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Monday, April 23, 2012

political Dairy of Seoni Disst- of M.p.

प्रदेश की राम भक्त भाजपा सरकार को जगाने और बीमार अस्पताल को सुधारने के लिये गौगपा बजरंगबली को सौंपेगी ज्ञापन

बालाघाट जिले के दौरे पर आये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा सांसद के.डी.देशमुख को वारासिवनी से विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दे डाले हैं। आखिर इतने समय पहले ऐसा संकेत देकर प्रभात झा आखिर क्या राजनैतिक संदेश देना चाहते है और किसको ं? यह भी चर्चा हैं कि ऐसा संकेत देकर प्रभात झा कहीं गौरी भाऊ को नियंत्रित रखने का प्रयास तो नहीं कर रहें हैं? जिले का केवलारी विस क्षेत्र बहुत भाग्यशाली क्षेत्र हैं। सन 67 से 90 तक विमला वर्मा फिर 93 से 2003 तक हरवंश सिंह और अब डॉ. बिसेन और हरवंश सिंह दोनो ही लाल बत्ती पर सवार हैं। ऐसे उदाहरण भी इतिहास में बिरले ही मिलते हैं कि एक ही क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रत्याशी एक ही साथ और एक ही समय में एक ही क्षेत्र में लाल बत्ती लेकर धूमें। अस्पताल को भाजपा नेताओं के परिजनों से मुक्त कराने की अनोखी पहल गौगपा ने की हैं। राम नाम जप कर सत्ता के पायदानों पर पहुंचने वाली भाजपा को सबक सिखाने के लिये गौगपा ने नयाब तरीका खोजा है। उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद जिले में भी सपा की गतिविधियां बढ़ गयीं हैं।सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा प्रदेश के एक मुस्लिम नेता को यू.पी. से राज्यसभा में भेजे जाने से काफी उत्साह का माहौल दिख रहा हैं। अब इस राजनैतिक समीकरण का कब,कितना और कैसा असर पड़ेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा।

प्रभात का के.डी. को दिया गया संकेत चर्चित-बालाघाट जिले के दौरे पर आये प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा सांसद के.डी.देशमुख को वारासिवनी से विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत देने के समाचार अखबारों में प्रकाशित हुये हैं। इन समाचारों ने जिले के राजनैतिक हल्कों में भी तूफान ला दिया हैं। वैसे भी जहां तक सिवनी जिले के का सवाल हैं तो सांसद ने इसके साथ सौतेला व्यवहार किया हैं। इसके अलावा मंत्री के रूप में गौरीशंकर बिसेन के जल्वे देख कर मन ही मन वे भी यही चाह रहे थे कि काश वे भी विधायक रहते तो उन्हें भी लालबत्ती का सुख मिल जाता। लेकिन वे पिछला विस चुनाव कटंगी विस क्षेत्र से हार गये थे और सांसद रहते हुये गौरी भाऊ चुनाव जीत कर मंत्री बन गये थे। इसके बाद भाजपा ने के.डी. भाऊ को लोकसभा की टिकिट दे दी थ और वे बालाघाट क्षेत्र से सांसद बन गये थे। एक सांसद के रूप में उनका कार्यकाल उल्लेखनीय नहीं रहा। सिवन के साथ तो उन्होंने ऐसा सौतेला व्यवहार किया कि सदन में उन्होंने ना तो फोर लेन का और ना ही रामटेक गोटेगांव और छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर रेल लाइन का ही मुद्दा उठाया। सांसद निधि बांटने में भी उन्होंने कोई खास दिलचस्पी नहीं ली और इसीलिये कोई भी बड़ा काम जिले में उनके नाम से कहीं नहीं हैं। जबकि उनके क्षेत्र के दोनों विधायक भाजपा के ही थे। लेकिन भाजपायी हल्कों में इस बात को लेकर भारी उत्सुकता हैं कि आखिर इतने समय पहले ऐसा संकेत देकर प्रभात झा आखिर क्या राजनैतिक संदेश देना चाहते है और किसको ं? यह भी चर्चा हैं कि ऐसा संकेत देकर प्रभात झा कहीं गौरी भाऊ को नियंत्रित रखने का प्रयास तो नहीं कर रहें हैं?

लालबत्ती के मामले में भग्यशाली रहा है केवलारी क्षेत्र-जिले का केवलारी विस क्षेत्र बहुत भाग्यशाली क्षेत्र हैं। सन 1967 से लेकर 1990 तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व जिले की वरिष्ठ इंका नेत्री कु. विमला वर्मा ने किया। इस दौरान अधिकांश समय तक वे प्रदेश के मंत्रीमंड़ल की तमाम महत्वपूर्ण विभागों की मंत्री रहीं। उसके बाद 1993 में पहला चुनाव जीतने वाले हरवंश सिंह को कांग्रेस सरकार में कबीना मंत्री बनाया गया औद चंद महीने छोड़कर लगभग दस साल तक वे भी मंत्री रहे। केवलारी से वे चार चुनाव जीत चुके हैं। पिछले चुनाव में शिवराजसिंह की दूसरी पारी में भी इस क्षेत्र को विपक्ष का विधायक रहते हुये भी लालबत्ती मिल गयी। हालांकि दस साल तक केबिनेट मंत्री रहने वाले हरवंश सिंह को विधानसभा के उपाध्यक्ष के रूप में राज्य मंत्री का ही दर्जा मिला हैं लेकिन क्षेत्र को तो लाल बत्ती मिल ही गयी थी। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरवंश सिंह को मुख्यमंत्री के डंपर कांड़ के लिये बनायी गयी जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया था फिर भी वे सर्वसम्मति से विस उपाध्यक्ष चुन लिये गये थे हालांकि यह पद विपक्ष के पास रहता है फिर भी उनके लिये ये विशेष उपलब्धि ही कही जा सकती हैं। लेकिन इस बार तो अब ऐसा हो गया कि इस क्षेत्र से पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन को भी मध्यप्रदेश वित्त आयोग का अध्यक्ष बना कर केबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ लाल बत्ती मिल गयी है। ऐसे उदाहरण भी इतिहास में बिरले ही मिलते हैं कि एक ही क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रत्याशी एक ही साथ और एक ही समय में एक ही क्षेत्र में लाल बत्ती लेकर धूमें। इसे केवलारी विधानसभा का सौभग्य ही माना जायेगा कि यह क्षेत्र लाल बत्तियों से कभी महरूम नहीं रहा इसलिये इसका विकास भी तेजी से हो रहा हैं।

राम भक्त हनुमान को ज्ञापन सौपेगी गौगपा -जिले के बीमार अस्पताल को भाजपा नेताओं के परिजनों से मुक्त कराने की अनोखी पहल गौगपा ने की हैं। जिला गौगपा के प्रवक्ता विवेक डहेरिया द्वारा जारी विज्ञप्ति के माध्यम से यह समाचार सुर्खियों में आया हैं।पार्टी ने जिला अस्पताल को खुद गंभीर रूप से बीमार बताया हैं। पार्टी ने यह भी कहा है कि जिले के बीमार लोगों को ठीक करने की जवाबदारी जिले के भाजपा नेताओं के परिजनों के हवाले हैं। सरकार कोई सुनवायी करने को तैयार नहीं हैं। भाजपा को उसी तर्ज पर जवाब देते हुये गौगपा ने एक अनोखी पहल की हैं। राम नाम जप कर सत्ता के पायदानों पर पहुंचने वाली भाजपा को सबक सिखाने के लिये गौगपा ने नयाब तरीका खोजा है। उन्होंने बीमार अस्पताल को भाजपा नेताओं के परिजनों से मुक्त कराने के लिये आंदोलन की घोषणा की है वह कम रोचक नहीं हैं। पार्टी पहले पूजन पाठ करेगी फिर ज्ञापन सौंगी। ज्ञापन भी किसी प्रशासनिक अधिकारी को नहीं वरन कथित राम भक्तों की सरकार को अपनी बात राम भक्त हनुमान के माध्यम से भेजेगी। गौगपा हनुमान जी को ज्ञापन देकर यह उम्मीद करेगी कि शायद वे ही इस राम भक्त सरकार को ऐसी सदबुद्धि दे कि जनता को राहत मिल सके। अब यह तो वक्त ही बतायेगा कि गौगपा की यह पहल भी लोगों को राहत दिला पायेगी या नहीं? हालांकि इस आंदोलन की अभी कोई तारीख तय नहीं हैं कि यह कब होगा?

सपा की सक्रियता चर्चिित हुयी सियासी हल्कों में-उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद जिले में भी सपा की गतिविधियां बढ़ गयीं हैं। सपा की सक्रियता फिलहाल नगरीय क्षेत्र में अधिक दिखायी दे रही हैं और उन्होंने नपा को अपना लक्ष्य बनाया हुआ हैं। उनके बयान आजकल अक्सर जारी होते रहते हैं। अभी हाल ही में सपा के जिला महासचिव याहया कुरैशी ने नगरीय क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान चलाया हुआ हैं। सपा ने बढ़ी हुयी जलकर की दरें वापस करने हेतु भी मांग की है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा प्रदेश के एक मुस्लिम नेता को यू.पी. से राज्यसभा में भेजे जाने से काफी उत्साह का माहौल दिख रहा हैं। उन्हें प्रदेश में विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों के लिये माकूल माहोल की उम्मीद नजर आने लगी हैं। सपा के इस उत्साह से भाजपा का एक वर्ग भी उत्साहित है। ऐसे नेताओं का मानना हैं कि यू.पी. की तर्ज पर यदि सपा मुस्लिम वर्ग को अपनी ओर आर्कषित कर लेती हैंतो भाजपा को तीसरी पारी खेलने में आसानी हो सकती हैं।कुरेशी ने भी कांग्रेस द्वारा विद्युत दरों की वृद्धि के विरोध में किये गये आंदोलन पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि काँग्रेस पार्टी को इस तरह के विरोध का कोई नैतिक अधिकार नहींहै, क्योंकि काँग्रेस की तत्कालीन सरकार ने ही यह जनघाती विद्युत कानून एवं नीति बनाई थीजिसका अनुसरण अब भाजपा सरकार कर रही है और जिससे प्रदेश का आम आदमी परेशान हो रहा है। अब इस राजनैतिक समीकरण का कब,कितना और कैसा असर पड़ेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा। “मुसाफिर”

साप. दर्पण झूठ ना बोले से साभार

Monday, April 16, 2012

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

महाकौशल विकासप्राधिकरण के अध्यक्ष बनने के बाद स्वागत और आतिथ्य से मुक्त होकर कब विकास की चिंता करेंगें नरेश?

जिला इंका की इन नियुक्तियों को लेकर मौखिक रूप से तो यह प्रचारित किया जा रहा है कि ये नियुक्तियां युवा इंका नेता राजा बघेल के प्रयासों से बिना हरवंश सिंह की सहमति से करायी गयीं हैं। लेकिन जब इन नियुक्तियों के विज्ञापन प्रकाशित हुये तब उसमें यह उल्लेख किया गया कि जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह की सहमति से ये नियुक्तियां हुयी हैं।जबकि जिला एन.एस.यू.आई. के अध्यक्ष के रूप में प्रवेश बाबू भालोटिया के मित्रों ने उनको बधायी देने के लिये जो फ्लेक्स बनवाये उनमें एक लंबे अर्से बाद जिले की वरिष्ठतम इंका नेत्री कु. विमला वर्मा की फोटो भी देखने को मिली। मविप्रा के अध्यक्ष बनने के बाद नरेश के अधिकांश दौरे मुख्यअतिथि के रूप में हो रहें हैं विकास के लिये नहीं। जबकि महाकौशल अंचल में ही विस अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह,प्रदेश सरकार के मंत्रीगण सर्वश्री सरताज सिंह, गौरीशंकर बिसेन,अजय विश्नोई,देवसिंह सर्याम, नाना भाऊ मोहोड़ के साथ ही केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ,प्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और प्रदेश भाजपा महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया जैसे वजनदार जनप्रतिनिधि हैं जिनके सहयोग से महाकौशल अंचल के विकास के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है। जिले के आगामी विधान चुनावों की दृष्टि से नपं लखनादौन के चुनाव इंका और भाजपा के लिये महत्वपूर्ण साबित होगें।

इंका में नियुक्ति का राज खुला विज्ञापनों से-बीते दिनों जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ और पदाधिकारियों के नाम जोड़े गयें हैं। इनमें रंजीत यादव और चीकू सक्सेना को महामंत्री और राजा बघेल को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया हैं। हालाकि ये तीनों ही नेता पहले से ही पदों पर निर्वाचित घोषित किये जा चुके थे जो क्रमशः जिला इंका के संगठन सचिव, नगर इंका के संगठन सचिव एवं प्रदेश प्रदेश प्रतिनिधि के रूप में कांग्रेस कमेटियों में शामिल थे। इन नियुक्तियों को लेकर मौखिक रूप से तो यह प्रचारित किया जा रहा है कि ये नियुक्तियां युवा इंका नेता राजा बघेल के प्रयासों से बिना हरवंश सिंह की सहमति से करायी गयीं हैं। लेकिन जब इन नेताओं की नियुक्तियों के विज्ञापन प्रकाशित हुये तब उसमें यह उल्लेख किया गया कि जिले के इकलौते इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह की सहमति से ये नियुक्तियां हुयी हैं। इन विज्ञापनों में हरवंश सिंह का फोटो भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया हैं। इन विज्ञापनों की एक और विशेषता यह भी रही हैं कि उनमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष हीरा आसवानी की अनुशंसा का उल्लेख नहीं हैं जो कि अभी तक लगभग हर विज्ञापनों में रहता था। इन विज्ञापनों में प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह का फोटो भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया हैं। यह भी पता चला है कि इन नियुक्तियों में प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह का विशेष सहयोग रहा हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जिला एन.एस.यू.आई. के अध्यक्ष के रूप में प्रवेश बाबू भालोटिया के मित्रों ने उनको बधायी देने के लिये जो फ्लेक्स बनवायेउनमें एक लंबे अर्से बाद जिले की वरिष्ठतम इंका नेत्री कु. विमला वर्मा की फोटो भी देखने को मिली वरना पिछले कई सालों से तो कांग्रेसी मानो उन्हें भूल ही चुके थे। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि बाबू के आजा स्व. डालचंद अग्रवाल विमला जी के संगी साथी थे और एक जमाने में कांग्रेस की ओर से नगर पालिका सिवनी के उपाध्यक्ष थे। वैसे भी आजकल यह देखा जा रहा हैं कि कांग्रेसियों में अंदर ही अंदर बढ़ रहे विरोध को देखते हुये कई कांग्रेस नेता यह प्रयास कर रहें हैं कि वे एक तरफ तो हरवंश सिंह के विरोधी भी दिखें और दूसरी तरफ उनकी नजरों में भी अच्छे बनें रहें। इसी कवायत में कांग्रेस की राजनीति में तरह तरह के चल रहे खेलों को लेकर सियासी हल्कों में रोचक चर्चाओं का दौर जारी रहता हैं।

महाकौशल के विकास में कब जुटेंगें नरेश?-सिवनी के पूर्व भापा विधायक नरेश दिवाकर को मविप्रा का अध्यक्ष बना कर कबीना मंत्री का दर्जा दिया गया है। पद पाने के बाद पद देने वाले का आभार व्यक्त करना और स्वागत समारोहों का सिलसिला चलना तो एक स्वभाविक राजनैतिक प्रक्रिया हैं। लेकिन कुछ समय बाद मिली हुयी जवाबदारी को पूरा करने का कार्य भी शुरू होता हैं। इस प्राधिकरण में सिवनी सहित जबलपुर संभाग के सात जिलों के विकास की रूपरेखा बनाना और उसे सरकार को सौंपने का महत्वपूर्ण दायित्व भी प्राधिकरण का हैं। यदि आवश्यक्ता हो तों विकास के लिये विशेष पैकेज बना कर धनराशि भी प्राप्त की जा सकती हैं। जब नरेश जी ने शहर की दुगनी लागत में बनी एस.पी.बंगले से पाल पेट्रोल पंप तक की घटिया सड़क को फिर से बनाने के लिये प्राधिकरण से 39 लाख रु. की राशि स्वीकृत की थी बत ऐसा लगने लगा था कि कम से कम अपनें जिले के लिये तो कुछ और विशेष सौगात वे जरूर देंगें। इसी क्रम में उन्होंने केवलारी में भी एक सड़क के लिये पैसा दिया था। लेकिन लंबे समय से उनके भ्रमण के जो कार्यक्रम जारी होकर अखबारों में प्रकाशित हो रहें हैं उनमें सिवनी से प्रस्थान,नियत स्थान पर पहुंचने और किसी ना किसी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि या अध्यक्षता कर वापस आने के समाचार ही छप रहें हैं। कभी भी किसी भी जिले में जन प्रतिनिधियों या अधिकारियों से विकास की योजना बनाने हेतु विचार विमर्श करने का समाचार आज तक सामने नहीं आया हैं। जबकि जबलपुर संभाग में अधिकतर जनप्रतिनिधि भाजपा के ही हैं। महाकौशल अंचल में ही विस अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह,प्रदेश सरकार के मंत्रीगण सर्वश्री सरताज सिंह, गौरीशंकर बिसेन,अजय विश्नोई,देवसिंह सर्याम, नाना भाऊ मोहोड़ के साथ ही केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ,प्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और प्रदेश भाजपा महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया जैसे वजनदार जनप्रतिनिधि हैं जिनके सहयोग से महाकौशल अंचल के विकास के लिये बहुत कुछ किया जा सकता है। वैसे नरेश जी अनुभवी नेता हैं और दस साल तक विधायक रह चुकें हैं इसलिये ऐसी अपेक्षा की जा सकती हैं कि उनके मन में महाकौशल के विकास लिये कोई ना कोई ठोस योजना जरूर होगी जो कि वक्त आने पर सामने आयेगी।

राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण होंगें नपं लखनादौन के चुनाव-नपं लखनादौन के चुनावों की आहट राजनैतिक हल्कों में सुनायी देने लगी है। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने सभी वार्डों में भाजपा के दिग्गज नेताओं को जवाबदारी सौंप दी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह 20 अप्रेल को चुनावी बिसात बिछाने लखनादौन आ रहें हैं। नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश मुनमुन राय काफी पहले से ही सक्रिय हो गये हैं। भाजपायी और इंकाई हल्कों में अभी से यह चर्चायें जोर पकड़ने लगीं हैं कि दोनों ही पार्टियां चुनाव जीतने की रणनीति बनाने के बजाय हार का ठीकरा फोड़ने के लिये सर तलाश करने में जुटी हुयीं हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि दिनेश मुनमुन राय ने पिछला विस चुनाव कप प्लेट चुनाव चिन्ह से लड़ा था और लगभग 30 हजार वोट लेकर दूसरे नंबंर पर रहे थे। कप प्लेट के चुनावी रसद वितरण की डायरी दोनों ही पार्टियों के जिला मुख्यालय सहित कई नेताओं के लिये गले की फांस बनी हुयी हैं। बताया जाता है कि यह तय माना जा रहा हैं कि मुनमुन राय अपने किसी उम्मीदवार को चुनाव अवश्य लड़वायेंगें और भाजपा और इंका नेताओं के साथ अपने अतीत के अनुभवों के आधार पर जीतने का प्रयास करेंगें। वैसे तो अभी यह चुनाव का शुरुआती दौर हैं इसलिये कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती लेकिन यहां के चुनाव जिले के विस चुनावों के हिसाब से अवश्य ही महत्वपूर्ण होंगें। “मुसाफिर“ साप्त. दर्पण झूठ ना बोले से साभार 17 अप्रल 2012

Sunday, April 8, 2012

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

जब पत्थर को ही सनम मान कर दिल लगा लें तो उसके टूटने या गुम होने की खबर अखबारों की सुर्खी तो बन ही जाती है

केवलारी विस के इंका विधायक हरवंश सिंह ने जिला कलेक्टर से मांग की थी कि किसानों की गेहूं की फसल और गर्मी में आगजनी की घटनाओं की संभावना को देखते हुये क्षेत्र में फायर ब्रिगेड उपलब्ध करायी जाये। इस पर जिला कलेक्टर ने बरघाट नपा की फायर ब्रिगेड अधिगृहीत कर पलारी क्षेत्र भजने के निर्देश जारी किये थे। जिला भाजपा की महामंत्री एवं जिला पंचायत की वरिष्ठतम सदस्य श्रीमती गोती ठाकुर ने इसका विरोध किया। जिले की लखनादौन नगर पंचायत के चुनावों की हलचल दिखने लगी हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव में प्रत्याशी चयन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी जो कि अपना निर्णायक रोल अदा करेगी। लेकिन इतना तो तय है कि इस चुनाव में रोचक त्रि कोणीय संघर्ष होगा जो कि आगामी विधानसभा चुनाव के हिसाब से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। दुगनी लागत से बनी शहर की सबसे घटिया सड़कों में से एक सड़क का पिछले दिनों समारोह पूर्वक शिलान्यास किया गया। एस.पी. बंगले से राकेश पाल पेट्रोल पंप तक बनने वाली सात सौ मीटर की यह डामर सड़क 49 लाख रु. की लागत से बनेगी। वैसे तो पत्थर का कोंई मान या अपमान नहीं होता लेकिन जब पत्थर को ही सनम मान कर दिल लगा लें तो पत्थर के सनम की कीमत तो बढ़ ही जाती है और फिर जब ऐसे पत्थर को तोड़ दिया जाये या पत्थर का सनम ही कहीं गुम हो जाये तो चर्चा होना तो स्वभाविक ही होता हैं।

फायर ब्रिगेड के साथ ही क्षेत्र में ओले भी पहुंचे-केवलारी विस के इंका विधायक हरवंश सिंह ने जिला कलेक्टर से मांग की थी कि किसानों की गेहूं की फसल और गर्मी में आगजनी की घटनाओं की संभावना को देखते हुये क्षेत्र में फायर ब्रिगेड उपलब्ध करायी जाये। इस पर जिला कलेक्टर ने बरघाट नपा की फायर ब्रिगेड अधिगृहीत कर पलारी क्षेत्र भजने के निर्देश जारी किये थे। जैसे ही ये निर्देश लागों की जानकारी में आये वैसे ही क्षेत्र में विरोध के स्वर उठने लगे। जिला भाजपा की महामंत्री एवं जिला पंचायत की वरिष्ठतम सदस्य श्रीमती गोती ठाकुर ने इसका विरोध किया और कहा कि क्षेत्र में धान की फसल का पेरा जैसी ज्वलनशील वस्तु रहती हैं जिसमें भी आग लगने की संभावना रहती हैं। यहां की फायर ब्रिगेड जाने से असुविधा होगी। आपने यह सुझाव भी दे डाला था कि जैसे केवलारी विधायक हरवंश सिंह और सांसद बसोरी सिंह ने केवलारी क्षेत्र में पानी के टेंकर वितरित किये हैं वैसे ही क्षेत्र के लिये फायर ब्रिगेड भी विधायक सांसद निधि से दे दे। लेकिन इन आपत्तियों को दर किनार कर बरघाट नगर पंचायत की फायर ब्रिगेड पलारी भेज दी गयी। बाद में यह भी खुलासा किया गया कि रोटेशन में सिवनी और लखनादौन की फायर ब्रिगेड भी अधिगृहीत कर भेजी जायेंगी और वर्षाकाल तक इस क्षेत्र में यह सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि जिले की वरिष्ठ इंका नेत्री कु. विमला वर्मा ने अपने केवलारी क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा मिट्ठी का सबसे बड़ा भीमगढ़ बांध जबसे बनवाया हैं तबसे यह क्षेत्र जिले का पंजाब माने जाने लगा हैं। इस क्षेत्र के किसान इतने अधिक समृद्ध हो गयें हैं कि पूरी तरह से मशीनी खेती कर रहें हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसानों की फसलों की अग्नि से सुरक्षा की चिंता करना स्वभाविक ही हैं। अब इसे एक संयोग कहें या लोगों की आह लेकिन इधर फायर ब्रिगेड रवाना हुयी और उधर पलारी क्षेत्र में हुयी भारी ओला वृष्टि ने किसानों की खड़ी फसल को तबाह करके रख दिया। डर के मारे लोगों ने रात दिन भिड़ कर गेहूं की फसल काट डाली और यह भी नहीं देखा कि अभी फसल थोड़ी बहुत हरी हैं या नहीं?

लखनादौन में बिछने लगी चुनावी बिसात-जिले की लखनादौन नगर पंचायत के चुनावों की हलचल दिखने लगी हैं। उल्लेखनीय है कि कोर्ट के निर्णय के कारण पालिका चुनावों के साथ यहां चुनाव नही हो पाये थे। लेकिन फैसला आने के बाद अब चुनाव का रास्ता साफ हो गया हैं और संभवतः जून के महीने में चुनाव होंगें। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि आरक्षण का कार्य पहले ही हो चुका था जिसके तहत नगर पंचायत के अध्यक्ष का पद पिछड़े वर्ग की मिहला के लिये आरक्षित हुआ था। जिले में इंका और भाजपा तो परंपरागत रूप से स्थापित पार्टियां हैं ही लेकिन इस नगर पंचायत में पूर्व अध्यक्ष और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सिवनी विस से चुनाव लड़कर दूसरे नंबंर पर रहने वाले दिनेश मुनमुन राय दोनों के लिये ही चुनौती बन कर सामने आ रहें हैं। विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि वे इस बार अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतार सकतें हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने अपने परंपरागत तरीके इसकी तैयारियां भी प्रारंभ कर दी हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मशहूर गायिका अनुराधा पोड़वाल का जंगी कार्यक्रम भी लखनादौन में आयोजित हो चुका हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने भी प्रारंभिक तैयारियों के रूप में नगर के सभी पंद्रह वार्डों में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिये हैं जिसमें भाजपा के भारी भरकम नेताओं के नाम भी शामिल हैं। ऐसी संभावना है कि जल्दी ही प्रदेश इंकाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का दौरा भी लखनादौन में होने वाला है। जिला इंकाध्यक्ष हीरा आसवानी उनसे सतत संपर्क में हैं और शायद इसके बाद ही कांग्रेस भी इस चुनाव के लिये अपनी बिसात बिछाना प्रारंभ करेगी। राजनैतिक विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि इस चुनाव में प्रत्याशी चयन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी जो कि अपना निर्णायक रोल अदा करेगी। लेकिन इतना तो तय है कि इस चुनाव में रोचक त्रि कोणीय संघर्ष होगा जो कि आगामी विधानसभा चुनाव के हिसाब से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।

पत्थर के सनम की चर्चा रही सुर्खियों में-दुगनी लागत से बनी शहर की सबसे घटिया सड़कों में से एक सड़क का पिछले दिनों समारोह पूर्वक शिलान्यास किया गया। एस.पी. बंगले से राकेश पाल पेट्रोल पंप तक बनने वाली सात सौ मीटर की यह डामर सड़क 49 लाख रु. की लागत से बनेगी। इस समारेह के बांटे गये निमंत्रण पत्रों में प्रदेश सरकार के मत्रीद्वय अजय विश्नोई और नाना भाऊ के साथ ही सांसद के.डी. देशमुख, विधायक नीता पटेरिया,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर, नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन के नाम अतिथियों के रूप में छापे गये थे। लेकिन समारोह के तुरंत बाद शिलान्यास का पत्थर अखबारों की सुर्खियां बन गया। कहीं यह छपा कि यह पत्थर तोड़ दिया गया तो कहीं यह प्रकाशित हुआ कि पत्थर गायब हो गया। अखबारों में यह भी छपा कि लिा भाजयुमो के अध्यक्ष ठा. नवनीत सिंह ने यह स्वीकार किया कि हां यह पत्थर तोड़ दिया गया क्योंकि इसमें जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन का नाम नहीं लिखा गया था। लेकिन फिर भाजपाप के स्थापना दिवस दिवस के अवसर पर नवनीत सिंह ने इसका खंड़न कर दिया कि उन्होंने पत्थर तोड़ने की बात कही ही नहीं थी। अब इस बात का खुलासा होना भी संभव नहीं हैं क्योंकि सड़क बनाने वाली ऐजेंसी पी.डब्ल्यू.डी. ने ना तो पत्थ्र गुमने की और ना पत्थर तोड़े जाने की कोई रिपोर्ट ही दर्ज नहीं करायी हैं। इसलिये अब ना तो इसकी तफशीश होगी और ना ही कुछ पता चलेगा। अब इसका खुलासा तो तब ही होगा जब इस सड़क ाक लोर्कापण होगा और तब लोगों को दोनों पत्थर जब देखने को मिलेंगें तो इसका खुलासा हो जायेगा। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि पहले इस सउ़क के घटिया बनने और अब फिर दोबारा बनने के केन्द्र बिन्दु मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर ही रहें हैं। इसको बनाने के लिये नरेश जी ने प्राधिकरण से ना केवल 39 लाख रु. दियेवरन राशि कम पड़ने पर सांसद से भी दस लाख रु. दिलाये जिसकी बाकयदा विज्ञप्तियां भी प्रकाशित हुयीं। नगर पालिका के बजाया ऐजेन्सी भी नरेश जी ने ही गुणवत्ता बनाये रखने के लिये पी.डब्ल्यू.डी. को बनाया था। भूमि पूजन का कार्यक्रम भी ऐजेन्सी ने आयोजित किया था। सुजीत जी भी डी.एन. के ग्रुप के माने जाते हैं। फिर आखिर ऐसा क्या हो गया जो पत्थर से जिला भाजपा के अध्यक्ष का नाम ही गोल हो गया। वैसे तो पत्थर का कोंई मान या अपमान नहीं होता लेकिन जब पत्थर को ही सनम मान कर दिल लगा लें तो पत्थर के सनम की कीमत तो बढ़ ही जाती है और फिर जब ऐसे पत्थर को तोड़ दिया जाये या पत्थर का सनम ही कहीं गुम हो जाये तो चर्चा होना तो स्वभाविक ही होता हैं।

Tuesday, April 3, 2012

News regarding pench irrigation project Of M.p.


ऐसे कितने ताकतवर हैं बारह किसान?
सिवनी। दो जिलों के हजारों किसानों के लिये वरदान साबित होने वाली पेंच परियोजना के पक्के बांध का काम गा्रम बाम्हनवाड़ा के मात्र 12 किसानों के       विरोध के कारण प्रारंभ नहीं हो पा रहा हैं। 
उल्लेखनीय है कि 25 अक्टू. 10 में एस.ई.डब्ल्यू.कंपनी हैदराबाद से अनुबंध हो गया था । इस कंपनी ने अपना केंप बनाकर 22 नव. 10 को भूमि पूजन भी कर दिया था। इसमें बाम्हनवाड़ा गांव के 12 किसानों की भूमि आती है।जिसके मुआवजे का अवार्ड वर्ष 2006 एवं 2009 में कर दिया गया था। जिसका मुआवजा भी किसानों को दे दिया गया हैं तथा    आधिपत्य भी सिचायी विभाग का हैं। 
नवम्बर 2010 से ही विभाग इस पक्के बांध का काम प्रारंभ करने की कोशिश कर रहा हैं लेकिन मौके पर किसानों के असहयोग के कारण निर्माण कार्यचालू नहीं हो पा रहा हैं। काम चालू करने के लिये विभाग छिंदवाड़ा के कलेक्टर और एस.पी. से सहयोग का अनुरोध भी लगातार कर रहा हैं। विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ घटनाओं में विभागीय कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटनायें भी हुयी हैं।  लेकिन आज तक इसका काम चालू नहीं हो पाया हैं। 
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना में 400 मीटर में पक्के बांध का काम होना हैं जिसमें गेट सहित लगभग 320 मी. में पक्के बांध का निर्माण होना हैं। इस कार्य के लिये हैदराबाद की जिस कंपनी ने 113 करोड़ रु. का ठेका लिया हैं लेकिन लगभग 18 महीने बाद भी विभाग उसे बाधा मुक्त साइड उपलब्ध नहीं करा पा रहा हैं। जानकारों का कहना है ऐसी परिस्थिति में विभाग को ठेकेदार को आइडियल चार्जेस देना पड़ता हैं। परियोजना की लागत बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 2013 तक इस योजना को पूरा करने का दावा किया हैं। इसके बाद विभाग के तेज तर्रार माने जाने वाले प्रमुख सचिव जुलानिया ने छिदवाड़ा और सिवनी जिले का पूरे लाव लश्कर के साथ दौरा भी किया था। विभाग द्वारा दोबारा तेजी से काम चालू होने के दावे भी किये गये हैं। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक पक्के बांध का काम चालू नहीं हो पाया हैं और प्रशासन से सहयोग की गुहार भी कारगर होते नहीं दिख रही हैं।  
अब तो लोग बरबस ही यह चर्चा करने लगें हैं कि आखिर ये बारह किसान ऐसे कितने ताकतवर हैं जो इतनी बड़ी योजना का काम चालू नहीं हो दे रहें हैं। 


पेंच सिचायी परियोजना के पेंच

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


अजय विश्नोई ने शिवराज की जो सौगातें गिनायी उनमें हरवंश सिंह के विस उपाध्यक्ष पद को भी गिनाकर सवाल खड़ा कर दिया
पिछले कई दिनों से बनने का इंतजार कर रही बाहुबली सड़क के निर्माण का भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हो ही गया। घटिया सड़क निर्माण की शिकायत इंका ेनेता आशुतोष वर्मा ने की थी।प्रदेश सरकार द्वारा आदेश जारी होने के बाद भी आज तक वसूली की कार्यवाही ना तो नगरपालिका ने की हैं और ना ही जिला प्रशासन ने।नरेश ने प्राश्चित तो किा लेकिन किसी पाप के प्राश्चित के श्रेय लेने की मिसाल तो शायद बिरली ही देखने को मिलतीं हैं जो कि यहां देखने को मिली। आखिर प्रदेश सरकार ने जिले में गेहूं खरीदी के लिये संशोधित आदेश जारी कर ही दिये। हरवंश सिंह ने भी 45 क्वि. से अधिक खरीदी की मांग नहीं की थी लेकिन सरकार ने सिर्फ अधिकतम 40 क्वि. खरीदी के ही आदेश जारी किये जो कि पिछले साल से भी कम हैं। इस कमी के बावजूद भी जिले में किसानों के मसीहा कहलाने वाले इंका विधायक हरवंश सिंह ने तत्काल विज्ञप्ति जारी कर सरकार का आभार भी मान लिया। जबकि एक विपक्ष के विधायक होने के नाते उन्हें कम से कम खरीदी की मात्रा कम करने का विरोध तो करना ही था। कौन कहता है कि शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने कोई सौगात नहीं दी हैं? विकास की सौगात भले ही ना मिली हो लेकिन बकाक्ल अजय विश्नोयी जिले मे तीन लाल बाी और एक प्रदेश अध्यक्ष का पद देकर राजनैति महत्व तो बढ़ाया ही है। कांग्रेस के कोटे से विस उपाध्यक्ष  का पद कैसे शिवराज की सौगात है? यह समझना जरूरी है।   
प्राश्चित का भी श्रेय लेने की बनी मिसाल -हाल ही में पिछले कई दिनों से बनने का इंतजार कर रही बाहुबली सड़क के निर्माण का भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हो ही गया। प्रदेश सरकार के मंत्री अजय विश्नोई और प्रभारी मंत्री नाना भाऊ के साथ ही सांसद के.डी.देशमुख,मविप्रा के अध्यक्ष नरेश दिवाकर,विधायक नीता पटेरिया जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन और पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की गरिमामय उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। अखबारों में इस भूमि पूजन के कार्यक्रम के विज्ञापन भी भाजपा की ओर से प्रकाशित कराये गये। जारी की गयी विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि ठेकेदार ने कम से कम पांच सल तक रोड़ सही सलामत रहने का भरोसा भी दिलाया हैं। सड़क बनाने का श्रेय भी मविप्रा के अध्यक्ष नरेश जी को दिया गया। भाजपा के विकास के प्रति समर्पित रहने की बात भी कही गयी। यह सब तो ठीक हैं लेंकिन इसका अतीत भी सभी जानते हैं। नगर की दुगनी लागत में बनने वाली सबसे घटिया सड़कों में एक सड़क यह भी रही हैं। इंका नेता आशुतोष वर्मा ने इसकी शिकायत सरकार से की थी। सड़क से लेकर सदन तक यह मामला गूंजा था। लंबे समय सरकार जांच में टाल मटोल करती रही लेकिन लगभग तीन साल बाद कार्यवाही हुयी और तत्कालीन नपा अध्यक्ष पार्वती जंघेला और देा सी.एम.ओ. पर तीन लाख से अधिक की वसूली प्रत्येक से किये जाने के आदेश जारी हुये। लेकिन वास्तव में सड़क बनाने वाले भाजपा नेताओं को तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर का संरक्षण प्राप्त था। प्रदेश सरकार द्वारा आदेश जारी होने के बाद भी आज तक वसूली की कार्यवाही ना तो नगरपालिका ने की हैं और ना ही जिला प्रशासन ने। और तो और भाजपा ने पावर्ती जंघेला को पुरुस्कृत कर महिला मोर्चे का अध्यक्ष बना दिया हैं। पालिका ने भी आज तक संबंधित ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया हैं। एक तरह से देखा जाये तो तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश ने मविप्रा के अध्यक्ष बनने के बाद पिछले पापों का प्राश्चित करने की कोशिश की हैं लेकिन अपने चहेतों को दंड़ ना दिलाकर नागरिको को हुयी परेशानी की अनदेखी भी की हैं। मविप्रा द्वारा स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं थी इसलिये इसी सड़क के लिये सांसद से भी दस लाख रुपये की राशि मांगी गयी। जिस घटिया सड़क को लोगों ने पांच साल तक भोगा हैं ता अब बनने वाली सड़क में यदि राशि कम हो तो सभी काम सादगी से होना चाहिये थे। लेकिन जिस ताम झाम से इसका भूमि पूजन किया गया उससे ऐसा तो नहीं लगता कि नेताओं ने अतीत से कोई सबक सीखा हैं। यह भी एक ओपन सरीक्रेट हैं ऐसे भूमि पूजन और लोकार्पण के ाकर्यक्रम अंततः ठेकेदार के ही मत्थे पर पड़े हैं क्योंकि ऐस्टीमेट में तो इनका प्रावधान होता नहीं हैं। यह भी सच है कि ठेकेदार अपनी जेब से तो पैसा कार्यक्रम में लगायेगा नही ऐसे में पैसे कम होने की बात सामने आने के बाद भी श्रेय लेने के लिये पत्थर,समारोह और विज्ञापनों से नेता परहेज नहीं कर पाये तो भला बाकी बातों में क्या परहेज कर पायेंगें? किसी पाप के प्राश्चित के श्रेय लेने की मिसाल तो शायद बिरली ही देखने को मिलतीं हैं जो कि यहां देखने को मिली।
और हो गये गेहूं खरीदी के संशोधित आदेश-आखिर प्रदेश सरकार ने जिले में गेहूं खरीदी के लिये संशोधित आदेश जारी कर ही दिये। इस आदेश के अनुसार असिंचिंत में 16 क्वि. एवं सिंचित में 40 क्वि. प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकार खरीदी करेगी। जबकि पिछले साल सरकार ने प्रति हेक्टेयर 25 से 45 क्वि. गेहूं खरीदी की थी जिसमें सिंचिंत और असिंचित का कोई फर्क नहीं था। इस साल अच्छी फसल को देखते हुये जिले के कांग्रेसी तथा भाजपा नेताओं ने पुरजोर मांग की थी कि सरकार 16 क्वि. के आदेश को संशोधित करें और ख्ये आदेश जारी करें। हालांकि जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह ने भी 45 क्वि. से अधिक खरीदी की मांग नहीं की थी लेकिन सरकार ने सिर्फ अधिकतम 40 क्वि. खरीदी के ही आदेश जारी किये जो कि पिछले साल से भी कम हैं। वैसे वित्त आयोग के अध्यक्ष और केवलारी क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रहे डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने भी आश्वस्त कराया था कि पिछले वर्ष जैसी ही खरीदी की जायेगी। लेकिन केबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त डॉ. बिसेन और हरवंश सिंह दोनों ही नेता किसानों को राहत नहीं दिलवा पाये ब्लकि प्रदेश की शिवराज सरकार ने पिछले साल की तुलना में पांच क्वि. प्रति हेक्टेयर कम कर दिया। इस कमी के बावजूद भी जिले में किसानों के मसीहा कहलाने वाले इंका विधायक हरवंश सिंह ने तत्काल विज्ञप्ति जारी कर सरकार का आभार भी मान लिया। जबकि एक विपक्ष के विधायक होने के नाते उन्हें कम से कम खरीदी की मात्रा कम करने का विरोध तो करना ही था। श्रेय लेने की होड़ में जिले के विशेषकर केवलारी क्षेत्र के गेहूं उत्पादक किसानों का इस साल नुकसान होना तय हैं क्योंकि पिछले साल 45 क्वि. की दर से खरीदी करने पर भी पूरा गेहूं नहीं खरीदा जा सका था। 
शिवराज की सौगातें गिनायी विश्नोयी ने-कौन कहता है कि शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने कोई सौगात नहीं दी हैं?ये बात अलग हैं कि इंजीनियरिंग,मेडिकल और एग्रीकल्चर कालेज ना खुला हो,दहाड़ने के बाद भी जिले के फोर लेन की समस्या ना निपटी हो,,पेंच सिचायी परियोजना ना बनी हो और संभाग मुख्यालय भी ना मिला हो लेकिन शिवराज ने जिले को सौगातें तो दी हैं।इन सौगातों का खुलासा प्रदेश सरकार के मंत्री अजय विश्नोयी ने एक सार्वजनिक समारोह में किया हैं। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि विस उपाध्यक्ष मविप्रा के अध्यक्ष और प्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष का पद देकर शिवराज ने जिले को तीन तीन लालबत्ती और प्रदेश महिला मोर्चे के अघ्यक्ष का पद दिया हैं। वैसे तो विस उपाध्यक्ष का पद कांग्रेस के कोटे का है जिस पर हरवंश सिंह विराजमान हैं तो फिर यह जिले को शिवराज की सौगात कैसे हो गयी? वैसे अजय विश्नोयी जी की बात को यदि नेता प्रति पक्ष अजय सिंह की बात से जोड़ कर देखा जाये तो विश्नोयी सही भी हो सकते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भोपाल की कार्यकर्त्ताओं की विशाल सभा में अजय सिंह ने कहा था कि हम प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो बना लेगें बशर्ते ठा. हरवंश सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सहयोग करना बंद कर दें। इंका और भाजपा दोनों ही पार्टियोंके जिम्मेदार अजय यदि एक ही बात कह रहें हैं तो भला उसपर अविश्वास भी कैसे किया जा सकता है। अजय विश्नोयी के इस कथन पर उपस्थित एक नागरिक का यह कथन एक दम सटीक लगा कि ये चारों शिवराज की तीसरी पारी खेलने के लिये उपयोगी तो हो सकते हैं लेकिन इससे जिले को क्या मिलने वाला हैं।  


             

nirogi kese rahi kitab ki samekcha

पुस्तक समीक्षा -निरोगी कैसे रहें?

खान पान की वस्तुओं में भी छिपे पडे हैं औषधीय गुण

निरोगी कैसे रहें? मानव शरीर धारण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की यह एक अनिवार्य चिंता रहती हैं। आदि काल से लेकर अब तक इसके कई उपाय बताये गये हैं। इसी क्रम में जिले के आध्यात्मिक क्षेत्र के स्थापित हस्ताक्षर पं. दयाशंकर जी मिश्रा के पुत्र पं राजेन्द्र मिश्रा ने भी इस दिशा में एक प्रशंसनीय प्रयास किया हैं। वैसे तो राजेन्द्र जी का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं। वे ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता होने के साथ साथ कर्म कांड़ के क्षेत्र में भी अपना विशेंष स्थान रखते हैं। पिछले कई वर्षों से आपके इन विषयों पर लेख ना केवल अखबारों में प्रकाशित होते रहें हैं वरन प्रमाणिक पाये जाकर लोकप्रियता भी हासिल करते रहें हैं।

कहा जाता है कि ईश्वर ने शरीर की रचना ऐसी की हैं कि वह निरोगी ही रहेगी। लेकिन हमारी आदतें, खान पान में बदपरहेजी और प्रकृति के विपरीत आचरण ही रोगों को आमंत्रित करता हैं। निरोगी कैसे रहें और रोग हो जाये तो कैसे दूर करें? इन दोनों ही विषयों पर लेखक ने अपनी पैनी नजर रखी हैं। प्रकृति की गोद में और हमारे आस पास औषधियां बिखरी पड़ीं हैं लेकिन उनकी पहचान और रोग दूर करने के लिये उपयोग की पद्धति से आम आदमी अनजान हैं। एक छोटी सी सौ पेज की किताब में गागर में सागर भरने का काम कर दिखाया है राजेन्द्र जी ने।

इस किताब के पहले चार पेजों में ही लेखक ने निरोगी कैसे रहें इसके कारगर उपाय सुझाये हैं। इनमें प्रातः काल उठना, करतल दर्शन, पाद स्पर्श, उषः पान, व्यायाम, तेल मालिश और स्नान आदि की विधि बताकर शरीर को निरोगी रखने के उपाय बताये हैं। इसके साथ ही अगले चार पेजों में निरोगी रहने के उपाय बताये गये हैं। इसके साथ ही लेखक ने अगले चरण में रोग हो जाने पर उनसे छुटकारा पाने के आसान 101 उपाय भी बतायें हैं।

इस पुस्तक के लेखक ने निरोगी रह कर शतायु होने के नुस्खे भी सुझाये हैं। इस अध्याय में यह बताया गया हैं कि रोग निरोधक क्षमता बढ़ाने एवं शरीर को स्वस्थ रखनें में अलसी,मैथी,आंवला,घृतकुमारी,हरड़,सरसों का तेल,गौ मूत्र तुलसी पत्र,नीम पत्र और छाछ का कब और कैसे प्रयोग किया जाये। इस किताब में यह भी बताया गया हैं कि आर्युवेद के अनुसार बहुत सी सब्जियां ऐसी हैं जो ना केवल रोगों को दूर भगातीं हैं वरन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती हैं। इनके जीवन पर्यंन्त या ऋतु अनुसार सेवन की विधि भी बतायी गयी हैं। इनमें शमी,लिसोड़ा,कच्ची हल्दी,बथुआ,चौलाई,मैथी,मूली,गाजर,करेला,लौकी,टमाटर एवं पालक के समयानुसार सेवन करने की विधि बता कर लाभ गिनाये गये हैं।

शरीर में होने वाले अलग अलग रोगों के लिये धरेलू औषधियों का वर्णन भी पुस्तक में सहज सरल भाषा में किया गया हैं तथा यह बताने का प्रयास किया गया हैं कि हमारे घरों में हमेशा रहने वाली खान पान की चीजें ही वक्त पड़ने पर एक औषधालय का काम कर सकतीं हैं। शास्त्रों के अनुसार किस ऋतु में किस चीज का सेवन नहीं करना चाहिये यह भी बताया गया हैं। प्राथमिक उपचार के लिये घरेलू औषघालय में अनिवार्य रूप से रखी जाने वाली दवाइयों का भी लेखक ने उल्लेख किया हैं।

योग भगाये रोग नामक अध्याय में लेखक ने एक दिन में सिर्फ 15 मिनिट योग करके स्वस्थ रहने के उपाय बताने के साथ ही मुद्रा विज्ञान और कुछ मंत्रों की मदद से निरोगी रहनें राज को भी उजागर किया हैं।

कुल मिलाकर सहज और सरल भाषा में लिखी गयी इस सौ पेज की किताब में हमें हमारे ही आस पास रहने वाली खान पान की चीजों का एक औषधि के रूप में उपयोग कर निरोगी रहने या रोग होने पर उपचार करने के सरल उपाय बताये गये हैं।

वैसे तो रोगी काया की चिकित्सा करना मानव सेवा मानी जाती थी लेकिन आज कल पैसे की अंधी दौड़ ने इसे इतना अधिक व्यवसायिक कर दिया हैं कि कई गंभीर बीमारियों के इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गये हैं। ऐसे हालातों में यह पुस्तक लाइलाज रहने के बजाय कुछ ऐसे नुस्खे तो दे रही हैं जिससे मानव मात्र की सेवा हो सके।

मैं राजेन्द्र जी के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुये यह भी अपेक्षा व्यक्त करता हूॅं कि वे भविष्य में भी समाज के हित में अपने ऐसे प्रशंसनीय प्रयास सतत जारी रखें।





आशुतोष वर्मा

सिवनी

09425174640