Monday, February 28, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवनी के सांसद के.डी. देशमुख


इन दिनों दो ही किसान पुत्र चर्चित हैं। एक प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया शिवराजसिंह चौहान और दूसरे विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस के विधायक हरवंश सिंह। प्रदेश में पिछले चार महीनों से किसान आत्म हत्या कर रहें हैं। बुन्देलखंड़ से शुरू हुआ यह सिलसिला सिवनी जिले तक आ गया है। इस दौरान प्रदेश के 90 किसान आत्म हत्या कर चुके हैं। एक ने संवेदना व्यक्त करने जाने से पहले अखबारों में जगह रुकवायी तो दूसरे की सरकार ने बिना मुआवजा बांटे इस आत्म हत्या को आर्थिक तंगी के कारण हुयी घटना मानने से इंकार कर दिया।ममता के तीसरे रेल बजट में भी सिवनी को कोई ऐसी सौगात नहीं मिली हैं जिसकी प्रशंसा की जा सके। ममता ने जिले की दोनों महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर भले ही कोई ठोस कार्यवाही ना की हो लेकिन इनका बजट में उल्लेख कर पूरी तरह निराश भी नहीं किया हैं। इस रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवनी के सांसद के.डी. देशमुख। जिन्होंने बालाघाट की रेल परियोजनाओं के लिये तो प्रयास किये लेकिन सिवनी जिले की मांगों की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में आयोजित इस हाकी प्रतियोगिता के लियेसभी पार्षद भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने सर्वसम्मति से प्रस्तावित पास कर इस आयोजन हेतु राशि का प्रावधान कराया। इस मौके पर नगर के हालात पर चर्चा कर नरेश द्वारा राजेश को दी गई नसीहत जिले के राजनैतिक हल्कों चर्चित है।


किसानों की आत्महत्या पर भाजपा और इंका कर रही हैं राजनीति -इन दिनों दो ही किसान पुत्र चर्चित हैं। एक प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया शिवराजसिंह चौहान और दूसरे विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस के विधायक हरवंश सिंह। प्रदेश में पिछले चार महीनों से किसान आत्म हत्या कर रहें हैं। बुन्देलखंड़ से शुरू हुआ यह सिलसिला सिवनी जिले तक आ गया है। इस दौरान प्रदेश के 90 किसान आत्म हत्या कर चुके हैं। सरकार अपना पक्ष रख कर चुप हो जाती हैं और विपक्ष विज्ञप्ति जारी कर अपने कत्तZव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। सिवनी जिले में आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या करने का यह पहला मामला हैं जब एक युवा आदिवासी किसान ने अपने ही खेत के एक झाड़ पर गमछे से फांसी लगा कर अपनी जान गंवा दी है।अस्पताल में किसी और को देखने गये हरवंश सिंह को जैसे ही यह पता चला तो वे तुरन्त ही सान्त्वना देने रवाना हो गये। रवाना हानें पहले अखबारों के दफ्तरो में फोन करवाया गया कि जगह बचा कर रखना अभी समाचार भेजते हैं। इतने बड़े कद के नेता और वो भी उस कांग्रेस के जिस पार्टी ने हमेशा आदिवासियों की सेवा की हैं का उनके प्रति ऐसा रुझान ही इस वर्ग को कांग्रेस ेस दूर ले जा रहा हैं। कहा तो यह भी जा रहर हैं कि जब हरवंश सिंह अस्पताल पहुचें थे तब मृतक कृषक का शव पोस्टमार्टम होकर उसके गृह ग्राम के लिये रवाना हो चुका था। कांग्रेस के किसान पुत्र ने यदि संवेदना व्यक्त करने का नाटक किया तो भाजपायी किसानपुत्र शिवराज सिंह की सरकार ने भी कम कमाल नहीं दिखाया। सरकारी विज्ञप्ति में आर्थिक तंगी के कारण मृत्यु होने को नकार दिया गया हैं। मृतक की पारिवारिक कृषि भूमि का हवाला दिया गया है और यह भी उल्लेख किया गया हैं कि उसके परिवार का फसल नुकसानी का मुआवजा 36690 रु. बनाया गया है। इससरकारी विज्ञप्ति से यह साफ हो जाता हैं कि मुआवजा बनाया गया तो हैं लेकिन बांटा नहीं गया हैं अन्यथा सरकारी विज्ञप्ति में बचाव में मुआवजा बनाये जाने का उल्लेख करने के बजाय बाकायदा चेक नंबंर दिये जाते। एक युवा आदिवासी किसान की आत्महत्या को स्वीकार कर भविष्य में पुनरावृत्ति ना होने के उपाय करने के बाजय सरकार ने बेशर्मी की हदें पार करते हुये इसे आर्थिक तंगी से हुयी मौत मानने से इंकार कर दिया। किसान पुत्र शिवराज सिंह के कृषि मन्त्री किसानों की आत्महत्या को किसानों के पाप की सजा बताते हैं और किसान पुत्र शिवराज मूक दर्शक बने बैठे रहते हैं। प्रदेश में आज जरूरत इस बात की हैं कि इस बात की चिन्ता की जाये कि किसान आत्महत्या क्यों कर रहें हैं और इसे कैसे रोका जा सकता हैं। वरना यह सिलसिला चलते रहेगा और नेताओं की नौटंकी भी बदस्तूर जारी रहेगी।


सांसद के.डी. की लापरवाही से रेल बजट में सिवनी की हुयी उपेक्षा-ममता के तीसरे रेल बजट में भी सिवनी को कोई ऐसी सौगात नहीं मिली हैं जिसकी प्रशंसा की जा सके। ममता ने जिले की दोनों महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर भले ही कोई ठोस कार्यवाही ना की हो लेकिन इनका बजट में उल्लेख कर पूरी तरह निराश भी नहीं किया हैं। अपने बजट में उन्होंने रामटेक बरास्ता सिवनी गोटेगांव नयी रेल परियोजना और छिन्दवाड़ा सिवनी नैनपुर मंड़ला फोर्ट के गेज कन्वर्शन का उल्लेखकरते हुये कहा हैं कि दोनों परियोजनाओं का सर्वे कार्य मार्च 2011 तक पूरा हो जावेगा और बारहवी पंचवषीZय योजना में इनका कार्य प्रारंभ हो जावेगा। इस रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवी के सांसद के.डी. देशमुख। जिन्होंने बालाघाट की रेल परियोजनाओं के लिये तो प्रयास किये लेकिन सिवनी जिले की मांगों की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया। चुनाव के समय तो देशमुख ने सिवनी के लिये बड़ी बड़ी बातें की थीं लेकिन चुनावके बाद उन्हें बालाघाट जिले के 6 विधानसभाओं का ही ख्याल रह रहा हैं सिवनी की उन दो विधानसभाओं का उन्हें कोई ख्याल ही नहीं हैं जिन्होने उन्हे भारी वोटों से जिताया था। के.डी. को यह भी याद रखना चाहिये किसिवनी जिले का यह भी इतिहास रहा हें कि जिले का एक विधानसभा क्षेत्र ही मंड़ला के सात विधानसभा क्षेत्रों की भरपायी करके भाजपा को धूल चटा देता था। 1980 के दशक में मंड़लासंसदीय क्षेत्र में जिले के घंसौर विधानसभा क्षेत्र के ऐसा कमाल कर दिखाया था।मंड़ला की सातों सीटों से जीतने वाली भाजपा मात्र घंसौर की हार से पूरी लोकसभा हार जाती थी। सिवनी के दोनों विधानसभा क्षेत्रों ने यदि ठान ली तो अगले चुनाव में के.डी. भाऊ की बालाघाट की 6 साीटों के परिणाम को बदलने में कोई देर नहीं लगने वाली हैं।


समापन समारोह में राजेश को दी नरेश ने नसीहत-नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित अखिल भारतीय गोल्डकप हाकी प्रतियोगिता का समापन हो गया। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में आयोजित इसहाकी प्रतियोगिता के लियेसभी पार्षद भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने सर्वसम्मति से प्रस्तावित पास कर इस आयोजन हेतु राशि का प्रावधान कराया। नगर के हाकी प्रेमियों के लिये यह एक सुखद आयोजन रहा वहीं दूसरी ओर भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी से पेरशान पालिका अध्यक्ष राजेश को इस सफल आयोजन और उसमें शिरकत करने वाले भाजपा नेताओं की उपस्थिति से मजबूती मिली हैं। भाजपा में गुटबाजी का आलम यह हैं कि अब वह खुले आम देखी जा सकती हैं। इसकाएक उदाहरण तो समापन समारोह के मंचीय उदबोधनों के दौरान ही देखने को मिल गया। सिवनी के पूर्व भाजपा विधायक नरेश का मंच पर सम्मान किया गया। यह सम्मान उनके कार्यकाल में खेलों के लिये गये प्रोत्साहन को लेकर किया गया। एक सम्मान जिला हाकी संध ने तो दूसरा सम्मान विभिन्न क्लबों के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। सम्मान होने के बाद जब संबोधन के लिये नरेश दिवाकर को बुलाया गया तब उन्होंने ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बिना संकोच किये इस सफल आयोजन के लिये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की तारीफ भी की और बधाई भी दी। लेकिन साथ ही यह नसीहत भी दे डाली कि राजेश जी को अब नगर की साफ सफाई और उसे सुन्दर बनाने के कत्तZव्य की पूर्ति करने भी इसी लगन के साथ जुट जाना चाहिये। इस मौके पर नगर के हालात पर चर्चा कर नरेश द्वारा राजेश को दी गई नसीहत जिले के राजनैतिक हल्कों चर्चित है।

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवनी के सांसद के.डी. देशमुख

इन दिनों दो ही किसान पुत्र चर्चित हैं। एक प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया शिवराजसिंह चौहान और दूसरे विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस के विधायक हरवंश सिंह। प्रदेश में पिछले चार महीनों से किसान आत्म हत्या कर रहें हैं। बुन्देलखंड़ से शुरू हुआ यह सिलसिला सिवनी जिले तक आ गया है। इस दौरान प्रदेश के 90 किसान आत्म हत्या कर चुके हैं। एक ने संवेदना व्यक्त करने जाने से पहले अखबारों में जगह रुकवायी तो दूसरे की सरकार ने बिना मुआवजा बांटे इस आत्म हत्या को आर्थिक तंगी के कारण हुयी घटना मानने से इंकार कर दिया।ममता के तीसरे रेल बजट में भी सिवनी को कोई ऐसी सौगात नहीं मिली हैं जिसकी प्रशंसा की जा सके। ममता ने जिले की दोनों महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर भले ही कोई ठोस कार्यवाही ना की हो लेकिन इनका बजट में उल्लेख कर पूरी तरह निराश भी नहीं किया हैं। इस रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवनी के सांसद के.डी. देशमुख। जिन्होंने बालाघाट की रेल परियोजनाओं के लिये तो प्रयास किये लेकिन सिवनी जिले की मांगों की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में आयोजित इस हाकी प्रतियोगिता के लियेसभी पार्षद भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने सर्वसम्मति से प्रस्तावित पास कर इस आयोजन हेतु राशि का प्रावधान कराया। इस मौके पर नगर के हालात पर चर्चा कर नरेश द्वारा राजेश को दी गई नसीहत जिले के राजनैतिक हल्कों चर्चित है।

किसानों की आत्महत्या पर भाजपा और इंका कर रही हैं राजनीति -इन दिनों दो ही किसान पुत्र चर्चित हैं। एक प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया शिवराजसिंह चौहान और दूसरे विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस के विधायक हरवंश सिंह। प्रदेश में पिछले चार महीनों से किसान आत्म हत्या कर रहें हैं। बुन्देलखंड़ से शुरू हुआ यह सिलसिला सिवनी जिले तक आ गया है। इस दौरान प्रदेश के 90 किसान आत्म हत्या कर चुके हैं। सरकार अपना पक्ष रख कर चुप हो जाती हैं और विपक्ष विज्ञप्ति जारी कर अपने कत्तZव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। सिवनी जिले में आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या करने का यह पहला मामला हैं जब एक युवा आदिवासी किसान ने अपने ही खेत के एक झाड़ पर गमछे से फांसी लगा कर अपनी जान गंवा दी है।अस्पताल में किसी और को देखने गये हरवंश सिंह को जैसे ही यह पता चला तो वे तुरन्त ही सान्त्वना देने रवाना हो गये। रवाना हानें पहले अखबारों के दफ्तरो में फोन करवाया गया कि जगह बचा कर रखना अभी समाचार भेजते हैं। इतने बड़े कद के नेता और वो भी उस कांग्रेस के जिस पार्टी ने हमेशा आदिवासियों की सेवा की हैं का उनके प्रति ऐसा रुझान ही इस वर्ग को कांग्रेस ेस दूर ले जा रहा हैं। कहा तो यह भी जा रहर हैं कि जब हरवंश सिंह अस्पताल पहुचें थे तब मृतक कृषक का शव पोस्टमार्टम होकर उसके गृह ग्राम के लिये रवाना हो चुका था। कांग्रेस के किसान पुत्र ने यदि संवेदना व्यक्त करने का नाटक किया तो भाजपायी किसानपुत्र शिवराज सिंह की सरकार ने भी कम कमाल नहीं दिखाया। सरकारी विज्ञप्ति में आर्थिक तंगी के कारण मृत्यु होने को नकार दिया गया हैं। मृतक की पारिवारिक कृषि भूमि का हवाला दिया गया है और यह भी उल्लेख किया गया हैं कि उसके परिवार का फसल नुकसानी का मुआवजा 36690 रु. बनाया गया है। इससरकारी विज्ञप्ति से यह साफ हो जाता हैं कि मुआवजा बनाया गया तो हैं लेकिन बांटा नहीं गया हैं अन्यथा सरकारी विज्ञप्ति में बचाव में मुआवजा बनाये जाने का उल्लेख करने के बजाय बाकायदा चेक नंबंर दिये जाते। एक युवा आदिवासी किसान की आत्महत्या को स्वीकार कर भविष्य में पुनरावृत्ति ना होने के उपाय करने के बाजय सरकार ने बेशर्मी की हदें पार करते हुये इसे आर्थिक तंगी से हुयी मौत मानने से इंकार कर दिया। किसान पुत्र शिवराज सिंह के कृषि मन्त्री किसानों की आत्महत्या को किसानों के पाप की सजा बताते हैं और किसान पुत्र शिवराज मूक दर्शक बने बैठे रहते हैं। प्रदेश में आज जरूरत इस बात की हैं कि इस बात की चिन्ता की जाये कि किसान आत्महत्या क्यों कर रहें हैं और इसे कैसे रोका जा सकता हैं। वरना यह सिलसिला चलते रहेगा और नेताओं की नौटंकी भी बदस्तूर जारी रहेगी।

सांसद के.डी. की लापरवाही से रेल बजट में सिवनी की हुयी उपेक्षा-ममता के तीसरे रेल बजट में भी सिवनी को कोई ऐसी सौगात नहीं मिली हैं जिसकी प्रशंसा की जा सके। ममता ने जिले की दोनों महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर भले ही कोई ठोस कार्यवाही ना की हो लेकिन इनका बजट में उल्लेख कर पूरी तरह निराश भी नहीं किया हैं। अपने बजट में उन्होंने रामटेक बरास्ता सिवनी गोटेगांव नयी रेल परियोजना और छिन्दवाड़ा सिवनी नैनपुर मंड़ला फोर्ट के गेज कन्वर्शन का उल्लेखकरते हुये कहा हैं कि दोनों परियोजनाओं का सर्वे कार्य मार्च 2011 तक पूरा हो जावेगा और बारहवी पंचवषीZय योजना में इनका कार्य प्रारंभ हो जावेगा। इस रेल बजट में पैसे आवंटित नहीं होने के लिये यदि कोई दोषी हें तो वे हैं बालाघाट सिवी के सांसद के.डी. देशमुख। जिन्होंने बालाघाट की रेल परियोजनाओं के लिये तो प्रयास किये लेकिन सिवनी जिले की मांगों की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया। चुनाव के समय तो देशमुख ने सिवनी के लिये बड़ी बड़ी बातें की थीं लेकिन चुनावके बाद उन्हें बालाघाट जिले के 6 विधानसभाओं का ही ख्याल रह रहा हैं सिवनी की उन दो विधानसभाओं का उन्हें कोई ख्याल ही नहीं हैं जिन्होने उन्हे भारी वोटों से जिताया था। के.डी. को यह भी याद रखना चाहिये किसिवनी जिले का यह भी इतिहास रहा हें कि जिले का एक विधानसभा क्षेत्र ही मंड़ला के सात विधानसभा क्षेत्रों की भरपायी करके भाजपा को धूल चटा देता था। 1980 के दशक में मंड़लासंसदीय क्षेत्र में जिले के घंसौर विधानसभा क्षेत्र के ऐसा कमाल कर दिखाया था।मंड़ला की सातों सीटों से जीतने वाली भाजपा मात्र घंसौर की हार से पूरी लोकसभा हार जाती थी। सिवनी के दोनों विधानसभा क्षेत्रों ने यदि ठान ली तो अगले चुनाव में के.डी. भाऊ की बालाघाट की 6 साीटों के परिणाम को बदलने में कोई देर नहीं लगने वाली हैं।

समापन समारोह में राजेश को दी नरेश ने नसीहत-नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित अखिल भारतीय गोल्डकप हाकी प्रतियोगिता का समापन हो गया। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और उपाध्यक्ष राजिक अकील के नेतृत्व में आयोजित इसहाकी प्रतियोगिता के लियेसभी पार्षद भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने सर्वसम्मति से प्रस्तावित पास कर इस आयोजन हेतु राशि का प्रावधान कराया। नगर के हाकी प्रेमियों के लिये यह एक सुखद आयोजन रहा वहीं दूसरी ओर भाजपा की आन्तरिक गुटबाजी से पेरशान पालिका अध्यक्ष राजेश को इस सफल आयोजन और उसमें शिरकत करने वाले भाजपा नेताओं की उपस्थिति से मजबूती मिली हैं। भाजपा में गुटबाजी का आलम यह हैं कि अब वह खुले आम देखी जा सकती हैं। इसकाएक उदाहरण तो समापन समारोह के मंचीय उदबोधनों के दौरान ही देखने को मिल गया। सिवनी के पूर्व भाजपा विधायक नरेश का मंच पर सम्मान किया गया। यह सम्मान उनके कार्यकाल में खेलों के लिये गये प्रोत्साहन को लेकर किया गया। एक सम्मान जिला हाकी संध ने तो दूसरा सम्मान विभिन्न क्लबों के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। सम्मान होने के बाद जब संबोधन के लिये नरेश दिवाकर को बुलाया गया तब उन्होंने ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बिना संकोच किये इस सफल आयोजन के लिये पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की तारीफ भी की और बधाई भी दी। लेकिन साथ ही यह नसीहत भी दे डाली कि राजेश जी को अब नगर की साफ सफाई और उसे सुन्दर बनाने के कत्तZव्य की पूर्ति करने भी इसी लगन के साथ जुट जाना चाहिये। इस मौके पर नगर के हालात पर चर्चा कर नरेश द्वारा राजेश को दी गई नसीहत जिले के राजनैतिक हल्कों चर्चित है।

Wednesday, February 23, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

मैदान पर हाकी के हुनरऔर उदघाटन समारोह के मंच पर नेताओं के द्वारा मारे जा रहे पेनाल्टी स्ट्रोक्स भी कम चर्चित नहीं रहे


हाकी हमारे शहर का सबसे लोकप्रिय खेल हैं। इसलिये राजनेताओं ने भी इसे अपने सियासी खेल का एक हिस्सा बना लिया हैं। उदघाटन समारोह के दिन हाकी प्रेमी तो खेल देखने में मग्न थे लेकिन मंच नेताओं द्वारा लगाये जा रहें पेनाल्टी स्ट्रोक्स का आनंद तो मंच पर मौजूद चंद लोग ही ले पा रहे थे। हरवंश सिंह ने इस पर भी राहत महसूस की है कि पहली बार बिना चंदा दिये मुख्यअतिथि बनने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि यह जिले में पहला ऐसा बड़ा आयोजन हैं जिसमें कोई चंदा नहीं लिया गया। वैसे कुछ भी कहो इतना तो जरूर हैं कि हाकी के मैदान में खिलाड़ियों के दांव पेंच के साथ साथ मंच पर भी रोज नेताओं के दांव पेंच भी कम रोचक नहीं हैं। उप चुनावों में कांग्रेस की परंपरागत सीटो पर भाजपा की जीत का जश्न सिवनी में भी मना और कार्यकत्र्ताओं ने मीठा बांटकर ना केवल खुशियां मनायीं वरन जिला संगठन मंत्री त्यागी का आभार भी माना। बरघाट ब्लाक कांग्रेस द्वारा आहूत किसान आंदोलन में हरवंश सिंह की दहाड़ और सत्ता से अलग कर देने तक की चुनौती को लेकर तरह तरह की चर्चायें हो रहीं है। तत्कलीन भाजपा सांसद एवं वर्तमान विधायक नीता पटेरिया ने भले ही अपना राजनैतिक कद बढ़ा लिया हो और आज वे प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष बन गयीं हो लेकिन आज से लगभग तीन साल पहले हुये आमानाला कांड़ की जांच पूरी करवा कर अपनी ही सरकार में चालान पेश नहीं करा पायीं हैं।


हरवंश की शिवराज को दी गयी खुली चुनौती चर्चित-ब्लाक कांग्रेस कमेटी बरघाट के आव्हान पर किसानों की मांगों के समर्थन में म.प्र. विधानसभा और प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरवंशसिंह ने प्रदेश की भाजपा सरकार और उसके मुखिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के ऊपर तीखे आरोप लगाये। पाला से पीड़ित किसानों को मुआवजे वितरण में हो रहे विलंब और चीन्ह चीन्ह के मुआवजा देने का आरोप लगाते हुये इंका नेता सिंह ने भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों की आलोचना की हैं। अपने भाषण में उन्होंने यहां तक कहा कि मैं किसान का बेटा हूॅं और किसानों के लिये लड़ रहा हूं भले ही मुझे सत्ता से अलग कर दिया जाये। मैं शिवराज जैसा सिर्फ बोलने वाला किसान पुत्र या किसान नहीं हूॅं। उनके ऐसे तीखे आरोपों से राजनैतिक हल्कों में चर्चा चल उठी हैं कि किसी सोची समझी राजनैतिक रणनीति के तहत हरवंश ने यह लहजा अपनाया है।


मैदान के साथ साथ मंच पर भी मारे जा रहें थेैं पेनाल्टी स्ट्रोक्स-हाकी हमारे शहर का सबसे लोकप्रिय खेल हैं। इसलिये राजनेताओं ने भी इसे अपने सियासी खेल का एक हिस्सा बना लिया हैं। वर्तमान में नगर पालिका गोल्डकप आल इंड़िया हाकी टूर्नामेंट चल रहा। हाकी प्रेमी जनता को अच्छा खेल इेखने को मिल रहा हैं लेकिन नेता गण भी मंच पर अपना खेल दिखाने से नहीं चूक रहें हैं। उदघाटन समारोह के दिन हाकी प्रेमी तो खेल देखने में मग्न थे लेकिन मंच नेताओं द्वारा लगाये जा रहें पेनाल्टी स्ट्रोक्स का आनंद तो मंच पर मौजूद चंद लोग ही ले पा रहे थे। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने अपने बाजू में बैठे इंका विधायक हरवंश सिंह से पूछा कि चाचा कैसा कार्यक्रम लगा तो हरवंश ने कहा कि बहुत अच्छा हैं। तुम तो बहुत अच्छे नेता हो हमारे साथ आ जाओ तो और अच्छा बना देंगें। इस पर राजेश ने कहा कि मैं तो आपके साथ हूं। इस पर हरवंश ने यह कह कर विराम लगा दिया कि अभी आधे साथ हो। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि पालिका चुनाव में हरवंश सिंह और उनके समर्थकों पर ना केवल भीतरघात के आरोप लगे थे वरन उनके कुछ समर्थकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी हुयी थी। इसके बाद भी हाथ आये मौके को राजेश भला कहां चूकने देने वाले थे उन्होंने लगे हाथ यह भी कह डाला कि चाचा जरा राजिक वगैरह को तो समझाओ वो जब देखो तब लोकायुक्त या कहीं कहीं शिकायत करते रहता हैं। इस पर अनुभवी हरवंश सिंह ने पेनाल्टी स्ट्रोक मारते हुये नसीहत दी कि अकेले अकेले मलाई खाने से थोड़ी ना सब कुछ ठीक ठाक रहता है मिल बांट कर खाओ तो सब ठीक हो जायेगा। वैसे भी इस मामले में हरवंश सिंह का नजरिया हमेशा से साफ रहा हैं। तभी तो जब वे गृह मंत्री बन कर आये थे तो गांधी चैक में अपने स्वागत समारोह में उन्होंने खुले आम यह कहा था कि “रामई की चिड़िया,रामई का खेत।खाओ री चिड़िया,भर भर पेट“। आपस में हो रही चर्चाओं को यहीं विराम नहीं मिला। युवा पालिका अध्यक्ष राजेश नेहरवंश से यह भी कह डाला कि चाचा जरा मेरी तारीफ कर देना तो विधायक नीता पटेरिया को चीटा लग जायेगा तो तत्काल ही हरवंश ने सहमति दे दी और भाषण में खुल कर तारीफ कर डाली और इस पर भी राहत महसूस की है कि पहली बार बिना चंदा दिये मुख्यअतिथि बनने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि यह जिले में पहला ऐसा बड़ा आयोजन हैं जिसमें कोई चंदा नहीं लिया गया। वैसे कुछ भी कहो इतना तो जरूर हैं कि हाकी के मैदान में खिलाड़ियों के दांव पेंच के साथ साथ मंच पर भी रोज नेताओं के दांव पेंच भी कम रोचक नहीं हैं।


उपचुनाव में भाजपा की जीत जश्न सिवनी में भी मना-प्रदेश की कांग्रेस की दो परंपरागत सीटों को उप चुनाव में अपने खाते में डालने के बाद भाजपा के हौसले बहुत बुलंद हैं। प्रदेश में इन दिनो विपक्ष नाम की कोई चीज कहीं नहीं दिख रही हैं। कांग्रेस में प्रदेश से लेकर जिले तक अनिश्चितता का का वातावरण बना हुआ है। उप चुनावकी जीत पर जिले में भी खाुशी का माहैल दिखायी दिया। भाजपा के नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी के नेतृत्व में मिठाइयां बांटी गयीं और खुशियां मनायी गयीं। जिले के संगठन मंत्री संतोष त्यागी का भी आभार माना गया जिन्हें प्रदेश संगठन ने इन चुनावों में लगया था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता और केन्द्रीय मंत्री ज्यातिरादित्य सिंधिंया ने सार्वजनिक रूप से इन चुनाव परिणामों के बाद यह कहा है कि कांग्रेस को इस मामले में आत्मावलोकन करना चाहिये।


नीता पटेरिया अभी तक पेश नही ंकरा पायीं हैं आमानाला कांड़ का चालान-तत्कलीन भाजपा सांसद एवं वर्तमान विधायक नीता पटेरिया ने भले ही अपना राजनैतिक कद बढ़ा लिया हो और आज वे प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष बन गयीं हो लेकिन आज से लगभग तीन साल पहले हुये आमानाला कांड़ की जांच पूरी करवा कर अपनी ही सरकार में चालान पेश नहीं करा पायीं हैं। इस मामले में उन्होनें जिल की पूरी भाजपा के साथ बंड़ोल थाने का घेराव कराया था और इंका विधायक हरवंश सिंह के साथही कुछ अन्य कांग्रेसियांे के खिलाफ धारा 307 सहित कई गंभीर अपराधों में केस पंजीबद्ध कराया था। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी ना तो पुलिस अपनी पूरी तफशीश कर पायी हैं,ना ही अदालत में चालान पेश कर पायी हैं और ना ही खारिजी। इससे ऐसा लगता है कि या तो कोई अपराध ना बनने के बाद भी पुलिस ने दवाब मे प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया और अब कुछ ना कर पा रही हैं या फिर दवाब बनाने वाली ताकतें ही निष्क्रिय हो गयीं हैं। केस दर्ज होने के बाद से बहुत सा पानी बैनगंगा के पुल के नीचे से बह चुका हैं। विधानसभा के ना केवल टिकिट बट चुके हैं वरन तत्कालीन सांसद नीता पटेरिया भाजपा की टिकिट पाकर अब विधायक भी बन चुकीं हैं। सार्वजनिक मंचों पर साथ ना दिखने की बात भी अब खत्म हो चुकी हैं। यह सब देख कर लोग अब यह कयास भी लगाने लगें हैं कि आमानाला जमीन घोटाले में फरियादी द्वारा मेरा विवाद विवाद शेष नहीं है कहने से मुक्ति पाने वाले हरवंश सिंह अब जल्दी ही दूसरे आमानालाकांड़ से भी मुक्ति पा सकतें हैं।
: जय भड़ास : दुनिया के सबसे बड़े हिंदी ब्लाग में आपका स्वागत है : 850 सदस्यों वाले इस कम्युनिटी ब्लाग पर प्रकाशित किसी रचना के लिए उसका लेखक स्वयं जिम्मेदार होगा : आप भी सदस्यता चाहते हैं तो मोबाइल नंबर, पता और प्रोफाइल yashwantdelhi@gmail.com पर मेल करें : जय भड़ास :











This Blog Linked From Here The Web


This Blog


Linked From Here


.The Web


.


23.2.11






हरवंश सिंह को थी क्लीन चिट की जल्दी लेकिन फरियादी ने लगायी शीर्ष सुनवायी की अर्जी









सिवनी। आमानाला जीमन घोटाले मामले में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिह के बरी हो जाने का मामला राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं। हरवंश सिंह को तो मामले में क्लीन चिट लेने की जल्दी समझ में आती हैं लेकिन अदालत में शीघ्र सुनवायी की गुहार फरियादी द्वारा की जाना समझ से परे हैं। जिस फरियादी ने अदालत में परिवाद दायर कर हरवंश सिंह और उनके पुत्र पर आरोप लगाये थे उसी फरियादी द्वारा उन्हें आरोप मुक्त करने में जल्दी सियासी हल्कों में चर्चित है। झूठे आरोप लगाकर परिवाद पेश कर आरोपी बनाने वाले फरियादी के खिलाफ हरवंश सिंह द्वारा कोई कार्यवाही नही किये जाने की घोषणा के कई अर्थ लगाये जा रहें हैं।










उल्लेखनीय है कि बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में फरियादी मो. शाह ने लखनादौन के न्यायालय में 18 मई 2010 को एक परिवाद धारा 156(3) के अंर्तगत पेशकर अभियुक्त न्याज अली,रजनीश सिंह और हरवंश सिंह के विरुद्ध 420,506,294,120बी के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करने की गुहार लगायी थी। कोर्ट के बार बार आदेश देने के बाद भी रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह के खिलाफ पुलिस ने मामला पंजीबद्ध नहीं किया था। अंततः 28 जून 2010 को इनके खिलाफ मामला पंजीबद्ध करने की सूचना कोर्ट को दी गयी थी। फरियादी ने कोर्ट में बयान देकर यह कहा था कि उसकी हरी महाराज ने रजनीश सिंह से फोन पर बात करायी थी। फरियादी ने यह भी कहा था कि रजनीश सिंह ने उससे कहा था कि बैठकर फैसला कर लेते हैं। अन्य सभी खातेदारों के साथ बैठ कर बात कर लो। ऐसा करते करते 3 माह गुजर गये लेकिन कोई भी सह खातेदार ने मेरे साथ बैठकर बात नहीं की हैं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि फरियादी की पुश्तैनी जमीन सादकसिवनी निवासी रवी नारायण शर्मा ने खरीदी हैं जिनके हरवंश सिंह से नजदीकी संबंधों की चर्चा भी होती रही हैं।










सियासी हल्कों में व्याप्त चर्चा के अनुसार हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष का चयन होना हैं। नेता प्रतिपक्ष के चयन का काम तो फरवरी माह में ही किये जाने की संभावना है। राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित हैं कि हरवंश सिंह भी इस दौड़ में शामिल हैं। इसीलिये वे प्रयासरत थे कि अदालत में पंजीबद्ध धोखाधड़ी के मामलें में उन्हें जल्द ही क्लीन चिट मिल जाये क्योंकि इस मामले शिकायत जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा आला कमान को कर चुके थे। लेकिन फरियादी द्वारा कोर्ट में जल्दी सुनवायी की गुहार करना लोगों को समझ में नहीं आ रहा हैं। उल्लेखनीय है कि प्रकरण की खारिजी पर विचार हेतु कोर्ट मामले को 7 फरवरी 2011 को सुनवायी के लिये नियत कर चुकी थी लेकिन कोर्ट में उपस्थित फरियादी ने एक आवेदन पत्र देकर प्रार्थना की कि आज ही याने 28 जनवरी को ही सुनवायी कर ली जाये। इस अर्जी को स्वीकार करते हुये कोर्ट ने उसी दिन प्रकरण में खारिजी लगा दी। खारिजी के संबंध फरियादी ने अदालत में अपनी सहमति जतायी तथा अपने बयान में कहा कि,“ मेरा कोई विवाद शोष नही है।“फरियादी का अदालत में दिया यह कथन भी बहुअर्थी माना जा रहा है।










यहां यह भी उल्लेखनीय हें कि आरोपी ने जिस तेजी से आरोप लगाये थे उसी तेजी से स्वयं ही अरोप वापस लेने की जल्दी चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। कुछ लोगों का तो यह मानना है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि फोन पर हुयी चर्चा के अनुसार अदालत के बाहर कहीं कोई बैठक हुई हो और मामला सुलट गया हो इसीलिये फरियादी ने अपने बयान में यह कहा हो कि मेरा कोई विवाद शेष नहीं है। कुछ लोगों का तो यह भी मानना हैं कि जिले में हो रहे बेनामी जमीनों के सौदे की तरह ही यह मामला ना हो।










इस निर्णय की जानकारी देने के लिये बुलायी गयी प्रेस कांफ्रेंस में जब हरवंश से यह पूछा गया कि झूठे आरोप लगाकर आपकी छवि खराब करने वाले फरियादी मों. शाह के विरुद्ध झूठी शिकायत करने और मानहानी का क्या आप दावा करेंगें तो हरवंश सिंह ने साफ मना कर दिया कि वे ऐसी कोई कार्यवाही नहीं करेगें। उनके इस जवाब से भी लोग भैंचक हैं कि आखिर ऐसे आदमी के खिलाफ कोई कार्यवाही करने से वे क्यों हिचक रहें हैं?










अब इस सब में सच्चायी क्या हैं? यह तो पर्दे के पीछे ही हैं। लेकिन इस मामले के निपट जाने से विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को राजनैतिक रूप से काफी राहत मिल गयी हैं।


घोखाधड़ी का यह तीसरा मामला था हरवंश पर










सिवनी। लंबे राजनैतिक जीवन में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के ऊपर यह घोखाधड़ी करने का तीसरा मामला हैं। पहला मामला पिछड़ेवर्ग की एक विधवा महिला था जिसने अपनी जमीन हड़प लेने का आरोप लगयाथा। दूसरा मामला आदिवासियों को पैसे लेकर सिंचाई पंप ना देने का था जिसमें धोखाध्ड़ी का आरोप प्रमाणित पाने पर उप पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने सिवनी पुलिस थाने को अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही करने हेतु लिखित पत्र भेजा था। तीसरा आरोप एक फकीर मुस्लिम ने लगाया और अदालत में मेरा कोई विवाद शेष नहीं का बयान दियाऔर मामला खारिज हो गया। यह भी एक विचारणीय प्रश्न हैं कि बार बार हरवंश सिंह पर धोखाधड़ी के आरोप लगते क्यों हैं?










क्या बेनामी खरीद का मामला है?










सिवनी। फरियादी की पुश्तैनी जमीन के 22 खातेदारों में से 19 खातेदारों ने अपनी जमीन सादकसिवनी निवासी रविनारायण शर्मा ने 29 जनवरी 2010 को खरीद ली थी। इस सौदे की रजिस्ट्री भी मामले में जांच में आयी थी। विक्रय पत्र की फोटो कापी भी ली गयी थी। बताया जाता हैं कि क्रेता रविनारायण और हरवंश सिंह के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। इसी आधार पर कई लोगों का यह भी मानना हैं कि जिले में इस चल रहें गोरख धंधें के समान ही यह भी एक बेनामी सौदा ना हो?










सात महीने दस दिनों में निपटी कार्यवाही










सिवनी। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के विरुद्ध परिवाद पत्र के द्वारा अदालत में पेश किये गये मामले का निर्णय होने में सात महीने दस दिनों का समय लगा। उल्लेखनीय हैं कि यह परिवाद मो. शाह ने 18 मई 2010 को पेश कर हरवंश सिंह धोखाधड़ी के आरोप चस्पा कियं थे और 28 जनवरी 2011 को अदालत में मेरा कोई विवाद शेष नहीं हैं का बयान दिया जिसके आधार पर अदालत ने खारिजी मंजूर कर दी।










कार्यवाही करने में क्यों हिचक रहें हैं हरवंश










सिवनी। झूठे आरोप लगाकर इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बनने वाले हरवंश सिंह अब मामले के झुठे साबित हो जाने के बाद फरियादी मो. शाह के खिलाफ झूठी शिकायत करने के लिये आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करने और मानहानि का दावा करने से क्यों साफ साफ मना कर रहे हैं? उनके इस इंकार में मामले को सुलटाने की कोई गुत्थी तो नहीं उलझ रही है?दैनिक यशोन्नति सिवनी से साभार

Monday, February 14, 2011

फोर लेन विवाद

अरबों में दी जाने वाली हर्जाने की राशि ही तो कहीं विलंब का कारण नहीं बन रही है?

एन.एच.ए.आई. के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा विलंब बना पहेली: 8.7 कि.मी. की आड़ में 38 कि.मी. का काम रोेकना समझ से परे

सिवनी। फोर लेन विवाद में हो रहे विलंब को लेकर तरह तरह की चर्चायें होने लगीं है। राष्ट्रीय राज मार्ग विकास प्राधिकरण के ठेकेदारों साथ हुये करार के अनुसार 14 फरवरी 2011 तक सरकार को 337 करोूड़ 85 लाख 17 हजार 4 सौ रुपये हर्जाना देय हो गया हैं। साने के अंडे देने वाली इस मुर्गी के कारण ही शायद एन.एच.ए.आई. के अधिकारी इस मामले को लटका रहे हैं। वरना खुद के द्वारा ही दिये गये विकल्प से अब उनका मुकरना समझ से परे हैं।

कुरई के विवादास्पद 8.7 कि.मी. का मार्ग पेंच नेशनल पार्क को आधार बना कर प्रस्तुत किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की सी.ई.सी. को अपने जवरब में एन.एच.ए.आई. ने प्रथम विकल्प के रूप में एलीवेटेड हाई वे याने फ्लाई ओवर बनाने का रखा था लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस पर भी सहमत नहीं था। लेकिन जब जिले के नागरिकों की ओर से जनमंच के माध्यम से जब दूसरा पक्ष कोर्ट के समक्ष आया तो वन मंत्रालय भी इस पर सहमत हो गया। लेकिन आम सहमति इसलिये नहीं बन पा रहीं है क्योंकि भू तल परिवहन मंत्रालय ही 900 करोड़ रुपये की लागत की आड़ लेकर अब इससे मुकर रहा है।

जिला कलेक्टर सिवनी ने राज्य शासन को भेजे अपने एक पत्र में उल्लेख किया हैं कि ठेकेदार को बाधा मुक्त जमीन उपलब्ध ना करा पाने के कारण एन.एच.ए.आई. को 6हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रतिदिन हर्जाना देना होगा। इसके अनुसार 14 फरवरी 2011 तक सरकार को 337 करोड़ 85 लाख 17 हजार 4 सौ रु. की राशि ठेकेदार को हर्जाने के रूप में देय हो गयी हैं।

जनचर्चा हैं कि इसी कारण एन.एच.ए.आई. के अधिकारी यह नहीं चाहते हैं कि मामला जल्दी निपट जाये। इतनी बड़ी राशि का भुगतान ाी कोई वैसे ही होने की संभावना भी नहीं व्यक्त की जा रही हैं। इसीलिये शायद इस मामले में उनके अधिकारी बात करना नहीं चाहते हैं। बीती 13 फरवरी को जब नरसिंहपुर में पदस्थ उनके अधिकारी श्री सिंघई से चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने यह कहा कि अभी वे खाना खा रहे हैं और बात नहीं कर सकते। लेकिन इसके बाद भी शिष्टाचारवश उन्होंने भी बात करना जरूरी नहीं समझा।

ऐसे हालात में इसविवाद का कब हल और होता हें और केन्द्र सरकार को कितने अरब रुपयों का चूना लगता हैं? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.

या रब मेरे दुश्मन को सदा,रखना सलामत ,
वरना मेरे मरने की,दुआ कौन करेगा?

नर्मदा तट पर प्रदेश भाजपा सरकार का सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन विवादों के बीच संपन्न हो गया। प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं जिले के इंका विधायक हरवंश सिंह ने इस आयोजन को भाजपा धार्मिक पाखंड़ बताया था और विश्व हिन्दु परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल से राम मंदिर के लिये एकत्रित किये गये चंदे का हिसाब भी पूछा था। इसके जवाब में बजरंग दल ने उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया था। यह कहा जा रहा था कि हरवंश सिंह स्वयं इस बयान का खंड़न करेंगें। लेकिन उनहोंने खुद खंड़न करके विहिप और बजरंग दल सहित भाजपा से भी सीधा पंगा लेना मुनासिब नहीं समझा और जिला इंका प्रवक्ता ओ.पी.तिवारी के माध्यम से खंड़न जारी कराया और मामले को समाप्त कर दिया। कांग्रेस के संगठन चुनाव हुये लगभग एक साल का समय बीत गया हैं। अभी तक जिला कांग्रेस की तो घोषणा ही नहीं हो पायी हैं। लेकिन ब्लाक कांग्रेस कमेटियों की घोषणायें हो गयीं हैं। ब्लाक कमेटियों की घोषणा के बाद भी इन दो महीनों में किसी भी ब्लाक के अध्यक्ष अपने महामंत्रियों की घोषणा नहीं कर पाये और अपनी पूरी टीम नहीं बना पाये हैं। ना जाने कब पूरी टीम बनेगी और कब नये पादिधाकारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथ मजबूत करने का काम शुरू करेंगें। नीता तो ताबड़ तोड़ प्रदेश के दौरों पर निकल जातीं हैं। इस दौरान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर सिवनी विधानसभा क्षेत्र में किसी कार्यक्रम मेंशामिल होने का कोई भी मौका नहीं चूकते हैं। कार्यकत्र्ताओं को भी एक विकल्प मिल जाता हैं और डी.एन. को भी संपर्क बनाने का अवसर मिल जाता हैं। नरेश समर्थक नीताके अध्यक्ष बनने से इसीलिये बहुत खुश हैं कि उनके नेता को इसी बहाने क्षेत्र संपंर्क जीवंत रखने का अवसर मिल रहा हैं जो कि बाद में टिकिट के वक्त काम आ सकता हैं।

आक्रामक तेवरों के बाद खुद खंड़न ना कर बचाव की मुद्रा में दिखे हरवंश-नर्मदा तट पर प्रदेश भाजपा सरकार का सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन विवादों के बीच संपन्न हो गया। गौड़वाना गणतंत्र पार्टी ने इसका विरोध किया था लेकिन इसका कोई खास असर आयोजन में कहीं नजर नहीं आया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ हैं। कई बार यह देखा गया हैं कि विरोध में स्वर तो मुखर होते हैं लेकिन फील्ड में कुछ दिखायी देता नहीं हैं। प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष एवं जिले के इंका विधायक हरवंश सिंह ने इस आयोजन को भाजपा धार्मिक पाखंड़ बताया था और विश्व हिन्दु परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल से राम मंदिर के लिये एकत्रित किये गये चंदे का हिसाब भी पूछा था। इसके जवाब में बजरंग दल ने उन्हें कठघरे में खड़ा करते हुये यह कहा था कि हरवंश सिंह इस आयोजन के लिये हुयी बैठक में स्वयं उपस्थित थे और उन्होंने ना केवल इस आयोजन का स्वागत किया था वरन सहयोग देने के साथ ही कुछ सुझाव भी दिये थे। बजरंग दल के इस बयान के बाद इंकाई हल्कों में कई दिनों तक चर्चा जारी रही और यह कहा जा रहा था कि हरवंश सिंह स्वयं इस बयान का खंड़न करेंगें। लेकिन उनहोंने खुद खंड़न करके विहिप और बजरंग दल सहित भाजपा से भी सीधा पंगा लेना मुनासिब नहीं समझा और कई दिनों तक विचार विमर्श करने के बाद जिला इंका प्रवक्ता ओ.पी.तिवारी के माध्यम से खंड़न जारी कराया और मामले को समाप्त कर दिया। उनके इस करतब से सियासी हल्कों में चर्चा जारी हो गयी कि वे समन्वय की राजनीति पर हमेशा की तरह संतुलन बनाकर चलना चाह रहें हैं जैसा कि वे अभी तक करते आये हैं। उनके आक्रमक बयान उनकी तासीर के खिलाफ थे इसलिये राजनैतिक क्षेत्रों यह चर्चा होने लगी थी कि वे नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिये ऐसी बयान बाजी कर रहें हैं लेकिन अब ऐसा लगने लगा हैं कि ऐसा कुछ पाने की संभावना को समाप्त होते देख हरवंश सिंह ने जो हैं, याने विस उपाध्यक्ष पद, उसको बचाने के लिये फिर कवायत शुरू कर दी हैं और अपनी जानी पहचानी अंर्तदलीय समन्वय की रणनीति पर चलना फिर शुरू कर दिया हैं।लेकिन उनके समर्थकों का यह मानना है कि यह सबउनके पार्टी के ही कुछ दुश्मनों की कयासबाजी हैं जो उनके बारे में ऐसे ही प्रलाप करते रहते हैं। जबकि उनके दुश्मनों कायह कहना हैं कि हम तो उनकी सलामती इसलिये भी चाहते हैं कि नहीं तो हमारा तो विरोध ही समाप्त हो जायेगा। उनकी इसी मर्जी से मिलता जुलता दर्दे बयां करते हुये किसी शायर ने में कहा हैं कि,

“या रब मेरे दुश्मन को सदा,

रखना सलामत ,

वरना मेरे मरने की,

दुआ कौन करेगा?“

ब्लाक इंका के महामंत्रियों की घोषणा में विलंब चर्चित-कांग्रेस के संगठन चुनाव हुये लगभग एक साल का समय बीत गया हैं। अभी तक जिला कांग्रेस की तो घोषणा ही नहीं हो पायी हैं। लेकिन ब्लाक कांग्रेस कमेटियों की घोषणायें हो गयीं हैं जिनमें धनोरा के निर्वाचित अध्यक्ष मुकेश जैन के स्थान पर तिवारी लाल उइके को विजयी घोषित करने का कमाल हो चुका हैं। कांग्रेस के संविधान के अनुसार निर्वाचित अध्यक्ष को महामंत्री घोषित करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन ब्लाक कमेटियों की घोषणा के बाद भी इन दो महीनों में किसी भी ब्लाक के अध्यक्ष अपने महामंत्रियों की घोषणा नहीं कर पाये और अपनी पूरी टीम नहीं बना पाये हैं। ना जाने कब पूरी टीम बनेगी और कब नये पादिधाकारी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथ मजबूत करने का काम शुरू करेंगें। इंकाई हल्कों में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार इस बार महामंत्रियों की घोषणा पर ही बहुत सारे समीकरण बनना बिगड़ना हैं। इसलिये जिले के इंका पुरोधा हरवंश सिंह पत्ते बहुत संभल खेल रहें हैं। इसलिये वे इसमें विलंब कर रहें हैं। क्योंकि बहुत सारे नेताओं को महामंत्री बनाने का आश्वासन दे दिया गया था। जिनमें कई नेताओं का विरोध अभी से शुरू हो गया है। इस असंतोष को दबाने और संतुलित करने के उपाय तलाशे जा रहें हैं। ऐसा ही कुछ सफल प्रयास पिछले चुनावों के बाद भी किया गया था। जब निर्वाचित अध्यक्ष महेश मालू महामंत्रियों की सूची में असलम भाई को शामिल नहीं करना चाहते थे और हरवंश सिंह यह चाहते थे कि उन्हें शामिल किया जाय। ससीलिये लंबे समय तक जिला इंका के महामंत्री घोषितनहीं हो पाये और अंततः असलम भाई महामंत्री बन गये और समय बीत जाने के कारण विरोध भी नहीं हो पाया। ऐसे हालात में अब कौन और कब महामंत्री बन पायेगा? इसके बारे में कोई भी कुछ भी कहने की परिस्थिति में नहीं है।

नीता के बाहर रहने पर नरेश कोमौका मिल जाता हैं सिवनी क्षेत्र में-भाजपा के तबेले में इन दिनों कुछ शांति सी दिख रही हैं। इसका एक कारण यह भी हैं कि अभी तक तो समूची भाजपा मंड़ला के नर्मदा के तट पर आयोजित कथित धार्मिक कार्य में जुटी हुयी थी। इसके बाद घोषणा हो गयी थी कि जिला भाजपा अध्यक्ष एवं तीनों विधायक मुख्यमंत्री के उपवास में शामिल होंगें लेकिन उनका उपवास ही प्रधानमंत्री के आश्वासन पर स्थगित हो गया। यहां की स्थिति भी ऐसी हैं कि सिवनी के पूर्व एवं वर्तमान विधायक दोनों ही खुश हैं। वर्तमान विधायकनीता पटेरिया इसलिये खुश हैं कि वे प्रदेश महिला मोर्चे की अधक्ष बन गयीं और मुख्यमंत्री की पत्नी सहितकई दिग्गजों के रिश्तेदार उनके नेतृत्व वाली कार्यकारिणी में शामिल हैं। वे ताबड़ तोड़ प्रदेश के दौरों पर निकल जातीं हैं। इस दौरान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर सिवनी विधानसभा क्षेत्र में किसी कार्यक्रम मेंशामिल होने का कोई भी मौका नहीं चूकते हैं। कार्यकत्र्ताओं को भी एक विकल्प मिल जाता हैं और डी.एन. को भी संपर्क बनाने का अवसर मिल जाता हैं। नरेश समर्थक नीताके अध्यक्ष बनने से इसीलिये बहुत खुश हैं कि उनके नेता को इसी बहाने क्षेत्र संपंर्क जीवंत रखने का अवसर मिल रहा हैं जो कि बाद में टिकिट के वक्त काम आ सकता हैं।नीता के विरुद्ध लग रहे आरोप और क्षेत्र में कम होता उनका संपंर्क उनके विरुद्ध वातावरण बनाने में काम आयेगा ऐसा उनके विरोधियोंका मानना हैं। वहीं दूसरी ओर नीता समर्थक इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका ऐसा मानना हैं कि नीता के प्रदेश अध्यक्ष बनने से उनके उच्च स्तरीय राजनैतिक संबंध बनेंगें और रहा सवाल नरेश के द्वारा आरोप लगाने का तो ेउनका कोई महत्व नहीं रहेगा क्योंकि आरोपों के चलते ही उनकी टिकिट कटी थी। अब आगे क्या होगा और कैसे राजनैतिक समीकरण बनेंगें? इनके बारे में अभी से कुछ भी कहना जल्दबाजी ही होगी।



Monday, February 7, 2011

Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.

समूची भाजपा मां नर्मदा सामाजिक महाकुभ में डुबकी लगाकर अपने सारे पाप धोने के चक्कर में लगी हुई है?

इन दिनों समूची भाजपा मां नर्मदा सामाजिक महाकुभ में डुबकी लगाकर अपने सारे पाप धोने के चक्कर में लगी हुई हैं। कुंभ शब्द को लेकर विवाद भी चल रहा हैं। भाजपा के संचालन सूत्रों को पर्दे के पीछे से संचालित करने वाले संघ की सुनियोजित रणनीति के तहत यह आयोजन किया जा रहा हैं। सन 1990 से लगातार 2004 तक लगातार मंड़ला संसदीय क्षेत्र से 6 चुनाव जीतने वाली भाजपा इस बार 2009 में हार गई हैं। प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह ने भी इस आयोजन केा आड़े हाथों लेते हुये प्रदेश सरकार और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। दूसरी ओर बजरंग दल के नेता ने हरवंश सिंह पर आरोप लगाया है कि कुंभ के आयोजन की बैठक में वे स्वयं उपस्थित थे और उन्होंने ना केवल इस आयोजन की प्रशंसा की थी वरन अपने सुझाव भी दिये थे। यदि पूरी श्र्द्धा और धार्मिक भावना मात्र से यह आयोजन किया जाता और इसे कुंभ कहने के बजाय मां नर्मदा के नाम पर कोई नाम आयोजन का रख दिया जाता तो सभी भूरि भूरि प्रशंसा करते। ओला पाला पीड़ित किसानों और फिर प्रदेशाध्यक्ष सुरेश पचौरी के अनशन के समर्थन में जिला इंका द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन में विस उपाध्यक्ष हरवंश के आक्रमक भाषणों को लेकर सियासी हल्कों में चर्चाओं का दौर जारी है।संघ और प्रदेश सरकार हमला बोलकर वे आलाकमान के सामने यह दिखाने का प्रयास कर रहें है कि विस उपाध्यक्ष रहते हुये भी जब वे इतना आक्रमक हो सकते तो फिर प्रदेशाध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनकर कितने आक्रमक हो सकते हैंर्षोर्षो

विवादित कर डाला मां नर्मदा तट पर होने वाले आयोजन को भाजपा ने-इन दिनों समूची भाजपा मां नर्मदा सामाजिक महाकुभ में डुबकी लगाकर अपने सारे पाप धोने के चक्कर में लगी हुई हैं। कुंभ शब्द को लेकर विवाद भी चल रहा हैं। जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती महाराज के साथ ही राष्ट्रीय सन्त स्वामी प्रज्ञानानन्द महाराज सहित अनेक धर्मार्चायों ने इसे कुभ कहने पर आपत्ति की हैं। भाजपा के संचालन सूत्रों को पर्दे के पीछे से संचालित करने वाले संघ की सुनियोजित रणनीति के तहत यह आयोजन किया जा रहा हैं। सन 1990 से लगातार 2004 तक लगातार मंड़ला संसदीय क्षेत्र से 6 चुनाव जीतने वाली भाजपा इस बार 2009 में हार गई हैं। कांग्रेस के एक अदने से उम्मीदवार ने भाजपायी दिगग्ज फग्गन सिंह कुलस्ते को धराशायी कर दिया था। लगातार 19 साल तक विजयी पताका फहराने वाली भाजपा को तब ना तो मां नर्मदा कें प्रति ना तो भक्ति भाव जागृत हुआ और ना आदिवासी समाज की प्रगति का ही कोई ख्याल आया। लेकिन चुनाव हारने के बाद धार्मिक आयोजन की आड़ में अपने राजनैतिक हित को साधने के प्रयास को भांप कर अब राजनैतिक हल्कों में भी इसका विरोध होने लगा है। प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह ने भी इस आयोजन केा आड़े हाथों लेते हुये प्रदेश सरकार और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। दूसरी ओर बजरंग दल के नेता ने हरवंश सिंह पर आरोप लगाया है कि कुंभ के आयोजन की बैठक में वे स्वयं उपस्थित थे और उन्होंने ना केवल इस आयोजन की प्रशंसा की थी वरन अपने सुझाव भी दिये थे। इस विज्ञप्ति में हरवंश सिंह को नास्तिक बताते हुये यह भी कहा गया था कि वे कभी कभी धार्मिक होने का पाखंड़ करते रहते है। लेकिन कोई कुछ भी कहते रहे भाजपा और संध इस आयोजन को पूरी तरह भुनाने के मूड में दिख रहे हैं। जैसे राम मन्दिर निर्माण के लिये जगह जगह से रामशिलायें एकत्रित करायी गईं थी वैसे ही अभी घर घर जाकर एक किलो चांवल, 100 ग्राम दाल और एक रुपये का सिक्का मां नर्मदा के नाम से लिया जा रहा हैंं। धर्म पे्रमी महिलायें सहज ही यह दे भी देती हैं। इसी तरह यदि शासकीय अमले में चल रही चर्चाओं को यदि सही माना जाये तो हर विभाग का चन्दे का लक्ष्य रख दिया गया हैं और उस आधार पर विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों से वसूली भी की जा रही हैं। इसमें सर्वधर्म समभाव की तर्ज पर हिन्दू मुसलमान का भी कोई भेद नहीं किया जा रहा हैं। ना केवल मंड़ला जिले में वरन समूचे प्रदेश में इसी तरह वसूली किये जाने के चर्चे आम हैं। इसे कुभ कहा जाये या नहींर्षोर्षो इस विवाद में ना पड़ते हुये इतना तो जरूर कहा जा सकता हैं कि मां नर्मदा के नाम का उपयोग भी भगवान राम के तरह करने में भाजपा कोई परहेज नहीं कर रही हैं। इसलिये इस मां नर्मदा के तट पर भरने वाले भाजपायी सरकारी मेले का नाम तो दिया ही जा सकता हैं जिसके माध्यम से 19 साल बाद हुयी हार को जीत में बदलने को प्रयास किया जायेगा। कुछ लोगों को इसबात का भी भारी आश्चर्य हैं कि भाजप में सबसे बड़े मां नर्मदा के भक्त के रूप में पूर्व केन्द्रीय मन्त्री और राष्ट्रीय असंगठित मजदूर संघ के अध्यक्ष प्रहलाद पटेल माने जाते हैं। उन्होंने पैदल नर्मदा परिक्रमा भी की है। वे महाकौशल अंचल के जनाधार वाले नेता भी माने जाते है। नर्मदा के तट पर होने वाले इस आयोजन में प्रहलाद पटेल से परहेज भी लोगों की समझ से परे हैं। वैसे तो कहने वाले यह कहने से भी नहीं चूक रहें हैं कि भगवान राम तो मर्यादापुरषोत्तम कहलाते हैं जो सारी गिल्तयों को माफ भी कर देते है लेकिन शान्त रहने वाली जगत जननी मां नर्मदा जब अपने रौद्र रूप में आती हैं गिल्तयां करने वाले और पापों तथा पापियों को बहाकर भी ले जातीं हैं। यदि पूरी श्र्द्धा और धार्मिक भावना मात्र से यह आयोजन किया जाता और इसे कुंभ कहने के बजाय मां नर्मदा के नाम पर कोई नाम आयोजन का रख दिया जाता तो सभी भूरि भूरि प्रशंसा करते और महाकौशल के लिये यह गौरवपूर्ण आयेजन होता लेकिन धर्म के नाम पर राजनीति करने की आदी भाजपा ने इसे भी नहीं छोडा है।़

क्या अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनने की जुगाड़ लगा रहें है हरवंश-ओला पाला पीड़ित किसानों और फिर प्रदेशाध्यक्ष सुरेश पचौरी के अनशन के समर्थन में जिला इंका द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन में विस उपाध्यक्ष हरवंश के आक्रमक भाषणों को लेकर सियासी हल्कों में चर्चाओं का दौर जारी है। पहले जो किसानों के समर्थन में धरनाहुआ उसमें काफी तादाद में जिले भर के इंकाजन और किसान लायें गये। इतना बड़ा धरना कई दिनों बाद जारी हुआ। फिर पचौरी जी के समर्थन में जिले के सभी प्रमुख इंका नेता धरने में शरीक हुये। इनमें सबसे प्रमुख बात यह रही कि विस उपाध्यक्ष हरवंशसिंह ने सरकार के साथ साथ विश्व हिन्दू परिषद और संघ पर तीखे आक्रमण किये जो कि उनके भाषणों से कई दिनों से गायब थे। ऐसा करने के पीछे वे अपने संवैधानिक पद की बात कह दिया करते थे। लेकिन इस बार जो बदले तेवर दिखे उसेराजनैतिक विश्लेषक ऐसा मान रहें कि प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बनने की होड़ मेंहरवंश सिंह एक बार फिर शामिल होना चाह रहें हैं। तभी आलाकमान की रणनीति के तहत संघ और विश्व हिन्दु परिषद जैसे संगठनों पर हरवंश ने आक्रमक तेवर अपनाये हैं। इसके साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलकर वे आलाकमान के सामने यह दिखाने का प्रयास कर रहें है कि विस उपाध्यक्ष रहते हुये भी जब वे इतना आक्रमक हो सकते तो फिर प्रदेशाध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनकर कितने आक्रमक हो सकते हैं? वैसे तो कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह संघ पर लंबे समयसे आक्रमक मुद्रा में दिखायी दे रहें थे लेकिन उनके मन्त्रीमंड़ल में दस साल तक प्रमुख विभागों के मन्त्री और उनके विश्वसनीय साथ्ी रहे हरवंश सिंह चुप्पी साधे रहे थे। अचानक ही उनके तेवर बदलने को किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा हैं।वैसे तो उन पर भ्रष्टाचार से लेकर पार्टी विरोधी गतिविधियों सहित जिले में कांग्रेस को रसातल में पहुचाने के आरोप भी लगते रहे हैं लेकिन अपने कुशल राजनैतिक प्रबंधन और प्रदेश केसभी इंका नेताओं से अच्छे तालमेल के कारण वे अपने आप को नाकेवल बचाते आ रहें हैं वरन नये आरोपों के चस्पा होने के बाद भी वे नया पद पा लेने में सफल होते रहें हैं। जिले में भी वे अपने तमाम विरोधियों को एक जुट ना होने देने में कामयाब रहें हैं। ऐसे में अब उनका यह प्रयास सफल होगा या नहीं र्षोर्षो इसके सम्बंध में अभी कुछ भी कह पाना सम्भव नहीं हैं।