Monday, June 24, 2013

कमलनाथ को काले झंड़े दिखाने वाले जनमंच ने शिवराज के आने पर विज्ञप्ति जारी कर लगायी गुहार
जनमंच ने कमलनाथ के आगमन पर काले झडे़ं दिखायश्े जबकि शिवराज सिंह के आगमन पर केवल विज्ञप्ति जारी अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री कर ली। इससे क्या यह प्रमाणित नहीं होता हैं कि जनमंच पर भाजपा की बी टीम बन कर आरोप गलत नहीं हैं? शायद इसीलिये जनमंच से जन दूर हो गया है और केवल मंच ही शेष रह गया है। जिले के केवलारी विस क्षेत्र से डॉ. वसंत तिवारी की दावेदारी के समचार अखबारों में सुर्खियां बने हुये हैं। अपने दावे को पुख्ता बताने के लिये डॉ. तिवारी के समर्थन में प्रकाशित होने वाले समाचारों में सन 1993 के टिकिट वितरण के मामले को उछाला जा रहा हैं। बताया जा रहा है कि तत्कालीन सांसद कु. विमला वर्मा ने अपने कर्म क्षेत्र केवलारी को छोड़कर अपने कोटे की टिकिट सिवनी से आशुतोष वर्मा को दिलवा दी। लेकिन यह तथ्य सही नहीं हैं। केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के दौरे के बाद सिवनी विस क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडने वाले मुनमुन राय का बयान अखबारों में सुर्खियों में रहा कि उन्हें किसी नाथ की जरूरत नहीं हैं उनके साथ 30 हजार मतदाताओं का साथ हैं। यह जगजाहिर से उन्हें भाजपा और इंका के असंतुष्टों ने खुले आम मदद की थी। इंका के क्षत्रप का तो उन्हें खुला समर्थन प्राप्त था। 
नाथ के लिये काले झंड़े शिवराज के लिये सिर्फ विज्ञप्ति..वाह जनमंच-जिले के नागरिकों द्वारा फोर लेन के संघर्ष के लिये जनमंच नामक गैर राजनैतिक संगठन का गठन किया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सिवनी का मामला दर्ज हो जाने के बाद इसके चंद कर्त्ता धर्त्ताओं ने इसके राजनीतिकरण करने का प्रयास प्रारंभ कर दिया था। कार्यक्रमों में जहां एक तरफ कांग्रेस नेताओं का विरोध तो किया जाता था लेकिन भाजपा के नेताओं पर निशाना साधने से परहेज किया जाने लगा था। इस कारण धीरे धीरे कई प्रमुख लोगों ने इससे किनारा करना चालू कर दिया था। धीरे धीरे यह जन धारणा बनने लगी थी कि जनमंच भाजपा की टीम बन गयी है। एक तरफ तो केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ पर आरोप लगा कि उन्होंने फोर लेन में व्यवधान डाले तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी स्थानीय मिशन स्कूल ग्राउंड़ में यह सिंह गर्जना की थी कि सूरज चाहे पूरब की जगह पश्चिम से ऊगने लगे लेकिन फोर लेन सिवनी से ही जायेगी। इतना ही नहीं जनमंच के प्रतिनधिमंड़ल को भी शिवराज सिंह ने दो बार यह आश्वासन दिया था कि वो जनमंच का प्रतिनधि मंड़ल अपने साथ दिल्ली ले जायेंगें और प्रधानमंत्री सहित अन्य केन्द्रीय मंत्रियों से मिलवा कर समस्या को दूर करने का प्रयास करेंगें। यह बात जनमंच के संजय तिवारी ने खुद अखबारों में विज्ञप्तियां प्रकाशित कर छपवायी थी। हाल ही 13 जून को केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का सिवनी आगमन हुआ था। इस दौरान जनमंच ने उनको काले झंड़े दिखाकर अपना विरोध प्रगट किया था। इसके ठीक  9 दिन बाद जब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सिवनी आये तो जनमंच ने उनसे विज्ञप्ति जारी करके गुहार लगाना ही उचित ही समझा। जनमंच ने उनको काले झंड़े दिखाना जरूरी नहीं समझा। जनमंच के इस दोहरे चरित्र से यह स्पष्ट हो गया है कि जनमंच अब एक गैर राजनैतिक संगठन नहीं रह गया हैं। होना तो यह था कि शिवराज को भी काले झंड़े दिखाये जाते और उनकी कई अधूरी घोषणाओं के पूरे ना होने पर उनका विरोध किया जाता। इन तमाम बातो ऐसा लगना स्वभाविक ही है कि जनमंच अब भाजपा की बी टीम के रूप में काम करने वाला मंच बन कर रह गया है जिससे जन दूर हो गये है।
केवलारी से वसंत का दवाःतथ्यों को तोड़ मरोड़ कर परोसा -जिले के केवलारी विस क्षेत्र से डॉ. वसंत तिवारी की दावेदारी के समचार अखबारों में सुर्खियां बने हुये हैं। अपने दावे को पुख्ता बताने के लिये डॉ. तिवारी के समर्थन में प्रकाशित होने वाले समाचारों में सन 1993 के टिकिट वितरण के मामले को उछाला जा रहा हैं। इसमें कुछ तथ्यों को ऐसे तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है जिसमें जिले की वरिष्ठ इंका नेत्री कु. विमला वर्मा कां इंगित कर डॉ. तिवारी के त्याग को प्रचारित किया जा रहा हैं। बताया जा रहा है कि तत्कालीन सांसद कु. विमला वर्मा ने अपने कर्म क्षेत्र केवलारी को छोड़कर अपने कोटे की टिकिट सिवनी से आशुतोष वर्मा को दिलवा दी। लेकिन यह तथ्य सही नहीं हैं। सन 1990 में सिवनी क्षेत्र से स्व. हरवंश सिंह चुनाव लड़े थे और वे 6086 वोटों से चुनाव हार गये थे। कांग्रेस ने यह नीति बनायी थी कि पिछला चुनाव पांच हजार से अधिक वोटों से हारने वालों को टिकिट नहीं देगी। स्व. हरवंश सिंह उन दिनों प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री थे और वे ये बात जानते थे कि उनको सिवनी से टिकिट नहीं मिलेगी। इसीलिये उन्होंने कु विमला वर्मा के सांसद बन जाने के बाद केवलारी जैसे सुरक्षित क्षेत्र से टिकिट पाने की रणनीति बनायी थी। उल्लेखनीय है कि 1967 से लेकर 1985 तक कांग्रेस से विमला वर्मा ही चुनाव जीत रहीं थीं। 1990 में वे चुनाव हारीं थीं। अपनी रणनीति के तहत स्व. हरवंश सिंह ने जब जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज से बर्रा में भागवत करायी थी तब से ही उन्होंने केवलारी के केन्द्र में रख कर काम करना चालू कर दिया था। सांसद के रूप में विमला वर्मा ने केवलारी क्षेत्र से जिन तीन नामों का पैनल दिया था उसमें डॉ. वसंत तिवारी,स्व. ठा. रामनारायण सिंह और दादू राघवेन्द्रनाथ सिंह के नाम शामिल थे।लेकिन प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री होने के नाते अपनी राजनैतिक रसूख के साथ उन्होंनें स्वामी जी का भी आर्शीवाद प्राप्त कर लिया था जो कि उनकी टिकिट में निर्णायक साबित हो गया था। इन सब बातों को डॉ. वसंत तिवारी भी जानते हैं। लेकिन एक सच्चे कांग्रेसी के रूप में उन्होंनें केवलारी में कांग्रेस का काम किया और बाद में वे जनपद अध्यक्ष भी बने। अब वे यदि टिकिट की दावेदारी कर रहें हैं तो अपना दावा खें इसमें कोई बुरायी नहीं हैं लेकिन तथ्यों को तोड़ने मरोड़ने वाले कोई तथ्य यदि अखबारों में प्रकाशित होते है तो उनका खंड़न करने का साहस भी उन्हें दिखाना चाहिये। 
कोई नाथ की चाह नहीं मुनमुन को-केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के दौरे के बाद सिवनी विस क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडने वाले मुनमुन राय का बयान अखबारों में सुर्खियों में रहा कि उन्हें किसी नाथ की जरूरत नहीं हैं उनके साथ 30 हजार मतदाताओं का साथ हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि ऐसे समाचार आये थे कि उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश हेतु कमलनाथ से प्रयास किया था। इसके संबंध में उन्होंने यह बयान जारी किया है। मुनमुन राय ने 2008 का चुनाव सिवनी से लड़ा था। यह जगजाहिर से उन्हें भाजपा और इंका के असंतुष्टों ने खुले आम मदद की थी। इंका के क्षत्रप का तो उन्हें खुला समर्थन प्राप्त था। उनके तमाम समर्थकों ने सरेआम अपने हाथों में पंजे के बजाय कप बसी थाम ली थी। यह बात अलग है कि कांग्रेस में या भाजपा में किसी के भी खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं हुयी थी। लेकिन कम से कम मुनमुन राय तो इस बात को भली भांति समझते ही है कि उन्हें तीस हजार वोट कैसे और किसके सहारे मिले थे? हालांकि वे इस बार भी सिवनी से चुनाव लड़ने की तैयारी में है लेकिन इस बार उन्हें नये सिरे से रणनीति बनाये बिना सम्मानजनक स्थिति बनाये रखना बहुत ही कठिन होगा। जिले में कांग्रेस का नया परिवेश कितनामजबूत होगा और भाजपा और निर्दलीयों के लिये कितना चुनौतीपूर्ण होगा? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। “मुसाफिर“ 

दर्पण झूठ ना बोले
25 जून 2013 से साभार
फिर ठगे गये शिव की नगरी के वासी शिवराज से
सिवनी। शिव की नगरी सिवनी से ना जाने शिवराज का क्या बैर है कि उनके राज में जिले को कुछ मिला तो नहीं छिन जरूर गया। जिले की लगभग पेंतीस ऐसी घोषणायें है जो आज तक पूरी नहीं हुयीं है। यह भी पहला मौका है कि उनके राज में जिला मंत्री विहीन रहा है। 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में शिव की नगरी सिवनी सबसे ज्यादा नुकसान में रही है। उनका हर दौरा जिले के साथ छलावा ही रहा है। मुख्यमंत्री ने घोषणाओं का तो हर दौरे में अंबार लगा दिया और जिले के भाजपा नेताओं ने उनकी घोषणाओं पर आभार भी खूब व्यक्त किया लेकिन अंततः वे घोषणावीर ही साबित हुये। उनकी ज्यदातर घोषणायें अपने पूरा होने का इंतजार ही कर रहीं है। इसमें यदि यह कहा जाये कि जिले के भाजपा के जनप्रतिनिधि भी बराबरी के दोषी हैं तो कोई गलत बात नहीं होगी। वे भी हर बार उनके आगमन पर नयी नयी मांग तो करतें गये लेकिन पूर्व की घोषणाओं पर अमल के लिये अपने ही मुख्यमंत्री को मजबूर नहीं करा पाये। 
इस दौरे में तो हद ही हो गयी। मुख्यमंत्री ने अपनी ही पूर्व में की गयी अधूरी घोषणाओं को ही एक बार फिर से करने का करतब भी दिखा डाला है। चाहे वह नर्सिंग कॉलेज की हो या फिर फोर लेन की हो। 
फोर लेन के मामले में शिवराज ने सफाई दी कि वे इस मामले में जयराम रमेश से मिल थे। लेकिन उनकी इन मुलाकातों के जितने भी समाचार सूचना प्रकाशन विभाग से जारी हुये उनमें विभिन्न योजनाओं का तो जिक्र था लेकिन सिवनी की फोर लेन का नहीं था। और तो और केन्द्र में लगभग साल भर से जयंती नटराजन वन एवं पर्यावरण मंत्री है जिनका अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने जिक्र तक नही किया। उन्होंने यह भी कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के बीच एक पेंच फंसा हुआ हैं जबकि फोर लेन का मामला नेशनल टाइगर कंजरवेश अर्थारिटी ऑफउ इंड़िया में एन.ओ.सी. के लिये लंबित है। इससे यह साफ जाहिर होता है सिवनी में सिंह गर्जना करने के अलावा मुख्यमंत्री इस मामले में कितने गंभीर है। मेडिकल कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज,संभाग जैसी कई मांगें हैं जिनका कोई समाधान नहीं हुआ है। सिवनी का एक और रिकार्ड शिवराज के नाम दर्ज हो गया हैं। अंतरिम सरकार से लेकर अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि सत्तादल का जिले से विधायक जीता हो और जिले से मंत्रीमंड़ल में कोई मंत्री ना बना हो। एक बार सन 1977 में जरूर जिले से कोई मंत्री नहीं बना था क्योंकि सत्तारूढ़ जनता पार्टी का एक भी विधायक जिले सें जीता नहीं था। जिले की पांचों विस सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के दोनों कार्यकाल के लगभग आठ वर्षों से जिले में चार में तीन भाजपा के विधायक होने के बाद भी किसी को शिवराज ने मंत्री नहीं बनाया। और तो और प्रदेश में जिन सांसदों को विस चुना लड़ाया था उनमें नीता पटेरिया को छोड़कर सभी मंत्री बन गये। हालांकि दो भाजपा नेताओं को लालबत्ती जरूर दी गयी है।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि जब बिना कुछ दिये सांसद,तीन विधायक और नगर पालिका काचुनाव भाजपा जीत जाती हैं तो भला शिवराज शिव की नगरी को कुछ क्यों देंगें?
दर्पण झूठ ना बोले
25 जून 2013 से साभार

Tuesday, June 11, 2013

भाजपा में टिकिट को लेकर मची भारी धमासान विस की चुनावी जंग में पड़ सकती है भारी
कांग्रेस के कद्दावर नेता और केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का 13 जून को आगमन को हो रहा हैं। उनके इस कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश कांग्रेस  से यह भी जानकारी दी गयी है कि प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रति पक्ष अजय सिंह भी आ रहे हैं। जिले के सभी कांग्रेसियों के बीच समन्वय बनाते हुये कार्यक्रम को सफल बनाने के प्रयास किये जा रहें है। जिले के बदले हुय राजनैतिक हालात में कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया और अजय सिंह का यह दौरा कांग्रेसियों में कितनी ऊर्जा का सुचार करता है? इस पर ही कांग्रेस की भावी राजनीति निर्भर करेगी। मिशन 2013 को लेकर जिले में सपा,बसपा और गौगपा की रानजैतिक गतिविधयां भी जोर पकड़ रहीं है। हालांकि इन पार्टियों का जिले में ऐसा वर्चस्व नही है कि वे कोई भी सीट जीत सकें लेकिन चुनावी गणित बिगाड़ने में इनकी अहम भूमिका हो सकती है। राजनैतिक रूप से देखा जाये भाजपा के लिये मिशन 2013 की जंग कोई कठिन नहीं है। चार में से तीन विधायक भाजपा के है और दो नेताओं के पास लाल बत्ती है। नपा अध्यक्ष भी भाजपा का है। लेकिन टिकिट को लेकर भाजपा में मची भारी घमासान ही उसके लिये घातक साबित हो सकती हैं।
कमलनाथ,भूरिया और अजय सिंह का दौरा निर्णायक होगा- इन दिनों कांग्रेस की राजनीति में काफी हल चल मची हुयी हैं। जिले के इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के निधन के बाद यह पहला मौका है कि कांग्रेस में एक राजनैतिक उत्सुकता पैदा हुयी हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता और केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का 13 जून को आगमन को हो रहा हैं। उनके इस कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश कांग्रेस  से यह भी जानकारी दी गयी है कि प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रति पक्ष अजय सिंह भी आ रहे हैं। इसलिये यह कार्यकर्त्ता सम्मेलन के साथ ही परिवर्तन यात्रा के रूप में भी मानी जा रही हैं। पड़ोसी सांसद कमलनाथ ने अपने विश्वस्त अबरार अहमद और पं. राममूर्ति मिश्रा को पर्यवेक्षक बना कर भेजा हैं। छिंदवाड़ा जिला इंका के उपाध्यक्ष रिजवी भी यहां दौरे कर रहें हैं। जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कमलनाथ के विश्वस्त ये नेता स्वयं मीटिंग लेकर तैयारियों का जायजा ले रहें हैं और सभी उन नेताओं से मिल रहें हैं जो पिछले दस पंद्रह सालों से उपेक्षा के चलते घर बैठ गये थे। हालांकि मीडिया में सिवनी लोस क्षेत्र के विलापन,फोर लेन,बड़ी रेल लाइन और संभाग को लेकर नाथ की भूमिका पर सवालिया निशान लगाने वाले समाचार भी प्रकाशित हुये हैं। अब देखना यह है कि इन मुद्दों पर कमलनाथ क्या कार्यवाही करते हैं?
यह अभी भविष्य की गर्त में हैं। इंकाइयों में व्याप्त चर्चा के अनुसार मिशन 2013 और 2014 के लिये कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जो प्रभार तय किये गये हैं उनमें महाकौशल का प्रभार केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ को दिया गया हैं। प्रदेश कांग्रेस ने नव गठित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के बीच विधानसभा वार जो प्रभार सौंपा है उसमे महाकौशल क्षेत्र की विधानसभाओं का प्रभार नाथ समर्थकों को ही दिया गया है। इसी के तहत प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष मो. अबरार अहमद को सिवनी जिले के चारों विस क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया है। इसे दृष्टिगत रखते हुये जिले के सभी कांग्रेसियों के बीच समन्वय बनाते हुये कार्यक्रम को सफल बनाने के प्रयास किये जा रहें है। जिले के बदले हुये राजनैतिक हालात में कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया और अजय सिंह का यह दौरा कांग्रेसियों में कितनी ऊर्जा का सुचार करता है? इस पर ही कांग्रेस की भावी राजनीति निर्भर करेगी।  
सपा,बसपा और गौगपा की गतिविधियंा बढ़ीं- मिशन 2013 को लेकर जिले में सपा,बसपा और गौगपा की रानजैतिक गतिविधयां भी जोर पकड़ रहीं है। हालांकि इन पार्टियों का जिले में ऐसा वर्चस्व नही है कि वे कोई भी सीट जीत सकें लेकिन चुनावी गणित बिगाड़ने में इनकी अहम भूमिका हो सकती है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सपा और बसपा मुस्लिम मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने के प्रयास में है तो वहीं  गौगपा भी आदिवसियों के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित  करने का प्रयास कर रही हैं। वैसे एक बात यह भी सच है कि बहुसंख्यक मुस्लिम और आदिवासी नेता यह नहीं चाहते हैं कि भाजपा चुनाव जीते। लेकिेन चुनाव के दौरान इनके ऐसे रहनुमा पैदा हो जाते है जो कि उनमें से कुछ नेताओं को चुनावी जादूगर यह सब्जबाग दिखा देते हैं कि जीत के समीकरण शत प्रतिशत तुम्हारे ही पक्ष में हैं। इस बहकावे में मुस्लिम और आदिवासी वर्ग के नेता इन पार्टियों से या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में  के रूप में चुनाव लड़ जाते हैं। लेकिन ये उम्मीदवार चुनाव तो नहीं जीतते लेकिन इतने वोट जरूर ले लेते है कि जिससे भाजपा की जीत हो जाती है जो कि इन वर्गों का बहुसंख्यक मतदाता नहीं चाहता है। एक तरह से यह भाजपा की जीत की अघोषित रणनीति बन चुकी है और चुनावी जंग में इसमें रसद भी झोंकी जाती हैं। कांग्रेस के असंतुष्ट इस आग में घी झोंकने के काम से कोई परहेज नहीं करते रहें हैं। इसीलिये कभी कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाला यह जिला आज भाजपा का मजबूत किला बन चुका हैं। 
जिला भाजपा में मची है टिकिट की घमासानं- भाजपा में भी मिशन 2013 को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से तीन विस क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा हैं। जिले के दोनों आदिवासी क्षेत्रों से भाजपा के विधायक के रूप में शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले चुने गये हैं। सिवनी विस सीट से भाजपा की ही नीता पटेरिया विधायक हैं। भाजपा के दो पूर्व विधायकों डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और नरेश दिवचाकर को शिवराज सरकार ने लाल बत्ती दे रखी हैं। सिवनी नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में भाजपा के ही राजेश त्रिवेदी बैठे हैं। इस लिहाज से देखा जाये भाजपा के लिये मिशन 2013 की जंग कोई कठिन नहीं है। लेकिन भाजपा में मची भारी घमासान ही उसके लिये घातक साबित हो सकती हैं। जहां तक दोनों आदिवासी विधायकों शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले की बात है तो कमल के लिये भी टिकिट में अशोक टेकाम आड़े आ सकते हैं। वरना दोनो की टिकिट पक्की समझी जा रही हैं। लेकिन सिवनी को लेकर घमासान मची हुयी हैं। सिवनी के पूर्व विधायक ,मविप्रा एवं जिला भाजपा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर खुद सिवनी से टिकिट के प्रबल दावेदार हैं। नरेश समर्थकों के गणित के अनुसार नीता पटेरिया को केवलारी से लड़ाने का सुझाव है और रहा सवाल डॉ. बिसेन का तो उन्हें बालाघाट संसदीय क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारने की बात कही जा रही हैं। लेकिन प्रदेश भाजपा के सूत्रों का कहना है कि केवलारी से डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को ही लड़ाया जायेगा। यदि ऐसा होता है तो सिवनी से किसी अन्य नेता को टिकिट तभी मिल सकती है जब कि नीता पटेरिया की टिकिट कटे। इस स्थिति में नरेश के अलावा नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी भी टिकिट के दावेदार बन सकते है। राजेश समर्थकों का तर्क है कि नीता की टिकिट काट कर यदि भाजपा ब्राम्हण को टिकिट नहीं देगी तो जिले भर के ब्राम्हण मतदाता नाराज हो जायेंगें जो कि भाजपा के लिये नुकसान दायक होगा। इन हालातों में यदि ज्यादा घमासान मचा तो भाजपा वर्तमान विधायक नीता पटेरिया को ही मैदान में फिर से उतार सकती है। इन परिस्थितियों में भाजपा के चारो प्रत्याशी ही एक बार फिर अपनी किस्मत आजमायेंगें। “मुसाफिर”
दर्पण झूठ ना बोले
11 जून 2013 से साभार
कमलनाथ,भूरिया और अजय सिंह परिवर्तन यात्रा में होंगें शामिल
सिवनी। कांग्रेस के कार्यकर्त्ता सम्मेलन और परिवर्तन यात्रा में शामिल होने केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ,प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का आगमन 13 जून को हो रहा है। 
जिले के इकलौते कांग्रेस विधायक एवं विस उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह के आकस्मिक दुखद निधन के बाद यह पहला बड़ा कार्यक्रम हैं जो सिवनी जिले में हो रहा है। ठा. हरवंश सिंह के जीवन काल में जिले की सारी राजनति उनके इर्द गिर्द की घूमती थी।
जिले के कांग्रेसजनों में इस दौरे को लेकर काफी उत्साह दिखायी दे रहा हैं। जिला कांग्रेस द्वारा आयोजित 5 जून की बैठक के बाद सभी ब्लाक कांग्रेस कमेटियों ने अपनी अपनी बैठकें करके कार्यक्रम को सफल बनाने के प्रयास किये है।
इस कार्यक्रम के लिये प्रदेश कांग्रेस ने भी अपने पर्यवेक्षक के रूप में उपाध्यक्ष एवं जिले के प्रभारी मो. अबरार अहमद एवं जबलपुर के वरिष्ठ इंका नेता राममूर्ति मिश्रा को नियुक्त किया हैं। इसके साथ ही छिंदवाड़ा के जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष जनाब रिजवी भी जिले का सघन दौरा कर रहें हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी,नगर कांग्रेस अध्यक्ष इमरान पटेल एवं प्रदेश प्रतिनिधि राजकुमार पप्पू खुराना सहित सभी कांग्रेस के पदाधिकारी इसे सफल बनाने में जुटे हुये हैं।
इस परिवर्तन यात्रा और कार्यकर्त्ता सम्मेलन से जिले की विकास यात्रा और कांग्रेस की राजनीति में भी परिवर्तन की राजनैतिक विश्लेषकों को अपेक्षा हैं। जानकारों का मानना है कि जिले की बदली हुयी राजनैतिक परिस्थितियों में बदलाव अवश्यंभावी हैं और बदलाव जिले के विकास में सहायक होगा।
अब देखना यह है कि इस सब कवायद से जिले की विकास यात्रा और कांग्रेस की राजनीति में कोई बदलाव आता हैं या नतीजा वही ढाक के तीन पात निकलता है? यह तो अभी भविष्य की गर्त में छिपा हुआ हैं।
फिर टला अटल अभियान
सिवनी। पूरे प्रदेश में चौबीस घंटें बिजली देने के लिये चलाये जा रहा अटल ज्योति अभियान जिले में तीसरी बार फिर टल गया हैं। यह कार्यक्रम बार बार क्यों टल रहा है? इसका जवाब देने को तैयार नहीं हैं। 
ृजानकारों का मानना है कि इसका एक प्रमुख कारण जिला भाजपा की गुटबंदी हैं। लेकिन राजनैतिक विश्लेषकों का यह दावा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिले में आने से इसलिये कतरा रहें है कि उनके द्वारा की गयी 35 घोषणायें अभी तक पूरी नहीं हुयी है। जिसमें फोरलेन और सतपुड़ा संभाग का मामला प्रमुख है। चुनावी साल में मुख्यमंत्री का इस तरह मुह चुराना सियासी हल्कों में चर्चित है। 
 दर्पण झूठ ना बोले
11 जून 2013 से साभार

Monday, June 3, 2013

जिले में भाजपा में ब्राम्हणों और जैनियों को मिल रही प्राथमिकता अन्य लोगों में नाराजगी का करण बन रही है
 विगत 14 मई को जिले के केवलारी क्षेत्र के विधायक और विस उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का आकस्मिक दुखद निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार और त्रयोदशी संस्कार में कांग्रेस और भाजपा के कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त कर परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। पक्ष एवं विपक्ष के नेताओं की उपस्थिति उनके राजनैतिक कद की परिचायक हैं। चुनावी साल में भाजपा की गुटबंदी जिले थमने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश दिवाकर,विधायक नीता पटेरिया और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी का त्रिकोण इन दिनों सियासी हल्कों में चर्चित हैं। हाल ही में हुये प्रदेश कांगेस के फेर बदल में सिवनी जिले के किसी भी नेता कों शामिल नहीं किया गया। और तो और प्रदेश कांग्रेस की महामंत्री गीता सिंह को भी निकाल दिया गया। भाजपा में पंड़ितों और जैनियों को जिले में सालों से मिल रही प्राथमिता के कारण पिछड़ा वर्ग,मुस्लिमों, आदिवासी और हरिजनो के मन में यह भावना घर करते जा रही है कि भाजपा में उनका अपना कोई भविष्य नहीं है। अगले चुनाव के लिये यह शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र तोमर के लिये एक चिंता का विषय बन सकता है।

स्व. हरवंश सिंह को मुसाफिर की श्रृद्धांजलीे- विगत 14 मई को जिले के केवलारी क्षेत्र के विधायक और विस उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का आकस्मिक दुखद निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार और त्रयोदशी संस्कार में कांग्रेस और भाजपा के कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त कर परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। पक्ष एवं विपक्ष के नेताओं की उपस्थिति उनके राजनैतिक कद की परिचायक हैं। जिले की राजनीति में वे लंबे समय से एक मात्र केन्द्र बिन्दु बने हुये थे। चौपाल से भोपाल तक का उनका सफर कई उतार चढ़ाव से भरा हुआ था। ऐसे कद्दावर इंका नेता के चुनावी साल में एका एक निधन से एक रिक्तता आ गयी है जो कैसे भरी जायेगी? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में उत्सुकता बनी हुयी हैं। मुसाफिर स्व. ठा. हरवंश सिंह को अपनी विनम्र श्रृद्धांजली अर्पित करता है तथा परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि वो उन्हें विर शांति प्रदान करे और उनके परिजनो तथा शुभचिंतकों को यह गहन दुख वहन करने की शक्ति प्रदान करें।  
अविश्वास प्रस्ताव बनाम भाजपायी गुटबंदीे-चुनावी साल में भाजपा की गुटबंदी जिले थमने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश दिवाकर,विधायक नीता पटेरिया और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी का त्रिकोण इन दिनों सियासी हल्कों में चर्चित हैं। नीता पटेरिया सिवनी की विधायक हैं। नरेश सिवनी के पूर्व विधायक है और फिर टिकिट की जुगत में हैं। राजेश पालिका अध्यक्ष है और सिवनी से युवा और नये चेहरे के रूप में टिकिट पाना चाह रहें हैं। फिलहाल तो सिवनी सीट भाजपा में खाली नहीं है लेकिन ना जाने क्यों इसे खाली मानकर ही टिकिट की जुगाड़ और इसके लिये राजनैतिक दांव पेंच चालू हो चुके हैं। पिछले दिनों जिला भाजपा कार्यालय में पालिका के भाजपा पार्षदों की बैठक हुयी जिसमें पालिका के कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजिक अकील के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लेकर कलेक्टर के यहां पेश कर दिया गया। भाजपायी हल्कों में चर्चा है कि इस निर्णय में भाजपा के ही पालिका अध्यक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया। इसमें रणनीति यह बतायी जा रही है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया तो यश जिला भाजपा अध्यक्ष नरेश दिवाकर को मिलेगा और यदि प्रस्ताव गिर गया तो ठीकरा पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के सिर पर फोड़ दिया जायेगा। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि परिषद में कांग्रेस के 13 और भाजपा के अध्यक्ष और 11 पार्षद हैं जबकि अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिये कुल संख्या के दो तिहायी वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़ना चाहिये। एक तरह से यह निश्चित माना जा रहा है कि इस खेल में भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती हैं। यह सब जानते हुये भी अविश्वास प्रस्ताव लाना भाजपा की गुटबंदी का ही परिणाम हैं। जिला भाजपा में एक दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में वो नगर विकास अवरुद्ध हो रहा है जिसका वायदा चुनाव के समय रोड़ शो करके प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था।
गीता की छुट्टी प्रदेश कांग्रेस में प्रतिनिधित्व समाप्त-हाल ही में हुये प्रदेश कांगेस के फेर बदल में सिवनी जिले के किसी भी नेता कों शामिल नहीं किया गया। और तो और प्रदेश कांग्रेस की महामंत्री गीता सिंह को भी निकाल दिया गया। उल्लेखनीय है कि गीता सिंह कांग्रेस के विधायक स्व. रणधीर सिंह की पत्नी हैं। आपके आजा ससुर दीप सिंह और ससुर सत्येन्द्र सिंह भी विधायक थे। युवा रणधीर की अकाल मृत्यु के बाद हुये उप चुनाव में गीता को कांग्रेस की टिकिट नहीं मिली थी। उसके बाद से वे कांग्रेस की राजनीति में हासिये थीं। लेकिन जब दिग्गी समर्थक कांतिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष बने तो उन्हें एकदम से प्रदेश में महामंत्री जैसे पद की जवाबदारी मिल गयी। लेकिन ना जाने क्यों इसके बाद भी वे अपने पद के अनुसार सक्रिय नहीं हो पायीं और अपने प्रभार के जिले में भी एक बार भी नहीं गयीं। इन्हीं सब कारणों से शायद उनकी छुट्टी हो गयी। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस में जिले का प्रतिनिधित्व ही समाप्त हो गया। एक समय था जब 1977 की जनता लहर में जिले की पांचों सीटें कांग्रेस ने जीत कर समूचे उत्तर भारत में एक रिकार्ड बनाया था। लेकिन आज जिले की चार में से तीन सीटें भाजपा के पास है जिसमें से दो बरघाट और सिवनी में भाजपा पांच बार से चुनाव जीत रही हैं।ऐसे हालात में जिले में कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिये नेतृत्व को ध्यान देना होगा अन्यथा मिशन 2013 और 2014 को फतह करना एक कठिन काम होगा।
भाजपा में पंड़ितों और जैनियों के वर्चस्व से अन्य निराश- भाजपा में पंड़ितों और जैनियों को जिले में सालों से मिल रही प्राथमिता के कारण पिछड़ा वर्ग,मुस्लिमों, आदिवासी और हरिजनो के मन में यह भावना घर करते जा रही है कि भाजपा में उनका अपना कोई भविष्य नहीं है। ऐसा मानने वाले यह तर्क देते है कि चाहे जिला भाजपा अध्यक्ष पा पद हो या सिवनी विस की टिकिट सालों से इन पर ब्राम्हणों और जैनियों का ही कब्जा रहा है। स्व. महेश शुक्ल,प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब, चक्रेश जैन, सुदर्शन बाझल, सुजीत जैन और अभी नरेश दिवाकर भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं। बीच में वेद सिंह ठाकुर,डॉ ढ़ालसिंह बिसेन और कीरत सिंह बघेल जरूर अध्यक्ष रहें हैं। इसी तरह सिवनी विस की टिकिट भी 1985 से इन्हीं के कोटे में जा रही हैं। 85 में प्रमोद कुमार जैन,90 और 93 में स्व. पं. महेश शुक्ला,09 और 2003 में नरेश दिवाकर और 2008 में नीता पटेरिया को भाजपा ने टिकिट दी थी। सन 1990 से यहां से भाजपा का विधाय ही जीत रहा है इसीलिये इस रणनीति को बदलने के बारें में भाजपा में कभी विचार भी नहीं हुआ। अगले विस चुनाव में भी टिकिट इन्हीं के बीच मिलना तय माना जा रहा है। इसी कारण पिछड़ा वर्ग,अल्प संख्यक,आदिवासी और हरजिन वर्ग के कार्यकर्त्ताओं में धीरे धीरे यह भावना बैठती जा रही है कि भाजपा में हमारा कोई भविष्य नहीं है? भाजपा नेतृत्व यान शिवराज सिंह और नरेन्द्र तोमर के लिये यह मिशन 2013 और 2014 के लिये यह एक चिंता का विषय होे सकता है।“मुसाफिर”  

सा. दर्पण झूठ ना बोले सिवनी
04 जून 2013 से साभार