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Sunday, December 19, 2010

दो साल में दूसरी बार विकास के लियेयोजना बनाने की बात कह मंचासीन भाजपा नेताओं की तालियां बटोर ले गये शिवराज

हाल ही में लगभग दो साल बाद एक बार फिर जब जिले के विकास की बात उठी तो मुख्यमन्त्री जी ने फिर मंच से योजना बनाने के निर्देश देते हुये पैसे की कमी नहीं आने देने की बात कर दी। मंच पर बैठे भाजपा के उन तमाम नेताओं ने इस बार भी ताली बजाई जिन्होंने दो साल पहले पालेटेकनिक के मंच से ताली बजायी थी। प्रदेश भाजपा महिलामोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया पर मुख्यमन्त्री की पत्नी और उपाध्यक्ष साधना सिंह के भारी पड़ने के समाचार सुर्खियों में रहें। वैसे सामान्य तौर पर देखा जाये तो यह एक साधारण सी बात हैं।लेकिन भाजपा हमेशा अपने आप को सबसे अलग होने का दावा करती हैं जहां व्यक्ति नहीं संगठन और संगठन का पद ही सम्मान पाने का अधिकारी होता हैं। ऐसा लगता हैं कि सबसे अलग होने का भाजपा का दावा सत्ता सुन्दरी की चकाचौंध में कहीं गुम होकर रह गया हैं। एक तो वर्तमान में महेश मालू जिलाध्यक्ष हैं तो दूसरे हीरा आसवानी जिले के निर्वाचित अध्यक्ष हैं। महेश मालू अपना कार्यकाल समाप्त मान चुके हैं और हीरा आसवानी अपने कार्यकाल की अभी शुरुआत हुयी नहीं मानते हैं। शिवराज जी आपके राज में तो आडवानी जी की नसीहत के खिलाफ भ्रष्टाचारियों को सजा देने के बजाय संगठन में प्रदेशस्तर पर पद देकर नवाजा जा रहा हैं। डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को अपनी ही सरकार से सर्वाजनिक मंच से बार बार एक ही मांग करनी पड़ रही हें और सरकार के मुखिया शिवराज सिंह हैं कि सभा में घोषणा करके तालियां तो बजवा लेते हैं लेकिन फिर नतीजा वही ढाक के तीन पात के समान ही रहता हैं। यह मांग हैं सिंचाई विभाग की कांचना मंड़ी जलाशय की जिससे क्षेत्र की लगभग 6 हजार एकड़ भूमि सिंचित होना हैं।

घोषणाओं से ही बहला जाते हैं शिव की नगरी को शिवराज -एक समय था जब मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान नगर के पालेटेकनिक कॉलेज के परिसर में आये थे। उनकी पत्नी साधना सिंह जी भी उनके साथ थीं। उस दौरान नगर विकास के लिये मांग उठी तो शिवराज सिंह ने मंच से शहर की सम्पूर्ण योंजना बनाने के लिये कलेक्टर को निर्देश दिये थे कि एक माहीने के अन्दर योजना बनाये सरकार एक मुश्त पैसा देगी। हाल ही में लगभग दो साल बाद एक बार फिर जब जिले के विकास की बात उठी तो मुख्यमन्त्री जी ने फिर मंच से योजना बनाने के निर्देश देते हुये पैसे की कमी नहीं आने देने की बात कर दी। उनकी पत्नी साधना जी इस बार भी साथ थीं। मंच पर बैठे भाजपा के उन तमाम नेताओं ने इस बार भी ताली बजाई जिन्होंने दो साल पहले पालेटेकनिक के मंच से ताली बजायी थी। ऐसी ही किसी आम सभा में शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने मेडिकल कॉलेज देने की घोषणा भी की थी। घोषणा के बाद जिला कलेक्टर ने जिले में इस हेतु एक कमेटी भी गठित की थी। लेकिन किसी ने भी आज तक इस बात की सुधि ही नहीं ली हैं कि उस मेडिकल कालेज का क्या हुआ र्षोर्षो वैसे भी शिवराज ने शिव की नगरी को हमेशा हताश ही किया हैं। ना तो अपने मन्त्रीमंड़ल में तीन तीन भाजपा विधायक होने के बाद भी किसी को मन्त्री बनाया,ना ही भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त होने के बाद भी उसेसंभाग का दर्जा मिलने दिया, सिवनी लोक सभा और जिले की एक विधानसभा समाप्त हो गई, फोर लेन मामले में सभाओं में गरजने वाले शिवराज कमलनाथ और जयराम रमेश से बात करते वक्त उसे भूल जाते हैं। इतना सब कुछ करने बाद भी यदि जनता लोकसभा,चार में से तीन विधानसभा और नपा अध्यक्ष का चुनाव जिता देती हैं तो भला कुछ करने की जरूरत ही क्या हैंर्षोर्षो रहा सवाल भाजपा नेताओं का तो वे भी मंच पर घोषणा होने मात्र से ताली बजाकर सन्तुष्ट हो जाते ळें तो फिर चिन्ता करने की तो कोई बात ही नहीं रह जाती हैं ?

नीता पर साधना भारी: सबसे अलग दिखने का भाजपायी दावा खोखला साबित हुआ -बीते दिनों भोपाल से प्रकाशित एक समाचार सिवनी के राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। सिवनी की विधायक नीता पटेरिया प्रदेशभाजपा की महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं और मुख्यमन्त्री की पत्नी साधना सिंह उपाध्यक्ष हैं। समाचार का सार यह था कि जहां देखो वहां हर राजनैतिक कार्यक्रमों नीता पर साधना भारी पड़ रहीं हैं। वैसे सामान्य तौर पर देखा जाये तो यह एक साधारण सी बात हैं और इसका कोई समाचार भी नहीं बनता क्योंकि आजकल ऐसा ही हो रहा हैं। लेकिन भाजपा हमेशा अपने आप को सबसे अलग होने का दावा करती हैं जहां व्यक्ति नहीं संगठन और संगठन का पद ही सम्मान पाने का अधिकारी होता हैं। लेकिन एक महिला संगठन में प्रदेश प्रमुख की यह गत देखकर तो ऐसा लगता हैं कि सबसे अलग होने का भाजपा का दावा सत्ता सुन्दरी की चकाचौंध में कहीं गुम होकर रह गया हैं।

जिले में कांग्रेस के हाल बेहाल तो क्या बदहाल हो गये हैं-जिले में कांग्रेस के हाल भी बेहाल हैं। ऐसी अजीब स्थिति शायद पहले कभी नहीं रहीं। एक तो वर्तमान में महेश मालू जिलाध्यक्ष हैं तो दूसरे हीरा आसवानी जिले के निर्वाचित अध्यक्ष हैं।हीरा आसवानी का अधिकृत घोषणा अभी तक नहीं हुई हैं।महेश मालू अपना कार्यकाल समाप्त मान चुके हैं और हीरा आसवानी अपने कार्यकाल की अभी शुरुआत हुयी नहीं मानते हैं। ऐसे में कांग्रेस कौन चलायेर्षोर्षो यह एक यक्ष प्रश्न सामने खड़ा हो गया हैं। जिस जिले में आजादी से लेकर कांग्रेस की सरकार रहते तक हमेशा मन्त्री रहें हों यदि उस जिले में कांग्रेस को अपने दिवंगत नेताओं की जयन्तियां और पुण्यतिथियां मनाने के लिये जगह ना मिले या आफिस खोलने की गुहार करना पड़े तो इससे शर्मनाक बात भला और क्या हो सकती हैंर्षोर्षो

शिवराज के राज में पदों से नवाजा जा रहा हैं भ्रष्टाचारियों को-भाजपा के शीर्ष नेता आडवानी ने भोपाल में गौरव दिवस पर मुख्यमन्त्री को सीख दी थी कि भ्रष्टाचार से समझोता नहीं करना। बस क्या था फिर शिवाराज भी अपने सभी भाषणों में भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ने की बात कहते दिखते हैं। नये तो जब पकड़ें जायेंगें तब छोड़ने या ना छोड़ने का सवाल पैदा होगा लेकिन शिवाराजजी यह तोबता दें कि जो पुराने पकड़े जा चुके हैं और जिन पर आरोप भी सिद्ध हो चुके हैं उन्हें आपकी सरकार कब दंड़ित करेगी। एक छोटा सा उदाहरण तो सिवनी शहर का ही हैं। दुगनी कीमत पर घटिया सड़के बनाने का आरोप इंका नेता आशुतोष वर्मा ने लगाया था। जिनमें से एक एस.पी.बंगले से राकेशपाल के पंप तक की भी हैं।नपा के कागजों में तो यह ठेका सुखदेव पटेल ने लिया था लेकिन यह सभी जानते हैं कि इसका काम भाजपा नेता पवन बंसल और समीर अग्रवाल ने बनायी थी। कई जाचों मेंआरोप प्रमाणितभी हो गये हैं। सरकार ने नपा अध्यक्ष,उपाध्यक्षऔर सी.ण्म.ओ. को तथा जिला कलेक्टर के यहां से पार्षदों को नोटिस भी जारी किये गये। लेकिन लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी नतीजा सिफर ही हैं। यह भी एक ओपन सीक्रेट हैं कि इन भाजपा नेताओं को पहले तत्कालीन भाजपा विधायक नरेशदिवाकर तथा पालिका अध्यक्ष पार्वती जंघेंला का संरक्षण प्राप्त था तो आज भी इन्हें भाजपा विधायक नीता पटेरिया और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी का संरक्षण प्राप्त हैं। और तो और पवन बंसल तो राजेश त्रिवेदी के साथ युवा मोर्चे की प्रदेश कार्यकारिणी में भी शामिल हो गये हैं। शिवराज जी आपके राज में तो आडवानी जी की नसीहत के खिलाफ भ्रष्टाचारियों को सजा देने के बजाय संगठन में प्रदेश स्तर पर पद देकर नवाजा जा रहा हैं।

शिवराज के रज में पदों से नवाजा जारहा हैं भ्रष्टाचारियों को-बरघाट विस क्षेत्रसेचार बार विधायक और भाजपा सरकार में तीन विभाग के मन्त्री रहे डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को अपनी ही सरकार से सर्वाजनिक मंच से बार बार एक ही मांग करनी पड़ रही हें और सरकार के मुखिया शिवराज सिंह हैं कि सभा में घोषणा करके तालियां तो बजवा लेते हैं लेकिन फिर नतीजा वही ढाक के तीन पात के समान ही रहता हैं। यह मांग हैं सिंचाई विभाग की कांचना मंड़ी जलाशय की जिससे क्षेत्र की लगभग 6 हजार एकड़ भूमि सिंचित होना हैं। इस बार भी सुकतरा में शिवराज सिंह ने मंच से यह घोषणा कर दी हैं कि इस योजना में जितना भी पैसा लगना हैं वह एक मुश्त इस साल के बजट में रख दिया जायेगा। अब देखना यह हैं कि डॉ. बिसेन को अगली बार फिर मांग करनी पड़ती है या नहीं?

Wednesday, December 15, 2010

क्या आपने डामर रोड़ में धूल उड़ते और पानी सिंचते देखा हैंर्षोर्षो

संजय तिवारी ने की नयी रोड़ बनाने की मांग



क्या आपने कभी डामर की सड़क पर धूल उड़ते और इससे बचने के लिये पानी सिंचते कही देखा है? यदि नहीं तो यह नजारा आपको नगर पालिका दिखा सकती हैं।

जी हां ऐसा नजारा आपको एस.पी. बंगले के सामने से राकेश पाल के पेट्रोल पंप तक वाली रोड़ में दिख सकता है। यह आज से तीन साल पहले नगर पालिका ने इस रोड़ को 89 प्रतिशत अधिक की दर पर बनवाया था। पहली ही बरसात में इस रोड़ के घटिया काम की पोल खुल गई थी। इसमें हुये भ्रष्टाचार की शिकायत हुयी थी जिन पर राज्य सरकार स्तर से कार्यवाही अभी भी लंबित हैं। सड़क बनाने वाले ठेकेदारों पर तब भी तत्कालीन भाजपा विधायक एवं पालिका अध्यक्ष का संरक्षण प्राप्त था और आज भी विधायक एवं पालिका अध्यक्ष का संरक्षण प्राप्त हैं।

तब से लेकर आज तक इस सड़क पर धूल उड़ती देखी जा सकती हैं। जब कोई वी.आई.पी. इस सड़क से गुजरने वाला होता हैं तो पालिका अपनी करनी को छिपाने के लिये इस सड़क पर पानी सींच देती हैं तो कुछ समय के लिये धूल उड़ना बन्द हो जाती हैं।

हाल ही में हुये प्रभारी मन्त्री के कार्यक्रम में फोर लेन बचाने के लिये गठित किये गये गैर राजनैतिक संगठन जनमंच के संजय तिवारी ने मन्त्री जी से मिलकर किसानों,उनसे सम्बंधित व्यापारियों को मंड़ी से होने वाली तकलीफो और वहां की अनियमितताओंं तथा उक्त रोड़ को फिर से नयी बनाने की मांग की हैं। संजय तिवारी ने इस सयड़क को फिर से बनवाने की मांग तो की हैं लेकिन लगभग दुगनी कीमत पर घटिया काम करने वाले ठेकेदारों और पालिका के तकनीकी स्टाफको दंड़ित करने की मांग करना उचित नहीं समझा। इस बात की क्या गारंटी हैं कि मन्त्री जी यदि फिर ये पैसा देकर इस सड़क ाके नयी बनवादें तो वो काम घटिया नहीं होगा?





Monday, December 13, 2010

सदी के महानाय्ाक अमिताभ पेंच नेशनल पार्क में रुके दो दिन

सिवनी । एन.डी. टीव्ही द्वारा बाघों के

संरक्षण की दिशा में चलाय्ो जा रहे एक विशेष अभिय्ाान टाइगर

कन्जर्वेशन अंतर्गत पेंच पार्क में आय्ाोजित कायर््ाक्रम में

शामिल होने अभिनय्ा के शहंशाह, महानाय्ाक अमिताभ बच्चन का

11 दिसम्बर को दोपहर 2.40 पर पेंच आगमन हुआ। महानाय्ाक को देखने

टुरिय्ाा गेट पर सिवनी एवं नागपुर जिले के लोगों का

ताँता सुबह 10 बजे से ही लग गय्ाा था। जब महानाय्ाक टुरिय्ाा

गेट पहुंचे और कार से उतरकर होटल जाने के लिय्ो दूसरी कार

में बैठे , इस दौरान ही दर्शकों को उनकी एक झ्ालक देखने

मिली।

इस सदी के महानाय्ाक अमिताभ बच्चन 11 दिसंबर

को मुंबई से हवाई जहाज द्वारा दोपहर 12 बजे नागपुर

पहुँचे जहाँ से वे कार द्वारा नेशनल पार्क पेंच के लिय्ो

रवाना हुय्ो। अमिताभ दोपहर करीब 2.40 मिनिट पर पेंच पार्क

का प्रवेश स्थल टुरिय्ाा गेट पहुँचे। श्री बच्चन टुरिय्ाा गेट से

पेंच पार्क स्थित ताज ग्रुप की होटल बागवान की ओर रवाना

हो गय्ो। बताय्ाा जाता है कि श्री बच्चन एन.डी.टीव्ही द्वारा होटल

बागवान(ताज ग्रुप)में आय्ाोजित टाइगर कन्जर्वेशन कायर््ाक्रम

में शामिल होंगे। इस कायर््ाक्रम में वे पेंच टाइगर रिजर्व

क्षेत्र्ा अंतर्गत रहने वाले ग्रामीणजनों को प्रसारण के

माध्य्ाम से वन्य्ा प्राणिय्ाों विशेषकर बाघों को संरक्षित

करने के लिय्ो समझ्ााईश देंगे एवं य्ाह भी समझ्ााने का प्रय्ाास

करेंगे कि य्ादि उनके रहवासी इलाके के आसपास टाइगर का बसेरा

है तो वे रहवासी क्षेत्र्ा टाइगर के लिय्ो छोड दें, ताकि राष्ट्रीय्ा

धरोहर को संजोय्ो रखने में उनका भी य्ाोगदान बना रहे। श्री

बच्चन के संदेश को प्रसारण के माध्य्ाम से एन.डी. टीव्ही द्वारा

पेंच पार्क के वन ग्रामों एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों

में विशेष व्य्ावस्था की गई है। य्ाह सीधा प्रसारण बागवान

होटल पेंच पार्क के एक कमरे में बनाय्ो गय्ो स्टुडिय्ाो से

होगा। य्ाह सीधा प्रसारण रात्र्ाि 11 बजे तक चलेगा, इसके बाद

श्री बच्चन होटल में ही रात्र्ाि विश्राम करेंगे। सूत्र्ाों से प्राप्त

जानकारी अनुसार महानाय्ाक अमिताभ कल प्रातः पेंच पार्क का

भ्रमण भी करेंगे। श्री बच्चन के इस आगमन को लेकर पेंच

नेशनल पार्क सिवनी मप्र, महाराष्ट्र एवं जिला प्रशासन द्वारा

सुरक्षा की दृष्टि से वृहद तैय्ाारिय्ाां की गई हैं। बताय्ाा जाता

है कि श्री बच्चन 13 दिसंबर को नागपुर होते हुय्ो मुंबई को

रवाना हो गये हैं।।



एन.डी.टी.वी. के बाघ संरक्षण कार्यक्रम से उठे चंद सवाल

सिवनी। पेंच नेधनल पार्क में आनन फानन में हुये अभिताब बच्चन के कार्यक्रम से लोगों के मन में चंद सवाल उठ खड़े हुये हैं

0 क्या फोर लेन मामले में सुप्रीम कोर्ट में 17 जनवरी को होने वाले संभावित निर्णय से इसके आयोजन का कोई सरोकार हैं?

0 क्या नेशनल हाई वे से लगभग तीस किलो मीटर पेंच पार्क में आयोजित इस बाघ संरक्षण कार्यक्रम को मुद्दा बनाया जा सकता हें?

0 क्या अभिताब जैसे महानायक का कार्यक्रम पेंच पार्क में ही करना जरूरा था जबकि राज्य सरकार अपनी घोषणा के बाद भी मोगली महोत्सव इस वर्ष पेंच पार्क में आयोजित नहीं कर ही हैं?

0 क्या बाघ संरक्षण के लिये आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में ही फिल्मी शेर को ज्रगल का शेर ना दिख पाना इनके संरक्षण में सरकारी लापरवाही का प्रमाण नहीं हैं?

0 क्या पेंच में कागजों पर दिखायी जा रही बाघों की संख्या सही है? यदि सही हैं तो फिर एक भी शेर का ना दिखना क्या संकेत देता है?

0 इस नेशनल पार्क का नाम प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी नेशनल पार्क शासन द्वारा रखा गया हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दायर मामले में पेंच टाइगर रिर्जव की बात कही गयी हैं क्या इसीलिये नेशनल पार्क का सही नाम कहीं भी नहीं लिया गया हैं?

Sunday, December 12, 2010

जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं जरूरत इसमें हो रहे भ्रष्टाचार में कमी लाने की जिसकी कोई सीमा नहीं है

जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की हैं जिसके लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होगें। भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों या वर्गों में पकड़ नही रहती उन जगहों पर भले ही तव्वजो मिल जाये लेकिन पकड़ बनते ही संघीय प्ष्ठ भूमि के नेताओं से उन्हें विस्थापित कर दिया जाता हैं। ऐसा ही कुछ जिले में स्व. महेश शुक्ला के साथ प्रदेश में स्व. पोर्ते,नेताम और भूरिया के साथ हुआ। अब लगता हैं कांग्रेस से भाजपा मे आये जिलें के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह के खिलाफ भी घोषित एवं अघोषित भाजपाइयों ने मोर्चा खोल दिया हैं। अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल। पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था।

जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की-

जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिह ने जिला योजना समिति की बैठक में इस बात का विश्वास दिलाया हैं कि जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं आने दी जायेगी। जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के विकास में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से इतना पैसा आ रहा हैं कि खर्च करते नहीं बन रहा हैं और जो खर्च हो रहा हैं उसमें भी इतना अधिक भ्रष्टाचार हैं कि काम की गुणवत्ता तो जैसे कहीे गुम ही गई हैं। तारीफ की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार के जो मामले प्रमाणित भी हो रहें हैं उनके खिलाफ प्रदेश सरकार से कार्यवाही में इतनी अधिक हीला हवाली हो रही हैं कि आज तक ाकेई भी भ्रष्टाचारी दंड़ित नहीं हो पाये हैं। इसीलिये मन्त्री जी जरूरत हैं तो भ्रष्टाचार में मी लाने की पैसे की तो कोई कमी हैं ही नहीं। और भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होंगें क्योंकि हर भ्रष्टाचारी को सत्ता शिखर के किसी ना किसी गुबन्द का संरक्षण प्राप्त हैं।

दूसरे दलों से आये नेता भाजपा में खप नहीं पाते हैं-

भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों में पकड़ नहीं रहती उन क्षेत्रों में पकड़ बनाने के लिये भाजपा में भले ही दूसरे दलों से आये नेताओं को तव्वजो मिल जाये और उन्हें मन्त्री तक बना दिया जाये लेकिन जैसे ही वे क्षेत्र भाजपा मय हो जाते हैं तो ऐसे नेताओं को दर किनार कर संघीय पृष्ठ भूमि को बिठाल दिया जाता हैं। इसका उदाहरण तो सिवनी जिले में ही मौजूद हैं। कांग्रेस से भाजपा में गये स्व. पं. महेश शुक्ला को ना केवल भसापा ने जिले का अध्यक्ष बनाया ब्लकि सिवनी विधानसभा से 90 में टिकिट भी दिया जहां उन्होंने कांग्रेस के हरवंश सिंह को हराया और मन्त्री भी बने। दूसरी बार फिर वे 93 में सिवनी से लड़े और कांग्रेस के आशुतोष वर्मा को हराकर विधायक बने। सन 1977 की जनता आंधी में इस क्षेत्र से कांग्रेस जीती थी। लेकिन जैसे ही भाजपा को लगा कि अब इस क्षेत्र में पकड़बन गई तो संघी पृष्ठभूमि के नेरश दिवाकर को टिकिट देकर उन्हें दरकिनार कर दिया गया। ऐसा ही कुछ हाल कांग्रेस से भाजपा में गये प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब एवं आदिवासी नेता अशोक टेकाम और कमल मर्सकोले का हैं। वैसे तो अशोक टेकाम सहकारी बैंक के अध्यक्ष और कमल मर्सकोले आदिवासी क्षेत्र बनने के बाद बरघाट से पहले विधायक हैं। लेकिन वास्तविकता तो यही हैं कि इन दोनों आदिवासी नेताओं के खिलाफ पुराने भाजपायी ही खोले हुये हैं। ऐसा ही कुछ हाल जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह का भी हैं। वे भी कांग्रेस में सांसद थे। कांग्रेस से भाजपा में आकर वे विधायक बने और उन्हें मन्त्री इसलिये बनाया गया हैं क्योंकि महाकौशल क्षेत्र में आदिवासी दिग्गज फग्गन सिंह कुलस्ते के कारण भाजपा के गिरते ग्राफ को आदिवासियों में थामना था। लेकिन उनके पिछले दौरे से ऐसा लगता हैं कि जिले में घोषित और अघोषित भाजपाइयों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं।अब यह आगे किस सीमा तक जायेगार्षोर्षो इस बारे में अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे भी कांग्रेस से भाजपा में गये आदिवासी नेताओं का हश्र अच्छा नहीं रहा हें चाहे वे स्व. भंवर सिंह पोर्ते रहें हो या अरविन्द नेताम हों या दिलीप सिंह भूरिया हों उन्हें कभी सत्ता के शीर्ष तक नहीं पहुचने दिया गया हैं।

क्रिकेट की पिच के साथ ही राजनीति में दिखा फिरकी गेन्दबाजी का कमाल -

अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। हुआ यूं कि नगर पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष राजिक अकील के खिलाफ राजनैतिक प्रतिशाोध के कारण फर्जी मुकदमें दर्ज करने का आरोप लगाते हुये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ कांग्रेसी सड़को पर उतरे और सभी के खिलाफ जमकर नारे बाजी भी की थी। जिसमें महेश मालू,हीराआसवानी,आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू,स हित कई कांग्रसी शामिल थे। लेकिन चन्द दिनों बाद ही संभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता के फायनल मैंच के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि राजेश त्रिवेदी और अध्यक्षता राजिक अकील तथा समापन समारोह में मुख्य अतिथि कलेक्टर मनोहर दुबे और अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार थे। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्षके रूप में राजकुमार पप्पू खुराना के सभी अतिथियों का माला पहना कर स्वागत भी किया। धन्य हैं आमन्त्रण देने और स्वीकार करने वाले तथा धन्य हैं माला पहनाने और पहनने वाले। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल।

भव्य थिगड़ोत्सव के बाद भी थिगड़े नहीं लगवा पाये हरवंश -

पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। इनमें सिवनी,बण्डोल,छपारा आदि बायपास रोउ़ बन जाने के बाद खराब हो चुके पराने मार्गों में थिगड़े लगाकर याने पेच वर्क के बाद सरफेस रिनीवल की बात कही गई थी जिसमें आधा पैसा ठेकेदार को भी लगाना था। सभी जगह आयोजन हुये और कांग्रेस नेताओं ने हरवंश सिंह और कमलनाथ का इस थिगड़ोत्सव में आभार व्यक्त किया। शहर वालों ने भी सोचा कि चलो फोर लेन का मामला जब तक कोर्ट में लटका हैं तब तक चलने में सुविधा तो रहेगी। वास्तविकता यह हैं कि लखनादौन से नागपुर तक जाने वाले फोरलेन मार्ग में जब से कानूनी विवाद छिड़ा हैं तब से ही इन सड़कों का रख रखाव विभाग ने बन्द कर दिया हैं। अब हालात यह हैं कि कोर्ट के आदेश के बिना भी काम तो पूरा रुक गया हैं लेकिन रखरखाव भी ना होने से सड़क में गìों के बजाय वाहन चालक गìों में सड़क ढूंढ़ते ढूंढ़ते परेशान हो रहे हैं। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। फोर लेन रोड़ में कोर्ट में नये नये अड़ंगें डलने के बाद थिगड़े भी ना लगने से लोग अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैंऔर आभार व्यक्त करने वाले कांग्रसी बगले झांकते देखे जा सकते हैं।



जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं जरूरत इसमें हो रहे भ्रष्टाचार में कमी लाने की जिसकी कोई सीमा नहीं है

जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की हैं जिसके लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होगें। भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों या वर्गों में पकड़ नही रहती उन जगहों पर भले ही तव्वजो मिल जाये लेकिन पकड़ बनते ही संघीय प्ष्ठ भूमि के नेताओं से उन्हें विस्थापित कर दिया जाता हैं। ऐसा ही कुछ जिले में स्व. महेश शुक्ला के साथ प्रदेश में स्व. पोर्ते,नेताम और भूरिया के साथ हुआ। अब लगता हैं कांग्रेस से भाजपा मे आये जिलें के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह के खिलाफ भी घोषित एवं अघोषित भाजपाइयों ने मोर्चा खोल दिया हैं। अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल। पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था।

जरूरत हैं भ्रष्टाचार में कमी लाने की-

जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिह ने जिला योजना समिति की बैठक में इस बात का विश्वास दिलाया हैं कि जिले के विकास में पैसे की कमी नहीं आने दी जायेगी। जिले के पालनहार कों भला अब यह कौन बताये कि जिले के विकास में वैसे भी पैसे की कोई कमी नहीं हैं। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से इतना पैसा आ रहा हैं कि खर्च करते नहीं बन रहा हैं और जो खर्च हो रहा हैं उसमें भी इतना अधिक भ्रष्टाचार हैं कि काम की गुणवत्ता तो जैसे कहीे गुम ही गई हैं। तारीफ की बात तो यह हैं कि भ्रष्टाचार के जो मामले प्रमाणित भी हो रहें हैं उनके खिलाफ प्रदेश सरकार से कार्यवाही में इतनी अधिक हीला हवाली हो रही हैं कि आज तक ाकेई भी भ्रष्टाचारी दंड़ित नहीं हो पाये हैं। इसीलिये मन्त्री जी जरूरत हैं तो भ्रष्टाचार में मी लाने की पैसे की तो कोई कमी हैं ही नहीं। और भ्रष्टाचार में कमी लाने के लिये आपको ही सख्त कदम उठाने होंगें क्योंकि हर भ्रष्टाचारी को सत्ता शिखर के किसी ना किसी गुबन्द का संरक्षण प्राप्त हैं।

दूसरे दलों से आये नेता भाजपा में खप नहीं पाते हैं-

भाजपा का कुछ मिजाज ही ऐसा हैं कि इसमें दूसरे दलों से आये नेता खप नहीं पाते हैं। वास्तव में भाजपा तो मुखोटा हैं इसमें होता वही हैं जो कि संघ चाहता हैं। जिन क्षेत्रों में पकड़ नहीं रहती उन क्षेत्रों में पकड़ बनाने के लिये भाजपा में भले ही दूसरे दलों से आये नेताओं को तव्वजो मिल जाये और उन्हें मन्त्री तक बना दिया जाये लेकिन जैसे ही वे क्षेत्र भाजपा मय हो जाते हैं तो ऐसे नेताओं को दर किनार कर संघीय पृष्ठ भूमि को बिठाल दिया जाता हैं। इसका उदाहरण तो सिवनी जिले में ही मौजूद हैं। कांग्रेस से भाजपा में गये स्व. पं. महेश शुक्ला को ना केवल भसापा ने जिले का अध्यक्ष बनाया ब्लकि सिवनी विधानसभा से 90 में टिकिट भी दिया जहां उन्होंने कांग्रेस के हरवंश सिंह को हराया और मन्त्री भी बने। दूसरी बार फिर वे 93 में सिवनी से लड़े और कांग्रेस के आशुतोष वर्मा को हराकर विधायक बने। सन 1977 की जनता आंधी में इस क्षेत्र से कांग्रेस जीती थी। लेकिन जैसे ही भाजपा को लगा कि अब इस क्षेत्र में पकड़बन गई तो संघी पृष्ठभूमि के नेरश दिवाकर को टिकिट देकर उन्हें दरकिनार कर दिया गया। ऐसा ही कुछ हाल कांग्रेस से भाजपा में गये प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब एवं आदिवासी नेता अशोक टेकाम और कमल मर्सकोले का हैं। वैसे तो अशोक टेकाम सहकारी बैंक के अध्यक्ष और कमल मर्सकोले आदिवासी क्षेत्र बनने के बाद बरघाट से पहले विधायक हैं। लेकिन वास्तविकता तो यही हैं कि इन दोनों आदिवासी नेताओं के खिलाफ पुराने भाजपायी ही खोले हुये हैं। ऐसा ही कुछ हाल जिले के प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह का भी हैं। वे भी कांग्रेस में सांसद थे। कांग्रेस से भाजपा में आकर वे विधायक बने और उन्हें मन्त्री इसलिये बनाया गया हैं क्योंकि महाकौशल क्षेत्र में आदिवासी दिग्गज फग्गन सिंह कुलस्ते के कारण भाजपा के गिरते ग्राफ को आदिवासियों में थामना था। लेकिन उनके पिछले दौरे से ऐसा लगता हैं कि जिले में घोषित और अघोषित भाजपाइयों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं।अब यह आगे किस सीमा तक जायेगार्षोर्षो इस बारे में अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे भी कांग्रेस से भाजपा में गये आदिवासी नेताओं का हश्र अच्छा नहीं रहा हें चाहे वे स्व. भंवर सिंह पोर्ते रहें हो या अरविन्द नेताम हों या दिलीप सिंह भूरिया हों उन्हें कभी सत्ता के शीर्ष तक नहीं पहुचने दिया गया हैं।

क्रिकेट की पिच के साथ ही राजनीति में दिखा फिरकी गेन्दबाजी का कमाल -

अभी तक तो लोगों ने फिरकी याने िस्पन गेन्दबाजी का कमाल क्रिकेट की पिच पर ही देखा होगा लेकिन शहर के दर्शकों ने इसका मजा राजनीति की पिच पर भी बीते दिनों देख लिया। हुआ यूं कि नगर पालिका के कांग्रेसी उपाध्यक्ष राजिक अकील के खिलाफ राजनैतिक प्रतिशाोध के कारण फर्जी मुकदमें दर्ज करने का आरोप लगाते हुये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और जिला एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ कांग्रेसी सड़को पर उतरे और सभी के खिलाफ जमकर नारे बाजी भी की थी। जिसमें महेश मालू,हीराआसवानी,आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू,स हित कई कांग्रसी शामिल थे। लेकिन चन्द दिनों बाद ही संभागीय क्रिकेट प्रतियोगिता के फायनल मैंच के उदघाटन समारोह में मुख्य अतिथि राजेश त्रिवेदी और अध्यक्षता राजिक अकील तथा समापन समारोह में मुख्य अतिथि कलेक्टर मनोहर दुबे और अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार थे। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्षके रूप में राजकुमार पप्पू खुराना के सभी अतिथियों का माला पहना कर स्वागत भी किया। धन्य हैं आमन्त्रण देने और स्वीकार करने वाले तथा धन्य हैं माला पहनाने और पहनने वाले। सड़कों पर विरोध में नारे और मंच पर माला से स्वागत है ना फिरकी गेन्दबाजी का कमाल।

भव्य थिगड़ोत्सव के बाद भी थिगड़े नहीं लगवा पाये हरवंश -

पिछले कुछ महीने पहले शहर के नये बस स्टेन्ड सहित जिले के कुछ स्थानों पर राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण द्वारा मन्त्री कमलनाथ के निर्देश पर आयोजन किये गये। उनमें प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह मुख्य अतिथि थे। आयोजनों से पहले उन्होनें मीडिया को कमलनाथ का पत्र एवं होने वाले कार्य के एस्टीमेट आदि की प्रति भी उपलब्ध करायी थी। इनमें सिवनी,बण्डोल,छपारा आदि बायपास रोउ़ बन जाने के बाद खराब हो चुके पराने मार्गों में थिगड़े लगाकर याने पेच वर्क के बाद सरफेस रिनीवल की बात कही गई थी जिसमें आधा पैसा ठेकेदार को भी लगाना था। सभी जगह आयोजन हुये और कांग्रेस नेताओं ने हरवंश सिंह और कमलनाथ का इस थिगड़ोत्सव में आभार व्यक्त किया। शहर वालों ने भी सोचा कि चलो फोर लेन का मामला जब तक कोर्ट में लटका हैं तब तक चलने में सुविधा तो रहेगी। वास्तविकता यह हैं कि लखनादौन से नागपुर तक जाने वाले फोरलेन मार्ग में जब से कानूनी विवाद छिड़ा हैं तब से ही इन सड़कों का रख रखाव विभाग ने बन्द कर दिया हैं। अब हालात यह हैं कि कोर्ट के आदेश के बिना भी काम तो पूरा रुक गया हैं लेकिन रखरखाव भी ना होने से सड़क में गìों के बजाय वाहन चालक गìों में सड़क ढूंढ़ते ढूंढ़ते परेशान हो रहे हैं। लेकिन इस भव्य आयोजन के बाद थिगड़े भी ना लगने से हरवंश सिंह मजाक का विषय बन गयें हैं जिन्होंने इन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। फोर लेन रोड़ में कोर्ट में नये नये अड़ंगें डलने के बाद थिगड़े भी ना लगने से लोग अपने आप को ठगा हुआ सा महसूस कर रहें हैंऔर आभार व्यक्त करने वाले कांग्रसी बगले झांकते देखे जा सकते हैं।





Tuesday, November 2, 2010


दिवाली पर ऐसा कुछ करने का संकल्प ले जा ेराम राज की ओर ले जाये

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व हैं दीपावली। अंधकार से आशय उस अंधेरे से नहीं हैं जो कि बिजली का बटन दबाते ही टयूब लाइट की रोशनी से समाप्त हो जाता हैं और ना ही उजाले का यह आशय हैं जो कि टयूब लाइट से निकलने वाला प्रकाश होता हैं। अंधकार से आशयसामाजिक बुराइयों से हैं और प्रकाश का आशय हैं सदगुण।

आज से 63 साल पहले हमारा देश गुलामी के अंधेरे से मुक्त हो गया हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि इन सालों में अंधकार तो गहन होता गया हैं लेकिन प्रकाश की रोशनी कमजोर पड़ती जा रही हैं। आज सामाजिक बुराइयों को साधन बनाकर खुद को इतना अधिक प्रकाशवान कर लेते हैं कि वे समाज के आदर्श बन जाते हैं और उनका अनुसरण करने में लोगों को संकोच तक नहीं होता हैं। भ्रष्टाचार समाज में शिष्टाचार का रूप लेता जा रहा हैं। अत्याचार पर रोक लगाने का जिन कंधों पर दायित्व हैं वे परदे के पीछे उनके संरक्षक की भूमिका में दिखते हैं। अधिकार संपन्न लोग अपनी सनक में कुछ भी करते देखे जा सकते हैंं। इन अंधकारों में गुणव्यक्ति कहीं खो गयाहैं जिसे देश में कभी गुणों के कारण सम्मान मिला करता था।

रावण बुराइयों और अत्याचार का प्रतीक था जिसका सदगुणों के प्रतीक राम ने वध यिा था और ऋषि मुनियों तथा मानव मात्र को अत्याचार से छुटकारा दिलया था। यह विजय प्राप्त करके राम जब अयोध्या वापस आये थे तब अयोध्यावासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था जिसे हम आज भी दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। दीप जलाकर,फटाके फोड़ कर और मां लक्ष्मी की पूजन करने मात्र से दिवाली मनाने का उद्देश्य पूरा नहीं होता हैं। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि जिन आर्दशों और सदगुणों के माध्यम से राम ने रावण का वध किया था उन आदशोZं को अंगीकार करें और सामाजिक बुराइयों के रूप स्थापित होते जा रहे रावण राज के अन्त की दिशा में अपने कदम बढ़ायें। अन्यथा हर साल रावण का पुतला तो हम जलाते रहेंगें लेकिन आसुरी शक्तियां देश में फलती फूलती रहेंगी और राम राज का सपनी देखने वाले इस भारत वर्ष में राम ना जाने कहां गुम हो जायेंगें।

इस दिवाली पर हम ऐसा कुछ कर गुजरने का संकल्प ले जो कि हमें राम राज की ओर ले जाये यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं।

दिवाली पर ऐसा कुछ करने का संकल्प ले जा राम राज की ओर ले जाये

अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व हैं दीपावली। अंधकार से आशय उस अंधेरे से नहीं हैं जो कि बिजली का बटन दबाते ही टयूब लाइट की रोशनी से समाप्त हो जाता हैं और ना ही उजाले का यह आशय हैं जो कि टयूब लाइट से निकलने वाला प्रकाश होता हैं। अंधकार से आशयसामाजिक बुराइयों से हैं और प्रकाश का आशय हैं सदगुण।

आज से 63 साल पहले हमारा देश गुलामी के अंधेरे से मुक्त हो गया हैं। ऐसा प्रतीत होता हैं कि इन सालों में अंधकार तो गहन होता गया हैं लेकिन प्रकाश की रोशनी कमजोर पड़ती जा रही हैं। आज सामाजिक बुराइयों को साधन बनाकर खुद को इतना अधिक प्रकाशवान कर लेते हैं कि वे समाज के आदर्श बन जाते हैं और उनका अनुसरण करने में लोगों को संकोच तक नहीं होता हैं। भ्रष्टाचार समाज में शिष्टाचार का रूप लेता जा रहा हैं। अत्याचार पर रोक लगाने का जिन कंधों पर दायित्व हैं वे परदे के पीछे उनके संरक्षक की भूमिका में दिखते हैं। अधिकार संपन्न लोग अपनी सनक में कुछ भी करते देखे जा सकते हैंं। इन अंधकारों में गुणव्यक्ति कहीं खो गयाहैं जिसे देश में कभी गुणों के कारण सम्मान मिला करता था।

रावण बुराइयों और अत्याचार का प्रतीक था जिसका सदगुणों के प्रतीक राम ने वध यिा था और ऋषि मुनियों तथा मानव मात्र को अत्याचार से छुटकारा दिलया था। यह विजय प्राप्त करके राम जब अयोध्या वापस आये थे तब अयोध्यावासियों ने घी के दिये जलाकर उनका स्वागत किया था जिसे हम आज भी दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। दीप जलाकर,फटाके फोड़ कर और मां लक्ष्मी की पूजन करने मात्र से दिवाली मनाने का उद्देश्य पूरा नहीं होता हैं। आज आवश्यकता इस बात की हैं कि जिन आर्दशों और सदगुणों के माध्यम से राम ने रावण का वध किया था उन आदशोZं को अंगीकार करें और सामाजिक बुराइयों के रूप स्थापित होते जा रहे रावण राज के अन्त की दिशा में अपने कदम बढ़ायें। अन्यथा हर साल रावण का पुतला तो हम जलाते रहेंगें लेकिन आसुरी शक्तियां देश में फलती फूलती रहेंगी और राम राज का सपनी देखने वाले इस भारत वर्ष में राम ना जाने कहां गुम हो जायेंगें।

इस दिवाली पर हम ऐसा कुछ कर गुजरने का संकल्प ले जो कि हमें राम राज की ओर ले जाये यही दीपावली पर हमारी शुभकामनायें हैं।