www.hamarivani.com

Monday, August 24, 2015

अतिथि बनाकर बुलाने पर भी गौरी भाऊ से परहेज के चलते क्या सिवनी आने से  कतराते हैं सांसद बोध सिंह?
बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद बोधसिंह भगत भी एक अलग ही मिजाज के आदमी है। यदि कोई किसी को अतिथि बनाकर बुलाता है तो ऐसा महसूस होता है कि उसे सम्मान दिया जा रहा है और उसका सीना गर्व से फूल जाता है। लेकिन सांसद भगत तो अपने ही क्षेत्र में अपनी ही पार्टी की सरकार के कार्यक्रमों में अतिथि बनाये जाने के बाद भी परहेज कर जाते हैं और शरीक नहीं होते हैं। जबकि जिले की बरघाट और सिवनी विस सीट से उन्हें लगभग 70 हजार वोटों की बढ़त मिली थी नहीं तो बालाघाट जिले के 6 विस क्षेत्रों से तो वे मात्र 20 हजार वोट की ही लीड ले पाये थे। भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सांसद जी की गौरी भाऊ से पटती नहीं हैं इसलिये वे गोल मार जाते है। विगत 20 अगस्त को व्यापम घोटाले के विरोध में जबलपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में विशाल जेल भरो आंदोलन हुआ जिसमें लगभग 20 हजार गिरफ्तारी हुयी।सभी लोगों ने अपने अपने निजी प्रयास किये और अपने नेतृत्व में अपने समर्थकों को ले जाने का प्रयास किया। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के सामने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराना ही नेताओं का लक्ष्य रहा। शिवराजसिंह चौहान ने जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात देने की घोषणा करके जनता की खूब तालियां बटोरीं थीं। लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिवनी के भाग्य से मेडिकल कालेज छिन रहा है ।  
अतिथि बनने पर भी नहीं आते सांसद बोधसिंह-बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद बोधसिंह भगत भी एक अलग ही मिजाज के आदमी है। यदि कोई किसी को अतिथि बनाकर बुलाता है तो ऐसा महसूस होता है कि उसे सम्मान दिया जा रहा है और उसका सीना गर्व से फूल जाता है। लेकिन सांसद भगत तो अपने ही क्षेत्र में अपनी ही पार्टी की सरकार के कार्यक्रमों में अतिथि बनाये जाने के बाद भी परहेज कर जाते हैं और शरीक नहीं होते हैं। जबकि जिन मतदाताओं ने उन्हें चुनकर सांसद बनाया है उनके प्रति तो उनके बहुत सारे कर्त्तव्य भी है लेकिन ना जाने क्यों वे सिवनी जिले से ना केवल मंुह चुराते है वरन यहां की समस्याओं के प्रति भी गंभीर नहीं है। जबकि जिले की बरघाट और सिवनी विस सीट से उन्हें लगभग 70 हजार वोटों की बढ़त मिली थी नहीं तो बालाघाट जिले के 6 विस क्षेत्रों से तो वे मात्र 20 हजार वोट की ही लीड ले पाये थे। भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सांसद जी की गौरी भाऊ से पटती नहीं हैं इसलिये वे गोल मार जाते है। अब भाजपा के इन दो दिग्गज नेताओं की लड़ाई का खामियाजा जिले को भुगतना पड़ रहा है। अभी हाल ही में बरघाट में नगर पंचायत में लगभग सवा करोड़ रुपयों के कामों का भूमिपूजन प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन के द्वारा किया गया जिसमें सांसद बोधसिंह भगत और फग्गनसिंह कुलस्ते दोनों ही विशिष्ट अतिथि बनाये गये थे। इसी तरह 15 अगस्त को जिले के दलसागर तालाब में दलसागर महोत्सव आयोजित किया गया इसमें भी ओनों ही सांसद विशिष्ट अतिथि थे लेकिन दोनों ही कार्यक्रमों में सांसद कुलस्ते तो आये लेकिन बोधसिंह भगत ने हमेशा की तरह कन्नी काट लिया। जबकि बरघाट और सिवनी दोनों ही विधानसभा क्षेत्र कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में नहीं आते है। कार्यक्रमों से परहेज करें और चाहें तो जिले में बिल्कुज ना आये लेकिन कम से कम जिले की समस्याओं के प्रति तो जागरूक रहें तो वैसा भी नहीं है। फोर लेन के मामले में जरूर उनके एक दो बयान आये लेकिन वे भी सही नहीं निकले। रामटेक गोटेगांव नई रेल लाइन और छिंदवाड़ा नैनपुर के गेज परिवर्तन के संबंध में भी ना जाने क्यों भगत जी ने चुप्पी ही साध रखी है जबकि ये तीनों ही मांगें केन्द्र सरकार से संबंधित हैं और बिना उनके प्रयास किये पूरी भी नहीं होने वाली हैं। जिले के भाजपा के इकलौते विधायक कमल मर्सकोले और दोनों भाजपा सांसदों को इसं संबंध में कारगर पहल करना चाहिये ताकि जिले के लोगों को ये मूलभूत सुविधायें मिल सकें। 
कमलनाथ के नेतृत्व में हुआ जंगी प्रर्दशनःजिले में बजी अपनी अपनी ढपली -विगत 20 अगस्त को व्यापम घोटाले के विरोध में जबलपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में विशाल जेल भरो आंदोलन हुआ जिसमें लगभग 20 हजार लोगों ने अपनी गिरफ्तारी दी। इस आंदोलन में जिले के कांग्रेस नेताओं ने भी अलग अलग ग्रुप में अपनी भागीदारी की है। केवलारी के इंका विधायक रजनीश सिंह के नेतृत्व में स्व. हरवंश सिंह के समर्थकों ने अपनी गिरफ्तारी दी। इसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी,राजा बघेल, असलम भाई और मोहन चंदेल सहित कई नेता शामिल थे। जबकि एक अलग ग्रुप के रूप में सिवनी विस के पूर्व प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना के नेतृत्व में उनके समर्थकों ने भी हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि व्यापम घोटाले की सी.बी.आई. जांच के बाद प्रदेश में यह पहला विशाल आंदोलन था जिसकी अगुवायी पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने की है। कांग्रेस की आक्रामक नीति के चलते ऐसे और भी आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। वेस्े तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जबलपुर संभाग के अन्य जिलों में इसमें शामिल होने के लिये कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किये थे। ऐसा दावा जिले के कांग्रेस के पदाधिकारियों का था। वैसे भी जिले में कांग्रेस या कांग्रेस के नेताओं के द्वारा कोई ऐसे संगठित प्रयास नहीं किये गये कि जिले के ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें पहुंच सकें। सभी लोगों ने अपने अपने निजी प्रयास किये और अपने नेतृत्व में अपने समर्थकों को ले जाने का प्रयास किया। ब्लाक कांग्रेस के लेवल पर भी कोई प्रयास नहीं हुये। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के सामने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराना ही नेताओं का लक्ष्य रहा। इसीलिये सभी नेता अपनी अपनी ढपली बजाते देखे गये।
क्या मुख्यमंत्री को अपनी ही जुबान की कद्र नहीं हैं? -कई साल पहले सविनी के मिशन स्कूल की सभा में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात देने की घोषणा करके जनता की खूब तालियां बटोरीं थीं। बीच में प्रदेश सरकार ने सदन और प्रेस कॉंफ्रेंस में दावा किया था कि केन्द्र सरकार को छिंदवाड़ा और शिवपुरी नहीं वरन मूल प्रस्ताव के अनुरुप सिवनी और सतना के प्रस्ताव भेजे गये हैं। फिर भाजपा नेताओं ने दावा किया कि यहां पीपीडी मोड का कॉलेज खुलेगा। जेकिन पीपीडी मोड के कालेजों के समय भी सरकार ने सिवनी का प्रस्ताव लंबित रख दिया और ऐसा अखबारों से पता चला है कि केन्द्र सरकार द्वारा पोषित मेडिकल कालेजों की सूची में भी पूर्व की ही भांति छिंदवाड़ा और शिवपुरी का प्रस्ताव भेज दिया गया है। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिवनी के भाग्य से मेडिकल कालेज छिन रहा है जबकि मेडिकल कालेज के हिसाब से 80 के दशक में ही कु. विमला वर्मा के समय सरकारी अस्पताल खुल चुका था। भाजपा और उसके जनप्रतिनिधि शायद जिले के हितों का इसलिये ध्यान नहीं रखने के आदी हो गये हैं कि बिना कुछ दिये वे चुनाव जीत जाते हैं तो फिर भला कुछ देने से क्या फायदा। रहा सवाल विपक्ष याने कांग्रेस के विधायकों रजनीश सिंह और योगेन्द्र सिंह का तो सिवनी मुख्यालय उनके क्षेत्र में नहीं आता है तो वे भी रुचि लेते नहीं दिखते है।वैसे तो एक कहावत है कि झूठ बोले कौव्वा काटे यह चरितार्थ होती है या नहीं और मुख्यमंत्री को कौव्वा काटता है कि नहीं?“मुसाफिर”   
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी
24 अगस्त 2015 से साभार
अतिथि बनाकर बुलाने पर भी गौरी भाऊ से परहेज के चलते क्या सिवनी आने से  कतराते हैं सांसद बोध सिंह?
बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद बोधसिंह भगत भी एक अलग ही मिजाज के आदमी है। यदि कोई किसी को अतिथि बनाकर बुलाता है तो ऐसा महसूस होता है कि उसे सम्मान दिया जा रहा है और उसका सीना गर्व से फूल जाता है। लेकिन सांसद भगत तो अपने ही क्षेत्र में अपनी ही पार्टी की सरकार के कार्यक्रमों में अतिथि बनाये जाने के बाद भी परहेज कर जाते हैं और शरीक नहीं होते हैं। जबकि जिले की बरघाट और सिवनी विस सीट से उन्हें लगभग 70 हजार वोटों की बढ़त मिली थी नहीं तो बालाघाट जिले के 6 विस क्षेत्रों से तो वे मात्र 20 हजार वोट की ही लीड ले पाये थे। भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सांसद जी की गौरी भाऊ से पटती नहीं हैं इसलिये वे गोल मार जाते है। विगत 20 अगस्त को व्यापम घोटाले के विरोध में जबलपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में विशाल जेल भरो आंदोलन हुआ जिसमें लगभग 20 हजार गिरफ्तारी हुयी।सभी लोगों ने अपने अपने निजी प्रयास किये और अपने नेतृत्व में अपने समर्थकों को ले जाने का प्रयास किया। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के सामने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराना ही नेताओं का लक्ष्य रहा। शिवराजसिंह चौहान ने जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात देने की घोषणा करके जनता की खूब तालियां बटोरीं थीं। लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिवनी के भाग्य से मेडिकल कालेज छिन रहा है ।  
अतिथि बनने पर भी नहीं आते सांसद बोधसिंह-बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद बोधसिंह भगत भी एक अलग ही मिजाज के आदमी है। यदि कोई किसी को अतिथि बनाकर बुलाता है तो ऐसा महसूस होता है कि उसे सम्मान दिया जा रहा है और उसका सीना गर्व से फूल जाता है। लेकिन सांसद भगत तो अपने ही क्षेत्र में अपनी ही पार्टी की सरकार के कार्यक्रमों में अतिथि बनाये जाने के बाद भी परहेज कर जाते हैं और शरीक नहीं होते हैं। जबकि जिन मतदाताओं ने उन्हें चुनकर सांसद बनाया है उनके प्रति तो उनके बहुत सारे कर्त्तव्य भी है लेकिन ना जाने क्यों वे सिवनी जिले से ना केवल मंुह चुराते है वरन यहां की समस्याओं के प्रति भी गंभीर नहीं है। जबकि जिले की बरघाट और सिवनी विस सीट से उन्हें लगभग 70 हजार वोटों की बढ़त मिली थी नहीं तो बालाघाट जिले के 6 विस क्षेत्रों से तो वे मात्र 20 हजार वोट की ही लीड ले पाये थे। भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सांसद जी की गौरी भाऊ से पटती नहीं हैं इसलिये वे गोल मार जाते है। अब भाजपा के इन दो दिग्गज नेताओं की लड़ाई का खामियाजा जिले को भुगतना पड़ रहा है। अभी हाल ही में बरघाट में नगर पंचायत में लगभग सवा करोड़ रुपयों के कामों का भूमिपूजन प्रभारी मंत्री गौरीशंकर बिसेन के द्वारा किया गया जिसमें सांसद बोधसिंह भगत और फग्गनसिंह कुलस्ते दोनों ही विशिष्ट अतिथि बनाये गये थे। इसी तरह 15 अगस्त को जिले के दलसागर तालाब में दलसागर महोत्सव आयोजित किया गया इसमें भी ओनों ही सांसद विशिष्ट अतिथि थे लेकिन दोनों ही कार्यक्रमों में सांसद कुलस्ते तो आये लेकिन बोधसिंह भगत ने हमेशा की तरह कन्नी काट लिया। जबकि बरघाट और सिवनी दोनों ही विधानसभा क्षेत्र कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र में नहीं आते है। कार्यक्रमों से परहेज करें और चाहें तो जिले में बिल्कुज ना आये लेकिन कम से कम जिले की समस्याओं के प्रति तो जागरूक रहें तो वैसा भी नहीं है। फोर लेन के मामले में जरूर उनके एक दो बयान आये लेकिन वे भी सही नहीं निकले। रामटेक गोटेगांव नई रेल लाइन और छिंदवाड़ा नैनपुर के गेज परिवर्तन के संबंध में भी ना जाने क्यों भगत जी ने चुप्पी ही साध रखी है जबकि ये तीनों ही मांगें केन्द्र सरकार से संबंधित हैं और बिना उनके प्रयास किये पूरी भी नहीं होने वाली हैं। जिले के भाजपा के इकलौते विधायक कमल मर्सकोले और दोनों भाजपा सांसदों को इसं संबंध में कारगर पहल करना चाहिये ताकि जिले के लोगों को ये मूलभूत सुविधायें मिल सकें। 
कमलनाथ के नेतृत्व में हुआ जंगी प्रर्दशनःजिले में बजी अपनी अपनी ढपली -विगत 20 अगस्त को व्यापम घोटाले के विरोध में जबलपुर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में विशाल जेल भरो आंदोलन हुआ जिसमें लगभग 20 हजार लोगों ने अपनी गिरफ्तारी दी। इस आंदोलन में जिले के कांग्रेस नेताओं ने भी अलग अलग ग्रुप में अपनी भागीदारी की है। केवलारी के इंका विधायक रजनीश सिंह के नेतृत्व में स्व. हरवंश सिंह के समर्थकों ने अपनी गिरफ्तारी दी। इसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी,राजा बघेल, असलम भाई और मोहन चंदेल सहित कई नेता शामिल थे। जबकि एक अलग ग्रुप के रूप में सिवनी विस के पूर्व प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना के नेतृत्व में उनके समर्थकों ने भी हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि व्यापम घोटाले की सी.बी.आई. जांच के बाद प्रदेश में यह पहला विशाल आंदोलन था जिसकी अगुवायी पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने की है। कांग्रेस की आक्रामक नीति के चलते ऐसे और भी आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। वेस्े तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जबलपुर संभाग के अन्य जिलों में इसमें शामिल होने के लिये कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किये थे। ऐसा दावा जिले के कांग्रेस के पदाधिकारियों का था। वैसे भी जिले में कांग्रेस या कांग्रेस के नेताओं के द्वारा कोई ऐसे संगठित प्रयास नहीं किये गये कि जिले के ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें पहुंच सकें। सभी लोगों ने अपने अपने निजी प्रयास किये और अपने नेतृत्व में अपने समर्थकों को ले जाने का प्रयास किया। ब्लाक कांग्रेस के लेवल पर भी कोई प्रयास नहीं हुये। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के सामने अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराना ही नेताओं का लक्ष्य रहा। इसीलिये सभी नेता अपनी अपनी ढपली बजाते देखे गये।
क्या मुख्यमंत्री को अपनी ही जुबान की कद्र नहीं हैं? -कई साल पहले सविनी के मिशन स्कूल की सभा में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने जिले को मेडिकल कॉलेज की सौगात देने की घोषणा करके जनता की खूब तालियां बटोरीं थीं। बीच में प्रदेश सरकार ने सदन और प्रेस कॉंफ्रेंस में दावा किया था कि केन्द्र सरकार को छिंदवाड़ा और शिवपुरी नहीं वरन मूल प्रस्ताव के अनुरुप सिवनी और सतना के प्रस्ताव भेजे गये हैं। फिर भाजपा नेताओं ने दावा किया कि यहां पीपीडी मोड का कॉलेज खुलेगा। जेकिन पीपीडी मोड के कालेजों के समय भी सरकार ने सिवनी का प्रस्ताव लंबित रख दिया और ऐसा अखबारों से पता चला है कि केन्द्र सरकार द्वारा पोषित मेडिकल कालेजों की सूची में भी पूर्व की ही भांति छिंदवाड़ा और शिवपुरी का प्रस्ताव भेज दिया गया है। अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिवनी के भाग्य से मेडिकल कालेज छिन रहा है जबकि मेडिकल कालेज के हिसाब से 80 के दशक में ही कु. विमला वर्मा के समय सरकारी अस्पताल खुल चुका था। भाजपा और उसके जनप्रतिनिधि शायद जिले के हितों का इसलिये ध्यान नहीं रखने के आदी हो गये हैं कि बिना कुछ दिये वे चुनाव जीत जाते हैं तो फिर भला कुछ देने से क्या फायदा। रहा सवाल विपक्ष याने कांग्रेस के विधायकों रजनीश सिंह और योगेन्द्र सिंह का तो सिवनी मुख्यालय उनके क्षेत्र में नहीं आता है तो वे भी रुचि लेते नहीं दिखते है।वैसे तो एक कहावत है कि झूठ बोले कौव्वा काटे यह चरितार्थ होती है या नहीं और मुख्यमंत्री को कौव्वा काटता है कि नहीं?“मुसाफिर”   
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी
24 अगस्त 2015 से साभार

Thursday, August 13, 2015

तिरंगे के भगवा और हरे रंग के पक्षधर ये ना भूले कि दोनों के बीच शांति का प्रतीक सफेद रंग भी है जिसके बिना देश की प्रगति की कल्पना संभव नहीं
आज हम 69 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। अंग्रेजों की 2 सौ साल की गुलामी के बाद आज के दिन हमें आजादी मिली थी। जिन अंग्रेजों के राज में कभी सूरज नहीं डूबता था उन्हें अहिंसा के हथियार से हमने देश से खदेड़ दिया था। हमने अपने संविधान में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का संकल्प लिया था लेकिन कुछ तबकों में फैली संप्रदायिक ताकतों के चलते  हमें देश को एक और अखंड़ रखने के लिये आजादी के बाद भी तीन तीन गांधियों,महात्मा गांधी,इंदिरा गांधी और राजीव गांधी, की शहादत देनी पड़ी। आज भी देश के कुछ हिस्सों में आतंकवाद का खतरा मंड़रा रहा है। आये दिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान युद्ध विराम और सीमाओं का उल्लंघन करके सीमा पर गोलीबारी करते रहता है। हमारे जवान ना केवल उनका मुंहतोड़ जवाब देते है वरन कई जवान तो शहीद भी हो जाते है। इसके अलावा सांप्रदायिक हिंसा की घटनायें भी हमें शर्मिंदा करती रहतीं हैं। हमें यह समझना और मानना पड़ेगा कि आतंवादियों और अपराधियों का कोई भी धर्म या मजहब नहीं होता। कोई भगवान या खुदा नहीं होता। वो सिर्फ आतंकवादी या अपराधी ही होता है। लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जो आतंकवादियों और अपराधियों में रंग के आधार पर परहेज करते है। कभी कोई हरे रंग का पक्षधर दिखायी देता है तो कभी कोई भगवे रंग के पक्ष में लामबंदी करते दिखता है। जबकि होना यह चाहिये कि आतंकवादी हो या अपराधी उससे उसके कर्मों के आधार पर व्यवहार किया जाये ना कि धर्म या जाति के आधार पर। वैसे तो हमने अपने राष्ट्र ध्वज में भी केसरिया (भगवे) और हरे रंग का प्रयोग किया है लेकिन दोनों ही रंगों के बीच में सफेद रंग पर अशोक चक्र भी बनाया है। हालांकि इन रंगो के  प्रतीक कुछ और माने गये थे लेकिन आज के परिपेक्ष्य में देखें तो भगवे और हरे रंग के पक्षधर के रूप में जो लोग भी सामने आये है वे शायद यह भूल गयें हैं कि इन दोनों रंगों के बीच में शांति के प्रतीक सफेद रंग को भी रखा गया है। ताकि सभी वर्गों और धर्मों के बीच अमन चैन और शांति बनी रहे। सिर्फ भगवे और हरे रंग से तिरंगा पूरा नहीं हो सकता जब तक कि उसके बीच में शांति का प्रतीक सफेद रंग नहीं होगा। इसलिये आज यह समय की मांग है कि देश के सभी राजनैतिक दल जात पात,धर्म मजहब, भाषा और क्षेत्रीयता की भावना को वरीयता ना दें और संविधान की मूल भावना के अनुरूप देश को एक मजबूत और विकसित धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बनाने में प्राण प्रण से जुट जायें। तो आइये आज के दिन हम यह संकल्प लें कि आतंकवादियों और अपराधियों में हम मजहब या धर्म के आधार पर हरे या भगवे रंग का पक्षधर बनने के बजाय तिरंगें के तीनों रंगों का सम्मान करते हुये आपसी भाईचारा और अमन चैन कायम करके देश को प्रगति के पथ पर तेजी से अग्रसर करने में जुट जायेंगें। 

Monday, July 27, 2015

शहर में दो गर्ल्स कॉलेज हैं या सरकार के मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने सदन में मुनमुन के सवाल का गलत जवाब दिया है? 
   सिवनी के विधायक दिनेश मुनमुन राय ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछा। इसका जवाब देते हुये प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जवाब दिया कि,सिवनी के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या माविद्यालय के पास भवन नहीं हैं इस वजह से यूजीसी से राशि नहीं मिल पा रही है। जबकि बींझावाड़ा की भूमि पर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वोरा ने गर्ल्स कालेज का भूमिपूजन किया था जिसमें कालेज भवन के साथ साथ पचास पचास सीट के दो हास्टल भी बनाये गये थे। लेकिन शहर से दूरी को मुद्दा बनाकर जब विरोध पुनः हुआ तो तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर की पहल पर उस अपने खुद के भवन को छोड़कर इस कालेज को एक बार फिर उसी जेल भवन में ले जाया गया।इसी दौरान शासकीय कन्या महाविद्यालय का नामकरण नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में कर दिया गया। लेकिन कालेज का स्थापना वर्ष तो एक ही है। व्यापम के विरोध में प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर 16 जुलाई को जिले में भी बंद का आव्हान किया गया था। कांग्रेस के इस बंद को जिल मुख्यालय लगभग सभी बड़े कस्बों में आशातीत सफलता मिलने से जिले के कांग्रेसी उत्साहित है। प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं पर पुलिस ने अश्रु गैस के गोलों के साथ जम कर लाठी भी भांजी जिसमें सिवनी जिले के बरघाट विस क्षेत्र के युवक कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र ठाकुर भी घायल हो गये और उनके हाथ की हड्डी टूट गयी।

मुनमुन के सवाल से उठे कई सवाल-सिवनी के विधायक दिनेश मुनमुन राय ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछा। इसका जवाब देते हुये प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जवाब दिया कि,सिवनी के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या माविद्यालय के पास भवन नहीं हैं इस वजह से यूजीसी से राशि नहीं मिल पा रही है। जेल भवन की भूमि को महाविद्यालय को देने के लिये उच्च शिक्षा विभाग ने अर्धशासकीय पत्र लिखकर इस संबंध में कार्यवाही करने को लिखा है। विधायक के प्रश्न और मंत्री के द्वारा दिये गये जवाब से यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या शहर के दो गर्ल्स कॉलेज है? ऐसा सवाल इसलिये उठ खड़ा हुआ क्योंकि सन 1980 के दशक में जिले में छात्राओं को उच्च शिक्षा मिले इसकी मांग उठने लगी थी। प्रदेश की तत्कालीन दबंग कांग्रेस सरकार की मंत्री कु. विमला वर्मा की पहल पर जिले के सिवनी मुख्यालय में शासकीय कन्या महाविद्यालय खोला गया था जो अपने शुरुआती दिनों में एमएलबी स्कूल में लगा था। फिर कुछ समय बाद इसे जेल के भवन में स्थानान्तरित कर दिया गया था। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा थे तब प्रदेश के उच्चशिक्षा मंत्री चित्रकांत जैसवाल जिले के प्रभारी मंत्री थे। उसी समय इस कालेज के भवन के लिये राशि स्वीकृत हुयी और जिले की प्रथ महिला कलेक्टर श्रीमती आभा अस्थाना ने निकटवर्ती ग्रात बींझावाड़ा की लगभग 40 एकड़ शासकीय भूमि चिन्हित की जिसमें से 15 एकड़ जमीन गर्ल्स कालेज के लिये आवंटित की गयी एवं शेष जमीन कलेक्टरेट सहित ऐसे शासकीय कार्यालयों को आवंटित कर दी थी जिनके स्वयं के भवन नहीं थे। इसी भूमि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री वोरा ने गर्ल्स कालेज का भूमिपूजन किया था जिसमें कालेज भवन के साथ साथ पचास पचास सीट के दो हास्टल भी बनाये गये थे। छुट पुट स्थानीय विरोध के बाद भी गर्ल्स कॉलेज नये भवन में ले जाया गया एवं आवागमन की दिक्कत को देखते हुये एक कालेज बस भी सरकार ने दिलायी थी।लेकिन शहर से दूरी को मुद्दा बनाकर जब विरोध पुनः हुआ तो तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर की पहल पर उस अपने खुद के भवन को छोड़कर इस कालेज को एक बार फिर उसी जेल भवन में ले जाया गया। और कालेज के उस भवन का तो कुछ उपयोग हो भी रहा है लेकिन हास्टल के दोनों भवन बिना चालू हुये ही खंडहर में तबदील होते जा रहे है। तात्कालिक राजनैतिक लाभ के लिये गये इस निर्णय से कालेज का कितना नुकसान हुआ इसका अंदाज तो सदन में दिये गये उच्च शिक्षा मंत्री के बयान से ही लग रहा है खुद का भवन ना होने के कारण यूजीसी के अनुदान प्राप्त नहीं हो सकते है। इससे कालेज का पूरा विस्तार ही थम गया है। इसी दौरान शासकीय कन्या महाविद्यालय का नामकरण नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में कर दिया गया। लेकिन कालेज का स्थापना वर्ष तो एक ही है। सदन में उच्च शिक्षा मंत्री गुप्ता द्वारा दिये गये बयान से प्रतीत होता है कि शहर में या तो दो गर्ल्स कॉलेज हैं या फिर उन्होंने सदन में गलत बयानी की है कि जिले के कन्या महाविद्यालय के पास अपना खुद का भवन नहीं हैं क्योंकि नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में जिले के शासकीय कन्या महाविद्यालय का ही नामकरण किया गया था। अब यह एक शोध का विषय बन गया है कि जिस कालेज का एक भवन हो और वह अपने भवन में नहीं लग रहा है तो क्या यूजीसी उसी कालेज के लिये दूसरा भवन बनाने के लिये राशि देगी? और क्या जिले की छात्राओं को दिखाये जा रहे सपने पूरे होंगें? इनके जवाब भविष्य की गर्त में छिपे हुये हैं।
व्यापम के विरोध में कांग्रेस का बंद रहा सफल-व्यापम के विरोध में प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर 16 जुलाई को जिले में भी बंद का आव्हान किया गया था। कांग्रेस के इस बंद में जिले भर में व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने का आव्हान कांग्रेस ने किया था। कांग्रेस के इस बंद को जिला मुख्यालय लगभग सभी बड़े कस्बों में आशातीत सफलता मिलने से जिले के कांग्रेसी उत्साहित है। जिस तरह से भाजपा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर बंद का विरोध किया था उससे ऐसा लगता था कि भाजपा के लोग सड़क पर उतरकर शायद बंद का विरोध करें। कुछ जानकारों का ऐसा मानना है कि भाजपा के कुछ नेताओं की ऐसी तैयारी भी थी लेकिन शहर में कांग्रेस के सभी गुट के लोगों के एक साथ सड़क पर उतर कर बंद में सहयोग देने के लिये की गयी अपील अधिक कारगर साबित हुयी और लोगों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। प्रदेश के युवाओं की योग्यता के साथ किये गये शिवराज सरकार के व्यापम के खूनी खिलवाड़ के खिल
ाफ लोगों में आक्रोश था और इसी के चलते कांग्रेस को अपने बंद में सफलता मिली। राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर कांग्रेस जिस आक्रामक तरीके से इस मामले को उठा रही है उससे प्रदेश में पहली बार भाजपा और शिवराज सिंह बेकपुट पर दिखायी दे रहे हैं। इस मामले में भाजपा आला कमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्तीफे को लेकर चाहे जो भी निर्णय ले लेकिन इस मामले से प्रदेश में भाजपा की साख को जरूर धक्का लगा है।  
घेराव के दौरान देवेन्द्र ठाकुर की हड्डी टूटी-व्यापम के विरोध की श्रृंखला में प्रदेश युवक कांग्रेस ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव की घोषणा की थी। इसमें जिले से कई युवा कांग्रेसी शरीक हुये थे। प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं पर पुलिस ने अश्रु गैस के गोलों के साथ जम कर लाठी भी भांजी जिसमें सिवनी जिले के बरघाट विस क्षेत्र के युवक कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र ठाकुर भी घायल हो गये और उनके हाथ की हड्डी टूट गयी। कांग्रेस शासनकाल में कभी ये ही भाजपा के कार्यकर्त्ता गला फाड़ फाड़ कर नारे लगाते थे कि लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी चलेगी और आज भाजपा की सरकार ही अपने मुख्यमंत्री के निवास तक लोग ना पहुंच पाये इसके लिये लाठियां भांज रही है। “मुसाफिर” 
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी
28 जुलाई 2015 से साभार 






Monday, June 15, 2015

वक्त पर सोना बाद में रोना फिर दूसरांे को कोसना ही क्या  जिले की नियति बन कर रह गयी है ?
कमलनाथ ने प्ररंभ किये भोपाल,इंदौर दिल्ली और मुबंई की  हवाई यात्रा चालू कराने के प्रयास: जिले के सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बांधसिंग भगत बैठे हैं चुप: वक्त निकल जाने पर क्या फिर दूसरों को कोसेंगे जिले के नेता?
सिवनी ।  मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले दिनों केबिनेट मीटिंग में प्रदेश की दस हवाई पट्टियों को निजी विमानन कंपनियों के उपयोग के लिये भी अनुमति दे दी है। इसमें सिवनी के साथ छिंदवाड़ा भी शामिल है। छिंदवाड़ा से हवायी यात्रा प्रारंभ कराने के प्रयास भी प्रारंभ हो गये हैं लेकिन जिले के सांसद अभी सो रहें है। वक्त पर सोना बाद में रोना और फिर दूसरों को कोसना ही क्या जिले की नियति बन कर रह गयी है।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने प्रदेश की दस हवाई पट्टियों को निजी हवाई कंपनियों के उपयोग के लिये छूट देने का निर्णय अपनी केबिनेट बैठक में कर लिया है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से इन दसों जिलों में भविष्य में यात्रियों के लिये हवाई यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध हो सकती है। प्रदेश के पिछड़े जिलों हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध होने से जिलों में औद्योगिक विकास के अवसर बढ़ते हैं क्योंकि अच्छे और बड़े उद्योगपति कम समय में यात्रा करने के लिहाज से हवाई यात्रा करना पसंद करते हैं जिससे उनके समय की बचत होती है। 
प्रदेश सरकार ने जिन दस हवाई पट्टियों को यह अनुमति दी है उनमें छिंदवाड़ा के साथ ही सिवनी भी शामिल है। इस अनुमति के मिलते ही अपने क्षेत्र को सब कुछ दिलाने की ललक रखने वाले कांग्रेस के सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ ने जबलपुर से छिंदवाड़ा होते हुये भोपाल,इंदौर दिल्ली और मुंबई के लिये हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के प्रयास भी प्रारंभ कर दिये हैं जो कि विगत दिनों अखबारों की सुर्खियां भी बने रहे। ये प्रयास कितने और कब कारगर साबित होते हैं? यह तो भविष्य की गर्त में हैं लेकिन प्रयास प्रारंभ होना भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। 
छिंदवाड़ा के साथ ही सिवनी जिले की हवायी पट्टी को भी प्रदेश सरकार यह अनुमति प्रदान की है लेकिन हमारे जिले के दोनों भाजपा सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते और बोध सिंह भगत के कोई ऐसे प्रयास प्रकाश में नहीं आये हैं कि उन्होनें जिले के लोगों को हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिये किये हो। आज जबकि देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो जिले के सांसदों को इस दिशा में प्रयास कर लोगों को यह सुविधा उपलब्ध करानी चाहिये क्योंकि जबलपुर से छिंदवाड़ा सिवनी होकर ही हवाई मार्ग भी जायेगा। लेकिन जिले के सांसदों की यह उदासीनता कहीं ऐसा ना हो कि जिले को मिल सकने वाली इस सुविधा से भी वंचित करा दे। 
अभी तक जिला ऐसी ही उपेक्षा के चलते बड़ी रेल लाइन,संभाग और मेडिकल कॉलेज जैसी उपलब्धियों से वंचित हो गया है। हर चीज को पाने के लिये समय पर प्रयास करना जरूरी होते हैं। यदि ऐसा ना किया जाये तो यह जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत क्षति ना होकर जिले की क्षति हो जाती है। बीते पंद्रह वर्षों से हमेशा यह देखा जा रहा है कि जिले के जनप्रतिनिधि वक्त पर सोते रहते हैं और फिर बाद में रोते हैं। शायद अपनी छिपाने के लिये ही फिर दूसरे को कोसने का काम चालू कर देते हैं। 
यह सब देख देख कर जिले के लोग अब यह सोचने को मजबूर हो गये हैं कि वक्त पर सोना बाद में रोना और फिर दूसरों को कोसना ही क्या जिले की नियति बन कर रह गयी है? 
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 1
16 दजून 2015 से साभार


  



शासकीय मेडिकल कॉलेज छिनने पर कमलनाथ पर आरोप लगाने वाले क्या अब सुषमा और शिवराज पर लगायेंगें आरोप? 
   प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुयी केबिनेट की बैठक में पगदेश में तीन जिलों में पी.पी.पी. मोड के मेडिकल कालेज खेलने की स्वीकृति दे दी है लेकिन इन जिलों साथ ही सिवनी जिले के लिये पूर्ण की गयी प्रक्रिया के बाद भी उसे मंजूरी ना देकर लंबित रख दिया गया है। इन जिलों में विदिशा के नाम के जुड़ने से यह एक चिंता का विषय बन गया है। केन्द्र शासन द्वारा पोषित किये जाने वाले जो मेडिकल कॉलेज प्रदेश में खुलने वाले हैं उस प्रस्ताव में भी विदिशा जिले का नाम शामिल है। पहले जिन सात जिलों के नाम प्रदेश सरकार के द्वारा बताये गये थे उनमें  प्रमुख रूप से विदिशा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा बताये गये थे। ये तीनों ही वी आई पी क्षेत्र थे । लोकसभा चुनावों के बाद और नपा तथा नगर निगम चुनावों के पहले विवाद चालू हुआ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की प्रेस कांफ्रेंस और सदन में दिये गये इस बयान से कि प्रदेश सरकार के मूल प्रस्ताव के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल कालेज सिवनी और सतना में ही खोले जायेंगें ना कि छिंदवाड़ा और शिवपुरी में । इससे विवाद हो गया था और पीपीपी  मोड के कालेज की प्रक्रिया जिले के लिश्े चालू हो गयी थी। जिला योजना समिति के चुनाव में कांग्रेस ने अपना बहुमत बना लिया है। जिला पंचायत से निर्वाचित होने वाले 14 में से 11 सदस्य कांग्रेस के चुने गये है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं रोचक चुनाव रहा नगर पालिका सिवनी के निर्वाचन का जहां से कांग्रेस के संतोष नान्हू पंजवानी ने भाजपा के अलकेश रजक को 10 के मुकाबले 14 मतों से पराजित कर दिया।  
सरकारी छिंदवाड़ा तो क्या पीपीपी मोड का  मेडिकल कालेज सुषमा ले गयीं विदिशा?-प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुयी केबिनेट की बैठक में पगदेश में तीन जिलों में पी.पी.पी. मोड के मेडिकल कालेज खेलने की स्वीकृति दे दी है लेकिन इन जिलों साथ ही सिवनी जिले के लिये पूर्ण की गयी प्रक्रिया के बाद भी उसे मंजूरी ना देकर लंबित रख दिया गया है। वैसे तो यह एक सामान्य प्रक्रिया कही जाती है लेकिन इन जिलों में विदिशा के नाम के जुड़ने से यह एक चिंता का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र शासन द्वारा पोषित किये जाने वाले जो मेडिकल कॉलेज प्रदेश में खुलने वाले हैं उस प्रस्ताव में भी विदिशा जिले का नाम शामिल है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रदेश सरकार के जिम्मेदार मंत्री और अधिकारियों के अलग अलग बयान आते रहें है। पहले जिन सात जिलों के नाम प्रदेश सरकार के द्वारा बताये गये थे उनमें  प्रमुख रूप से विदिशा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा बताये गये थे। ये तीनों ही वी आई पी क्षेत्र थे जहां से लोकसभा की तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष  एवं वर्तमान में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिंया सांछ थे। ये तीनों ही आज भी इन्हीं क्षेत्रों सांसद है। लेकिन लोकसभा चुनावों के बाद और नपा तथा नगर निगम चुनावों के पहले विवाद चालू हुआ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा की प्रेस कांफ्रेंस और सदन में दिये गये इस बयान से कि प्रदेश सरकार के मूल प्रस्ताव के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल कालेज सिवनी और सतना में ही खोले जायेंगें ना कि छिंदवाड़ा और शिवपुरी में जिन्हें तत्कालीन यू.पी.ए. सरकार ने बदल दिया था। लेकिन नगर निगम चुनाव के पूर्व छिंदवाड़ा आये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह नें आम सभा में यह घोषणा कर दी थी कि मेरे रहते कोई भी माई का लाल छिंदवाड़ा का हक नहीं छीन सकता यह मेडिकल कालेज यहीं खुलेगा ना जाने कौन ऐसी अफवाहें फैला रहा है। अब भला मुख्यमंत्री जी को यह कौन बताता कि यदि यह अफवाह है तों इसे और कोई नहीं ब्लकि उनके मंत्रीमंडल के सदस्य और स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने फैलायी है। इसके बाद छिंदवाड़ा के सांसद कमलनाथ पर एक बार फिर यह आरोप लगया जाने लगा कि वे सिवनी का हक छीन रहें हैं जबकि 2013 में जब सात जिलों के नाम घोषित किये गये थे तब उनमें सिवनी का नाम शामिल ही नहीं था। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सालों पहले सिवनी में मेडिकल कालेज खोलने की घोषणा करके सभा में तालियां बजवा चुके थे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि पी.पी.पी. माडल में मेडिकल कालेज सिवनी में खुलेगा। इसके लिये प्रक्रिया भी प्रारंभ की गयी जिसमें यह पता चला था डॉ. सुनील अग्रवाल के जिंदल ग्रुप और सुखसागर ग्रुप में से किसी को सरकार यह खोलने की अनुमति देने वाली है। पिछले दिनों जब केबिनेट की बैठक में पी.पी.पी. माडल में तीन जिलो के लिये तो मंजूरी दे दी गयी लेकिन उसमें सिवनी का नाम शामिल नहीं था ब्लकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के क्षेत्र और  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले विदिशा का नाम शामिल था जबकि केन्द्र शासन द्वारा खोले जाने मेडिकल कालेजों में विदिशा का नाम शामिल है और उसमें तो विवाद भी नहीं है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से जिले के राजनैतिक क्षेत्रों में तरह तरह की चर्चायें चाले हो गयी है। कुछ लोगों का मानना है कि या तो विदिशा में दो दो मेडिकल कॉलेज खोले जा रहें या फिर कहीं ऐसा तो नहीं कि केन्द्र शासन द्वारा खोले जाने वाले मेडिकल काफलेजों की सूची से विदिशा का नाम भी इसलिये कट गया हो क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गुड बुक में नहीं है। इसीलिये पी.पी.पी. माडल के मेडिकल कॉलेज में सिवनी का नाम रोक कर विदिशा में यह खोला जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो मेडकल कॉलेज कमलनाथ द्वारा छीने जाने का आरोप लग रहा था तो अब वही आरोप क्या विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर नहीं लगना चाहिये? यदि ऐसा हो रहा है तो जिले के भाजपा के सांसद द्वय फग्गन सिंह कुलस्ते और बोध सिंह भगत तथा विधायक कमल मर्सकोले को जिले के हित के लिये लड़ना चाहिये और यदि जरूरत हो तो इसके लिये जिले के अन्य जन प्रतिनिधियों को इसमें शामिल कर एक सशक्त पक्ष जिले का रखना समय की मांग है। 
जिला योजना समिति के कांग्रेस ने किया कब्जा -जिला योजना समिति के चुनाव में कांग्रेस ने अपना बहुमत बना लिया है। जिला पंचायत से निर्वाचित होने वाले 14 में से 11 सदस्य कांग्रेस के चुने गये है जबकि लखनादौन और बरघाट नगर पंचायत से गोल्हानी निर्विरोध चुन लिये गये हैं। जिसमें सिवनी के विधायक मुनमुन राय की विशेष भूमिका बतायी जा रही है। सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं रोचक चुनाव रहा नगर पालिका सिवनी के निर्वाचन का जहां से कांग्रेस के संतोष नान्हू पंजवानी ने भाजपा के अलकेश रजक को 10 के मुकाबले 14 मतों से पराजित कर दिया। यहां यह विशेष रूप से उल्ल्ेखनीय है कि पालिका में अध्यक्ष सहित 25 सदस्यों में से 13 भाजपा के 8 कांग्रेस के हैं। इसके बाद भी भाजपा की हार होना राजनैतिक हल्कों में चर्चित है। जबकि भाजपा ने इसी पालिका में कांग्रेस के नान्हू पंजवानी को हरा कर पहली बार अपना उपाध्यक्ष जिताया था। ऐसा क्यों और कैसे हुआ? इसे लेकर भाजपा में तरह तरह की चर्चायें चल रहीं हैं। एक तरफ कुछ भाजपा नेताओं का कहना है कि उपाध्यक्ष चुनाव के समय पार्षदों से जो वायदे किये गये थे वे कुछ पार्षदों के साथ पूरे नहीं किये गये तो इसीलिये उन्होंने अपनी नाराजगी बतायी हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ भाजपा नेता यह भी कह रहें हैं कि भाजपा के एक गुट ने जान बूझ कर भाजपा को वोट नहीं देकर हरा दिया तो कुछ यह कहने से भी नहीं चूक रहें कि सब कुछ पैसे का खेल है। अब जो भी हो लेकिन भाजपा की यह हार भाजपा के चाल चरित्र और और चेहरे को बेनकाब जरूर कर गया है। “मुसाफिर”
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 1



16 दजून 2015 से साभार

Monday, June 8, 2015

मोदी बनवा रहे राव का स्मारक लेकिन उनके सांसद रामटेक गोटेगांव रेल लाइन की राव की घोषणा  से कर रहे परहेज
   जबलपुर से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार पत्र में रामटेक से गोटेगांव व्हाया सिवनी रेल लाइन में मामले में प्रकाशित समाचार इन दिनों जिलें में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। 1996 में देश के प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने इस परियोजना की घोषणा जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में की थी। इस मांग को प्रधानमंत्री के सामने तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री और सिवनी की सांसद कु. विमला वर्मा ने रखी थी। जिले से चुने गये दोनों भाजपा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बोधसिंह भगत ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जबकि केन्द्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में कांग्रेस के दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिंहाराव का स्मारक बनाने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया है। जिपं में कांग्रेस के 11 और भाजपा के 6 और दोनो ही पार्टी के 1 1 बागी सदस्य चुन कर आये थे लेकिन अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी और भाजपा ने दोनों ही पद जीत लिये थे। इन चुनावों में जिले भर के सारे कांग्रेसी नेता लगे हुये थे और सदस्यों को मार्गदर्शन भी दे रहे थे। इस बार समितियों के चुनाव में ना तो जिले के किसी नेता ने मार्गदर्शन दियालेकिन समितियों में कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है। जिले में इस बार कमल या शिशि ठाकुर को मिल लालबत्त्ी सकती है ।  
क्या सांसद द्वय रामटेक गोंटेगांव रेल के लिये करेंगें प्रयास?-जबलपुर से प्रकाशित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार पत्र में रामटेक से गोटेगांव व्हाया सिवनी रेल लाइन में मामले में प्रकाशित समाचार इन दिनों जिलें में चर्चा का केन्द्र बना हुआ है। इस समाचार में उल्लेख किया गया है कि 1996 में देश के प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने इस परियोजना की घोषणा जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इसमें रेल्वे को नफा नुकसान नहीं देखना चाहिये क्योंकि इसके बनने से आदिवासी क्षेत्रों को विकास का मौका मिलेगा। लेकिन बीस साल होने को आ गये हैं अब तक मामला सिर्फ सर्वे तक ही पहुंच पाया है। इस समाचार के प्रकाशित होने से जिले के राजनैतिक हल्कों में कुछ सवाल हवा में तैरने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि इस मांग को प्रधानमंत्री के सामने तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री और सिवनी की सांसद कु. विमला वर्मा ने रखी थी। 1996 में कांग्रेस सरकार के दौरान ही इसके ट्रेफिक सर्वे के आदेश हो गये थे लेकिन लोस चुनाव में कांग्रेस तथा सिवनी से विमला वर्मा चुनाव हार गयीं थीं। इसके बाद उनके सक्रिया राजनीति से स्वास्थ्य कारणों से हट जाने के बाद इस योजना के लिये भले ही इंका नेता आशुतोष वर्मा सहित कई नेताओं ने आंदोलन चलाये हों लेकिन यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस योजना को स्थानीय कांग्रेस की गुटबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ा। जबकि इसके लिये शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने स्वयं भी दो बार पत्र लिख की आंदोलन को आर्शीवाद दिया था। इसके बाद लगातार अभी तक भाजपा के सांसद चुने जाते रहें लेकिन ना जाने किन राजनैतिक कारणों से उन्होंने ना केवल इस योजना के लिये कोई प्रयास किये वरन अव्यवहारिक नये नये सुझाव देकर जिले की आवाज को ही कमजोर किया । उनके पास एक बहाना भी था कि क्या करें केन्द्र में कांग्रेस की सरकार है और हमारी कोई सुनता ही नहीं हैं। लेकिन पिछले एक साल से राज्य के साथ साथ केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है लेकिन जिले से चुने गये दोनों भाजपा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते और बोधसिंह भगत ने इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जबकि केन्द्र की मोदी सरकार ने दिल्ली में कांग्रेस के दिवंगत प्रधानमंत्री नरसिंहाराव का स्मारक बनाने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया है। मोदी सरकार यदि सही में स्व. नरसिंहाराव के प्रति सम्मान प्रगट करना चाहती है तो उसे गोटेगांव सिवनी रामटेक नई रेल लाइन को मुजूरी देकर बनाना चाहिये क्योंकि यह प्रधानमंत्री के रूप में संभवतः उनकी अंतिम सार्वजनिक घोषणा थी जो अब चालू भी नहीं हो पायी है। जिले से निर्वाचित दोनों सांसद यदि इस बारे में प्रधानमंत्री से बात कर उनका ध्यानाकर्षित कराये तो तो शायद जिले को विकास के नये आयाम तक पहुचने का अवसर मिल सकता है।  
 जिपं समितियों के चुनाव में कांग्रेस का कब्जा-बीते दिनों जिला पंचायत की समितियों के चुनाव संपन्न हुये। उल्लेखनीय है कि जिपं में कांग्रेस के 11 और भाजपा के 6 और दोनो ही पार्टी के 1 1 बागी सदस्य चुन कर आये थे लेकिन अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी थी और भाजपा ने दोनों ही पद जीत लिये थे। इन चुनावों में जिले भर के सारे कांग्रेसी नेता लगे हुये थे और सदस्यों को मार्गदर्शन भी दे रहे थे लेकिन अंतिम समय में सदस्यों की राय के विपरीत उम्मीदवार थोपे जाने के कारण हार का सामना करना पड़ा था। इस समय भी कांग्रेस के कुछ नताओं की यह राय थी कि कांग्रेस के चुने हुये सदस्य काफी अनुभवी है इसीलिये पहला दौर इनके बीच ही होने दिया जाये और यदि सर्वसम्मति से ये प्रत्याशी चयन कर लेते है तो उसे मान लिया जाये लेकिन इस सलाह की अनदेखी कर दी गयी। इस बार समितियों के चुनाव में ना तो जिले के किसी नेता ने मार्गदर्शन दिया और ना ही जिला कांग्रेस ने कोई बैठक ही बुलायी फिर कांग्रेस के सदस्यों ने आपसी तालमेल से अधिकांश समितियों में अपना बहुमत बना लिया हैं और उनमें कांग्रेस का सभापति बनना तय है। जबसे जिला पंचायत का गठन हुआ है तबसे जिला पंचायत पर लगातार चार बार कांग्रेस का कब्जा रहा था लेकिन इस बार पहली बार खुद का स्पष्ट बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस अपना अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष नहीं बना पायी लेकिन समितियों में कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहने से कुछ तो संतुलन बन ही जायेगा।
कमल या शशि को मिल सकती है लालबत्ती-प्रदेश में इन दिनों मंत्रीमंड़ल विस्तार और निगमों में नियुक्ति किये जाने की चर्चायें राजनैतिक हल्कों में जारी हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की आलाकमान से इस संबंध में चर्चा भी हो चुकी हैं। इसे लेकर जिले के भाजपायी नेताओं के बीच भी लालबत्ती पाने की होड़ लग गयी है। वैसे तो शिवराज सिंह ने अभी तक अपने मंत्रीमंड़ल में शिव की नगरी सिवनी की उपेक्षा ही की है। भाजपा के तीन तीन विधायक होने के बाद भी उन्होंने  किसी को भी मंत्री नहीं बनाया था जबकि कांग्रेस के शासनकाल में हमेशा जिले से दो दो मंत्री रहें है। लेकिन इस चुनाव में भाजपा से जिले के एकमात्र विधायक कमल मर्सकोले ही है। यदि शिवराज ने शिव की नगरी सिवनी से परहेज नहीं रखा तो ऐसा माना जा रहा है कि कमल मर्सकोले  का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। वैसे शिवराज सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में नदेश दिवाकर और डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को लाल बवैसे शिवराज सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में नरेश दिवाकर और डॉ. ढ़ालसिंह   बिसेन को लालबत्ती से नवाजा था। यदि इस बार भी ऐसा ही करने की मुख्यमंत्री ने सोचा तो ऐसा माना जा रहा है कि लखनादौन क्षेत्र की दो बार विधायक रही और इस बार चुनाव हार जाने वाली आदिवासी महिला नेत्री शशि ठाकुर को किसी निगम में लालबत्ती दी जा सकती है। अब किसको क्या मिलेगा या दोनों खाली हाथ रह जायेंगें? यह तो शिवराज सिंह का पिटारा खुलने के बाद ही पता चल पायेगा। “मुसाफिर”  
सा. दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 
09 जून 2015 से साभार

Monday, May 25, 2015

मोदी सरकार की पहली सालगिरह पश्चाताप दिवस के रूप में मना रहें हैं देशवासी: आशुतोष
वायदों को चुनावी जुमला बनाया भाजपा नेताओं ने: अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है पेरा देश: जिले के पाले में भी कुछ आया नहीं: ऐसे में कैसे आयेंगें अच्दे दिन?

सिवनी। केन्द्र सरकार के एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री मोदी,भाजपा और पूरी सरकार जश्न मना रही है। लेकिन आम देशवासी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर इसे पश्चाताप दिवस के रूप में मनाने को मजबूर है। भाजपा नेता ही अपनी पार्टी के चुनावी वायदों को जुमला कहकर पल्ला झाड़ रहें हैं। जिले में भी ना फोर लेन बनी, ना बड़ी रेल लाइन आयी, ना संभाग बना,ना मेडिकल कालेज खुला और ना ही सिवनी मॉडल शहर बन पाया तो भला अच्छे दिन कैसे महसूस हो सकते हैं? प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम ने ही भाजपा को आइना दिखा दिया है। उक्ताशय के उदगार वरिष्ठ कांग्रेस नेता आशुतोष वर्मा ने प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में व्यक्त किये हैं। 
इंका नेता वर्मा ने आगे कहा है कि आगामी 26 मई को केन्द्र की मोदी सरकार का एक साल पूरा होने जा रहा है। इसे जश्न के रूप में मनानें के लिये मोदी सरकार और भाजपा युद्ध स्तर पर तैयारियां कर रही है। प्रधानमंत्री सहित तमामा वरिष्ठ नेता रैलियां आदि करके मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान करेगें। लेकिन आम देशवासी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और इस दिन को पश्चाताप दिवस के रूप में मनाने को मजबूर हो गया है।
इंका नेता आशुतोष वर्मा ने विज्ञप्ति में उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री मोदी सहित भाजपा के तमाम नेताओं ने जनता से जो भी वायदे किये थे उन्हें सरकार बनने के बाद भाजपा ने भुला दिया। इतना ही नहीं ब्लकि इन चुनावी वायदों को एक जुमला करार देकर भाजपा नेताओं ने देश की भोली भाली जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। आज वह इस बात का पश्चाताप कर रहा है कि क्यों उसने इन पर भरोसा किया। इसीलिये आम मतदाता आज पश्चाताप कर रहा है क्योंकि अच्छे दिन आये नहीं,ना तो काला धन वापस आया और खाते में 15 लाख रु. जमा हुये,विदेशों में पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने देश की पिछली सरकार पर खेद जनक टिप्पणियां की ह,ैंअंर्तराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने के बाद भी पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ रहें हैं,मंहगायी बढ़ रही है,नव युवक आज भी रोजगार की राह तक रहें हैं,आतंकवादियों को बिरयानी खिलाने के आरोप लगाने वाले उन्हें फांसी देने के बजाय छोडरहे है, पाकिस्तान के खिलाफ दहाड़ने वाले अब उसकी हरकतों पर खामोश है,विदेश मंत्री देश में और प्रधानमंत्री विदेश में पाये जा रहें हैं,पूंजी पतियों के आये अच्छे दिन और किसान कर रहें हैं आत्म हत्या,देश में मोदी के और विदेश में रुपये के भाव लगातार गिर रहें हैं,बदलाव की बात करने वाले मोदी बदले की राजनीति कर रहें हैं,इतिहास में पहली बार देश के प्रधानमंत्री के विदेश में पुतले जले,कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात करके चुनाव लड़ने के बाद उसका समर्थन करने वाले मुफ्ती के साथ सरकार बनाने डाली।
जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा ने आगे उल्लेख किया है कि जिले के मतदाताओं ने भी भाजपा के वायदों पर विश्वास कर अच्छे दिन आने की आस में जिले के दोनों भाजपा प्रत्याशियों को प्रचंड़ बहुमत से जिता दिया था। लेकिन एक साल पूरा होने के बाद भी फोर लेन बनी नहीं, बड़ी रेल लाइन आयी नहीं, रामटेक गोटेंगांव रेल लाइन को बजट नहीं, मेडिकल कॉलेज खुला नहीं, संभाग बना नहीं और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी शहर माडल शहर नहीं बन पाया। इन हालातों में अच्छे दिन तो महसूस हुये ही नहीं इसलिये लोग पश्चाताप दिवस मना रहें हैं। 
इंका नेता वर्मा ने प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश की एक विधानसभा सीट के हाल ही में हुये उप चुनाव का हवाला देते हुये कहा है कि विगत माह भाजपा की एक परंपरागत सीट पर उप चुनाव हुआ था जिसमे जीत सपा की हुयी दूसरे स्थान पर कांग्रेस रही और जनता ने भाजपा को तीसरे स्थान पर ढकेल कर अपने गुस्से का इजहार कर प्रधानमंत्री मोदी और समूची भाजपा को आइना दिखा दिया है।