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Sunday, September 19, 2010

राजनैतिक रूप से चौंकाने वाले है अनुसुइया के दौरे-

पहले तो बुलाने से भी नहीं आतीं थीं। अब कुछ दिनों से आने के बहाने ढ़ूढ़तीं हैं। चौंकिये नहीं हम बात कर रहें हैं पड़ोसी छिन्दवाड़ा जिलक की भाजपा नेत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुश्री अनुसुइया उइके की। भाजपायी बताते हैं कि पहले कई बार जिलें के कई कार्यक्रमों में जब उन्हें आमन्त्रित करते थे तो वे किसी ना किसी बहाने टाल जातीं थीं। लेकिन कहते हैं कि आजकल वे सिवनी आने के बहाने तलाशतीं हैं। उनके राज्यसभा का तीन चौथाई कार्यकाल भी समाप्त हो चला हैं। आजकल राज्यसभा के लिये प्रदेश को भाजपा ने बाहरी नेताओं का चारागाह बना दिया हैं। इसलिये हर बार एक ना एक राष्ट्रीय नेता प्रदेश से चुनकर राज्यसभा में जा रहा हैं। इसलिये आगे क्या होगा यह कहना आज तो सम्भव नहीं हें लेकिन राज्यसभा के दूसरे कार्यकाल के लिये टिकिट ला पाना उतना आसान भी नहीं हो पायेगा। वैसे सुश्री उइके प्रदेश में पटवा ग्रुप की मानी जाती हैं और उनके ही बल पर वे आज इस मुकाम पर हैं। पटवा जब छिन्दवाड़ा से कमलनाथ को हरा कर सांसद बने थे तब अनुसुइया ने उनका बहुत काम किया था। इसी चुनाव में तत्कालीन मन्त्री एवं केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह पर कमलनाथ को हराने के आरोप भी लगे थे। प्रदेश के मुख्यमन्त्री भी पटवा के ही अनुयायी माने जाते हैं। कुछ दिनों से जबलपुर संभाग के सर्वमान्य आदिवासी नेता फगग्नसिंह कुलस्ते से शिवराज की पट नहीं रही है। वे इस बार मंड़ला लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी हार गये हैं। नये परिसीमन में जिले की लखनादौन और केवलारी विस सीट मंड़ला लोकसभा क्षेत्र में ही आती हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि अनुसुइया 1993 में जिले के लखनादौन विस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकीं हैं। केवलारी क्षेत्र से तो अभी भी भाजपा ही जीती हैं। इन सब राजनैतिक कारणों सें सुश्री उइके के इन दौरों को नज़र अन्दाज नहीं किया जा सकता। यह भी हो सकता हें कि कुलस्ते की जड़ों में मट्ठा डालने के लिये इन दौरों को शिवराज का भी समर्थन हासिल हो। सुश्री उइके अपनी सांसद निधि से विकास कार्यों के लिये राशि भी दे रहीं हैं। वैसे उनके सभी कार्यक्रम सामाजिक रूप से आयोजित हों रहें हें लेकिन इनमें हो सकने वाली राजनीति से अनजान बने रहना एक भूल भी हो सकती हैं।वैसे तो प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष होने के नाते उनका कार्यक्रम कोई अनुचित नहीं कह सकता लेकिन कुछ भाजपाइयों के इन कार्यक्रमों में परहेज से तो यही लगता हैं कि हो ना हो इन दौरों के पीछे कोई उच्च स्तरीय राजनीति जरूर हैं।
क्या राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप हो पायेंगें युवक कांग्रेस के चुनाव?

कांग्रस महासचिव राहुल गांधी की मंशा के के अनुरूप मध्यप्रदेश में भी युवक कांग्रेस के चुनाव होने वाले हें। इसी सिलसिले पिछले दिनों प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी सिवनी आये थे जो एक बार फिर अध्यक्ष बनना चाहते हैं। बीते दिनों प्रदेश एन.एस.यू.आई. की पूर्व अध्यक्ष सुश्री रिश्म पवार बालाघाट जाते वक्त सिवनी में भी रुकीं। जिले के युवा इंका नेता आसिफ इकबाल के नेतृत्व में युवकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना,जकी अनवर,गीता ठाकुर,डी.वी.नायर,प्रदीप राय आदि नेता उपस्थित थे। लेकिन जिला इंका ें पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम से किनारा काट लिया। और तो और जिला युवा इंका ग्रामीण एवं शहर के अध्यक्ष रंजीत यादव और देवी सिं चौहान भी कहीं नज़र नहीं आये। वैसे भी सिवनी जिला राहुल गांधी के आम अरदमी के सिपाही कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वयक राजा बघेल का गृह जिला हैं। वे भी इस कार्यक्रम में कहीं नहीं थे। हालांकि इस कार्यक्रम में गुटबाजी से दूर रहकर कांग्रेस को मजबूत करने का आव्हान किया गया लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के समर्थक कांग्रेसी कार्यक्रम में जनर नहीं आये। ऐसे में जिले में राहुल गांधी की आशा के अनुरूप युवक कांग्रेस कैसे काम करेगी?इसका तो भगवान ही मालिक हैं। जिले में तो इा बात की भीह संभावना बहुत कम हैं कि जिले में युवक कांग्रेस के चुनाव भी तरीके से हो जाये और पदाधिकारी नेताओं की जेब के बजाय कार्यकत्ताZओं के बीच से चुना जा सके। यह आशंका हाल ही में हुये जिला इंका के चुनावों की में की गई मनमानी से और भी अधिक बलवती हो रही हैं।



क्या राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप हो पायेंगें युवक कांग्रेस के चुनावर्षोर्षो

कांग्रस महासचिव राहुल गांधी की मंशा के के अनुरूप मध्यप्रदेश में भी युवक कांग्रेस के चुनाव होने वाले हें। इसी सिलसिले पिछले दिनों प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी सिवनी आये थे जो एक बार फिर अध्यक्ष बनना चाहते हैं। बीते दिनों प्रदेश एन.एस.यू.आई. की पूर्व अध्यक्ष सुश्री रिश्म पवार बालाघाट जाते वक्त सिवनी में भी रुकीं। जिले के युवा इंका नेता आसिफ इकबाल के नेतृत्व में युवकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना,जकी अनवर,गीता ठाकुर,डी.वी.नायर,प्रदीप राय आदि नेता उपस्थित थे। लेकिन जिला इंका ें पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम से किनारा काट लिया। और तो और जिला युवा इंका ग्रामीण एवं शहर के अध्यक्ष रंजीत यादव और देवी सिं चौहान भी कहीं नज़र नहीं आये। वैसे भी सिवनी जिला राहुल गांधी के आम अरदमी के सिपाही कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वयक राजा बघेल का गृह जिला हैं। वे भी इस कार्यक्रम में कहीं नहीं थे। हालांकि इस कार्यक्रम में गुटबाजी से दूर रहकर कांग्रेस को मजबूत करने का आव्हान किया गया लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के समर्थक कांग्रेसी कार्यक्रम में जनर नहीं आये। ऐसे में जिले में राहुल गांधी की आशा के अनुरूप युवक कांग्रेस कैसे काम करेगीर्षोर्षो इसका तो भगवान ही मालिक हैं। जिले में तो इा बात की भीह संभावना बहुत कम हैं कि जिले में युवक कांग्रेस के चुनाव भी तरीके से हो जाये और पदाधिकारी नेताओं की जेब के बजाय कार्यकत्ताZओं के बीच से चुना जा सके। यह आशंका हाल ही में हुये जिला इंका के चुनावों की में की गई मनमानी से और भी अधिक बलवती हो रही हैं।



क्या राहुल गांधी की मंशा के अनुरूप हो पायेंगें युवक कांग्रेस के चुनावर्षोर्षो

कांग्रस महासचिव राहुल गांधी की मंशा के के अनुरूप मध्यप्रदेश में भी युवक कांग्रेस के चुनाव होने वाले हें। इसी सिलसिले पिछले दिनों प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी भी सिवनी आये थे जो एक बार फिर अध्यक्ष बनना चाहते हैं। बीते दिनों प्रदेश एन.एस.यू.आई. की पूर्व अध्यक्ष सुश्री रिश्म पवार बालाघाट जाते वक्त सिवनी में भी रुकीं। जिले के युवा इंका नेता आसिफ इकबाल के नेतृत्व में युवकों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार खुराना,जकी अनवर,गीता ठाकुर,डी.वी.नायर,प्रदीप राय आदि नेता उपस्थित थे। लेकिन जिला इंका ें पदाधिकारियों ने इस कार्यक्रम से किनारा काट लिया। और तो और जिला युवा इंका ग्रामीण एवं शहर के अध्यक्ष रंजीत यादव और देवी सिं चौहान भी कहीं नज़र नहीं आये। वैसे भी सिवनी जिला राहुल गांधी के आम अरदमी के सिपाही कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वयक राजा बघेल का गृह जिला हैं। वे भी इस कार्यक्रम में कहीं नहीं थे। हालांकि इस कार्यक्रम में गुटबाजी से दूर रहकर कांग्रेस को मजबूत करने का आव्हान किया गया लेकिन जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के समर्थक कांग्रेसी कार्यक्रम में जनर नहीं आये। ऐसे में जिले में राहुल गांधी की आशा के अनुरूप युवक कांग्रेस कैसे काम करेगीर्षोर्षो इसका तो भगवान ही मालिक हैं। जिले में तो इा बात की भीह संभावना बहुत कम हैं कि जिले में युवक कांग्रेस के चुनाव भी तरीके से हो जाये और पदाधिकारी नेताओं की जेब के बजाय कार्यकत्ताZओं के बीच से चुना जा सके। यह आशंका हाल ही में हुये जिला इंका के चुनावों की में की गई मनमानी से और भी अधिक बलवती हो रही हैं।

























































Saturday, September 18, 2010

तार तार हुयी भाजपा में अनुशासन की चादर -

कभी पूरे देश में भाजपा सबसे अधिक अनुशासित पार्टी मानी जाती थी। भाजपा को भी इस बात पर नाज था। लेकिन राज पाठ मिलते ही ऐसा राजरोग लगा कि यह सब कुछ गायब ही हो गया। हाल ही में झारखंड़ में मुंड़ा की हुयी ताजपोशी के समारोह में यह सब कुछ पूरी तरह खुल गया। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवानी सहित द्वितीय पंक्ति के कई राष्ट्रीय नेता शामिल नहीं हुये। आज भाजपा में ऊपर से लेकर नीचे तक यही हाल हैं। कहीं मुख्यमन्त्री और प्रदेश अध्यक्ष दो छोर पर खड़े दिखायी दे रहें हें तो कहीं जिले में भाजपा कई गुटों में बंटी दिखायी दे रही हैं। जिले में तो हालात यहां तक पुंहच गये हैं कि पार्टी के नेता ही एक दूसरे के खिलाफ अखबारबाजी कराने से भी नहीं चूक रहें हैं। समन्वय बनाने का काम जिन संगठन मन्त्री के जिम्मे हैं वे खुद ही कभी किसी के तो किसी के पक्षधर बन कर एक पार्टी बन जाते हैं। यही कारण हें कि संगठन मन्त्री खुद ही ना केवल विवादों के घेरे में आ गये हैं वरन अखबारों में सुखीZ भी बन रहें हैं।फिर यह तो एक सिद्धान्त ही हैं कि ताल मेल बनाने का काम करने वाला यदि खुद ही अपनी पसन्द और नापसन्दगी के दायरे में घिर जाये तो फिर वो काम या योग्यता के अधार पर सभी कार्यकत्ताZओं के साथ न्याय नहीं कर सकता हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों जिला भाजपा में हो रहा हैं। कई गुटों में बंटी जिला भाजपा में समन्वय के आभाव में एका नहीं हो पा रहा हैं। भाजपायी भी कांग्रेसियों का विरोध करने के बजाय अपने आपस में ही गला काट प्रतियोगिता में लगे हुये हैं। वो तो भला हो कि कांग्रेस और उसके इकलोते छत्रप हरवंश सिंह से चुनावी नूरा कुश्ती सेट हो जाती हैं जिसके चलते भाजपा चुनावी वैतरणी पार कर लेती हैं वरना जिस दिन यह नूरा कुश्ती टूट जायेगी उस दिन जिले में भाजपा को एक सीट जीतने के भी लाले पड़ जायेंगें। अन्यथा भजपा का आला नेतृत्व इस बात की पड़ताल करा ले कि कब कौन सा विधायक किन कारणों से तीजा और कब कब भाजपा केवलारी में किन किन कारणों से हारीर्षोर्षो कुुल मिलाकर वर्तमान में यह तो कहा ही जा सकता हैं कि भाजपा को अनुशासन की जिस चादर पर नाज था वह आज तार तार हो चुकी हैं।

Thursday, September 16, 2010

कलेक्टर का पत्र संशोधित करायें शिवराज

सुप्रीम कोर्ट के खुलासे से हुआ स्पष्ट :कुरई घाटी छोड़कर पेड़ काटने की स्थगित अनुमति बहाल की जाये

प्रदेश सरकार जिला कलेक्टर को इस बाबद निर्देश जारी करें कि फोर लेन मामले में पूर्व में जारी गये आदेश को संशोधित करें और विवादास्पद कुरई घाटी के क्षेत्र को छोड़कर शेष जगह पेड़ काटने के लिये पदान की गई अनुमति को यथावत रखें । सुप्रीम कोर्ट के खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया हैं कि शेष जगह जो काम रुका हैं वह कलेक्टर के उसी पत्र के कारण रुका हैं।

उक्ताशय के तथ्य प्रस्तुत करतें हुये इंका नेता आशुतोष वर्मा ने मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान को एक पत्र भेजा हैं। पत्र की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व औऱ जिला कलेक्टर को भी भेंजी गई हैं। पत्र में बताया गया हें कि उत्तर दक्षिण कारडोर का निर्माण हो रहा हैं जिसमें सिवनी जिले के लखनादौन से लेकर खवासा तक निर्माण कार्य जारी था। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में पेंच टाइगर रिर्जव के हिस्से को लेकर एक याचिका विचाराधीन हैं। इस याचिका में जिले के नागरिक भी जनमंच के माध्यम से हस्तक्षेपकत्ताZ हैं। आपने भी राज्य सरकार की ओर वकील नियुक्त किया हैं।

इंका नेता वर्मा ने पत्र में आगे यह भी उल्लेख किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पिछली 13 सितम्बर की पेशी में यह खुलासा किया हैं कि कुरई घाट के 8.57 कि.मी. के विवादित हिस्से को छोड़कर शेष भाग के निर्माण में कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगायी हैं। लेकिन सी.ई.सी. के प्रदेश के मुख्य सचिव को संबोधित पत्र के आधार पर जिला कलेक्टर पी.नरहरि ने दिनांक 18 दिसम्बर 2008 को राज्य शासन की अनुशंसा की प्रत्याशा में वन भूमि और गैर वन भूमि में पेड़ कटाई की पूर्व में जारी की गई अनुमति को स्थगित कर दिया था और पेड़ कटाई प्रतिबंधित कर दी थी। जिससे निमार्ण कार्य रुक गया हैं। ऐसा भी विदित हुआ हें कि जिला कलेक्टर के इस पत्र में उल्लेखित राज्य शासन की अनुशंसा अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं जिसकी प्रत्याशा में जिला कलेक्टर ने आदेश जारी किये थे।

मुख्यमन्त्री को भेजे गये पत्र में इंका नेता वर्मा ने बताया हैं कि जिले में लगभग 38 कि. मी. रोड़ का निर्माण कार्य रुका हुआ हैं। ऐसी परिस्थिति में कोर्ट के इस खुलासे के बाद लगभग 30 कि.मी. रोड़ का निर्माण कार्य शुरू हो सकता हैं। इस हेतु यह आवयक हैं कि प्रदेश सरकार अब नये निर्देश जारी करे और कलेक्टर सिवनी के पत्र को संशोधित कर मात्र विवादास्पद 8.57 कि.मी के विवादित क्षेत्र भर में पेंड़ कटाई प्रतिबंधित रहे तथा शेष इलाके में इस हेतु लगाया प्रतिबंध समाप्त किया जाये ताकि निर्माण कार्य प्रारंभ हो सके।

इंका नेता आशुतोष वर्मा ने सरकार को हो रहे नुकसान की जानकारी देते हुये लिखा हें कि यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि एन.ए.एच.आई. द्वारा ठेकेदार को बाधामुक्त जमीन उपलब्ध ना कराने के कारण प्रतिदिन लाखों रुपयों की छतिपूर्ति देना होगा जो अभी लगभग 200 करोड रुपये हो चुकी हैं। इस सम्बंध में जिला कलेक्टर सिवनी ने अपने पत्र दिनांक 19 दिसम्बर 2008 के माध्यम से राज्य शासन का ध्यानाकषिZत कराया था लेकिन इस पत्र आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुयी हैं।

पत्र के अन्त में इंका नेता ने अनुरोध किया हैं कि प्रदेश सरकार शीघ्र जिला कलेक्टर सिवनी के उक्त पत्र दिनांक 18 दिसम्बर 2008 में संशोधन करने के निर्देश जारी करें जिसके कारण कॉरीडोर के निर्माण का कार्य रुका हुआ हैं वह शीघ्र ही प्रारंभ हो सके।

Tuesday, September 14, 2010

शिव की नगरी सिवनी को फिर निराश करेंगें शिवराज?


राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के भाजपायी हल्कों में इस बात की तेजी से चर्चा चल रही हैं कि प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान गणेश उत्सव के दौरान ही निगम और मंड़लों में नामांकन करके भाजपाइयों को गणेश जी के प्रसाद के रूप में मोदक खिलाने वाले हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि शिवराज ने शिव की नगरी सिवनी को निराश ही किया हैं। जिले के चार में से तीन विधायक भाजपा के रहते हुये भी किसी को भी मन्त्रीमंड़ल में नहीं लिया। प्रदेश के चार सांसदों को भाजपा ने विधानसभा के टिकिट दिये थे। जीतने के बाद चार में से तीन को मन्त्री बना दिया लेकिन सिवनी की नीता पटेरिया को मन्त्री नहीं बनाया।

राजनैतिक क्षेत्रों में जारी चर्चाओं के अनुसार पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, जिनकी टिकिट भाजपा ने काट दी थी, के साथ पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन भी निगम या मंड़ल के अध्यक्ष पद के सशक्त दावेदार हैं।लेकिन सदैव की भान्ति शायद इस बार भी शिव की नगरी सिवनी के भाजपाइयों शिव के पुत्र गणेश के जन्मोत्सव में बांटे जाने वाले मोदकों का आनन्द शायद ही उठाने को मिले।

वैसे तो ऐसी चर्चायें सरकार बनने के बाद से कई बार चली लेकिन शिवराज ने अपना पिटारा नहीं खोला। इस बार भी यदि गणेशोत्सव में मोदक का प्रसाद नहीं मिला तो फिर पितृ पक्ष में तो मिलने से रहा और जब इतने दिन के लिये बात टल जायेगी तो फिर ना जाने कब तक के लिये बात टल जाये?इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता हैं।

Sunday, September 12, 2010

भीमगढ़ जलावर्धन योजना

भाजपा इंका की नूरा कुश्ती का खामियाजा भोगा शहर ने

1 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि बिजली बिल में समायोजित : थम गया हैं विकास का पहिया : 13 करोड़ बिजली का बिल बाकी : राजेश,नीता,के.डी.,शिवराज कुछ करेंगें या मूक दर्शक बन देखेंगें तमाशा

जिले के लिये वरदान मानकर बनायी गई भीमगढ़ जलावर्धन योजना अब अभिशाप बन गई हैं। योजना के निर्माण में हुये भारी भ्रष्टाचार के कारण यह योजना तकनीकी स्वीकृति के अनुसार काम नहीं कर रही हैं। इसीलिये इस योजना को बिजली का बिल 13 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया हैं। इंका भाजपा की नूरा कुश्ती के कारण आज तक इस योजना की जांच नहीं हो पायी। प्रदेश की भाजपा सरकार ने नगर विकास के लिये मिलने वाली 1 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि काटकर बिजली के बिल भुगतान में समायोजित कर ली हैं। इसका खामियाजा पूरा शहर भुगतेगा। क्या रोड़ शो करके भाजपा को जिताने आये शिवराज शहर के लोगों को राहत दिलायेंगेंर्षोर्षो यह सवाल राजनैतिक गलियारों में गूंज रहा हैं।

यहां यह उल्लेखनीय हैं कि शहर की सन 2021 तक की अनुमानित 1 लाख 20 हजार आबादी को दोनों समय में 12 एम.एल.डी. पाने देने के लिये बनायी गई थी। इस परियोजना के संचालन में तकनीकी स्वीकृति के अनुसार शहर को दोनो समय 12 एम.एल.डी. पानी देने पर 57 लाख यूनिटों की खपत होनी चाहिये। इसमें शहर की चारों टंकिया, जिनकी कुल क्षमता 5.40 एम.एल.डी. हैं, को 22 घंटों में दो बार भरना चाहिये था। लेकिन हर व्यक्ति यह बात जानता हैं कि आज तक एक बार भी टंकिया ओनों टाइम नहीं भरी जा सकीं वरन 20 घंटें में बमुश्किल एक बार ही टंकिया भर जा रही हैं। इसके बावजूद भी आधा पानी मिलने पर पर दो गुना बिजली का बिल आ रहा हैं। यही राशि बढ़कर आज 13 करोड़ से भी अधिक हो गई हैं।

शहर के लिये वरदान मान कर बनासयी इस जलावर्धन योजना को बनाने में ऐसा भ्रष्टाचार हुआ कि बनते से ही यह योजना वरदान के बजाय अभिशाप बन गई हैं। यह योजना कांग्रेस शासन काल में पी.एच.ई.मन्त्री हरवंश सिंह के कार्यकाल में पूरी हुयी थी। जिसमें हुये भ्रष्टाचार को लेकर एक भाजपा नेता ने दुगाZ मंड़प में झांकी भी लगायी थी।योजना को बनवाने का श्रेय लेने वाले नेता तो भागीरथ बन गये लेकिन भ्रष्टाचार के नंगे नाच ने गंगा को ही कर्जदार बना डाला हैं। इसकी जांच के लिये कई जतन किये गये लेकिन जांच नहीं हो पायी। इंका नेता आशुतोष वर्मा ने कांग्रेस शासनकाल में पोस्टकार्ड अभियान चलाया। इसी दौरान उनके अनुरोध पर पालिका के अध्यक्ष विजय चौरसिया के कार्यकाल में 22 पार्षदों की मांग पर परिषद की अभियाचित बैठक दिनांक 6 फरवरी 2003 को परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके राज्य शासन से मांग की थी कि इस योजना की जांच की जाये कि आधा पानी मिलने पर भी दुगना बिजली का बिल कैसे आ रहा हैंर्षोर्षो इसके बाद भाजपा शासनकाल में जिला भाजपा अध्यक्ष वेदसिंह ठाकुर ने भी इस परियोजना की जांच की मांग की थी। लेकिन इस परियोजना में भ्रष्टाचार करने वालों की जड़े इतनी गहरी थीं कि कोई भी आज तक जांच नहीं करा पाया हैं। भाजपा और इंका की इस नूरा कुश्ती का खामियाजा आज पूरा भुगत रहा हैं रहा है जबकि प्रदेश की शिवराज सरकार ने शहर विकास के लिये मिलने वाली राशि में से एक करोड़ 25 लाख रुपये की राशि एक मुश्त बिजली के बिल में समायोजित कर ली।

नगर पालिका चुनाव में भाजपा को जिताने के लिये प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने रोड़ शो करके सड़क सड़क वोट मांगे थे। जनता ने उनके प्रत्याशी को जिताया भी हैं। लेकिन आज उनकी ही सरकार ने शहरवासियों के मुंह से निवाला छीन लिया हैं। शिवराज के चुनाव में किये गये विकास के दावे खोखले साबित हो रहें हैं। पिछले पन्द्रह सालों से लगातार बिजली के बिल का भुगतान पूरा नहीं हो रहा हैं। पालिका करीब 13 करोड़ रुपये से भी अधिक बिल देना बाकी हैं। क्या भाजपा के पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी अपने राजनैतिक सम्बंधों का लाभ शहर के लोगों को भी दिलायेंगेंर्षोर्षोक्या शिवराज शहर के लोगों को इस अभिशाप से निजात दिलाने के लिये सरकार से अनुदान दिलायेंगेंर्षोर्षो क्या भाजपा विधायक नीता पटेरिया शहर के नागरिकों की सुध लेकर विधानसभा में प्रश्न उठाकर इस योजना की जांच की मांग करेंगींर्षोर्षो क्या भाजपा सांसद के.डी.देशमुख संसद में इस बारे में कुछ करेंगेंर्षोर्षो या सभी चुप रहकर तमाशा देखते रहेंगें और शहर के नागरिक इन नेताओं की नूरा कुश्ती का खामियाजा ऐसे ही भुगतते रहेंगें।



Saturday, September 11, 2010

अमन चैन के लिये अपराधियों में धर्म या मजहब तलाशना बन्द करें

अपराध अपराध होता हैं। गुनाह गुनाह होता हैं। अपराधी अपराधी होता हैं। गुनहगार गुनहगार होता हैं।दंगाई दंगाई होता हैं। इनका कोई धर्म या मजहब नहीं होता। इनके ना तो परवरदिगार होते हैं और ना ही भगवान होते हैं। ये ना तो पूजा में विश्वास करते हैं और ना ही इबादत में। इनके ना तो कोई पूजा स्थल होते हैं और ना ही इबादतगाह होते हैं। समाज और राजनेता इनमें यदि धर्म और मजहब तलाशना बन्द कर दे और अपराधियों को सिर्फ अपराधी, गुनहगारों को सिर्फ गुनहगार तथा दंगाइयों को सिर्फ दंगाई मानकर चले तो ज्यादातर फसादों का तो वैसे ही खात्मा हो जायेगा।

आज समस्या इसी बात की हैं कि इन तत्वों में समाज और राजनेता धर्म और मजहब को तलाशने लगे हैं। राजनेता अपनी सुविधा और लाभ के लिये ऐसे तत्वों को संरक्षण देकर बवाल खड़ा करने में भी कोई संकोच नहीं करते हैं। यही मूल कारण है कि जब देखो तब सांप्रदायिक दंगों की आग में कई शहर कई बार धधक जाते हैं और आग जब लगती हैं तो वह यह नहीं देखती कौन आग लगाने वाले धर्म या मजहब का हैं और कौन दूसरे मजहब या धर्म का हैं? वह अपनी चपेट में सबको समेट लेती हैं और सब कुछ जलाकर खाक कर देती हैं।

स्वामी विवेकानन्द जी ने यह कहा है कि इस देश में कोई भी बड़ा सामाजिक,आर्थिक या राजनैतिक परिवर्तन धर्म के माध्यम से ही सम्भव हैं। इसे मूल मन्त्र मानकर कई राजनेताओं ने धर्म और राजनीति का घालमेल कर दिया हैं। राजनीति यदि धर्म के नियन्त्रण में रहे तो ठीक हैं लेकिन होने यह लगा हें कि राजनेता धर्मावलंबी लोगों की घार्मिक भावनायें भड़का कर अपनी राजनीति चमकाने में लग जातेे हैं। फिर वे ये भी नहीं देखते कि जिस जगह मन्दिर या मिस्जद बनाने की बात कर रहें हैं वह जगह ही मानव मात्र के खून से रंग गई हैं। आदमी के खून से लाल हुयी ऐसी जमीन पर बनी इमारत में ना तो भगवान का वास होगा और ना ही परवरदिगार का। और भला होगा भी कैसे ? जिन्हें पूजा या इबादत करना हैं जब उनका ही खून उसे बनाने के लिये बहा हों तो भला भगवान या खुदा उसे कैसे माफ कर सकते हैं ?

Þईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवानß आजादी के छ: दशक बाद भी बापू की लाइनों की देश को जरूरत हैं। आज आवश्यक्ता इस बात की हैं कि धर्म या मजहब का नियन्त्रण धर्माचार्यों और मौलवियों के हाथों में रहे और प्रजातन्त्र में शासन चलाने का काम राजनेताओं के नियन्त्रण में रहे। इन दोनों में घालमेल ना हो। साथ यह भी आवश्यक हैं कि अपराधियों और गुनहगारों में धर्म और मजहब को तलाशने तथा उस आधार पर संरक्षण देने का काम भी बन्द हो। प्रशासनिक अमला भी इन आपराधिक तत्वों के नियन्त्रण में राजनैतिक हस्तक्षेप को बरदाश्त ना करें और कड़ाई से कार्यवाही करें। ऐसा सब कुछ हो जाये तो आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सदभाव देश में हमेशा बना रहेगा।



आशुतोष वर्मा

16 शास्त्री वार्ड

सिवनी म.प्र.

09425174640