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Tuesday, August 23, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

महिला मोर्चे की प्रदेशाध्यक्ष नीता पटेरिया के जिले में भ्रष्टाचार की आरोपी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चित











अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली में भारी तादाद में युवकों छात्रों के अलावा जिले में अन्ना की कमान संभाहलने वाले राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल के साथ भाजपा नेता नरेन्द्र ठाकुर एवं प्रवीण भारद्वाज सहित कई भाजपा कार्यकर्त्ता भी शामिल थे। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है। शिवराज के उपवास स्थगित होने की याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जाखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती। मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी थीै या फिर कुछ और? इसे लेकर स्तीफा वापस होने के बाद भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं।मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी हैं। अन्ना के आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके।









अन्ना के समर्थन में निकली विशाल रैली-पूरे देश में इस वक्त अन्ना हजारे और लोकपाल बिल को लेकर सड़क से लेकर सदन तक तक धूम मची हुयी है। जिले में भी अन्ना की गिरफ्तारी से अभी तक प्रर्दशन और अनशन जारी हैं। अन्ना समर्थकों द्वारा 16 अगस्त को चार बजे शाम को गांधी चौक से विशाल रैली निकाली जिसमें युवकों छात्रों की भागीदारी भारी तादाद में रही। इस रैली में अन्ना समर्थकों की कमान संभाहलने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता और नरेन्द्र अग्रवाल प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा इस रैली में भाजपा नेता प्रवीण भारद्वाज, नरेन्द्र ठाकुर के साथ भाजपा के कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे। वकीलों ने मोटर सायकिल रैली के रूप में भागीदारी की थी।









र्पावती की उपस्थिति में अन्ना के समर्थन में भाजपा का धरना चर्चित-इसके बाद जिला भाजपा ने भी अन्ना की गिरफ्तारी के विरोध में एक दिवसीय धरना दिया।यह धरना जिला कलेक्टरेट के प्रतिबंधित क्षेत्र में हुआ जिसे लेकर ही भाजपा आरोपों के कठघरे में आ गयी हैं। इस धरने में जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन के साथ ही पूर्व मंत्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन,विधायक शशि ठाकुर,अशोक टेकाम सहित भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्त्ता मौजूद थे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चित उपस्थिति पूर्व पालिका अध्यक्ष और महिला मोर्चे की अध्यक्ष पार्वती जंघेला की रही जिन्हें प्रदेश की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाकर उनसे तीन लाख रुपये की रिकवरी उवं उन्हें पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिये अयाग्य घोषित किया था। उल्लेखनीय है कि दुगनी लागत में घटिया सड़कों के मामले की शिकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने की थी जिसे चार साल तक सरकार ने लटकायें रखा लेकिन पुख्ता प्रमाणों के चलते अंततः कार्यवाही करनी ही पड़ी थी। प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष विधायक नीता पटेरिया के गृह जिले में भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने के बाद भी पार्वती जंघेला को पद पर बनाये रखने वाली भाजपा का अन्ना के समर्थन में धरना चर्चा का विषय बना हुआ हैं। विधायक नीता पटेरिया और और कमल मर्सकोले की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी है।









धरने में उपस्थिति को लेकर नरेश और हरवंश की तुलना हो रही है -भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन के समर्थन में जिला भाजपा द्वारा दिये गये धरने में हाल ही में केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कर लाल बत्तीधारी बने नरेश दिवाकर की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। जबकि विस उपाध्यक्ष के संवैधानिक पद पर राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त करने वाले हरवंश सिंह अपनी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश सरकार के विरोध में होने वाले धरना प्रर्दशनों में बेधड़क शामिल होते हैं। हालांकि नियम तो यही कहता हैं कि मंत्री या दर्जा प्राप्त मंत्री किसी भी सरकार विरोधी आंदोलन या धरने में शामिल नहीं हो सकते। लेकिन आजकल इस नियम पर कड़ाई से पालन कोई नहीं करता हैं। यदि संवैधानिक पद पर बैठे हरवंश के आंदोलनों पर जब जिला भाजपा चुप रहती हैं तो भला नरेश के शामिल होने पर जिला इंका कोई आपत्ति कैसे कर सकती हैं। भाजपाइयों के बीच में यह चर्चा भी दबी लुबान चल रही हैं कि शायद नरेश जी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का वह उपवास प्रकरण याद आ गया था जिसमें राजभवन से उपवास स्थल पर पहुंचते ही शिवराज ने मंचासीन किसी भी भाजपा नेता को बताये बिना माइक पर अपने उपवास के समाप्त होने की घोषणा कर दी थी। यहां यह उल्लेखनीय हैं राजभवन में मुख्यमंत्री को साफ साफ बता दिया गया था कि यदि आप उपवास पर बैठेंगें तो आपकी कुर्सी जा सकती हैं। शायद यह याद आते ही नरेश ने बमुश्किल हासिल हुयी लाल बत्ती को खतरे में डालने का जोखिम नहीं उठाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ होने वाले धरने से परहेज करना ही उचित समझा नहीं तो उनकी उपस्थिति को लेकर भी व्यंग के तीर चलना कोई बड़ी बात नहीं होती।









श्रीकांत के स्तीफे के कारणों की लेकर शुरू हुयी अटकलें समाप्त-भाजपा के मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल का त्यागपत्र इन दिनों सियासी हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ हैं। उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देते हुये एक आम कार्यकर्त्ता के रूप में पार्टी की सेवा करते रहने की बात कही हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि आज से लगभग 11 साल पहले तत्कालीन जिला भाजपा अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने उन्हें मीडिया प्रभारी बनाया था। उसके बाद चक्रेश जैन, प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब, वेदसिंह ठाकुर,सुदर्शन बाझल के समय भी वे अपने पद बने रहे थे। जिला भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी उन्हें इसी पद पर बनाये रखा था। उनके कार्यकाल के एक साल बाद मीडिया प्रभारी के पद से श्रीकांत ने स्तीफा क्यों दिया था? इसे लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह की चर्चायें चल रहीं थीं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि हाल ही में सिवनी के पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को सरकार ने लाल बत्ती देकर महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया हैं। मीडिया प्रभारी के स्तीफे के पीछे भाजपा की गुटबाजी है या फिर कुछ और? कुछ भाजपायी तो यह भी कहते देखे जा रहें हैं कि श्रीकांत अग्रवाल को हटाने की योजना बन चुकी थी इसलिये उन्होंने हटाये जाने के बजाय खुद ही हट जाना बेहतर समझा और इसलिये त्यागपत्र दे दिया था। इसे लेकर अलग अलग लोंगों की अलग अलग मान्यतायें हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि भाजपा नेताओं द्वारा उन्हें मनाने का प्रयास किया जा रहा था। और अंततः उनका स्तीफा वापस हो गया हैं। इसी दौरान मीडिया प्रभारी बनने के लिये इच्छुक नेताओं ने अपने अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करना प्रारंभ कर दी थी जिन्हें अंत में निराशा ही हाथ लगी। लागों में इस स्तीफे के कारणों को लेकर अभी भी जिज्ञासा बनी हुयी हैं।









अन्ना के आंदोलन को हाई जैक करने की भाजपायी कोशिश प्रारंभ?-संघ और भाजपा के चिंतक अन्ना हजारे के आंदोलन को हाई जैक करने की योजना बनाने में जुट गये हैं। इनका यह मानना हैं कि अन्ना के आंदोलन से कांग्रेस को नुकसान तो हो रहा हें लेकिन अन्ना चूंकि चुनावी राजनीति से दूर रहने की बात कह रहें हें इसलिये चुनावी राजनीति में इस नुकसान का लाभ कोई उठाने की स्थिति में नहीं हैं। संघ और भाजपा के रणनीतिकारों ने उज्जैन में तीन दिन के मंथन शिविर में इस ऐलेन्डे पर गुप्त चर्चा की हैं। इस आंदोलन के मूल मूद्दे भ्रंष्टाचार पर ऐसा आंदोलन चलाने की योजना बनायी गयी हैं जिसका राजनैतिक लाभ आगामी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिल सके। परदे के पीछे रहकर अन्ना को समर्थन देने वाली भाजपा और संघ अब खुलकर राजनैतिक लाभ लेने के लिये खुद कमान संभाहलने की योजना बना रहें हैं।







Saturday, August 13, 2011

Artical On Independance Day Of India

भ्रष्टाचार के मामले में कानून के दायरे के बजाए लागू करने के कारगर तरीके की चिता जरूरी है

आज का दिन भारत वर्ष की स्वतंत्रता का दिन हैं। सैकड़ों सालों की गुलामी और हजारों लोगों की शहादत के बाद देश को आजादी मिली थी। गांधी ने आजाद देश की एक कल्पना की थी जिसमें आजादी का लाभ समाज के अंतिम छोर के उस व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक था जिसे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत हैं। आज हम आजादी की 64 वीं सालगिरह मना रहें है। हम गांधी जी के सपनों के भारत हिसाब से देश का आकलन करें तो हम पाते हैं कि गांधीं के अंतिम छोर के आदमी की बात तो सभी राजनैतिक दल करने लगें हैं लेकिन वास्तव में आम आदमी की चिंता नेताओं को नहीं हैं। समाज के पिछड़े और दलित आदिवासी वर्ग के हितों की बात करने वाले ये नेता उनके विकास की बात तो छोड़ो उनके मान सम्मान तक को अपने अपने राजनैतिक हित साधने का मुद्दा बनाने में भी संकोच नहीं करते हैं। राजनीति समाज के हर हिस्से में इस कदर हावी हो चुकी है कि सभी समाजसेवी कहलाने वाले भी अपने आप को राजनीति से परे नहीं रख पा रहें हैं। आज हर एक की यह फितरत हो गई है कि आम आदमी जिन चीजों से प्रताडित हो उसे मुद्दा बनाओ और अपनी रोटी सेकों। आज ऐसा ही कुछ देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर हो रहा हैं। लोकपाल बिल के मामले को लेकर तरह तरह के तर्क वितर्क चल रहें हैं। प्रधानमंत्री, न्यायाधीश,संसद में सांसदों का आचरण और समूचे शासकीय अमले को इसके दायरे में लाने की बात की जा रही हैं।़ इसका आशय क्या यह नहीं है कि ऐसी मांग करने वालों का यह मानना हैं कि देश की विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका सभी भ्रष्टाचार के मामले में संदिग्ध हैंर्षोर्षो और यदि सच्चायी यही हैं तो फिर इस देश में किसी दूध से धुले लोकपाल को कहां तलाश किया जाएगार्षोर्षो आज भी देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कई कानून बने हुए हैं। लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई कारगर रोक नहीं लग पा रही हैं। देखा जाए तो आज जरूरत इस बात की है कि इन कानूनोेंं को लागू करने वाली ऐजेसिंया पहले तो खुद ईमानदार हों और फिर भ्रष्टाचारी को दंड़ देने के कारगर उपाय करें। भ्रष्टाचार की शिकायत यदि भ्रष्टाचार से ही साबित नहीं हो पाएगी तो कोई भी कानून भला कहां और कैसे भ्रष्टाचार को रोक पाएगार्षोर्षो इसलिए किसी भी कानून के दायरे की चिंता करने के बजाए आज चिंता इस बात की करना जरूरी है कि इन कानूनों को कारगर तरीके से लागू करने के उपाय किए जाए और भ्रष्टाचारियों पर सख्ती से कार्यवाही करने का संकल्प लिया जाए वरना हमेशा ही ऐसे आंदोलन होते रहेगें और मुद्दे जस के तस रह जाएंगें।

Sunday, July 10, 2011

Political Dairy of Seoni Dist- Of M.P.

जैन नेताओं को उपकृत करने की बात पता चलते ही नरेश को रोकने नीता ने भोेपाल में डेरा डालकर क्या पत्ता कटवा दिया?











हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने बाद घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षोकांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं।सासंद के.डी.देशमुख सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।









नरेश को रोकने नीता डटी रहीं भोपाल में -विधायक नीता पटेरिया प्रदेश के दौरे के नाम पर प्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीं रहीं। लोगों को अंदाज नहीं हो पाया कि वे ऐसा क्यों कर रहीं हैंर्षोर्षो हाल ही में प्रदेश योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में जब बाबूलाल जैन की नियुक्ति की घोषणा हुयी तब राज खुला कि मैडम वहां क्यों डटीं थींर्षोर्षो बताया जाता हैं कि नीता जी को यह पता चल गया था कि कुछ जैन नेता लाल बत्ती से नवाजे जाने वालें हैं। यह मालूम होते ही उन्होंने भोपाल में डेरा डाल कर पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को रोकने की रणनीति बना डाली। सिवनी के नीता और नरेश दोनों ही लाल बत्ती के प्रबल दावेदार हैं। नीता पूर्व सांसद हैं और एक मात्र वे ही विधायक बने सांसदोंं में बचीं हैं जिन्हें मंत्री नहीं बनाया गया हैं।दूसरी ओर नरेश दिवाकर ऐसेहैं जिनकी टिकिट काट कर नीता को दी गई थी और पार्टी ने नीता को जीतने के बाद से उन्हें उपकृत नहीं किया हैं। लेकिन दोनो ही नेताओं यह होड़ लगी हैं कि पहले लाल बत्ती उन्हें मिले वरना बाद में दूसरे को मिल जाय इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। इसलिए मौका आते ही दोनो एक दूसरे के खिलाफ जुट जातें हैं और नतीजा सिफर ही निकलता हैं।योजना आयोग में बाबूलाल जैन की नियुक्ति से अब नरेश की राह और मुश्किल हो जाएगी क्योंकि पहले भी काफी जैन नेताओं को भाजपा लाल बत्ती से नवाज चुकी हैं।









कितने परिपक्व साबित होगें हीरा आसवानी? -निर्वाचन के नौ महीने बाद आखिर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में हीरा आसवानी की ताजपोशी हो ही गई। इस दौरान वर्तमान और भावी अध्यक्ष के बीच जैसी तना तनी चली वह किसी से छिपी नहीं हैं। कार्यक्रमों का कौन इंतजाम करें और कौन अध्यक्ष बन कर बैठा रहें? यही खेल इन नौ महीनों में चलता रहा हैं।जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के अत्यंत विश्वास पात्रों में गिने जाने वाले इंका नेताओं में हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने से यह माना जा रहा हैं कि भाजपा का नेतृत्व युवा सुजीत जैन के हाथों में सौंपे जाने के बाद युवा को ही कांग्रेस की कमान सौंपने के उद्देश्य से यह नियुक्ति की गई हैं। वैसे तो हीरा आसवानी को संगठन का लंबा अनुभव हैं और वे हरवंश समर्थक नेताओं की तरह अन्य इंका नेताओं में अछूत भी नहीं माने जाते हैं। लेकिन फिर भी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हरवंश सिंह से उन्हें काम करने में कितनी छूट मिल पाती हैं। यदि जितनी चाबी भरी राम ने की तर्ज पर ही काम चला तो पिछले अध्यक्ष महेश मालू के कार्यकाल से इनका कार्यकाल कुछ अलग नहीं होगा। वैसे यह माना जाता हैं कि नौ महीने तके गर्भस्थ रहने वाला शिशु पूरी तरह परिपक्व हो जाता हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि निर्वाचन के पूरे नौ महीने घोषित होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी कितने परिपक्व साबित होते हैंर्षोर्षो और कब अपने महामंत्रियों की घोषणा कर पाते हैं क्यों कि सुरेश पचौरी के कार्यकाल में ही घोषित हो चुके ब्लाक इंका अध्यक्ष अब तक अपने महामंत्रियों की घोषणा नहीं कर पाएं हैं?









विज्ञापन में छपी एक फोटो इंकाइयों में चर्चित- नव नियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी के आभार और बधायी के विज्ञापनों में एक विज्ञापन इंकाइयों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ हैं। कांग्रेस की राजनीति में गुमनामी के दौर से गुजरने वाले नेता तो बहुत सारे हैं लेकिन उनमें से एक फोटो एक विज्ञापन में आने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। कुछ इंका नेताओं का यह दावा हैं कि एक इंका नेता ने अपनी फोटो का मोह त्याग कर ये कारनामा कर दिखाया हैं। वैसे हमेशा से सुर्खियों रहने वाले इंका नेताओं में ये भी एक माने जाते थे लेकिन लंबे समय से गुमनामी में रहना उनही नियति बन चुकी हैं? या किसी सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैर्षोर्षो इसे लेकर लोगों का अलग अलग मत हैं। वास्तविकता चाहे जो भी हो लेकिन हीरा आसवानी के अध्यक्ष बनने के विज्ञापनों ने चर्चाओं का एक मुद्दा तो दे ही दिया हैं।









इशारों को अगर समझो राज को राज रहने दो-सासंद के.डी.देशमुख लगभग हर सोमवार को सिवनी आते हैं और कभी स्कूलों का तो कभी अस्पताल का निरीक्षण करके जब भी कलेक्टर और एस.पी. से चर्चा करते हैं तो पूरे जिले में गांव गांव में बिक रही अवैध शराब की बिक्री को रोकने की बात कहने से अपने आप को नहीं रोक पा रहें हैं। निर्माण कार्यों में भी भ्रष्टाचार की बात वे कभी कभी करते हैं लेकिन अवैध शराब के धंधें की चिंता हैं कि उनका पिंड़ ही नहीं छोड़ रही हैं। भाजपायी हल्कों में इस बात को लेकर बहुत सी चर्चाएं जारी हैं।कुछ भाजपा नेता तो यह तक कहते पाए जा रहें हैं कि या तो शराब ठेकेदार और आबकारी विभाग भाऊ का इशारा ही नहीं समझ पा रहा हैं या फिर समझ कर भी जानबूझ कर अनजान बना हुआ हैं? कुछ नेता तो गाने के ये बोल बोल कर मजा ले रहें हैं कि Þइशारों को अगर समझो,राज को राज रहने दोÞ। अब इसमें राज क्या हैं और इशारा क्या है? येभाजपा नेता ही जाने लेकिन ऐसी चर्चाएं किसी भी जनप्रतिनिधि की सेहत के लिए अच्छभ् नहीं होतीं हैं।









सुरेंद्र की जीत से गर्माएगी भाजपायी गुटबंदी-अभिभाषक संघ के चुनाव में सुरेंद्र शुक्ला के अध्यक्ष चुने जाने से भाजपा की स्थानीय गुटबंदी में तेजी आने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। सिवनी के दो जन प्रतिनिधियों के बीच खिंची तलवारें तो जगजाहिर ही हैं। विधायक नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी कई मौकों पर एक दूसरे के सामने खड़े नज़र आए हैं। भाजपायी राजनीति के जानकारों का मानना हैं कि पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला के भतीजे सुरेंद्र शुक्ला की इस जीत को नीता पटेरिया भुनाएंगी और राजेश त्रिवेदी के सामने एक ब्राम्हण नेता के रूप में उनका उपयोग करेंगीं।यहां यह उल्लेखनीय हैं कि राजेश त्रिवेदी भी आगे विधानसभा की टिकिट के दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। यदि नीता पटेरिया दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर जाना चाहेंगी तो ऐसी परिस्थिति में नीता विकल्प के रूप में सुरेंद्र शुक्ला का नाम अड़ा सकतीं हैं। यहां महेश शुक्ला का नाम उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता हैं। राजेश के अरविंद मैनन से संबंध उनके दावे को पुख्ता कर सकते हैं। ऐसी हालात में जब दो ब्राम्हण नेता आमने सामने होंगें तो इस खींचातानी में विकल्प के रूप में नीता पटेरिया अपने विश्वस्त ब्राम्हण नेता प्रेम तिवारी को सामने कर निर्णायक स्थिति बना सकतीं हैं। यहां यह भी दावा किया जा रहा हैं कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र में ब्राम्हणों की निर्णायक संख्या को देखते हुए अगली टिकिट भी ब्राम्हण नेता को ही देना भाजपा की मजबूरी होगी। इसका कारण यह बताया जा रहा हैं कि पूरे जिले के ब्राम्हणों ने नीताको जिता कर यह सोचा था कि भाजपा उन्हें मंत्री बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद यदि सिवनी की टिकिट भी ब्राम्हण को देने के बजाय किसी और को दी गई तो जिले भर के ब्राम्हण मतदाताओं की नाराजगी भाजपा को भुगतना पड़ सकता हैं। हालांकि यह सब कुछ बहुत दूर की बातें हैं लेकिन दूर की कौड़ी चलने वाले इन सारे समीकरणों पर पैनी नज़र रखें हुए हैं।







Monday, July 4, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

क्या राहुल और भूरिया की धार बोथली साबित करने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत जबेरा में हराया गया कांग्रेस को?

विधायक नीता पटेरिया पर भाजपा के ही अन्य जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के आरोप पार्टी में ही चस्पा हो रहें हैं। बीते दिनों जनपद पंचायत सिवनी की अध्यक्ष किरण अवधिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके नीता पटेरिया को कठघरे में खड़ा कर भाजपा से त्यागपत्र दे दिया हैं। उनका आरोप हैं कि नीता की ही शह पर सी.ओ.उन्हें ना केवल नकार रहीं हैं वरन अपमानित भी कर रहीं हैं। जबेरा में इंका की हार के बारे में राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि अजय सिंह और भूरिया को बोथला साबित करने के लिए तथा इंका महासचिव दिग्विजय सिंह पर वार करने के लिए प्रदेश के क्षत्रपों को हथियार मुहैया कराने के लिए यह सब एक सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैं।पिछले लंबे समय से इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह स्वयं प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की जुगाड़ में लगे थे। लेकिन उनके दागदार इतिहास के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी।केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा के प्रभारी बनने के बाद प्रदेश के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने अंदाज में दौरे चालू कर दिए हैं। अपने कार्यक्रमों में वे ना केवल अधिकारियों को चमका रहें हैं वरन इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के समाने यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि ठीक से काम नहीं करोगे तो तुम्हें कोई बचा भी नहीं पाएगा।

नीता पर उपेक्षा का आरोप लगा भाजपा छोड़ी जनपद अध्यक्ष किरण ने -विधायक नीता पटेरिया पर भाजपा के ही अन्य जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा करने के आरोप पार्टी में ही चस्पा हो रहें हैं। बीते दिनों जनपद पंचायत सिवनी की अध्यक्ष किरण अवधिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके नीता पटेरिया को कठघरे में खड़ा कर दिया हैं। उनका आरोप हैं कि नीता की ही शह पर सी.ओ.उन्हें ना केवल नकार रहीं हैं वरन अपमानित भी कर रहीं है और उनके द्वारा शिकायत करने के बाद भी भाजपा की ही सरकार में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जनपद अध्यक्ष ने अपने पति वरिष्ठ भाजपा नेता किशोरी लाल अवधिया ने भाजपा की सदस्यता से स्तीफा देने की घोषणा कर दी हैं। यहां यह उल्लेखनीय है केवलारी विस क्षेत्र के गा्रम कान्हीवाड़ा की रहने वाली किरण अवधिया की मारक क्षमता सिवनी विसक्षेत्र में नहीं हें इसलिए ही शायद वे विधायक नीता पटेरिया द्वारा उपेक्षित की जा रहीं थीं। हालांकि अभी उन्होंने किसी पार्टी की सदस्यता नहीं ली हैं लेकिन ऐसे कयास लगाए जा रहें हैं कि अब शायद वे हरवंश सिंह के प्रयासों से इंका की सदस्यता ले लेंगी।यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं जनपद चुनाव के दौरान किरण ने कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी और इंका के कुछ हरवंश विरोधियों ने उन्हें जिता दिया था। वे तत्कालीन प्रदेश इंका अध्यक्ष सुरेश पचौरी के कार्यक्रम में शामिल भी हुयीं थीं लेकिन ना तो उन्हें कांग्रेस में तव्वजो मिली और ना ही उन्होंने भाजपा का दामन छोड़ा था। उनके पति किशोरीलाल अवधिया क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपायी नेता माने जाते हैं। उसके बाद भी उनकी पत्नी की उपेक्षा ने उन्हें भी इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने भी भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया हैं। भाजपा विधायक नीता पटेरिया पर इस आरोप के बाद छपारा क्षेत्र के दो जनप्रतिनिधियों ने भी उपेक्षा का आरोप चस्पा कर दिया हैं। नप अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के समर्थक भी उनके हो रहे विरोध के पीछे विधायक नीता पटेरिया की भूमिका ही बताते हैं। इस सबको देखकर यही कहा जा सकता हैं किम यह कहावत सौ फीसदी सही हैं कि राज के साथ राजरोग आते ही हैं।

जबेरा में इंका की हार क्या सोची समझी रणनीति थी?-इंका विधायक रत्नेश सालोमन के निधन से रिक्त हुयी जबेरा विधानसभा सीट से उनकी बेटी डॉ. तान्या सालोमन की उप चुनाव में भारी हार से इंका की राजनीति में बवाल आ गया हैं। जहां एक ओर प्रदेश स्तर पर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और चुनाव संचालक हरवंश को घेरने के प्रयास किए जा रहें हैं तो वहीं दूसरी ओर इस हार को इस रूप में भी देखा जा रहा हैं कुछ अति महत्वाकांक्षी इंका नेताओं ने सोची समझी रणनीति के तहत इंका की नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की धार कमजोर करने के लिए यह षड़यंत्र रच कर सफलता हासिल कर ली हैं। पिछले लंबे समय से इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह स्वयं प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की जुगाड़ में लगे थे। लेकिन उनके दागदार इतिहास के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। भूरिया और अजय सिंह के समय भी ये दौड़ में थे और कुछ पाना तो दूर जो विस उपाध्यक्ष का पद उनके पास हैं वह भी दांव में लग गया था। अजय सिंह की नियुक्ति और प्रियव्रत सिंह के प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए जाने के बाद हरवंश सिंह का पद दांव में लगा हुआ हैं। अपने लाभ के लिए पार्टी से गद्दारी और भाजपा से सांठ गांठ करना उनका शगल बन चुका हैं। अतीत के ऐसे कई उदाहरणों की समय समयपर इंका नेताओं ने आला कमान को शिकायतें भी भेजी थीं लेकिन इनके प्रभाव के चलते वे सब ठंड़े बस्ते में चली जाती हैं। प्रदेश का कोई ना कोई बड़ा इंका नेता उन्हें बचा लेता हैं। हरवंश के इन्हीं कारनामों के चलते उनके गृह जिले सिवनी में लोकसभा दो बार से,सिवनी और बरघाट विस पिछले पांच चुनावों से, लखनादौन दो चुनावों से और सिवनी नगर पालिका अध्यक्ष दो चुनावों स कांग्रेस हारती जा रही हैं। जिले की एक मात्र केवलारी विस क्षेत्र से हरवंश सिंह तो पिछले चार चुनावों से विधायक बनते आ रहें हैं लेकिन उनके क्षेत्र से चंद महीनों बाद कांग्रेस लोकसभा चुनाव में हर बार हार जाती हैं। इंका नेता आशुतोष वर्मा ने इस बारे में प्रमाणों के साथ कई बार आलाकमान के सामने अपना रोना रोया लेकिन हरवंश सिंह कुछ भुगतने बजाय हर बार कुछ ना कुछ पाते ही रहे। जबेरा चुनाव में कांग्रेस की हार से हरवंश सिंह के राजदार कांग्रेसी नेता बहुत खुश दिखायी दे रहे हैं और यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि हरवंश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया जाता तो कांग्रेस को ये दिन नहीं देखने पड़ते। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि अजय सिंह और भूरिया को बोथला साबित करने के लिए तथा इंका महासचिव दिग्विजय सिंह पर वार करने के लिए प्रदेश के क्षत्रपों को हथियार मुहैया कराने के लिए यह सब एक सोची समझी रणनीति का एक हिस्सा हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि अजय सिंह ने साफ शब्दों में भोपाल की स्वागत रैली में मंच से यह तक कह दिया था कि हम प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो बना लेंगें अगर हरवंश सिह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मदद करना बंद कर दें। कुछ इंकाइयों का तो यह भी मानना हैं कि हरवंश सिंह ने अपना पद बचाने लिए जानबूझ कर कांग्रेस को हार के गर्त में गिराया हैं ताकि अजय सिंह और भूरिया उन पर स्तीफा देने के लिए कुछ कहने के लायक ही ना रह जाए और उनका पद बच जाए। हरवंश सिंह को चुनाव संचालक बनाने के फैसले को कुछ विश्लेषक आत्मघाती निर्णय मान रहें हैं। दिग्गी राजा से हरवंश सिंह की पिछली निकटता को आधार बनाकर प्रदेश के कुछ इंकाई क्षत्रप दिग्गी राजा पर आक्रमण करने की रणनीति बनाने में भी जुट गए हैं। वैसे पिछले दिनों कांग्रेस आला कमान द्वारा बनायी गईं तीन महत्वपूर्ण समितियोंमें हरवंश सिंह को शामिल ना किए जाने को लेकर भी तरह तरह की अटकलें जारी हैं जबकि उनसे कद में बौने कई इंका नेताओं को इनमें शामिल किया गया हैं।

गौरी ने कमाल दिखाना शुरू किया केवलारी में-केवलारी विस क्षेत्र के भाजपा के प्रभारी बनने के बाद प्रदेश के मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने अपने अंदाज में दौरे चालू कर दिए हैं। अपने कार्यक्रमों में वे ना केवल अधिकारियों को चमका रहें हैं वरन इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के समाने यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि यदि ठीक से काम नहीं करोगे तो तुम्हें कोई बचा भी नहीं पाएगा। मंच से हरवंश सिंह पर तीखे प्रहार करके भाजपा कार्यकत्ताZओं की तालियां बटोरने में भी कामयाब रहें हैं। हरवंश सिंह और और गौरीशंकर बिसेन की राजनैतिक शैली एक जैसी हैं। राजनैतिक क्षेत्रों में यह चर्चा व्याप्त हैं कि इन दोनों हरफन मौला नेताओं के बीच हाने वाली पेंतरें बाजी ना केवल रोचक होगी वरन किस अंजाम पर पहुचेंगीर्षोर्षो इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं हैं। ये दोनों ही नेता यह मानकर चलते हैं कि राजनीति में ना तो हमेश कोई दुश्मन होता है औ ना ही दोस्त। इसलिए कब कौन किस पर दवाब बना कर अपना उल्लू सीधा कर लेर्षोर्षो यह देखने योग्य दृश्य होगा।

















Tuesday, June 14, 2011

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केवलारी के प्रभारी बनने के बाद दूसरे ही प्रवास में राजा भोज प्रतिमा अनावरण के मंच पर एक साथ दिखे गौरी और हरवंश





इस क्षेत्र के तीनों पार्षदों दलीय भावना से परे हटकर इस आन्दोलन को संचालित किया। इसमें सर्वाधिक चर्चित मामला क्षेत्र में सालों से बन रही पानी की टंकी हैं जिसमें ठेकेदार को बिना काम शुरू किये ही भारी धनराशि दे दी गई थी। केवलारी विधानसभाक्षेत्र के ग्राम मोहबर्रा में राजा भोज की प्रतिमा के अनावारण का कार्यक्रम सियासी हल्कों में चर्चित हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा द्वारा केवलारी क्षेत्र के प्रभारी बनाये गये मन्त्री गौरीशंकर बिसेन और क्षेत्रीय इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सामाजिक आयोजन में हरवंश सिंह को बुलाने को लेकर भारी बवाल भी मचा था। पिछले बीसों सालों से मोहबर्रा गांव की पहचान वहां के वरिष्ठतम इंका नेता झुम्मक लाल बिसेन के कारण रही हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में हरवंश सिंह के कारण उन्हें बहुत नीचा देखना पड़ा। अब इस सब के पीछे इंका और भाजपा के इन दो महारथियों की क्या रणनीति रहीर्षोर्षो इसके बाबद अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। एक तरफ बाबा के समर्थकों के साथ ही भाजपा के लोगों ने भी अनशन मेंं भागीदारी की हैं। जिलेके प्रमुख समाजवादर नेता वरिष्ठअधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता एवं नरेन्द्र अग्रवाल भी अपने साथियों के साथ धरने में शामिल हुये। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने भी बाबा को रामलीला मैदान में कार्यवाही के बाद समझाइश देने का खुलासा किया हैं।





भेरौगञ्ज में ग्यारह दिन चला धरना-नगरीय क्षेत्र की श्रीलंका मानी जाने वाली उप नगरी भेरौगञ्ज के नागरिकों ने एक समिति बना कर सोमवारी चौक में धरना दिया। समिति के अध्यक्ष महेश उर्फ मन्दरा डहेरिया बनाये गये थे। 11 दिनों तक चले इस धरने में पालिका के उपाध्यक्ष राजिक अकील ने सक्रिय भूमिका निभायी। इस क्षेत्र के तीनों पार्षदों दलीय भावना से परे हटकर इस आन्दोलन को संचालित किया। इसमें सर्वाधिक चर्चित मामला क्षेत्र में सालों से बन रही पानी की टंकी हैं जिसमें ठेकेदार को बिना काम शुरू किये ही भारी धनराशि दे दी गई थी। बताया जाता हैं कि यह ठेकेदार तत्कालीन सहायक ख्न्त्री डी. आदित्य कुमार का खास था जिसे सांठ गांठ और भारी लेन देन करके पैसा दे दिया गया। परिषद जिस ठेकेदार के कारण परेशानी में पड़ी हैं उसे पैसा दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले आदित्य कुमार के खिलाफ ना जाने क्यों कोई कार्यवाही नहीं कर रही हैं र्षोर्षो इस परिषद के कार्यकाल में यह पहला जन आन्दोलन था। सिवनी की जनता आन्दोलित हो जाये तो इसे गम्भीरता से लेना चाहिये क्योंकि यहाँ के लोग बहुत अधिक सहनशील हैं। ऐसे लोग यदि सड़क पर उतर आयेेंं तो इसे नकारना घातक हो सकता हैं। वैसे पालिका प्रशासन ने 11 वें दिन अनशन को समाप्त कराने में तो सफलता हासिल कर ली हैं लेकिन यदि मांगों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो यह लावा फिर कभी भी फूट सकता हैं।





राजा भोज की प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम में गौरी:हरवंश एक मंच पर दिखे-केवलारी विधानसभाक्षेत्र के ग्राम मोहबर्रा में राजा भोज की प्रतिमा के अनावारण का कार्यक्रम सियासी हल्कों में चर्चित हैं। इस कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा द्वारा केवलारी क्षेत्र के प्रभारी बनाये गये मन्त्री गौरीशंकर बिसेन और क्षेत्रीय इंका विधायक और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह भी अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस आयोजन में सिर्फ हरवंश सिंह ही गैर पवार नेता थे अन्यथा सभी नेता समाज के ही थे। सामाजिक आयोजन में हरवंश सिंह को बुलाने को लेकर भारी बवाल भी मचा था। पिछले बीसों सालों से मोहबर्रा गांव की पहचान वहां के वरिष्ठतम इंका नेता झुम्मक लाल बिसेन के कारण रही हैं। वे लम्बे समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहें हैं और उन्हें बहुत सम्मान की नज़रों से देखा जाता हैं। वे पार्टी में भी कई पदों पर रहें हैं और केवलारी जनपद पंचायत के अध्यक्ष तथा पहली जिला पंचायत के उपाध्यक्ष भी रहें हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में हरवंश सिंह के कारण उन्हें बहुत नीचा देखना पड़ा। बताया जाता हैं पैसा फेंक तमाशा देखने के आदी हरवंश सिंह ने झुम्मक भाऊके पास पचास हजार रूपये भेज दिये और कार्यक्रम में आने का आग्रह भी किया। भोले भाले झुम्मक भाऊ ने चाल समझी नहीं और उन्हें आमन्त्रित कर लिया। जब समाज में यह बात पता चली तो इसका भारी विरोध हुआ और निZविवादित रहने रहने वाले झुम्मक भाऊ विवाद में आ गये। बताया जाता हैं कि समाज के दवाब के चलते उन्हें ना केवल इस बात के लिये माफी मांगनी पड़ी वरन उन्होंने वे पैसे भी दे दिये कि आप लोगों को जैसा उचित लगे वैसा करें। समाज के एक बुजुर्ग का मान रखने के लिये लोग इस बात के लिये सहमत हो गये।राजनैतिक क्षेत्रों में ऐसा माना जा रहा था कि अपने कारण इतने बुजुर्ग कांग्रेसी के अपमान को देखते हुये हरवंश सिंह आयेंगें नहीं जेकिन ऐसा नहीं हुआ। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि हरवंश सिंह ने यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत किया था। उनका ऐसा मानना था कि प्रदेश भाजपा द्वारा हाल ही में प्रभारी बनाये गये गौरीशंकर बिसेन के साथ एक ही मंच पर दिखकर वे यह राजनैतिक संकेत देना चाहते थे कि नूरा कुश्ती आगे भी जारी रहेगी। वैसे यह बात भी गौर करने लायक हैं कि एक ही मंच पर आने से ना तो गौरी भाऊ ने परहेज किया और ना ही हरवंश सिंह ने। लेकिन यह जरूर देखा गया कि केवलारी के भाजपा प्रत्याशी पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन इस कार्यक्रम में शामिल नहीं थे। वैसे बताया तो यह गया कि वे अपनी अस्वस्थता के कारण शामिल नही हो पाये थे लेकिन उनका वहां ना रहना राजनैतिक हल्कों में चर्चित रहा।अब इस सब के पीछे इंका और भाजपा के इन दो महारथियों की क्या रणनीति रही? इसके बाबद अभी कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं। वैसे एक बात तो सर्वमान्य हैं कि ये दोनों ही नेता हरफन मौला खिलाड़ी हैं और कब किसको कौन दांव लगा कर चित कर दें ?इसकी भविष्यवाणी भी करना सम्भव नहीं हैं।





बाबा के अनशन के आस पास घूमती रही जिले की राजनीति-बाबा रामदेव के अनशन को लेकर राजनीति जिले भी गरमायी रही। एक तरफ बाबा के समर्थकों के साथ ही भाजपा के लोगों ने भी अनशन मेंं भागीदारी की हैं। भाजपा के सभी प्रमुख नेता अध्यक्ष सुजीत जैन,विधायक द्वय नीता पटेरिया और कमल मर्सकोले,पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी सहित संघ के प्रमुख लोगों ने भी हिस्सा लिया।इनके अलावा जिलेके प्रमुख समाजवादर नेता वरिष्ठअधिवक्ता राजेन्द्र गुप्ता एवं नरेन्द्र अग्रवाल भी अपने साथियों के साथ धरने में शामिल हुये। बाबा के कार्यक्रम में प्रमुखता से मंच पर आसीन होने वाले विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने रामलीला मैदान में सरकार द्वारा की गई कार्यवाही के बाद एक विज्ञप्ति जारी कर यह खुलासा किया कि उन्होंने बाबा को सिवनी प्रवास के दौरान उनकी समर्थक आशा सनोड़िया के निवास पर यह समझाइश दी थी कि यदि वे योग ही कराते रहेंगें तो पूजे जायेंगें और यदि राजनीति में आयेंगें तो उनकी फजीहत हो जायेगी। उनकी यहसमझाइश की बात यदि बाबा के कार्यक्रम के तुरन्त बाद आती और बाबा के समर्थक यदि उन्हें हरवंश सिंह की समझाइश मान लेने के लिये मना लेते तो ना तो केन्द्र की कांग्रेस सरकार को इतनी मशकक्त करनी पड़ती और ना ही बाबा की इतनी फजीहत होती। हरवंश सिंह के इसखुलासे के बाद जिला कांग्रेस ने भी बाबा पर तीखे हमले किये हैं वरना इसके पहले कांग्रेस की चुप्पी राजनैतिक हल्कों में चर्चित रही हैं। बाबा के रामलीला मैदान में अनशन शुरू करने के साथ ही पूरे देश में बाबा ने अपने समर्थकों को अनशन शुरू करने का आव्हान किया था और दावा किया था कि पूरे देश के 624 जिलों में एक करोड़ लोग उनके साथ अनशन करेंगें। इस हिसाब से देश के हर जिले में 16026 आदमी धरने पर बैठना चाहिये थे। लेकिन देश के किसी भी जिले में इतने लोग धरने में बैठे नहीं दिखे। इससे एक बात तो साबित हो गई हैं कि बाबा के कार्यक्रमों में लोग योग के कारण ही आते थे और जब बिना योग के लोगों का बाबा ने अनशन के लिये आव्हान किया तो सारा आयोजन पिट गया। कुछ दिन बाद जब भाजपायी और अन्य नेता हट गये तो बमुश्किल अगुंलियों पर गिने जाने लायक लोगों ने बाबा के स्वस्थ्य होने वाले यज्ञ में हिस्सा लिया। बाबा रामदेव के मुद्दे सही होने के बावजूद भी ऐसे थे जिन पर तत्काल सब कुछ करना सम्भव नहीं था और बाबा समय देने को तैयार नहीं थे। इसी कारण मामला तूल पकड़ गया और योग गुरू बाबा अनशन के छठवें दिने से बीमार हो गये।





























,गेहूँ खरीदी में किसानो का दस हजार िक्व.ज्यादा तौल कर एक करोड़ सत्ताइस लाख की रकम का हुआ गोलमाल





जांच कर दोषियों को दंड़ित करने और किसानो की रकम खाते में डलवाने की प्रशासन से अपेक्षा





सिवनी। समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी में किसानों का लगभग 10 हजार िक्वण्टल गेहूँ ज्यादा तौल कर उनका शोषण किया गया हैं। इस गेहूँ की कीमत 1 करोड़ 27 लाख रुपये होती हैं। प्रशासन से अपेक्षा है कि नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में रखी बोरियों को तौल कर इस घोटाले की जांच कर दोषियों को दंड़ित करें तथा किसानों को मिलने वाली यह रकम उनके खातों में जमा करायी जाये।





उल्लेखनीय हैं कि जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से गेहूँ खरीदी का काम किया गया था शासन द्वारा निर्धारित 31 मई तक जिले में लगभग 10 लाख िक्वण्टल गेहूँ किसानों से खरीदा गया हैं।





लगभग सभी खरीदी केन्द्रों पर किसान के गेहूँ तोलने में गोल माल किया गया हैं। हर बोरी में पचास किलो के बजाय 51 किलो से लेकर 51 किलो 300 ग्राम तक गेहूँ तौला गया हैं। बताया जाता है कि नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों का यह दवाब था कि 50 किलो की हर बोरी पर कम से कम आधा किलो की ज़िन्दा तौल कर ही लाया जाये। मानक आधार पर हर बोरी का वजन 650 ग्राम होना चाहिये था लेकिन घटिया खरीदी गई बोरियों का वजन 450 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक का ही था। इस तरह किसान से कम से कम 1 किलो प्रति िक्वण्टल गेहूँ अधिक तौल में लिया गया हैं। विरोध करने वाले किसानों का माल ही नहीं लिया जाता था।





जिले में हुयी 10 लाख िक्वण्टल की खरीदी में इस तरह किसान का 10 हजार िक्वण्टल ज्यादा तौला गया जिसकी कीमत 1270 रु. प्रति िक्वण्टल के हिसाब से 1 करोड़ 27 लाख रुपये होती हैं। केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित 1170 रु. पर राज्य सरकार द्वारा 100 रु. प्रति िक्वण्टल बोनस किसानो को दिया गया था। लेकिन इस लूट पाट के कारण किसान को हर िक्वण्टल पर कम से कम 12रु. 70 पैसे कम कीमत मिली हैं।





जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि करोड़ो के इस घोटाले की जांच की जाये। यह भी अपेक्षा है कि प्रशासन नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में बोरियों को तुलवा कर इससच का पता लगा सकते हैं जिसमें किसानो को मिलने वाली 1 करोड़ 27 लाख रुपये की राशि गोल हो गई हैं। प्रशासन से यह भी अपेक्षा हैं कि जिस किसान ने जितना गेहूँ बेचा है उसमें एक किलो गेहूँ का मूल्य जोड़ कर यह रकम उनके खातों में जमा करायी जाये और इस गोल माल करने के दोषियों के खिलाफ दंड़ात्मक कार्यवाही की जाये।



Monday, June 6, 2011

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इंका और भाजपा के हरफनमौला खिलाड़ियों हरवंश और गौरी भाऊ के बीच केवलारी में होने वाली जंग क्या रोचक होगी?























भाजपायी राजनीति में इन दिनों पूर्व विधायक नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की युगलबन्दी चर्चित हैं। दोनों नेताओं को एक साथ ना केवल कई कार्यक्रमों में शिरकत करते एक साथ देखा गया हैं वरन ऐसे भी चर्चे हैं कि दोनों ही नेता एक साथ प्रदेश भाजपा के कार्यालय में भी देखें गयें हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा महाकौशल के वरिष्ठ भाजपा नेता और मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को केवलारी क्षेत्र का प्रभार दिया हैं जो कि विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का निर्वाचन क्षेत्र हैं। मुख्यमन्त्री की तरह ही मरावी ने प्रभारी बनने के बाद उंहोंने भी केवलारी आने से परहेज किया था जिससे कार्यकत्ताZओं में असन्तोष था। पहले भी बिसेन और हरवंश को एक साथ खड़े देखा गया हैं। प्रभात झा और नव नियुक्त प्रभारी गौरीशंकर बिसेन को बहुत कुछ करना होगा वरना नतीजा फिर वही ढाक के तीन पात ही निकलेगा। भाजपा ने कहा हैं कि बिजली की दरों में वृद्धि प्रदेश सरकार ने नहीं वरन नियामक आयोग ने की हैं जिसे कांग्रेस सरकार ने बनाया था। यह कांग्रेस की दिग्गी सरकार का ही पाप हैं जिसे प्रदेश की जनता भोग रही हैं।जिले से एक और पुरानी उपलब्धि छिनने जा रही वह हैं एकमात्र विधि महाविद्यालय।इस मुद्दे पर भी वैसी ही राजनीति हो रही हैं जैसी करने के नेता आदी हो चुके हैं।





















नरेश राजेश जोड़ी भाजपायी हल्कों में चचििZत- भाजपायी राजनीति में इन दिनों पूर्व विधायक नरेश दिवाकर और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की युगलबन्दी चर्चित हैं। दोनों नेताओं को एक साथ ना केवल कई कार्यक्रमों में शिरकत करते एक साथ देखा गया हैं वरन ऐसे भी चर्चे हैं कि दोनों ही नेता एक साथ प्रदेश भाजपा के कार्यालय में भी देखें गयें हैं। सियासी हल्कों में चर्चा हैं कि इन दोनों नेताओं के रास्त भले ही अलग अलग हों लेकिन मञ्जिल एक ही हैं और वो है सिवनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने की। इनमें से एक नरेश दिवाकर तो भूतपूर्व विधायक हैं और पुन: विधायक बनना चाहते हैं तो दूसरी ओर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी पालिका अध्यक्ष के बाद अगली पायदान के रूप में विधायक बनने का सपना सञ्जोये हुये हैं। वैसे अतीत में देखा जाये तो इन दोनों ही नेताओं के सम्बन्ध अच्छे नहीं रहें हैं। जब नरेश विधायक थे और राजेश युवा मोर्चे के अध्यक्ष थे तबदोनों में ही काफी तना तनी चला करती थी। ऐसा भी दावा किया जाता था कि नरेश की टिकिट कटवाने में भी राजेश की महत्वपूर्ण भूमिका थी। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि वर्तमान में भाजपा की ही नीता पटेरिया ना सिर्फ विधायक हैं वरन प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष भी हैं। अगले चुनावमें उनकी टिकिट कट ही जायेगी इसकी भी कोई गैरण्टी नहीं हैं। ऐसे में दोनों के बीच बनी यह जुगल बन्दी कितने दिन चलेगी और ना जाने कब टूट जायेगीर्षोर्षो इसके बारे में कोई ठोसदावा नहीं किया जा सकता हैं।









हरवंश के क्षेत्र के गौरी बने प्रभारी फिर शुरू हुयी चर्चायें -प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा महाकौशल के वरिष्ठ भाजपा नेता और मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को केवलारी क्षेत्र का प्रभार दिया हैं जो कि विधानसभा उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह का निर्वाचन क्षेत्र हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस से हारी हुयी सीटों को जीतना भाजपा ने पहली प्राथमिकता बनायी हैं।इसके तहत पहले सरकार के मन्त्री जयसिंह मरावी को प्रभारी बनाया गया था। लेकिन मुख्यमन्त्री की तरह प्रभारी बनने के बाद उंहोंने भी केवलारी आने से परहेज किया था जिससे कार्यकत्ताZओं में असन्तोष था। इसके चलते प्रभात झा ने अब गौरीशंकर बिसेन को प्रभारी बनाया हैं। भाजपायी हल्कों में यह दावा भी किया जा रहा हें कि गौरी भाऊ खुद भी प्रभारी बनने के इच्छुक थे। राजनैतिक विश्लेषकों में इन चर्चाओं के लेकर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा हैं। पहले भी बिसेन और हरवंश को एक साथ खड़े देखा गया हैं। चाहे फिर वह परिसीमन का मामला हो या फिर चुनावी समीकरणों का मामला हो। दोनों ही नेताओं ने एक दूसरे के लाभ के लिये दलीय हितों को दरकिनार करने में कोई परहेज नहीं किया हैं। पिछले विधानसभाचुनाव में हरवंश की जीत और भाजपा की हार को लेकर भाजपायों ने जो आरोप चस्पा किये थे उसके कुछ छीण्टें गौरी भाऊ के दामन पर भी आये थे। वैसे राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि बिसेन और हरवंश सिंह दोनों ही कर फल और जुगाड़ की राजनीति में माहिर हैं। वैसे दबे स्वरों में एक चर्चा यह भी हैं कि शिवराज-हरवंश सांठगांठ के किस्सों के चलते प्रभात झा ने पहले नियुक्त प्रभारी को अलग कर गौरीशंकर बिसेन को इस आशा के साथ मोर्चे पर लगाया हैं कि वे बीसें साबित होगें और केवलारी में भाजपा को जिताने के लिये सफल रणनीति बना कर राह आसान करेंगें। लेकिन क्षेत्र के समर्पित भाजपा कार्यकत्ताZ बार बार धोखा खाकर इतनेहताश होचुके हैं और उनकी यह धारणा बन चुकी हैं कि वक्त आने पर हरवंश सिंह सभी भाजपा नेताओं को पटा लेतें है और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता हैं। भाजपा कार्यकत्ताZओं में एक बार फिर से विश्वास पैदा करने के लिये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा और नव नियुक्त प्रभारी गौरीशंकर बिसेन को बहुत कुछ करना होगा वरना नतीजा फिर वही ढाक के तीन पात ही निकलेगा।









अब तो कांग्रेसपर दोष मढ़ने के बजाय अपनी उपलब्धि गिनाये भाजपा -प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर बिजली की दरों में हुयी वृद्धि को लेकर हर जिले में ब्लाक स्तर पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा हैं। जिले में भी यह क्रम शुरू हो चुका हैं। हालांकि जिले यह सब औपचारिक ही रहेगा क्योंकि जिले के अध्यक्षों की घोषणा ना होने से ना तो पुराने ही सक्रिय रह गये हैं और नाही नये। कांग्रेस के इस हमले का जवाब देते हुये भाजपा ने खुद कांग्रेस और दिग्गी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया हैं। भाजपा ने कहा हैं कि बिजली की दरों में वृद्धि प्रदेश सरकार ने नहीं वरन नियामक आयोग ने की हैं जिसे कांग्रेस सरकार ने बनाया था। यह कांग्रेस की दिग्गी सरकार का ही पाप हैं जिसे प्रदेश की जनता भोग रही हैं। अख्बारों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार तो विद्युत कम्पनियों ने बिजली की दरों में 22 प्रतिशत वृद्धि करने की मांग की थी जिसे नियामक आयोगनें नहीं माना और वर्तमान में 4 से लेकर 6 प्रतिशत तक बिजली की दरें बढ़ायीं हैं। यदि ऐसा हैं तो भाजपा को इसे कांग्रेस और दिग्गी राजा का पाप मानने के बजाय पुंय मानना चाहिये जिसके कारण जनता पर 22 प्रतिशत वृद्धि का बोझ नहीं पड़ा। बिजली पानी सड़क को मुद्दा बना कर आठ साल पहले सरकार बनाने वाली भाजपा आखिर कब तक अपने पापों को कांग्रेस और दिग्गी के सिर मढ़ते रहेगी जबकि वास्तविकता तो यह हैं कि उसकी सरकार अपने ही वायदों पर खरी नहीं उतर रही हैं। भाजपा के राज में भी बिजली के बिल तो किसानों को करण्ट मार रहें हैं लेकिन तारों में करण्ट गुल रहता हैं। यदि दूसरे कार्यकाल में भी भाजपा अपनी उपलब्धियों को गिनाने की स्थिति में नहीं हैं तो यह अत्यन्त ही शर्मनाक बात हैं।









लॉ कालेज छिनने पर भी घिसीपिटी राजनीति ही हो रही है-जिले से एक और पुरानी उपलब्धि छिनने जा रही वह हैं एकमात्र विधि महाविद्यालय। बहुत संघंषोZं के बाद कालेज में लॉ फेक्ल्टी खेलने की घोषणा गेदरिंग में आये तत्कालीन शिक्षा मन्त्री माधवलाल दुबे ने की थी। सन 1981 से यह लगातार चलते रहा। लेकिन अब यह बन्द होने जा रहा हैं। इस मुद्दे पर भी वैसी ही राजनीति हो रही हैं जैसी करने के नेता आदी हो चुके हैं। प्रदेश में सरकार चलाने वाली भाजपा और उसके नेता पत्र लिखकर राज्पाल की ओर गेन्द उछाल रहे हैं तो कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने कोई आन्दोलन छेड़ना तो दूर अभी कुछ कहना या लिखना भी उचित नहीं समझा हैं। एक प्रश्न यह भी उठता हैं कि इतना बड़ा फैसला सरकार ने कोई एक दिन में तो लिया नहीं होगार्षोर्षोयदि लम्बे समय से यह कवायत चल रही थी तो कालेज से सम्बन्धित शासकीय कर्मचारियों ने इससे जन प्रतिनिधियों को अवगत क्यों नहीं कराया? सरकार के द्वारा फैसला लेेने के बाद ही यह मामला क्यों खुलार्षोर्षो क्या जन प्रतिनिधियों को इस बात का अहसास नहीं था कि उनके क्षेत्र और जिले से एक और चीज छीनी जा रही हैं?क्या बार कांउसिल आफ इंड़िया ने निरीक्षण फीस के रूप में एक लाख रुपये की राशि जमा करने को कहा था? यह राशि जमा की गई या नहीं? ये तमाम ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर जनता के सामने आना चाहिये अंयथा और भी चीजें जिले से ऐसे ही छिनती जायेंगीं।







Monday, May 30, 2011

Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.

दिग्विजय के खुले विरोध और कमलनाथ के समर्थन के बीच बाबा रामदेव के कार्यक्रम में हरवंश का आना सियासी हल्कों में चर्चित

जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं। पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी।

खुल कर दिखने लगी भाजपा में भी गुटबाजी-जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।पहले जिला भाजप के महामन्त्री पद से नन्दकिशोर सोनकेशरिया की छुट्टी हुयी फिर टेगौर वार्ड की पार्षद श्रीमती लीला डागोरिया को पार्टी सदस्यता से निलम्बित कर दिया गया। इस निर्णय पर जमकर अखबारबाजी हुयी। नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। इसमें यह बताया गया कि उनके स्पष्टीकरणसे सन्तुष्ट होकर बहाली की गई हैं। इसमें यह सवाल उठ खड़ा होता है कि निलम्बन के पूर्व कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किया गयार्षोर्षो भाजपायी हल्कों में यह माना जा रहा हैं कि ये सब गुटबाजी के कारण किया जा रहा हैं। गुटबाजी का राजरोग भाजपा में भी अब खुल कर दिखायी देने लगा हैं।

दिग्गी के विरोध के बाद भी हरवंश का बाबा रामदेव के शिविर में आना चर्चित-योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। बीते दिनों हुये इस कार्यक्रम में जहा। भाजपा के सभी प्रमुख नेता जिला अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायकद्वय नीता पटेरिया एवं कमल मर्सकोले, पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी,पूर्व विधायक नरेश दिवाकर आदि शामिल थे तो दूसरी ओर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल शामिल थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। हालांकि केन्द्रीय मन्त्री कमलनाथ भी बाबा के कार्यक्रम में छिन्दवाड़ा में शामिल हुये थे और उन्होंने खुले आम बाबा के अभियान का समर्थन भी किया था। लेकिन सिवनी मेंहरवंश सिंह के शामिल होने को लेकर तरह तरह की चर्चायें हैं। कुछ लोगों का मानना हैं कि हरवंश सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनना चाह रहें थे। लेकिन इन दोनों ही पदों पर दिग्गी राजा ने ऐसी रणनीति बनायी कि हरवंश सिंह का कुछ बन पाना तो दूर जो आज उनके पास हैं उसके भी जाने की तलवार उनके सिर पर लटकी हुयी हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि कान्तिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष और अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं जो कि दिग्गी खेमे के ही माने जा रहें हें। दिग्गी खेमे के ही प्रियव्रत सिंह युवक कांग्रेस के अध्यक्ष पद काचुनाव जीत चुके हैं। राजनैतिक हल्कों में चर्चा हैं कि ऐसी परिस्थिति में ठाकुर हरवंश सिंह की विधानसभा उपाध्यक्ष पद से बिदायी निश्चित मानी जा रही हैं। हरवंश समर्थकों का मानना हैं कि दिग्गी राजा की सोची समझी रणनीति के कारण ही हरवंश सिंह से लालबत्ती छिनने की नौबत आ गई हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोगों का यह भी मानना हैं कि कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले बाबा रामदेव के आयोजन में हरवंश सिंह इसलिये शामिल हुये कि कहीं उनकी गैरहाजरी में बाबा सिवनी में उनके खिलाफ ही कुछ ना बोल दे। हरवंश सिंह की यह आशंका सही भी साबित हुयी। उनके जाने के बाद पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने यह सवाल कर ही दिया कि बैतूल में शिवााज सिंह चौान जिन पर डम्पर कांड़ का आरोप हैं,छिदवाड़ा में कमलनाथ जिस सरकार को भ्रष्ट कह रहें हैं और सिवनी में हरवंश सिंह जिन पर भ्रष्टाचार केकई आरोप हैं इन्हें सामने रखकर आप कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लडेंगेंर्षोर्षो बाबा इस प्रश्न से असहज हो उठे थे। हालांकि उन्होंने यह जवाब देकर मामले को टाल दिया कि मैं उन्हें जन प्रतिनिधि के रूप में तो जानता हूं लेकिन किसी को काई प्रमाणपत्र नहीं दे रहा हूं। लेकिन इसके पूर्व में बाबा ने यह भी कहा था कि जब हरवंश सिंह वन मन्त्री थे मैं उन्हें तब से जानता हूं और उनके यहां रुका भी हूंं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो

नरेश के आग्रह पर बाबा द्वारा शहीदों को माला पहनना हुआ चर्चित -संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इंका सांसद बसोरीसिंह मरकाम जहां एक भी शब्द संसद में ना बोलने वाले में शामिल है तो वहीं भाजपा सांसद के.डी.देशमुख सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले सांसदों में शामिल हैं। जिले के दोनों सांसदों के इस व्यवहार से तो संसद में ऐसा सन्देश गया होगा कि इनके क्षेत्र देश के ऐसे विकसित क्षेत्र हैं जहां कोई समस्या नहीं हैं। जबकि प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े हुये इन क्षेत्रों में कई ऐसी ज्वलन्त समस्यायें हैं जिनके लिये संसद में लड़ना जरूरी हैं। चाहे वह छिन्दवाड़ा से नैनपुर छोटी रेल लाइन को बकड़ी रेल लाइन में बदलने की हो हो या रामटेक गोटेगांव नई रेल लाइन की हो या उत्तर दक्षिण गलियारे के तहत बनने वाली फोर लेन सड़क ीक की अनुमति की हो। लेकिन इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं।

सांसद मरकाम,देशमुख की संसदीय भूमिका से निराशा -पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर अपने एक दिवसीय प्रवास में बाबा रामदेव ने शासकीय सुधारालय के एक हिस्से में लग रहे कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी। कन्या महाविद्यालय के सुधार कार्य के दौरान इन मूर्तियों को बनवाया गया था जिसमें भारी भ्रष्टाचार होने की खबरें सुर्खियों में रहीं थी। उस दौरान यह भी कहा गया था कि ऐसे पैसे से शहीदों की मूर्तियां बनवा कर उनका अपमान किया गया हैं। जांच की मांग होने के बाद भी आज तक प्रदेश सरकार ने ना तो जांच की और ना ही दोषियों को दंड़ित ही किया। नरेश दिवाकर के कार्यकाल में गुरु गोलवलकर, नेताजी और सन्त विनोबा की ये मूर्तियां बनवायी गईं थी जिनका अनावरण संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में किया था। अपनी भारत स्वाभिमान यात्रा पर निकले बाबा रामदेव का पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर वहां जाना और माल्यार्पण करना जन चर्चाओं में आ गया हैं। पहले से ही यह चर्चा थी कि प्रथम पंक्ति में बैठ कर योग करने, माला पहनाने, मंच पर बाबा से आशीZवाद लेने और मंच पर आसीन होने के लिये ग्यारह हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का पैकेज था। ऐसे मंच से और ऐसे कार्यक्रमों में बाबा के जाने से उनके अभियान को सिवनी में तो निश्चित रूप से ठेस ही पहुंची हैं।