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Monday, August 26, 2013

जिला मुख्यालय की सीट से टिकिट के लिये इंका और भाजपा में मची भारी घमासान से राजनैतिक हल्कों में  सरगर्मी बढ़ी
 जिला मुख्यालय की राजनैतिक रूप से सर्वाधिक मूहत्वपूर्ण सिवनी विधानसभा सीट के लिये टिकिट की मारामारी कांग्रेस और भाजपा में तेज हो गया हैं। पिछले पांच चुनावों से भाजपा इस सीट से जीत रही है। इसलिये भाजपा नेताओं का मानना है कि सिर्फ टिकिट मिल जाये जीतना तो सुनिश्चित है ही। जिले की कांग्रेसी राजनीति में केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का सीधा हस्तक्षेप बढ़ गया है इसीलिये राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जिले में कांग्रेस की चुनावी रणनीति में होने ंवाला आमूल चूल परिवर्तन भाजपा की डगर आसान नहीं रहने देगा और जिले चारों विस क्षेत्रों में बिना कठिन परिश्रम किये जीतना संभव नहीं होगा। कांग्रेस भी टिकिट की लड़ायी में उलझी हुयी हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में टिकटार्थियों के लिये बनाये गये मानदंड़ और टिकिट का आवेदन लगाने वालों से मांगी गयी जानकारियों के कारण समीकरण काफी उलझ गये है। वैसे कांग्रेस इस द्वोत्र से 1990 से चुनाव हार रही हैं। लेकिन यह भी राजनैतिक रूप से कम महत्वपूर्ण बात नहीं है कि इस क्षेत्र से टिकिट मांगने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। इस बार कांग्रेस और भाजपा के आलाकमान ने टिकिट देने की प्रक्रिया निर्धारित की है उससे एक बात तो हुयी है कि चुनाव लड़नें इच्छुक नेता जो मंड़ल या ब्लाक के पदाधिकारियों को अपने आधीन समझते थे उन्हें अपनी ही टिकिट ले लिये उनके दर पर पहुंचना पड़ रहा है। 
आयती जीत की संभावना नहीं फिर भी मची भाजपा में होड़ -जिला मुख्यालय की राजनैतिक रूप से सर्वाधिक मूहत्वपूर्ण सिवनी विधानसभा सीट के लिये टिकिट की मारामारी कांग्रेस और भाजपा में तेज हो गया हैं। पिछले पांच चुनावों से भाजपा इस सीट से जीत रही है। इसलिये भाजपा नेताओं का मानना है कि सिर्फ टिकिट मिल जाये जीतना तो सुनिश्चित है ही।इस क्षेत्र से दो बार स्व. महेश शुक्ला, दो बार नरेश दिवाकर चुने गये और वर्तमान में नीता पटेरिया भाजपा से विधायक है। भाजपा में टिकिट के लिये इस बार नीता और नरेश के अलावा पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी भी दावेदार के रूप में उभर कर सामने आयें है।लेकिन कार्यकर्त्ताओं एक वर्ग ने ब्राम्हण बनिया विरोधी मोर्चा खोल रखा है। क्षेत्र के कार्यकर्त्ता सम्मेलन में यह मुहिम जोरदार तरीके से चली भी थी। इसके बाद भाजपा में अब यह चर्चित हे गया है कि चौथा कौन? चौथा कौन की चर्चा चालू होते ही पूर्व मंत्री स्व. महेश शुक्ला कि पुत्र अखिलेश शुक्ला एवं पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष द्वय प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब,सुदर्शन बाझल एवं सुजीत जैन के नामों की चर्चा भी चाले हो गयी हैं। लेकिन ये सभी संभावित नाम भी ब्राम्हण एवं बनिया वर्ग से ही हैं। इन वर्गों के विरोध में मुहिम चलाने वाला तबका अपनी ओर से किसी सशक्त दावेदार का नाम आम सहमति से सामने नहीं ला पाया है। वैसे राजेन्द्रसिंह बघेल,नरेन्द्र टांक, घासीराम सनोड़िया, राजेश उपाध्याय,ज्ञानचंद सनोड़िया आदि नेताओं के नाम भी दावेदारों के रूप में सामने आ रहें है। इनमें से कौन बाजी मार लेगा? इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन इस बार का चुनाव पिछले चुनावों जैसा नहीं होगा यह बात भाजपा आलाकमान भी जानता है कि सिवनी क्षेत्र में भाजपा को बिना कमर कस कर चुनाव लड़े आयती जीत नहीं मिलने वाली हैं। जिले के कांग्रेस के पुरोधा हरवंश सिंह के आकस्मिक निधन के बाद जिले की कांग्रेसी राजनीति में केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का सीधा हस्तक्षेप बढ़ गया है इसीलिये राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जिले में कांग्रेस की चुनावी रणनीति में होने ंवाला आमूल चूल परिवर्तन भाजपा की डगर आसान नहीं रहने देगा और जिले चारों विस क्षेत्रों में बिना कठिन परिश्रम किये जीतना संभव नहीं होगा। 
सिवनी क्षेत्र से कांग्रेस में भी मची है घमासान-कांग्रेस भी टिकिट की लड़ायी में उलझी हुयी हैं। एक तरफ तो राहुल गांधी के नाम पर राजा बघेल की टिकिट काफी पहले से सुनिश्चित मानी जा रही थी। लेकिन टिकिट की कवायत चालू होने के बाद बहुत सारा पानी बैनगंगा के पुल के नीचे से बह चुका है। राहुल गांधी के नेतृत्व में टिकटार्थियों के लिये बनाये गये मानदंड़ और टिकिट का आवेदन लगाने वालों से मांगी गयी जानकारियों के कारण समीकरण काफी उलझ गयें हैं। वैसंे तो कांग्रेस में 38 लोगों ने टिकिट मांगी थी लेकिन अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते जिले के उपाध्यक्ष खुमान सिंह के निष्कासन के बाद यह संख्या अब 37 रह गयी है। कांग्रेस के प्रमुख दावेदारों में राजकुमार खुराना,नेहा सिंह,दिलीप बघेल,रमेश जैन, मोहन चंदेल, चंद्रभान सिंह बघेल,ठा. धमेन्द्र सिंह के अलावा अल्पसंख्यक नेताओं में जकी अनवर, सुहेल पाशा, असलम भाई,आरिफ पटेल,साबिर अंसारी प्रमुख हैं। वैसे कांग्रेस इस द्वोत्र से 1990 से चुनाव हार रही हैं। लेकिन यह भी राजनैतिक रूप से कम महत्वपूर्ण बात नहीं है कि इस क्षेत्र से टिकिट मांगने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर इस क्षेत्र में कांग्रेस संदेश यात्रा भी प्रारंभ हो गयी हैं। 24 अगस्त से प्ररंभ यह यात्रा 30 अगस्त चलेगी। इस यात्रा में सभी संबंधित ब्लाक कांग्रेस के पदाधिकारी एवं टिकटार्थी शामिल हो रहें हैं। इस यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता एक फोल्डर के माध्यम से कांग्रेस की केन्द्र सरकार की उपलब्धि और भाजपा की प्रदेश सरकार की पोल भी खोल रहें है। कांग्रेस में एक यह मांग भी जबरदस्त तरीके से उठ रही है कि इस बार सिवनी या केवलारी क्षेत्र से मुस्लिम नेता को टिकिट दी जाये। राहुल गांधी की गाइड लाइन,कांग्रेस के पर्यवेक्षकों की कवायत एवं नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी मोहनप्रकाश के सख्त निर्देशों के चलते किसे टिकिट मिली है यह तो अभी नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि अच्छे उम्मीदवार को टिकिट और कांग्रेसी यदि एक रहे तो भाजपा के लियें सीट गंवाने का खतरा भी हो सकता है। 
तो कांग्रेस और भाजपा में उत्साह का संचार तो हो ही जायेगा-इस बार कांग्रेस और भाजपा के आलाकमान ने टिकिट देने की प्रक्रिया निर्धारित की है उससे एक बात तो हुयी है कि चुनाव लड़नें इच्छुक नेता जो मंड़ल या ब्लाक के पदाधिकारियों को अपने आधीन समझते थे उन्हें अपनी ही टिकिट ले लिये उनके दर पर पहुंचना पड़ रहा है। राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के दौरान अधिकांश पदाधिकारियों ने उन्हें महत्व ना मिलने की बात की थी। राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने इस बार ब्लाक कांग्रेस कमेटी से भी सुझाव मांगे तथा तीन तीन नाम प्रस्तावित करने को कहा। इससे यह हुआ कि अपने आप को बहुत बड़ा नेता मानकर टिकिट मांगने वालों को अपनी मनुहार लेकर उनके दर तक जाना पड़ा। इसी तरह भाजपा में भी रायशुमारी देने का जिन कार्यकर्त्ताओं को अधिकार दिये गये हैं उनके पास अपनी जुगाड़ जमाने के लिये वर्तमान और भावी विधायक पहुंच रहें हैं।दोनों ही पार्टियों द्वारा इस प्रक्रिया को अपनाने से पार्टी के कार्यकर्त्ताओं की प्रतिक्रिया संतोषजनक देखी जा रही हैं। यदि वास्तव में इसी के आधार पर टिकटें बंटतीं हैं तो इससे कार्यकर्त्ताओं में उत्साह का संचार तो हों ही जायेगा। 
“मुसाफिर“ 
सा. दर्पण झूठ ना बोले, सिवनी से साभार
27 अगस्त 2013   

Thursday, August 15, 2013

राजनैतिक हित साधने के लिये  धर्म , जाति और क्षेत्रीयता के आधार पर नफरत के बीज बोने से परहेज करें वरना देश में विकास के पहिये थम जायेंगें
आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की 66 वीं वर्षगांठ मना रहा हैं। आजादी के बाद देश ने प्रजातंत्र के साथ साथ धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्त को भी अंगीकार किया है। इसके तहत सर्व धर्म समभाव की नीति का पालन किया गया। हर धर्म के मानने वाले नागरिकों को अपने अपने  धर्मानुसार आचरण करने की स्वतंत्रता तो दी गयी है लेकिन किसी दूसरे के धर्म की आलोचना का अधिकार नहीं दिया गया हैं। लेकिन धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण कर सत्ता के गलियारे तक पहुंचने की ललक ने देश के राजनीतिज्ञों को धर्म की आड में राजनीति करने का रास्ता खोल दिया। धर्म,जाति और क्षेत्रीयता के शार्ट कट से सत्ता पाने का लालच राजनीतिज्ञ छोड़ नहीं पाये और इसी कारण वासुदैव कुटुम्बकम् की संस्कृति को मानने वाले देश में तरह तरह के विभाजन दिखायी देने लगे हैं। अब धर्मनिरपेक्षता और छद्म धर्मनिरपेक्षता के शब्द राजनैतिक गलियारों में आरोप प्रत्यारोप लगाने में उपयोग होते दिखायी दे रहें हैं। कोई राजनैतिक दल अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहता है तो दूसरा उसे मुस्लिम तुष्टीकरण की संज्ञा देकर छद्म धर्मनिरपेक्ष होने का आरोप लगाता हैं। वहीं दूसरी ओर आरोप लगाने वाले खुद ही सत्ता में आने के बाद वही कुछ करते नजर आते हैं जिनके आधार पर वे दूसरे दल पर छद्म धर्मनिरपेक्षता का आरोप लगाते हैं। एक ही राजनैतिक दल के दो मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से अलग अलग आचरण करते दिखायी दे रहें है। एक मुख्यमंत्री सदभावना मंच पर एक मौलवी द्वारा पहनायी जा रही टोपी पहनने से इंकार कर कट्टर हिन्दू होने का संकेत देता है तो दूसरा मुख्यमंत्री ईद मिलन समारोह में इस्लामी टोपी पहनकर खुद को धर्मनिरपेक्ष दिखाने का प्रयास करता है। लेकिन मंशा दोनों की ही एक है कि वे अपनी पार्टी को मजबूत करना चाहते है। क्या राजनेताओं का यह आचरण उचित है? लेकिन यह शाश्वत सत्य है कि विभिन्नता में एकता ही भारत की विशेषता है। हमारे देश में अलग अलग धर्म और जाति के लोग आपस में भाई चारे के साथ रहते है। इसीलिये धर्म और जाति को आधार मानकर राजनैतिक बिसात बिछाना देश के लिये हितकारी नहीं हैं। भारत एक विकासशील देश है। विकास की प्रक्रिया सतत जारी रखने के लिये यह आवश्यक है कि देश में अमन चैन कायम रहे। आज यह समय की मांग है कि देश में राजनैतिक नेतृत्व करने वाले राजनेता अपने राजनैतिक हित साधने के लिये  धर्म और जाति के आधार पर नफरत के बीज बोने से परहेज करें वरना देश में विकास के पहिये थम जायेंगें और देश के नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा और आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।़ इसलिये आइये आज के दिन हम यह संकल्प लें कि हम अपने राजनैतिक हितों के लिये हम धर्म, जाति और क्षेत्रीयता के आधार पर समाज को बंटने नहीं देंगें और देश के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगें।     

Tuesday, August 6, 2013

विस चुनाव के इस दौर में जिले में अभी से टिकिट के बजाय के बजाय मंत्री बनने का ताना बाना बुन रहे हैं भाजपा के शीर्ष नेता
 इन दिनों नगरपालिका की लीज को लेकर समाचार पत्रों में तरह तरह के समाचार प्रकाशित हो रहें हैं। बताया जा रहा है कि गंज क्षेत्र के कुछ व्यापारियों की लीज का नवीनीकरण होना हैं। इसमें अधिकांश व्यापारी संघ एवं भाजपा के कट्टर समर्थक हैं। पालिका अध्यक्ष एवं भाजपा नेता राजेश त्रिवेदी का सहयोग ना मिलने पर इन व्यापारियों ने युवा इंका नेता राजा बघेल एवं जिला इंका के महामंत्री चीकू सक्सेना से संपंर्क साधा । कांग्रेस पार्षदों के सहयोग से परिषद में प्रस्ताव भी पारित कर दिया और नियमानुसार कार्यवाही करने के लिये मुनपा अधिकारी को अधिकृत कर दिया गया। कांग्रेस में पर्यवेक्षकों के दौरों के बाद टिकिट मांगने वाले नेताओं ने प्रादेशिक नेताओं से मेल मुलाकात का दौर चालू कर दिया है। मोहन समर्थकों में चल रही चर्चा के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते मोहन चंदेल अपने आप को महिमा मंड़ित कर स्वयमेव नेता दिखने के राजनैतिक संदेश देने में सफल रहें हैं। जिला भाजपा में चल रही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के तार विधानसभा चुनाव से जुड़े बताये जा रहें है। दरअसल में इस स्थानीय समीकरण के पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार बनने पर मंत्री बनने की जुगाड़ हैं। यह तो समय आने पर ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है?
संघ और भाजपा में सेंध लगायी इंकाइयो ने?-इन दिनों नगरपालिका की लीज को लेकर समाचार पत्रों में तरह तरह के समाचार प्रकाशित हो रहें हैं। बताया जा रहा है कि गंज क्षेत्र के कुछ व्यापारियों की लीज का नवीनीकरण होना हैं। इसमें अधिकांश व्यापारी संघ एवं भाजपा के कट्टर समर्थक हैं। इन समाचारों में यह भी उल्लेख किया गया है कि पालिका अध्यक्ष एवं भाजपा नेता राजेश त्रिवेदी का सहयोग ना मिलने पर इन व्यापारियों ने युवा इंका नेता राजा बघेल एवं जिला इंका के महामंत्री चीकू सक्सेना से संपंर्क साधा और कांग्रेस पार्षदों के सहयोग से परिषद में प्रस्ताव भी पारित कर दिया और नियमानुसार कार्यवाही करने के लिये मुनपा अधिकारी को अधिकृत कर दिया गया। प्रकाशित समाचारों में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारी लेन देन के बाद भी मामला अटकाया जा रहा हैं जिससे व्यापारियों में आक्रोश है। राजनैतिक हल्कों में चर्चा है कि चुनावी समय में इस तरीके से इंकाइयों द्वारा संघ और भाजपा में सेंध लगाने का काम किया गया है जो कि चुनाव में लाभ दायक होगा। भाजपा के पालिका अध्यक्ष होने के बाद भी संघ समर्थक व्यापारी इंका नेताओं के संपंर्क में आये और उनकी मदद से परिषद में प्रस्ताव होने और लीज का नवीनीकरण ना होने से भाजपा के प्रति आक्रोश पैदा हो गया है।बताया जा रहा है कि मुनपा अधिकारी का कहना है कि नियमानुसार परिषद तीन साल से अधिक की लीज नहीं दे सकती जबकि व्यापारियों का कहना है कि भाजपा की पिछली परिषद की तरह इस बार भी 30 साल के लिये नवीनीकरण किया जाय। लेकिन मुनपा अधिकारी अपने अभिमत पर अड़े हुये है कि तीन साल से अधिक की लीज के लिये प्रकरण राज्य शासन को भेजने होंगें। सियासी हल्कों में दूसरी तरफ यह भी चर्चा है कि मामला लेन देन के इर्द गिर्द ही घूम रहा है कि लेन देन कहां हुआ, किसके साथ हुआ और यदि नियम नहीं था तो भाजपा की पिछली परिषद ने तीस साल के लिये लीज कैसे दी? इन सारे सवालों के जवाब तो नगर पालिका परिषद के कर्त्ता धर्त्ता या पालिका के मामलों में विशेष योग्यता हासिल कर चुके नेता ही बता सकते हैं लेकिन इतना तो तय है कि या तो पिछली भाजपा की परिषद ने नियम के विपरीत जाकर तीस साल की लीज दी थी या भाजपा की ही वर्तमान परिषद नियम होने के बाद भी तीस साल की लीज नहीं दे रही है। पालिका परिषद और प्रशासन से इस बात की अपेक्षा करना कोई बेमानी नहीं होगी कि वें इस बात का खुलासा करें कि भाजपा की पिछली परिषद ने नियम विपरीत काम किया है या वर्तमान परिषद नियम विपरीत काम कर रही है? 
प्रदेश के नेताओं के यहां दस्तक दी इंका टिकटार्थियों ने-कांग्रेस में पर्यवेक्षकों के दौरों के बाद टिकिट मांगने वाले नेताओं ने प्रादेशिक नेताओं से मेल मुलाकात का दौर चालू कर दिया है। जिले में पांच बार से हारने वाले सिवनी से 38 और आदिवासी क्षेत्र बरघाट से 19 नेताओं ने टिकिट के लिये आवेदन लगाये है। दोनों ही क्षत्रों क्रमशः 22 और 18 नेता लामबंद हो गये हैं। इन नेताओं ने बीते दिनों छिंदवाड़ा में केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ से भेंट कर अपना पक्ष रखा था। पिछले दिनों सिवनी के 22 नेताओं के समूह ने भोपाल जाकर कांग्रेस नेताओं के यहां दस्तक दी है। इन नेताओं ने प्रभारी महासचिव मोहन प्रकाश, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह,प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष से भेंट कर अपना पक्ष रखा और मांग की है कि इस बार प्रत्याशी ग्रामीण क्षेत्र से ही बनाया जाना चाहिये क्योंकि शहरी क्षत्र के नेता पिछले पांच बार से चुनाव हार रहें हैं। भोपाल गये लगभग 16 टिकटार्थियों में जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल और सिवनी के पूर्व विधायक रमेश जैन भी शामिल थे। मोहन समर्थकों में चल रही चर्चा के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते मोहन चंदेल अपने आप को महिमा मंड़ित कर स्वयमेव नेता दिखने के राजनैतिक संदेश देने में सफल रहें हैं।इस प्रतिनिधिमंड़ल द्वारा यह बताये जाने पर कि इस क्षेत्र से 38 नेताओं ने टिकिट के लिये आवेदन लगाया हैं तो कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आश्चर्य व्यक्त किया कि पांच बार से हारने वाले क्षेत्र से इतने आवेदक? कांग्रेसी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार सिवनी और बरघाट से आवेदकों की संख्या बढ़ने का कारण यह बताया जा रहा है कि इस चुनाव में कांग्रेस में बिलोरन होने की संभावना कम है और कांग्रेस जीत भी सकती हैं। हालांकि इस तर्क के आधार अलग अलग लोग अलग ही बता रहें हैं लेकिन इससे इस बात से भी इंकार नहीं सकता कि हो रहे इस बिखराव को रोकना आसान नहीं होगा। 
भाजपा में मंत्री पद को लेकर बुने जा रहें हैं ताने बाने-जिला भाजपा में चल रही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के तार विधानसभा चुनाव से जुड़े बताये जा रहें है। नेरश नीता गुट इस मामले में आमने सामने हैं। नरेश समर्थकों का मानना है कि सिवनी विस से नीता पटेरिया का जीतना संभव नहीं है। इसीलिये भाजपा को प्रत्याशी बदल कर नरेश को टिकिट देना चाहिये। केवलारी के इंका विधायक हरवंश सिंह के निधन के कारण आसान हो चुकी सीट को भाजपा को जीतने के लिये नीता पटेरिया को केवलारी से चुनाव लड़ाना चाहिये।वहीं केवलारी क्षेत्र के प्रबल दावेदार डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को बालाघाट संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ाना चाहिये। दरअसल में इस स्थानीय समीकरण के पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार बनने पर मंत्री बनने की जुगाड़ हैं। यदि नरेश चुनाव जीतते है तो वे तीसरी बार के विधायक होगें,नीता केवलारी से जीततीं है तो वे दूसरी बार की विधायक होंगी जबकि यदि केवलारी से चुनाव लड़कर डॉ. बिसेन चुनाव जीतते है तो वे जिले के पांचवी बार के विधायक होंगें और भाजपा की उमा और गौर सरकार में वे मंत्री भी रह चुके है। इस तरह यदि डॉ. बिसेन को लोकसभा चुनाव लड़ाने के लिये कहा जाता है तो नरेश और नीता के मंत्री बनने की होड़ में नरेश बाजी मार सकते है। वैसे वर्तग्मान में डॉ. बिसेन और नरेश दोनों ही केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त नेता हैं। मंत्री पद को लेकर बुने जा रहे इस ताने बाने के लिये ही भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की बात चल रही है और नरेश अपने ही किसी समर्थक को जिला भाजपा का अध्यक्ष बनाकर बाजी अपने हाथ में रखना चाह रहें हैं। यह तो समय आने पर ही पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है? “ मुसाफिर “    
सा. दर्पण झूठ ना बोले, सिवनी
06 अगस्त 2013  

Tuesday, July 30, 2013

क्या जिला भाजपा में होगा नेतृत्व परिवर्तन?
क्या सुजीत या वेदसिंह ठाकुर होगें जिला भाजपा के नये अध्यक्ष
सिवनी। क्या जिला भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है? यदि ऐसा हुआ तो किसके हाथ में आयेगी कमान?ये सवाल इन दिनों जिले के राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है।
विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर जहां एक ओर सभी राजनैतिक दल अपने अपने प्रत्याशी चयन और चुनावी बिसात बिछाने में लगे हुये हैं वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा में जिले में नेतृत्व परिर्वतन की खबरें चल रहीं हैं। नेतृत्व परिर्वतन की बात करने वाले नेता इस आधार पर यह बात कर रहें हैं कि इसीलिये भाजपा जिले में अभी तक प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर रही है। जबकि कांग्रेस के एक राष्ट्रीय और एक प्रादेशिक पर्यवेक्षक जिले की चारों विधानसभा सीटों का दौरा कर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को चालू कर चुके हैं। 
वर्तमान में जिला भाजपा की कमान सिवनी के पूर्व विधायक एवं महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त कद्दावर भाजपा नेता के हाथों में हैं। फिर आखिर ऐसे क्या कारण है कि चुनाव के चंद महीनों पहले प्रदेश का भाजपा नेतृत्व जिले में नेतृत्व परिवर्तन की सोच रहा है।
यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि भाजपा के संगठन चुनाव के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष सुजीत जैन की दोबारा ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन उस वक्त नरेश दिवाकर ने अपने ही समर्थक सुजीत जैन के बजाय वरिष्ठ महिला नेत्री एवं लगातार चार बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाली गोमती ठाकुर का नाम आगे कर दिया था। लेकिन काल चक्र कुछ ऐसा घूमा कि नरेश भले ही सुजीत को रोकने में तो सफल हो गये पर गोमती ठाकुर के बजाय उन्हें खुद ही जिला भाजपा अध्यक्ष बनना पड़ा।
यह बात भी एक ओपन सीक्रेट है कि सिवनी से दो बार विधायक रहे नरेश दिवाकर अपनी टिकिट कटने का दंश भूल नहीं पाये थे और मविप्रा का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने ताबड़ तोड़ सिवनी विस क्षेत्र के दौरे भी चालू कर दिये थे। भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर के इसी कारण मनमुटाव समय समय पर जगजाहिर होते रहें हैं। अभी नरेश दिवाकर इस बात के लिये जी तोड़ मेहनत कर रहें कि आगामी चुनाव में भाजपा से उन्हें ही विस की टिकिट मिले।
राजनैतिक विश्लेषकों का दावा है कि इसी कारण प्रदेश भाजपा का नेतृत्व जिले में परिवर्तन के बारे में विचार कर रहा हैं। प्रदेश के नेताओं का ऐसा मानना है कि प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया ऐसे हालात में चालू करना उचित नहीं हैं जब जिले का अध्यक्ष स्वयं ही टिकिट का दावेदार हो।
भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार नरेश दिवाकर ने अध्यक्ष पद के लिये उन्हीं सुजीत जैन का नाम आगे बढ़ा दिया है जिसे उन्होंने ही दूसरी पारी नहीं खेलने दी थी। जिला भाजपा अध्यक्ष पद के लिये दूसरे सबसे ताकतवर दावेदार के रूप में दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ नेता वेदसिंह ठाकुर का नाम सामने आया हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इन दिनों भाजपा में कार्यकर्त्ताओं का एक खेमा लगातार बैठकें करके ब्राम्हण और जैन ेनताओं को भाजपा में मिल रहे अत्यधिक महत्व को लेकर उनके विरोध में लामबंद हो रहा है और प्रदेश नेतृत्व से यह मांग कर रहा है अन्य वर्ग के नेताओं को भी महत्व मिलना आवयक है अन्यथा उनमें उभर रहा असंतोष भाजपा के लिये नुकसानदायक होगा।
ऐसे हालात में प्रदेश भाजपा नेतृत्व जिले में नेतृत्व परिवर्तन करेगा या नही? और करेगा तो कमान किसे देगा? और नरेश दिवाकर सिवनी विस क्षेत्र से टिकिट ला पायेंगें या नहीं? यह सब कुछ तो फिलहाल भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है?
सा. दर्पण झूठ बोले, सिवनी से साभार   
चुनावी साल में  वृक्षारोपण के शासकीय कार्यक्रम में  किसी शाही पर्यावरण मित्र  का अतिथि बनना सियासी हल्कों में  हुआ चर्चित
जिला मुख्यालय के पांच बार से जीतने वाले सिवनी विस क्षेत्र में इस बार एक नयी पहल प्रारंभ हुयी है। अपने आप को भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्त्ता बताने वाले कई नेता बैठकों का दौर कर रहें हैं कि इस बार पार्टी का उम्मीदवार किसी भी ब्राम्हण या बनिये को नहीं बनाना चाहिये। कांग्रेस में भी नजारा  कुछ अलग नहीं है। सिवनी विस क्षेत्र के 38 में से 22 और बरघाट विस क्षेत्र से 19 में से 18 टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं।  सिवनी में ये सभी टिकटार्थी स्वयं को ग्रामीण परिवेश का बता रहें हैं और उनका कहना है कि पार्टी पांच बार से यहां से चुनाव हार रही है और पांचों बार शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था।  लेकिन कोई भी चुनाव जीत नहीं पाया।बरघाट के टिकटाथियों का कहना है कि पार्टी के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ चुके अर्जुन काकोड़िया को प्रत्याशी नहीं बनाया जाना चाहिये। चुनावी साल में वृक्षारोपण के किसी शासकीय कार्यक्रम में कोई शाही पर्यावरण मित्र अतिथि बने और सियासी हल्कों में कोई चर्चा ना हो ये भला कैसे हो सकता है? ऐसा ही कुछ बीते दिनों इस जिले में हुआ है। अब देखना यह है कि ये सूबे के शहंशाह के नजदीकी शाही पर्यावरण मित्र चुनावी साल में अपनी आमद से कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण समाप्त करेंगें।
भाजपा में खुला ब्राम्हण बनिया विरोधी मोर्चा-आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा में भी गतिविधियां तेज हो गयीं है। जिला मुख्यालय के पांच बार से जीतने वाले सिवनी विस क्षेत्र में इस बार एक नयी पहल प्रारंभ हुयी है। अपने आप को भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्त्ता बताने वाले कई नेता बैठकों का दौर कर रहें हैं कि इस बार पार्टी का उम्मीदवार किसी भी ब्राम्हण या बनिये को नहीं बनाना चाहिये। इन नेताओं का यह कहना है कि भाजपा में पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं सिवनी विस क्षेत्र के अधिकांश उम्मीदवार अभी तक इन दो वर्गों से ही रहे है। भाजपा के इस धड़े का यह भी कहना है कि स्व. पं. महेश शुक्ला,प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब,स्व. चक्रेश जैन,सुदर्शन बाझल,सुजीत जैन और अब नरेश दिवाकर पार्टी के जिलाध्यक्ष है। पार्टी में अब तक सिर्फ दो बार वेदसिंह ठाकुर,कीरत सिंह बघेल और डॉ. ढ.ालसिंह बिसेन ही अन्य ऐसे नेता है जिन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह सिवनी विस क्षेत्र से 85 में प्रमोद कुमार जैन,90 और 93 में स्व0 महेश शुक्ला, 98 और 2003 में नरेश दिवाकर और 2008 में नीता पटेरिया को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया और जनता ने पांच बार यह सीट भाजपा की झोली में डाली है। भाजपा के इन नेताओं का यह कहना है कि इन कारणों से जनता में यह संदेश जा रहा है कि भाजपा ब्राम्हणों और बनियों की पार्टी बन कर रह गयी है। इससे पार्टी के अन्य कार्यकर्त्ताओं में अब उपेक्षा की भावना घर करने लगी है। इसलिये इस बार पार्टी को सिवनी से किसी अन्य वर्ग के नेता को पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिये। चुनाव के पहले भाजपा में उठ रही यह असंतोष की लपटें कितना नुकसान पहुंचाने वाली साबित होंगी? यह कहा जाना अभी संभव नहीं हैं। 
सिवनी और बरघाट में भी कांग्रेस के टिकटार्थी हुये लामबंद-कांग्रेस में भी नजारा कुछ अलग नहीं है। सिवनी विस क्षेत्र के 38 में से 22 और बरघाट विस क्षेत्र से 19 में से 18 टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं। सिवनी में ये सभी टिकटार्थी स्वयं को ग्रामीण परिवेश का बता रहें हैं और उनका कहना है कि पार्टी पांच बार से यहां से चुनाव हार रही है और पांचों बार शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 90 में स्व. ठा. हरवंश सिंह, 93 और 98 में आशुतोष वर्मा, 2003 में राजकुमार पप्पू खुराना और 2008 में प्रसन्न मालू को उम्मीदवार बनाया था और कोई भी जीत नहीं पाया था इसलिये इस बार ग्रामीण क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया जाये। इसी तरह बरघाट विस क्षेत्र में भी कांग्रस पांच बार से चुनाव हार रहीं है। लेकिन परिसीमन के बाद पिछले चुनाव से जिले की यह सीट आदिवासी वर्ग के लिये आरक्षित हो गयी है। लेकिन इस सीट से भी कांग्रेस की टिकिट के लिये 19 नेताओं ने आवेदन दिया है। इनमें से अर्जुन काकोड़िया को छोड़कर शेष 18  टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं कि उनके अलावा 19 में से किसी को भी पार्टी टिकिट दे क्योंकि वे पार्टी के खिलाफ दो बार इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। 
केवलारी क्षेत्र में शाही पर्यावरण मित्र की आमद हुयी चर्चित-हर साल बारिश आती है। बारिश में हर साल वृक्षारोपण होता है। हर शासकीय या अशासकीय वृक्षारोपण के कार्यक्रम में कोई ना कोई अतिथि पर्यावरण मित्र भी होता है। लेकिन जब चुनावी साल में वृक्षारोपण के किसी शासकीय कार्यक्रम में कोई शाही पर्यावरण मित्र अतिथि बने और सियासी हल्कों में कोई चर्चा ना हो ये भला कैसे हो सकता है? ऐसा ही कुछ बीते दिनों इस जिले में हुआ है। जी हां हम बात कर रहें है छपारा के एक शासकीय कार्यक्रम में उपस्थित हुये एक शाही पर्यावरण मित्र की उपस्थिति की जो कि अखबारों की सुर्खी बना था। केवलारी विस क्षेत्र के छपारा कस्बे में आयोजित एक शासकीय वृक्षारोपण कार्यक्रम में  चुनावी मौसम में अचानक ही प्रगट हुये एक शाही पर्यावरण मित्र अपने आप को सूबे के शहंशाह के किचिन केबिनेट के खास मेम्बर का रिश्तेदार बता रहें हैं। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में सूबे के शहंशाह से नजदीकी बता कर आमद देने वाले पर्यावरण मित्र किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण दूर करेंगें और किसमें प्रदूषण फैलायेंगें? इसे लेकर क्षेत्र के सियासी हल्कों में तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं। वैसे भी जिले का केवलारी विस क्षेत्र कांग्रेस का एक ऐसा मजबूत गढ़ है जहां से कांग्रेस सिर्फ दो चुनाव,1962 और 1990 में,ही हारी है। अन्यथा 1967 से 1985 तक के पांच विस चुनाव कांग्रेस की कु. विमला वर्मा और 1993 से 2008 तक के चार विस चुनाव कांग्रेस के स्व. हरवंश सिंह चुनाव जीते है। आगामी विस चुनाव में स्व. हरवंश सिंह के ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह कांग्रेस के प्रबल दावेदार है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सूबे के शहंशाह स्व. हरवंश सिंह को एक शासकीय समारोह के सार्वजनिक मंच से स्व. हरवंश सिंह को एक शानदार और जानदार राजनेता बता चुके हैं। अब देखना यह है कि ये सूबे के शहंशाह के नजदीकी शाही पर्यावरण मित्र चुनावी साल में अपनी आमद से कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण समाप्त करेंगें।
और अंत में -जिले के राजनैतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा केवलारी विस क्षेत्र इस बार भी महत्वपूर्ण ही रहेगा। यहां से इस बार कांग्रेस के विधायक रहे स्व0 हरवंश सिंह के ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह टिकटि के प्रबल दावेदार हैं। इनके अलावा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष डॉ. वसंत तिवारी,जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष शक्ति सिंह,ब्लाक इंका के पूर्व अध्यक्ष दिलीप दुबे, जिला इंका के उपाध्यक्ष जकी अनवर और क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रदेश प्रतिनिधि मो. शफीक पटेल के पुत्र अतीक पटेल ने भी टिकिट की दावेदारी की हैं। हालांकि कांग्रेस में किसी भी विस क्षेत्र टिकिट मांगने वालों की यह संख्या सबसे कम हैं लेकिन सियासी हल्कों में यह इसलिये चर्चित हैं कि 20 साल में पहली बार इस क्षेत्र से टिकिट की मांग अन्य नेताओं ने भी की हैं। क्षेत्री विधायक रहे स्व. हरवंश सिंह के निधन के चंद महीनों बाद ही उनके गृह क्षेत्र में नेताओं की आवाज मुखर होना महत्वपूर्ण माना जा रहा हैंमु।”साफिर”
सा. दर्पण झूठ ना बोले
30 जुलाई 13

Monday, July 8, 2013

अत्यंत घिनौने कृत्य के आरोप में स्तीफा देने वाले  वित्त मंत्री राघवजी का पुतला जलाया कांग्रेसियों ने 
 बीते दिनों जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक बरघाट में सम्पन्न हुयी। इस बैठक में राहुल गांधी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पल्लब लोचनदास भी उपस्थित थे। राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के दौरान ब्लाक और जिला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कोई अधिकार नहीं होने की शिकायत की थी। कांग्रेस आला कमान द्वारा प्रत्याशी चयन जैसे महत्वपूर्ण को में ब्लाक और जिला कांग्रेस कमेटियों को यह अधिकार दिया गया था। लेकिन एक दूसरे से बुराई ना होने के चक्कर में संगठन ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा। इन दिनों प्रदेश का राजनैतिक तापमान एकदम से बढ़ गया हैं। इसकी तपिश ने प्रदेश के 80 वर्षीय बुजुर्ग वित्त मंत्री राघवजी की बलि ले ली हैं। राजधानी के हबीबगंज थाने में उनके एक नौकर रामकुमार दांगी ने उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुये शपथ पत्र दिया। इसके बाद पटेरिया,ताजकुमार के पिता और उसके भाई के बयान आदि केस को कमजोर करने वाले साबित होंगें। नपा उपाध्यक्ष राजिक अकील के साथ अन्य युवा कांग्रेसियों ने भी राघवजी का पुतला जलाया।गौगपा के रोको,टोको और ठोंको अभ्यिान का पहला शिकार मुनमुन राय हो गये हैं। सिवनी विस क्षेत्र के एक गांव से उन्हें गौगपा के कार्यकर्त्ताओं ने गांव में घुसने नहीं दिया और बेरंग वापस जाने के लिये मजबूर कर दिया। यह समाचार अखबारों में सुर्खियों में इसलिये आ गया क्योंकि पिछले विस चुनाव में मुनमुन ने लगभग 30 हजार वोट लेकर कांग्रेस को तीसरे नंबंर पर ढ़केल दिया था।
जिला कांग्रेस ने अलाकमान को किया अधिकृत-बीते दिनों जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक बरघाट में सम्पन्न हुयी। इस बैठक में राहुल गांधी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पल्लब लोचनदास भी उपस्थित थे। यह बैठक आगामी विधानसभा चुनाव के लिये कि जिले के चारों विस क्षेत्रों के लिये कांग्रेस के प्रत्याशियों के चयन के लिये रखी गयी थी। बताया जा रहा था कि इस बैठक में हर विस क्षेत्र से तीन तीन उम्मीदवारों का पैनल बनाना था। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के दौरान ब्लाक और जिला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कोई अधिकार नहीं होने की शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि इसी को ध्यान में रखते हुये कांग्रेस आला कमान द्वारा प्रत्याशी चयन जैसे महत्वपूर्ण को में ब्लाक और जिला कांग्रेस कमेटियों को यह अधिकार दिया गया था। लेकिन एक दूसरे से बुराई ना होने के चक्कर में संगठन ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा। जिला कांग्रेस कमेटी की इस बैठक मे सख्ती के साथ इस बात का ध्यान रखा गया था कि जिले के पदाधिकारियों के अलावा अन्य नेता बैठक में शामिल ना हों। इसीलिये सिवनी नगर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री संतोष उर्फ नान्हू पंजवानी से जिला इंका अध्यक्ष हीरा आसवानी ने अधिकृत नेताओं के नामों की सूची को पढ़वाया। बैठक में सिवनी के पूर्व प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना और प्रसन्न मालू भी शामिल हो गये थे लेकिन पर्यवेक्षक द्वारा उन्हें बाद में मिलकर अपनी बात रखने को कहा और वे बैठक से बाहर चले गये। वैसे जिला इंकाध्यक्ष ने जिले के सभी पूर्व प्रत्याशियों को बरघाट आमंत्रित किया था और कहा था कि बैठक के बाद पर्यवेक्षक आपसे चर्चा करेंगें। कांग्रेसी हल्कों में चर्चा है कि जब दो पूर्व प्रत्याशियों को बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया तो फिर एक दर्जन से अधिक जिला कांग्रेस के महामंत्री होने के बाद भी पदाधिकारियों की सूची नगर कांग्रेस के महामंत्री से क्यों पढ़वायी गयी जबकि वे इस बैठक में शामिल होने की पात्रता भी नहीं रखते थे।  राहुल गांधी और आला कमान के निर्देश और गाइड लाइन भले ही पूरे प्रदेश के लिये लागू हो लेकिन जिले में इसको धता बताने में किसी को संकोच नहीं हुआ। इतनी महत्वपूर्ण बतायी जाने वाली इस बैठक में एक मात्र दो लाइन का प्रस्ताव पास करके सभी आवेदन कांग्रेस आला कमान को भेज दिया गया तथा जिला कांग्रेस की ओर से उन्हें अधिकृत कर दिया गया। बैठक के बाद पर्यवेक्षक से मिलकर पूर्व प्रत्याशी आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और नपा अध्यक्ष के पूर्व प्रत्याशी संजय भारद्वाज ने चर्चा कर राजनैतिक स्थिति से अवगत कराया।
अत्यंत घिनौने आरोप में नप गये राघवजी-इन दिनों प्रदेश का राजनैतिक तापमान एकदम से बढ़ गया हैं। इसकी तपिश ने प्रदेश के 80 वर्षीय बुजुर्ग वित्त मंत्री राघवजी की बलि ले ली हैं। राजधानी के हबीबगंज थाने में उनके एक नौकर रामकुमार दांगी ने उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुये शपथ पत्र दिया और साथ में एक सी.डी. भी पुलिस को सौंप दी हैं। उसने अपने शपथपत्र में कहा है कि यह सी.डी. उसके दोस्त ने बनायी है। मूल दस्तावेज लेने वो जो गया है तो उसका पता नही है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश पर राघवजी का स्तीफा मंजूर हो गया है।स्तीफे के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और विदिशा के ही भाजपा नेता एवं प्रदेश के पूर्व निगम अध्यक्ष शिवशंकर पटेरिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस लेकर यह दावा किया कि यह सी.डी. उन्होंने बनवायी है और वे भाजपा से गंदगी साफ करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने 22 सी.डी. बनवायीं हैं। प्रदेश भाजपा ने पटेरिया को निलंबित कर दिया है। इसके बाद दो दिनों से लापता राजकुमार के पिता ने मीडिया को यह बयान देकर सबको चौंका दिया है कि उनका पुत्र मांसिक रूप से बीमार है और उसने पहले भी एक बुजुर्ग आदमी पर ऐसा इल्जाम लगाकर उसके पैसा वसूला था। उसके पिता ने यह प्रमाणपत्र भी दे डाला कि राघवजी उसके पुत्र को बेटे की तरह रखते थे। इसके साथ ही राजकुमार के भाई ने विदिशा जिले के कुरवायी थाने में यह रिपोर्ट दर्ज करायी है कि मांसिक रूप से बीमार उसका भाई तीन महीनों से लापता हैं। अब यहां एक सवाल यह उठना स्वभाविक ही है कि यदि राजकुमार तीन तहीनों से लापता था तो भोपाल में राघवजी के खिलाफ शपथपत्र देने और दो दिनों से लापता होने के बाद ही उसके भाई के द्वारा यह रिपोर्ट क्यों दर्ज करायी गयी? अब राजकुमार ने खुद मीडिया के सामने आकर यह बयान दिया है कि उसके पिता और भाई को धमकी देकर यह सब कराया जा रहा हैं। विधि के विशेषज्ञों का यह मानना है कि थाने में शपथपत्र के साथ राजकुमार द्वारा आवेदन देने के बाद ऐसे तमाम बयान केस को कमजोर करने वाले साबित होंगें और भाजपा तथा प्रदेश सरकार अपने बुजुर्ग नेता राघवजी को बचाने के लिये ये सारे दांव पेंच खेल रही है। राघवजी के विरोध में पूरे प्रदेश में कांग्रेसी उनके पुतले जलाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग कर रहें हैं। इसी क्रम में नपा उपाध्यक्ष राजिक अकील के साथ अन्य युवा कांग्रेसियों ने भी राघवजी का पुतला जलाया। मुख्य प्रश्न तो यह है कि आखिर राजनीति के शिखर में बैठे ऐसे जिम्मेदार नेता ही ऐसा आचरण और अपना चरित्र पेश करेंगें तो उनके अनुयायी और युवा पीढ़ी आखिर किस बात के लिये प्रेरित होंगें?
गौगपा ने मुनमुन को गांव में घुसने नहीं दिया-गौगपा के रोको,टोको और ठोंको अभ्यिान का पहला शिकार मुनमुन राय हो गये हैं। सिवनी विस क्षेत्र के एक गांव से उन्हें गौगपा के कार्यकर्त्ताओं ने गांव में घुसने नहीं दिया और बेरंग वापस जाने के लिये मजबूर कर दिया। यह समाचार अखबारों में सुर्खियों में इसलिये आ गया क्योंकि पिछले विस चुनाव में मुनमुन ने लगभग 30 हजार वोट लेकर कांग्रेस को तीसरे नंबंर पर ढ़केल दिया था। उल्लेखनीय है कि मुनमुन इस बार फिर कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाने लिये चुनाव लड़ना चाह रहें हैं। अभी यह कहना मुश्किल हैं कि मुनमुन की सेंधमारी उन्हें जिताने लायक साबित होती हैं या फिर भाजपा को जिताने में मददगार होती है? गौगपा के ऐसे तीखे तेवरों से यह अंदेशा हो रहा है कि पिछले चुनाव में छपारा ब्लाक की 34 पंचायतों में मुनमुन ने आदिवासियों के काफी वोट ले लिये थे वो अब संभव हो पायेगा या नही? आदिवासी और मुस्लिम वोटों के भरोसे इस बार मुनमुन कितनी सेंधमारी कर पायेंगें? यह कहना फिलहाल संभव नहीं हैं। “मुसाफिर“

साप्ताहिक दर्पण झूठ ना बोले 
09 जुलाई 2013 से साभार 
पांच बार से हारने वाले सिवनी विस क्षेत्र के इंका ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाईस टिकटार्थी हुये लामबंद
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह की पहल लायी रंग
सिवनी।जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष ठा. धर्मेन्द्र सिंह की पहल पर ग्रामीण क्षेत्र के इंका के टिकटार्थियों की एक बैठक संपन्न हुयी जिसमें उनमें से किसी को भी टिकिट देने का प्रस्ताव पास किया गया।
सिवनी विधानसभा क्षेत्र्ा के लिय्ो कांग्रेस पार्टी केे ३८ नेताओं ने टिकिट की मांग की है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि पार्टी हाईकमान द्वारा उनका आग्रह न माने जाने की स्थिति में जिस किसी भी व्य्ाक्ति को पार्टी का उम्मीदवार बनाय्ाा जाय्ोगा उसे विजय्ाी बनाने के लिय्ो जीतोड मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोडी जावेगी।
इस बैठक में ३८ में से जो २२ दावेदार एकत्र्ाित हुय्ो थे वे सभी मूलतः ग्रामीण परिवेश से जुडे हुय्ो हैं। उनके पैतृक घर और कारोबार सभी कुछ गांव पर निर्भर हैं। य्ाद्यपि इनमें से कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने बाल बच्चों के भविष्य्ा को ध्य्ाान में रखकर नगरीय्ा परिवेश में भी निवास करते हैं। किंतु है वे मूलतः ग्रामीण ही और इसी आधार पर य्ो सभी लोग इन २२ में से किसी एक को पार्टी की टिकिट दिय्ो जाने की मांग को लेकर आगामी १२ जुलाई को केन्द्रीय्ा मंत्र्ाी कमलनाथ से मिलने छिंदवाडा पहंुचने वाले हैं।
आज की बैठक में ग्रामीण परिवेश से जुडे जो २२ लोग एकमत होकर शामिल हुय्ो थे उनमें सर्वश्री रमेश जैन,आरिफ  खान, गुलाब साहू, श्रीमती फ रिदा अंसारी, धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर, चंद्रभान सिंह बघेल, बसीर खान, बहादुर सनोडिय्ाा, पदम सनोडिय्ाा, शिवराम सनोडिय्ाा, आशा सनोडिय्ाा, कविता कहार, कीरतसिंह बघेल, आदित्य्ा सिंह, मृत्य्ाुंजय्ा सेंगर, मोहन चंदेल, सेवकराम चंद्रवंशी, श्रीमती रंजीता बघेल, जय्ादीप सिंह बैस व ओम प्रकाश तिवारी का समावेश है। ३८ में से कुल ग्रामीण परिवेश के २४ दावेदार हैं। जिनमें दिलीप बघेल और प्रदीप राय के आने का उल्लेख किया गया हैं।
बैठक में उपस्थित इन २२ लोगों ने आपस में विचार विमर्श करने के बाद जिन तथ्य्ाों को पार्टी के हाईकमान और वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराने का निर्णय्ा लिय्ाा है उसके अनुसार सिवनी विधानसभा क्षेत्र्ा में ७॰ से ८॰ प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्र्ा के हैं और इसी आधार पर वे य्ाह चाहते हैं कि इस बार पार्टी की टिकिट ग्रामीण परिवेश से जुडे व्य्ाक्ति को ही दी जाय्ो। बैठक में यह भी बताया गया कि 1985 में ग्रामीण परिवेश के रमेश जैन को टिकिट देने और उनके जीतने के बाद भी सन 1990 से सभी नगरीय क्षेत्र से प्रत्याशी बनाये गये और कांग्रेस तभी से चुनाव हार रही हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 1990 में स्व. हरवंश सिंह को टिकिट दी थी और वे चुनाव हार गये थे। 
इन्हें नहीं माना गया ग्रामीण परिवेश का
सिवनी। जिला कांग्रेस में सिवनी विस क्षेत्र के लिये टिकिट मांगने वाले नेताओं को ग्रामीण परिवेश का नहीं माना गया। इनमें श्रीमती पुष्पा रमेशचंद जैन,जकी अनवर खान, राजकुमार खुराना, राजा बघेल,हाजी सोहेल पाशा, संजय ारद्वाज, मो.असलम खान,घनश्याम जड़ेजा,श्रीमती नेहा सिंह,अजय पेशवानी,सुश्री हेमलता जैन, श्रीमती अल्पना राणा, खुमान सिंह,जयकिशोर वर्मा,विजय चौरसिया के नाम शामिल हैं। इस बैठक को लेकर कांग्रेस से टिकिट मांगने वाले नेताओं के बीच इस बात को लेकर जमकर चर्चायें जारी हैं कि गांव और शहर की बात चलने के पीछे आखिर कारण क्या है,इसे कौन शह दे रहा हैं और अंततः इससे किसको लाभ होगा?  
बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि उनके इस आग्रह के बाद भी य्ादि पार्टी किसी अन्य्ा व्य्ाक्ति को अपना उम्मीदवार बनाती है तो भी य्ो सभी २२ लोग उसे विजय्ाी बनाने में अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगे। उपस्थित दावेदारों ने कहा है कि पार्टी को विजय्ाी बनाने का संकल्प लेने ही आज वे मातृधाम में अपनी इस बैठक को आय्ाोजित किय्ो हैं और माता राजराजेश्वरी के सामने संकल्पबद्घ हो गय्ो हैं।
साप्ताहिक दर्पण झूठ ना बोले 
09 जुलाई 2013 से साभार