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Monday, July 12, 2010

हरवंश पुलिस और आमानाला का रोचक त्रिकोण
एक आमानाला कांड़ में चालान पेश नहीं : दूसरे में बमुश्किल दर्ज हुआ मामला
सिवनी । एक आमानाला गांव में तत्कालीन सांसद एवं वर्तमान विधायक नीता पटेरिया के साथ उदघाटन को लेकर हुये विवाद में बण्डोल थाने में भाजपा के धरने के बाद इंका विधायक हरवंश सिंह के खिलाफ धारा 307 का मामला पंजीबद्ध किया गया था जिसका आज तक चालान कोर्ट में पेश नहीं हो पाया हैं। एक आमानाला गांव में अभी हाल ही में हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ परिवाद पत्र पेश हुआ जिसमें कोर्ट के तीन बार निर्देश देने के बाद पुलिस ने मामला पजीबद्ध कर जांच में लिया हैं। आमानाला नाम का गांव, इंका विधायक हरवंश सिंह और पुलिस के बीच एक रोचक त्रिकोण बन गया हैं। दोनों ही मामले भाजपा सरकार के कार्यकाल के हैं। आमानाला सिंचाई परियोजना के उदघाटन को लेकर तत्कालीन क्षेत्रीय सान्द एवं विधायक नीता पटेरिया और हरवंश सिंह में अनबन हो गई थी। घोड़े पर सवार हरवंश सिंह को झांसी की रानी बनी नीता पटेरिया ने खूब खरी खोटी सुनायी थी। घटना में हुये पथराव में सांसद की गाड़ी का कांच टूट गये थे जिसमे उनका बेटा बैठा हुआ था। वाहन के चालक को भी चोटें आयीं थीं।सांसद जब बंड़ोल थाने पहुचीं और थाने में वाहन चालक के नाम से रिपोर्ट दर्ज कराने की बात की तो वह आना कानी करने लगा। नीता पटेरिया के फोन पर समूची भाजपा ने बंड़ोल थाने में धरना दिया तब कहीं जाकर अपनी ही सरकार रहते मामला पंजीबद्ध करवा पाये थे। पुलिस ने अपराध क्र. 226/07 धारा 307, 147,148 और 506/बी 34 के अंर्तगत दिनांक 26 दिसम्बर 2007 को दर्ज किया गया था। उस दौरान प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान लोकायुक्त जांच में डम्पर कांड़ में उलझे हुये थे। कांग्रेस आलाकमान ने इसकी जांच और आन्दोलन चलाने के लिये हरवंश सिंह की अध्यक्षता में एक समिति बनायी थी। जिले में भी आन्दोलन हुआ था और कांग्रेसी नेता पप्पू खुराना के डंपर में सवार होकर इंकाइयों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था।बंड़ोल थाने में हरवंश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने जिले में एक संभाग स्तरीय न्याय रैली निकाली जिसमें संभाग के हजारों लोगों ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया था। इसी रैली को डंपर काण्ड के संभागीय आन्दोलन का नाम आलाकमान के सामने दे देने की खबरें भी चर्चित थीं। वैसे भी यह कांड़ विधानसभा चुनाव के पहले का था। 2008 के विधानसभा चुनाव में नीता पटेरिया भी केवलारी क्षेत्र से हरवंश सिंह के विरुद्ध संभावित भाजपा प्रत्याशी थी। लेकिन उन्हें सिवनी से टिकिट मिला और वे जीत भी गईं। विस चुनाव में कुछ ऐसे राजनैतिक समीकरण बने कि आमानाला कांड़ की सुध लेने वाला ही कोई नहीं बचा। दिसम्बर 2007 के मामाले का अभी तक कोर्ट में कोई चालान पेश नहीं हो पाया हैं। भाजपा के नेता भी हाल ही में हरवंश सिंह के खिलाफ जारी विज्ञप्तियों में इस मामले का उल्लेख कर आलोचना तो करते हैं लेकिन वे शायद यह भूल जाते हैं कि प्रदेश में सरकार उनकी ही हैं जिनके इशारों पर ही सब कुछ होता हैं। हाल ही हुये आमानाला गांव के जमीन घोटाले में भी एक परिवाद में हरवंश सिंह और उनके पुत्र आरोपी बन गये हैं। मई 2010 में पेश किये गये इस परिवाद में कोर्ट के धारा 156 (3) के आदेश के बावजूद भी पुलिस ने हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया। कोर्ट के आदेश और मेन्डेटरी प्रावधान होने के बावजूद भी पुलिस ने मामला नहीं बनाया। जब तीसरी बार कोर्ट ने निर्देश दिये तब जाकर पुलिस मामलजा दर्ज कर जांच में लिया हैं। भाजपा ने इस मामले में पूरे जिले को सर पर उठा लिया लेकिन अपनी ही सरकार के रहते पुलिस का ऐसा रवैया क्यों रहा या जिसने कोर्ट के निर्देयाों की अवहेलना की उसे अपने ही राज मेंं सजा नहीं दिला पाये। इस मामले में पुलिस को 20 जुलाई 2010 को कोर्ट में अपना अन्तिम प्रतिवेदन पेश कराना हैं। पिछले तीन सालों में आमनाला गांव पुलिस और हरवंश सिंह के बीच एक रोचक त्रिकोण बना दिखा जिसमें चौथे कोण के रूप में भाजपा मौजूद तो रही लेकिन अपनी सरकार के रहते हुये भी पुलिस से नियमानुसार कार्यवाही तक नहीं करवा पायी हैं। वैसे भी भाजपा और हरवंश सिंह के बीच सांठ गांठ की बात केोई नयी नही हैं। ऐसे हालातों में यदि पुलिस का पलड़ा कहीं झुका दिखायी दे तो भला आश्चर्य का क्या बात हें। सख्ती और निष्पक्षता दिखाने के लिये पूरा जिला जो पड़ा है।
कार्यकारिणी में केवलारी की उपेक्षा राजनैतिक संकेत हैं कि भाजपा की जीतने के लिये कोई रणनीति नहीं
आजकल ऐसा भी होता हैं। पहले अखबारों में यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री फलां स्कूल में बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन करेंगें फिर यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री ने बच्चों के साथ फलां स्कूल में मध्यान्ह भोजन किया और उसकी प्रशंसा की। हमारी मन्त्री जी से अपेक्षा हैं कि अगले प्रोग्राम में वे फिर यही आयोजन रखें लेकिन स्कूल का नाम ऐन वक्त पर बतायें और फिर देखें कि आपके प्रभार के जिले में नौनिहालों को कैसा भोजन मिल रहा हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने प्रदेशाध्यक्ष के अनुमोदन के बाद इस सूची को जारी कर दिया हैं। संख्या के हिसाब से जारी यह कार्यकारिणी हैं तो जम्बो जेट लेकिन इसे सन्तुलित नहीं माना जा रहा हैं। भाजपायी हल्कों में इस कार्यकारिणी को क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरण के हिसाब से असन्तुलित माना जा रहा हैं। आदिवासी वर्ग में दो,हरिजन में 1 नेता को ही पदाधिकारी बनाया गया हैं जबकि अल्पसंख्यक वर्ग से एक भी पदाधिकारी ना बनाया जाना इन वर्गों के प्रति भाजपा की मांसिकता को ही उजागर करता हैं। बहुचर्चित जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। कोर्ट ने एक बार फिर निर्देश देकर पिछली पेशी में सभी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने एवं प्रतिवेदन कोर्ट में देने के लिये 20 जुलाई की पेशी दे दी थी।
मन्त्री जी का चर्चित मध्यान्ह भोजन-
आजकल ऐसा भी होता हैं। पहले अखबारों में यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री फलां स्कूल में बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन करेंगें फिर यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री ने बच्चों के साथ फलां स्कूल में मध्यान्ह भोजन किया और उसकी प्रशंसा की। होता पहले भी यही था लेकिन स्कूल का नाम पता नहीं होता था। वह मन्त्री जी अचानक तय करके प्रशासन को बताते थे कि आज वे फलां स्कूल में बच्चों के साथ भोजन करेंगें और जब अचानक वहां जाकर भोजन करते थे तो यह पता चलता था कि बच्चों को कैसा भोजन परोसा जा रहा हैं। लेकिन पहले से पता होने पर सब कुछ प्रायोजित हो जाता हैं। हमारा यह कहने का आशय बिल्कुल भी नहीं हैं कि साल भर बच्चों को घटिया भोजन ही परोसा जाता हैं। लेकिन चेकिग करने का यह तरीका तो बिल्कुल भी सही नहीं कहा जा सकता हैं। ऐसा ही इस बार प्रभारी मन्त्री के भ्रमण के दौरान हुआ। अखबारों में समाचार छपा कि मन्त्री जी बच्चों के साथ आमाझिरिया स्कूल में मध्यान्ह भोजन करेंगें। मन्त्री जी ने लाव लश्कर के साथ जाकर वहां भोजन भी किया। उसका भी समाचार प्रकाशित हुआ और मामला खत्म हो गया। हमारी मन्त्री जी से अपेक्षा हैं कि अगले प्रोग्राम में वे फिर यही आयोजन रखें लेकिन स्कूल का नाम ऐन वक्त पर बतायें और फिर देखें कि आपके प्रभार के जिले में नौनिहालों को कैसा भोजन मिल रहा हैं।
भाजपा कार्य.:जम्बोजेट पर बेलेंस नहीं-
जिले की बहुप्रतीक्षित भाजपा कार्यकारिणी की घोषणा अन्तत: हो ही गई। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने प्रदेशाध्यक्ष के अनुमोदन के बाद इस सूची को जारी कर दिया हैं। संख्या के हिसाब से जारी यह कार्यकारिणी हैं तो जम्बो जेट लेकिन इसे सन्तुलित नहीं माना जा रहा हैं। भाजपायी हल्कों में इस कार्यकारिणी को क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरण के हिसाब से असन्तुलित माना जा रहा हैं। इसके चयन का आधार योग्यता या वरिष्ठता ना होकर नेताओं के समर्थकों के हिसाब से किया गया हैं। इससे नेता भले ही सन्तुष्ट हो जाये लेकिन जमीनी तौर असन्तोष के स्वर सुनायी देने लगे हैं। चूंकि भाजपा के अधिकांश नेताओं का रहना सिवनी नगर में ही हो रहा हैं इसलिये इसमें नगर की भरमार हैं। लगभग 150 नेताओं की घोषित कार्यकारिणी में 63 शहर के नेता शामिल हैं। अध्यक्ष सहित 8 उपाध्यक्षों में से 2,तीन महामन्त्रियों में से 1, मन्त्रियों में 7 में से 2, कोषाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी के अलावा 71 कार्यकारिणी सदस्यों में से 33 तथा आमन्त्रित सदस्यों में 59 में से 21 नेता शहर के रहने वाले हैं। मुस्लिमों की संख्या भी अगुलियों में गिनने लायक हैं।भाजपा के वोट बैंक मानी जाने वाली जातियों को भी उचित अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया हैं। जिले के विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से भी कार्यकारिणी असन्तुलित ही नज़र आ रही हैं। जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से सिर्फ केंवलारी क्षेत्र में भाजपाप हारी थी जहां से विस उपाध्यक्ष हरवंश सिह लगातार चौथी बार जीते हैं। इस कार्यकेारिणी से भी ऐसा राजनैतिक सन्देश नहीं जा रहा हें कि भाजपा इस क्षेत्र से चुनाव जीतने की कोई गम्भीर रणनीति बना रही हैं। केवलारी क्षेत्र के महामन्त्री रहे डॉ. प्रमोद राय को भी सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया हैं। किसी नये नेता को भी महामन्त्री बनाया गया होता तो बात कुछ और होती। भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर हरवंश से सांठ गांठ के आरोप लगाते रहें हैं। पर इस सबसे भाजपा नेताओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता हैं। तभी तो नव घोषित कार्यकारिणी में केवलारी क्षे से 1 उपध्यक्ष,3 मन्त्री सहित कुल 29 नेता शामिल किये गये हैं। जबकि सबसे अधिक सिवनी विस के नेताओं का ही बोलबाला हैं। लगातार पांच बार से जीतने वाले इस क्षेत्र से भाजपा ने 2 उपाध्यक्ष,1 महामन्त्री,3 मन्त्री सहित कुल 72 नेताओं को लिया गया हैं। वैसे भी आग्रामी विस चुनाव लड़ने का सपना भी सबसे अधिक इसी क्षेत्र से भाजपा नेता पाले हुए हैं क्योंकि इस क्षेत्र से पिछले चुनाव में भाजपा ने अपने विधायक नरेश दिवाकर की टिकिट काट कर एक मिसाल पेश कर दी हैं। इसलिये नेताओं की आस अभी से बढ़ी दिखायी दे रही हैं इसी का परिणाम यह हैं कि इस क्षेत्र के अपने समर्थकों को हर भाजपा नेता ने कार्यकारिणी में शामिल करवाया हैं।पांच बार से जीतने वाले बरघाट विस क्षेत्र से भी भाजपा ने 2 उपाध्यक्ष, 2 महामन्त्री सहित 20 नेताओं को शामिल किया हैं जबकि दो बार से लगातार जीतने वाले लखनादौन विस क्षेत्र से भाजप की कार्यकारिणी में 3 उपध्यक्ष, 2 मन्त्री सहित 28 नेताओं को शामिल किया गया हैं। पदाधिकारियों के रूप में
आदिवासी,हरजिन एवं अल्पसेंख्यक वर्ग की उपेक्षा भी दिखायी दे रही हैं। आदिवासी वर्ग में दो,हरिजन में 1 नेता को ही पदाधिकारी बनाया गया हैं जबकि अल्पसंख्यक वर्ग से एक भी पदाधिकारी ना बनाया जाना इन वर्गों के प्रति भाजपा की मांसिकता को ही उजागर करता हैं। भाजपा की यह कार्यकारिणी युवा ऊर्जावान नेतृत्व से तो लबालब भरी हैं लेकिन इन सारी विसंगतियों के साथ भारी गुटबाजी के रहते हुये संगठनात्मक गतिविधियों को चलाना अध्यक्ष सुजीत जैन के लिये चुनोती ही साबित होगी।
जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में -
बहुचर्चित जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। कोर्ट ने एक बार फिर निर्देश देकर पिछली पेशी में सभी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने एवं प्रतिवेदन कोर्ट में देने के लिये 20 जुलाई की पेशी दे दी थी। पेशी बढ़ने के बाद पुलिस ने उसी दिन विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह एवं उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करके दूसरे ही दिन कोर्ट में जांच करने की अनुमति का आवेदन लगाकर अनुमति ले ली हैं। इस तरह इस मामले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। जनचर्चा में अब यही हैं कि कैसी पुलिस जांच होगी और क्या मामला बनेगा इसे लेकर अटकलें लगायी जा रहीं हैं। यह भी चर्चा है कि कोर्ट के निर्देश और मेन्डेटरी प्रावधान हाने के बाद भी जिस चौकी प्रभारी ने मामला दर्ज नहीं किया था उसके खिलाफ इस संवेदनशील मामलें में भी कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई हैं और वह अभी भी वहीं चौकी प्रभारी हैं।इसके बाद हरवंश सिंह ने पत्रकार वार्ता में जो प्रेस विज्ञप्ति बांटी हैं उसमें यह लिखा हुआ हैं कि,Þअन्वेषण में जो भी तथ्य आवेंगें उनके अनुसार पुलिस को न्यायालय में आरोप पत्र खारिजी अथवा खात्मा प्रस्तुत करना होगा।ß उनका यह कथन इस बात का प्रमाण हैं कि खारिजी या खात्मे केे लिये वे जांच शुरू होने से पहले ही आश्वस्त हैं। ऐसा क्यों हैं यह तो वे स्वयं ही जानते होंगें। वैसे भी अभी तक पूर्व में हरवंश सिंह पर धोखा धड़ी के जो दो आरोप उन पर लगे थे उनमें वे किसी भी मामले में कोर्ट द्वारा दोष मुक्त नहीं हो पाये थे। एक मामला फरियादी की मौत के कारण खत्म हो गया था और एक मामले का पता ही नहीं हैं कि वह कहां गया?

Monday, July 5, 2010

मीडिया को मिस गाइड किया हरवंश ने ?
सिवनी। आमानाला जमीन घोटाले में अपना पक्ष रखने के लिये विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह द्वारा बुलायी गई प्रेस वार्ता और वितरित किये गये दस्तावेज इन दिनों मीडिया में चर्चा का विषय बने हुये हैं कि हरवंश सिंह ने मीडिया को मिसगाइड किया हैं। प्रेस कांफ्रेंस में इंका विधायक द्वारा बांटे गये दस्तावेजों भ्रामक बताया जा रहा हैं। उन्होंने अपना पक्ष जो लिखित में रखा हैं उसमें भले ही इस बात का उल्लेख हो कि कोर्ट ने शपथ पूर्वक लिये गये परिवादी के कथ को निरस्त कर दिया हैं लेकिन उनकी पूरी सफायी उसी बयान के आधार पर दी गई हैं। हालांकि परिवादी ने हरवंश सिंह द्वारा उल्लेखित किये गये तथ्यों के अलावा भी बहुत कुछ बोला हैं जो हरवंश सिंह द्वारा पेश की गई सफायी की धज्जियां उठा देता हैं। परिवादी ने बयान में तीसरे पेज की कंड़िका 7 में यह भी कहा हैं कि Þमैंने अभियुक्त हरवंश सिंह और रजनीश सिंह को कभी नहीं देखा।मैंने अभियुक्त हरवंश सिंह और रजनीश सिंह को सामाजिक सम्मेलन में देखा हैं।मेरी अभियुक्तगणों से कभी व्यक्तिगत बात या बैठक नहीं हुयी। मेरी हरी महाराज ने टेलीफोन पर अभियुक्त क्रमांक 2 रजनीश सिंह से बात करायी थी। मेरी बात हरी महाराज ने लखनादौन न्यायालय के प्रांगण में मोबाइल से बात करायी थी। हरी महाराज ने फोन लगाकर मुझे कहा था कि रजनीश सिंह से बात कर लो उसी आधार पर बता रहा हूंं कि मेरी रजनीश सिंह से बात हुयी हैं।ß यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि हरी महाराज ना केवल विवादास्प्द जमीन का खरीददार हैं वरन हरी महाराज का भाई भी है जो कि हरवंश सिह के यहां काम करता हैं। परिवादी ने पेज क्र. 4 की कंड़िका 8 में यह भी बोला हैं कि,Þरजनीश सिंह ने मुझसे कहा था कि बैठकर फैसला कर लेते हैेंं। रजनीश सिंह ने मुझसे कहा था कि अन्य सभी सह खातेदारों के बैठकर बात कर लो। ऐसा करते करते लगभग तीन माह गुजर गये।किन्तु कोई भी सह खातेदार ने मेरे साथ बैठक नहीं की। ß परिवादी से खरीददार के भाई के मार्फत रजनीश सिंह की यह बातचीत तथा मूामला निपटा लेने की बात कहना क्या यह प्रमाणित नहीं करता हैं कि इस जमीन के सौदे और उसमें चल रहें विवादों से हरवंश सिंह और उनके परिवार का गहरा सम्बंध हैं। विवादास्यद जमीन का खरीददार हरवंश सिंह के यहां कार्यरत कर्मचारी का भाई हैं। हरवंश सिंह का कर्मचारी विवाद सुलझाने के लिये रजनीश सिंह से परिवादी की बात कराता हैं। रजनीश मामला निपटा देने का आश्वासन देते हैं। परिवादी तीन माह तक रास्ता देखता है। फिर परिवादी का नाश्ता करने बर्रा जाना अपने आप में ही बहुत कुछ कह जाता हैं। ऐसी परिस्थिति में हरवंश सिंह का यह दावा करना कि उनका या उनके परिवा का इस मामले में कोई लेना देना नहीं हैंर्षोर्षो समझ से परे हैं। इन्हीं सब तथ्यों को लेकर मीडिया में इन दिनो यह चर्चा हो रही हैं कि हरवंश सिंह ने मीडिया को मिस गाइड किया हैं।
इन सवालों के जवाब देगा कौन?
1 क्या फरियादी ने अपने बयान में यह नहीं कहा है कि उसकी फोन पर हरी महाराज ने रजनीश से बात करायी थी और रजनीश ने सभी खातेदारों को साथ बिठाल कर मामला निपटा देने की बात कही थी?
2 क्या तीन महीने तक रजनीश के मामला ना निपटा पाने के बाद परिवादी ने परिवाद पेश किया हैं?
3 क्या परिवादी ने जब हरवंश सिंह के यहां नाश्ता किया था तो इस सौदे या केस के बारे में कोई बात नहीं हुयी थी?
4 क्या विवादास्पद जमीन खरीदने वाला हरवंश सिंह के स्टाफ के कर्मचारी का रिश्तेदार हैं?
5 क्या चार लाख रूपये से अधिक की जमीन खरीदने की आर्थिक स्थिति क्रेता रविनारायण शर्मा की है?
6 क्या हरवंश सिंह ने मीडिया को गुमराह करने के लिये फरियादी के उस बयान की प्रति बांटी हैं जिस बयान को कोर्ट खुद निरस्त कर चुकी हैं?
7 क्या इस तथ्य को छिपाने के लिये ही हरवंश सिंह ने 18 जून की कोर्ट की आर्डर शीट की कापी प्रेस को नहीं दी जिसमें यह उल्लेख हैं कि कोर्ट फरियादी के बयान को निरस्त करती हैं?
8 हरवंश सिंह ने कहा कि धारा 156(3) में अपराध पजीबद्ध करने के बाद जांच हो पाती हैं तो क्या बिना अपराध दर्ज किये सुनवारा चौकी प्रभारी द्वारा कोर्ट में दिया गया प्रतिवेदन अमान्य है?
9 भाजपा के राज में चौकी प्रभारी द्वारा नियम विपरीत प्रतिवेदन किसके प्रभाव में दिया गया जिसमें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह को निर्दोष बताया गया है?
10 क्या हरवंश सिंह का यह कहना कोर्ट की अवमानना नहीं हैं कि,Þइस तरह मैं यह कह सकता हूं कि मेरे विरुद्ध विपक्ष द्वारा साजिश की गई है और मुझे राजनीतिक रूप से क्षति पहुचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही करायी गई हैं।ß

Sunday, July 4, 2010

धारा 420 के रजिस्टर्ड आरोपी बन नगरागमन पर हरवंश सिंह के स्वागत होने को आखिर क्या कहा जा सकता हैं?
जिले में भाजपा के संगठनात्मक चुनाव हुये काफी समय बीत गया हैं लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाये हैं। कहा जा रहा है कि सिवनी विधायक नीता पटेरिया के प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हीं की आपत्ति पर इस सूची को अनुमोदन नहीं मिल पा रहा हैं। प्रदेश की भाजपायी राजनीति में मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की आंख की किरकिरी बन चुके प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगना शुरू हो गई हैं। शिवराज के राजनैतिक गुरू सुन्दरलाल पटना की अनुयायी राज्यसभा सदस्या आदिवासी नेत्री अनुसुइया उइके के दौरे लगना चालू हो गये हैं।जिले और प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में इन दिनों आमानाला जमीन घोटाले के चर्चे हैं जिसमें विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह लपेटें में आ गये हैं। इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस लेने जब हरवंश सिंह धारा 420 के आरोपी बन कर सिवनी शहर में आये तो उनके समर्थकों ने ढ़ोल बाजे, आतिशबाजी, फूलमालाओं से उनका ऐसा स्वागत किया मानो वे कोई ऐसी जंग जीत कर आयें हों जिससे समूचे जिले की छाती गर्व से फूल गई हो।भाजपा यदि आरोपियों के चुंगल से सही में संवैधानिक पदो को बचाना चाहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपाध्यक्ष के विरुद्ध संसदीय कार्यमन्त्री अविश्वास प्रस्ताव लायें और सदन में कार्यवाही करें जो कि वैधानिक मंच हैं। अन्यथा इस बयानबाजी और राज्यपाल को ज्ञापन देने से कुछ होने वाला नहीं हैं।
जिला कार्यकारिणी की घोषणा में विलंब चर्चित-
जिले में भाजपा के संगठनात्मक चुनाव हुये काफी समय बीत गया हैं लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाये हैं। बताया तो यह जा रहा हैं कि वे अपनी कार्यकारिणी की सूची भोपाल भेज चुके हैं लेकिन वहां से अभी मंजूरी नहीं मिल पायी हैं। कहा जा रहा है कि सिवनी विधायक नीता पटेरिया के प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हीं की आपत्ति पर इस सूची को अनुमोदन नहीं मिल पा रहा हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन भाजपा की स्थानीय राजनीति में पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के खेमे के माने जाते हैं।नीता नरेश सम्बंध जग जाहिर हैं कि दोनो एक दूसरे को फंटी आंख भी नहीं सुहाते हैं। हालांहिक अभी अख्बारों में ऐसे समाचार भी प्रकाशित हुये हैं कि जिले की सूची को अनुमोदन मिल चुका है लेकिन अभी वह सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसका क्या कारण है यह तो अभी कहा नहीं जा सकता लेकिन यदि नीता का ज्यादा हस्तक्षेप हो गया होगा तो उसे ठीक कराने के प्रयास अवश्य ही किये जायेंगें।कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में अनुसुइया के दौरों की चर्चा- प्रदेश की भाजपायी राजनीति में मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की आंख की किरकिरी बन चुके प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगना शुरू हो गई हैं। शिवराज के राजनैतिक गुरू सुन्दरलाल पटना की अनुयायी राज्यसभा सदस्या आदिवासी नेत्री अनुसुइया उइके के दौरे लगना चालू हो गये हैं। भाजपाइयों का ही कहना हैं कि पहले कभी भी उनको आमन्त्रित करते थे तो वे टाल जातीं थीं लेकिन अभी हाल ही में उन्होंने सिवनी और लखनादौन का दौरा कर सभी को चौंका दिया हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि अनुसुइया उइके और फगग्न सिंह के भाई रामप्यारे दोनों ही पहले लखनादौन से भाजपा की टिकिट पर विधानसभा चुनाव लड़कर हार चुके हैं। वैसे तो भाजपा आलाकमान ने कुलस्ते को अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया हैं लेकिन वे पहले भी इस पद पर रह चुकें हें और उनकी अपेक्षा कुछ और थी जो पूरी नहीं हुयी हैं। इसके विपरीत शिवराज समर्थक नरेन्द्र तोमर को राष्ट्रीय महामन्त्री बना दिया गया हैं। कुलस्ते जैसे वरिष्ठ आदिवासी नेतृत्व की अनदेखी को वे और उनके समर्थक बरदाश्त नहीं कर पा रहें हैंं।
हरवंश सिंह के आरोपी बनने से सियासी हल्कों में हलचल
जिले और प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में इन दिनों आमानाला जमीन घोटाले के चर्चे हैं जिसमें विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह लपेटें में आ गये हैं। इलाके के जमीन्दार मरहूम फैलकूस मोहम्मद साहब ने फकीर को खैरात में कुछ जमीन दी थी। कुछ जमीन फकीर परिवार ने मेहनत करके खरीदी थी। इसी फकीर परिवार के वारसानों में से कुछ ने इस जमीन में से लगभग 21 एकड़ जमीन 4 लाख 50 हजार रुपये में बेच दी थी। इसी फकीर परिवार के एक वारसान मो. शाह ने अपने भाई नियाज अली और हरवंश सिंह तथा उनके पुत्र रजनीश सिंह के विरुद्ध परिवाद पेश किया था। कोर्ट ने एक महीने का समय देकर भा.दं.प्र.सं. की धारा 156 (3) के आदेश पारित कर पुलिस को निर्देश दिये थे। मामला धनौरा थाने की पुलिस चौकी सुनवारा के अंर्तगत था जो कि हरवंश सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता हैं। चौकी प्रभारी ने एक महीने बाद एक आरोपी नियाज अली के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया हैं तथा शेष दो आरोपियों,हरवंश सिंह और रजनीश सिंह, के विरुद्ध साक्ष्य ना होने से मामला दर्ज नहीं किया गया। जबकि 156(3) के अंर्तगत दिये गये आदेश में पहले मामला पंजीबद्ध करना पड़ता फिर जांच कर प्रतिवेदन में खात्मा करने या फिर मामला चलाने की बात की जाती हैं लेकिन सुनवारा चौकी प्रभारी नें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह के खिलाफ बिना मामला दर्ज किये जांच प्रतिवेदन सौंप दिया था। इस पर फरियादी के बयान भी कोर्ट में दर्ज कर लिये गये थे। लेकिन जब यह पाया गया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन किये बिना चौकी प्रभारी ने जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया हैं वह अन्तिम प्रतिवेदन नहीं हैं अत: कोर्ट ने स्वयं ही परिवादी के दर्ज किये गये बयान को निरस्त कर दिये। और दस दिन बाद अन्तिम प्रतिवेदन पेश करने को कहा था। इसके बाद भी धनौरा थाने ने शेष दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज ना करके मात्र डायरी में नाम शामिल कर जांच के लिये कोर्ट से 20 जुलाई तक का समय मांगां था। पुलिस का यह कदम विधिमान्य प्रक्रिया के अनुसार नहीं था। इससे ऐसा लगा था कि मानो प्रभावशाली आरोपियों को न्यायालयीन राहत लेने के लिये समय दिलाने के प्रयास का एक हिस्सा समझा जा रहा हैं। फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि रातों रात उसी दिन पुलिस ने ना केवल मामला दर्ज कर लिया वरन जिला पुलिस अधीक्षक ने भी मीडिया में इसे स्वीकार किया कि हरवंश सिंह के खिलाफ मामला पंजीबद्ध हो गया हैं। मामला दर्ज होने की पुष्टि होते ही मानो बवाल आ गया। तमाम भाजपा नेताओं ने नैतिकता के आधार पर विस उपाध्यक्ष पद से स्तीफा मांगना चालू कर दिया। इलेक्ट्रानिक और पिं्रट मीडिया में मामले के तूल पकड़ लेने के कारण हरवंश सिंह ने अपना पक्ष रखने के लिये प्रेस कांफ्रेंस बुलायी। प्रेस कांफ्रेंस लेने जब हरवंश सिंह धारा 420 के आरोपी बन कर सिवनी शहर में आये तो उनके समर्थकों ने ढ़ोल बाजे, आतिशबाजी, फूलमालाओं से उनका ऐसा स्वागत किया मानो वे कोई ऐसी जंग जीत कर आयें हों जिससे समूचे जिले की छाती गर्व से फूल गई हो। वैसे इस केस में कुछ चीजे तो वास्तव में देखने लायक हुयी हैं। कोर्ट के तीन तीन बार निर्देश देने के बाद भी पुलिस ने हरवंश और उनके पुत्र के विरुद्ध प्रकरण दर्ज नहीं किया जो कि कानूनन करना चाहिये था। पुलिस की लचर कार्यवाही के सूत्र सुनवारा चौकी से जुड़े हैं या धनौरा थाने से,जिले से जुड़े हैं या कमिश्नरी और राजधानी से यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सूत्रों का कहना हैं कि हरवंश सिंह के समर्थक यह दावा कर रहें हैं कि उनके नेता का इस मामले में बाल भी बांका नहीं होगा। इस मामले में यदि वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं होते तो उपाध्यक्ष पद के साथ साथ विधायक पद से भी स्तीफा देने की घोषणा वे कभी नहीं करते। उनके समर्थको का तो यह भी दावा हैं कि हरवंश सिंह की भाजपा सरकार में तूती बोलती हें उनके खिलाफ पुलिस प्रतिवेदन आ ही नहीं सकता। पुलिस को यदि मन से सही जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करना होता तो क्या पहले से ऐसी कार्यवाही की जातीर्षोर्षो अदालतें तो फैसला अपने सामने आने वाले तथ्यों पर ही निर्णय देतीं है। भाजपा यदि आरोपियों के चुंगल से सही में संवैधानिक पदो को बचाना चाहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपाध्यक्ष के विरुद्ध संसदीय कार्यमन्त्री अविश्वास प्रस्ताव लायें और सदन में कार्यवाही करें जो कि वैधानिक मंच हैं। अन्यथा इस बयानबाजी और राज्यपाल को ज्ञापन देने से कुछ होने वाला नहीं हैं।

आरोप सिद्ध होने पर ही इस्तीफा दूंगा-हरवंश सिंह
. न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद से मेरा व मेरा पुत्र कोई लेना देना नहीं .
. सामाजिक राजनैतिक क्षति पहुंचाने रची गई एक सोची समझी साजिश.
सिवनी । न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी लखनादौन के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में मुझ पर एवं मेरे पुत्र पर जो आरोप लगाये गये हैं वे पूर्णत: निराधार एवं सौ प्रतिशत झूठे हैं। यदि न्यायालय में दोष सिद्Ëा हो जाता है तो म्ौं विधानसभा उपाध्यक्ष पद से ही नहीं विधायक पद से भी इस्तीफा दे दूंगा।
प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह ने यह घोषणा माननीय न्यायालय में उनके व उनके पुत्र के विरूद्Ëा प्रस्तुत परिवाद पर अपना स्पष्टीकरण देने आयोजित पत्रकार वाताZ में करते हुये कहा कि समाचार पत्र और इलेक्टिªॉनिक मीडिया में मेरे और मेरे पुत्र द्वारा जमीन खरीदी के मामले में उल्लेख करते हुये तरह तरह के समाचार प्रकाशित हो रहे हैंं इस सम्बंध में न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपियों के आधार पर यह जानकारी देना चाहता हूं कि 18 जून को ग्राम आमाना निवासी मोह. शाह आत्मज इिम्तयाज खान ने माननीय न्यायालय श्री ए एस सिसोदिया न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी लखनादौन के समक्ष एक मिथ्या एवं आधारहीन परिवाद नियाज अली तथा मेरे एवं मेरे पुत्र रजनीश सिंह के विरूद्Ëा प्रस्तुत किया। परिवाद के आधार पर श्रीमान न्याियक दण्डाधिकारी द्वारा अन्वेषण का आदेश पुलिस थाना धनौरा को दियाग या और रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु 18 जून 2.1. की तिथि निर्धारित की गई, चूंकि माननीय न्याियक दण्डाधिकारी के द्वारा अन्वेषण के लिये जो परिवाद भेजा गया था उसमें घटना स्थल, घटना का समय एवं दिनांक इत्यादि का विवरण नहीं था कारण जिस दस्तावेज के सम्बंध में धोखा देना कहा गया था वह संलगन् नहीं था इसलिए विशिष्टियां एकत्र करने के लिये पुलिस ने प्रारंभिक जांच की। पुलिस की प्रारंभिक जांच एवं शिकायतकताZ के कथनों में यह पाया कि मोह. शाह और उनके भाई नियाज अली के साथ विवाद एवं मारपीट हुई है, परन्तु पुलिस जांच में मेरे और मेरे पुत्र रजनीश सिंह का इस अपराध में कहीं कोई समावेश होना नहीं पाया गया तथा चौकी प्रभारी सुनवारा के द्वारा 18 जुन 2.1. को न्यायालय के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
श्री सिंह ने बताया कि माननीय न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी के द्वारा शिकायत कताZ मोह. शाह से शपथ पर लंबी पूछताछ की गई तथ्ज्ञा उसके कथन लिपिबद्Ëा किये गये। मोह शाह ने अपने शपथ पर दिये गये न्यायालयीन कथनों में यह स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके और अन्य सहखातेदारों के बीच जमीन का बंटवारा हो गया है और वह 5 एकड भूमि के अलग कब्जे में है, उसने यह भी स्वीकार किया है कि उसने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद मेंं किसी इकरारनामें का जिक्र नहीं किया है अपने बयान में उसने यह स्पष्ट किया है कि उसका विवाद उसके भाई नियाज अली से है न कि मुझसे या मेरे पुत्र रजनीश सिंह से है।
शिकायतकताZ मोह शाह के अनुसार उसका वाद विवाद एवं लडाई झगडा व मारपीट उसके भाई नियाज अली के साथ हुआ था जिसकी रिपोर्ट मोह शाह द्वारा पुलिस चौकी सुनवारा में दजZ की गई। मोह शाह ने अपने न्यायालयीन कथनों में यह भी स्पष्ट किया है कि मुझसे व मेरे पुत्र रजनीश से कभी भी उसकी कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं हुई और न कभी भी म्ौंने और मेरे पुत्र ने उसे कभी भी कोई धमकी दी है उसने यह भी स्वीकार किया है कि उसने मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा कोई पुलिस रिपोर्ट नहीं की है। मोह शाह के बयान के अनुसार म्ौंने और मेरे पुत्र रजनीश सिंह ने मोह शाह को छोड उसके अन्य सह खातेदारों से न तो कोई इकरारनामा लिखाया है और न ही कोई भूमि का विक्रय पत्र लिखवाया है।
शिकायतकताZ मोह शाह के न्यायालय में दिये गये कथनों से स्पष्ट है कि हमारे द्वारा कोई विक्रय पत्र इकरारनामा या कोई भी रसीद नहीं लिखाई गई है और नही हमने कोई सौदा किया है जब कोई रजिस्ट्री इकरारनामा या रसीद ही अिस्तत्व में नहीं है तो धोखा देने का कोई प्रÜान् ही उत्पé नहीं होता है और यदि जन सामान्य के पास एैसा कोई दस्तावेज या कोई मौखिक साक्ष्य उपलब्ध हो तो वह उसे प्रकट कर सकता है। पूर्व में पुलिस द्वारा की गई विवेचना और मोह शाह के न्यायालयीन कथनों से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्Ëा विपक्ष द्वारा सिाजश की गई है और मेरे विरूद्Ëा राजनैतिक रूप से क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही कराई गई है। म्ौंने और मेरे पुत्र ने मोह शाह को न तो कोई धोखा दिया है और न ही उनको कभी डराया धमकाया गया है जो जमीन की खरीदी बिक्री बताई जा रही है उससे भी मेरा और मेरे परिवार का कोई लेना देना नहीं है उक्त परिवाद के तथ्य मिथ्या व झूठे हैं मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा विरोधियों द्वारा तोड मरोडकर मिथ्या तथ्य आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का हमेशा की तरह किया गया कुित्सत प्रयास है जिससे कि मेरी राजनैतिक एवं सामाजिक छवि धूमिक की जा सके।
पुलिस ने न्यायालय के द्वारा दिये गये आदेश 18 मई 2.1. के परिपालन में प्रारंभिक जांच की और इस जांच में पुलिस ने यह पाया कि मेरे और मेरे पुत्र रजनीश के विरूद्Ëा कोई अपराध नहीं बनता है तथा नियाज अली के विरूद्Ëा प्रथम दृष्टया अपराध पाये जाने पर पुलिस ने नियाज अली के विरूद्Ëा अपराध पंजीबद्Ëा किया तथा न्यायालय में 18 जून 2.1. को अन्तिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया इस प्रतिवेदन के अवलोकन के उपरान्त माननीय न्यायालय द्वारा शिकायतकताZ मोह शाह को सुना गया और उसके कथन लेखबद्Ëा किये गये इस प्रक्रम में माननीय न्यायालय ने यह पाया कि अन्तिम प्रतिवेदन न्यायालय के आदेशानुसार नहीं है इसलिये उन्होंने मोह शाह के कथन निरस्त कर पुलिस थाना धनौरा को सभी आरोपियों के विरूद्Ëा प्राथमिकी दजZ कर अन्वेषण उपरान्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश दिये गये तब मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ कि पुलिस ने न्यायालयीन आदेश के परिपालन में मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा प्रकरण पंजीबद्Ëा कर विवेचना में लिया है। विदित हो कि परिवाद प्रकरणों में पुलिस को जो अपराध दजZ कर अन्वेषण के आदेश दिये जाते हैं उसके पूर्व माननीय न्यायालय द्वारा कोई जांच नही ंकी जाती है बल्कि अपराध पंजीबद्Ëा होने के बाद पुलिस द्वारा विवेचना की जाती है और पुलिस थाना धनौरा ने इस न्यायालयीन आदेश के परिपालन में ही अपराध पंजीबद्Ëा कर अन्वेषण प्रारंभ किया गया है। अन्वेषण में जो भी तथ्य आवेंगे उनके अनुसार पुलिस को न्यायालय में आरोप पत्र खारिजी अथवा खात्मा प्रस्तुत करना होगा। मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा जो तथ्य अभी तक आये हैं उनसे स्पष्ट है कि हम लोग पूर्णत: निर्दोष हैं।
श्री सिंह ने बताया कि मामला अभी न्यायालयीन प्रक्रिया में है और मुझे सम्मानीय न्यायालय और न्यायालयीन प्रक्रिया पर पूर्ण रूपेण विÜवास है भविष्य में आम जनता के समक्ष इस प्रकरण की सारी सच्चाई सामने आ जायेगी। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों के लोग मुझसे जो त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं उसका एक मात्र उद्देश्य मुझे बदनाम करना और बयानबाजी कर अपने आप को सुर्खियों में लाना है। यदि न्यायालय द्वारा मुझे दोषी करार दिया जाता है तो म्ौं घोषणा करता हूं कि म्ौं ना केवल विधानसभा के उपाध्यक्ष पद वरन विधायक पद से भी इस्तीफा दे दूंगा। म्ौंने कभी कोई एैसा काम नहीं किया जिससे जिले को नीचा देखना पडा हो मेरे 42 साल के राजनैतिक व सामाजिक जीवन में विभिé पदों पर रहते हुये म्ौंने जो भी काम किया उससे जिले का नाम ऊंचा ही हुआ है।
आलाकमान को आशु ने किया ईमेल
सिवनी। प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वमाZ ने ईमेल के मार्फत अ भा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, प्रदेश प्रभारी वी के हरिप्रसाद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को आमानाला जमीन घोटाले के सम्बंध में सभी तथ्यों की जानकारी भेजी है साथ ही आज इस संंबंध में 420 का प्रकरण दर्ज होने के बाद पत्रकार वाताZ लेने सिवनी आये इंका विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष ठा.हरवंश सिंह के आगमन पर उनके स्वागत में जिस तरह से जगह-जगह आतिशबाजी ढोल धमाका और फूल मालाओं का प्रदर्शन किया गया उसकी भी जानकारी भेजते हुये आग्रह किया है कि पार्टी हित में आवश्यक कार्यवाही व उचित निर्देश जारी करें ताकि पार्टी की छवि पर कभी कोई विपरीत प्रभाव ना पड सके।
होशियार कौन स्वागत करने या कराने वाले?
सिवनी। कोर्ट के आदेश पर धारा 420 के आरोपी बन कर पहली बार नगर में प्रवेश कर पत्रकार वार्ता को संबोधित करने आये इंका विधायक हरवंश सिंह का बाजे गाजे ढ़ोल धमाके फूलमालाओं और आतिशबाजी से किया गया स्वागत राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं। हरवंश समर्थक कांग्रेसियों ने ना केवल स्वागत किया वरन बड़े चाव से प्रदेश इंका के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने स्वागत कराया भी हैं।राजनैतिक क्षेत्रों में चटखारों के साथ इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा हें कि स्वागत करने की योजना बनाकर स्वागत करने वाले ज्यादा होशियार हैं या स्वागत कराने वाले वरिष्ठ इंका नेता हरवंशर्षोर्षोइस सवाल का जवाब तो कुछ दिनों बाद ही मिलेगा या समझ मे आयेगा।
इन सवालों के जवाब देगा कौन?
1 क्या विवादास्पद जमीन खरीदने वाला हरवंश सिंह के स्टाफ के कर्मचारी का रिश्तेदार हैं?
2 क्या चार लाख रूपये से अधिक की जमीन खरीदने की आर्थिक स्थिति क्रेता रविनारायण शर्मा की है?
3 क्या हरवंश सिंह ने मीडिया को गुमराह करने के लिये फरियादी के उस बयान की प्रति बांटी हैं जिस बयान को कोर्ट खुद निरस्त कर चुकी हैं?
4 क्या इस तथ्य को छिपाने के लिये ही हरवंश सिंह ने 18 जून की कोर्ट की आर्डर शीट की कापी प्रेस को नहीं दी जिसमें यह उल्लेख हैं कि कोर्ट फरियादी के बयान को निरस्त करती हैं?
5 हरवंश सिंह ने कहा कि धारा 156(3) में अपराध पजीबद्ध करने के बाद जांच हो पाती हैं तो क्या बिना अपराध दर्ज किये सुनवारा चौकी प्रभारी द्वारा कोर्ट में दिया गया प्रतिवेदन अमान्य है?
6 भाजपा के राज में चौकी प्रभारी द्वारा नियम विपरीत प्रतिवेदन किसके प्रभाव में दिया गया जिसमें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह को निर्दोष बताया गया है?
7 क्या हरवंश सिंह का यह कहना कोर्ट की अवमानना नहीं हैं कि,Þइस तरह मैं यह कह सकता हूं कि मेरे विरुद्ध विपक्ष द्वारा साजिश की गई है और मुझे राजनीतिक रूप से क्षति पहुचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही करायी गई हैं।ß

मालगुजार ने खैरात में फकीर को दी थी जमीनभोपाल। बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में विवादित जमीन के बारे में बताया जाता हैं कि यह जमीन अंजनिया के मालगुजार मरहूम जनाब फेलकूस मोहम्मद खॉन ने विक्रेता के पूर्वजों को, जो कि फकीर थे, खैरात में जमीन दी थी। अपनी मेहनत के कमा कर उन फकीरों ने मालगुजार से कुछ और जमीन बाद में खरीदी थी। मालगुजार द्वारा खैरात में फकीर को दी गई जमीन बिक्री के विवाद में जिले के इकलौते इंका विधायक ठा. हरवंश सिंह का नाम आने से लोगों के बीच तरह तरह की चर्चायें व्याप्त हैं।धारा 420 का पहला आरोप नहीं हैं हरवंश सिंह परभोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हरवंश पर धोखा दने के आरोप लगने का यह कोई पहला मामला नहीं हैं। आज से 26 साल पहले पिछड़े वर्ग की एक विधवा महिला ने अपने वकील हरवंश सिंह पर जमीन हड़प लेेने का अरोप लगाते धारा 420 के तहम परिवाद पत्र प्रस्तुत किया था।सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने बकोड़ा सिवनी सहकारी समिति के आदिवासियों को डीजल पंप सप्लायी ना कर धोखा दने के आरोप को सही पाते था सिवनी को फर्म के पार्टनर हरवंश सिहं के विरुद्ध धारा 420 का मामला दर्ज कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे।प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री सुन्दरलाल पटवा ने झूठे शपथपत्र देकर प्रदेश के जिन मन्त्रियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगयाी थी उनमें भी हरवंश सिंह शामिल थे। माननीय उच्च न्यायालय ने भी सरकार को जांच कर कार्यवाही रिने के निर्देश दिये थे।इंका विधायक हरवंश सिंह के विरुद्ध वर्तमान धोखाधड़ी का मामला न्यायलय के निर्देश पर कायम किया गया हैं।बाजार मूल्य से आधी कीमत पर खरीदी गई हैं जमीनभोपाल। घंसौर तहसील के ग्राम आमानाला पटवारी हल्का नंबंर 54/41 की 10.47 हेक्टेयर याने लगभग 21 एकड़ विवादित जमीन की रजिस्ट्री सादक सिवनी निवासी रवि नारायण शर्मा के नाम हुयी हें। उन्होंने यह जमीन विक्रेता नियाज अली एवं अन्य से 4 लाख 50 हजार रुपये में खरीदी हैं। इस जमीन का बैनामा 21 जनवरी 2010 को लखनादौन में हुआ हैं। इस जमीन का कलेक्टर द्वारा निर्धारित कीमत 9 लाख 24 हजार रुपये है। बाजारू कीमत से लगभग आधी कीमत पर एक अनजान व्यक्ति शर्मा के नाम जमीन के बैनाम को हो जाने से तरह तरह की चर्चाओ में एक चर्चा यह भी हें कि कहीं यह बेनामी सौदा तो नहीं हैं।

Thursday, July 1, 2010

घोखाधड़ी हरवंश के स्वभाव में शामिल: डॉ. बिसेन
प्रदेश की जनता को शर्मसार ना होना पडे,. . पद की गरिमा बनाये रखने उचित निर्णय का भरोसा .

सिवनी । ठा. हरवंश Çसह के विरूद्Ëा धोखाधडी का अपराधिक प्रकरण मेरे लियें कोई आÜचर्य की बात नहीं है। पूर्व में भी उनके द्वारा किये एैसे कई मामले इस बात के गवाह हैं कि एैसे कृत्य उनके स्वभाव में ही निहित हैं किन्तु प्रदेश के उच्च संव्ौधानिक पद पर रहते हुये कोई भी व्यक्ति यदि एैसा कोई कार्य करता है तो उससे जिले को ही नहीं पूरे प्रदेश की जनता को शर्मसार होना पडता है।
आमानाला जमीन घोटाले में न्यायालय के आदेश पर विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के विरूद्Ëा दजZ किये गये धोखाधडी के अपराधिक प्रकरण पर उक्ताशय की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश के पूर्व मन्त्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ढालसिंह बिसेन ने कहा है कि धोखा देना हरवंश Çसह के स्वभाव में शामिल एक एैसी फितरत है जिसके कई प्रमाण पहले भी देखने को मिल चुके हैं। सबसे पहले इन्होंने एक वकील के रूप में अपनी मुविक्कल पिछडे वर्ग की विधवा महिला कुडोपार निवासी गंगाबाई के साथ किया था, गंगाबाई की शिकायत पर न्यायालय में उसकी जमीन हडप लेने के सम्बंध में चार सौ बीसी का मामला कायम हुआ था और उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन रहते हुये ही उसकी मृत्यु हो गई थी। इसी तरह एक व्यवसाियक फर्म के पार्टनर के रूप में हरवंश सिंह आदिवासियोें के साथ धोखाधडी करने से भी बाज नहीं आये थे। इस फर्म ने ब्ौंक से पैसा तो ले लिया था लेकिन गरीब आदिवासियों को सिंचाई के लिये डीजल पंप सप्लाय नहीं किये थे। उपपंजीयक सहकारी संस्था ने आरोप सही पाते हुये थाना सिवनी को धारा 42. के तहत अपराध पंजीबद्Ëा कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। कांग्रेस की सरकार रहने के कारण मामला दब गया था तब बालाघाट जिले की लांजी विधानसभा में मामला उठाया था जिसका जवाब देते हुये तत्कालीन कृषि मन्त्री शिवभानुसिंह सोलंकी ने यह स्वीकार किया था कि प्रकरण पुलिस ने दजZ कर लिया है जांच उपरान्त आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ढालसिंह बिसेन ने कहा है कि इसीलिये ही मुझे आमानाला जमीन काण्ड की खबर का आÜचर्य नहीं हुआ किन्तु पहले और अब में हालात बदले हुये हैं। श्री सिंह आज विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे गरिमामय संव्ौधानिक पद पर आसीन हैं और इतिहास गवाह है कि एैसे पदों पर आसीन रहे नेताओं ने नैतिकता की मिसाल पेश की है डॉ बिसेन ने कहा है कि अब एैसी परिस्थिति में श्री सिंह को क्या करना चाहिये इसका निर्णय स्वयं करना है। मुझे विÜवास है कि श्री हरवंश सिंह एैसा निर्णय करेंगे जिससे जिले व प्रदेश की जनता को शर्मसार न होना पडे।
डॉ बिसेन ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान स्विर्णम मप्र बनाने प्राण प्रण से जुटे हुये हैं। इसीलिये प्रदेश के हर नागरिक का ये नैतिक दाियत्व हो जाता है कि उसका कृत्य इस प्रयास में कोई बदनुमा दाग न साबित हो। सरकारी मशीनरी से भी अपेक्षा है कि वे अपनी कार्यप्रणाली एैसी रखें कि प्रत्येक फरियादी को एैसा महससू हो कि इस सरकार म्ों सबको न्याय मिलता है।

bjp demands for regignation from the post of dy speaker

भाजपा नेताओं ने नैतिकता के आधार पर विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह से इस्तीफा मांगा
.जिला भाजपा अध्यक्ष एवं नगर भाजपा अध्यक्ष ने संव्ौधानिक पद की गरिमा का दिया हवाला.
सिवनी। आमानाला भूमि प्रकरण में प्रदेश विस उपाध्यक्ष हरवंश िंसह पर धोखाधडी के मामले में 420 जैसी गम्भीर धाराओं पर प्रकरण दजZ हो जाने के पश्चात् उन्हें नैतिकता के आधार पर तत्काल विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिये। जिला भाजपा की ओर से जिलाध्यक्ष सुजीत जैन, सांसद के डी देशमुख, राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य डॉ ढालसिंह बिसेन, सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं विधायक श्रीमती शशि ठाकुर, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले, सहकारी ब्ौंक अध्यक्ष अशोक तेकाम, नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एवं पार्टी पदाधिकारियों द्वारा इस आशय की मांग हरवंश सिंह से की जाने के साथ ही प्रदेश के महामहिम राज्यपाल महोदय को फैक्स भेजकर हरवंश सिंह को तत्काल विधानसभा उपाध्यक्ष पद से मुक्त करने की मांग भी की गई।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुजीत जैन द्वारा सिह से इस्तीफे की मांग करते हुये कहा गया है कि विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे संव्ौधानिक पद लोगों के आदर्श होते हैं सिंह इस उच्च पद पर विराजमान हैं और उन पर एैसे प्रकरण पहली बार दजZ नहीं हये हैं इसके पूर्व भी वे मारपीट एवं जानलेवा हमले के मामलों में धारा 307 के आरोपी रह चुके हैं आमानाला प्रकरण में जमीन खरीदी के मामले में उन पर धोखाधडी का प्रकरण दजZ हुआ था जो कि एक गम्भीर अपराध है। अत: उन्हें इस प्रकरण के निराकरण होने तक अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिये ताकि न्याय प्रक्रिया बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।
भाजपा मीडिया प्रभारी द्वारा कहा गया है कि संव्ौधानिक पद की गरिमा का उल्लंघन करते हुये हरवंश सिंह इसके पूर्व भी प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार कर चुके हैं कि उनके लियेे पार्टी इस संव्ौधानिक पद से बडी है उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुये जिला भाजपा द्वारा उनसे नैतिकता के नाते इस्तीफे की मांग की गई थी तब श्री सिंह ने घोषणा की थी कि वे भाजपा जिलाध्यक्ष सुजीत जैन से नैतिकता का पाठ पढेंगे। श्री सिंह ने अपनी घोषणा के बाद कभी भी नैतिकता का पाठ सीखने की कोशिश नहीं की। यदि अपनी घोषणा के अनुरूप उन्होंने नैतिकता का पाठ सीख लिया होेता तो आज उनसे पुन: इस्तीफा मांगने की आवश्यक्ता नहीं पडती।
पार्टी की विज्ञिप्त में कहा गया है कि श्री सिंह ने नैतिकता का पाठ भाजपा जिलाध्यक्ष से सीखने की घोषणा की थी तभी सिद्ध हो गया था कि कांग्रेसियों में नैतिकता पूर्णतया समाप्त हो गई है। इसी वजह से उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष से नैतिकता का पाठ सीखने की आवश्यकता पड गई थी। श्री सिंह के एैसे बयानों से यह भी प्रमाणित हो गया है कि अपने लंबे राजनैतिक जीवन में उन्होंने कभी भी ना तो नैतिकता सीखी ना ही कभी उसका पालन किया।
इसी तारतम्य में नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने जारी विज्ञिप्त में कहा है कि पूर्व में प्रदेश की तीन-तीन विभागों के मन्त्री रह चुके और वर्तमान में मप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष जैसे गरिमामय पूर्ण संव्ौधानिक पद पर रहते हुये उनके विरूद्ध धोखाधडी तथा मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे गम्भीर अपराध का दजZ होना संव्ौधानिक पद एवं जनप्रतिनिधि की गरिमा के विपरीत है। एैसी स्थिति में ठा. हरवंश सिंह को स्वयं नैतिकता के आधार पर संव्ौधानिक पद से त्याग पत्र दे देना चाहिये। श्री तिवारी ने कहा है कि इस मामले के पूर्व भी श्री सिंह के विरूद्ध वर्तमान भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया की रिपोर्ट पर बण्डोल थाने में एक प्रकरण दजZ कराया गÄ(ाा था जिसका चालान भी आज तक पेश नहीं हो सका है। श्री तिवारी ने प्रदेश के राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमन्त्री,नेता प्रतिपक्ष के अलावा प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में संव्ौधानिक पद की गरिमा बनाये रखने हेतु उचित कार्यवाही की मांग की है।