलारी विधानसभा क्षेत्र का है इसलिये? या मामला हरवंश सिंह से संबंधित है इसलिये? या इसमें विधायक नीता पटेरिया पर आरोप लगे थे इसलिये? या इसलिये कि यह मामला फगग्नसिंह कुलस्ते और डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन के क्षेत्र का है? अब इस सबके पीछे सच्चायी क्या है? इसका जवाब तो जिला भाजपा ही दे सकती हैं लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि इस सबके पीछे कहीं ना नहीं भाजपा के गुटबंदी का जरूर योगदान हैं। जिले में भाजपा की एकता एक संतरे के समान हैं कि छिलका उतरा तो सारी की सारी फांके अलग अलग दिखायी देने लगतीं हैं। इसी तरह किसी के स्वागत समारोह में एक ही गाड़ी में माला पहन कर खड़े रहने वाले दिग्गज नेता गाड़ी से उतरते ही संतरें की फांकांे की तरह ही दिखायी देने लगते हैं। जिला भाजपा अध्यक्षसुजीत जैन इन सब हालातों पर कैसे काबू कर पायेंगें? और जिला उभाजपा पर लगने वाले इन आरोपों से कैसे मुक्ति दिला पायेंगें? यह तो वक्त आने पर ही पता चल पायेगा।

कांग्रेस में क्यों नहीं नियुक्त हो पा रहें हैं प्रभारी महामंत्री ?-जिला कांग्रेस सहित ब्लाक कमेटियों को भी अभी तक प्रभारी महामंत्री नहीं मिल पाये हैं। लंबे उहापोह के बाद जिले में कांग्रेस की कमेटिया तो घोषित हो गयीं हैं लेकिन अब तक प्रभारी महामत्रियों की घोषणा नहीं हो पायी हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में अध्यक्ष के बाद प्रभारी महामंत्री का पद ही सबसे महत्वपूर्ण होता है लेकिन ना जाने क्यों अभी इसका निर्णय नही हो पा रहा हैं। हालांकि पिछले लगभग पंद्रह सालों से जिले को कांग्रेस संगठन में जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का ही वर्चस्व हैं। लगभग सारे के सारे पदाधिकारी उनके अपने ही समर्थक हैं। इसका इससे बड़ा प्रमाण भला और क्या हो सकता हैं कि जिले की वरिष्ठतम इंका नेत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कु. विमला वर्मा तक को प्रदेश प्रतिनिधि बना कर सम्मान देने की जरूरत नहीं समझी गयी। जबकि राजनैतिक कद में उनसे बौने और उम्र में काफी छोटे नेताओं को प्रदेश प्रतिनिधि बनाया गया हैं। इसके बाद भी जिले सहित सभी ब्लाकों में प्रभारी महामंत्री चुनने में हरवंश सिंह को ना जाने क्या परेशानी आ रही हैं? जबकि पहली बार जिला कांग्रेस में उनके पुत्र रजनीश सिंह भी महामंत्री बनाये गये हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीिरा आसवानी खुद भी कई सालों तक प्रभारी महामंत्री रहें हैं और वे इसके महत्व को भी बखूबी समझते हैं। इसके बावजूद भी वे अभी तक यह कार्य क्यों नहीं कर पा रहें हैं? यह एक ओपन सीक्रेट हैं। इन हालातों में जिले में संगठन कैसे मजबूत हो पायेगा? जबकि हाल ही में उत्तर प्रदेश के चुनावों में कांग्रेस की हार के लिये कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी दोनों ही स्पष्टतौर यह कह चुके हैं पार्टी की हार का प्रमुख कारण प्रदेश में संगठन की कमजोरी रही हैं और इस जवाबदारी को मानते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा ने अपना स्तीफा ळी सौंप दिया है। अगले साल मध्यप्रदेश में भी चुनाव होना हैं और यदि इसी गति से कांग्रेस चलती रही तो हालात संभाहना मुकिल हो जायेगा।

रामगोपाल को लेकर मचा भाजपा में बवाल-जिला पंचायत की वन समिति के अध्यक्ष रामगोपाल जैसवाल इन दिनों सुर्खियों में बने हुये है। हाल ही में जिला भाजपा ने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर यह कहा है कि रामगोपाल भाजपा के सदस्य नहीं है और भाजपा कार्यकर्त्ता इनके कार्यक्रमों से दूरी बना कर रखें। यह बात अलग है कि जिला भाजपा ने जिला पंचायत चुनावों में अध्यक्ष पद के लिये रामगोपाल को ना केवल अपना प्रत्याशी घोषित किया था वरन वरिष्ट आदिवासी नेता फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव के प्रभारी थे। अध्यक्ष का चुनाव हार जाने के बाद रामगोपाल जब जिला पंचायत की वन समिति के अध्यक्ष काचुनाव लड़े तो भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों ने उन्हें वोट देकर जिताया भी था। हालांकि रामगोपाल ने सदस्य के चुनाव में भाजपा के क्षेत्र के घोषित भाजपा प्रत्याशी को हराया था लेकिन उसके बाद भी पार्टी ने उन्हें समर्थन देकर अध्यक्ष का चुनाव लड़वाया था। राजनैतिक क्षेत्रों में इस बात को लेकर चर्चा हैं कि आखि रामगोपाल जैसवाल में ऐसा क्या कुछ जिला भाजपा को नया दिख गया जिसके कारण अब सार्वजनिक रूप से विश्रप्ति जारी कर कार्यकर्त्ताओं को उनसे परहेज रखने की नसीहत दी जा रही हैं। जबकि यह भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं कि उमा भारती के कार्यकाल में हुये जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के वक्त यही रामगोपाल नरेश-हरवंश युति की संयुक्त रणनीति केे एक महत्वपूर्ण हिस्से थे।जिसके कारण भाजपा की अधिकृत एम्मीदवार श्रीमती गोमती ठाकुर अध्यक्ष का चुनाव हार गयीं थीं। जिला भाजपा अब आखिर ऐसा क्यों कर रही है और किसके कहने पर कर रही? इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें हैं।

Monday, March 5, 2012

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

सांसद बसोरी सिंह का यह बयान कि हरवंश मेरे माई बाप हैं को आदिवासियों के अपमान का मुद्दा बनाया रामगुलाम ने

ध्वज वाहिनी योजनाओं का चेयरमेन असलम भाई को बनाने को लेकर जिले के इंकाइयों में तरह तरह की चर्चायेजारी हैं। यह एक महत्वपूर्ण नियुक्ति है या झुनझुना? इसे लेकर कांग्रेसी ही अलग अलग तर्क देते देखे जा रहे है। असलम भाई केी नियुक्ति को लेकर सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि उनको बधायी देने के लिये कांग्रेसियों का जो पहला विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित हुआ उसमें उन तमाम इंका नेताओं के नाम ही शामिल थे जोे असलम विरोध के ध्वजवाहक थे। अब ऐसे में भला लोग ये कहें कि वाह क्या बात हैं हरवंश? तो भला क्या गलत हैं।दुगनी लागत मंें बनी घटिया सड़क के भाजपायी ठेकेदारों के संरक्षक भी नरेश थे और अब नयी रोड़ बनवाने को सेहरा भी उनके ही सर बंध रहा हैं।येहुयी ना वही बात कि तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना?अपने से उम्र और सियासी कद में छोटे हरवंश सिंह को इंका सांसद बसोरी सिंह द्वार यह कहना कि “हरवंश मेरे माई बाप है”ं सियासी हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। इसी कार्यक्रम में जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी ने महंगे टेंकर बांटने को लेकर सिवनी विधायक नीता पटेरिया को आरोपों के कठघरे में खड़ा किया। दोनों ही पार्टियां आरोप तो लगा रहीं हैं लेकिन ना जाने क्यों बाकायदा शिकायत करके जांच कराने से बच रहीं हैं।

असलम की नियुक्ति झुनझुना या महत्वपूर्ण?-पिछले दिनों कांग्रेस की राजनीति में हुयी एक नियुक्ति से फिर से हलचल मच गयी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने असलम भाई पत्ते वाले को कांग्रेस की ध्वजवाहिनी योजनाओं के प्रचार प्रसार एवं मानीटरिंग के लिये बनायी गयी समिति का चेयरमेन नियुक्त किया हैं। इस नियुक्ति की इंकाई हल्कों में इसलिये ज्यादा कानाफूसी हो रही हैं क्योंकि 1/14 के किस्से के चलते जिले के एक मात्र इंका विधायक हरवंश सिंह ने असलम भाई को महामंत्री के बजाय सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य बनाया था।जिले की कार्यकारिणी की घोषणा के कुछ दिन बाद ही असलम भाई को जिले का चेयरमेन बना दिया गया है।इस पर एक धड़ा यह कहते दिख रहा है कि आगामी चुनावों की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण पद है जिसमें केन्द्र की महत्वपूर्ण योजनाओं का ना केवल प्रचार प्रसार करना है वनर उनकी निगरानी कर उनकी रिपोर्ट भी करना हैं। वहीं दूसरी ओर एक धड़ा यह कहते देखा जा रहा है कि नाराज असलम को मनाने के लिये हरवंश सिंह ने उन्हें एक झुनझुना थमा दिया है जो वे 2014 के लोस चुनाव तक बजाते रहेंगें। इसमें सच्चायी क्या है? यह तो समय असने पर ही पता चल सकेगा।

वाह क्या बात है हरवंश ?-सियासत में शह और मात का खेल तो चलते रहता हैं चाहे वो दो सियासी पार्टियों के बीच हो या फिर एक ही पार्टी के दो गुटों के बीच हो। लेकिन जब यह खेल एक ही पार्टी के एक ही गुट के लोगों के बीच खेला जाता हैं तो वह सुर्खियों में अवश्य ही आ जाता हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों जिले के कांग्रेसियों के बीच चर्चित हो रहा हैं। मुसाफिर ने अपने पाठकों को पहले ही बहुत निरीह दिखे हरवंश शीर्षक में बता दिया था कि जिला इंका के गठन में 1/14 के खेल में हरवंश सिंह ने दवाब में आकर असलम भाई को सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य बनाया हैं। इसका कारण यह था कि विरोध करने वाले 14 नेताओं में अधिकांश ऐसे थे जिनका परिसीमन के पहले वाले केवलारी क्षेत्र में व्यापक प्रभाव था जहां से पिछले चुनाव में हरवंश सिंह हार गये थे और नये जुड़े क्षेत्रों से बढ़त लेंकर चुनाव जीत लिया था। लेकिन अब नये नये क्षेत्रों के लिये भी वे नये नहीं रह गये हैं लिहाजा पुराने क्षेत्र में नाराजगी कम करना जरूरी हो गया था। लेकिन जिला इंका की घोषणा के कुछ दिनों बाद ही उन्हीं असलम भाई के हवाले कांग्रेस की ध्वज वाहिनी योजनाओं की कमान सौंपना कम आश्चर्यजनक नहीं हैं। उससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक यह है कि इस नियुक्ति के बाद असलम भाई को बधायी देने का सबसे पहला विज्ञापन उन्हीं इंका नेताओं का आया जो कि 1/14 की लड़ाई के प्रमुख ध्वजवाहक थे।ऐसा नजारा देखकर राजनैतिक विश्लेषकों के मुंह से यह वाक्य निकलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि वाह क्या बात है हरवंश?

तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना की तर्ज पर दिखे नरेश-पुरानी फिल्म का एक बहुत ही मशहूर गाना था “तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना”। कुछ इसी तर्ज पर काम करते दिख रहे हैं मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर। दुगनी लागत में बनी घटिया सड़क के रूप में शहर में मशहूर बाहुबली रोड के लिये नरेश दिवाकर ने प्राधिकरण से इस सड़क को डामर की बनाने के लिये 30 लाख रुपये मंजूर कर दिये। इस बार एक सावधानी बरतते हुये उन्होंने यह सड़क बनाने के लिये नगरपालिका के बजाय पी.डब्ल्यू.डी. को ऐजेन्सी बनाया। उसी के द्वारा बनाये गये प्राक्कलन के अनुसार ही दिवाकर ने तीस लाख रू. की राशि स्वीकृत की। टेंडर लगे लेकिन किसी ने फार्म ही नहीं भरा। चर्चा चली कि इतने में सड़क नहीं बन सकती। अतः और राशि दी जाये। बताया जाता है कि फिर रिवाइस एस्टीमेट बना और इसी बहुचर्चित रोड़ के लिये सांसद के.डी.देशमुख ने भी दस लाख रु. की राशि मंजूर कर दी। बताया जा रहा है कि अब चालीस लाख रुपये की लागत से एस.पी.बंगले के सामने से सर्किट हाउस तक की करीब 700 मीटर की यह रोड डामर की बनायी जायेगी।हाल ही में अखबारों में प्रकाशित बयान में मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर ने कहा है कि इस रोड़ में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जायेगा। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नपा द्वारा दियेे गये ठेके में दुगनी लागत में इस घटिया सड़क को बनाने वाले भाजपायी ठेकेदारों को भी तत्कालीन विधायक के रूप में नरेश दिवाकर का ही संरक्षण प्राप्त था जिसका खामियाजा आज तक शहर के लोग भोग रहें हैं। जबकि इस सड़क के दोनों ओर नाली बनाने का काम भाजपा के राजेश त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पालिका ही कर रही हैं। ऐसे हालात में क्या यह कहना गलत है कि तुम्हीं ने दर्द दिया है तुम्हीं दवा देना?

हरवंश मेरे माई बाप हैं सांसद बसोरी का कथन चर्चित -बीते दिनों धनोरा ब्लाक की केवलारी विस क्ष़्ोत्र में आने वाली पंचायतों को भी छपारा की तर्ज पर ही टेंकर बांटे गये।कार्यक्रम में उपस्थित मंड़ला के इंका सांसद बसोरी सिंह मसराम ने अपने संबांेधन में इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को अपना माई बाप तक कह डाला। ये समाचार जबलपुर से निकलने वाले दो प्रमुख समाचार पत्रों में सुर्खी बना। हालांकि उम्र और ओहदे दोनों में ही सांसद हरवंश सिंह से बड़े है लेकिन उनका यह कहना उनकी सहजता है या फिर चाटुकारिता की सीमा? इस पर कुछ भी नहीं कहा सकता। हालांकि यह भी एक कटु सत्य हैं कि मंड़ला संसदीय क्षेत्र में आठ में से सिर्फ केवलारी के हरवंश सिंह और गोटेगांव के नर्मदा प्रजापति ही इंका के तथा शेष छःविधायक भाजपा के थे। लोकसभा चुनाव में बसोरी सिंह दोनों ही इंका विधायकों के क्षेत्रों से चुनाव हारे थे। उसके बाद भी हरवंश को महिमा मंड़ित करने के लिये उनका यह बयान विवादित हो गया हैं और घंसौर के पूर्व विधायक रामगुलाम उइकें ने इसे आदिवासियों को अपमानित करने वाला बयान निरूपित किया हैं।

टेंकर वितरण में टेंकर को लेकर नीता पर आरोप लगाये हीरा ने -इसी कार्यक्रम में जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी ने महंगे टेंकर बांटने को लेकर सिवनी विधायक नीता पटेरिया को आरोपों के कठघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि इनकी खरीदी में भारी कमीशन खोरी हुयी हैं। वैसे भी टेंकरों और जनप्रतिनिधियों का इसजिले में चोरी दामन का साथ रहा हैं। सबसे तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर के घटिया टेंकरों के मामले ने ऐसा तूल पकड़ा था कि खुद के द्वारा लोकार्पित किये गये टेंकरों के लिये दी गयी विधायक निधि वापस लेनी पड़ी थी और बिना भुगतान हुये टेंकर वापस चले गये थे।फिर अपने ही जन्मदिन पर एक शासकीय समारोह में विधायक निधि से टेंकर इंका विधायक हरवंश सिंह ने बांटें और उन पर बाकायदा यह लिखाया गया कि उनके जन्मदिन पर भेंट। फिर अटल जी के जन्मदिन पर भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने भी टेंकर बांटे जो कि अधिक कीमत के कारण सुर्खियों मेंरहें। हरवंश और नीता के टेंकरों पर इंका और भाजपा में विज्ञप्ति युद्ध भी जम कर हुआ। नीता समर्थथकों का कहना है कि उन्होंने किसी जिनी व्यक्ति से बनवाने के बजाय शासकीय ऐजेन्सी से बनवाये हैं। जबकि हरवंश के टेंकरों की खरीदी में शासकीय नियमों का उल्लंघन किया गया हैं। हरवंश समर्थकों का आरोप हैं कि नीता ने टेंकरों में भारी कमीशन बाजी की हैं। दोनों ही पार्टियां आरोप तो लगा रहीं हैं लेकिन ना जाने क्यों बाकायदा शिकायत करके जांच कराने से बच रहीं हैं।