Monday, June 15, 2015

वक्त पर सोना बाद में रोना फिर दूसरांे को कोसना ही क्या  जिले की नियति बन कर रह गयी है ?
कमलनाथ ने प्ररंभ किये भोपाल,इंदौर दिल्ली और मुबंई की  हवाई यात्रा चालू कराने के प्रयास: जिले के सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बांधसिंग भगत बैठे हैं चुप: वक्त निकल जाने पर क्या फिर दूसरों को कोसेंगे जिले के नेता?
सिवनी ।  मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले दिनों केबिनेट मीटिंग में प्रदेश की दस हवाई पट्टियों को निजी विमानन कंपनियों के उपयोग के लिये भी अनुमति दे दी है। इसमें सिवनी के साथ छिंदवाड़ा भी शामिल है। छिंदवाड़ा से हवायी यात्रा प्रारंभ कराने के प्रयास भी प्रारंभ हो गये हैं लेकिन जिले के सांसद अभी सो रहें है। वक्त पर सोना बाद में रोना और फिर दूसरों को कोसना ही क्या जिले की नियति बन कर रह गयी है।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने प्रदेश की दस हवाई पट्टियों को निजी हवाई कंपनियों के उपयोग के लिये छूट देने का निर्णय अपनी केबिनेट बैठक में कर लिया है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से इन दसों जिलों में भविष्य में यात्रियों के लिये हवाई यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है। प्रदेश के पिछड़े जिलों हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध होने से जिलों में औद्योगिक विकास के अवसर बढ़ते हैं क्योंकि अच्छे और बड़े उद्योगपति कम समय में यात्रा करने के लिहाज से हवाई यात्रा करना पसंद करते हैं जिससे उनके समय की बचत होती है। 
प्रदेश सरकार ने जिन दस हवाई पट्टियों को यह अनुमति दी है उनमें छिंदवाड़ा के साथ ही सिवनी भी शामिल है। इस अनुमति के मिलते ही अपने क्षेत्र को सब कुछ दिलाने की ललक रखने वाले कांग्रेस के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने जबलपुर से छिंदवाड़ा होते हुये भोपाल,इंदौर दिल्ली और मुंबई के लिये हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के प्रयास भी प्रारंभ कर दिये हैं जो कि विगत दिनों अखबारों की सुर्खियां भी बने रहे। ये प्रयास कितने और कब कारगर साबित होते हैं? यह तो भविष्य की गर्त में हैं लेकिन प्रयास प्रारंभ होना भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। 
छिंदवाड़ा के साथ ही सिवनी जिले की हवायी पट्टी को भी प्रदेश सरकार यह अनुमति प्रदान की है लेकिन हमारे जिले के दोनों भाजपा सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते और बोध सिंह भगत के कोई ऐसे प्रयास प्रकाश में नहीं आये हैं कि उन्होनें जिले के लोगों को हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिये किये हो। आज जबकि देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो जिले के सांसदों को इस दिशा में प्रयास कर लोगों को यह सुविधा उपलब्ध करानी चाहिये क्योंकि जबलपुर से छिंदवाड़ा सिवनी होकर ही हवाई मार्ग भी जायेगा। लेकिन जिले के सांसदों की यह उदासीनता कहीं ऐसा ना हो कि जिले को मिल सकने वाली इस सुविधा से भी वंचित करा दे। 
अभी तक जिला ऐसी ही उपेक्षा के चलते बड़ी रेल लाइन,संभाग और मेडिकल कॉलेज जैसी उपलब्धियों से वंचित हो गया है। हर चीज को पाने के लिये समय पर प्रयास करना जरूरी होते हैं। यदि ऐसा ना किया जाये तो यह जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत क्षति ना होकर जिले की क्षति हो जाती है। बीते पंद्रह वर्षों से हमेशा यह देखा जा रहा है कि जिले के जनप्रतिनिधि वक्त पर सोते रहते हैं और फिर बाद में रोते हैं। शायद अपनी छिपाने के लिये ही फिर दूसरे को कोसने का काम चालू कर देते हैं। 
यह सब देख देख कर जिले के लोग अब यह सोचने को मजबूर हो गये हैं कि वक्त पर सोना बाद में रोना और फिर दूसरों को कोसना ही क्या जिले की नियति बन कर रह गयी है? 
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 1
16 दजून 2015 से साभार


  



शासकीय मेडिकल कॉलेज छिनने पर कमलनाथ पर आरोप लगाने वाले क्या अब सुषमा और शिवराज पर लगायेंगें आरोप? 
   प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुयी केबिनेट की बैठक में पगदेश में तीन जिलों में पी.पी.पी. मोड के मेडिकल कालेज खेलने की स्वीकृति दे दी है लेकिन इन जिलों साथ ही सिवनी जिले के लिये पूर्ण की गयी प्रक्रिया के बाद भी उसे मंजूरी ना देकर लंबित रख दिया गया है। इन जिलों में विदिशा के नाम के जुड़ने से यह एक चिंता का विषय बन गया है। केन्द्र शासन द्वारा पोषित किये जाने वाले जो मेडिकल कॉलेज प्रदेश में खुलने वाले हैं उस प्रस्ताव में भी विदिशा जिले का नाम शामिल है। पहले जिन सात जिलों के नाम प्रदेश सरकार के द्वारा बताये गये थे उनमें  प्रमुख रूप से विदिशा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा बताये गये थे। ये तीनों ही वी आई पी क्षेत्र थे । लोकसभा चुनावों के बाद और नपा तथा नगर निगम चुनावों के पहले विवाद चालू हुआ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की प्रेस कांफ्रेंस और सदन में दिये गये इस बयान से कि प्रदेश सरकार के मूल प्रस्ताव के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल कालेज सिवनी और सतना में ही खोले जायेंगें ना कि छिंदवाड़ा और शिवपुरी में । इससे विवाद हो गया था और पीपीपी  मोड के कालेज की प्रक्रिया जिले के लिश्े चालू हो गयी थी। जिला योजना समिति के चुनाव में कांग्रेस ने अपना बहुमत बना लिया है। जिला पंचायत से निर्वाचित होने वाले 14 में से 11 सदस्य कांग्रेस के चुने गये है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं रोचक चुनाव रहा नगर पालिका सिवनी के निर्वाचन का जहां से कांग्रेस के संतोष नान्हू पंजवानी ने भाजपा के अलकेश रजक को 10 के मुकाबले 14 मतों से पराजित कर दिया।  
सरकारी छिंदवाड़ा तो क्या पीपीपी मोड का  मेडिकल कालेज सुषमा ले गयीं विदिशा?-प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुयी केबिनेट की बैठक में पगदेश में तीन जिलों में पी.पी.पी. मोड के मेडिकल कालेज खेलने की स्वीकृति दे दी है लेकिन इन जिलों साथ ही सिवनी जिले के लिये पूर्ण की गयी प्रक्रिया के बाद भी उसे मंजूरी ना देकर लंबित रख दिया गया है। वैसे तो यह एक सामान्य प्रक्रिया कही जाती है लेकिन इन जिलों में विदिशा के नाम के जुड़ने से यह एक चिंता का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र शासन द्वारा पोषित किये जाने वाले जो मेडिकल कॉलेज प्रदेश में खुलने वाले हैं उस प्रस्ताव में भी विदिशा जिले का नाम शामिल है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रदेश सरकार के जिम्मेदार मंत्री और अधिकारियों के अलग अलग बयान आते रहें है। पहले जिन सात जिलों के नाम प्रदेश सरकार के द्वारा बताये गये थे उनमें  प्रमुख रूप से विदिशा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा बताये गये थे। ये तीनों ही वी आई पी क्षेत्र थे जहां से लोकसभा की तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष  एवं वर्तमान में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिंया सांछ थे। ये तीनों ही आज भी इन्हीं क्षेत्रों सांसद है। लेकिन लोकसभा चुनावों के बाद और नपा तथा नगर निगम चुनावों के पहले विवाद चालू हुआ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की प्रेस कांफ्रेंस और सदन में दिये गये इस बयान से कि प्रदेश सरकार के मूल प्रस्ताव के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल कालेज सिवनी और सतना में ही खोले जायेंगें ना कि छिंदवाड़ा और शिवपुरी में जिन्हें तत्कालीन यू.पी.ए. सरकार ने बदल दिया था। लेकिन नगर निगम चुनाव के पूर्व छिंदवाड़ा आये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह नें आम सभा में यह घोषणा कर दी थी कि मेरे रहते कोई भी माई का लाल छिंदवाड़ा का हक नहीं छीन सकता यह मेडिकल कालेज यहीं खुलेगा ना जाने कौन ऐसी अफवाहें फैला रहा है। अब भला मुख्यमंत्री जी को यह कौन बताता कि यदि यह अफवाह है तों इसे और कोई नहीं ब्लकि उनके मंत्रीमंडल के सदस्य और स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने फैलायी है। इसके बाद छिंदवाड़ा के सांसद कमलनाथ पर एक बार फिर यह आरोप लगया जाने लगा कि वे सिवनी का हक छीन रहें हैं जबकि 2013 में जब सात जिलों के नाम घोषित किये गये थे तब उनमें सिवनी का नाम शामिल ही नहीं था। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सालों पहले सिवनी में मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा करके सभा में तालियां बजवा चुके थे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि पी.पी.पी. माडल में मेडिकल कालेज सिवनी में खुलेगा। इसके लिये प्रक्रिया भी प्रारंभ की गयी जिसमें यह पता चला था डॉ. सुनील अग्रवाल के जिंदल ग्रुप और सुखसागर ग्रुप में से किसी को सरकार यह खोलने की अनुमति देने वाली है। पिछले दिनों जब केबिनेट की बैठक में पी.पी.पी. माडल में तीन जिलो के लिये तो मंजूरी दे दी गयी लेकिन उसमें सिवनी का नाम शामिल नहीं था ब्लकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के क्षेत्र और  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले विदिशा का नाम शामिल था जबकि केन्द्र शासन द्वारा खोले जाने मेडिकल कालेजों में विदिशा का नाम शामिल है और उसमें तो विवाद भी नहीं है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से जिले के राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह की चर्चायें चाले हो गयी है। कुछ लोगों का मानना है कि या तो विदिशा में दो दो मेडिकल कॉलेज खोले जा रहें या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि केन्द्र शासन द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल काफलेजों की सूची से विदिशा का नाम भी इसलिये कट गया हो क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुड बुक में नहीं है। इसीलिये पी.पी.पी. माडल के मेडिकल कॉलेज में सिवनी का नाम रोक कर विदिशा में यह खोला जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो मेडकल कॉलेज कमलनाथ द्वारा छीने जाने का आरोप लग रहा था तो अब वही आरोप क्या विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर नहीं लगना चाहिये? यदि ऐसा हो रहा है तो जिले के भाजपा के सांसद द्वय फग्गन सिंह कुलस्ते और बोध सिंह भगत तथा विधायक कमल मर्सकोले को जिले के हित के लिये लड़ना चाहिये और यदि जरूरत हो तो इसके लिये जिले के अन्य जन प्रतिनिधियों को इसमें शामिल कर एक सशक्त पक्ष जिले का रखना समय की मांग है। 
जिला योजना समिति के कांग्रेस ने किया कब्जा -जिला योजना समिति के चुनाव में कांग्रेस ने अपना बहुमत बना लिया है। जिला पंचायत से निर्वाचित होने वाले 14 में से 11 सदस्य कांग्रेस के चुने गये है जबकि लखनादौन और बरघाट नगर पंचायत से गोल्हानी निर्विरोध चुन लिये गये हैं। जिसमें सिवनी के विधायक मुनमुन राय की विशेष भूमिका बतायी जा रही है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं रोचक चुनाव रहा नगर पालिका सिवनी के निर्वाचन का जहां से कांग्रेस के संतोष नान्हू पंजवानी ने भाजपा के अलकेश रजक को 10 के मुकाबले 14 मतों से पराजित कर दिया। यहां यह विशेष रूप से उल्ल्ेखनीय है कि पालिका में अध्यक्ष सहित 25 सदस्यों में से 13 भाजपा के 8 कांग्रेस के हैं। इसके बाद भी भाजपा की हार होना राजनैतिक हल्कों में चर्चित है। जबकि भाजपा ने इसी पालिका में कांग्रेस के नान्हू पंजवानी को हरा कर पहली बार अपना उपाध्यक्ष जिताया था। ऐसा क्यों और कैसे हुआ? इसे लेकर भाजपा में तरह तरह की चर्चायें चल रहीं हैं। एक तरफ कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि उपाध्यक्ष चुनाव के समय पार्षदों से जो वायदे किये गये थे वे कुछ पार्षदों के साथ पूरे नहीं किये गये तो इसीलिये उन्होंने अपनी नाराजगी बतायी हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ भाजपा नेता यह भी कह रहें हैं कि भाजपा के एक गुट ने जान बूझ कर भाजपा को वोट नहीं देकर हरा दिया तो कुछ यह कहने से भी नहीं चूक रहें कि सब कुछ पैसे का खेल है। अब जो भी हो लेकिन भाजपा की यह हार भाजपा के चाल चरित्र और और चेहरे को बेनकाब जरूर कर गया है। “मुसाफिर”
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 1



16 दजून 2015 से साभार

Monday, June 8, 2015

मोदी बनवा रहे राव का स्मारक लेकिन उनके सांसद रामटेक गोटेगांव रेल लाइन की राव की घोषणा  से कर रहे परहेज
   जबलपुर से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार पत्र में रामटेक से गोटेगांव व्हाया सिवनी रेल लाइन में मामले में प्रकाशित समाचार इन दिनों जिलें में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। 1996 में देश के प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने इस परियोजना की घोषणा जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में की थी। इस मांग को प्रधानमंत्री के सामने तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री और सिवनी की सांसद कु. विमला वर्मा ने रखी थी। जिले से चुने गये दोनों भाजपा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बोधसिंह भगत ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जबकि केन्द्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में कांग्रेस के दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिंहाराव का स्मारक बनाने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया है। जिपं में कांग्रेस के 11 और भाजपा के 6 और दोनो ही पार्टी के 1 1 बागी सदस्य चुन कर आये थे लेकिन अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी और भाजपा ने दोनों ही पद जीत लिये थे। इन चुनावों में जिले भर के सारे कांग्रेसी नेता लगे हुये थे और सदस्यों को मार्गदर्शन भी दे रहे थे। इस बार समितियों के चुनाव में ना तो जिले के किसी नेता ने मार्गदर्शन दियालेकिन समितियों में कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है। जिले में इस बार कमल या शिशि ठाकुर को मिल लालबत्त्ी सकती है ।  
क्या सांसद द्वय रामटेक गोंटेगांव रेल के लिये करेंगें प्रयास?-जबलपुर से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार पत्र में रामटेक से गोटेगांव व्हाया सिवनी रेल लाइन में मामले में प्रकाशित समाचार इन दिनों जिलें में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। इस समाचार में उल्लेख किया गया है कि 1996 में देश के प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने इस परियोजना की घोषणा जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसमें रेल्वे को नफा नुकसान नहीं देखना चाहिये क्योंकि इसके बनने से आदिवासी क्षेत्रों को विकास का मौका मिलेगा। लेकिन बीस साल होने को आ गये हैं अब तक मामला सिर्फ सर्वे तक ही पहुंच पाया है। इस समाचार के प्रकाशित होने से जिले के राजनैतिक हल्कों में कुछ सवाल हवा में तैरने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि इस मांग को प्रधानमंत्री के सामने तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री और सिवनी की सांसद कु. विमला वर्मा ने रखी थी। 1996 में कांग्रेस सरकार के दौरान ही इसके ट्रेफिक सर्वे के आदेश हो गये थे लेकिन लोस चुनाव में कांग्रेस तथा सिवनी से विमला वर्मा चुनाव हार गयीं थीं। इसके बाद उनके सक्रिया राजनीति से स्वास्थ्य कारणों से हट जाने के बाद इस योजना के लिये भले ही इंका नेता आशुतोष वर्मा सहित कई नेताओं ने आंदोलन चलाये हों लेकिन यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस योजना को स्थानीय कांग्रेस की गुटबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ा। जबकि इसके लिये शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने स्वयं भी दो बार पत्र लिख की आंदोलन को आर्शीवाद दिया था। इसके बाद लगातार अभी तक भाजपा के सांसद चुने जाते रहें लेकिन ना जाने किन राजनैतिक कारणों से उन्होंने ना केवल इस योजना के लिये कोई प्रयास किये वरन अव्यवहारिक नये नये सुझाव देकर जिले की आवाज को ही कमजोर किया । उनके पास एक बहाना भी था कि क्या करें केन्द्र में कांग्रेस की सरकार है और हमारी कोई सुनता ही नहीं हैं। लेकिन पिछले एक साल से राज्य के साथ साथ केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है लेकिन जिले से चुने गये दोनों भाजपा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बोधसिंह भगत ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जबकि केन्द्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में कांग्रेस के दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिंहाराव का स्मारक बनाने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया है। मोदी सरकार यदि सही में स्व. नरसिंहाराव के प्रति सम्मान प्रगट करना चाहती है तो उसे गोटेगांव सिवनी रामटेक नई रेल लाइन को मुजूरी देकर बनाना चाहिये क्योंकि यह प्रधानमंत्री के रूप में संभवतः उनकी अंतिम सार्वजनिक घोषणा थी जो अब चालू भी नहीं हो पायी है। जिले से निर्वाचित दोनों सांसद यदि इस बारे में प्रधानमंत्री से बात कर उनका ध्यानाकर्षित कराये तो तो शायद जिले को विकास के नये आयाम तक पहुचने का अवसर मिल सकता है।  
 जिपं समितियों के चुनाव में कांग्रेस का कब्जा-बीते दिनों जिला पंचायत की समितियों के चुनाव संपन्न हुये। उल्लेखनीय है कि जिपं में कांग्रेस के 11 और भाजपा के 6 और दोनो ही पार्टी के 1 1 बागी सदस्य चुन कर आये थे लेकिन अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी और भाजपा ने दोनों ही पद जीत लिये थे। इन चुनावों में जिले भर के सारे कांग्रेसी नेता लगे हुये थे और सदस्यों को मार्गदर्शन भी दे रहे थे लेकिन अंतिम समय में सदस्यों की राय के विपरीत उम्मीदवार थोपे जाने के कारण हार का सामना करना पड़ा था। इस समय भी कांग्रेस के कुछ नताओं की यह राय थी कि कांग्रेस के चुने हुये सदस्य काफी अनुभवी है इसीलिये पहला दौर इनके बीच ही होने दिया जाये और यदि सर्वसम्मति से ये प्रत्याशी चयन कर लेते है तो उसे मान लिया जाये लेकिन इस सलाह की अनदेखी कर दी गयी। इस बार समितियों के चुनाव में ना तो जिले के किसी नेता ने मार्गदर्शन दिया और ना ही जिला कांग्रेस ने कोई बैठक ही बुलायी फिर कांग्रेस के सदस्यों ने आपसी तालमेल से अधिकांश समितियों में अपना बहुमत बना लिया हैं और उनमें कांग्रेस का सभापति बनना तय है। जबसे जिला पंचायत का गठन हुआ है तबसे जिला पंचायत पर लगातार चार बार कांग्रेस का कब्जा रहा था लेकिन इस बार पहली बार खुद का स्पष्ट बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस अपना अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नहीं बना पायी लेकिन समितियों में कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहने से कुछ तो संतुलन बन ही जायेगा।
कमल या शशि को मिल सकती है लालबत्ती-प्रदेश में इन दिनों मंत्रीमंड़ल विस्तार और निगमों में नियुक्ति किये जाने की चर्चायें राजनैतिक हल्कों में जारी हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की आलाकमान से इस संबंध में चर्चा भी हो चुकी हैं। इसे लेकर जिले के भाजपायी नेताओं के बीच भी लालबत्ती पाने की होड़ लग गयी है। वैसे तो शिवराज सिंह ने अभी तक अपने मंत्रीमंड़ल में शिव की नगरी सिवनी की उपेक्षा ही की है। भाजपा के तीन तीन विधायक होने के बाद भी उन्होंने  किसी को भी मंत्री नहीं बनाया था जबकि कांग्रेस के शासनकाल में हमेशा जिले से दो दो मंत्री रहें है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा से जिले के एकमात्र विधायक कमल मर्सकोले ही है। यदि शिवराज ने शिव की नगरी सिवनी से परहेज नहीं रखा तो ऐसा माना जा रहा है कि कमल मर्सकोले  का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। वैसे शिवराज सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में नदेश दिवाकर और डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को लाल बवैसे शिवराज सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में नरेश दिवाकर और डॉ. ढ़ालसिंह   बिसेन को लालबत्ती से नवाजा था। यदि इस बार भी ऐसा ही करने की मुख्यमंत्री ने सोचा तो ऐसा माना जा रहा है कि लखनादौन क्षेत्र की दो बार विधायक रही और इस बार चुनाव हार जाने वाली आदिवासी महिला नेत्री शशि ठाकुर को किसी निगम में लालबत्ती दी जा सकती है। अब किसको क्या मिलेगा या दोनों खाली हाथ रह जायेंगें? यह तो शिवराज सिंह का पिटारा खुलने के बाद ही पता चल पायेगा। “मुसाफिर”  
सा. दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 
09 जून 2015 से साभार