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Monday, October 29, 2012


शिवराज ने नरेश को मविप्रा का अध्यक्ष महाकौशल के विकास के लिये बनाया था या उनके राजनैतिक व्यक्तित्व के विकास के लिये?
राजनेता कोई संत या सन्यासी नहीं होता जिससे कि त्याग और बलिदान की उम्मीद की जाये। कोई ऐसा राजनीतिज्ञ जिसका सब कुछ छीन कर किसी दूसरे की झोली में डाल दिया गया हो वो तो और अधिक प्रतिशोध की आग में झुलसा हुआ रहता हैं। और ऐसे में उसे फिर से कोई अवसर देने वाला अवसर दे दे तो फिर कहना ही क्या है? ऐसा ही कुछ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का लालबत्तीधारी अध्यक्ष बनाकर किया है। सियासी हल्कों में यह चर्चा है कि आखिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष महाकौशल के विकास के लिये बनाया था या उनके राजनैतिक व्यक्तित्व के विकास के लिये? बीस साल से जिस केवलारी विस क्षेत्र का वे प्रतिनिधित्व कर रहें हैं वहां खुद कितना विकास हुआ है? इसका खुलासा हाल ही में हुआ हैं। वैसे तो हर साल हर विस द्वोत्र में हाई रूकूल और हायर सेकेन्डरी स्कूल खुलते हैं। लेकिन इस साल केवलारी विस द्वोत्र में उगली के पास रुमाल गांव में खुले हायर सेकेन्डरी स्कूल ने राजनैतिक भूचाल ला दिया है। इस घोषणा के बाद से ही उगली में क्षेत्रीय विधायक और विस उपध्यक्ष हरवंश सिंह का विरोध चालू हो गया।इन दिनों जिले में भाजपा के चुनावों को लेकर राजनैतिक हलचल जारी हैं। हालांकि आलकमान के निर्देशानुसार भाजपा में चुनाव की जगह आम सहमति से चयन होने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। मंड़लों के चुनावों में तो कोई खास उलट फेर होने की संभावना नहीं हैं।
विकास किसका महाकौशल का या खुद का? -राजनेता कोई संत या सन्यासी नहीं होता जिससे कि त्याग और बलिदान की उम्मीद की जाये। कोई ऐसा राजनीतिज्ञ जिसका सब कुछ छीन कर किसी दूसरे की झोली में डाल दिया गया हो वो तो और अधिक प्रतिशोध की आग में झुलसा हुआ रहता हैं। और ऐसे में उसे फिर से कोई अवसर देने वाला अवसर दे दे तो फिर कहना ही क्या है? ऐसा ही कुछ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का लालबत्तीधारी अध्यक्ष बनाकर किया है। उल्लेखनीय है कि दो बार के विधायक रहते हुये भी भाजपा ने नरेश दिवाकर की कई आरोपों के चलते टिकिट काट कर तत्कालीन सांसद नीता पटेरिया को दे दी थी। वे भारी मतों से चुनाव जीत भी गयीं थीं। प्रदेश में चार सांसदों को चुनाव लड़ाया गया था जिनमें से तीन को दो चरणों में कबीना मंत्री बना दिया गया। लेकिन ना जाने क्यों शिवराज सिंह ने नीता पटेरिया को मंत्री नहीं बनाया हालांकि उन्हें प्रदेश महिला मोर्चे का अध्यक्ष जरूर बना दिया गया। इसके बाद जब लाल बत्तियां बंटनी शुरू हुयी तो शिवराज ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया। यहां यह उल्लेखनीय है कि विकास के लिहाज से प्रदेश के पिछड़े हुये क्षेत्रों के विकास को गति प्रदान करने के लिये प्राधिकरण बनाये गये हैं। इस लिहाज से देखा जाये तो नरेश जी के अध्यक्ष बनने के बाद से महाकौशल के विकास को गति पकड़ना चाहिये था लेकिन ऐसा कुछ तो दिखायी नहीं दिया वरन उनके राजनैतिक व्यक्तित्व में विकास जरूर दिखायी दे रहा हैं। जिले को भी कोई विशेष उपलब्धि नहीं हुयी हैं। हां कहने को उन दो सड़कों के लिये राशि मंजूर करने की जरूर घोषणा हुयी है। ये सड़के है सर्किट हाउस से एस.पी. बंगले तक तथा सिंघानिया के मकान से मठ स्कूल जिसे जुलूस मार्ग कहा जाता है। ये दोनों सड़कें ही उनके विधायक रहते हुये दुगनी लागत में उनके समर्थक भाजपा ठेकेदारों ने घटिया बनायीं थी। इनमें से एक पहली सड़क तो बन गयी है लेकिन जुलूस मार्ग अभी भी नहीं बनी है जबकि दशहरा का जुलूस तो इस साल का भी निकल गया है। सियासी हल्कों में यह चर्चा है कि आखिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष महाकौशल के विकास के लिये बनाया था या उनके राजनैतिक व्यक्तित्व के विकास के लिये?
विकास की गंगा कहां गुम हो गयी उगली में?-जिले में विकास की गंगा बहाने वाले भागीरथ,इंका महाबली,प्रदेश के कद्दावर नेता,दादा ठाकुर और विकास पुरुष जैसे ना जाने कितने नामों से जिले के इकलौते इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को पुकारा जाता हैं। लेकिन बीस साल से जिस केवलारी विस क्षेत्र का वे प्रतिनिधित्व कर रहें हैं वहां खुद कितना विकास हुआ है? इसका खुलासा हाल ही में हुआ हैं। वैसे तो हर साल हर विस द्वोत्र में हाई रूकूल और हायर सेकेन्डरी स्कूल खुलते हैं। लेकिन इस साल केवलारी विस द्वोत्र में उगली के पास रुमाल गांव में खुले हायर सेकेन्डरी स्कूल ने राजनैतिक भूचाल ला दिया है। इस घोषणा के बाद से ही उगली में द्वोत्रीय विधायक और विस उपध्यक्ष हरवंश सिंह का विरोध चालू हो गया। वहां गांव के लोगों और इंका नेताओं का भी यह कहना है कि हरवंश सिंह के पहले चुनाव जीतने के बाद से ही उगली में हायर सेकेन्डरी स्कूल खोलने की मांग की जा रही थी। यह मांग अभी तक पूरी नहीं हो पायी है जबकि उससे छोटे गांव रुमाल में हायर सेकेन्डरी स्कूल खुल गया। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सितम्बर माह में ही शिक्षक दिवस के मौके पर क्षेत्रीय विधायक हरवंश सिंह ने रुमाल गांव में ही शिक्षकों के सम्मान का आयोजन किया था। इस घोषणा से उगली गांव में आक्रोश पैदा हो गया और विधायक के आगमन पर पुतला जलाने की घोषणा कर दी गयी। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि हरवंश सिंह कांग्रेस के दिग्विजय मंत्री मंड़ल में दस साल तक एक ताकतवर मंत्री के रूप में रहें हैं। वर्तमान में भाजपा के राज में भी वे लाल बत्तीधारी विस उपाध्यक्ष के पद पर विराजमान हैं। इन सब कारणों से जो विरोध उपजा उसे येन केन प्रकारेण हरवंश सिंह ने फिलहाल तो शांत कर लिया और उनका पुतला बनने के बाद भी जल नहीं पाया। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि पिछले चुनाव में उनका मुकाबला करने वाले भाजपा प्रत्याशी डॉ. ढ़ासिंह बिसेन भी इन दिनों प्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष बन कर लाल बत्ती पर सवार कबीना मंत्री के दर्जे के साथ केवलारी क्षेत्र में ही घूम रहें हैं। लेकिन 2013 में होने वाले विस चुनाव के पहले उपजे इस विरोध ने इंका विधायक हरवंश सिंह को चौकन्ना कर दिया हैं और अब वे डेमेज कंट्रोल करने के उपाय तलाशने में जुट गयें हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि इस विरोध की खबर सुनकर हरवंश ने अपने दो सिपहसालारों को भी खूब खरी खोटी सुनायी है जबकि इसमें उनका कोई दोष भी नही था। अब चुनाव तक वे इस विरोध को कैसे और कितना शांत कर पायेंगें? यह तो अभी भविष्य की गर्त में ही हैं। 
जिला भाजपा अध्यक्ष को लेकर अटकलें हुयी तेज-इन दिनों जिले में भाजपा के चुनावों को लेकर राजनैतिक हलचल जारी हैं। हालांकि आलकमान के निर्देशानुसार भाजपा में चुनाव की जगह आम सहमति से चयन होने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। मंड़लों के चुनावों में तो कोई खास उलट फेर होने की संभावना नहीं हैं। अधिकांश मंड़लों में अध्यक्ष पद पर पुराने चेहरों के बने रहने की ही संभावना हैं। जिला अध्यक्ष पद को लेकर सर्वाधिक चर्चे हो रहे हैं। जिले में भाजपा के तीन नेताओं के इर्द गिर्द ही यह चयन प्रक्रिया घूम रही हैं। इनमें डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर शामिल हैं। वैसे तो अध्यक्ष पद के लिये आधा दर्जन से ज्यादा नाम शामिल हैं जिनमें वर्तमान अध्यक्ष सुजीत जैन के अलाव पूर्व अध्यक्ष वेदसिंह ठाकुर एवं सुदर्शन बाझल,सुदामा गुप्ता, भुवनलाल अवधिया,प्रेम तिवारी,अशोक टेकाम आदि शामिल हैं। नरेश दिवाकर के मामले में कहा जा रहा है कि वे अपनी तरफ से सुजीत को अध्यक्ष बनाने की कोशिश तो नहीं करेंगें लेकिन यदि आम सहमति बनती दिखी तो वे विरोध भी शायद ना करें। वैसे उनकी ओर से सुदर्शन बाझल का नाम आगे किया जा सकता हैं। यदि आदिवासी अध्यक्ष बनाने की बात हुयी तो वे अशोक टेकाम के नाम को आगे कर सकते हैं। डॉ. बिसेन खुले तौर पर कुछ बोल नहीं रहें हैं लेकिन सुजीत से उन्हें भी कोई  तकलीफ नहीं हैं। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं। जिले के दोनों आदिवासी विधायक शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले की विशेष रुचि अपने क्षेत्रों के मंड़ल अध्यक्षों तक ज्यादा केन्द्रित हैं। इस सबके बावजूद भी यह माना जा रहा हैं प्रदेश स्तर पर जिसके नाम पर आम सहमति बन जायेगी उसके सर पर ही ताज पहनाया जायेगा।”मुसाफिर”  

Monday, October 22, 2012



अजय सिंह को विस उपाध्यक्ष और हरवंश सिंह को प्रदेश चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाने के असंतुष्टों के प्रस्ताव से सियसी हल्के हुये भौंचक
 बीते दिनों दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असंतुष्ट विधायकों की केन्द्रीय नेताओं से हुयी मुलाकात अखबारों की सुर्खी बनी हुयी हैं। इन नेताओं ने मिशन 2013 में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिये केन्द्रीय नेताओं एक पांच सूत्रीय र्फामूला सुझाया हैं। अखबारों में दावा किया जा रहा हैं कि यह मुहिम प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेश जोशी के नेतृत्व में चलायी जा रही हैं जिसमें सिंधिया समर्थक गुट शामिल हैं। इस अभियान से यह चर्चा जोर पकड़ गयी हैं कि अभी से मुख्यमंत्री बनने की बिसात बिछना चालू हो गयी हैं। इंकाई राजनीति को जानने वालों का दावा है कि महेश जोशी की हरवंश सिंह के बीच  सालों से तना तनी चल रही हैं। राजनैतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि हरवंश-शिवराज सांठ गांठ के आरोपों के चलते यह मुहिम फेल भी हो सकती हैं। हाल ही में संविधान में हुये संशोधन ाके लेकर जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन खासे उत्साहित हें कि गड़करी की भांति उन्हें भी लगातार दूसरी पारी खेलने को मिल सकती हैं। सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायकों नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया को अन्य जिलों का चुनाव प्रभारी बनाने को लेकर भी तरह तरह की चर्चायें जारी हैं। पिछले विस चुनाव में गौगपा उम्मीदवार के रूप में 39 हजार वोट लेने वाली इंका नेत्री एवं जनपद अध्यक्ष राजेश्वरी उइके ने आगामी चुनाव में कांग्रेस से उम्मीदवार बनने के लिये अपनी दावेदारी ठोंक दी हैं।
जिले मे चर्चा है प्रदेश इंका असंतोष की-प्रदेश कांग्रेस में चल रहे उठा पटक के दौर की जिले के राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चा जारी हैं। बीते दिनों दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर असंतुष्ट विधायकों की केन्द्रीय नेताओं से हुयी मुलाकात अखबारों की सुर्खी बनी हुयी हैं। इन नेताओं ने मिशन 2013 में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिये केन्द्रीय नेताओं एक र्फामूला सुझाया हैं। इस र्फामूले तहत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया को केन्द्रीय मंत्री बनाने, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाने, वरिष्ठ आदिवासी विधायक बिसाहूलाल सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाने और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को प्रदेश चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया गया हैं। अखबारों में दावा किया जा रहा हैं कि यह मुहिम प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेश जोशी के नेतृत्व में चलायी जा रही हैं जिसमें सिंधिया समर्थक गुट शामिल हैं। इस अभियान से यह चर्चा जोर पकड़ गयी हैं कि अभी से मुख्यमंत्री बनने की बिसात बिछना चालू हो गयी हैं जबकि आज इस बात कीे कोई गारंटी नहीं हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन ही जायेगी। गुटबाजी के लिये मशहूर मध्यप्रदेश में जब तक कांग्रेस के सभी गुटों को आला कमान पूरी सख्ती के साथ एक जुट होकर कांग्रेस को जिताने के लिये लाम बंद नहीं करेगा तब तक कांग्रेंस की संभावनायें प्रबल नहीं बन सकती हैं। और ऐसा हो पायेगा? यह कहना भी अभी संभव नहीं दिख पा रहा हैं। चूंकि इस अभियान में दिये गयेसुझावों में से एक हरवंश सिंह को प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष बनाने का भी है इसलिये जिले के राजनैतिक हल्कों में बन रहे इस नये राजनैतिक समीकरण का विश्लेषण भी किया जा रहा हैं। इंकाई राजनीति को जानने वालों का दावा है कि महेश जोशी की हरवंश सिंह के बीच  सालों से तना तनी चल रही हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में चलाये जा रहे अभियान में प्रदेश चुनाव समिति के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद के लिये उनका नाम कैसे शामिल हो गया। जानकार सूत्रों का दावा हैं कि विधायकों के माफीनामे के कांड़ के बाद दिग्गी खेमा हरवंशसिंह से खासा नाराज हैं। इसका खुलासा भी बीते दिनों जिले के कई इंका नेताओं ने देखा भी हैं। इसको भांपते हुये हरवंश सिंह ने एक सोची समझी रणनीति के तहत कमलनाथ और दिग्गी खेमे से परे हट कर सिधिंया खेमे की ओर अपने कदम बढ़ा लिय हैं। परिसीमन समिति में इंका सांसदों में सिधिया और विधायक हरवंश सिंह सदस्य थे। इस दौरान बने संबंधों के चलते ही उन्होंने निकटता बढ़ायी और चार साल तक विपक्ष की सरकार में भी लाल बत्ती का सुख भोगने के बाद अब चुनाव समिति का अध्यक्ष बन कर मिशन 2013 में तुरुप के पत्ते बनने का प्रयास चालू कर दिया हैं। इस र्फामूले की एक विशेषता और यह हैं कि मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार अजय सिंह करे विस उपाध्यक्ष के संवैधानिक पद बिठाने और दूसरंे प्रबल दावेदार भूरिया को केन्द्र में भेजने की जो योजना हैं वह  भी  एक सोची समझी कूटनीतिक चाल कही जा रही  हैं। हरवंश सिंह यह बात भी भली भांति जानते है कि विस उपाध्यक्ष रहते हुये प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में भी वे सिर्फ विस अध्यक्ष ही बन सकते हैं। इस रास्ते से मुख्यमंत्री बनना संभव नहीं हैं। इसीलिये प्रदेश की राजनैतिक शतरंज में यह बिसात बिछायी गयी हैं। इंकाई हल्कों में यह भी चर्चा है कि कमलनाथ और दिग्गी राजा लंबे समय से हरवंश सिंह की राजनैतिक फितरतों को भली भांति जानते हैं जबकि सिंधिंया इससे उतने वाकिफ नहीं हैं। फिलहाल तो आला कमान ने डांट डपट कर असंतुष्टों को खाली हाथ लौटा दिया हैं लेकिन बताया जा रहा हैं कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात के विस चुनावों के बाद यह मुहिम एक बार फिर नये सिरे से चालू करने की योजना बनायी जा रही हैं। लेकिन राजनैतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि हरवंश-शिवराज सांठ गांठ के आरोपों के चलते यह मुहिम फेल भी हो सकती हैं।
भाजपा में क्या दूसरी पारी खेल पायेंगें सुजीत?-प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के संगठनात्मक चुनावों को लेकर इन दिनों खासी उत्सुकता बनी हुयी हैं। हाल ही में संविधान में हुये संशोधन ाके लेकर जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन खासे उत्साहित हें कि गड़करी की भांति उन्हें भी लगातार दूसरी पारी खेलने को मिल सकती हैं। सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायकों नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया को अन्य जिलों का चुनाव प्रभारी बनाने को लेकर भी तरह तरह की चर्चायें जारी हैं। संगठनात्मक चुनाव, सहकारिता के चुनाव और अगली विधानसभा टिकिट लो लेकर कुछ भाजपा नेताओं की डिनर डिप्लोमेसी की भी भाजपायी खेमे में खासी चर्चा हें।  जिले में कई गुटों में बंटी भाजपा में प्रदेश नेतृत्व कैसे तालमेल बिठायेगा और किसकी झोली मे क्या आयेगा? इसे लेकर तरह तरह के कयास लगाये जा रहें हैं। वर्तमान जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन के कार्यकाल में हुये एक मात्र लखदौन नगर पंचायत के चुनाव में भाजपा की हुयी करारी हार को उनके विरोधी नेता हथियार बनाने की फिराक में हैं। इसमें वे कहां तक कामयाब होते हैं? इसका खुलासा तो चुनावों के बाद ही हो पायेगा। 
इंका में लखनादौन विस से राजेश्वरी ने किया दावा -कभी कांग्रेस का मजबूत किला रही लखनादौन विस क्षेत्र में मिशन 2013 को लेकर अभी से हलचल चालू हो गयी हैं। पिछला चुनाव गौगपा से लड़कर 30 हजार 8 सौ 57 वोट लेने वाली राजेश्वरी उइके अब कांग्रेस में आकर वर्तमान में लखनादौन जनपद पंचायत की अध्यक्ष हैं। पिछले चुनाव में इंका प्रत्याशी पूर्व विधायक बेनी परते को 41211 तथा चुनाव जीतने वाली भाजपा की शशि ठाकुर को 46209 वोट मिले थे। आजादी के बाद से इस क्षेत्र में कभी ना हारने वाली कांग्रेस को 2003 के चुनाव में शशि ठाकुर ने ही पहली हराया था और भाजपा का परचम फहराया था। हाल ही में यह समाचार सियासी हलकों में चर्चित रहा कि लखनादौन क्षेत्र के 25 हजार आदिवासियों ने हस्ताक्षर करके राजेश्वरी उइके को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की गुहार आलाकमान से की हैं। इस पत्र में यह लिखा गया हैं कि राजेश्वनी उइके ही भाजपा से इस क्षेत्र को वापस कांग्रेस को दिला सकतीं हैं। अब इसे क्या कहा जाये कि इंका नेता हरवंश की राजनैतिक चालों एवं उनके समर्थकों द्वारा की गयी हरकतों के चलते ही कांग्रेस का यह किला धूल धूसरित हो गया और हरवंश के समर्थक ही इस किले पर फिर से कांग्रेस का परचम फहराने का दावा कर रहें हैं। इतने पहले चालू हुयी राजनैतिक गतिविधियों को लेकर सियासी हल्कों में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा हैं। उल्लेखनीय हैं कि हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह के परिसीमन के बाद समाप्त हो गयें घंसौर विस क्षेत्र का काफी बड़ा हिस्सा भी अब लखनादौन क्षेत्र में शामिल हो गया हैं।“मुसाफिर” 

Monday, October 1, 2012


शिवनगरी का आखिर किस मंुह से जनदर्शन करते या जनता को दर्शन देते शिवराज 
एक भी घोषणा नहीं हुयी थी पूरीः अन्य जिलों की तरह पूरे पेज के विज्ञापन में क्या छपता?
सिवनी। पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगभग तीन सप्ताह तक जनदर्शन का कार्यक्रम रखा था। इसके तहत हर जिले में जब वो जाते  थे तो जन संपर्क विभाग द्वारा स्थानीय एवं क्षेंत्रीय अखबारों में पूरे पूरे पेज के विज्ञापन प्रकाशित कराये जाते थे जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा जिले में की गयी घोषणाओं और उनके पूरे होने का जिक्र होता था। बताया जाता हैं कि इसके लिये जिला प्रशासन से घोषणाओं के बारे में पूरी जानकारी संकलित की जाती थी। 
शिवराज सिंह चौहाने ने मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले में सात बार यात्रायें की हैं। इस दौरान उन्होंने छोटी बड़ी  कई घोषणाये करके  ना केवल जनता की वरन मंच पर बैठे जनप्रतिनिधियों की भी खूब तालियां बटोरी थी। इनमें प्रमुख मेडिकल कालेज, इंजीनियरिंग एवं कृषि महाविद्यालय,फोर लेन,पेंच का पानी सिवनी लाने,सिवनी को प्रदेश का सबसे सुंदर शहर बनाने,दलसागर को ऐसा सजायेंगें कि मेहमान गर्व कर सकें,नरसिंग कॉलेज खोेलने,केवलारी और छपारा को नगर पंचायत का दर्जा देने,पलारी को उप तहसील बनाने, कान्हीवाड़ा को पूर्ण तहसील एवं विकास खंड़ बनाने और कांचना मंड़ी जलाशय के लिये 2008 में 36 करोड़ रु. स्वीकृत करने सहित अन्य कई छोटी घोषणाये भी शामिल हैं। 
उक्त घोषणाओं में सिर्फ दलसागर तालाब के मामले में जरूर कुछ काम हुआ हैं वह भी केन्द्र सरकार की बी.आर.जी.एफ. योजना के तहत हुआ हैं। शेष सभी घोषणायें सिर्फ घोषणायें ही बन कर रह गयीं हैं।
लेकिन इसके लिये सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं वरन जिले के वे जन प्रतिनिधि भी दोषी हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र के लिये होने वाली घोषणाओं पर ताली तो खूब बजायी लेकिन मुख्यमंत्री के पीछे नहीं पड़े कि उन्हें पूरा किया जायें। ऐसे हालात में शिवराज शिव की नगरी सिवनी में जनदर्शन करने या जनता को दर्शन देने के लिये भला कैसे और किस मुंह से आ सकते थे?


जिसके खिलाफ आंदोलन उससे ही 
मदद की मांग? वाह क्या बात है .......
सिवनी। कभी आपने यह सुना है कि जिसके खिलाफ आंदोलन किया जाये उससे ही आंदोलन के खर्च की मांग की जाये? और कहीं कभी भी यह हुआ हो या नहीं लेकिन सिवनी में ऐसा एक वाकया होने की इन दिनो शहर में चर्चा गर्म हैं। बताया जा रहा है कि नगर के वी.आई.पी. जोन बारापत्थर में स्थित केन्द्र सरकार के एक कार्यालय प्रमुख से बुद्धिबल के नाम पर जनहित की आड़ में राजनीति करने वाले एक नेता ने कुछ ऐसी ही मांग कर डाली थी। उनका तर्क यह था कि जब वे आंदोलन करते हैं तभी तो केन्द्र सरकार आपके लिये पैसा स्वीकृत्त करता हैं। लेकिन जब कार्यालय प्रमुख ने यह मांग पूरी करने से मना कर दिया तो उससे बहुत हुज्जत भी की गयी। बताया तो यहां तक जा रहा हैं कि जब यह मांग पूरी नहीं हुयी तो कार्यालय प्रमुख के उच्चाधिकारियों से उसकी शिकायत भी कर दी गयी हैं। जनहित की आड़ में स्वहित की राजनीति करने वाले ये नेता ऐसा भी कारनामा कर दिखायेंगें इसकी लोगों को उम्मीद नहीं थी। लोग तो यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि ऐसा नायाब नुस्खा  तो कोई बुद्धिमान ही ढ़ूंढ़कर ला सकता हैं।

पुराने पाप धोने की भी मांग की जाये और फिर आभार भी व्यक्त करें तो भला नरेश को क्यों ना पसंद आयेगा? 
पाप धोने में भी आभार लेने की तकनीक जिले की राजनीति में ईजाद कर ली गयी हैं।भाजपा की तत्कालीन नपा अध्यक्ष पार्वती जंघेला के कार्यकाल में दुगनी कीमत पर तीन घटिया सड़कें तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर के कार्यकाल में बनायीं गयीं थीं। इसकी शिकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने राज्य सरकार से की थी। प्रदेश की भाजपा सराकर ने पार्वती जंघेला सहित दो सी.एम.ओ. पर 9 लाख से अधिक की रिकवरी निकाली गयी थी जो कि आज तक वसूल नहीं की जा सकी हैं। इन सड़कों को फिर से बनवाने में पुराने पाप धोने में भी आभार प्राप्त करने की उपरोक्त कला का बखूबी प्रर्दशन किया गया। जनता जनार्दन यदि किसी नेता या कुछ नेताओं को शूरवीर मान लें और वाकयी में वे वीर भी ना हों तो भला उन नेताओं का क्या दोष है? दोषी तो जनता जर्नादन ही कहलायेगी जो ऐसे नेताओं को अपना प्रतिनिधि बनाते रहती हैं। मुस्लिम समाज मे हज यात्रा सबसे पाक यात्रा मानी जाती हैं। आज से दो साल पहले अचानक ही सिवनी,छिंदवाड़ा,बालाघाट और मंड़ला जिले के हज यात्रियों को नागपुर के बजाय भोपाल से उड़ान भरने का आदेश जारी हो गया। सन 2010 में चारों जिलों की हज कमेटियों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। अब जब फिर नागपुर से ही जाने का निर्णय हुआ तो श्रेय लेने का सियासी खेल भी खूब चला और कांग्रेस और भाजपा ने भी इसमें पूरी कवायत की हैं। इसेस तमाम सवाल पैदा हो गयें हैं जिनका जवाब यदि हम खुद तलाश करें तो सारे खेल का खुलास हो जायेगा।  
पुराने पाप धोने में भी मिलने लगा आभार-पाप      धोने में भी आभार लेने की तकनीक जिले की राजनीति में ईजाद कर ली गयी हैं। इसके लिये पहले पाप धोने की जनप्रतिनिधयों से बाकायदा अखबारों के माध्यम से मांग करानी पड़ती हैं। फिर इसकी स्वीकृति देकर अपना पुराना पाप धोया जाता हैं और फिर मांग करने वालों से अखबार में ही आभार व्यक्त कराया जाता हैं और अपना नाम विनाश पुरूष से अलग कर विकास पुरूष के रूप मे दर्ज करा लिया जाता हैं। चौंकिये नही यह वाकया कहीं और का नहीं वरन अपने सिवनी शहर का ही हैं। पाठकों को याद होगा कि भाजपा की तत्कालीन नपा अध्यक्ष पार्वती जंघेला के कार्यकाल में दुगनी कीमत पर तीन घटिया सड़कें तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर के कार्यकाल में बनायीं गयीं थीं। इसकी शिकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने राज्य सरकार से की थी। तीन साल चली इस लड़ाई के बाद प्रदेश की भाजपा सराकर ने पार्वती जंघेला सहित दो सी.एम.ओ. पर 9 लाख से अधिक की रिकवरी निकाली गयी थी जो कि आज तक वसूल नहीं की जा सकी हैं। यह भी आरोप था कि ये घटिया सड़के तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर के ही विश्वस्त भाजपा ठेकेदारों ने बनायीं थी। जैसे ही नरेश दिवाकर को सरकार ने महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाकर लाल बत्तीधारी बनाया वैसे ही वे अपने पुराने पाप धोने में लग गये। पहले सर्किट हाउस से एस.पी. बंगले तक की घटिया सड़क को बनवाया गया और अब दूसरी सड़क अनिल सिंघानिया के मकान से मठ मंदिर चौराहे तक की सड़क की स्वीकृति दी गयी हैं। इसमें पुराने पाप धोने में भी आभार प्राप्त करने की उपरोक्त कला का बखूबी प्रर्दशन किया गया। यहां एक बात और विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि इन दोनों ही सड़कों को बनाने के लिये स्वीकृत की गयी राशि भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी वाली पालिका को ना देकर लोक निर्माण विभाग को देकर यह संदेश देने की कोशिश भी गयी हैं कि घटिया सड़क  बनाने में पालिका ही जवाबदार थी और इसमें किसी और का कोई रोल नहीं था। जबकि मांग और आभार दोनों ही पालिका के पदाधिकारी और पार्षदों ने ही की थी और नरेश दिवाकर को विकास पुरूष बनने का मौका दिलाया था। इसे ही तो राजनीति में कूटनीति कहा जाता हैं।
हज यात्रा जैसे पाक काम में भी खूब हुआ सियासी खेल-जनता जनार्दन यदि किसी नेता या कुछ नेताओं को शूरवीर मान लें और वाकयी में वे वीर भी ना हों तो भला उसमें उन नेताओं का क्या दोष है? दोषी तो जनता जर्नादन ही कहलायेगी जो ऐसे नेताओं को अपना प्रतिनिधि बनाते रहती हैं। मुस्लिम समाज मे हज यात्रा सबसे पाक यात्रा मानी जाती हैं। आज से दो साल पहले अचानक ही सिवनी,छिंदवाड़ा,बालाघाट और मंड़ला जिले के हज यात्रियों को नागपुर के बजाय भोपाल से उड़ान भरने का आदेश जारी हो गया। सन 2010 में चारों जिलों की हज कमेटियों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इस संबंध में जानकार लोगों का कहना हैं कि प्रदेश हज कमेटी और प्रदेश सरकार की अनुशंसा पर सेन्ट्रल हज कमेटी और केन्द्र सरकार हज यात्रियों की उड़ान भरने के लिये एरोड्रम का निर्धारण करती हैं। पिछले साल भी इसका विरोध हुआ और इस साल भी जारी था। पहले तो यह खबर आयी कि चारों जिले के हज यात्रियों अब पहले की तरह नागपुर से हज यात्रा पर जायेंगें। इसके लिये आभार भी व्यक्त कर दिया गया। लेकिन जब आदेश आये तो केवल छिंदवाड़ा जिले के हज यात्रियों के लिये ही नागपुर   किया गया लेकिन बाकी तीनों जिलों को छोड़ दिया गया। यह हल्ला होते ही इन तीन जिलो में खलबली मच गयी। जब चारों जिलो का एक साथ नागपुर से भोपाल परिवर्तन किया गया था तो फिर केवल छिंदवाड़ा को ही यह       सुविधा फिर से क्यों दी गयी और बाकी तीन जिलों को क्यों छोड़ दिया गया? मुस्लिम समाज के नेताओं के अलावा और कांग्रेस तथा भाजपा ने भी परंपरानुसार एक दूसरे पर आरोप लगाते हुये इस मामले में पहल करना शुरू कर दिया। इसी बीच मुस्लिम सामाजिक संस्था अलफलाह तंजीम के दो नौजवानों तनवीर अहमद और रिजवान खॉन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। याचिका दायर होने के चंद दिनों बाद ही इन तीनों जिलों के हज यात्रियों को भी नागपुर से हज यात्रा प्रारंभ करने के आदेश जारी हो गये। इसकी खबर लगते ही हज जस्ी पाक यात्रा में सियासत का दौर शुरू हो गया। कांग्रेस की ओर से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह का आभार व्यक्त किया गया तो जिला भाजपा अल्प सयंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शफीक खॉन ने विज्ञप्ति जारी कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, छिंदवाड़ा जिले के विधायक प्रेम नारायण ठाकुर, विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष रनेश दिवाकर एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन का आभार व्यक्त कर डाला। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज की ओंर से याचिका दर्ज करने वालों की प्रशंसा कर डाली। इन सब भारी भरकम लोगों का आभार व्यक्त करने से एक सवाल यह पैदा हो गया हैं कि क्या ये सब वास्तव में भारी भरकम हैं? यदि हैं तो इन सबको यह काम कराने में दो साल का समय क्यों लग गया? जिन कांग्रेस भाजपा नेताओं की नूरा कुश्ती के समाचार सियासी हल्कों में जब देखो तब तैरते दिखायी देते हैं उन्हें भी यह करने में क्यों इतना समय लग गया? इन सब भारी भरकम नेताओं के रहते हुये भी इन चार जिलों के हज यात्रियों को क्या दो साल तक बिना वजह परेशानी का भार नहीं छेलना पड़ा? और यदि भार झेलना पड़ा तो भला अब आभार किस बात का?क्या चार जिलों में से तीन जिलों को पहले छोड़ देना उचित था? प्रदेश  के इन वार जिलो को नागपुर के बदलेे भोपाल से भेजने का पहले लिया गया निर्णय अब गलत साबित नहीं हो गया है? यदि हां तो इस निर्णय को किसने और क्यों लिया था? क्या यह सब भोपाल में हज यात्रियों की खिदमत के लिये हज हाउस बनाने के लिये किया गया था? क्या यह सारी सियासी कवायत अगले साल होने वाले चुनावों को ध्यान में रख कर की गयी है? इन सारे ावालों का जवाब यदि बिना किसी सियासी भेदभाव के हम खुद तलाश करें तो सारा खेल का खुद ब खुद खुलासा हो जायेगा। अब यह तो हमें खुद ही सोचना पड़ेगा कि जिन्हें हम शूर वाीर मान कर अपना प्रतिनिधि चुनते आ रहें हैं वे कितने शूरवीर हैं?”मुसाफिर”