<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981</id><updated>2012-02-16T00:27:23.301-08:00</updated><title type='text'>ASHUTOSH VERMA</title><subtitle type='html'>MY education is M.A.Economics and LL.B. I am in active politics and had participated in asseb. election as Congress candidate.I was working in the firld of journalisim from 1980.I am married having a son and a daughter.Photography is my hobby.</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>174</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-8603227967362675096</id><published>2012-02-13T07:40:00.000-08:00</published><updated>2012-02-13T07:40:42.178-08:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;खेत के सवाल का जवाब खलिहान से देने की आदी हो चुकी भाजपा अब लोगों में मजाक का विषय बनते जा रही है&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;जिला कांग्रेस की पहली बैठक में कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था और अभी जिला इंका का महामंत्री बनाया गया हैं। इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं। इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब देकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। भाजपा ने सुजीत जैन और इंका ने हीरा आसवानी को जिले का अध्यक्ष बनाया ा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं &amp;nbsp;और वो भी हरवंश सिंह के। नपं लखनादौन और मंड़ी चुनावों में दोनों की मिशन 2013 के पहले अग्नि परीक्षा हो जावेगी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;रजनीश की ताजपोशी के बाद भवन का संकल्प एक बार फिर लिया गया&lt;/span&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;-बीते पंद्रह सालों बिन हरवंश सब सून की तर्ज पर चलने की आदी हो गयी है जिले में कांग्रेस। पिछले जनवरी माह में जिले की कांग्रेस कमेटी की बैठक रखी गयी थी लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के उपलब्ध ना होने के कारण वह स्थगित कर दी गयी थी। यह बैठक 11 फरवरी को संपन्न हुयी। इस पहली बैठक में जिला कांग्रेस का भवन बनाने का संकल्प लिया गया। हालांकि निवर्तमान अध्यक्ष महेश मालू &amp;nbsp;भी कांग्रेस भवन बनाने की पहल करना चाहते थे लेकिन ना जाने क्यों वे अपने कार्यकाल में शुरूआत नहीं कर सके। अब एक बार फिर यह पहल प्रारंभ की गयी है। हालांकि आज से दस साल पहले भवन बनाने की बात शुरू हुयी थी। उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसका भूमि पूजन उसी दिन किया था जिस दिन तत्कालीन मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल के कार्यकाल में मंड़ी की आधारशिला रखी थी। मंड़ी तो सालों पहले बन गयी लेकिन कांग्रेस भवन में एक ईंट तक नहीं जुड़ पायी। यह भी एक संयोग है या कुछ और कि उस वक्त हरवंश सिंह ने अपने पुत्र रजनीश सिंह को कांग्रेस सेवादल का अध्यक्ष बवनाया था। तब सेवादल के सभी शिवरों में कांग्रेस भवन का एक माडल कार्यकर्त्ताओं को दिखाया गया था। उस वक्त हरवंश सिंह प्रदेश के एक ताकतवर मंत्री थे। अब एक बार फिर भवन बनाने की पहल हुयी हैं और अभी नवगठित जिला इंका में रजनीशसिंह को महामंत्री बनाया गया हैं। राजनैतिक विश्लेषकों &amp;nbsp;का ऐसा मानना है कि कांग्रेस में रजनीश की ताजपोशी और कांग्रेस भवन की बात में चोली दामन का साथ हैं। चाहे बात जो भी हो लेकिन जिले के कांग्रेसजनों की यह तीव्र इच्छा हैं कि जिले में कांग्रेस का अपना भवन हो। यह इच्छा उस समय से और तीव्र हो गयी हैं जब सालों बाद जमीन मिलने के बाद भी जिला भाजपा का भवन तो लगभग बन कर तैयार है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है जिला इंका को भवन के लिये जमीन जो तत्कालीन अध्यक्ष हाजी मोहीत खॉन के कार्यकाल में ही मिल गयी थी। लेकिन यदि आज भी देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर कांग्रेस का भवन बन जाये तो यह एक प्रशंसनीय बात ही होगी लेकिन यदि जैसा खेल 2003 के विस चुनाव के पहले खेला गया था वैसा ही यदि 2013 के चुनाव के पहले खेला जा रहा हैं तो यह एक दुर्भाग्य पूर्ण बात ही होगी। मुसाफिर की तो यही कामना है कि कांग्रेा का भी अपना भवन जल्दी बन ही जाये।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी &lt;/span&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;-इन दिनों कुछ मुद्दों पर इंका और भाजपा केबीच विज्ञप्ति युद्ध चल रहा हैं। इस युद्ध में होता यह है कि मुद्दा तो दर किनार रह जाता हैं और अपने अपने नेता को पाक साफ बताते हुये दूसरे के सिर पर ठीकरा फोड़ने का काम कर अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं और जनहित का मामला जस का तस छूट जाता हैं। एक बात और है कि विज्ञप्तिवीर और छपास के रोगी होने का आरोप भी जो लगाते है वे खुद ये भूल जाते हैं इस क्षेत्र में तो वे खुद परमवीर चक्र लेने के अधिकारी हैं। प्रदेश के सत्तारूढ़ दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का यह रवैया किसी भी कीमत पर उचित नहीं कहा जा सकता हैं। जिले के विेकास और लंबित योजनाओं पर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना तो ठीक है लेकिन इसके हल के लिये भी ठोस प्रयास करना चाहिये। अन्यथा हालात तो जस के तस रह जायेंगें भले ही नेताओं की छवि चमक या बिगड़ जाये।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अपने अपने नेता को पाक साफ बता इतिश्री कर लेते है इंकाई और भाजपायी -&lt;/span&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;इन दिनों भाजपा खेत का जवाब खलिहान से देने के लिये मशहूर होते जा रही है। कई बार आंकड़ों और तथ्यों की जानकारी के आभाव में भाजपा मजाक का विषय बन जाती हैं। सही आरोपों के जवाब में चुप रह जाना तो समझ में आता हैं लेकिन उस पर बकवास भरे जवाब दकर अपने आप को तीसमारखां मान लेना समझ से परे हैं। पूछे गये सवालों पर जवाब ना होने के कारण भाजपा मामले को कहीं ओर घुमाने में विश्वास करने लगी हैं। इस कारण भले ही सवाल जवाब का सिलसिला तो चलते रहता है लेकिन आम लोगों के बीच में भाजपा मजाक का पात्र बन कर रह जाती हैं। जिले में कई गुटों में बंटी भाजपा का नेतृत्व इस कारनामे पर अंकुश लगाने में भी सफल नहीं हो पा रहा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;वरिष्ट,कनिष्ट और घनिष्ट चर्चित हैं इंका और भाजपा में-प्रदेश के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा ने जिले में अपने अपने संगठन की कमान अपेक्षाकृत युवा हाथों में सौंपी हैं। पहले भाजपा ने संगठन चुनावों में युवा सुजीत जैन को जिले का अध्यक्ष निर्वाचित किया और उसके बाद कांग्रेस ने भी हीरा आसवानी के रूप में युवा नेतृत्व दिया। लेकिन भाजपा और और इंका में एक फर्क दिखायी दे रहा हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुजीत जैन वरिष्ट और कनिष्ट भाजपा नेताओं के बीच फंसें दिखायी देते हैं। उनसे उम्रदराज नेता पार्टी में अपनी मनमानी करते देखे जा सकते हैं। कोई चाचा तो बड़े भाई के रूप में हमेशा हावी होने की कोशिश करते रहतें हैं। जबकि इंका में संगठन के काम में ना तो वरिष्ट चलते हैं और ना ही कनिष्ट। यहां तो केवल घनिष्ट चलतें हैं और वे भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के। इसलिये इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी अपेक्षाकृत रूप से अधिक सुविधाजनक स्थिति में हैं। उन्हें जो कुछ भी देखना हैं वह केवल घनिष्टता । और सभी विस उपाध्यक्ष हरवंशसिंह के घनिष्ट हैं दूसरे किसी अन्य नेता के हैं ही नहीं। जबकि भाजपा के संगठन की कमेटी में ही कई वरिष्ट नेताओं का सीधा और प्रभावशाली दखल हैं। इस सबकें चलते अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजर होने वाले लखनादौन नगर पंचायत और जिले के मंड़ी चुनावों पर लगी हुयी हैं। भाजपा में इन दिनों जिले के नाम पर नरेश दिवाकर, डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन एवं इंद्रेश गजभियेके पास लाल बत्ती हैं तो कांग्रेस के पाले में इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल के पास लाल बत्ती हैं। वहीं विधायक नीता पटेरिया भी प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं। इंका और भाजपा की कमान संभालने वाले जिले के तमाम नेताओं के लिये मिशन 2013 से पहले &amp;nbsp;के पहले यह एक मिनी परीक्षा रहेगी और इस पर ही आगे के परिणाम निर्भर करेंगें। &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-8603227967362675096?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/8603227967362675096/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/02/political-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8603227967362675096'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8603227967362675096'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/02/political-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-7184573509563576976</id><published>2012-02-07T23:13:00.000-08:00</published><updated>2012-02-07T23:13:21.878-08:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;कभी बुआ भतीजावाद का रोना रोने वाले कांग्रेसी अब पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते दिख रही हैं। कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब देखना यह है कि चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं? जिले में कांग्रेस की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जिला इंका की जम्बो जेट कार्य.घोषित-&lt;/span&gt;लंबे ऊहा पोह और इंतजार के बाद आखिर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की घोषणा हो ही गयी। हालांकि आज से लगभग 18 महीने पहले जिले में हुये कांग्रेस के कथित चुनाव के बाद जैसा अखबारों में प्रकाशित हुआ था उससे बहुत कुछ अलग इस घोषित समिति में दिखा। इस घोषित समिति में चुनावी साया स्पष्ट दिखायी दे रहा हैं। वैसे जब कहीं ओर चुनावी साया दिखने की बात होती हैं तो किसी भी जिले के सभी विस क्षेत्रों की बात होती हैं लेकिन सिवनी जिले में हमेशा की तरह इस बार भी जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के केवलारी विस चुनाव की बिसात ही बिछते जिला इंका की घोषणा में दिख रही हैं। इस जम्बो जेट कार्यकारिणी में कांग्रेस संविधान के निर्वाचन के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ और मन माफिक संख्या में पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गयी हैं। जिला इंका में 1कोषाध्यक्ष,9उपाध्यक्ष,11महामंत्री,17 संगठन सचिव,13 कार्य. सदस्य एवं 7 स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाये गये हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;बहुत निरीह दिखे महाबली कहलाने वाले हरवंश-&lt;/span&gt;कांग्रेसी हरवंश सिंह को महाबली,दादा ठाकुर या अन्य किसी भी नाम से पुकारते हैं। लेकिन यह भी शाश्वत सत्य है कि आदमी खुद अपने आप को सबसे अच्छा और सच्चा पहचानता हैं। यही बात हरवंश सिंह पर भी लागू होती हें। भले ही वे केवलारी विस क्षेत्र से चार चुनाव लगातार जीत चुकें हो लेकिन वे जानते हैं कि ये सब कैसे हुआ हैं? इंकाई हल्कों में कई दिनों से 1/14 का समीकरण चल रहा था। एक इंका नेता को जिला इंका में रोकने के लिये 14 नेताओं ने संयुक्त रूप से दवाब अनाया था कि यदि इसे शामिल किया गया तो हम सभी समूहिक रूप से त्यागपत्र दे देंगें। मजे की बात यह थी कि ये सभी 14 इंका नेता परिसीमन के पहले वाले केवलारी विस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते थे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में हरवंश सिंह पूरे पुराने केवलारी क्षेत्र से चुनाव हार गये थे लेकिन परिसीमन में जोड़े गये नये क्षेत्रों ने उनकी लाज रख ली थी और वे चुनाव जीत गये थे। लेकिन पांचवी पारी खेलने के लिये डरे हुये हरवंश सिंह ने 14 नेताओं को नाराज करने का जाखिम लेना उचित नहीं समझा और बीच का रास्ता निकाल लिया।जिस इंका नेता का विरोध था उसे छोड़ा तो नहीं लेकिन सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य ही बनाया और उन 14 नेताओं में अधिकांश को पदों से नवाज कर खुश करने का प्रयास कर लिया है। जिस नेता का पिछले पंद्रह सालों से जिले की कांग्रेसी राजनीति में एक छत्र राज चल रहा हो और जिसे महाबली माना जाता हो उसका इतना निरीह दिखना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पिता पुत्रवाद पर थिरक रहें हैं कांग्रेसी-&lt;/span&gt;जो कांग्रेसी 90 के दशक में बुआ भतीजावाद का रोना रोकर जिले में कांग्रेस के बरबाद होने का आरोप लगाया करते थे वे ही आज पिता पुत्रवाद की राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। जी हां बात हो रही है जब जिले की वरिष्ठतम कांग्रेस नेत्री कुमारी विमला वर्मा का सक्रिय राजनीति में जलवा में था। उन्हीं की अगुलियां पकड़ कर आज के इंकाई पुरोधा हरवंश सिंह ने राजनीति शुरू की थी। बरघाट के एक कार्यक्रम में हरवंश सिंह पर उनकी उपस्थिति में ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा था तब से विमला वर्मा ने उनसे किनारा कर लिया था और यहीं से हरवंश सिंह ने समानान्तर राजनीति करना शुरू की थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के रहमो करम से वे राजनीति में आगे बढ़ते गये। उस दौरान हरवंश सिंह और उनके संगी साथी विमला वर्मा पर कोई और आरोप ना लगा पाने के कारण भाई भतीजेवाद का आरोप लगाया करते थे।इससमय तकआशुतोष वर्मा भी कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हो चुके थे और उन्हीं के कारण ये आरोप लगाये जाते थे और कांग्रेस के हाल बेहाल होने की बात कही जाती थी। हालंकि आशुतोष वर्मा छात्र राजनीति से कांग्रेस की राजनीति में आये थे और सन 1977 में उस वक्त कांग्रेस में इंदिरा जी के साथ रहे जब हरवंश सिंह इंदिरा जी को छोड़ कर कांग्रेस अर्स की कमान संभाल रहे थे। आज वो ही कांग्रेसी पिता पुत्रवाद की राजनीति याने हरवंशसिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह की जिला में महामंत्री पद की ताज पोशी पर राग दरबारी पर थिरकते नजर आ रहें हैं। इसे ही तो कहते हैं वक्त के घूमते पहिये का कमाल।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;डॉ. बिसेन को भी मिली लाल बत्ती-&lt;/span&gt;जिले की भाजपायी राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी आ गयी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व त्रि विभागीय मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को शिवराज सरकार ने प्रदेश के वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया हैं। इसके पहले सरकार ने पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का अध्यक्ष नियुक्त कर केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। इसी तरह जिले के ही इंद्रेश गजभिये भी केबिनेट मेंत्री का दर्जा प्राप्त निगम के अध्यक्ष हैं। सिवनी की अंतिम सांसद रही विधायक नीता पटेरिया पहले ही प्रदेश की महिला मोर्चे की अध्यक्ष बन चुकीं हैं। इस तरह अब शिव की नगरी सिवनी से चार भाजपा नेता ऐसे हो गयें जो प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. बिसेन मुख्यमंत्री उमा भारती और बाबूलाल गौर की केबिनेट में कबीना मंत्री थे लेकिन शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें मंत्री नहीं बनाया था। मुख्यमंत्री ने यह सब कवायत करके जिले की भाजपायी राजनीति में गुटीय एवं जातीय संतुजन बनाने का प्रयास तो कर लिया हैं लेकिन अपने किये गये वायदों को पूरा करने में यदि वे कामयाब नहीं हुये तो उसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। इसीलिये अब राजनैतिक विश्लेषकों की नजरें इस पर टिकी हुयीं हैं कि शिव की सरकार में सिवनी के भाजपा नेता तो पर्याप्त स्थान एवं महत्व पा चुकें हैं लेकिन अब चुनाव के पहले शिव की नगरी सिवनी को भी शिव राज में कोई बड़ी उपलब्धि होती है या नहीं?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;सब कुछ मंशानुसार-&lt;/span&gt;इस सप्ताह पूरे जिले में कांग्रेस संगठन की जिला और ब्लाक इकाइयों के गठन की घोषणा हो रही हैं। जिले की सभी नियुक्तियों के लिये जारी विज्ञप्तियों में इस बात का उल्लेख अवश्य किया गया हैं कि जिले के वरिष्ठ नेता हरवंश सिंह की मंशानुसार ये नियुक्तियां हुयीं हें। एक विज्ञप्ति में यदि तीन ब्लाकों की घोषणा की गयी है तो तीन बार यही उल्लेख किया गया हैं। प्रदेश कांग्रेस के मिशन 2013 के अनुसार अब देखना यह है कि चुनावी परिणाम कांग्रेस की मंशानुसार आते हैं या हरवंश सिंह की मंशानुसार? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-7184573509563576976?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/7184573509563576976/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/02/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7184573509563576976'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7184573509563576976'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/02/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp.html' title='Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-7294994795022095060</id><published>2012-01-16T23:33:00.000-08:00</published><updated>2012-01-16T23:33:06.781-08:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;इंका और भाजपा ने टेंकरों पर विज्ञप्ति का खेल तो खूब खेला लेकिन नेताओं बचाने शिकायत नहीं की गयी&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;बीते दो सप्ताह से सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायक नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया के कारनामे चर्चित रहें। अटल जी जन्म दिन पर आरती की थाली से रूपये उठाने का नीता का मामला चर्चित रहा तो कुछ ही दिन बाद कालेज के ऐनुवल डे में नरेश द्वारा सुनाया गया एस.एम.एस। कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने नीता प्रकरण में तो विज्ञप्ति जारी कर नीता और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया लेकिन नरेश के मामले में सभी ने चुप्पी साध ली हैं।विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अटल जी के जन्म दिन पर विधायक निधि से बांटें गयें टेंकर विवादों में तो बहुत रहें लेकिन इंका और भाजपा दोनों ने ही किसी की भी शिकायत करना जरूरी नहीं समझा। प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जिले में कांग्रेजनों ने 9 जनवरी को जेल भरो आंदोलन किया जिसे एक सफल आंदोलन माना जा रहा है जिसमें हजारों कांग्रेसियों ने गिरफ्तारी दी हैं। दूसरे ही दिन भाजपा का लोकतंत्र बचाओ मौन धरना दिया गया। इसमें जितने नेता बोल सकते थे उन सबने खूब बोला लेकिन मौन धरने के निर्देशों का पालन भी किया गया लेकिन केवल उनने जो भाषण नहीं दे सकते थे। गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की केवलारी की आम सभा भी अजीबो गरीब रही।पहले तो केवलारी के उस.डी.एम. ने सभा की अनुमति दे दी फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि दी गयी परमीशन रद्दकर दी गयी लेकिन इसके बाद भी पूरी शानो शौकत से सभा हो भी गयी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश पर इंका की चुप्पी हरवंश से नूरा कुश्ती का प्रमाण -&lt;/span&gt;बीते दो सप्ताह से सिवनी के पूर्व और वर्तमान भाजपा विधायक नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया के कारनामे चर्चित रहें। अटल जी जन्म दिन पर आरती की थाली से रूपये उठाने का नीता का मामला चर्चित रहा तो कुछ ही दिन बाद कालेज के ऐनुवल डे में नरेश द्वारा सुनाया गया एस.एम.एस. कि,“सीता के वनवास जाने में भी बहुत बड़ी सीख है, घर में तीन तीन सास हों तो जंगल ही ठीक हैं।“ कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने नीता प्रकरण में तो विज्ञप्ति जारी कर नीता और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया लेकिन नरेश के मामले में सभी ने चुप्पी साध ली हैं। हालांकि दोनों ही भाजपा नेता प्रदेश के महत्वपूर्ण नेता हैं। नीता तो प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं तो नरेश महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष हैं। वैसे नरेश दिवकार के पहले चुनाव से ही इंका और भाजपा में हरवंश नरेश नूरा कुश्ती के जो आरोप लगना शुरू तो वे अभी तक जारी हैं और समय समय पर उसकी पुष्टि के प्रमाण भी मिलते रहते हैं। पिछले कई सालों से जिले के कांग्रेस के सभी पदाधिकारी हरवंश समर्थक ही बनते आये हैं इसलिये सब कुछ उनके इशारों पर ही होता हैं। कोई भी अपने मन से कुछ नहीं कर सकता हैं। इसीलिये नरेश के राजनैतिक रूप से ज्यादा व्यापक और महत्वपूर्ण राजनैतिक मुद्दे पर जिला इंका सहित सभी चुप रहे। प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जेल भरो आंदोलन के दौरान इंका नेता आशुतोष वर्मा ने अपने संबोधन में जरूर इस मामले पर ना केवल नरेश और भाजपा को आड़े हाथों लिया वरन स्वयं ही मंच और जिला कांग्रेस की तरफ से इसकी घोर निंदा कर दी जबकि वे जिला इंका के कार्यकारिणी सदस्य तक नहीं हैं। हरवंश नरेश की यह नूरा कुश्ती और ना जाने क्या क्या गुल खिलायेगी? यह तो भविष्य ही बतायेगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;टेंकरों पर राजनीति तो हुयी पर शिकायत नहीं-&lt;/span&gt;विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और अटल जी के जन्म दिन पर विधायक निधि से बांटें गये टेंकर खूब विवादों में रहे। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने एक दूसरे पर विज्ञप्ति के माध्यम से तो बहुत आरोप लगाये लेकिन इस बात का भी ख्याल रखा कि कोई भी नेता इसमें फंस ना पाये। इसलिये ना तो कांग्रेस ने नीता पटेरिया के मंहगें टेंकरों की कोई शिकायत लिखित में की और ना ही भाजपा ने क्रय एवं भंडारण नियमों की अनदेखी की हरवंश सिंह के टेंकरों की शिकायत की हैं। इस तरह से इंका और भाजपा ने एक दूसरे पर विज्ञप्ति के माध्यम से आरोप लगाकर अखबारों की सुर्खियां तो बटोर ली लेकिन किसी भी नेता को जांच के कठघरे में लाने से भी परहेज किया। इंका और भाजपा दोनों ही पार्टियों के युवा जिला अध्यक्ष हीरा आसवानी और सुजीत जैन के नेतृत्व में राजनीति का खेल भी हो गया और किसी का कुछ बिगड़ा भी नहीं।शायद इसी खेल को आज कल राजनीति में कूट नीति कहते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;सफल रहा कांग्रेस का जेल भरो आंदोलन -&lt;/span&gt;प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर जिले में कांग्रेजनों ने 9 जनवरी को जेल भरो आंदोलन किया। कई दिनों बाद जिले के कांग्रेसियों में उत्साह दिखा। वैसे भी पिछले आठ साल से ऐसा कोई आंदोलन नहीं हुआ था जो विपक्ष में रहने वाली पार्टी के कार्यकर्त्ताओं में जोश भरने के लिये जरूरी होता हैं। वैसे तो इस कार्यक्रम की कमान भी जिले के इकलौते विधायक हरवंश सिंह के ही हाथों में थी लेकिन इस आंदोलन में वैसा सैलाब नहीं उमड़ा जो कि शहर वालों ने इल्ली और न्याय रैली में देखा था। हरवंश सिंह के नेतृत्व में जिले में इल्ली प्रकोप से क्षतिग्रस्त हुयी सोयाबीन की फसल के लिये ये रैली निकाली गयी थी और न्याय रैली उस वक्त निकली थी जब तत्कालीन सांसद नीता पटेरिया की पहल पर हरवंश सिंह एवं उनके साथियों के खिलाफ घारा 307 का प्रकरण दर्ज हुआ था। हालांकि आज तक उस प्रकरण का चालान शिवराज सरकार कोर्ट में पेश नहीं कर पायी हैं। लेकिन ऐसी ऐतिहासिक रैली अब तक नहीं निकल पायी हैं। लेकिन जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी और नगर इंकाध्यक्ष इमरान पटेल के कार्यकाल का यह पहला आंदोलन था। हालांकि जिला कांग्रेस के इस जेल भरो आंदोलन को एक सफल आंदोलन ही माना जायेगा जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने अपनी गिरफ्तारी देकर प्रदेश की शिवराज सरकार के खिलाफ शंखनाद किया हैं। यदि यही वातावरण चुनाव तक बना रहा और भीतरघात की पुनरावृत्ति नहीं हुयी तो जिले में कांग्रेस की हालत में सुधार आ सकता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;भाजपा के मौन धरने में जम कर हुयी भाषणबाजी -&lt;/span&gt;कांग्रेस के आंदोलन के दूसरे ही दिन जिला भाजपा ने भी प्रदेश के निर्देश पर लोकतंत्र बचाओ का धरना दिया। हालांकि यह मौन धरना था लेकिन जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष्र प्रभात झा ही आधा घंटा भी मौन नहीं रह पाये तो भला सिवनी के भाजपायी कैसे पीछे रह सकते थे। भाजपा नेताओं भीषण भाषणबाजी की और बाकायदा विज्ञप्ति भी जारी कर कांग्रेस की केन्द्र सरकार के खिलाफ आरोप लगाये गये। जितने नेता बोल सकते थे उन सबने खूब बोला लेकिन मौन धरने के निर्देशों का पालन भी किया गया लेकिन केवल उनने जो भाषण नहीं दे सकते थे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;गौगपा की केवलारी में सभा संपन्न -&lt;/span&gt;गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की केवलारी की आम सभा भी अजीबो गरीब रही। पहले तो केवलारी के उस.डी.एम. ने सभा की अनुमति दे दी फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि दी गयी परमीशन रद्दकर दी गयी लेकिन इसके बाद भी पूरी शानो शौकत से सभा हो भी गयी। इस सभा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरा सिंह मरकाम भी आये थे। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा से आदिवासी भाइयों को बचने की सलाह देते हुये कहा कि दोनों ही समाज के शोषक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गौंड़ राजवंशों के शासन काल में ना तो चोरी होती थी और ना ही कोई भिखारी दिखता था लेकिन आज क्या हालात है? यह सभी देख रहें हैं। उन्होंने एक नक्शे की चर्चा भी जो कि क्षेत्रीय विधायक द्वारा गांवों में दिखाया जा रहा हैं कि उनके द्वारा नहरों की लाइनिंग का काम प्रस्तावित कर दिया है जो कि शीघ्र ही चालू होने वाला हैं।आपने यह भी कहा कि ऐसेही पिछले चुनावों में पेंच की नहरों के लिये चूने की लाइनें डल गयीं थीं और वे चुनाव तो जीत गये थे लेकिन पेंच का काम अभी भी लटका पड़ा हैं। गौंड़वाना गणतंत्र पार्टी की सभा में अच्छी खासी उपस्थिति आदिवासी वोटरों के मिजाज को दिखा रही थी। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-7294994795022095060?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/7294994795022095060/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/01/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp_16.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7294994795022095060'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7294994795022095060'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/01/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp_16.html' title='Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-6058051804886643814</id><published>2012-01-09T22:41:00.000-08:00</published><updated>2012-01-09T22:41:25.190-08:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;आरती की थाली में रखे दो सौ रुपयेउठाने पर लेकर ऐसा बवाल मचा कि पूरे जिले की राजनीति में भू चाल आ गया&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया ने अटल जी के जन्मदिन पर आयोजन रखा था। कार्यक्रम में भारतमाता की आरती उतारने और दीप प्रज्जवलित करने के बाद मुख्यअतिथि नाना भाऊ ने थाली में दो सौ रुपये रखे जो उनके पीछे चल रहीं आयोजक विधायक नीता पटेरिया ने उठाकर अपनी स्वेटर की जेब में रख लिये। इसके प्रसारित होते ही प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया ने इसे एक पारिवारिक घटना के हास्य विनोद के क्षण बताया। नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने नीता को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि अपने सांसद रहते हुये मैडम परसेन्टेज के नाम से मशहूर हो चुकी नीता पटेरिया ने पूजा की थाली से नोट उठाकर पुरोहित का हक छीन लिया। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने कहा है कि जिनमें सत्य उजागर करने का साहस नहीं होता वे बदनाम करने की साजिश करतें हैं। जिला कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि यह भाजपा का पारिवारिक कार्यक्रम था तो भाजपा को यह खुलासा भी करना चाहिये कि वीडियोग्राफी किसने करायी और उसमें छेड़छाड़ किसने की है?नेहरू युवक केन्द्र के कार्यक्रम का उदघाटन इंका विधायकहरवंश ने एवं समापनमविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकरद्वारा किया जाना भी राजनैतिक हल्कों में चर्चित हो गया हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अटल जी के जन्म दिन पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर मचा बवाल-&lt;/span&gt;क्रिसमस याने 25 दिसम्बर के दिन मिशन स्कूल मैदान में अटल जी जम्न दिन ऐसा मना कि उसकी सुर्खियां नये साल के आयोजन तक बनी रहीं।उल्लेखनीय है कि प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया ने अटल जी के जन्मदिन पर आयोजन रखा था। इसमें कार्यकर्त्ताओं के सम्मान और भोज के साथ ही 26 टेंकरों का भी वितरण किया गया था। आयोजन के मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री नाना भाऊ मोहाड़ थे।कार्यक्रम में भारतमाता की आरती उतारने और दीप प्रज्जवलित करने के बाद मुख्यअतिथि नाना भाऊ ने थाली में दो सौ रुपये रखे जो उनके पीछे चल रहीं आयोजक विधायक नीता पटेरिया ने उठाकर अपनी स्वेटर की जेब में रख लिये। यह सब एक पत्रकार में वीडियो कैमरे में कैद हो गया। एक दिन बाद से ही आग की तरह फैली यह खबर मीडिया की ऐसी सुर्खी बनी ना केवल पूरे प्रदेश वरन कई अन्य प्रदेशों में भी छा गयी। इसके प्रसारित होते ही प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया ने इसे एक पारिवारिक घटना के हास्य विनोद के क्षण बताया और कहा कि जब नाना भाऊ ने यह रुपये रखे तब मैंने उनसे कहा कि मैं इस कार्यक्रम की आयोजक हूं अतः इन पर मेरा अधिकार बनता है और मैंने रुपये उठाकर अपनी जेब में रख लिये। उन्होंने यह भी कहा कि नाना भाऊ ने मुझसे कहा कि आप तो मेरी बड़ी बहन है ताई हैं। इतना कहने के बाद उन्होंने मेरे पैर भी पड़े। नीता पटेरिया ने यह भी कहा एक पारिवारिक घटना को समाचार बनाकर एक महिला का जिस तरह अपमान किया गया उससे मैं बहुत अधिक दुखी हॅूं। इस घटना पर विज्ञप्ति जारी करते हुये नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने नीता को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि अपने सांसद रहते हुये मैडम परसेन्टेज के नाम से मशहूर हो चुकी नीता पटेरिया ने पूजा की थाली से नोट उठाकर पुरोहित का हक छीन लिया। इमरान पटेल ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा से भी सवाल पूछ डाला कि क्या वे नीता पटेरिया से त्यागपत्र लेने का साहस दिखायेंगें। नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने भी एक बयान जारी कर इसे भाजपा का असली चेहरा बताया और कहा कि भाजपा की महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष की इस करनी से उसकी सुचिता की पोल खुल गयी हैं। अखबारों में यह भी प्रकाशित हुआ कि जब मामला प्रदेष स्तर पर पहुंच गया तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने नीता पटेरिया का ढ़ाढ़स बंधातें हुये यह कहा कि आप निष्ंिचत रहे राजनैतिक जीवन में तो यह सब होते रहता हैं।नगर इंकाध्यक्ष के बयान पर संज्ञान लेते हुये जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने कहा है कि जिनमें सत्य उजागर करने का साहस नहीं होता वे बदनाम करने की साजिश करतें हैं। मुद्दा विहीन कांग्रेस निराधार मामले में नीता पटेरिया को बदनाम कर रहीं हैं। किसी पार्टी के निजी कार्यक्रम में टीका टिप्पणी करना और उनके मामलों दखल देना गलत है लेकिन कांग्रेस ऐसा कर रही हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन की विज्ञप्ति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुये जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी और सिवनी विस क्षेत्र के पूर्व इंका प्रत्याशीगण आशुतोश वर्मा,राजकुमार पप्पू खुराना एवं प्रसन्न माले तथा पूर्व मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल के संयुक्त नामों से जारी विज्ञप्ति में भाजपा और नीता पटेरिया पर कई आरोप चस्पा किये। कांग्रेस की इस विज्ञप्ति में यह भी सवाल उठाया गया कि हास्य विनोद यदि किया गया तो आखिर किसके साथ? भारतमाता के या जिन अटल जी का जन्मदिन मना रहें थे उनके साथ। यह भी कहा गया कि यह मामला भाजपा की अंर्तकलह का मामला है जिसमें भाजपा कांग्रेस को जबरन लपेट रही हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि यह भाजपा का पारिवारिक कार्यक्रम था तो भाजपा को यह खुलासा भी करना चाहिये कि वीडियोग्राफी किसने करायी और उसमें छेड़छाड़ किसने की है? इसके जवाबमें नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने कहा कि कांग्रेस अपने नेताजिन्हें श्रीमान 420 का खिताब मिल चुका है वे अपने ऊपर लगे 420 के आरोपों सहित अन्यआरोपों सेकैसे बरी हुये? जिले की राजनीति में टेंकरों और जन्मदिन का है ना यह विचित्र संयोग। लेकिन दोनों में फर्क इतना है कि हरवंश सिंह ने खुद के जन्मदिन पर यह कारनामा किया था लेकिन नीता पटेरिया ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर यह सौगात बांटी हैं। लेकिन दोनों ही कार्यक्रमों में एक बात की समानता यह भी हैं कि दोनों ही नेताओं ने सौगात बांटने के लिये विधायक निधि का ही उपयोग किया हैं। अब यह सही है या गलत? यह तो जनता जनार्दन ही तय करेगी। नीता समर्थक भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि जिसने आयोजन में स्वयं लाखों रुपये खर्च किये हों वो भला दो सौ रुपये चुरायेगा क्या? मामला हंसी मजाक का ही था जिसे जबरन विघ्नसंतोषी नेताओं ने तूल दे दिया। भाजपायी दबी जुबान से यह कहने में भी कोई संकोच नहीं कर रहें है कि भाजपा के ही एक गुट विशेष के लोगों ने इसे तूल दिया हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;हरवंश द्वारा उदघाटन एवं नरेश द्वारा समापन किया जाना चर्चित-&lt;/span&gt;भारत शासन के मानव संसाधन विभाग के अंर्तगत आने वाले नेहरू युवक केन्द्र का एक कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने किया जबकि समापन महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर ने किया। सालों से दोनों नेताओं के बीच नूरा कुश्ती के आरोप इंका और भाजपा दोनों ही पार्टियों में चर्चित रहें हैं। फिर ऐसे में केन्द्र सरकार के एक विभाग द्वारा भाजपा नेता नरेश दिवाकर को समापन समारोह में मुख्य अतिथि बनाना खास चर्चित हो गया हैं। चर्चा का एक मुख्य कारण यह भी है कि अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में सिवनी ब्लाक के एक भवन का लोकार्पण हरवंश सिंह ने किया और प्रदेश की भाजपा सरकार के नुमांइदों ने संबंधित पंचायत सचिव को दंड़ित कर डाला। ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक हैं कि हरवंश समर्थक इंका नेता जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह चंदेल को भी समापन समारोह में मुख्य अतिथि बना सकने को विकल्प रहते हुये भाजपा नेता नरेश दिवाकर का चयन क्यों किया गया?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;और अंत में-&lt;/span&gt;मातृ भाषा गौरव जागरण के कार्यक्रम में अंग्रेजी भाषा से परहेज कर मातृ भाषा का उपयोग करने की सीख देने वाली संस्था द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति में जारी करने वाले ने स्वयं अंग्रेजी में हस्ताक्षर किये थे। आखिर इसे ही तो कहते हैं कि पर उपदेश सहज बहुतेरे। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;राम के नाम पर वोट बटोरने वाली भाजपा के नेता नरेश दिवाकर द्वारा माता सीता के वनवास पर सुनाया मेसेज चर्चित&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी तीनों ही भाजपा नेता हैं। सभी शहर के विकास के लिये गंभीर और प्रयासरत हैं। लेकिन नीता और नरेश पालिका को ऐजेन्सी बनाने सें कतराते हैं। महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर द्वारा पी.जी. कालेज के कार्यक्रम में सीता के वनवास को लेकर सुनाया गया एक एस.एम.एस. सुर्खियों में छाया हुआ हैं। मेसेज सुनाने के पहले नरेश ने यह भी कहा था कि हर कविता या दोहे का कोई ना कोई मतलब होता हैं। ब्राम्हण समाज की युवा शाखाा की ओर से इसे अपमानजनक बताते हुये मांग की गयी कि नरेश सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। नरेश ने माफी ना मांग कर ठेस पहुंची हो तो खेद व्याक्त किया हैं। भाजपा तो राम का नाम लेकर दो सीटों से देश की सत्ता तक पहुंच गयी। भाजपा भातीय संस्कृति की ध्वज वाहक बनने का दावा करती हैं और उसके वरिष्ठ नेता सीता के वनवास और उनके त्याग का मजाक उड़ाने वाले मेसेज पढ़कर सुनाते हैं। इस मामले में सवाल यह उठता है कि अभी तो प्रदेश सरकार से वन विभाग का प्रस्ताव ही केन्द्र सरकार को नहीं भेजा गया हैं। यह बात मुख्यमंत्री को इस प्रतिनिधि मंड़ल नेबतायी ही नहीं या बताने का साहस नहीं जुटा पायी।वैसे भी मुख्यमंत्री पिछले दो साल में चौथी बार ऐसा आश्वासन देकर गये हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पालिका को ऐजेन्सी बनाने से परहेज किया नीता नरेश ने-&lt;/span&gt;विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी तीनों ही भाजपा नेता हैं। सभी शहर के विकास के लिये गंभीर और प्रयासरत हैं। विधायक नीता पटेरिया ने नगर पालिका को विधायक निधि से पांच टेंकर दिये। मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर ने शहर की सबसे अधिक बहुचर्चित घटिया सड़क,एस.पी.बंगले से सर्किट हाउस, बनाने के लिये तीस लाख रु. दिये लेकिन दोनों ने ही नगर पालिका को ऐजेन्सी बनाने से परहेज किया। जबकि पालिका में भी भाजपा का ही अध्यक्ष हैं। भाजपाइयों में चर्चित हैं कि ये दोनों ही नेता पालिका के भ्रष्टाचार से डरे हुये हैं। जबकि यदि देखा जाये तो भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के आरोप आज भला किस पर नहीं लग रहें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश द्वारा सीता माता को लेकर सुनाये गये मेसेज से मचा बवाल-&lt;/span&gt;भाजपा नेताओं की हरकतें इन दिनों राजनैतिक हल्कों में सुर्खियों में बनीं हुयी हैं। अभी विधायक नीता पटेरिया के आरती की थाली से रुपये उठाने की घटना की चर्चा खत्म भी नहीं हुयी थी कि महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर द्वारा पी.जी. कालेज के कार्यक्रम में सीता के वनवास को लेकर सुनाया गया एक एस.एम.एस. सुर्खियों में छाया हुआ हैं। अपने भाषण के अंत में उन्होंने जा कहा उसका अक्षरशः उल्लेख हम कर कर रहें हैं। दिवकार ने कहा कि,“एनुवल डे का कार्यक्रम हैं। चार लाइनें मुझे याद आ रहीं हैं। यदि आप सबकी अनुमति हो तो वो चार लाइनें सुनाकर अपनी बात को विराम दूंगा। याद आ गयी मुझे। जितने भी कवितायें और दोहे होते हैं उसके पीछे कोई ना कोई मतलब होता हैं। मुझे आज एक एस.एम.एस. आया वो एस.एम.एस. इच्छा हुयी आपको पढ़कर सुना दूॅं। सीता के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख है। सीता मां वनवास गयीं थी। सीता के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख हैं। घर में जब तीन तीन सास हों तो जंगल ही ठीक है।बहुत बहुत धन्यवाद।“ इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में आने के बाद मामला चर्चित हो गया हैं। ब्राम्हण समाज की युवा शाखा की ओर से इसे अपमानजनक बताते हुये मांग की गयी कि नरेश सार्वजनिक रूप से माफी मांगें नहीं तो आंदोलन किया जायेगा। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि सीता माता को भारतीय समाज एक आदर्श मानता हैं और उन पर ऐसा घटिया जोक सुनाना निंदनीय हैं। कुछ अखबारों में प्रकाशित इस विज्ञप्ति के साथ ही नरेश दिवाकर का तो खेद व्यक्त करता हूं के शीर्षक से समाचार भी छपा कि मैंने भगवान राम और सीता के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गयी वरन मेरे द्वारा मोबाइल में आये एक एस.एम.एस. विद्यार्थियों को सुनाया गया था। मेरे द्वारा उक्त मेसेज का उललेख करने से किसी को भी कोई ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिये खेद व्यक्त करता हॅूं। मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता सभी के लिये वंदनीय हैं। उनके बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी की मैं कल्पना भी नहीं कर सकता हूॅं। दस साल तक विधायक रहने वाले और आज कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त एक वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता से ऐसी उम्मीद तो कतई नहीं की जा सकती कि वो मोबाइल पर आये एक ऐसे मेसेज को पढ़कर विद्यार्थियों को सुनाये। संघ की पृष्ठ भूमि वाले दिवाकर ने इसी आधार पर बहुत कुछ हासिल किया हैं। भाजपा तो राम का नाम लेकर दो सीटों से देश की सत्ता तक पहुंच गयी। भाजपा के कार्यकर्त्ताओं का गला यह नारा लगा लगा कर फट जाता है कि कसम राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनायेंगें। भाजपा भातीय संस्कृति की ध्वज वाहक बनने का दावा करती हैं और उसके वरिष्ठ नेता सीता के वनवास और उनके त्याग का मजाक उड़ाने वाले मेसेज पढ़कर सुनाते हैं। मेसेज सुनाने के पहले नरेश ने यह भी कहा था कि हर कविता या दोहे का कोई ना कोई मतलब होता हैं। इस दोहे का मतलब तो यही निकलता हैं कि सीता माता तीन सासों से परेशान होकर ही जंगल गयीं थीं। इस बार यह मेसेज मीडिया में आने और बा्रम्हण समाज द्वारा विरोध के कारण नरेश ने खेद तो व्यक्त कर दिया पर साथ्र ही यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने यह मेसेज पढ़कर सुनाया था। लेकिन माफी तब भी नहीं मांगी। यहां एक बात यह भी उल्लेखनीय हैं नरेश दिवाकर ने एम.एल.बी.गर्ल्स स्कूल के वार्षिक उत्सव में 28 नवम्बर को यही मेसेज पढ़कर विद्यालय की छात्राओं को सुनाया था। लेकिन तब वहां मीडिया ना होने के कारण मामला छिपा रहा तो नरेश ने चुप्पी साधी रही। अभी भी यदि यह मीडिया में ना आता तो आगे और कई कार्यक्रमों में वे ये मेसेज शायद सुनाते रहते। वैसे भी मोबाइल पर आने वाले मेसेज के बारे में तो कुछ कहना ही बेकार है। कई तो इतने गंदे मेसेज भी आते हैं कि उन्हें तुरंत मिटाने मे ही भलाई रहती हैं। किसी युवा नेता से तो ऐसे लड़कपन की उम्मीद भी की जा सकती है लेकिन नरेश दिवाकर जैसें एक वरिष्ठ एवं परिपक्व भाजपा नेता द्वारा यह मेसेज सुनाया जाना कहां तक उचित है? साथ ही एक सवाल यह भी उठ खड़ा होता है कि माता सीता का अपमान करने वाली भाजपा और उसके नेता भला राम भक्त कैसे हो सकतें हैं?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;फोर लेन के लिये चौथी बार शिवराज के दिया आश्वासन-&lt;/span&gt;जिला भाजपा का एक प्रतिनिधि मंड़ल मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर और जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के निर्देश पर छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिला। भाजपा नेताओं ने जिले की फोर लेन मामले में उनसे चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय भू तल परिवहन मंत्री जोशी से मिलकर शीघ्र ही समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया। इस मामले में सवाल यह उठता है कि अभी तो प्रदेश सरकार से वन विभाग का प्रस्ताव ही केन्द्र सरकार को नहीं भेजा गया हैं। यह बात मुख्यमंत्री को इस प्रतिनिधि मंड़ल नेबतायी ही नहीं या बताने का साहस नहीं जुटा पायी।वैसे भी मुख्यमंत्री पिछले दो साल में चौथी बार ऐसा आश्वासन देकर गये हैं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा हैं। फोर लेन को लेकर पिछले कुछ महीनों से और भी कई मंेचों से प्रयास जारी हो गये हैं। ऐसा लगता है कि फोर लेन के मामले का जल्द ही कोई निपटारा होने जा रहा हैं इसलिये अब श्रेय लेने चक्कर में हर कोई प्रयास करते दिखना चाह रहा हैं ताकि सेहरा उसके सिर पर बंध सके। जबकि आज जरूरत इसबात की है कि पिछली बार तरह इस बार भी प्रदेश वाइल्ड लाइफ बोर्ड से कोई नकारात्मक कमेंट ना जाये। इसके लिये संयुक्त प्रयास किये जाने चाहिये। प्रदेश सरकार से जब प्रस्ताव केन्द्र सरकार कासे चला जायेगा तब वहां से प्रयास कर जल्दी ही काम शुरू कराने की काशिश की जाना चाहिये। अन्यथा सब कुछ राजनीति का एक खेल बन कर ही हर जायेगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-6058051804886643814?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/6058051804886643814/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2012/01/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;फोर लेन के मुद्दे को सिर्फ राजनैतिक हथियार बना कर राजनीति करने की छूट जनता किसी को भी नहीं दे सकती&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की यह संयुक्त यात्रा सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है आई.डबल्यू .ई. योजना -&lt;/span&gt;इन दिनों विशेषकर सड़कों के निर्माण में बी.ओ.टी. योजना बुहत लोकप्रिय हो रही हैं। बी.ओ.टी. याने बिल्ट,आपरेट और ट्रांसफर। लगाओ, चलाओ और वापस करो। इसी तर्ज पर राजनैतिक क्षेत्र में भी एक योजना हर जगह दिखायी देने लगी हैं जिसे लोग आई,डबल्यू.ई.के नाम से पुकारने लगे हैें। इसका फुल फार्म इनवेस्ट,विन और अर्न याने लगाओ, जीतो और कमाओ। जिस तरह से आज निर्वाचित जनप्रतिनिधि काम कर रहें हैं उससे आम आदमी के मन में यह धारणा काम करने लगी हैं कि अब कोई जनसेवा करने के लिये जन प्रतिनिधि नहीं बनता वरन जीतते ही वह धन सेवा में जुट जाता हैं। जैसे जैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया गया वैसे वैसे सत्ता का विकेन्द्रीकरण हुआ हो या नहीं लेकिन भ्रष्टाचार विकेन्द्रीकरण जरूर होता जा रहा हैं। इसलिये आज जहां देखो वहां भ्रष्टाचार का रोना रोते लोग दिख जाते हैं। अब इसका कारण क्या है? इस पर लोग अलग अलग बातें कहते दिखते हैं। जहां एक ओर जनप्रतिनिधि महंहगें चुनावों और पार्टी के द्वारा थोपी जाने वाली आर्थिक मांगों का रोना रोते हें तो वहीं दूसरी ओर जब लोग “आजई बनिया कालई सेठ“ होते जनप्रतिनिधियों को देखतें हैं तो उन्हें ये सारे तर्क बेमानी लगतें हैं। भ्रष्टाचार मिटाने का दावा तो सभी करतें हैं लेकिन इसकी शुरुआत कहां से करें? यह कोई भी नहीं बता पाता हैं। राजनीति में तो अब भ्रष्टाचार को बेशर्मी से शिष्टाचार कहने से कोई नहीं चूक रहा हैं। इस संबंध में तो गायत्री परिवार की यही मंत्र काम आ सकता हैं कि “हम सुधरेंगें,जग सुधरेगा“। यदि हमने खुद ना सुधरने की कसम खा ली है तो फिर जग के सुधरने की बात करना ही बेमानी होगा।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम की दिल्ली यात्रा सुर्खियों में -&lt;/span&gt;नगरपालिका का प्रतिनिधिमंड़ल दिलली से लौटकर आ गया हैं। दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कमलनाथ द्वारा नगर निगम,नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में भाग लेने सिवनी का प्रतिनिधि मंड़ल पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में गया था जिसमें जलकर्म सभापति राजा पराते , कांग्रेस पार्षद दल के नेता शफीक खान के अलावा इंका पार्षद इब्राहिम खान का समावेश था। इस यात्रा के दौरान इस प्रतिनिधि मंड़ल ने अलग से केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से भेंट कर शहर की समस्याओं से अवगत कराया और शहर में रेल्वे ओवर ब्रिज के साथ सीवर लाइन तथा सड़कों के लिये अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने की मांग भी की हैं।बताया जाता है कि इस दिल्ली यात्रा में पालिका के पूर्व अनुभवियों की टीम भी गयी थी जिसके फोटो भी अखबारों की सुर्खी बनी थी। लेकिन इस टीम का कहीं विज्ञप्ति में उल्लेख नहीं किया गया हैं। लोगों का कयास हैं कि पुरानी अनुभवी टीम ने पर्दे के पीछे कोई कारगर भूमिका निभायी होगी। पालिका की पुरानी और नयी अनुभवी टीम ने क्या गुल खिलाये हैं और इसका शहर को कितना और क्या लाभ होगा? यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा। पालिका की योजनाओं को जब तक प्रदेश सरकार अपनी सिफारिश के साथ केन्द्र सरकार को नहीं भेजेगी तब तक राशि मिलने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता हैं। शहर के लोगों की तो यही अपेक्षा है कि जिस तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रोड़ शो करके भाजपा के लिये वोट मांगें थे उसी तरह जल्दी ही प्रदेश सरकार योजनाओं को दिल्ली भेजे और दलीय भावनासे परे हट कर कांग्रेस के लोग केन्द्र से राशि दिलवायें ताकि स्वर्णिम मध्यप्रदेश की परिकल्पना के अनुसार स्वर्णिम शहर भी बन सकें। वैसे तो पालिका की युवा टीम से शहर के लोगों को बहुत उम्मीदें हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;फोर लेन सिर्फ राजनीति करने की छूट किसी को भी नहीं-&lt;/span&gt;फोर लेन सड़क को लेकर राजनीति का खेल अभी चल ही रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी राजनीति तो कर रहीं हैं लेकिन सेहरा बन ही नहीं पा रहा है जिसे अपने सिर पर बांधने के लिये सभी बेताब हैं। जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने एक प्रतिनिधि मंड़ल दिल्ली ले जा कर भू तल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी, पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन और शहरी विकास मंत्री कमलनाथ से भेंट कर मसले को जल्दी निपटाने का मांग की थी। उसके बाद दिल्ली से भोपाल आये वन विभाग के अधिकारी राजेश गोपाल सहित एनएचएआई के अधिकारियों की हरवंश सिंह से उनके ही बंगले भी हुयी भेंट के समाचार भी अखबारों में छपे। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट की सीईसी के सदस्य के रूप में राजेश गोपाल के प्रदेश सरकार के मुख्यसचिव को भेजे गये पत्र के आधार पर ही फोर लेन का काम पूरे जिले में रुक गया था। जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ कुरई घाट का 8.9 कि.मी. का हिस्सा ही विचाराधीन था जिस पर भी कोर्ट ने स्टे नहीं दिया था।इसके बाद हरवंश समर्थकों का दावा है कि दिल्ली में हरवंश सिंह ने वन एवं पर्यावरण विभाग और तथा एनएचएआई के अधिकारियोंकी संयुक्त बैठक कर पूरे मामले में सर्वमान्य हल निकाल लिया हैं और जल्दी ही पूरा रुका हुआ काम शुरू हो जावेगा। लेकिन जानकार लोगों का दावा है कि एनएचएआई का नया प्रस्ताव अभी जिले में ही वन विभाग के पास विचाराधीन है जिस पर परीक्षण किया जा रहा हें। फिर यह प्रदेश के वाइल्ड लाइफ बोर्ड के भोपाल जायेगा और वहां नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड को मामला दिल्ली भेजा जायेगा जहां अंतिम स्वीकृति के बाद ही काम शुरू हो पायेगा। दूसरी तरफ भाजपा यह दावा कर रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इसे पूरा कराने की पूरी कोशिश कर रहें हैं। शिवराज सिंह ने भी सिवनी के कुछ लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलाने की बात एक साल पहले कही थी। लेकिन ना तो ले जाने वाले दिल्ली ले गये और ना ही जाने वालों ने कभी शिवराज से यह जानने की जरूरत महसूस की कि वे उन्हें कब दिल्ली ले जायेंगें। और मामला अखबारों की सुर्खियां भर बन कर रह गया। बीते दिनों जिले से बहुत कुछ छिना हैं। लेकिन मिला कुछ भी नहीं हैं।इससे दुखी जिले के लोगों ने फोर लेन के संघर्ष में ऐतिहासिक बंद कर एक मिसाल कायम की थी। लेकिन तब मामला कोर्ट में लंबित होने कारण केन्द्र और राज्य सरकार के पास यह बहाना था कि चाहते हुये भी हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अब जबकि मार्च 2011 में कोर्ट ने आपत्तिकर्त्ता की याचिका खारिज कर दी हैं तब इस विलंब के लिये किसी के भी पास कोई बहाना नहीं हैं। लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी यदि मामला अभी जिले में लंबित है तो इसके लिये भला जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को कैसे क्लीन चिट दी जा सकती हैं? बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध लेय की तर्ज अब भी यदि सभी जन प्रतिनिध संयुक्त रूप से प्रयास कर फोर लेन का निर्माण पूरा नहीं करोंगें तो जिले की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी क्योंकि इस मुद्दे सिर्फ राजनीति करने का एक हथियार बनाने की छूट किसी को भी नहीं दी जा सकती हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-948510654881036117?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/948510654881036117/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_19.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/948510654881036117'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/948510654881036117'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_19.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-2984886885134569460</id><published>2011-12-12T21:05:00.000-08:00</published><updated>2011-12-12T21:05:22.075-08:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;शिवराज और सरकार के खिलाफ विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने की अनुमति नहीं दी जाती है?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है।यह भी चर्चित है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। कुलस्ते ने कांग्रेस और राष्ट्रीय नेतृत्व पर जम हर निशाने साधे लेकिनइस पर कांग्रेस की चुप्पी चर्चा में हैं। पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं।प्रदेश अध्यक्ष मौर्य ने इंका और भाजपापर निशाना साधते हुये कहा कि दोनों की करनी एक ही है। गौगपा ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की है। एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जिले में कुलस्ते की आदिवासी सम्मान यात्रा चर्चित-&lt;/span&gt;नोट फार वोट कांड़ में जमानत पर रिहा हुये भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र मंड़ला से आदिवासी सम्मान यात्रा प्रारंभ की है। नये मंड़ला संसदीय क्षत्र में नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव एवं सिवनी जिले की लखनादौन एवं केवलारी विस सीट के अलावा मंड़ला जिले की पांचः विस सीटें आती हैं। यह भी एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि गोटेगांव और केवलारी विस क्षेत्र से कांग्रेस के नर्मदा प्रजापति और हरवंश सिंह विधायक हैं लेकिन पिछले लोस चुनाव में चुनाव हारने वाले कुलस्ते इन दोनों ही सीटों से चुनाव जीते थे। जिले की लखनादौन विस सीट से कुलस्ते को भारी मतों से हारना पड़ा था। इसके साथ ही वे अपने गृह जिले मंड़ला की पांचों विस सीटों से भी चुनाव हार गये थे। गोटेगांव के बाद कुलस्ते की यात्रा ने लखनादौन एवं केवलारी क्षेत्र में आयोजित सम्मान समारोहों में हिस्सा लिया। कुलस्ते ने कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय नेतृत्व को कठघरे मे खड़ा करते हुयें कई आरोप लगाये और कहा कि कांग्रेस आदिवासी और दलितों को बिकाऊ समझती हैं। हमें समय आने पर बता देना है कि हम बिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के लिये कांग्रेस ने हमें प्रलोभन दिया और जब हमने ादन में उसे उजागर किया तो हमें ही जेल में डालकर सरकार ने प्रजातंत्र का अपमान किया हैं। जिसका बदला हम लेकर रहेंगें। इन सब आरोपों पर कोंग्रेस की चुप्पी भी कम रहस्यमय नहीं हें। वैसे भी पूर्व में यह आरोप लगते रहें हैं कि हरवंश और कुलस्ते के बीच परिसीमन के समय से ही नूरा कुश्ती चलती रही हैं। जिला भाजपा द्वारा जिले में आयोजन की भारी तैयारियां की गयी थी। उनके इस आयोजन में जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायक नीता पटेरिया, शशि ठाकुर,कमल मर्सकोले, मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर,पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक टेकाम सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुये। भाजपा के सभी नेताओं ने संप्रग सरकार और कांग्रेस पर जमकर निशाने साधे और उसे प्रजातंत्र का हत्यारा बताया और यह भी कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार को हर जगह बढ़ावा दे रही हैं। कुछ जगह जनता और आदिवासियो की नगण्य उपस्थिति भी अखबारों की सुर्खी बनी रहीं हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चित रहा कि जिला भाजपा का इस आयोजन के दौरान फील्ड मेनेजमेंट से कहीं अच्छा मीडिया मेनेजमेंट रहा हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चित है कि आदिवसी सम्मान यात्रा में जिले के आदिवासी विस क्षेत्र बरघाट और आदिवासी बाहुल्य वाली सिवनी विस क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में कुलस्ते ने अपना कार्यक्रम क्यों नहीं रखा? भाजपा के आदिवासी नेता कुलस्ते ने अपने संसदीय क्षेत्र तक ही इस अभियान को सीमित रखा इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जारी हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;इंका भाजपा का विज्ञप्ति युद्ध शवाब पर -&lt;/span&gt;पिछले कुछ दिनों से नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी के तीखे तीर इंका नेता हरवंश सिंह पर चल रहे हैं। उन्हें जवाब देने की कमान नगर इंका अध्यक्ष इमरान पटेल ने थाम रखी हैं। जहां एक ओर प्रेम तिवारी हरवंश सिंह की कारगुजारियों पर आक्रमण कर रहें हैं तो दूसरी ओर इमरान पटेल ने नीता पटेरिया पर निशाना साधना शुरू कर दिया हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भाजपायी गुटबाजी में प्रेम तिवारी विधायक नीता पटेरिया के खेमें के माने जाते हैं। इसीलिये नगर इंकाध्यक्ष ने नीता को कठघरे में खड़ा करने की योजना बना रखी हैं। इस विज्ञप्ति युद्ध में आरोपों के पूरे जवाब देने के बजाय सुविधानुसार जवाब देने और अपनी ओर से सवाल भी दागने से भी कोई नहीं चूक रहा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;बसपा ने भी दी जिले में राजनैतिक दस्तक -&lt;/span&gt;बसपा ने जिला मुख्यालय पर बाबा साहब अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विशाल आयोजन कर अपनी चुनावी तैयारियों की शुरुआत कर दी हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आई.एस.मौर्य ने इस विशाल आम सभा में कांग्रेस और भाजपा को जम कर कोसा और कहा कि इन दोनों दलों की करनी में कोई फर्क नहीं हें। दोनों ही दलों की सरकारों ने दलितों को छला है और अपनी तिजोरियां भरी हैं। बहन मायावती ने जब इन वर्गों के उत्थान के लिये कड़ी मेहनत शुरूकी है तो वे दोनों दलों की आंखों में खटकने लगी हैं। हमें आदिवासियों और दलितों के उत्थान के लिये उनके शैक्षणि,आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिये काम करना हें तभी बाबा साहेब का सपना साकार होगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;शिवराज के खिलाफ तो आंदोलन कर सकते हो पर हरवंश के खिलाफ नहीं -&lt;/span&gt;गौगपा ने विस उपाध्यक्ष और केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्मदिन एक शासकीय आयोजन के रूप में आयोजित किये जाने और शासकीय धन खर्च किये जाने की जांच की मांग मुख्यमंत्री से की हें। गौगपा ने इसके अलावा 12 अन्य बिन्दुओं पर भी जांच की मांग की हैं। गौगपा के प्रवक्ता विवेक डहेरिया ने प्रेस को विज्ञप्ति जारी कर यह आरोप लगाये थे कि छपारा जनपद पंचायत के सी.ओ. ने इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन पर शासकीय आयोजन किया और शासकीय धनराशि खर्च की है जो कि अनुचित हैं। इस अवसर पर विधायक निधि से पंचायतों को बांटे गये टंेकरो पर से लिखे हुये इस वाक्य को मिटाने की मांग की है जिसमें यह लिखा हुआ है कि हरवंश सिंह के जन्म दिन पर ये टेंकर दिये गये हैं। गौगपा प्रवक्ता ने एक अत्यंत गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ तो थाने के अंदर भी विरोध करने की अनुमति प्रशासन दे देता है लेकिन इंका विधायक हरवंश सिंह का विरोध करने के लिये केवलारी विस क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जाती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और इंका विधायक हरवंश के बीच सांठ गांठ के आरोप इंका और भाजपा में तो लगते ही रहें हैं लेकिन अब गौगपा ने भी इसी ओर इशारा करते हुये प्रशासन और सरकार को कठघरें में खडा़ किया है। लेकिन कहीं भी और कोई भी ऐसे आरोप लगाते रहें लेकिन उससे किसी को भी फर्क नहीं पड़ता हैं। सियासत सियासत के तरीके से चलती जिसमें आरोप लगाने से आज कल कुछ नहीं होता क्योंकि नूरा कुश्ती नेताओं की सुविधा के हिसाब से होती हैं इसमें पार्टियों का ख्याल रखना जरूरी नहीं होता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-2984886885134569460?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/2984886885134569460/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2984886885134569460'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2984886885134569460'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_12.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-1663811779223381321</id><published>2011-12-05T22:00:00.000-08:00</published><updated>2011-12-05T22:00:01.145-08:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच को लेकर नीता के सवाल पर सदन में मंत्री का जवाब और सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा में अंतर को लेकर शुरू हो गयीं हैं चर्चायें&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक लगाया गया प्रश्न और सिचायी मंत्री का जवाब जन चर्चा में बना हुआ हें।इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी। जिसे टाला जा रहा हैं।सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदर सिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने जरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। एफ.डी.आई. के विरोध में जिला भाजपा द्वारा समर्थन देने बाद भी उसकी दोरही भूमिका चर्चित हैं। ना तो कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला और ना ही उन्होंने अपने व्यवसायिक प्रतिष्ठान ही बंद रखे।ऐसा क्यों हुआ इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें सियासी हल्कों में जारी हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच को लेकर सदन के अंदर और बाहर के बयान हुये चर्चित -&lt;/span&gt;विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक नीता पटेरिया द्वारा पेंच परियोजना को लेकर एक प्रश्न लगाया गया था। इस प्रश्न का जवाब देते हुये जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि प्रदेश सरकार इस योजना को चालू रखे हुयी हैं। लेकिन यह योजना कब तक पूरी होगी? इस सवाल का जवाब वे यह कहकर टाल गये कि भू अधिग्रहण के मामलों में विलंबहोने के कारण यह नहीं बताया जा सकता कि येयोजना कब तक पूरी होगी। विधानसभा में लगाये गये प्रश्न को लेकर भी कुछ सवाल खड़े हो गये हैं। पहला सवाल तो यह है कि नीता पटेरिया ने यह सवाल क्यों नहीं पूछा कि क्या प्रदेश सरकार ने लागत बढ़ने के कारण बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था या नहीं? यह सर्वविदित हैं कि प्रमुख सचिव आर.एस.जुलानिया ने एक वीडियो कांसफ्रेसिंग में यह निर्देश दिये थे किप्रदेश सरकार ने इस योजना को बंद करने के निर्देश केन्द्र को भेज दिये हैं। इसनिर्देश के बाद ही मुख्य अभियंता के कार्यालय से दूसरी तिमाही के लिये आवंटित राशि में से 20 सितम्बर 2011 तक खर्च की गयी 327 करोड़ रु. की राशि के बाद शेष बची एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि समर्पण करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। इस संबंध में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत प्रमुख सचिव जुलानिया के कार्यालय में आवेदन लगा कर प्रदेश द्वारा केन्द्र सरकार को पेंच परियोजना बंद करने के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी थी जिसे प्रमुख सचिव ने प्रमुखअभियंता सिंचायीको अग्रेषित कर दिया था और प्रमुख अभियंता ने मुख्यअभियंता सिचायी को भेज दिया था। जिसपर मुख्य अभियंता ने यह जवाबदेदिया था इस कार्यालय से केन्द्र सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया हैं। यहां यह विशेषरूप से उल्लेखनीय हैं किकेन्द्र सरकार को कोई भी प्रस्ताव प्रदेश सहकार से ही भेजा जाता हैं मुख्यअभियंता ऐसा कोई प्रस्ताव सीधे केन्द्र सरकार को भेज ही नहीं सकते हैं। यह सवाल उठनाभी स्वभाविक ही हैं कि यदि प्रदेश सरकार की इस योजना को बंद करने की कोई योजना नहीं थी तो फिर मुख्य अभियंता के कार्यालय से स्वीकृत राशि में 1 करोड़ 22 लाख रुपये सरेंडर करने का प्रस्ताव शासन को क्यों भेजा गया?यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अपनी रथ यात्राकेदौरान जब पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी छिंदवाड़ा आये थे और मंच से पेंच परियोजना बंद की बात उठी थी तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दहाड़ कर कहा था कि कोई भी माई का लाल इस परियोजना को बंद नहीं करा सकताऔर यह योजना 2013 तक पूरी कर ली जायेगी। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ पर अड़ंगे लाने का आरोप भी लगाया था। लेकिन जब विधानसभा में उनकी ही पार्टी की विधायक नीता पटेरियाने इस योजना के पूरे होने के बारे सवाल पूछा तो सदन के अंदर उनकी ही सरकार के मंत्री अवधि बताने को यह कह कर टाल गये कि भू अर्जन के मामलों में विलंब होने के कारण यह अवधि नहीं बतायी जा सकती। प्रदेश में भाजपा सरकार का यह आठवां साल हैं लेकिन सरकार के पास इय बात भी कोई जवाब नहीं हैं कि उनकी सरकार का प्रशासनिक अमला इन आठ सालों में भी भूअर्जन के मामले निपटाक्यों नहीं पाये? सदन के बाहर मुख्यमंत्री की घोषणा और सदन के अंदरसिचायी मंत्री के जवाब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;हर हाल में केवलारी विधानसभा जीतने की बात कर गये मेनन -&lt;/span&gt;प्रदेश भाजपा के संगठन मंत्री अरविंद मैनन का दौरा सियायी हल्कों में चर्चित हैं। वैसे तो यह दौरा वोट फार नोट कांड़ में फंसे भाजपा नेता फग्गन सिंह कुलस्ते के लखनादौर और केवलारी प्रवास को लेकर था लेकिन बताते हैं कि मेनन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस बार पार्टी को चारों सीटों पर विजय मिलनी चाहिये। वैसे भी जिले में तीन सीटें तो भाजपा के पास हैं ही सिर्फ केवलारी सीट से इंका के हरवंश सिंह विधायक है जो किविस उपाध्यक्ष हैं। मेनन ने केवलारी सीट जीतने के लिये कमर कसने का आव्हान किया। वैसे भाजपायी हल्कों में सन 1993 के चुनाव से ही यह चर्चा आम रही हैं कि केवलारी में हर चुनावमें भाजपा को भाजपा ही हराती हैं। यह बात अलग है कि हर बार चेहरे बदल जाते हैं। कुछ दिनोंपहले केवलारी का प्रभार पाने वाले सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन नेजरूर आक्रामक तेवर अपनाये थे लेकिन कुछ विवादों में फंसने के बाद अब वे खामोश हो गये लगते हैं। अब यह तो खोज का विषय है कि वे खुद खामोश हो गयें हैं या उन्हें खामोश करा दिया हैं? यदि ऐसा ही रहा तो मेनन जी की जीतने की बात एक बार फिर धरी की धरी रह जायेगी। हां ऐसा जरूर हो सकेता हैं जैसा कि पिछले चुनाव में हुआ था कि केवलारी विस से लोकसभा में तो भाजपा जीत जाये और विधानसभा में काग्रेस को एक बार फिर जीत मिल जाये। इंका और भाजपा के बीच सुविधा का संतुलन दसों सालों से चलते आ रहा हैं जो कि अगली बार रुकेगा इसकी संभावना कम ही दिख रही हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;बंद को लेकर भाजपा की भूमिका चर्चित-&lt;/span&gt;एफ.डी.आई.याने खुरदा व्यापार में विदेशी निवेश को लेकर बंद में भाजपा की दोहरी भूमिका चर्चित है। व्यापारियों द्वारा आहूत बंद को जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन जैन ने भाजपा का समर्थन घोषित किया था। लेकिन सिवनी में ना तो बंद सफल रहा और ना ही समर्थन देने के बाद कोई भी भाजपायी बंद कराने निकला।और तो और भाजपायियों के व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी पूरी तरह ऐसे खुले रहे मानो वे केन्द्र सरकार की इसनीति के समर्थन में हों और मजबूरी में उन्होंने बंद का कागजी समर्थन दिया हो। भाजपा के व्यापारिक प्रकोष्ठ ने जरूर बंद के दूसरे दिन कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर अपने कर्त्तव्यों की इतिश्री जरूर कर ली थी। अब ऐसा क्यों हुआ? इसे लेकर तरह तरह की चर्चायें जरूर राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-1663811779223381321?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/1663811779223381321/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/1663811779223381321'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/1663811779223381321'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/12/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-6364047401132114578</id><published>2011-11-14T21:59:00.000-08:00</published><updated>2011-11-14T21:59:31.603-08:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;वन मंत्री सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार कोई भाजपा नेता नहीं ब्लकि इंका विधायक हरवंश सिंह ही दिखे&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;तेदूं पत्ता बोनस कार्यक्रम के लिये आये प्रदेश के वन मंत्री सरताज सिंह का दौरा भी राजनैतिक क्षेत्रों में विवादित होकर रह गया हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश के बर्रा स्थित निवास में सरताज सिंह का भोजन कार्यक्रम विवाद में रहा। नीता पटेरिया को छोड़कर भाजपा के सभी जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का अघोषित बहिष्कार कर दिया था। सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार भी किसी भाजपा नेता के बजाय सिर्फ हरवंश सिंह ही दिखे और कांई नहीं। ऐसे में यदि नूरा कुश्ती के चर्चे आम तो भला क्या गलत है? जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन भी 11 11 11 के विशेष दिन पड़ा तो इसका आयोजन भी विशेष रहा। शासन द्वारा दी जाने वाली विधायक निधि से हरवंश सिंह ने अपने केवलारी क्षेत्र में पड़ने वाली 21 पंचायतों को टेंकर दिये। यह सही है कि राजशाही के दौरान राजा अपना या अपने बच्चों का जन्म दिन मनाते थे औा अपने खजाने से अपनी जनता को खैरात बांटा करते थे। लेकिन लोक शाही में एक लोक सेवक द्वारा शासकीय आयोजन कर सरकारी पैसे से टेंकर बांटना कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;क्षेत्रीय भाजपा विधायक शशि ठाकुर भी बोनस वितरण कार्यक्रम में रहीं अनुपस्थित-&lt;/span&gt;तेदूं पत्ता बोनस कार्यक्रम के लिये आये प्रदेश के वन मंत्री सरताज सिंह का दौरा भी राजनैतिक क्षेत्रों में विवादित होकर रह गया हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश के बर्रा स्थित निवास में सरताज सिंह का भोजन कार्यक्रम विवाद में रहा। हालांकि हरवेश सिंह ने इंकाइयों के साथ साथ भाजपाइयों को भी भेाज में आमंत्रित किया था लेकिन अधिकांश भाजपाइयों ने इसमें शरीक होना उचित नहीं समझा। जिले के भाजपा नेताओं का आरोप हैं कि वन मंत्री ने भाजपा के नेताओं और जन प्रतिनिधियों को कोई तव्वजोनहीं दी। जिला भाजपा के संगठन के साथ ही जन प्रतिनिधियों को भी उचित महत्व नहीं दिया गया। क्षेत्रीय भाजपा विधायक शशि ठाकुर के स्थान पर विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह से अध्यक्षता कराना उन्हें रास नहीं आया और लखनादौन में रहते हुये भी उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होना उचित नहीं समझा। इसी तरह महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर जिन्हें कि कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त हैं उन्हें विशिष्ट अतिथिबनाना और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त हरवंश सिंह से अध्यक्षता कराना भी उनके समर्थकों को रास नहीं आया और वे लखनादौन ना रुक कर सीधे जबलपुर चले गये। क्षेत्रीय सांसद रहते हुये भी इंका के बसोरी सिंह मरकाम एवं भाजपा के के.डी.देशमुख का तो नाम ही कार्ड से गोल कर दिया गया था। भाजपा विधायक कमल मर्सकोले एवं भाजपा के ही नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने भी कार्यक्रम किनारा कर लिया था। पूर्व वन मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसन, जिन्होंने नई तेदूं पत्ता नीति बनायी थी जिसे लेंकर भाजपा कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुये अपने आपको आदिवासियों का बड़ा हितैषी बताती हैं उन्हें भी कारर्यक्रम में दर किनार कर दिया गयश। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि बिसेन ही हरवंश सिंह के खिलाफ भाजपा की ओर से केवलारी से चुनाव लड़े थे। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन सहित संगठन के सभी पदाधिकारियों ने कार्यक्रम का अघोषित बहिष्कार कर दिया। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी की विधायक नीता पटेंरिया जरूर कार्यक्रम में सम्मलित हुयी जिस पर मीडिया ने 63 और 36 के आंकड़े का सवाल उठाते हुये समाचार भी प्रकाशित हुये जिसका प्रतिवाद करते हुये नीता पटेरिया ने यह सफाई भी दी कि उनके हरवंश सिंह से संबंध 36 के थे, हैं और रहेंगें। ऐसा नहीं हैं कि भाजपा के सात साल के कार्यक्रम में यह कोई पहला मौका हें जब भाजपाइयों को यह लगा हो कि आज भी उनकी सरकार नहीं हैं। पहले भी कई बार ऐसे अघोषित बहिष्कार भाजपाई कर चुके हें लेकिन बार बार इसकी पुनरावृत्ति होने से सियासी हल्कों में तरह तरह के सवाल उठना स्वभाविक हैं। वैसे भी इंका विधायक हरवंश और भाजपा के बीच नूरा कुश्ती के समाचार कोई नये हें। गोदे में इंका की ओर से तो एक ही पहलवान हरवंश सिंह रहते लेकिल समय समय पर भाजपा की ओर के पहलवान बदलते रहतें हैं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि सरताज सिंह जब नरसिंहपुर होशंगाबाद लोस क्षेत्र से चुनाव लड़ा करते थे तब इंका प्रत्याशी रामेश्वर नीखरा और स्व. अर्जुन सिंह के चुनाव संचालकों ने कई इंका नेताओं पर चुनाव में भीतरघात करने के आरोप लगाये थे। भीतरघात करने के माहिर नेता पार्टी में इन आरोपों से बच भले ही गयें हों लेकिन जीतने वाला तो उनका एहसान मानता ही हैं। सरताज सिंह के इस कार्यक्रम के बारे में अब यह बात लोगो की समझ से परे है कि भाजपा और इंका के आदिवासी नेताओं की अनुपस्थिति के बाद भी प्रदेश की शिवराज सरकार अपने आप को आदिवासियों का शुभचिंतक भला कैसे बता पायेगी? जबकि उनके वन मंत्री सरदार सरताज सिंह को जिले में सरदार,सरताज और असरदार भी किसी भाजपा नेता के बजाय सिर्फ हरवंश सिंह ही दिखे और कांई नहीं। ऐसे में यदि नूरा कुश्ती के चर्चे आम तो भला क्या गलत है? भाजपायी हल्कों में यह भी चर्चा है कि जिला संगठन और अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी तत्काल ही सारी जानकारी प्रदेश के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी हैं। अब देखना यह है कि प्रदेश भाजपा का आलकमान इस मामले में वन मंत्री के खिलाफ कोई कार्यवाही करता हैं या फिर चुप रह कर हरवंश और भाजपाइयों की नूरा कुश्ती जारी रहने के पुख्ता होने का प्रमाण देता हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जन्मदिन पर विधायक निधि से बंटे टेंकर-&lt;/span&gt;जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का जन्म दिन भी 11 11 11 के विशेष दिन पड़ा तो इसका आयोजन भी विशेष रहा। शासन द्वारा दी जाने वाली विधायक निधि से हरवंश सिंह ने अपने केवलारी क्षेत्र में पड़ने वाली 21 पंचायतों को 65 हजार रु. की लागत वाले 4 हजार लीटर की क्षमता वाले टेंकरों की चाबी सौंपी। उनकी योजना है कि अपने क्षेत्र की हर ग्राम पंचायत को सांसद एवं विधायक निधि से चुनाव के पहले टेंकरों से लैस कर दिया जाये। विकास कार्यों के लिये विधायक निधि से पैसा देना कोई गलत बात नहीं हैं। लेकिन राजा महाराजाओं जैसे अपने जन्म दिन पर आयोजन कर शासकीय राशिसे खैरात की भांति टेंकर बांटने को लेकर विवाद चल पड़ा हैं। यह सही है कि राजशाही के दौरान राजा अपना या अपने बच्चों का जन्म दिन मनाते थे औा अपने खजाने से अपनी जनता को खैरात बांटा करते थे। लेकिन लोक शाही में एक लोक सेवक द्वारा शासकीय आयोजन कर सरकारी पैसे से टेंकर बांटना कतई उचित नहीं कहा जा सकता हैं। इस मामले में मीडिया में हल चल मची और इसे विधायक निधि का दुरुपयोग बताया गया लेकिन भाजपा सहित अन्य दलों की इस मामले में चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चित हैं। जरा जरा सी बात गज गज भर की विज्ञप्तियां जारी करने वाले प्रवक्तागण ना जाने क्यों चुप बैठे हैं? इस मामले को कहीं किसी लेबल पर उठाया जायेगा या नहीं ? इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं हैं। छपारा ब्लाक का एक बड़ा हिस्सा सिवनी विस क्षेत्र में भी आता हैं जिसकी विधायक प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया हैं वे इस मामले को उठाती हैं या नहीं? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में उत्सुकता हैं क्योंकि सरताज सिंह के कार्यक्रम में उनकी अकेली उपस्थिति को लेकर सवाल उठाये गये थे जिनके जवाब देने का यह एक अवसर हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-6364047401132114578?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/6364047401132114578/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/11/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6364047401132114578'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6364047401132114578'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/11/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_14.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-5061074350512174081</id><published>2011-11-07T21:21:00.000-08:00</published><updated>2011-11-07T21:21:35.678-08:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जोशी के बारे में हरवंश के बहुचर्चित भाषण के कारण क्या फोर लेन की गेंद जोशी ने नाथ के पाले में डाल दी?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: magenta;"&gt;क्या छिंदवाड़ा में जोशी के लिये दिये गये हरवंश सिंह के चर्चित भाषण ने ही फोर लेन की मांग को दरकिनार करवा दिया? और जोशी ने बात कमलनाथ के पाले में डालकर मुक्ति पा ली। कमलनाथ को कातिल बताने वालों को उनके दरबार में ले जाकर हरवंश सिंह ने नाथ को खुश करने का जो प्रयास किया उसके कारण कमलनाथ एक बार फिर जिले में विवादित बना दिये गये हैं। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी विधायकनीता पटेरिया के समर्थक माने जाने वाले नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी की इंका विधायक हरवंश सिंह के मामले में अपनाये गये तीखे तेवर सियासी हल्कों में चर्चित हैं। फलाने नेता के आर्शीवाद से और फलाने नेता की अनुशंसा से पद मिलने पर बधायी छपने का चलन तो आज कल हर पार्टी में आम हो गया हैं। ऐसे में गीता सिंह को प्रदेश कांग्रेस का महामंत्री बनाये जाने पर इंकाइयों की चुप्पी के तरह तरह के अर्थ लगाये जा रहें हैं। प्रदेश और जिले के स्थापना दिवस समारोहों में बुलाये गये नेता और पहुचने वाले नेताओं की ओर यदि गौर फरमायें तो कुछ नये समीरकरण स्थापित होते भी दिख रहें हैं। नीता अतिथि बननेे पर भी नहीं पहुचीं जबकि नरेश बिना अतिथि बनाये ही पहुंच गये थे जबकि समारोह के मुख्य अतिथि हरवंश सिंह थे।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;फोर लेन का हरवंशी खेल चर्चित-“&lt;/span&gt; दादा ठाकुर हरवंश सिंह बड़े मेहनती, जमीनी,किसानों के हितेषी और पट (बैल जोड़ी दौड़ प्रतियोगिता)के शौकीन नेता हैं। हालांकि वे एक बार 1990 में सिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गये थे थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पट के विशेषज्ञ की तरह दान बदल कर केवलारी से चुनाव लड़े और आज हमारे सामने विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में यहां मौजूद हैं।“ किसी सार्वजनिक सभा में इंका विधायक हरवंश सिंह का कोई समर्थक यदि ऐसा भाषण देने के बाद अपनी मांग रखे तो आप ही सोचिये कि उसकी मांग का क्या हश्र होगा ? जोश की शान में कुछ इसी अंदाज में कसीदे गढ़ते हुये इंका विधायक हरवंश सिंह ने छिंदवाड़ा की आम सभा में भाषण दिया था। उल्लेखनीय है कि श्री सी.पी.जोशी राजस्थान में विस चुनाव केवल एक वोट से हार गये थे और उसके बाद सांसद बनने के बाद भू तल परिवहन मंत्री के रूप में छिंदवाड़ा आये थे जहां सिवनी के इंकाइयों का एक जत्था फोर लेन की समस्या को लेकर गया हुआ था। अपने भाषण की ऐसी शुरूआत करने के बाद हरवंश सिंह ने जिले की फोर लेन की बात रखी और जोशी ने बात कमलनाथ के पाले में डालकर मुक्ति पा ली। किसी की यह भी हिम्मत नहीं थी कि वेा यह बता सकता कि फोर के कातिल के रूप में जिले की जनता कमलनाथ को ही जवाबदार मानती हैं। उनसे ही समय लेकर आने की बात से जिले में कांग्रेस के खिलाफ ही संदेश जायेगा और कमलनाथ एक बार फिर विवाद में आ जायेंगें। फोर लेन विवाद में लंबे अर्से तक चुप्पी साधने वाले जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह का सुप्रीम कोर्ट से मामला निपटने के लंबे समय बाद आयी सक्रियता को लेकर राजनैतिक हल्कों में तरह तरह की चर्चायें जारी हैं। इस मामले में प्रारंभ से ही सक्रिय रहें इंका नेता आशुतोष वर्मा का इस प्रतिनिधि मंड़ल में ना जाना भी चर्चित हैं। नागरिक मार्चे के नेताओं को भी हरवंश सिंह ने ले जाने का प्रयास किया था जो कि सफल नहीं हो पाया। दूसरी ओर कमलनाथ को फोरलेन का कातिल बताने वाले जनमंच के बचे खुचे नेताओं और लखनादौन के मुनमुन राय का छिंदवाड़ा जाकर ज्ञापन देना भी चर्चित हैं। इंकाई हल्कों में जारी चर्चाओं पर यदि विश्वास किया जाये तो ये मानना पड़ेगा कि कमलनाथ के यहां अपने गिरते ग्राफ से चिंतित हरवंश ने नाथ को खुश करनें के लिये यह राजनैतिक खेल खेला और यह बताने की कोशिश की है कि जनमंच के जो लोग आपको फोर लेन का कातिल बताने पर तुले हुये थे उन सबको आपके दरबार में हाजिर कर दिया हूॅं। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि कमलनाथ के यहां अपना ग्राफ बढ़ाने के चक्कर में हरवंश सिंह ने कमलनाथ को एक बार फिर जिले में विवादित बनाने का काम भी कर डाला हैं। फोर लेन का मामला तो सुप्रीम कोर्ट की न्यायायिक बाधा समाप्त हो जाने के बाद हल होना ही हैं लेकिन इसकी प्रक्रिया में कुछ समय और लग सकता हैं। साथ ही वन एवं पर्यावरण विभाग के यहां से अपना प्रोजेक्ट पूरा कराने के लिये भू तल परिवहन मंत्रालय तो लगा ही है और प्रयास वहां करने की जरूरत हैं। लेकिन इस सबके बाद भी छिंदवाड़ा गये इंकाइयों को इस बात जवाब देना मुश्किल हो रहा हैं कि आखिर वहां उन्हें हासिल क्या हुआ?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;प्रेम तिवारी की बयानबाजी चर्चित-&lt;/span&gt;प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं सिवनी विधायकनीता पटेरिया के समर्थक माने जाने वाले नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी की इंका विधायक हरवंश सिंह के मामले में अपनाये गये तीखे तेवर सियासी हल्कों में चर्चित हैं। पहले पेंच परियोजना और अब फोर लेन मामले को लेकर उनके प्रकाशित बयानों पर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। पिछले कई बरसों से इंका नेता हरवंश सिंह के साथ किजला भाजपा के आला नेताओं की नूरा कु श्ती के चर्चे दोनो ही पार्टी के कार्यकर्त्ता तक आपस में करते रहते हैं। ऐसी चर्चाओं के चलते यदि तीखी बयानबाजी चालू हो जाये तो उसके चर्चे होना स्वभाविक ही हैं। अब यह तो समय ही बतायेगा कि प्रेम की इस बयान बाजी को नीता की स्वीकृति है या नहीं? या कहीं कुछ दवाब बनाने के लिये वे ऐसी बयानबाजी करवा रहीे हैं। इंका प्रवक्ता ओमप्रकाश तिवारी की विज्ञप्ति में इस बात के स्पष्ट उल्लेख के बाद कि जिला भाजपा अध्यक्ष और भाजपा के सुलझे हुये कुछ नेताओं की लताड़ के बाद भी प्रेम तिवारी ऐसी बचकाना विज्ञप्तियां जारी करना बंद नहीं कर रहें हैं। इन सब गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि इंका और भाजपा के नेताओं के बीच नूरा कुश्ती का दौर पहले की तरह अब भी जारी है फर्क है तो सिर्फ इतना कि पहले के दौर औ अब के दौर में कुछ पात्र बदलते जरूर दिख रहें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;गीता के प्रदेश कांग्रेस महामंत्री बनने पर इंकाइयों की चुप्पी क्यों?-&lt;/span&gt;पूर्व कांग्रेस विधायक स्व. ठा. दीप सिंह की प्रपोत्र बहू,विधायक स्व. ठा. सत्येन्द्र सिंह की पुत्र वधू और विधायक स्व. रणधीर सिंह की पत्नी श्रीमती गीता सिंह को प्रदेश कांग्रेस में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर नवाजा गया। लेकिन आज के दौर में जैसे किसी की किसी वार्ड स्तर के पद पर भी नियुक्ति होंती होती हैं तो जैसी विज्ञापनों और बधाइयों के दौर चालू हो जाते हैं वैसा दौर गीता की नियुक्ति के बाद कांग्रेस में नहीं दिखा। जिस परिवार की तीन पीड़ियों ने जिले में कांग्रेस के लिये काम किया हो उसकी ऐसी उपेक्षा समझ से परे हैं। वरना फलाने नेता के आर्शीवाद से और फलाने नेता की अनुशंसा से पद मिलने पर बधायी छपने का चलन तो आज कल हर पार्टी में आम हो गया हैं। ऐसे में इंकाइयों की इस चुप्पी के तरह तरह के अर्थ लगाये जा रहें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;स्थापना दिवस समारोह मे स्थापित होते दिख रहे हैं नये राजनैतिक समीकरण -&lt;/span&gt;प्रदेश और जिले के स्थापना दिवस समारोहों में बुलाये गये नेता और पहुचने वाले नेताओं की ओर यदि गौर फरमायें तो कुछ नये समीरकरण स्थापित होते भी दिख रहें हैं। जिला मुख्यालय के मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह थे जबकि विशिष्टि अतिथि नीता पटेरिया थीं। लेकिन समारोह में हरवंश सिंह के साथ नीता पटेरिया के बजाय महाकौशल विकास प्राधिकरण के केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर उस समारोह में शामिल हुये जबकि वे अतिथि भी नहीं बनाये गये थे। इसी तरह नपा द्वारा आयोजित स्थापना दिवस समारोह में नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने नरेश दिवाकर का नाम अतिथि के रूप में प्रकाशित करा दिया था जबकि नरेश का दो दिन का नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा प्रवास का कार्यक्रम पहले ही घोषित हो चुका था। लेकिन एक दूसरे को फूंटी आंख ना सुहाने वाले दोनों भाजपा नेता समारोह में एक साथ दिखे। इन सबको देखकर राजनैतिक विश्लेषकों का ऐसा माना है कि स्थापना दिवस पर आयोजित इन समारोहों में स्थापना दिवस के ये कार्यक्रम जिले की राजनीति में भविष्य में स्थापित होने वाले नये राजनैतिक समीकरणों का पूर्वाभास तो नहीं हैं? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-5061074350512174081?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/5061074350512174081/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/11/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/5061074350512174081'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/5061074350512174081'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/11/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-307357880026317828</id><published>2011-10-23T22:21:00.000-07:00</published><updated>2011-10-23T22:21:09.615-07:00</updated><title type='text'>editorial on dewali</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;सामाजिक मूल्य बदलें बिना क्या भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत हो सकता है?ै&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्यौहार। आततायी रावण का वध करके जब भगवान राम अयोध्या वापस आये थे तो अयोध्यावासियों ने घी के दिये जला कर भगवान राम का स्वागत किये थे। इसे ही दिवाली के रूप में मनाते हैं। आज देश में सबसे बड़ी बुराई भ्रष्टाचार रूपी रावण है। इस बात से किसी को इंकार नहीं हैं। इसे खत्म होना ही चाहिये। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;इसे खत्म कर सकने का दावा कई लोग कर रहें हैं लेकिन हर एक का यह मानना हैं कि सिवाय मेरे तरीके के कोई और तरीका कारगर हो ही नहीं सकता। अन्ना हजारे जनलोकपाल बिल को,बाबा रामदेव विदेश से कालाधन वापस लाने को तो आडवानी रथ यात्रा और सरकार अपने तरीकों को इस रावण को मारने का सबसे का अचूक हथियार मान रही हैं। भ्रष्टाचार रूपी रावण को मारने के लिये राम बनने को तो कई लोग तैयार हैं लेकिन उसकी नाभि में अमृत है यह राज शायद कोई जानता ही नहीं हैं तो भला इसका अंत कैसे होगा?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;भ्रष्टाचार को रोकने के लिये कई कानून आज भी लागू हैं। कई राज्यों में लोकायुक्त भी नियुक्त किये गये हैं। इनका आलम यह है कि आज भी मध्यप्रदेश में लोकायुक्त द्वारा की गयी 170 सिफारिशें लंबित पड़ी हैं जिनमें से कुछ तो दस साल से लंबित हैं लेकिन सरकार ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की हैं। वास्तव में जरूरत हैं तो कानूनों को सख्ती से लागू करने की हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;समाज में होने वाल बदलावों का असर हर क्षेत्र में होता हैं चाहे वह प्रशासनिक क्षेत्र हो या राजनैति क्षेत्र हो या व्यापारिक क्षेत्र हो। भारतीय समाज में पहले गुणों पर आधारित मूल्य हुआ करते थे और ऐसे व्यक्ति ही समाज में सम्मान पाते थे। लेकिन अब पैसे और पावर पर आधारित मूल्य हो गये हैं और समाज सम्मान भी उन्हीं को दे रहा हैं और वह यह भी नहीं सोच रहा हैं कि ये पैसा और पावर कैसे प्राप्त किया गया है? समाज में रहने वाला हर व्यक्ति यह चाहता है कि उसे भी सम्मान मिले और सम्मान पाने के लिये वह वो सब कुछ करने को तैयार रहता है जिससे उसे सम्मान मिले। इसलिये आज मूल आवश्यक्ता इस बात की हैं सामाजिक मूल्यों के आधार बदले जायें अन्यथा भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत कोई भी नहीं कर पायेगा क्योंकि यही उसकी नाभि का अमृत बना हुआ हैं। सामाजिक मूल्य बदले,भ्रष्टाचार रूपी रावण का अंत हो यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-307357880026317828?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/307357880026317828/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/editorial-on-dewali.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/307357880026317828'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/307357880026317828'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/editorial-on-dewali.html' title='editorial on dewali'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-2037157492102045766</id><published>2011-10-11T00:05:00.000-07:00</published><updated>2011-10-11T00:05:55.474-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;शिवराज से सांठ गांठ के आरोप के चलते पार्टी में अपने घटते राजनैतिक कद से परेशान हरवंश अब शासकीय समारोहों से भी कन्नी काटने लगें हैं&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;इस सप्ताह कई कारणों से सबसे अधिक चर्चित राजनैतिक व्यक्तित्व जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाधयक्ष हरवंश सिंह का रहा हैं। सड़कों के गड्डे में बेशर्म की झाड़ी रोपने वाले आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस ने सभी बड़े नेताओं को अलग अलग शहरों में नेतृत्व करने भेजा उसमें हरवंश सिंह का नाम कहीं नहीं था। फिर अब प्रदेश इंका की जंबों जेट कार्यकारिणी में उनका नाम ही गोल हो गया। शिवराज से सांठगांठ के आरोपों के चलते हरवंश सिंह अब शासकीय समारोहों से भी किनारा काटने लगे हैं। इन सब वजहों से वे इतने परेशान हो गये हैं कि उन्होंने जिला इंका के कार्यालय के उदघाटन की प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं होने दी। जिले की महत्वाकांक्षी पेंच सिंचायी परियोजना को लेकर एक बार फिर किसानों की भावनाओं से खेलने का दौर चालू हो गया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने शिवराज से बात करने और इसे तेजी से चालू रखने के निर्देश का हवालादिया तो इंका विधायक हरवंश सिंह ने इंका कार्यालय के उदघाटन के दौरान पेंच के लिये किये गये अपने प्रयासों का हवाला दिया और मुख्यमंत्री से बात करने की बात भी बतायी। अब एक किसान संघंर्ष समितिके नाम से आंदोलन चलाने की बात की जा रही हैं जो कहने को तो गैर राजनैतिक बतायी जा रही हैं लेकिन प्रकाशित नामों में अधिकांश नाम भाजपा नेताओं के ही हैं। जिले में बड़ी लाइन अभी आयी हो या ना आयी हो लेकिन रेल का खेल जारी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;शिवराज से सांठ गांठ के आरोपो से इंका में कद गिर रहा है हरवंश का?-&lt;/span&gt;इस सप्ताह कई कारणों से सबसे अधिक चर्चित राजनैतिक व्यक्तित्व जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाधयक्ष हरवंश सिंह का रहा हैं। सड़कों के गड्डे में बेशर्म की झाड़ी रोपने वाले आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस ने सभी बड़े नेताओं को अलग अलग शहरों में नेतृत्व करने भेजा उसमें हरवंश सिंह का नाम कहीं नहीं था। फिर अब प्रदेश इंका की जंबों जेट कार्यकारिणी में उनका नाम ही गोल हो गया। शिवराज से सांठगांठ के आरोपों के चलते हरवंश सिंह अब शासकीय समारोहों से भी किनारा काटने लगे हैं। इन सब वजहों से वे इतने परेशान हो गये हैं कि उन्होंने जिला इंका के कार्यालय के उदघाटन की प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं होने दी। कांतिलाल भूरिया के अध्यक्ष बनने के बाद अक्सर ऐसे समाचार छपा करते थे कि हरवंश सिंह अब रिमोट से प्रदेश में कांग्रेस चलायेंगें। उन्हें पहला झटका तब लगा जब प्रदेश इंकाध्यक्ष ने सड़कों के गड्डों में बेशर्म की झाड़ियां रोपने का प्रदेश स्तरीय आंदोलन में सभी बड़े नेताओं को बड़े शहरो में नेतृत्व करने के लिये नियुक्त किया। इसमें हरवंश का नाम कहीं नहीं था ब्लकि जबलपुर में भूरिया ने स्वयं कमान संभाल कर राजनैतिक संकेत दे दिये थे। इस बारें में इंका नेताओं में यह चर्चा रही कि या तो अब प्रदेश कांग्रेस हरवंश को बड़ा नेता नहीं मानती या फिर लालबत्ती बचाने के चक्कर में वे खुद इससे दूर रह क्योंकि यह आंदोलन प्रदेश सरकार और शिवराज सिंह के खिलाफ था।तब हरवंश समर्थकों ने यह तर्क दिया था कि वे चूंकि संवैधानिक पद पर है इसलिये आंदोलन से दूर रहे। लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि जब मंत्री गौरीशंकर बिसेन के विरुद्ध आदिवासियों को अपमानित करने के लिये जब लखनादौन में आंदोलन किया गया था तब हरवंश सिंह उसमें क्यों शामिल हुये थे? और इस पर प्रदेश की भाजपा और शिवराज सरकार क्यों चुप रह गयी थी? इसके बाद अब जब भूरिया की टीम घोषित हुयी तो प्रदेश के 150 नेताओं में भी हरवंश सिंह का कहीं नाम नहीं था। ना तो वे कार्यकारी अध्यक्ष बने और ना ही प्रभारी महामंत्री बन पाये। इस तरह प्रदेश के संगठन में हरवंश सिंह की उपेक्षा एक बड़ी राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने पूरे प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत धूम धाम से की हैं। इसमें सभी विधायकों को अपने अपने क्षेत्र में मुख्य अतिथि बनाया गया था। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को भी केवलारी में मुख्य अतिथि बनाया गया था। लेकिन पार्टी के अंदर शिवराज से सांठ गांठ के आरोपों के चलते उन्होंने अपने ही विस क्षेत्र में इस कार्यक्रम में सम्मलित होना उचित नहीं समझा। जबकि इस कार्यक्रम में हरवंश के खिलाफ भाजपा से चुनाव लड़ने वाले डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन शामिल हुये थे। इसी सप्ताह उन्होंने कांग्रेस के परिर्वतित कार्यालय का उदघाटन किया। मुख्य अतिथि रहते हुये भी हरवंश सिंह ने सबसे पहले अपना भाषण दिया और कांग्रेस भवन,पेंच योजना, फोर लेन और छिंदवाड़ा नैनपुर बड़ी रेल लाइन के आंदोलन के समर्थन में भी खुल कर भाषण दिया। इस कार्यक्रम में भी वरिष्ठ कांग्रसियों को अपमानित करने में कोई परहेज नहीं किया गया और उठाये जाने वाले सवालों के जवाबों से बचने के लिये हरवंश सिंह ने खुद ही पहले भाषण देकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद कई नेताओं ने भाषण देने से ही मना कर दिया और जिनने बोला उनने भी कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाये लेकिन उन्हें सवालों के कोई जवाब नहीं मिल पाये। कार्यक्रम स्थल के करीब और इंका नेता मो. समी अंसारी के घर पर भी पूर्व मंड़ी अध्यक्ष दिलीप बघेल और हरवंश के बीच हुयी झड़प भी कांग्रेसियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। इन सब बातों का खुलासा ना हो कि हरवंश सिंह ने क्या क्या अपने भाषण में कहा इसलिये जिला इंका ने प्रेस विज्ञप्ति भी बहुत लेट और सोच विचार कर जारी की जिसमें विवादास्पद हो सकने वाले मुद्दों को छुपा लिया गया हैं। कुल मिलाकर पार्टी में भाजपा से सांठ गांठ के आरोपों में चलते कांग्रेस में अपने गिरते हुये कद से परेशान हरवंश अब इस आरोप से मुक्ति पाने की कोशिशों में लगे हुये हैं ताकि और अधिक राजनैतिक नुकसान ना हो सके। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच के पेंच उलझाते ही जा रहे हैं इंका और भाजपा नेता-&lt;/span&gt;जिले की महत्वाकांक्षी पेंच सिंचायी परियोजना को लेकर एक बार फिर किसानों की भावनाओं से खेलने का दौर चालू हो गया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने शिवराज से बात करने और इसे तेजी से चालू रखने के निर्देश का हवालादिया तो इंका विधायक हरवंश सिंह ने इंका कार्यालय के उदघाटन के दौरान पेंच के लिये किये गये अपने प्रयासों का हवाला दिया और मुख्यमंत्री से बात करने की बात भी बतायी। किसानों की एक समिति पहले ही ज्ञापन सौंप कर सरकार से इसे चालू रखने की मांग कर चुकी हैं। अब एक किसान संघंर्ष समितिके नाम से आंदोलन चलाने की बात की जा रही हैं जो कहने को तो गैर राजनैतिक बतायी जा रही हैं लेकिन प्रकाशित नामों में अधिकांश नाम भाजपा नेताओं के ही हैं। इस पूरे मामले में सबसें हास्यासपद बात तो यह हैं कि नीता पटेरिया और हरवंश सिंह ने शिवराज से बात करने और पेंच योजना को चालू रखने की चर्चा की बात कही हैं उससे ऐसा प्रतीत होता हैं कि मानो मुख्यमंत्री को यह मालूम ही नहीं हैं कि उनकी सरकार ने पेंच योजना को बंद करने का प्रस्ताव अपनी अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को भेज दिया हैं। विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया अपनी वीडियों कान्फ्रेन्स में इसका खुलासा भी कर चुके हैं जिसके समाचार अखबारों में छप चुके हैं। इस योजना को लेकर लंबे समय तक इंका नेता हरवंश सिंह राजनैतिक रोटी सेंक चुके हैं अब भाजपा की विधायक नीता पटेरिया और अन्य नेता भी ऐसा ही कुछ करना चाह रहें हैं। यदि भाजपा नेता ईमानदारी से यह चाहते हैं कि पेंच योजना बंद ना हो तो वे अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री पर दवाब बनायें कि प्रदेश सरकार इस योजना को बंद करने के प्रस्ताव को वापस ले। इसके लिये उन्हें किसानों के आंदोलन करने की क्या आवयक्ता हैं?और यदि उनकी ही पार्टी उनकी बात नहीं सुनती हैं और वे सही में किसानों का भला चाहते हैं तो इसके लिये उन्हें शिवराज और उनकी सरकार को कठघरें में खड़ा करना पड़ेगा जो कि भाजपा में रहते संभव नहीं हो पायेगा।इंका और भाजपा तथा सभी नेताओं से इस परिस्थिति में यह अनुरोध तो किया ही जा सकता हैं कि वे किसानों के जख्मों पर यदि मरहम नहीं लगा सकते हों तो तो ना लगायें कम से कम नमक तो ना छिड़के।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जिले मे रेल का खेल भी जारी है-&lt;/span&gt;जिले में बड़ी लाइन को लेकर भी खेल जारी हैं। छिंदवाड़ा नैनपुर का शिलान्यास कमलनाथ कर चुके हैं। तीस करोड़की राशि भी मिल गयी हैं। लेकिन संघर्ष जारी हैं और हरवंश सिंह ने अपने भाषण में खुमान सिंह के संघर्ष का ना केवल समर्थन किया वरन सभी को साथ देने का आव्हान भी किया। इसी तरह रामटेक गोटेगांव नई लाइन की रेल अभी पटरी पर तो ठीक से चढ़ी नहीं हैं लेकिन अगर इस बजट में चढ़ गयी तो हम नीचे ना रह जायें की इसी तर्ज पर इसमें भी खेल शुरू हो गये हैं। मुसाफिर तो यही चाहता हैं कि भले ही सारे नेता ए.सी.कोच में चढ़ जायें लेकिन कम से कम इस लाइन को बनवा तो दें। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-2037157492102045766?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/2037157492102045766/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2037157492102045766'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2037157492102045766'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_11.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-6080836477394583508</id><published>2011-10-03T21:33:00.000-07:00</published><updated>2011-10-03T21:33:12.128-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;फोर लेन की तरह पेंच में भी यदि शिवराज ने खेल खेला और नीता भी जनमंच के नेताओं की तरह चुप रहीं तो जनता कभी माफ नहीं करेगी&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;एक ही गाड़ी पर सवार होकर नरेश और राजेश जबलपुर में आयोंजित अरविंद मैनन की बैठक में शामिल होने गये। बाहुबली वाली रोड़ के लिये नरेश ने 40 लाख रुपये तो दिये लेकिन यह पैसा नपा के बजाय लोनिवि को देने की सिफारिश की है लेकिन पिछली दुगनी लागत में बनी घटिया सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को भी संरक्षण भी तो नरेश का ही था। मैनन जी यदि आपको के.डी. भाऊ के गांव की मिट्टी देखने से कोई राज पता चले तो कम से कम क्षेत्र के मतदाताओं को जरूर बता देना। मैनन ने श्रीमती बिसेन को क्या समझाइश दी और उसका कितना असर गौरी भाऊ पर दिखेगा? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे है। भाजपा द्वारा मंड़ला में आयोजित की गयी आक्रोश रैली पर सवाल उठाते हुये राकपा के महासचिव भारत प्रेमचंदानी ने कहा है कि इससें यह साबित हो गया है कि भाजपा को न्यायापालिका में कोई विश्वास नहीं हैं। यदि पेंच के मामले में शिवराज ने प्रमुख सचिव को जो निर्देश दिये उस पर पालन शुरू हो जाता हैं तो वास्तव में शिवराज और नीता पटेरिया बधायी के पात्र हैं। लेकिन यदि कुछ नहीं होता हें तो जनमंच के बचेखुचे नेताओं की तरह यदि नीता भी चुप्पी साधे रहतीं हैं तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश और राजेश एक साथ गये बैठक में -&lt;/span&gt;देखने वालों के लिये यह एक सुखद क्षण था जब एक ही पार्टी के दो धुर विराधी नेता एक ही गाड़ी में सवार होकर पार्टी की मीटिंग में शामिल होने जबलपुर के लिये रवाना हुये। जी हां यह नजारा लोगों ने देखा अब्बास भाई के प्रट्रोल पंप पर जहां मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एक ही गाड़ी पर सवार थे और जा रहे थे संगठन मंत्री अरविंद मैनन की बैठक में जो जबलपुर में थी। इसके बाद ही यह पता चला कि नरेश दिवाकर ने महाकौशल विकास प्राधिकरण से पेट्रोल पंप से एस.पी. बंगले की रोड़ बनवाने के लिये 40 लाख रुपये की राशि भी दे दी हैं। लेकिन उन्होंने नगरीय क्षेत्र में रोड़ बनाने के लिये नगर पालिका के बजाय लोक निर्माण विभाग को ऐजेन्सी बनाने का सुझाव दिया हैं। इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चायें शुरू हो गयीं है। यह बात सही है कि नपा ने यह सड़क इतनी घटिया बनायी थी कि भाजपा सरकार को अपनी ही पार्टी की तत्कालीन अध्यक्ष पार्वती जंघेला को ना केवल चुनाव लड़ने के लिये अपात्र घोषित करना पड़ा था ब्लकि तीन लाख रुपये की रिकवरी भी निकाली थी जिस पर पालिका ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं शुरू की हैं। लेकिन यह भी एक उजागर बात है कि इस सड़क को बनाने वाले भाजपायी बेनामी ठेकेदारों को तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर का ही खुला संरक्षण प्राप्त था। अब नरेश जी को यह भी ध्यान रखनाहोगा कि लोनिवि विभाग द्वारा जिसे ठेकेदार नियुक्त किया जायेगा वह भी पहले जैसा ही कोई ना बन जाये वरना ये 40 लाख रुपये भी बेकार ही चले जायेंगें और नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही निकलेगा। बात जो कुछ भी हो लेकिन एक बात तो साफ हो गयी है कि मंत्री का दर्जा प्राप्त नरेश दिवाकर भाजपा के नेतृत्व वाली नपा को भ्रष्ट मानने लगे हैं। सच को स्वीकार करना भी एक प्रशंसनीय कार्य माना जा रहा हैं। ं &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;के.डी. के गांव की मिट्टी देखना चाहते है मैनन-&lt;/span&gt;पिछले दिनों एक रोचक समाचार छपा जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री अरविंद मैनन ने बालाघाट सिवनी के भाजपा सांसद के.डी.देशमुख के गांव की मिट्टी देखने की इच्छा जाहिर की हैं। यह प्रसंग कैसे और क्यों आया?यह तो समाचार में खुलासा नही किया गयाहैं लेकिन इसने लोगों में उत्सुकता पैदा कर दी हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा? अब भला मैनन जी को यह कौन बताये कि क्षेत्र के मतदाता भी उन्हें वोट देकर पछता रहें और यह जानना चाह रहें हैं कि के.डी. भाऊ आखिर किस मिट्टी के बने हैं? जीतने के बाद क्षेत्र के हर मुद्दे पर चुप्पी साधे रहते हैं। मैनन जी यदि आपको के.डी. भाऊ के गांव की मिट्टी देखने से कोई राज पता चले तो कम से कम क्षेत्र के मतदाताओं को जरूर बता देना।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;गौरी को छोड़ उनके घर पहुंचे मैनन-&lt;/span&gt; केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन को बालाघाट के भाजपा कार्यालय में ही छोड़कर अरविंद मैनन उनके घर चले गये और वहां उन्होंने श्रीमती रेखा बिसेन से चर्चा की जिसकी सुर्खी भी अखबारों में बनी और यह आशंका व्यक्त की गयी है कि मैनन ने हाल ही के गौरी भाऊ के विवादों के बारे में चर्चा की हैं। मैनन ने श्रीमती बिसेन को क्या समझाइश दी और उसका कितना असर गौरी भाऊ पर दिखेगा? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह के कयास लगाये जा रहे है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मैनन द्वारा के.डी. के गांव की मिट्टी देखनेकी बात भी कही थी तो कहीं इसी को लेकर श्रीमती बिसेन को उन्होंने कोई भविष्य का राजनैतिक इशारा तो नहीं किया है? सच क्या है? यह तो वक्त आने पर ही पता लगेगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;क्या भाजपा को न्यायपालिका पर विश्वास नहीं है?-&lt;/span&gt; फग्गन सिंह कुलस्ते के प्रकरण में भाजपा द्वारा मंड़ला में आयोजित की गयी आक्रोश रैली पर सवाल उठाते हुये राकपा के महासचिव भारत प्रेमचंदानी ने कहा है कि इससें यह साबित हो गया है कि भाजपा को न्यायापालिका में कोई विश्वास नहीं हें। पैसा लेकर सवाल पूछने के आरोपी रहे कुलस्ते को संप्रग सरकार ने नहीं वरन न्यायपालिका ने जेल भेजा हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि तीन करोड़ रुपये में सेकुलस्ते ने सदन में सिर्फ एक करोड़ ही दिखाये थे शेष दो करोड़ रुपये कहां गये? वैसे तो राकपा नेता द्वारा उठाये गये दोनो सवाल सही हैं लेकिन क्या भाजपा इन सवालों का जवाब देगी? वास्तविकता तो यह हैं कि भाजपा को भी कुलस्ते से कोई लेना देना नहीं हैं। तभी तो उन्हें कभी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष तक नहीं बनने दिया गया। वास्तव में इंका में भूरिया की ताजपोशी के बाद भाजपा आदिवासी वोट बेंक में लग सकने वाली सेंध से परेशान थी इसलिये उसनें कुलस्ते मुद्दे की आड़ में आदिवासियों में एक बार फिर पैठ बनाने का प्रयास किया है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच में भी यदि खेल हुआ तो जनता माफ नहीं करेगी-&lt;/span&gt; प्रदेश सरकार के पेच योजना के बंद करने के प्रस्ताव से हल चल मची हुयी हैं। अंत्योदय मेले में जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल ने इस मामले को उठाया था लेकिन मुख्य अतिथि अजक मंत्री विजयशाह ने इस पर कुछ भी बोलना उचित नहीं समझा। लेकिन इस मेले के दो दिन बाद ही भाजपा विधायक नीता पटेरिया के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिलने का समाचार प्रमुखता से छपा और उसमें यह उल्लेख भी किया गया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि हर हाल में पेंच का पानी किसानों के खेत तक पहुंचेगा। इसमें यह भी उल्लेख था कि शिवराज ने प्रमुख सचिव जुलानिया को तेजी काम चालू रखने के निर्देश दिये हैं। इस समाचार की कतरन संलग्न करते हुये इंका नेता आशुतोष वर्मा ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखकर कहा है कि जब प्रदेश के मुखिया ने ही सचिव को तेजी से काम चालू रखने के निर्देश दे दियेहैं तो फिर प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना को बंद करने के लिये केन्द्र को भेजा गया प्रस्ताव ही औचित्यहीन हों गया हैं। अतः इसे मंजूर ना किया जाये। इंका नेता ने अपने पत्र में यह भी बताया हैं कि वास्तव में केन्द्र से मंजूरी मिलने के पहले ही इस योजना को प्रदेश सरकार ने बंद कर दिया हैं और दूसरी तिमाही के लिये आवंटित राशि में से शेष बचे 112 लाख रुपये सरेन्डर करने का प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया गया हैं। मुख्यमंत्री ने तो सिवनी की सभा में यह दहाड़ भी लगायी थी कि सूर्य चाहे पूर्व की जगह पश्चिम से निकल जाये लेकिन फोरलेन सिवनी से ही जायेगी। उन्होंने तो जनमंच के नेताओं को भी दो बार आश्वस्त किया था कि वे उन्हें साथ ले जाकर प्रधानमंत्री से मिलवायेंगें। लेकिन आज तक नतीजा सिफर ही हैं। यह बात अलग है कि इस बात पर जनमंच के नेता भी मौन साधे हुये हैं। कहीं इसी तर्ज पर तो पेंच का पानी किसानों के ख्ेातों तक नहीं पहुचने वाला है?यदि ऐसा हुआ तो फिर भगवान ही मालिक है।लेकिन यदि शिवराज ने प्रमुख सचिव को जो निर्देश दिये उस पर पालन शुरू हो जाता हैं तो वास्तव में शिवराज और नीता पटेरिया बधायी के पात्र हैं। लेकिन यदि कुछ नहीं होता हें तो जनमंच के बचेखुचे नेताओं की तरह यदि नीता भी चुप्पी साधे रहतीं हैं तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-6080836477394583508?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/6080836477394583508/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6080836477394583508'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6080836477394583508'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/10/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-1487826486695798902</id><published>2011-09-28T20:47:00.000-07:00</published><updated>2011-09-28T20:47:57.630-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांव पेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांवपेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया हैं।पूर्व केन्द्रीय मंत्री विमला वर्मा ने केिन्द्रीय एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिह ने प्रदेश के सिंचायी मंत्री को पत्र लिखा हैं। प्रदेश महिला र्मोचे की अध्यक्ष एवं क्षेत्री विधायक नीता पटेरिया की चुप्पी चर्चित हैं। समूचे महाकौशल के विकास की जवाबदारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सौंपी हैं। जिसे महाकौशल क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी शिवराज ने नरेश को सौंपी हैं उसी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना के विनाश की जानकारी नरेश को दी या नहीं़? इंजीनियर प्रसन्न मालू के मित्र ट्रूबा इंजीनियरिंग के संचालक सुनील डंडीर ने निःशुल्क निर्धन छात्रों को श्क्षिा देने का प्रशंसनीय कार्य किया जा रहा है। जिले में इंकाई राजनीति का आलम यदि नहीं सुधरा तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी पलीत होने से कोई नहीं रोक सकता हैं। कांग्रेस को इन चुनावों से सबक लेकर हालात सुधारना चाहिये अन्यथा हुछ ही समय बाद होने वाले नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में भी जीतना मुश्किल हो जायेगा।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच को लेकर फिर राजनैतिक पेंच शुरू-&lt;/span&gt;पेंच परियोजना को लेकर पिछले बीस सालों से सियासी दांवपेंच तो चल रहें हैं लेकिन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया हैं। पिछले साल से पैसों की कमी नहीं होने से ऐसा लग रहा था कि अब इस काम में तेजी आयेगी। इस परियोजना के लिये सिंचाई विभाग ने एक कार्यपालन यंत्री कार्यालय तथा पांच सब डिवीजन भी हाल ही में खोले थे। लेकिन कानून एवं व्यवस्था एवं आंदोलन पर नियंत्रण ना कर पाने के कारण प्रदेश सरकार ने पेंच परियोजना को बंद करने का प्रस्ताव अनुशंसा के साथ केन्द्र सरकार को भेज दिया हैं। छिदवाड़ा और सिवनी जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने वाली इस योजना को बंद करने के प्रस्ताव से किसानों में आक्रोश फैल रहा हैं। इस योजना को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्माने लगी हैं। विस उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह की चुप्पी को लेकर जब हमने सवाल उठाये तासे उन्होंने प्रदेश के सिंचाई मंत्री को एक पत्र लिखकर अखबारों में प्रकाशित कराया। राजनैतिक हल्कों में यह चर्चित है कि जिस प्रदेश सरकार ने अपनी अनुशंसा के साथ इसे बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र की कांग्रेस सरकार के पास भेजा हैं उसे ही पत्र हरवंश सिंह ने क्यों लिखा? उन्हें कांग्रेस की केन्द्र सरकार से इस बारे में पहल करनी चाहिये थी। जिले की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कु. विमला वर्मा,जिन्होंने इस जिले को विकास की कई बड़ी बड़ी सौगातें दी थी, ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार के इस तुगलकी प्रस्ताव को स्वीकार ना करने का अनुरोध किया हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार को भी कठघरे में खड़ा करते हुये किसान आंदोलन को नियंत्रित ना कर पाने तथा ठेकेदारों को बाधा मुक्त साइट उपलब्ध ना कराने को लेकर भी आरोप लगाये हैं जिसके कारण योजना की लागत बढ़ रही हैं जिसे आधार बना कर प्रदेश सरकार इसे बंद करने का प्रस्ताव भेज रही हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय विधायक नीता पटेरिया की चुप्पी राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। लोगों में ता यह भी चर्चा है कि नतिा शिवराज अनबन के चलते क्षेत्र को यह खामियाजा भुगतना ही ना पड़ जाये। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;विकास की जवाबदारी देने वाले नरेश को विनाश की बात बतायी या नहीं शिवराज ने?-&lt;/span&gt;समूचे महाकौशल के विकास की जवाबदारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सौंपी हैं। महाकौशल क्षेत्र में ही वह सिवनी विस क्षेत्र भी आता हैं जहां से नरेश दस साल तक विधायक रहें हैं एवं एक बार फिर विधायक बनने का सपना संजोये हुये हैं। इस विधान सभा क्षेत्र के लिये पेंच एक जीवन दायनी परियोजना हैं। जिले में सबसे अधिक लाभ इसी विस क्षेत्र के किसानों को मिलने वाला हैं। अब इस योजना को शिवराज सरकार ने बंद करने का प्रस्ताव केन्द्र को भेज दिया हैं। नरेश ने भी विज्ञप्ति जारी कर मुख्यमंत्री से मिलकर हल निकालने की बात कही है। सियासी हल्कों में यह चर्चा जोरों पर है कि जिसे महाकौशल क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी शिवराज ने नरेश को सौंपी हैं उसी क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना के विनाश की जानकारी नरेश को दी या नहीं़? नरेश के प्राधिकरण के अध्यक्ष बनने के बाद विकास जो कुछ होगा वह तो भविष्य के गर्त में हैं लेकिन यदि प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस योजना को बंद करने का प्रस्ताव वापस नही लिया तो विनाश की शुरुआत तो हो ही जायेगी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;प्रसन्न मालू की प्रशंसनीय पहल-&lt;/span&gt;सिवनी विस क्षेत्र के पूर्व इंका प्रत्याशी एवं इंका नेता प्रसन्न मालू के कार्य का पशंसा हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि इंजीनियर प्रसन्न मालू के मित्र ट्रूबा इंजीनियरिंग के संचालक सुनील डंडीर ने निःशुल्क निर्धन छात्रों को श्क्षिा देने का प्रशंसनीय निर्णय लिया था। इससे जिले के 18 छात्रों को इंजीनियर बनने का अवसर मिला हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। इस काम की जिनती भी तारीफ की जाये वह कम हैं। जिले के विभिन्न तबकों में इस काम की तारीफ भी की जा रही हैं। लेकिन अब जरूरत इस बात की भी पड़ सकती है कि प्रसन्न मालू को छात्रों के चयन करने में सावधानी बरतनी चाहिये। ऐसा ना हो कि इस सुविधा का लाभ लेने के लिये लोग जेक लगवाने लगे और अपात्र छात्र पात्र छात्रों का हक मारने लगे। किसी भी निर्धन लेकिन प्रतिभाशाली छात्र को पैसे के आभाव में उच्च तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाना र्दुभाग्य पूर्ण होता हैं। उन्हें यह अवसर दिलाना मानवता के हिसाब से से एक अच्छा काम है जो कि किया जा रहा हैं। आज के दौर में किसी राजनैतिक व्यक्ति द्वारा ऐसे सामाजिक काम करते देखा जाना एक मुश्किल काम ही होता हैं।इसलिये प्रसन्न मालू को एक बार फिर बधायी और शुभकामनायें।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;छात्र संघ चुनावों में कांग्रेस की हुयी मिट्टी पलीत -&lt;/span&gt;जिले के कालेजों में हुये छात्र संघों के चुनाव कांग्रेस के लिये फिर निराशा जनक ही रहें हैं। जिला मुख्यालय के सबसे बड़े पी.जी. कालेज में कांग्रेस को समता मंच से हार का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के विस क्षेत्र के मुख्यालय के केवलारी कालेज में कांग्रेस को भाजपा से मात खानी पड़ी हैं। हालांकि केवलारी क्षेत्र के हरवंश सिंह के गृह ब्लाक छपारा और सिवनी के डी.पी.चर्तुवेदी कॉलेज में कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया हैं। जिले के कई कॉलेजों में तो कांग्रेस अपने नामांकन पत्र भी दाखिल नहीं कर पायी। बरघाट में विरोध स्वरूप इंका समर्थक छात्रों ने शिवराज सिंह का पुतला भी फंूक डाला है।इन चुनाव परिणामों को लेकर इंकाइयों में यह चर्चा जोरों पर हैं कि आखिर यह चुनाव कांग्रेस क्यों हारी? कुछ इंकाइयों का दावा है कि छात्रसंघ चुनावों की बागडोर संभाहलने वाले हरवंश समर्थक युवा नेता आजकल उच्च स्तरीय इंकाई राजनीति में व्यस्त हो गयें हैं इस कारण इन चुनावों मेें कांग्रेस की यह गत बन गयी हैं। धन बल और सत्ता बल के भरोसेे चुनाव जीतने के आदी हो चुके इन इंका नेताओं को इस बार इस कमी ने ही चुनावों में पराजय का सामना करने को मजबूर कर दिया। हालांकि हाल ही में जिला एन.एस.यू.आई. की कमान छात्र नेता अंशुल अवस्थी को सौंपी गयी थी लेकिन वे कम समयमें पुराने हालात बदल सकने में नाकाम रहें। छात्र राजनीति में भी कोई विकल्प तैयार नहीं करने की रणनीति ने कांग्रेस को धराशायी करा दिया हें। जिले में इंकाई राजनीति का आलम यदि नहीं सुधरा तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस की मिट्टी पलीत होने से कोई नहीं रोक सकता हैं। कांग्रेस को इन चुनावों से सबक लेकर हालात सुधारना चाहिये अन्यथा हुछ ही समय बाद होने वाले नगर पंचायत लखनादौन के चुनावों में भी जीतना मुश्किल हो जायेगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पेंच योजना बंद करने के पहले जन प्रतिनिधियों को क्या विश्वास में नहीं लिया शिवराज ने?&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;सिवनी। छिदवाड़ा और सिवनी जिले के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण सिचायी एवं विद्युत परियोजना पेंच को बंद करने का प्रस्ताव लेने के पहले प्रदेश सरकार के मुख्यिा शिवराजसिंह चौहान ने जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया? यह यक्ष प्रश्न आज लोगों के बीच उठ खड़ा हुआ है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;छिंदवाड़ा जिले के सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ,प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह,बालाघाट सिवनी क्षेत्र के सांसद के.डी.देशमुख,प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष एवं विधायक नीता पटेरिया,महाकौशल विकास प्राधिकरण के केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष नरेश दिवाकर और दोनों जिलों के विधायक गण जैसे महत्वपूर्ण और कद्दावर जन प्रतिनिधियों को विश्वास में लिये बिना ही प्रदेश सरकार ने पेंच परियोजना को बंद करने का निर्णय आखिर कैसे ले लिया? और यदि विश्वास में लेने के बाद यह निर्णय लिया गया हैं तो फिर सरकार और जन प्रतिनिधियाों दोनों से ही क्या यह अपेक्षा नहीं की जाना चाहिये कि वे इस बात का खुलासा करें? इन सवालों का खुलासा जल्दी ही होना चाहिये अन्यथा किसानों के जिस आंदोलन से बचने के लिये सरकार इसे बंद कर रही हैं उससे कहीं बड़ा आंदोलन वे किसान भी कर सकते हें जो इस योजना से लाभान्वित होने वाले हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-1487826486695798902?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/1487826486695798902/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/09/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/1487826486695798902'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/1487826486695798902'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/09/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-4367095591945856447</id><published>2011-08-26T06:01:00.001-07:00</published><updated>2011-08-26T06:01:26.832-07:00</updated><title type='text'>samyik teep</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_q6xe8p="101" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;क्या संसद में भी हर सांसद को वो ही बोलना चाहिये जो अन्ना जी चाहते हैं? फिर बहस का तो सवाल ही नहीं उठता। अन्ना सीधे सीधे यह क्यों नहीं कह देते कि सभी सांसद चुपचाप मेरे लोकपाल बिल के पक्ष में हाथ उठाकर वोट डालें और पास करा दें नहीं तो अपना घर घिरवायें। राहुल गांधी कुछ बोल नहीं रहें थे तो भी आपत्ति थी और जब संसद में अपने विचार रखे तो कोप का भाजन बनना पड़ा। क्या अन्ना जी यही सच्चा लोकतंत्र हैं? &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-4367095591945856447?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/4367095591945856447/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep_1297.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/4367095591945856447'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/4367095591945856447'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep_1297.html' title='samyik teep'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-6405199939047280937</id><published>2011-08-26T05:49:00.001-07:00</published><updated>2011-08-26T05:49:43.745-07:00</updated><title type='text'>samyik teep</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_eumntq="98" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;ऐसा कैसे हो सकता है कि अन्ना अपने लोकपाल को संपूर्ण मानकर उसके समानान्तर भ्रष्टाचार खत्म करने के अन्य लोगों के विचारों को सिरे से नकार रहें है। ताजा उदाहरण है राहुल गांधी के विचारों से असहमत होने पर उन्होंने अपने समर्थकों को उनके घर का घेराव करने भेज दिया।&amp;nbsp; याने उनके ही लोकपाल को मानो नहीं तो भुगतो।क्या आपको ऐसा नहीं लगता लोकतंत्र के सबसे बड़े हिमायती होने का दावा करने वाले अन्ना लोकतंत्र से ही शक्ति पाकर सबसे ज्यादा लोकतंत्र का दमन कर रहें हैं।&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-6405199939047280937?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/6405199939047280937/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6405199939047280937'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/6405199939047280937'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep_26.html' title='samyik teep'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' 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है&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-3420925502410799747?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/3420925502410799747/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/3420925502410799747'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/3420925502410799747'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/samyik-teep.html' title='samyik teep'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-2869397898168722997</id><published>2011-08-23T00:36:00.000-07:00</published><updated>2011-08-23T00:36:15.732-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;महिला मोर्चे की प्रदेशाध्यक्ष नीता पटेरिया के जिले में भ्रष्टाचार की आरोपी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चित&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_2qkfn4="134" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_2qkfn4="132" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="130" style="color: orange;"&gt;अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली में भारी तादाद में युवकों छात्रों के अलावा जिले में अन्ना की कमान संभाहलने वाले राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल के साथ भाजपा नेता नरेन्द्र ठाकुर एवं प्रवीण भारद्वाज सहित कई भाजपा कार्यकर्त्ता भी शामिल थे। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है। शिवराज के उपवास स्थगित होने की याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जाखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती। मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी थीै या फिर कुछ और? इसे लेकर स्तीफा वापस होने के बाद भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं।मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी हैं। अन्ना के आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="129" style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली-&lt;/span&gt;पूरे देश में इस वक्त अन्ना हजारे और लोकपाल बिल को लेकर सड़क से लेकर सदन तक तक धूम मची हुयी है। जिले में भी अन्ना की गिरफ्तारी से अभी तक प्रर्दशन और अनशन जारी हैं। अन्ना समर्थकों द्वारा 16 अगस्त को चार बजे शाम को गांधी चौक से विशाल रैली निकाली जिसमें युवकों छात्रों की भागीदारी भारी तादाद में रही। इस रैली में अन्ना समर्थकों की कमान संभाहलने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा इस रैली में भाजपा नेता प्रवीण भारद्वाज, नरेन्द्र ठाकुर के साथ भाजपा के कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे। वकीलों ने मोटर सायकिल रैली के रूप में भागीदारी की थी। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="128" style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;र्पावती की उपस्थिति में अन्ना के समर्थन में भाजपा का धरना चर्चित-&lt;/span&gt;इसके बाद जिला भाजपा ने भी अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में एक दिवसीय धरना दिया।यह धरना जिला कलेक्टरेट के प्रतिबंधित क्षेत्र में हुआ जिसे लेकर ही भाजपा आरोपों के कठघरे में आ गयी हैं। इस धरने में जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन के साथ ही पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,विधायक शशि ठाकुर,अशोक टेकाम सहित भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्त्ता मौजूद थे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चित उपस्थिति पूर्व पालिका अध्यक्ष और महिला मोर्चे की अध्यक्ष पार्वती जंघेला की रही जिन्हें प्रदेश की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाकर उनसे तीन लाख रुपये की रिकवरी उवं उन्हें पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिये अयाग्य घोषित किया था। उल्लेखनीय है कि दुगनी लागत में घटिया सड़कों के मामले की शिकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने की थी जिसे चार साल तक सरकार ने लटकायें रखा लेकिन पुख्ता प्रमाणों के चलते अंततः कार्यवाही करनी ही पड़ी थी। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="127" style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;धरने में उपस्थिति को लेकर नरेश और हरवंश की तुलना हो रही है -&lt;/span&gt;भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन के समर्थन में जिला भाजपा द्वारा दिये गये धरने में हाल ही में केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कर लाल बत्तीधारी बने नरेश दिवाकर की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। जबकि विस उपाध्यक्ष के संवैधानिक पद पर राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त करने वाले हरवंश सिंह अपनी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश सरकार के विरोध में होने वाले धरना प्रर्दशनों में बेधड़क शामिल होते हैं। हालांकि नियम तो यही कहता हैं कि मंत्री या दर्जा प्राप्त मंत्री किसी भी सरकार विरोधी आंदोलन या धरने में शामिल नहीं हो सकते। लेकिन आजकल इस नियम पर कड़ाई से पालन कोई नहीं करता हैं। यदि संवैधानिक पद पर बैठे हरवंश के आंदोलनों पर जब जिला भाजपा चुप रहती हैं तो भला नरेश के शामिल होने पर जिला इंका कोई आपत्ति कैसे कर सकती हैं। भाजपाइयों के बीच में यह चर्चा भी दबी लुबान चल रही हैं कि शायद नरेश जी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का वह उपवास प्रकरण याद आ गया था जिसमें राजभवन से उपवास स्थल पर पहुंचते ही शिवराज ने मंचासीन किसी भी भाजपा नेता को बताये बिना माइक पर अपने उपवास के समाप्त होने की घोषणा कर दी थी। यहां यह उल्लेखनीय हैं राजभवन में मुख्यमंत्री को साफ साफ बता दिया गया था कि यदि आप उपवास पर बैठेंगें तो आपकी कुर्सी जा सकती हैं। शायद यह याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जोखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_2qkfn4="126" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="125" style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;श्रीकांत के स्तीफे के कारणों की लेकर शुरू हुयी अटकलें समाप्त-&lt;/span&gt;भाजपा के मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल का त्यागपत्र इन दिनों सियासी हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देते हुये एक आम कार्यकर्त्ता के रूप में पार्टी की सेवा करते रहने की बात कही हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि आज से लगभग 11 साल पहले तत्कालीन जिला भाजपा अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने उन्हें मीडिया प्रभारी बनाया था। उसके बाद चक्रेश जैन, प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब, वेदसिंह ठाकुर,सुदर्शन बाझल के समय भी वे अपने पद बने रहे थे। जिला भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी उन्हें इसी पद पर बनाये रखा था। उनके कार्यकाल के एक साल बाद मीडिया प्रभारी के पद से श्रीकांत ने स्तीफा क्यों दिया था? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह की चर्चायें चल रहीं थीं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि हाल ही में सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सरकार ने लाल बत्ती देकर महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया हैं। मीडिया प्रभारी के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी है या फिर कुछ और? कुछ भाजपायी तो यह भी कहते देखे जा रहें हैं कि श्रीकांत अग्रवाल को हटाने की योजना बन चुकी थी इसलिये उन्होंने हटाये जाने के बजाय खुद ही हट जाना बेहतर समझा और इसलिये त्यागपत्र दे दिया था। इसे लेकर अलग अलग लोंगों की अलग अलग मान्यतायें हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि भाजपा नेताओं द्वारा उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा था। और अंततः उनका स्तीफा वापस हो गया हैं। इसी दौरान मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी थी जिन्हें अंत में निराशा ही हाथ लगी। लागों में इस स्तीफे के कारणों को लेकर अभी भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_2qkfn4="102" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span closure_uid_2qkfn4="123" style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अन्ना के आंदोलन को हाई जैक करने की भाजपायी कोशिश प्रारंभ?-&lt;/span&gt;संघ और भाजपा के चिंतक अन्ना हजारे के आंदोलन को हाई जैक करने की योजना बनाने में जुट गये हैं। इनका यह मानना हैं कि अन्ना के आंदोलन से कांग्रेस को नुकसान तो हो रहा हें लेकिन अन्ना चूंकि चुनावी राजनीति से दूर रहने की बात कह रहें हें इसलिये चुनावी राजनीति में इस नुकसान का लाभ कोई उठाने की स्थिति में नहीं हैं। संघ और भाजपा के रणनीतिकारों ने उज्जैन में तीन दिन के मंथन शिविर में इस ऐलेन्डे पर गुप्त चर्चा की हैं। इस आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके। परदे के पीछे रहकर अन्ना को समर्थन देने वाली भाजपा और संघ अब खुलकर राजनैतिक लाभ लेने के लिये खुद कमान संभाहलने की योजना बना रहें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_2qkfn4="122" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-2869397898168722997?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/2869397898168722997/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2869397898168722997'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/2869397898168722997'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-145939546378871472</id><published>2011-08-13T05:20:00.001-07:00</published><updated>2011-08-13T05:20:46.632-07:00</updated><title type='text'>Artical On Independance  Day Of India</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_cf7laj="109" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;भ्रष्टाचार के मामले में कानून के दायरे के बजाए लागू करने के कारगर तरीके की चिता जरूरी है&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div closure_uid_cf7laj="113" style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;आज का दिन भारत वर्ष की स्वतंत्रता का दिन हैं। सैकड़ों सालों की गुलामी और हजारों लोगों की शहादत के बाद देश को आजादी मिली थी। गांधी ने आजाद देश की एक कल्पना की थी जिसमें आजादी का लाभ समाज के अंतिम छोर के उस व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक था जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हैं। आज हम आजादी की 64 वीं सालगिरह मना रहें है। हम गांधी जी के सपनों के भारत हिसाब से देश का आकलन करें तो हम पाते हैं कि गांधीं के अंतिम छोर के आदमी की बात तो सभी राजनैतिक दल करने लगें हैं लेकिन वास्तव में आम आदमी की चिंता नेताओं को नहीं हैं। समाज के पिछड़े और दलित आदिवासी वर्ग के हितों की बात करने वाले ये नेता उनके विकास की बात तो छोड़ो उनके मान सम्मान तक को अपने अपने राजनैतिक हित साधने का मुद्दा बनाने में भी संकोच नहीं करते हैं। राजनीति समाज के हर हिस्से में इस कदर हावी हो चुकी है कि सभी समाजसेवी कहलाने वाले भी अपने आप को राजनीति से परे नहीं रख पा रहें हैं। आज हर एक की यह फितरत हो गई है कि आम आदमी जिन चीजों से प्रताडित हो उसे मुद्दा बनाओ और अपनी रोटी सेकों। आज ऐसा ही कुछ देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर हो रहा हैं। लोकपाल बिल के मामले को लेकर तरह तरह के तर्क वितर्क चल रहें हैं। प्रधानमंत्री, न्यायाधीश,संसद में सांसदों का आचरण और समूचे शासकीय अमले को इसके दायरे में लाने की बात की जा रही हैं।़ इसका आशय क्या यह नहीं है कि ऐसी मांग करने वालों का यह मानना हैं कि देश की विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका सभी भ्रष्टाचार के मामले में संदिग्ध हैंर्षोर्षो और यदि सच्चायी यही हैं तो फिर इस देश में किसी दूध से धुले लोकपाल को कहां तलाश किया जाएगार्षोर्षो आज भी देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई कानून बने हुए हैं। लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई कारगर रोक नहीं लग पा रही हैं। देखा जाए तो आज जरूरत इस बात की है कि इन कानूनोेंं को लागू करने वाली ऐजेसिंया पहले तो खुद ईमानदार हों और फिर भ्रष्टाचारी को दंड़ देने के कारगर उपाय करें। भ्रष्टाचार की शिकायत यदि भ्रष्टाचार से ही साबित नहीं हो पाएगी तो कोई भी कानून भला कहां और कैसे भ्रष्टाचार को रोक पाएगार्षोर्षो इसलिए किसी भी कानून के दायरे की चिंता करने के बजाए आज चिंता इस बात की करना जरूरी है कि इन कानूनों को कारगर तरीके से लागू करने के उपाय किए जाए और भ्रष्टाचारियों पर सख्ती से कार्यवाही करने का संकल्प लिया जाए वरना हमेशा ही ऐसे आंदोलन होते रहेगें और मुद्दे जस के तस रह जाएंगें। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-145939546378871472?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/145939546378871472/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/artical-on-independance-day-of-india.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/145939546378871472'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/145939546378871472'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/08/artical-on-independance-day-of-india.html' title='Artical On Independance  Day Of India'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-8784457129564919093</id><published>2011-07-10T23:29:00.000-07:00</published><updated>2011-07-10T23:29:53.119-07:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.</title><content type='html'>&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जैन नेताओं को उपकृत करने की बात पता चलते ही नरेश को रोकने नीता ने भोेपाल में डेरा डालकर क्या पत्ता कटवा दिया?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने बाद घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षोकांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं।सासंद के.डी.देशमुख सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश को रोकने नीता डटी रहीं भोपाल में -&lt;/span&gt;विधायक नीता पटेरिया प्रदेश के दौरे के नाम पर प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीं रहीं। लोगों को अंदाज नहीं हो पाया कि वे ऐसा क्यों कर रहीं हैंर्षोर्षो हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। सिवनी के नीता और नरेश दोनों ही लाल बत्ती के प्रबल दावेदार हैं। नीता पूर्व सांसद हैं और एक मात्र वे ही विधायक बने सांसदोंं में बचीं हैं जिन्हें मंत्री नहीं बनाया गया हैं।दूसरी ओर नरेश दिवाकर ऐसेहैं जिनकी टिकिट काट कर नीता को दी गई थी और पार्टी ने नीता को जीतने के बाद से उन्हें उपकृत नहीं किया हैं। लेकिन दोनो ही नेताओं यह होड़ लगी हैं कि पहले लाल बत्ती उन्हें मिले वरना बाद में दूसरे को मिल जाय इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। इसलिए मौका आते ही दोनो एक दूसरे के खिलाफ जुट जातें हैं और नतीजा सिफर ही निकलता हैं।योजना आयोग में बाबूलाल जैन की नियुक्ति से अब नरेश की राह और मुश्किल हो जाएगी क्योंकि पहले भी काफी जैन नेताओं को भाजपा लाल बत्ती से नवाज चुकी हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;कितने परिपक्व साबित होगें हीरा आसवानी? -&lt;/span&gt;निर्वाचन के नौ महीने बाद आखिर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में हीरा आसवानी की ताजपोशी हो ही गई। इस दौरान वर्तमान और भावी अध्यक्ष के बीच जैसी तना तनी चली वह किसी से छिपी नहीं हैं। कार्यक्रमों का कौन इंतजाम करें और कौन अध्यक्ष बन कर बैठा रहें? यही खेल इन नौ महीनों में चलता रहा हैं।जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के अत्यंत विश्वास पात्रों में गिने जाने वाले इंका नेताओं में हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने से यह माना जा रहा हैं कि भाजपा का नेतृत्व युवा सुजीत जैन के हाथों में सौंपे जाने के बाद युवा को ही कांग्रेस की कमान सौंपने के उद्देश्य से यह नियुक्ति की गई हैं। वैसे तो हीरा आसवानी को संगठन का लंबा अनुभव हैं और वे हरवंश समर्थक नेताओं की तरह अन्य इंका नेताओं में अछूत भी नहीं माने जाते हैं। लेकिन फिर भी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हरवंश सिंह से उन्हें काम करने में कितनी छूट मिल पाती हैं। यदि जितनी चाबी भरी राम ने की तर्ज पर ही काम चला तो पिछले अध्यक्ष महेश मालू के कार्यकाल से इनका कार्यकाल कुछ अलग नहीं होगा। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षो और कब अपने महामंत्रियों की घोषणा कर पाते हैं क्यों कि सुरेश पचौरी के कार्यकाल में ही घोषित हो चुके ब्लाक इंका अध्यक्ष अब तक अपने महामंत्रियों की घोषणा नहीं कर पाएं हैं?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;विज्ञापन में छपी एक फोटो इंकाइयों में चर्चित-&lt;/span&gt; नव नियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी के आभार और बधायी के विज्ञापनों में एक विज्ञापन इंकाइयों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ हैं। कांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। कुछ इंका नेताओं का यह दावा हैं कि एक इंका नेता ने अपनी फोटो का मोह त्याग कर ये कारनामा कर दिखाया हैं। वैसे हमेशा से सुर्खियों रहने वाले इंका नेताओं में ये भी एक माने जाते थे लेकिन लंबे समय से गुमनामी में रहना उनही नियति बन चुकी हैं? या किसी सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैर्षोर्षो इसे लेकर लोगों का अलग अलग मत हैं। वास्तविकता चाहे जो भी हो लेकिन हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने के विज्ञापनों ने चर्चाओं का एक मुद्दा तो दे ही दिया हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;इशारों को अगर समझो राज को राज रहने दो-&lt;/span&gt;सासंद के.डी.देशमुख लगभग हर सोमवार को सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके जब भी कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में गांव गांव में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। निर्माण कार्यों में भी भ्रष्टाचार की बात वे कभी कभी करते हैं लेकिन अवैध शराब के धंधें की चिंता हैं कि उनका पिंड़ ही नहीं छोड़ रही हैं। भाजपायी हल्कों में इस बात को लेकर बहुत सी चर्चाएं जारी हैं।कुछ भाजपा नेता तो यह तक कहते पाए जा रहें हैं कि या तो शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग भाऊ का इशारा ही नहीं समझ पा रहा हैं या फिर समझ कर भी जानबूझ कर अनजान बना हुआ हैं? कुछ नेता तो गाने के ये बोल बोल कर मजा ले रहें हैं कि Þइशारों को अगर समझो,राज को राज रहने दोÞ। अब इसमें राज क्या हैं और इशारा क्या है? येभाजपा नेता ही जाने लेकिन ऐसी चर्चाएं किसी भी जनप्रतिनिधि की सेहत के लिए अच्छभ् नहीं होतीं हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;सुरेंद्र की जीत से गर्माएगी भाजपायी गुटबंदी-&lt;/span&gt;अभिभाषक संघ के चुनाव में सुरेंद्र शुक्ला के अध्यक्ष चुने जाने से भाजपा की स्थानीय गुटबंदी में तेजी आने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। सिवनी के दो जन प्रतिनिधियों के बीच खिंची तलवारें तो जगजाहिर ही हैं। विधायक नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी कई मौकों पर एक दूसरे के सामने खड़े नज़र आए हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।यहां यह उल्लेखनीय हैं कि राजेश त्रिवेदी भी आगे विधानसभा की टिकिट के दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। यदि नीता पटेरिया दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर जाना चाहेंगी तो ऐसी परिस्थिति में नीता विकल्प के रूप में सुरेंद्र शुक्ला का नाम अड़ा सकतीं हैं। यहां महेश शुक्ला का नाम उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता हैं। राजेश के अरविंद मैनन से संबंध उनके दावे को पुख्ता कर सकते हैं। ऐसी हालात में जब दो ब्राम्हण नेता आमने सामने होंगें तो इस खींचातानी में विकल्प के रूप में नीता पटेरिया अपने विश्वस्त ब्राम्हण नेता प्रेम तिवारी को सामने कर निर्णायक स्थिति बना सकतीं हैं। यहां यह भी दावा किया जा रहा हैं कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र में ब्राम्हणों की निर्णायक संख्या को देखते हुए अगली टिकिट भी ब्राम्हण नेता को ही देना भाजपा की मजबूरी होगी। इसका कारण यह बताया जा रहा हैं कि पूरे जिले के ब्राम्हणों ने नीताको जिता कर यह सोचा था कि भाजपा उन्हें मंत्री बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद यदि सिवनी की टिकिट भी ब्राम्हण को देने के बजाय किसी और को दी गई तो जिले भर के ब्राम्हण मतदाताओं की नाराजगी भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। हालांकि यह सब कुछ बहुत दूर की बातें हैं लेकिन दूर की कौड़ी चलने वाले इन सारे समीकरणों पर पैनी नज़र रखें हुए हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-8784457129564919093?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/8784457129564919093/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/07/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8784457129564919093'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8784457129564919093'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/07/political-dairy-of-seoni-dist-of-mp.html' title='Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-8045666202463693602</id><published>2011-07-04T23:26:00.000-07:00</published><updated>2011-07-04T23:26:37.023-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;क्या राहुल और भूरिया की धार बोथली साबित करने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत जबेरा में हराया गया कांग्रेस को?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;विधायक नीता पटेरिया पर भाजपा के ही अन्य जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के आरोप पार्टी में ही चस्पा हो रहें हैं। बीते दिनों जनपद पंचायत सिवनी की अध्यक्ष किरण अवधिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके नीता पटेरिया को कठघरे में खड़ा कर भाजपा से त्यागपत्र दे दिया हैं। उनका आरोप हैं कि नीता की ही शह पर सी.ओ.उन्हें ना केवल नकार रहीं हैं वरन अपमानित भी कर रहीं हैं। जबेरा में इंका की हार के बारे में राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि अजय सिंह और भूरिया को बोथला साबित करने के लिए तथा इंका महासचिव दिग्विजय सिंह पर वार करने के लिए प्रदेश के क्षत्रपों को हथियार मुहैया कराने के लिए यह सब एक सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैं।पिछले लंबे समय से इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह स्वयं प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की जुगाड़ में लगे थे। लेकिन उनके दागदार इतिहास के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी।केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा के प्रभारी बनने के बाद प्रदेश के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने अंदाज में दौरे चालू कर दिए हैं। अपने कार्यक्रमों में वे ना केवल अधिकारियों को चमका रहें हैं वरन इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के समाने यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि ठीक से काम नहीं करोगे तो तुम्हें कोई बचा भी नहीं पाएगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नीता पर उपेक्षा का आरोप लगा भाजपा छोड़ी जनपद अध्यक्ष किरण ने -&lt;/span&gt;विधायक नीता पटेरिया पर भाजपा के ही अन्य जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के आरोप पार्टी में ही चस्पा हो रहें हैं। बीते दिनों जनपद पंचायत सिवनी की अध्यक्ष किरण अवधिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके नीता पटेरिया को कठघरे में खड़ा कर दिया हैं। उनका आरोप हैं कि नीता की ही शह पर सी.ओ.उन्हें ना केवल नकार रहीं हैं वरन अपमानित भी कर रहीं है और उनके द्वारा शिकायत करने के बाद भी भाजपा की ही सरकार में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जनपद अध्यक्ष ने अपने पति वरिष्ठ भाजपा नेता किशोरी लाल अवधिया ने भाजपा की सदस्यता से स्तीफा देने की घोषणा कर दी हैं। यहां यह उल्लेखनीय है केवलारी विस क्षेत्र के गा्रम कान्हीवाड़ा की रहने वाली किरण अवधिया की मारक क्षमता सिवनी विसक्षेत्र में नहीं हें इसलिए ही शायद वे विधायक नीता पटेरिया द्वारा उपेक्षित की जा रहीं थीं। हालांकि अभी उन्होंने किसी पार्टी की सदस्यता नहीं ली हैं लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहें हैं कि अब शायद वे हरवंश सिंह के प्रयासों से इंका की सदस्यता ले लेंगी।यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं जनपद चुनाव के दौरान किरण ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी और इंका के कुछ हरवंश विरोधियों ने उन्हें जिता दिया था। वे तत्कालीन प्रदेश इंका अध्यक्ष सुरेश पचौरी के कार्यक्रम में शामिल भी हुयीं थीं लेकिन ना तो उन्हें कांग्रेस में तव्वजो मिली और ना ही उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ा था। उनके पति किशोरीलाल अवधिया क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपायी नेता माने जाते हैं। उसके बाद भी उनकी पत्नी की उपेक्षा ने उन्हें भी इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने भी भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया पर इस आरोप के बाद छपारा क्षेत्र के दो जनप्रतिनिधियों ने भी उपेक्षा का आरोप चस्पा कर दिया हैं। नप अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के समर्थक भी उनके हो रहे विरोध के पीछे विधायक नीता पटेरिया की भूमिका ही बताते हैं। इस सबको देखकर यही कहा जा सकता हैं किम यह कहावत सौ फीसदी सही हैं कि राज के साथ राजरोग आते ही हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;जबेरा में इंका की हार क्या सोची समझी रणनीति थी?-&lt;/span&gt;इंका विधायक रत्नेश सालोमन के निधन से रिक्त हुयी जबेरा विधानसभा सीट से उनकी बेटी डॉ. तान्या सालोमन की उप चुनाव में भारी हार से इंका की राजनीति में बवाल आ गया हैं। जहां एक ओर प्रदेश स्तर पर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और चुनाव संचालक हरवंश को घेरने के प्रयास किए जा रहें हैं तो वहीं दूसरी ओर इस हार को इस रूप में भी देखा जा रहा हैं कुछ अति महत्वाकांक्षी इंका नेताओं ने सोची समझी रणनीति के तहत इंका की नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की धार कमजोर करने के लिए यह षड़यंत्र रच कर सफलता हासिल कर ली हैं। पिछले लंबे समय से इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह स्वयं प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की जुगाड़ में लगे थे। लेकिन उनके दागदार इतिहास के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। भूरिया और अजय सिंह के समय भी ये दौड़ में थे और कुछ पाना तो दूर जो विस उपाध्यक्ष का पद उनके पास हैं वह भी दांव में लग गया था। अजय सिंह की नियुक्ति और प्रियव्रत सिंह के प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए जाने के बाद हरवंश सिंह का पद दांव में लगा हुआ हैं। अपने लाभ के लिए पार्टी से गद्दारी और भाजपा से सांठ गांठ करना उनका शगल बन चुका हैं। अतीत के ऐसे कई उदाहरणों की समय समयपर इंका नेताओं ने आला कमान को शिकायतें भी भेजी थीं लेकिन इनके प्रभाव के चलते वे सब ठंड़े बस्ते में चली जाती हैं। प्रदेश का कोई ना कोई बड़ा इंका नेता उन्हें बचा लेता हैं। हरवंश के इन्हीं कारनामों के चलते उनके गृह जिले सिवनी में लोकसभा दो बार से,सिवनी और बरघाट विस पिछले पांच चुनावों से, लखनादौन दो चुनावों से और सिवनी नगर पालिका अध्यक्ष दो चुनावों स कांग्रेस हारती जा रही हैं। जिले की एक मात्र केवलारी विस क्षेत्र से हरवंश सिंह तो पिछले चार चुनावों से विधायक बनते आ रहें हैं लेकिन उनके क्षेत्र से चंद महीनों बाद कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हर बार हार जाती हैं। इंका नेता आशुतोष वर्मा ने इस बारे में प्रमाणों के साथ कई बार आलाकमान के सामने अपना रोना रोया लेकिन हरवंश सिंह कुछ भुगतने बजाय हर बार कुछ ना कुछ पाते ही रहे। जबेरा चुनाव में कांग्रेस की हार से हरवंश सिंह के राजदार कांग्रेसी नेता बहुत खुश दिखायी दे रहे हैं और यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि हरवंश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाता तो कांग्रेस को ये दिन नहीं देखने पड़ते। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि अजय सिंह और भूरिया को बोथला साबित करने के लिए तथा इंका महासचिव दिग्विजय सिंह पर वार करने के लिए प्रदेश के क्षत्रपों को हथियार मुहैया कराने के लिए यह सब एक सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि अजय सिंह ने साफ शब्दों में भोपाल की स्वागत रैली में मंच से यह तक कह दिया था कि हम प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो बना लेंगें अगर हरवंश सिह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मदद करना बंद कर दें। कुछ इंकाइयों का तो यह भी मानना हैं कि हरवंश सिंह ने अपना पद बचाने लिए जानबूझ कर कांग्रेस को हार के गर्त में गिराया हैं ताकि अजय सिंह और भूरिया उन पर स्तीफा देने के लिए कुछ कहने के लायक ही ना रह जाए और उनका पद बच जाए। हरवंश सिंह को चुनाव संचालक बनाने के फैसले को कुछ विश्लेषक आत्मघाती निर्णय मान रहें हैं। दिग्गी राजा से हरवंश सिंह की पिछली निकटता को आधार बनाकर प्रदेश के कुछ इंकाई क्षत्रप दिग्गी राजा पर आक्रमण करने की रणनीति बनाने में भी जुट गए हैं। वैसे पिछले दिनों कांग्रेस आला कमान द्वारा बनायी गईं तीन महत्वपूर्ण समितियोंमें हरवंश सिंह को शामिल ना किए जाने को लेकर भी तरह तरह की अटकलें जारी हैं जबकि उनसे कद में बौने कई इंका नेताओं को इनमें शामिल किया गया हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;गौरी ने कमाल दिखाना शुरू किया केवलारी में-&lt;/span&gt;केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा के प्रभारी बनने के बाद प्रदेश के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने अंदाज में दौरे चालू कर दिए हैं। अपने कार्यक्रमों में वे ना केवल अधिकारियों को चमका रहें हैं वरन इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के समाने यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि ठीक से काम नहीं करोगे तो तुम्हें कोई बचा भी नहीं पाएगा। मंच से हरवंश सिंह पर तीखे प्रहार करके भाजपा कार्यकत्ताZओं की तालियां बटोरने में भी कामयाब रहें हैं। हरवंश सिंह और और गौरीशंकर बिसेन की राजनैतिक शैली एक जैसी हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह चर्चा व्याप्त हैं कि इन दोनों हरफन मौला नेताओं के बीच हाने वाली पेंतरें बाजी ना केवल रोचक होगी वरन किस अंजाम पर पहुचेंगीर्षोर्षो इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं हैं। ये दोनों ही नेता यह मानकर चलते हैं कि राजनीति में ना तो हमेश कोई दुश्मन होता है औ ना ही दोस्त। इसलिए कब कौन किस पर दवाब बना कर अपना उल्लू सीधा कर लेर्षोर्षो यह देखने योग्य दृश्य होगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-8045666202463693602?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/8045666202463693602/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/07/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8045666202463693602'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8045666202463693602'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/07/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-8985443720786897850</id><published>2011-06-14T00:33:00.000-07:00</published><updated>2011-06-14T00:33:15.521-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;केवलारी के प्रभारी बनने के बाद दूसरे ही प्रवास में राजा भोज प्रतिमा अनावरण के मंच पर एक साथ दिखे गौरी और हरवंश&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;इस क्षेत्र के तीनों पार्षदों दलीय भावना से परे हटकर इस आन्दोलन को संचालित किया। इसमें सर्वाधिक चर्चित मामला क्षेत्र में सालों से बन रही पानी की टंकी हैं जिसमें ठेकेदार को बिना काम शुरू किये ही भारी धनराशि दे दी गई थी। केवलारी विधानसभाक्षेत्र के ग्राम मोहबर्रा में राजा भोज की प्रतिमा के अनावारण का कार्यक्रम सियासी हल्कों में चर्चित हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा द्वारा केवलारी क्षेत्र के प्रभारी बनाये गये मन्त्री गौरीशंकर बिसेन और क्षेत्रीय इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सामाजिक आयोजन में हरवंश सिंह को बुलाने को लेकर भारी बवाल भी मचा था। पिछले बीसों सालों से मोहबर्रा गांव की पहचान वहां के वरिष्ठतम इंका नेता झुम्मक लाल बिसेन के कारण रही हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में हरवंश सिंह के कारण उन्हें बहुत नीचा देखना पड़ा। अब इस सब के पीछे इंका और भाजपा के इन दो महारथियों की क्या रणनीति रहीर्षोर्षो इसके बाबद अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। एक तरफ बाबा के समर्थकों के साथ ही भाजपा के लोगों ने भी अनशन मेंं भागीदारी की हैं। जिलेके प्रमुख समाजवादर नेता वरिष्ठअधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता एवं नरेन्द्र अग्रवाल भी अपने साथियों के साथ धरने में शामिल हुये। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने भी बाबा को रामलीला मैदान में कार्यवाही के बाद समझाइश देने का खुलासा किया हैं।&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;भेरौगञ्ज में ग्यारह दिन चला धरना-&lt;/span&gt;नगरीय क्षेत्र की श्रीलंका मानी जाने वाली उप नगरी भेरौगञ्ज के नागरिकों ने एक समिति बना कर सोमवारी चौक में धरना दिया। समिति के अध्यक्ष महेश उर्फ मन्दरा डहेरिया बनाये गये थे। 11 दिनों तक चले इस धरने में पालिका के उपाध्यक्ष राजिक अकील ने सक्रिय भूमिका निभायी। इस क्षेत्र के तीनों पार्षदों दलीय भावना से परे हटकर इस आन्दोलन को संचालित किया। इसमें सर्वाधिक चर्चित मामला क्षेत्र में सालों से बन रही पानी की टंकी हैं जिसमें ठेकेदार को बिना काम शुरू किये ही भारी धनराशि दे दी गई थी। बताया जाता हैं कि यह ठेकेदार तत्कालीन सहायक ख्न्त्री डी. आदित्य कुमार का खास था जिसे सांठ गांठ और भारी लेन देन करके पैसा दे दिया गया। परिषद जिस ठेकेदार के कारण परेशानी में पड़ी हैं उसे पैसा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले आदित्य कुमार के खिलाफ ना जाने क्यों कोई कार्यवाही नहीं कर रही हैं र्षोर्षो इस परिषद के कार्यकाल में यह पहला जन आन्दोलन था। सिवनी की जनता आन्दोलित हो जाये तो इसे गम्भीरता से लेना चाहिये क्योंकि यहाँ के लोग बहुत अधिक सहनशील हैं। ऐसे लोग यदि सड़क पर उतर आयेेंं तो इसे नकारना घातक हो सकता हैं। वैसे पालिका प्रशासन ने 11 वें दिन अनशन को समाप्त कराने में तो सफलता हासिल कर ली हैं लेकिन यदि मांगों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो यह लावा फिर कभी भी फूट सकता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;राजा भोज की प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम में गौरी:हरवंश एक मंच पर दिखे-&lt;/span&gt;केवलारी विधानसभाक्षेत्र के ग्राम मोहबर्रा में राजा भोज की प्रतिमा के अनावारण का कार्यक्रम सियासी हल्कों में चर्चित हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा द्वारा केवलारी क्षेत्र के प्रभारी बनाये गये मन्त्री गौरीशंकर बिसेन और क्षेत्रीय इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस आयोजन में सिर्फ हरवंश सिंह ही गैर पवार नेता थे अन्यथा सभी नेता समाज के ही थे। सामाजिक आयोजन में हरवंश सिंह को बुलाने को लेकर भारी बवाल भी मचा था। पिछले बीसों सालों से मोहबर्रा गांव की पहचान वहां के वरिष्ठतम इंका नेता झुम्मक लाल बिसेन के कारण रही हैं। वे लम्बे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहें हैं और उन्हें बहुत सम्मान की नज़रों से देखा जाता हैं। वे पार्टी में भी कई पदों पर रहें हैं और केवलारी जनपद पंचायत के अध्यक्ष तथा पहली जिला पंचायत के उपाध्यक्ष भी रहें हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में हरवंश सिंह के कारण उन्हें बहुत नीचा देखना पड़ा। बताया जाता हैं पैसा फेंक तमाशा देखने के आदी हरवंश सिंह ने झुम्मक भाऊके पास पचास हजार रूपये भेज दिये और कार्यक्रम में आने का आग्रह भी किया। भोले भाले झुम्मक भाऊ ने चाल समझी नहीं और उन्हें आमन्त्रित कर लिया। जब समाज में यह बात पता चली तो इसका भारी विरोध हुआ और निZविवादित रहने रहने वाले झुम्मक भाऊ विवाद में आ गये। बताया जाता हैं कि समाज के दवाब के चलते उन्हें ना केवल इस बात के लिये माफी मांगनी पड़ी वरन उन्होंने वे पैसे भी दे दिये कि आप लोगों को जैसा उचित लगे वैसा करें। समाज के एक बुजुर्ग का मान रखने के लिये लोग इस बात के लिये सहमत हो गये।राजनैतिक क्षेत्रों में ऐसा माना जा रहा था कि अपने कारण इतने बुजुर्ग कांग्रेसी के अपमान को देखते हुये हरवंश सिंह आयेंगें नहीं जेकिन ऐसा नहीं हुआ। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि हरवंश सिंह ने यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत किया था। उनका ऐसा मानना था कि प्रदेश भाजपा द्वारा हाल ही में प्रभारी बनाये गये गौरीशंकर बिसेन के साथ एक ही मंच पर दिखकर वे यह राजनैतिक संकेत देना चाहते थे कि नूरा कुश्ती आगे भी जारी रहेगी। वैसे यह बात भी गौर करने लायक हैं कि एक ही मंच पर आने से ना तो गौरी भाऊ ने परहेज किया और ना ही हरवंश सिंह ने। लेकिन यह जरूर देखा गया कि केवलारी के भाजपा प्रत्याशी पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थे। वैसे बताया तो यह गया कि वे अपनी अस्वस्थता के कारण शामिल नही हो पाये थे लेकिन उनका वहां ना रहना राजनैतिक हल्कों में चर्चित रहा।अब इस सब के पीछे इंका और भाजपा के इन दो महारथियों की क्या रणनीति रही? इसके बाबद अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे एक बात तो सर्वमान्य हैं कि ये दोनों ही नेता हरफन मौला खिलाड़ी हैं और कब किसको कौन दांव लगा कर चित कर दें ?इसकी भविष्यवाणी भी करना सम्भव नहीं हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;बाबा के अनशन के आस पास घूमती रही जिले की राजनीति-&lt;/span&gt;बाबा रामदेव के अनशन को लेकर राजनीति जिले भी गरमायी रही। एक तरफ बाबा के समर्थकों के साथ ही भाजपा के लोगों ने भी अनशन मेंं भागीदारी की हैं। भाजपा के सभी प्रमुख नेता अध्यक्ष सुजीत जैन,विधायक द्वय नीता पटेरिया और कमल मर्सकोले,पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी सहित संघ के प्रमुख लोगों ने भी हिस्सा लिया।इनके अलावा जिलेके प्रमुख समाजवादर नेता वरिष्ठअधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता एवं नरेन्द्र अग्रवाल भी अपने साथियों के साथ धरने में शामिल हुये। बाबा के कार्यक्रम में प्रमुखता से मंच पर आसीन होने वाले विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने रामलीला मैदान में सरकार द्वारा की गई कार्यवाही के बाद एक विज्ञप्ति जारी कर यह खुलासा किया कि उन्होंने बाबा को सिवनी प्रवास के दौरान उनकी समर्थक आशा सनोड़िया के निवास पर यह समझाइश दी थी कि यदि वे योग ही कराते रहेंगें तो पूजे जायेंगें और यदि राजनीति में आयेंगें तो उनकी फजीहत हो जायेगी। उनकी यहसमझाइश की बात यदि बाबा के कार्यक्रम के तुरन्त बाद आती और बाबा के समर्थक यदि उन्हें हरवंश सिंह की समझाइश मान लेने के लिये मना लेते तो ना तो केन्द्र की कांग्रेस सरकार को इतनी मशकक्त करनी पड़ती और ना ही बाबा की इतनी फजीहत होती। हरवंश सिंह के इसखुलासे के बाद जिला कांग्रेस ने भी बाबा पर तीखे हमले किये हैं वरना इसके पहले कांग्रेस की चुप्पी राजनैतिक हल्कों में चर्चित रही हैं। बाबा के रामलीला मैदान में अनशन शुरू करने के साथ ही पूरे देश में बाबा ने अपने समर्थकों को अनशन शुरू करने का आव्हान किया था और दावा किया था कि पूरे देश के 624 जिलों में एक करोड़ लोग उनके साथ अनशन करेंगें। इस हिसाब से देश के हर जिले में 16026 आदमी धरने पर बैठना चाहिये थे। लेकिन देश के किसी भी जिले में इतने लोग धरने में बैठे नहीं दिखे। इससे एक बात तो साबित हो गई हैं कि बाबा के कार्यक्रमों में लोग योग के कारण ही आते थे और जब बिना योग के लोगों का बाबा ने अनशन के लिये आव्हान किया तो सारा आयोजन पिट गया। कुछ दिन बाद जब भाजपायी और अन्य नेता हट गये तो बमुश्किल अगुंलियों पर गिने जाने लायक लोगों ने बाबा के स्वस्थ्य होने वाले यज्ञ में हिस्सा लिया। बाबा रामदेव के मुद्दे सही होने के बावजूद भी ऐसे थे जिन पर तत्काल सब कुछ करना सम्भव नहीं था और बाबा समय देने को तैयार नहीं थे। इसी कारण मामला तूल पकड़ गया और योग गुरू बाबा अनशन के छठवें दिने से बीमार हो गये। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: 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की प्रशासन से अपेक्षा&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;सिवनी। समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी में किसानों का लगभग 10 हजार िक्वण्टल गेहूँ ज्यादा तौल कर उनका शोषण किया गया हैं। इस गेहूँ की कीमत 1 करोड़ 27 लाख रुपये होती हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में रखी बोरियों को तौल कर इस घोटाले की जांच कर दोषियों को दंड़ित करें तथा किसानों को मिलने वाली यह रकम उनके खातों में जमा करायी जाये।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;उल्लेखनीय हैं कि जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से गेहूँ खरीदी का काम किया गया था शासन द्वारा निर्धारित 31 मई तक जिले में लगभग 10 लाख िक्वण्टल गेहूँ किसानों से खरीदा गया हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;लगभग सभी खरीदी केन्द्रों पर किसान के गेहूँ तोलने में गोल माल किया गया हैं। हर बोरी में पचास किलो के बजाय 51 किलो से लेकर 51 किलो 300 ग्राम तक गेहूँ तौला गया हैं। बताया जाता है कि नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों का यह दवाब था कि 50 किलो की हर बोरी पर कम से कम आधा किलो की ज़िन्दा तौल कर ही लाया जाये। मानक आधार पर हर बोरी का वजन 650 ग्राम होना चाहिये था लेकिन घटिया खरीदी गई बोरियों का वजन 450 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक का ही था। इस तरह किसान से कम से कम 1 किलो प्रति िक्वण्टल गेहूँ अधिक तौल में लिया गया हैं। विरोध करने वाले किसानों का माल ही नहीं लिया जाता था। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;जिले में हुयी 10 लाख िक्वण्टल की खरीदी में इस तरह किसान का 10 हजार िक्वण्टल ज्यादा तौला गया जिसकी कीमत 1270 रु. प्रति िक्वण्टल के हिसाब से 1 करोड़ 27 लाख रुपये होती हैं। केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित 1170 रु. पर राज्य सरकार द्वारा 100 रु. प्रति िक्वण्टल बोनस किसानो को दिया गया था। लेकिन इस लूट पाट के कारण किसान को हर िक्वण्टल पर कम से कम 12रु. 70 पैसे कम कीमत मिली हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि करोड़ो के इस घोटाले की जांच की जाये। यह भी अपेक्षा है कि प्रशासन नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में बोरियों को तुलवा कर इससच का पता लगा सकते हैं जिसमें किसानो को मिलने वाली 1 करोड़ 27 लाख रुपये की राशि गोल हो गई हैं। प्रशासन से यह भी अपेक्षा हैं कि जिस किसान ने जितना गेहूँ बेचा है उसमें एक किलो गेहूँ का मूल्य जोड़ कर यह रकम उनके खातों में जमा करायी जाये और इस गोल माल करने के दोषियों के खिलाफ दंड़ात्मक कार्यवाही की जाये। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-8985443720786897850?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/8985443720786897850/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/06/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_14.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8985443720786897850'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/8985443720786897850'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/06/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_14.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-5256985543207155598</id><published>2011-06-06T22:38:00.000-07:00</published><updated>2011-06-06T22:38:56.017-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;इंका और भाजपा के हरफनमौला खिलाड़ियों हरवंश और गौरी भाऊ के बीच केवलारी में होने वाली जंग क्या रोचक होगी?&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span 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style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;भाजपायी राजनीति में इन दिनों पूर्व विधायक नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की युगलबन्दी चर्चित हैं। दोनों नेताओं को एक साथ ना केवल कई कार्यक्रमों में शिरकत करते एक साथ देखा गया हैं वरन ऐसे भी चर्चे हैं कि दोनों ही नेता एक साथ प्रदेश भाजपा के कार्यालय में भी देखें गयें हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा महाकौशल के वरिष्ठ भाजपा नेता और मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को केवलारी क्षेत्र का प्रभार दिया हैं जो कि विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का निर्वाचन क्षेत्र हैं। मुख्यमन्त्री की तरह ही मरावी ने प्रभारी बनने के बाद उंहोंने भी केवलारी आने से परहेज किया था जिससे कार्यकत्ताZओं में असन्तोष था। पहले भी बिसेन और हरवंश को एक साथ खड़े देखा गया हैं। प्रभात झा और नव नियुक्त प्रभारी गौरीशंकर बिसेन को बहुत कुछ करना होगा वरना नतीजा फिर वही ढाक के तीन पात ही निकलेगा। भाजपा ने कहा हैं कि बिजली की दरों में वृद्धि प्रदेश सरकार ने नहीं वरन नियामक आयोग ने की हैं जिसे कांग्रेस सरकार ने बनाया था। यह कांग्रेस की दिग्गी सरकार का ही पाप हैं जिसे प्रदेश की जनता भोग रही हैं।जिले से एक और पुरानी उपलब्धि छिनने जा रही वह हैं एकमात्र विधि महाविद्यालय।इस मुद्दे पर भी वैसी ही राजनीति हो रही हैं जैसी करने के नेता आदी हो चुके हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश राजेश जोड़ी भाजपायी हल्कों में चचििZत-&lt;/span&gt; भाजपायी राजनीति में इन दिनों पूर्व विधायक नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की युगलबन्दी चर्चित हैं। दोनों नेताओं को एक साथ ना केवल कई कार्यक्रमों में शिरकत करते एक साथ देखा गया हैं वरन ऐसे भी चर्चे हैं कि दोनों ही नेता एक साथ प्रदेश भाजपा के कार्यालय में भी देखें गयें हैं। सियासी हल्कों में चर्चा हैं कि इन दोनों नेताओं के रास्त भले ही अलग अलग हों लेकिन मञ्जिल एक ही हैं और वो है सिवनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने की। इनमें से एक नरेश दिवाकर तो भूतपूर्व विधायक हैं और पुन: विधायक बनना चाहते हैं तो दूसरी ओर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी पालिका अध्यक्ष के बाद अगली पायदान के रूप में विधायक बनने का सपना सञ्जोये हुये हैं। वैसे अतीत में देखा जाये तो इन दोनों ही नेताओं के सम्बन्ध अच्छे नहीं रहें हैं। जब नरेश विधायक थे और राजेश युवा मोर्चे के अध्यक्ष थे तबदोनों में ही काफी तना तनी चला करती थी। ऐसा भी दावा किया जाता था कि नरेश की टिकिट कटवाने में भी राजेश की महत्वपूर्ण भूमिका थी। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि वर्तमान में भाजपा की ही नीता पटेरिया ना सिर्फ विधायक हैं वरन प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष भी हैं। अगले चुनावमें उनकी टिकिट कट ही जायेगी इसकी भी कोई गैरण्टी नहीं हैं। ऐसे में दोनों के बीच बनी यह जुगल बन्दी कितने दिन चलेगी और ना जाने कब टूट जायेगीर्षोर्षो इसके बारे में कोई ठोसदावा नहीं किया जा सकता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;हरवंश के क्षेत्र के गौरी बने प्रभारी फिर शुरू हुयी चर्चायें -&lt;/span&gt;प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा महाकौशल के वरिष्ठ भाजपा नेता और मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को केवलारी क्षेत्र का प्रभार दिया हैं जो कि विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का निर्वाचन क्षेत्र हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस से हारी हुयी सीटों को जीतना भाजपा ने पहली प्राथमिकता बनायी हैं।इसके तहत पहले सरकार के मन्त्री जयसिंह मरावी को प्रभारी बनाया गया था। लेकिन मुख्यमन्त्री की तरह प्रभारी बनने के बाद उंहोंने भी केवलारी आने से परहेज किया था जिससे कार्यकत्ताZओं में असन्तोष था। इसके चलते प्रभात झा ने अब गौरीशंकर बिसेन को प्रभारी बनाया हैं। भाजपायी हल्कों में यह दावा भी किया जा रहा हें कि गौरी भाऊ खुद भी प्रभारी बनने के इच्छुक थे। राजनैतिक विश्लेषकों में इन चर्चाओं के लेकर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा हैं। पहले भी बिसेन और हरवंश को एक साथ खड़े देखा गया हैं। चाहे फिर वह परिसीमन का मामला हो या फिर चुनावी समीकरणों का मामला हो। दोनों ही नेताओं ने एक दूसरे के लाभ के लिये दलीय हितों को दरकिनार करने में कोई परहेज नहीं किया हैं। पिछले विधानसभाचुनाव में हरवंश की जीत और भाजपा की हार को लेकर भाजपायों ने जो आरोप चस्पा किये थे उसके कुछ छीण्टें गौरी भाऊ के दामन पर भी आये थे। वैसे राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि बिसेन और हरवंश सिंह दोनों ही कर फल और जुगाड़ की राजनीति में माहिर हैं। वैसे दबे स्वरों में एक चर्चा यह भी हैं कि शिवराज-हरवंश सांठगांठ के किस्सों के चलते प्रभात झा ने पहले नियुक्त प्रभारी को अलग कर गौरीशंकर बिसेन को इस आशा के साथ मोर्चे पर लगाया हैं कि वे बीसें साबित होगें और केवलारी में भाजपा को जिताने के लिये सफल रणनीति बना कर राह आसान करेंगें। लेकिन क्षेत्र के समर्पित भाजपा कार्यकत्ताZ बार बार धोखा खाकर इतनेहताश होचुके हैं और उनकी यह धारणा बन चुकी हैं कि वक्त आने पर हरवंश सिंह सभी भाजपा नेताओं को पटा लेतें है और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता हैं। भाजपा कार्यकत्ताZओं में एक बार फिर से विश्वास पैदा करने के लिये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और नव नियुक्त प्रभारी गौरीशंकर बिसेन को बहुत कुछ करना होगा वरना नतीजा फिर वही ढाक के तीन पात ही निकलेगा। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अब तो कांग्रेसपर दोष मढ़ने के बजाय अपनी उपलब्धि गिनाये भाजपा -&lt;/span&gt;प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर बिजली की दरों में हुयी वृद्धि को लेकर हर जिले में ब्लाक स्तर पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा हैं। जिले में भी यह क्रम शुरू हो चुका हैं। हालांकि जिले यह सब औपचारिक ही रहेगा क्योंकि जिले के अध्यक्षों की घोषणा ना होने से ना तो पुराने ही सक्रिय रह गये हैं और नाही नये। कांग्रेस के इस हमले का जवाब देते हुये भाजपा ने खुद कांग्रेस और दिग्गी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया हैं। भाजपा ने कहा हैं कि बिजली की दरों में वृद्धि प्रदेश सरकार ने नहीं वरन नियामक आयोग ने की हैं जिसे कांग्रेस सरकार ने बनाया था। यह कांग्रेस की दिग्गी सरकार का ही पाप हैं जिसे प्रदेश की जनता भोग रही हैं। अख्बारों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार तो विद्युत कम्पनियों ने बिजली की दरों में 22 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग की थी जिसे नियामक आयोगनें नहीं माना और वर्तमान में 4 से लेकर 6 प्रतिशत तक बिजली की दरें बढ़ायीं हैं। यदि ऐसा हैं तो भाजपा को इसे कांग्रेस और दिग्गी राजा का पाप मानने के बजाय पुंय मानना चाहिये जिसके कारण जनता पर 22 प्रतिशत वृद्धि का बोझ नहीं पड़ा। बिजली पानी सड़क को मुद्दा बना कर आठ साल पहले सरकार बनाने वाली भाजपा आखिर कब तक अपने पापों को कांग्रेस और दिग्गी के सिर मढ़ते रहेगी जबकि वास्तविकता तो यह हैं कि उसकी सरकार अपने ही वायदों पर खरी नहीं उतर रही हैं। भाजपा के राज में भी बिजली के बिल तो किसानों को करण्ट मार रहें हैं लेकिन तारों में करण्ट गुल रहता हैं। यदि दूसरे कार्यकाल में भी भाजपा अपनी उपलब्धियों को गिनाने की स्थिति में नहीं हैं तो यह अत्यन्त ही शर्मनाक बात हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;लॉ कालेज छिनने पर भी घिसीपिटी राजनीति ही हो रही है-&lt;/span&gt;जिले से एक और पुरानी उपलब्धि छिनने जा रही वह हैं एकमात्र विधि महाविद्यालय। बहुत संघंषोZं के बाद कालेज में लॉ फेक्ल्टी खेलने की घोषणा गेदरिंग में आये तत्कालीन शिक्षा मन्त्री माधवलाल दुबे ने की थी। सन 1981 से यह लगातार चलते रहा। लेकिन अब यह बन्द होने जा रहा हैं। इस मुद्दे पर भी वैसी ही राजनीति हो रही हैं जैसी करने के नेता आदी हो चुके हैं। प्रदेश में सरकार चलाने वाली भाजपा और उसके नेता पत्र लिखकर राज्पाल की ओर गेन्द उछाल रहे हैं तो कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने कोई आन्दोलन छेड़ना तो दूर अभी कुछ कहना या लिखना भी उचित नहीं समझा हैं। एक प्रश्न यह भी उठता हैं कि इतना बड़ा फैसला सरकार ने कोई एक दिन में तो लिया नहीं होगार्षोर्षोयदि लम्बे समय से यह कवायत चल रही थी तो कालेज से सम्बन्धित शासकीय कर्मचारियों ने इससे जन प्रतिनिधियों को अवगत क्यों नहीं कराया? सरकार के द्वारा फैसला लेेने के बाद ही यह मामला क्यों खुलार्षोर्षो क्या जन प्रतिनिधियों को इस बात का अहसास नहीं था कि उनके क्षेत्र और जिले से एक और चीज छीनी जा रही हैं?क्या बार कांउसिल आफ इंड़िया ने निरीक्षण फीस के रूप में एक लाख रुपये की राशि जमा करने को कहा था? यह राशि जमा की गई या नहीं? ये तमाम ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर जनता के सामने आना चाहिये अंयथा और भी चीजें जिले से ऐसे ही छिनती जायेंगीं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-5256985543207155598?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/5256985543207155598/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/06/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/5256985543207155598'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/5256985543207155598'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/06/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-7973644441849124721</id><published>2011-05-30T23:50:00.000-07:00</published><updated>2011-05-30T23:50:34.486-07:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;दिग्विजय के खुले विरोध और कमलनाथ के समर्थन के बीच बाबा रामदेव के कार्यक्रम में हरवंश का आना सियासी हल्कों में चर्चित&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं। पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;खुल कर दिखने लगी भाजपा में भी गुटबाजी-&lt;/span&gt;जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।पहले जिला भाजप के महामन्त्री पद से नन्दकिशोर सोनकेशरिया की छुट्टी हुयी फिर टेगौर वार्ड की पार्षद श्रीमती लीला डागोरिया को पार्टी सदस्यता से निलम्बित कर दिया गया। इस निर्णय पर जमकर अखबारबाजी हुयी। नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। इसमें यह बताया गया कि उनके स्पष्टीकरणसे सन्तुष्ट होकर बहाली की गई हैं। इसमें यह सवाल उठ खड़ा होता है कि निलम्बन के पूर्व कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किया गयार्षोर्षो भाजपायी हल्कों में यह माना जा रहा हैं कि ये सब गुटबाजी के कारण किया जा रहा हैं। गुटबाजी का राजरोग भाजपा में भी अब खुल कर दिखायी देने लगा हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;दिग्गी के विरोध के बाद भी हरवंश का बाबा रामदेव के शिविर में आना चर्चित-&lt;/span&gt;योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। बीते दिनों हुये इस कार्यक्रम में जहा। भाजपा के सभी प्रमुख नेता जिला अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायकद्वय नीता पटेरिया एवं कमल मर्सकोले, पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी,पूर्व विधायक नरेश दिवाकर आदि शामिल थे तो दूसरी ओर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल शामिल थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। हालांकि केन्द्रीय मन्त्री कमलनाथ भी बाबा के कार्यक्रम में छिन्दवाड़ा में शामिल हुये थे और उन्होंने खुले आम बाबा के अभियान का समर्थन भी किया था। लेकिन सिवनी मेंहरवंश सिंह के शामिल होने को लेकर तरह तरह की चर्चायें हैं। कुछ लोगों का मानना हैं कि हरवंश सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनना चाह रहें थे। लेकिन इन दोनों ही पदों पर दिग्गी राजा ने ऐसी रणनीति बनायी कि हरवंश सिंह का कुछ बन पाना तो दूर जो आज उनके पास हैं उसके भी जाने की तलवार उनके सिर पर लटकी हुयी हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि कान्तिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष और अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं जो कि दिग्गी खेमे के ही माने जा रहें हें। दिग्गी खेमे के ही प्रियव्रत सिंह युवक कांग्रेस के अध्यक्ष पद काचुनाव जीत चुके हैं। राजनैतिक हल्कों में चर्चा हैं कि ऐसी परिस्थिति में ठाकुर हरवंश सिंह की विधानसभा उपाध्यक्ष पद से बिदायी निश्चित मानी जा रही हैं। हरवंश समर्थकों का मानना हैं कि दिग्गी राजा की सोची समझी रणनीति के कारण ही हरवंश सिंह से लालबत्ती छिनने की नौबत आ गई हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोगों का यह भी मानना हैं कि कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले बाबा रामदेव के आयोजन में हरवंश सिंह इसलिये शामिल हुये कि कहीं उनकी गैरहाजरी में बाबा सिवनी में उनके खिलाफ ही कुछ ना बोल दे। हरवंश सिंह की यह आशंका सही भी साबित हुयी। उनके जाने के बाद पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने यह सवाल कर ही दिया कि बैतूल में शिवााज सिंह चौान जिन पर डम्पर कांड़ का आरोप हैं,छिदवाड़ा में कमलनाथ जिस सरकार को भ्रष्ट कह रहें हैं और सिवनी में हरवंश सिंह जिन पर भ्रष्टाचार केकई आरोप हैं इन्हें सामने रखकर आप कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लडेंगेंर्षोर्षो बाबा इस प्रश्न से असहज हो उठे थे। हालांकि उन्होंने यह जवाब देकर मामले को टाल दिया कि मैं उन्हें जन प्रतिनिधि के रूप में तो जानता हूं लेकिन किसी को काई प्रमाणपत्र नहीं दे रहा हूं। लेकिन इसके पूर्व में बाबा ने यह भी कहा था कि जब हरवंश सिंह वन मन्त्री थे मैं उन्हें तब से जानता हूं और उनके यहां रुका भी हूंं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नरेश के आग्रह पर बाबा द्वारा शहीदों को माला पहनना हुआ चर्चित -&lt;/span&gt;संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इंका सांसद बसोरीसिंह मरकाम जहां एक भी शब्द संसद में ना बोलने वाले में शामिल है तो वहीं भाजपा सांसद के.डी.देशमुख सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले सांसदों में शामिल हैं। जिले के दोनों सांसदों के इस व्यवहार से तो संसद में ऐसा सन्देश गया होगा कि इनके क्षेत्र देश के ऐसे विकसित क्षेत्र हैं जहां कोई समस्या नहीं हैं। जबकि प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े हुये इन क्षेत्रों में कई ऐसी ज्वलन्त समस्यायें हैं जिनके लिये संसद में लड़ना जरूरी हैं। चाहे वह छिन्दवाड़ा से नैनपुर छोटी रेल लाइन को बकड़ी रेल लाइन में बदलने की हो हो या रामटेक गोटेगांव नई रेल लाइन की हो या उत्तर दक्षिण गलियारे के तहत बनने वाली फोर लेन सड़क ीक की अनुमति की हो। लेकिन इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;सांसद मरकाम,देशमुख की संसदीय भूमिका से निराशा -&lt;/span&gt;पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर अपने एक दिवसीय प्रवास में बाबा रामदेव ने शासकीय सुधारालय के एक हिस्से में लग रहे कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी। कन्या महाविद्यालय के सुधार कार्य के दौरान इन मूर्तियों को बनवाया गया था जिसमें भारी भ्रष्टाचार होने की खबरें सुर्खियों में रहीं थी। उस दौरान यह भी कहा गया था कि ऐसे पैसे से शहीदों की मूर्तियां बनवा कर उनका अपमान किया गया हैं। जांच की मांग होने के बाद भी आज तक प्रदेश सरकार ने ना तो जांच की और ना ही दोषियों को दंड़ित ही किया। नरेश दिवाकर के कार्यकाल में गुरु गोलवलकर, नेताजी और सन्त विनोबा की ये मूर्तियां बनवायी गईं थी जिनका अनावरण संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में किया था। अपनी भारत स्वाभिमान यात्रा पर निकले बाबा रामदेव का पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर वहां जाना और माल्यार्पण करना जन चर्चाओं में आ गया हैं। पहले से ही यह चर्चा थी कि प्रथम पंक्ति में बैठ कर योग करने, माला पहनाने, मंच पर बाबा से आशीZवाद लेने और मंच पर आसीन होने के लिये ग्यारह हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का पैकेज था। ऐसे मंच से और ऐसे कार्यक्रमों में बाबा के जाने से उनके अभियान को सिवनी में तो निश्चित रूप से ठेस ही पहुंची हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-7973644441849124721?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/7973644441849124721/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/05/political-dairy-of-seono-dist-of-mp.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7973644441849124721'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7973644441849124721'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/05/political-dairy-of-seono-dist-of-mp.html' title='Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-7232027475522668929</id><published>2011-05-23T23:38:00.000-07:00</published><updated>2011-05-23T23:38:53.952-07:00</updated><title type='text'>plitical dairy of seoni disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;अजय सिंह के चन्द शब्दों से अपनी अपनी पार्टी में आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश क्या बचाव की मुद्रा में आयेंगें?&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: orange;"&gt;जले की भाजपायी राजनीति में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही हैं कि गौ संवंर्धन बोर्ड के अध्यक्ष मेघराज जैन के राज्य सभा सदस्य बन जाने के बाद क्या उनका स्थान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर लेंगें? इस हेतु उन्होंने लॉबिंग भी शुरू कर दी हैं। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा हैं कि अपने किसी गुप्त राजनैतिक ऐञ्जेंड़े के चलते शिवराज जिले में कोई लालबत्ती देने के मूड में नहीं हैं। अजय सिंह के चन्द शब्दों के कारण आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश दोनों ही बचने के प्रयास में दिख रहें हैं। जहां एक तरफ जिले में रहते हुये भी हरवंश सिंह ने शिवराज की उपस्थिति में हुये मोगली उत्सव में शामिल होने से परहेज किया वहीं दूसरी ओर इसी महोत्सव के दौरान दूसरे कार्यकाल में केवलारी विस क्षेत्र, जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं, में उनके ना आने का रोना जब प्रभात झा के सामने रोया गया तो तत्काल है उन्होंने 21 मई को केवलारी आने की स्वीकृति दे दी। लेकिन अन्तत: आये नहीं।बीते सप्ताह की एक और महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा पड़ोसी जिले बालाघाट के कबीना मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र केवलारी का प्रभारी बनाने की मानी जा रही हैं।अपने अपने फन में माहिर ये दोनों नेताओं में गोदे में कौन किसे चित करेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;क्या मेघराज जैन की जगह ले पायेंगें नरेश?े -&lt;/span&gt;जिले की भाजपायी राजनीति में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही हैं कि गौ संवंर्धन बोर्ड के अध्यक्ष मेघराज जैन के राज्य सभा सदस्य बन जाने के बाद क्या उनका स्थान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर लेंगेंर्षोर्षो इस हेतु उन्होंने लॉबिंग भी शुरू कर दी हैं। पता चला हैं कि अपने कुछ समर्थकों के साथ इस हेतु उन्होंने भोपाल जाकर मुख्यमन्त्री और प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं से भेण्ट करके भी आ गये हैं। कुछ भाजपा नेताओं का यह भी मानना हैं कि नरेश को किसी निगम का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बनाने के बजाय किसी आयोग का सदस्य बना कर लाल बत्ती तो थमा दी जायेगी लेकिन फिर वे संवैधानिक पद पर रहने के कारण भाजपा की सक्रिय राजनीति से बाहर हों जायेंगें और इसके लिये जिले के सभी भाजपा नेताओं में सहमति भी बन सकती हैं। प्रदेश के नेताओं ने कैसा रिसपान्स दियार्षोर्षो ये तो वे ही जाने लेकिन भाजपा में ही एक वर्ग का यह मानना हैं कि नरेश की यह कवायत भी वैसे ही बेकार जायेगी जैसे नीता पटेरिया की मन्त्री बनने की कवायत बेकार गई थी। राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि नरेश की टिकिट काट कर विधायक बनने वाली पूर्व सांसद नीता पटेरिया अपने सम्पंर्कों का लाभ लेकर किसी भी कीमत पर नरेश को लाल बत्ती नहीं लेने देंगीं। भाजपा ने चुनाव में अपने चार सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया था जिसमें से तीन कबीना मन्त्री बन गयें हैं लेकिन नीता पटेरिया का दावा मुख्यमन्त्री ने ना जाने क्यों सिरे से नकार दिया था। आज वे प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं। भाजपा के ही एक वर्ग का यह भी मानना हैं कि जिन कारणों से नरेश दिवाकर की टिकिट कटी थी वे कारण ही लाल बत्ती ना मिलने के पर्याप्त हैं। हाल ही में सागर की पूर्व विधायक सुधा जैन और छिन्दवाड़ा के सन्तोष जैन को लाल बत्ती देकर निगम मंड़ंलों में नियुक्त किया गया हैं। ऐसे हालात में जातीय समीकरण भी नरेश के पक्ष में नहीं माने जा रहें हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना हें कि भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने से घबराये शिवराज आदिवासी विधायक शशि ठाकुर या कमल मर्सकोले में से किसी को मन्त्री बना कर आदिवासी वोटों को थामे रखने की कोशिश भी कर सकतें हैं। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा हैं कि अपने किसी गुप्त राजनैतिक ऐञ्जेंड़े के चलते शिवराज जिले में कोई लालबत्ती देने के मूड में नहीं हैं। यह सब तो कयासबाजी हैं लोग अपने अपने तरीके से प्रयास तो कर रहें हैं लेकिन वास्तविकता क्या हैंर्षोर्षो यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;आखिर नहीं आये शिवराज हरवंश के क्षेत्र केवलारी में -&lt;/span&gt;राजनीति में यह माना जाता हैं कि बड़े नेता के मुंह से निकले चन्द शब्द ही बवाल खड़ा कर देतें हैं। ऐसा ही कुछ सिवनी जिले की इंका और भाजपायी राजनीति में दिखायी दे रहा हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि नेता पेति पक्ष अजय सिंह ने भोपाल में आयोजित स्वागत समारोह हजारों कार्यकत्ताZओं के समने यह कह दिया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो हम सब बना लेंगें यदि हमारे वरिष्ठ नेता ठाकुर हरंश सिंह शिवराज सिंह को सहयोग करना बन्द दें। उनके मुंह से निकले इन चन्द शब्दों ने कांग्रेसी तबेले में तो बवाल मचा ही दिया था लेकिन अब इन चन्द शब्दों की आग की चपेट में शिवराज विरोधियों ने उन्हें भी घेर लिया हैं। अजय सिंह के चन्द शब्दों के कारण आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश दोनों ही बचने के प्रयास में दिख रहें हैं। जहां एक तरफ जिले में रहते हुये भी हरवंश सिंह ने शिवराज की उपस्थिति में हुये मोगली उत्सव में शामिल होने से परहेज किया वहीं दूसरी ओर इसी महोत्सव के दौरान दूसरे कार्यकाल में केवलारी विस क्षेत्र, जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं, में उनके ना आने का रोना जब प्रभात झा के सामने रोया गया तो तत्काल ही उन्होंने 21 मई को केवलारी आने की स्वीकृति दे दी। जिले के संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी और लिा भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने क्षेत्र के कार्यकत्ताZनों को उत्साहित करने के लिये केवलारी आने का आग्रह किया था। लेकिन मुख्यमन्त्री का तो शासकीय कार्यक्रम तो आया ही नहीं उसके बजाय वे सभी कार्यक्रम जिन्हें शिवराज सिंह को अपने दौरे में करना था वे सभी प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के द्वारा सम्पन्न करा लिये गये। इससे तो अब ऐसा लग रहा हैं तीन साल बाद मुख्यमन्त्री का पहली बार बना दौरा स्थगित नहीं वरन रद्द ही हो गया हैं और शायद अब चुनाव तक वे इस क्षेत्र की सुध भी नहीं लेंगें। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;क्यों प्रभारी बने गौरी भाऊ केवलारीं के?-&lt;/span&gt;बीते सप्ताह की एक और महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा पड़ोसी जिले बालाघाट के कबीना मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र केवलारी का प्रभारी बनाने की मानी जा रही हैं। राजनैतिक विश्लेषक प्रभात झा के इस फैसले के तरह तरह के अर्थ निकाल रहें हैं। कुछ का मानना हैं कि गौरीशंकर खुद कई दिनों से प्रभारी बनने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें सफलता और इसलिये भी मिल गई कि पिछले प्रभारी बने आदिवासी मन्त्री जयसिंह मरावी प्रभार मिलने के बाद से एक बार भी क्षेत्र में नहीं आये थे। गौरी शंकर क्यों प्रयास रहे थेर्षोर्षो इसे लेकर भी कई चर्चायें सियासी हल्कों में चल रहीं हैं। भाजपाइयों ने ही केवलारी में भाजपा की हार के छीण्टे भाऊ के दामन पर भी उछाले थे। वैसे एक बात तो सभी मानते हैं कि हरवंश और गौरीशंकर बिसेन दोनों ही राजनीति के मैदान के हरफन मौला खिलाड़ी हैं। कौन किस पर कब भारी पड़ जायेर्षोर्षो इसे कोई भी दावे से नहीं कह सकता हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में गौरीशंकर अपनी पत्नी रेखा बिसेन को लोस की टिकिट दिलाना चाहते थे। पैनल में पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन का नाम भी था। गौरी भाऊ किसी भी कीमत पर डॉ. बिसेन को नहीं चाहते थे। इसलिये अन्त में उन्होंने के. डी. देशमुख के नाम पर अपनी सहमति देकर उन्हें टिकिट दिला दी थी। अब उनकी पत्नी जिला पंचायत का चुनाव भी हार चुकीं है। सियासी हल्कों में यह चर्चा है कि कांग्रेस इस बार बालाघाट लोस से हरवंश सिंह को भी चुनाव लड़ा सकती हैं। इसे भाम्प कर हरवंश सिंह ने भी बालाघाट में अपनी आमद रफ्त बढ़ा दी हैं। राजनैतिक कार्यक्रमों के अलावा वे शादी विवाह में हाजिर हो रहें हैं। इसीलिये शायद गौरी भाऊ हरवंश सिंह पर दवाब बनाने के लिये प्रभार लेना चाहते थे। वे डम्पर कांड़ और धारा 307 के मुकदमे का खेल भी देख चुके हैं। अपने अपने फन में माहिर ये दोनों नेताओं में गोदे में कौन किसे चित करेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;पुच्छल तारा-&lt;/span&gt;शिवराज की जगह आये प्रभारी मन्त्री के कार्यक्रम में बोथिया में पंड़ाल का उड़ना और हरवंश सिंह का कार्यक्रम में शामिल होने बजाय रेस्ट हाउस में बैठे रहना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। राजनीति में हर विधाओं का उपयोग करना आज कल आम बात हो गई हैं। ऐसे में इस घाटना को लेकर तरह तरह की चर्चायें होना स्वभाविक ही हैं। यह तो ईश्वर की कृपा ही हैं कि सिर्फ दो लोग घायल हुये और कोई बड़ी दुघZटना होने से बच गई। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;नगर विकास का पैसा लील रही है सफेद हसफेद हाथी साबित हो चुकी भीमगढ़ जलावर्धन योजना&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये बिजली बिल बकाया&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;विकास के 20 लाख काट रही है प्रदेश सरकार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;सिवनी।महत्वाकांक्षी भीमगढ़ जलावर्धन योजना सफेद हाथी साबित हो चुकी है।नगर विकास के लिये मिलने वाले बीस लाख रुपये सरकार काट कर बिजली बिल में समायोजित करा रही है। 30 अप्रल 2011 तक इस योजना का बिजली का पालिका पर 13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये बकाया हैं। पालिका अध्यक्ष, विधायक, सांसद और सरकार सभी भाजपा के हैं लेकिन ना तो वे इस घटिया योजना की जांच ही करा रही हैं और ना ही अनुदान देकर पालिका को राहत पहुंचा रही है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;कांग्रेस शासनकाल में बनी महत्वाकांक्षी भीमगढ़ जलावर्धन योजना शुरूसे घटिया पाइप लाइन उपयोग में लाये जाने के कारण दुगनी बिजली खपत के बाद भी आधा पानी देने के लिये विवादों में रही हैं। कई बार मांग उठने के बाद भी ना तो कांग्रेस सरकार और ना ही भाजपा सरकार इसकी जांच कराने का साहस जुटा पायी हैं। इसी कारण यह योजना सफेद हाथी साबित हो चुकी हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;इस योजना का बिजली का बिल 30 अप्रेल 2011 तक सरचार्ज मिला कर 13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये हो गया हैं। इसमें श्रीवनी का बकाया 6 करोड़ 17 हजार रु. है जबकि सुआखेड़ा का 7 करोड़ 75 लाख 93 हजार रु. बकाया है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हे कि इस योजना की कुल लागत 18 करोड़ 15 लाख रु. है।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;करोड़ों के बकाया बिल में पालिका हाई कोर्ट के निर्देश के बाद मात्र 5 लाख रु. प्रतिमाह पटा रही थी। जिली बोर्ड के दवाब के चलते प्रदेश सरकार जून 2010 से नगर विकास के लिये मिलने वाली राशि में से प्रतिमाह 20 लाख रु. काटकर बिजली बिल में समायोजित कर रही हैं। इस तरह मई 2011 तक 2 करोड़ 40 लाख रु. बिजली बिल में समायोजित हो चुकें है जो नगर विेकास में लगते तो मुख्यमन्त्री के चुनाव के समय दिखाये गये कुछ सपने तो पूरे हो सकते थे।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नगर के लिये बनायी गई इस योजना से मार्च 1999 से 16 गांवों को भी पानी दिया जा रहा है। गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने का काम पी.एच.ई. विभाग का हैं। लेकिन इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को जो पानी दिया जा रहा है उसमें बिजली के बिल का 8.40 प्रतिशत हिस्सा पंचायतों द्वारा वहन किया जाना था। योजना का हर महीने 31 लाख 17 हजार रु. बिल आ रहा है।इस तरह 12 साल तीन महीने में पंचायतों को देने वाली बिजली बिल की राशि 38 लाख 48 हजार 7 सौ 54 रु. होती हैं जो कि आज तक वसूल नहीं की गई हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;पालिका चुनाव के दौरान रोड़ शो करने आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह ने जनता को बहुत सब्ज बाग दिखाये थे लेकिन शिव की नगरी सिवनी को कुछ देने के बजाय जो मिल रहा था उसी में कटोती करके जनता के साथ क्रूर मजाक कर रहें हैं। &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2581243771710614981-7232027475522668929?l=vermaasutosh.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/feeds/7232027475522668929/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/05/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7232027475522668929'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2581243771710614981/posts/default/7232027475522668929'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://vermaasutosh.blogspot.com/2011/05/plitical-dairy-of-seoni-disst-of-mp_23.html' title='plitical dairy of seoni disst. of M.P.'/><author><name>ASHUTOSH VERMA</name><uri>http://www.blogger.com/profile/09090436201571610635</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='22' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_8wE28sb8tpQ/S2O9tvzAHbI/AAAAAAAAABo/UfR6qIklde0/S220/ashupho.bmp'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2581243771710614981.post-6164223455109893801</id><published>2011-05-17T23:06:00.000-07:00</published><updated>2011-05-17T23:06:10.840-07:00</updated><title type='text'>Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;शशि और हरवंश सिंह के बजाय हालोन बान्ध की स्वीकृति का असली श्रेय परिसीमन अयोग को जाता है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: orange;"&gt;जिले के धनोरा विकास क्षेत्र में लम्बे समय से पेंड़िग पड़ी हॉलोन जलाशय योजना पर अब श्रेय लेने की होड़ लग गई हैं। सबसे पहले भाजपा विधायक शशि ठाकुर का आभार मानने की विज्ञप्ति अखबारों में प्रकाशित हुयी और अब ब्लाक कांग्रेस धनोरा ने विज्ञप्ति जारी कर विधानसभा उपाध्यक्ष एवं केवलारी के विधायक हरवंश सिंह और सांसद बसोरी सिंह का आभार मानने वाली विज्ञप्ति छपी। मोगी उत्सव में आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह का दौरा इस बार विवादित रहा। गौगपा और मीडिया ने उन्हेेंं आरोप लगाकर कठघरे में खड़ा कर दिया हैं।जिले को ना तो मन्त्री तथा ना ही कोई बड़ी सौगात देने के बावजूद भी जब 2008 के चुनाव में भाजपा जिले में 4 में से तीन सीटें जीत गईं तो भला वहां कुछ करने या देने का क्या मतलब हैंर्षोर्षो लेकिन यदि शिव की नगरी के साथ ऐसा ही खिलवाड़ होता रहा तो तो सकता है कि इस बार शिव का तीसरा नेत्र खुल जाये और भाजपा जिले में भस्म होकर रह जाये। क्षेत्रीय आवश्यक्ता को देखते हुये इस साल वहां स्वामी नारायणानन्द जी को आमन्त्रित किया गया था। लेकिन उसी दिन शंकराचार्य के सिवनी में रहने के कारण खुद हरवंश ही वैनगंगा महोत्सव में शामिल नहीं हुये। युवा इंका के चुनावों के बाद अखबारों में जारी किये गये विज्ञापनों के माध्यम से भी शायद राजनीति ही खेली गई। &amp;nbsp;अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मिले वोटों के इस फर्क को क्या माना जायेर्षोर्षो इसे लेकर राजनैतिक विश्लेषकों में अलग अलग मत हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;हॉलोन बान्ध का असली श्रेय परिसीमन आयोग को &lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;-जिले के धनोरा विकास क्षेत्र में लम्बे समय से पेंड़िग पड़ी हॉलोन जलाशय योजना पर अब श्रेय लेने की होड़ लग गई हैं। सबसे पहले भाजपा विधायक शशि ठाकुर का आभार मानने की विज्ञप्ति अखबारों में प्रकाशित हुयी और अब ब्लाक कांग्रेस धनोरा ने विज्ञप्ति जारी कर विधानसभा उपाध्यक्ष एवं केवलारी के विधायक हरवंश सिंह और सांसद बसोरी सिंह का आभार मानने वाली विज्ञप्ति छपी। वास्तव में यदि देखा जाये तो इस बान्ध की स्वीकृति के लिये असली आभार तो परिसीमन आयोग का मानना चाहिये। जिसने घंसौर विस क्षेत्र समाप्त कर केवलारी क्षेत्र को सामान्य कर धनोरा ब्लाक के एक हिस्से को केवलारी और दूसरे हिस्से को लखनादौन विस क्षेत्र में शामिल &amp;nbsp;किया। लगभग 40 करोड़ की इस योजना की लम्बे समय से मांग चल रही थी। भाजपा विधायक शशि ठाकुर और इंका विधायक हरवंश सिंह दोनो ही धनोरा ब्लाक का पहली बार प्रतिनिधित्व कर रहें हैं। भाजपा विधायक होने के नाते उनके समर्थकों ने अपनी सरकार की उपलब्धि पर जब श्रेय लेने की &amp;nbsp;मोहर लगा दी तो फिर इस खेल में माहिर हरवंश सिंह भला कैसे पीछे रह सकते हैं। उन्होंने मीडिया को पूरी लिखा पढ़ी के दस्तावेजों के साथ कांग्रेस की विज्ञपित भिजवा दी आर श्रेय लेने की कोशश की हैं। कांग्रेस की विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया हें कि जब वे इस क्षेत्र के विधायक भी नहीं थे तब भी उन्होंने 2007 में दस हजार लोंगों साथ इस बान्ध के लिये आन्दोलन किया था। इसका अर्थ यह है कि वे बिना स्वार्थ के भी जिले के विकास के लिये समर्पित रहतें हैं। लेकिन यह दावा अत्यन्त हास्यासपद हैं। यदि ऐसा होता तो प्रदेश सरकार में दससाल तक मन्त्री रहते उन्होंने हॉलोन बान्ध की सुध क्यों नहीं ली थीर्षोर्षो तब वे अपने क्षेत्र की पेंच परियोजना का लाली पाप दिखा कर चुनाव जीतने की जुगत जमाते रहते थे जो कि आज तक किसानों के खेत में पानी नहीं दे पायी हैं और वे उस इलाके से चार चुनाव जीत थे। परिसीमन में जब धनोरा क्षेत्र का एक हिस्सा केवलारी क्षेत्र में जुड़वाने में सफल हो गये तब उसके बाद ही उन्हें हॉलोन बान्ध की सुध आयी और उसे सहारा बना का चुनाव जीतने की जुग त उन्होंने जमाना प्रारम्भ कर दिया था। अब देखना यह हैं पेंच के समान हॉलोन बान्ध भी उन्हें तीन चार चुनाव जिताता हैं या फिर अगली बार ही दगा दे देता हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;तीसरा नेत्र खुला तो जिले में भस्म हो जायेगी भाजपा &amp;nbsp;-&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;मोगली उत्सव में शामिल होने आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा विवादों में रहा। पहले तो गौगपा ने उन्हें कठघरे में खड़ा करते हुये यह आरोप लगा दिया कि भाजपा विधायक एवं प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया की पुत्री और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के अनुज के 11 मई को होने वाले विवाह समारोह में आने के लिये कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ायी गई और प्रदेश भर के छोटे बच्चों को भरी गर्मी में परेशान किया गया। इस बार मीडिया ने भी उनकी घोषणायें पूरी ना होने के कारण कठघरे में खड़ा किया &amp;nbsp; &amp;nbsp;और यह लिखा कि शिव की नगरी सिवनी शिव के राज में ठगी सी रह गई। इनमें शिवराज द्वारा अपने पिछले प्रवासों में की गई लगभग सभी घोषणाओं का जिक्र किया गया था। लेकिप प्रदेश भर में घोषणावीर मुख्यमन्त्री के नाम से ख्याति अर्जित कर चुके शिवराज ने इसके बाद भी घोषणा करने से कोई परहेज नहीं किया और टुरिया में अगले सत्र से हायर सेकेन्डरी स्कूल चालू करने की घोषणा कर डाली। वैसे भी शिवराज ऐसे पहले मुख्यमन्त्री हैं जिन्होंने सत्ता पक्ष के तीन तीन विधायक होने के बाद भी जिले से किसी को मन्त्री नहीं बनाया वरना आजादी के बाद से कभी ऐसा नहीं हुआ था कि सत्ता पक्ष के विधायक रहते हुये जिला मन्त्री विहीन रहा हो। अपने पहले कार्यकाल जिले को ना तो मन्त्री तथा ना ही कोई बड़ी सौगात देने के बावजूद भी जब 2008 के चुनाव में भाजपा जिले में 4 में से तीन सीटें जीत गईं तो भला वहां कुछ करने या देने का क्या मतलब हैंर्षोर्षो वैसे भी जिले में भाजपा का यह आलम है कि जितने नेता हैं उतने ही गुट हैं। गुटबाजी का राजरोग गली चौराहों और पान के ठेलों और चाय की होटलों तक खुल आम देखा जा सकता हैं। लेकिन यदि शिव की नगरी के साथ ऐसा ही खिलवाड़ होता रहा तो सकता है कि इस बार शिव का तीसरा नेत्र खुल जाये और भाजपा जिले में भस्म होकर रह जाये।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;वैनगंगा महोत्सव में क्यों नहीं शामिल हुये हरवंश?&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt; &amp;nbsp;-तामझाम से पिछले चुनाव के पहले वैनगंगा महोत्सव की शुरूआत इंका विधायक हरवंश सिंह ने जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी की उपस्थिति में करायी थी। वैसे तो चुनाव जीतने के बाद यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से होता रहा हैं लेकिन अब 2013 में होने वाले चुनावों को देखते हुये इस साल इस वृहद रूप देने की योजना बनायी गई थी। क्षेत्रीय आवश्यक्ता को देखते हुये इस साल वहां स्वामी नारायणानन्द जी को आमन्त्रित किया गया था। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में स्वमी नारायणानन्द जी के भक्तों की संख्या अत्यमिधक हैं। जिस दिन इस उत्सव में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को शामिल होना था उसी दिन जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती भी अपने पुराने शिष्य परिवार के सदस्य सञ्जय भारद्वाज के वन निर्मित मकान के गृह प्रवेश के अवसर पर सिवनी में ही थे। यदि हरवंश सिंह वैनगंगा महोत्सव में शामिल होते और जगतगुरू शंकराचार्य जी से नहीं मिलते तो विषम स्थिति बन जाती। इसलिये हरवंश सिंह ने उस दिन भोपाल में ही रहना उचित समझा ताकि धर्माचार्यों के आपसी विवाद से बचा जा सके। अभी चुनाव में दो साल बाद बाकी है। इसीलिये अन्त मे भी विशाल वैनगंगा महोत्सव आयोजित कर धर्म प्रमी जनता को लुभाया जा सकता हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;क्या युवा इंका के विज्ञापनों में भी खेली गई राजनीति?&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;-युवा इंका के चुनावों के बाद अखबारों में जारी किये गये विज्ञापनों के माध्यम से भी शायद राजनीति ही खेली गई। इन विज्ञापनों में सिवनी विस क्षेत्र के विजयी नेताओं को बधायी देते हुये हरवंश सिंह के साथ पूर्व इंका प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना के साथ ही युवा नेता राजा बघेल की फोटो तो प्रमुखता से छापी गई लेकिन पूर्व विधायक नेहा सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम ऐसे छापे गये मानो उन्हें बेइज्जत करना ही उद्देश्य रहा हो। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हें कि पप्पू खुराना कमलनाथ समर्थक माने जाते हैं और जिले की राजनीति में उन्हें हरवंश सिंह विरोधी माना जाता हैं। &amp;nbsp;अखबारों में प्रकाशित इन समाचारों से यह सन्देश भी देने का प्रयास किया गया कि हरवंश - पप्पू खुराना ने मिल कर चुनाव लड़ा और जीता। वास्तविकता क्या हैर्षोर्षो यह तो चुनाव का नेजा सम्हाने वाले नेता ही जानते होंगें लेकिन चुनाव परिणाम तो ऐसा सन्देश दे रहें हैं कि या तो समझोता हुआ ही नहीं था या फिर वोटिंग में यह समझोता कायम नहीं रह पाया। उल्लेखनीय हैं कि सिवनी विस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार शिव सनोड़िया को 51, उपाध्यक्ष शाहिद खॉन, जो पप्पू समर्थक थे, उन्हें मात्र 27, महामन्त्री द्वय आनन्द पञ्जवानी को 20 तथा आसिफ इकबाल को 18 को 18 वोट मिले थे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मिले वोटों के इस फर्क को क्या माना जायेर्षोर्षो इसे लेकर राजनैतिक विश्लेषकों में अलग अलग मत हैं। &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण राजनैतिक हलचल रही युवक कांग्रेस के चुनाव की। कांग्रेस के महासचिव और युवक कांग्रेस के प्रभारी राहुल गान्धी कांग्रेस से युवाओं को जोड़ने के लिये नये प्रयोग कर रहें हैं। इन प्रयोगों में से एक ये चुनाव भी हैं। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लिंगदोह के मार्ग दर्शन और देख रेख में ये चुनाव हो रहें हैं। मध्यप्रदेश में इन चुनावों का दूसरा चरण समाप्त हो गया हैें और अब तीसरे चरण में लोकसभा क्षेत्र एवं प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना हैं। इन चुनावों के माध्यम से राहुल गान्धी युवा इंका की कमान ऐसे नेतृत्व के हाथों में सौम्पना चाहते हैं जो कि ना केवल नया हो वरन उसका कांग्रेस का कोई बड़ा नेता Þकेअर आफÞ भी ना हो। जिमें के बालाघाट लोस में आने वाले सिवनी और बरघाट विस क्षेत्रों के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों का चुनाव 3 मई को हो गया जिसमें सिवनी से शिव सनोड़िया और बरघाट से देवेन्द्र ठाकुर अध्यक्ष चुन लिये गये हैं।सिवनी से चुने गये शिव सनोड़िया का नाम कांग्रेस की छात्र और युवा राजनीति में नया नहीं हैं। वे पिछले कुछ सालों से जिला एन.एस.यू.आई. के अध्यक्ष पद कार्य कर रहें हैं और आज भी अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल यदि प्रशंसनीय नहीं रहा तो निन्दनीय भी नहीं कहा जा सकता हैं। छात्र संघों के चुनावों के दौरान इनकी सक्रियता देखी जाती रही हैं। अब देखना यह हैं कि पिछले पांच चुनावों से जिन सिवनी और बरघाट क्षेत्रों से कांग्रेस चुनाव हारती चली आ रही हैं वहां राहुल गान्धी की मंशा के अनुसार ये दोनो युवा नेता पार्टी को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं या जिले की पिछले पन्द्रह सालों से चली आ रही कांग्रेस की परम्परा के अनुसार गुटबाजी में व्यस्त रह कर कांग्रेस के बजाय नेता विशेष को मजबूत करतें हैं।&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;चुनव हो तो हथकंड़े भी होंगं ही-जहां चुनाव हों वहां चुनावी हथकंड़े ना अपनाये जाये इसकी तो कल्पना ही नहीं करनी चाहिये। ऐसा ही सब कुछ युवक कांग्रेस के चुनावों में भी हुआ। राहुल गान्धी चाहते थे कि इन चुनावों के जरिये हर विधान सभा की प्रत्येंक ग्राम पंचायत और हर वार्ड में युवा इंका की निर्वाचित इकाई हो। लेकिन ऐसा नही हो पाया। चुनाव होने के लिये जितनी इकाइयां आवश्यक थी उतनी इकाइयां बनायीं गईं और शेष को छोड़ दिया गया। उदाहरण के लिये सिवनी विधानसभा क्षेत्र में शहर के सभी वाडोZं के अलावा मात्र चालीस पंचायतों में ही इकाइयों का गठन किया गया जबकि इस क्षेत्र में सौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। रहा सवाल चुनावी हथकंड़ों के अपनाने का तो इसके बारे में तो अध्यक्ष पद एक प्रत्याशी आसिफ इकबाल ने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर इसका खुलासा किया हैं। वैसे तो चुनावों में ऐसा ही रहता हैं कि जो जीता वही सिकन्दर कहलाता है। लेकिन इन चुनावों में हार का गम कम करने की व्यवस्था की गई है। जिन पांच पदाधिकारियों को चुना था उसमें नियमानुसार सबसे अधिक मत पाने वाना अध्यक्ष उससे कम वोट पाने वाला उपाध्यक्ष और फिर उनसे कम मत पाने वाले तीन प्रत्याशी महामन्त्री चुने गये हैं।&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: red;"&gt;भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नही रह गया है भाजपा के लिये -&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="color: blue;"&gt;अत्याचार ना भ्रटाचार हम देंगें अच्छी सरकार के नारे पर भाजपा ने प्रदेश की सरकार पर आज से सात साल पहले अपना कब्जा किया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा कितनी गम्भीर हैं ये प्रदेश की जनता बखूबी देख चुकी है। आज लगभग एक दर्जन मन्त्री लोकायुक्त की जांच में के दायरे में हैं। जो जहां चुनकर आया उसमें से अधिकांश भाजपा नेता भ्रष्टाचार के एक सूत्री कार्यक्रम को लेकर चलना अपना ही सब कुछ समझने लगे हैं। भ्रष्टाचार के प्रमाणिक मामलों में भी अपने कार्यकत्ताZओं को बचाव करना भाजपा नेता अपना कत्तZव्य मानते हैं। पिछले दिनो भाजपा की प्रदेश सरकार ने ही सिवनी नगर पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती पार्वती जंघेला को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाते हुये उनसे ना केवल तीन लाख रुपये की वसूली के आदेश दिये हैं वरन पांच साल के लिये चुनाव लड़ने के लिये भी अयोग्य घाषित कर दिया हैं। पार्वती जंघेला जिला महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं।
