Monday, May 30, 2011

Political Dairy of Seono Dist- Of M.P.

दिग्विजय के खुले विरोध और कमलनाथ के समर्थन के बीच बाबा रामदेव के कार्यक्रम में हरवंश का आना सियासी हल्कों में चर्चित

जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं। पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी।

खुल कर दिखने लगी भाजपा में भी गुटबाजी-जिला भाजपा में इन दिनों गुटबाजी का खुला खेल दिखायी दे रहा है।पहले जिला भाजप के महामन्त्री पद से नन्दकिशोर सोनकेशरिया की छुट्टी हुयी फिर टेगौर वार्ड की पार्षद श्रीमती लीला डागोरिया को पार्टी सदस्यता से निलम्बित कर दिया गया। इस निर्णय पर जमकर अखबारबाजी हुयी। नन्दकिशोर सोनकेशरिया के फैसले को प्रदेश के महामन्त्री चौहान ने गलत निर्णय करार देते हुये ना केवल निरस्त कर दिया वरन उनकी बहाली महामन्त्री के पर कर दी गई। अनुसूचित जाति की महिला पार्षद की पार्टी सदस्यता को जिला भाजपा ने ही बहाल कर दिया। इसमें यह बताया गया कि उनके स्पष्टीकरणसे सन्तुष्ट होकर बहाली की गई हैं। इसमें यह सवाल उठ खड़ा होता है कि निलम्बन के पूर्व कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किया गयार्षोर्षो भाजपायी हल्कों में यह माना जा रहा हैं कि ये सब गुटबाजी के कारण किया जा रहा हैं। गुटबाजी का राजरोग भाजपा में भी अब खुल कर दिखायी देने लगा हैं।

दिग्गी के विरोध के बाद भी हरवंश का बाबा रामदेव के शिविर में आना चर्चित-योग गुरू बाबा रामदेव का कार्यक्रम राजनैतिक हल्कों में काफी चर्चित रहा। बीते दिनों हुये इस कार्यक्रम में जहा। भाजपा के सभी प्रमुख नेता जिला अध्यक्ष सुजीत जैन, विधायकद्वय नीता पटेरिया एवं कमल मर्सकोले, पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी,पूर्व विधायक नरेश दिवाकर आदि शामिल थे तो दूसरी ओर जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल शामिल थे। प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री ओर इंका के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह से बाबा रामदेव के खुले विरोध के चलते उनके मन्त्रीमंड़ल के सबसे ताकतवर मन्त्री रहे हरवंश सिंह का इस आयोजन में शामिल होना राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा आश्चर्यजनक माना जा रहा हैं। हालांकि केन्द्रीय मन्त्री कमलनाथ भी बाबा के कार्यक्रम में छिन्दवाड़ा में शामिल हुये थे और उन्होंने खुले आम बाबा के अभियान का समर्थन भी किया था। लेकिन सिवनी मेंहरवंश सिंह के शामिल होने को लेकर तरह तरह की चर्चायें हैं। कुछ लोगों का मानना हैं कि हरवंश सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष बनना चाह रहें थे। लेकिन इन दोनों ही पदों पर दिग्गी राजा ने ऐसी रणनीति बनायी कि हरवंश सिंह का कुछ बन पाना तो दूर जो आज उनके पास हैं उसके भी जाने की तलवार उनके सिर पर लटकी हुयी हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि कान्तिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष और अजय सिंह नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं जो कि दिग्गी खेमे के ही माने जा रहें हें। दिग्गी खेमे के ही प्रियव्रत सिंह युवक कांग्रेस के अध्यक्ष पद काचुनाव जीत चुके हैं। राजनैतिक हल्कों में चर्चा हैं कि ऐसी परिस्थिति में ठाकुर हरवंश सिंह की विधानसभा उपाध्यक्ष पद से बिदायी निश्चित मानी जा रही हैं। हरवंश समर्थकों का मानना हैं कि दिग्गी राजा की सोची समझी रणनीति के कारण ही हरवंश सिंह से लालबत्ती छिनने की नौबत आ गई हैं। लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोगों का यह भी मानना हैं कि कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने वाले बाबा रामदेव के आयोजन में हरवंश सिंह इसलिये शामिल हुये कि कहीं उनकी गैरहाजरी में बाबा सिवनी में उनके खिलाफ ही कुछ ना बोल दे। हरवंश सिंह की यह आशंका सही भी साबित हुयी। उनके जाने के बाद पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने यह सवाल कर ही दिया कि बैतूल में शिवााज सिंह चौान जिन पर डम्पर कांड़ का आरोप हैं,छिदवाड़ा में कमलनाथ जिस सरकार को भ्रष्ट कह रहें हैं और सिवनी में हरवंश सिंह जिन पर भ्रष्टाचार केकई आरोप हैं इन्हें सामने रखकर आप कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लडेंगेंर्षोर्षो बाबा इस प्रश्न से असहज हो उठे थे। हालांकि उन्होंने यह जवाब देकर मामले को टाल दिया कि मैं उन्हें जन प्रतिनिधि के रूप में तो जानता हूं लेकिन किसी को काई प्रमाणपत्र नहीं दे रहा हूं। लेकिन इसके पूर्व में बाबा ने यह भी कहा था कि जब हरवंश सिंह वन मन्त्री थे मैं उन्हें तब से जानता हूं और उनके यहां रुका भी हूंं। अब यह तो हरवंश सिंह ही जानते होंगें कि वे बाबा के आयोजन में क्यों गये थे और क्या वे किसी को कोई राजनैतिक संकेत देना चाहते थेर्षोर्षो

नरेश के आग्रह पर बाबा द्वारा शहीदों को माला पहनना हुआ चर्चित -संसद में एक भी शब्द ना बोलने वाले तथा सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले चन्द सांसदों में जिले के दोनों सांसद शामिल है। इंका सांसद बसोरीसिंह मरकाम जहां एक भी शब्द संसद में ना बोलने वाले में शामिल है तो वहीं भाजपा सांसद के.डी.देशमुख सबसे ज्यादा गैर हाजिर रहने वाले सांसदों में शामिल हैं। जिले के दोनों सांसदों के इस व्यवहार से तो संसद में ऐसा सन्देश गया होगा कि इनके क्षेत्र देश के ऐसे विकसित क्षेत्र हैं जहां कोई समस्या नहीं हैं। जबकि प्रदेश के सर्वाधिक पिछड़े हुये इन क्षेत्रों में कई ऐसी ज्वलन्त समस्यायें हैं जिनके लिये संसद में लड़ना जरूरी हैं। चाहे वह छिन्दवाड़ा से नैनपुर छोटी रेल लाइन को बकड़ी रेल लाइन में बदलने की हो हो या रामटेक गोटेगांव नई रेल लाइन की हो या उत्तर दक्षिण गलियारे के तहत बनने वाली फोर लेन सड़क ीक की अनुमति की हो। लेकिन इन सांसदों ने अपनी संसदीय भूमिका से अपने मतदाताओं को निराश ही किया हैं।

सांसद मरकाम,देशमुख की संसदीय भूमिका से निराशा -पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर अपने एक दिवसीय प्रवास में बाबा रामदेव ने शासकीय सुधारालय के एक हिस्से में लग रहे कन्या महाविद्यालय में जोकर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और सन्त विनोबा की प्रतिमाओं पर माला पहनायी। भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ देश भर में अलख जगाने निकले बाबा रामदेव ने जिन शहीदों की मूर्तियों पर माला पहनायी वह मूर्तियां किस विभाग ने किस मद से बनवायीं थी इसका खुलासा राज्य सरकार विधानसभा में भी नहीं कर पायी थी। कन्या महाविद्यालय के सुधार कार्य के दौरान इन मूर्तियों को बनवाया गया था जिसमें भारी भ्रष्टाचार होने की खबरें सुर्खियों में रहीं थी। उस दौरान यह भी कहा गया था कि ऐसे पैसे से शहीदों की मूर्तियां बनवा कर उनका अपमान किया गया हैं। जांच की मांग होने के बाद भी आज तक प्रदेश सरकार ने ना तो जांच की और ना ही दोषियों को दंड़ित ही किया। नरेश दिवाकर के कार्यकाल में गुरु गोलवलकर, नेताजी और सन्त विनोबा की ये मूर्तियां बनवायी गईं थी जिनका अनावरण संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में किया था। अपनी भारत स्वाभिमान यात्रा पर निकले बाबा रामदेव का पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के आग्रह पर वहां जाना और माल्यार्पण करना जन चर्चाओं में आ गया हैं। पहले से ही यह चर्चा थी कि प्रथम पंक्ति में बैठ कर योग करने, माला पहनाने, मंच पर बाबा से आशीZवाद लेने और मंच पर आसीन होने के लिये ग्यारह हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का पैकेज था। ऐसे मंच से और ऐसे कार्यक्रमों में बाबा के जाने से उनके अभियान को सिवनी में तो निश्चित रूप से ठेस ही पहुंची हैं।





Monday, May 23, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

अजय सिंह के चन्द शब्दों से अपनी अपनी पार्टी में आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश क्या बचाव की मुद्रा में आयेंगें?

जले की भाजपायी राजनीति में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही हैं कि गौ संवंर्धन बोर्ड के अध्यक्ष मेघराज जैन के राज्य सभा सदस्य बन जाने के बाद क्या उनका स्थान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर लेंगें? इस हेतु उन्होंने लॉबिंग भी शुरू कर दी हैं। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा हैं कि अपने किसी गुप्त राजनैतिक ऐञ्जेंड़े के चलते शिवराज जिले में कोई लालबत्ती देने के मूड में नहीं हैं। अजय सिंह के चन्द शब्दों के कारण आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश दोनों ही बचने के प्रयास में दिख रहें हैं। जहां एक तरफ जिले में रहते हुये भी हरवंश सिंह ने शिवराज की उपस्थिति में हुये मोगली उत्सव में शामिल होने से परहेज किया वहीं दूसरी ओर इसी महोत्सव के दौरान दूसरे कार्यकाल में केवलारी विस क्षेत्र, जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं, में उनके ना आने का रोना जब प्रभात झा के सामने रोया गया तो तत्काल है उन्होंने 21 मई को केवलारी आने की स्वीकृति दे दी। लेकिन अन्तत: आये नहीं।बीते सप्ताह की एक और महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा पड़ोसी जिले बालाघाट के कबीना मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र केवलारी का प्रभारी बनाने की मानी जा रही हैं।अपने अपने फन में माहिर ये दोनों नेताओं में गोदे में कौन किसे चित करेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा।

क्या मेघराज जैन की जगह ले पायेंगें नरेश?े -जिले की भाजपायी राजनीति में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही हैं कि गौ संवंर्धन बोर्ड के अध्यक्ष मेघराज जैन के राज्य सभा सदस्य बन जाने के बाद क्या उनका स्थान पूर्व विधायक नरेश दिवाकर लेंगेंर्षोर्षो इस हेतु उन्होंने लॉबिंग भी शुरू कर दी हैं। पता चला हैं कि अपने कुछ समर्थकों के साथ इस हेतु उन्होंने भोपाल जाकर मुख्यमन्त्री और प्रदेश अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं से भेण्ट करके भी आ गये हैं। कुछ भाजपा नेताओं का यह भी मानना हैं कि नरेश को किसी निगम का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बनाने के बजाय किसी आयोग का सदस्य बना कर लाल बत्ती तो थमा दी जायेगी लेकिन फिर वे संवैधानिक पद पर रहने के कारण भाजपा की सक्रिय राजनीति से बाहर हों जायेंगें और इसके लिये जिले के सभी भाजपा नेताओं में सहमति भी बन सकती हैं। प्रदेश के नेताओं ने कैसा रिसपान्स दियार्षोर्षो ये तो वे ही जाने लेकिन भाजपा में ही एक वर्ग का यह मानना हैं कि नरेश की यह कवायत भी वैसे ही बेकार जायेगी जैसे नीता पटेरिया की मन्त्री बनने की कवायत बेकार गई थी। राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि नरेश की टिकिट काट कर विधायक बनने वाली पूर्व सांसद नीता पटेरिया अपने सम्पंर्कों का लाभ लेकर किसी भी कीमत पर नरेश को लाल बत्ती नहीं लेने देंगीं। भाजपा ने चुनाव में अपने चार सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया था जिसमें से तीन कबीना मन्त्री बन गयें हैं लेकिन नीता पटेरिया का दावा मुख्यमन्त्री ने ना जाने क्यों सिरे से नकार दिया था। आज वे प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं। भाजपा के ही एक वर्ग का यह भी मानना हैं कि जिन कारणों से नरेश दिवाकर की टिकिट कटी थी वे कारण ही लाल बत्ती ना मिलने के पर्याप्त हैं। हाल ही में सागर की पूर्व विधायक सुधा जैन और छिन्दवाड़ा के सन्तोष जैन को लाल बत्ती देकर निगम मंड़ंलों में नियुक्त किया गया हैं। ऐसे हालात में जातीय समीकरण भी नरेश के पक्ष में नहीं माने जा रहें हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना हें कि भूरिया के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने से घबराये शिवराज आदिवासी विधायक शशि ठाकुर या कमल मर्सकोले में से किसी को मन्त्री बना कर आदिवासी वोटों को थामे रखने की कोशिश भी कर सकतें हैं। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा हैं कि अपने किसी गुप्त राजनैतिक ऐञ्जेंड़े के चलते शिवराज जिले में कोई लालबत्ती देने के मूड में नहीं हैं। यह सब तो कयासबाजी हैं लोग अपने अपने तरीके से प्रयास तो कर रहें हैं लेकिन वास्तविकता क्या हैंर्षोर्षो यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा।

आखिर नहीं आये शिवराज हरवंश के क्षेत्र केवलारी में -राजनीति में यह माना जाता हैं कि बड़े नेता के मुंह से निकले चन्द शब्द ही बवाल खड़ा कर देतें हैं। ऐसा ही कुछ सिवनी जिले की इंका और भाजपायी राजनीति में दिखायी दे रहा हैं। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि नेता पेति पक्ष अजय सिंह ने भोपाल में आयोजित स्वागत समारोह हजारों कार्यकत्ताZओं के समने यह कह दिया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो हम सब बना लेंगें यदि हमारे वरिष्ठ नेता ठाकुर हरंश सिंह शिवराज सिंह को सहयोग करना बन्द दें। उनके मुंह से निकले इन चन्द शब्दों ने कांग्रेसी तबेले में तो बवाल मचा ही दिया था लेकिन अब इन चन्द शब्दों की आग की चपेट में शिवराज विरोधियों ने उन्हें भी घेर लिया हैं। अजय सिंह के चन्द शब्दों के कारण आरोपों के घेरे में आये शिवराज और हरवंश दोनों ही बचने के प्रयास में दिख रहें हैं। जहां एक तरफ जिले में रहते हुये भी हरवंश सिंह ने शिवराज की उपस्थिति में हुये मोगली उत्सव में शामिल होने से परहेज किया वहीं दूसरी ओर इसी महोत्सव के दौरान दूसरे कार्यकाल में केवलारी विस क्षेत्र, जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं, में उनके ना आने का रोना जब प्रभात झा के सामने रोया गया तो तत्काल ही उन्होंने 21 मई को केवलारी आने की स्वीकृति दे दी। जिले के संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी और लिा भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने क्षेत्र के कार्यकत्ताZनों को उत्साहित करने के लिये केवलारी आने का आग्रह किया था। लेकिन मुख्यमन्त्री का तो शासकीय कार्यक्रम तो आया ही नहीं उसके बजाय वे सभी कार्यक्रम जिन्हें शिवराज सिंह को अपने दौरे में करना था वे सभी प्रभारी मन्त्री जगन्नाथ सिंह और विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के द्वारा सम्पन्न करा लिये गये। इससे तो अब ऐसा लग रहा हैं तीन साल बाद मुख्यमन्त्री का पहली बार बना दौरा स्थगित नहीं वरन रद्द ही हो गया हैं और शायद अब चुनाव तक वे इस क्षेत्र की सुध भी नहीं लेंगें।

क्यों प्रभारी बने गौरी भाऊ केवलारीं के?-बीते सप्ताह की एक और महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा द्वारा पड़ोसी जिले बालाघाट के कबीना मन्त्री गौरीशंकर बिसेन को विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के निर्वाचन क्षेत्र केवलारी का प्रभारी बनाने की मानी जा रही हैं। राजनैतिक विश्लेषक प्रभात झा के इस फैसले के तरह तरह के अर्थ निकाल रहें हैं। कुछ का मानना हैं कि गौरीशंकर खुद कई दिनों से प्रभारी बनने का प्रयास कर रहे थे। उन्हें सफलता और इसलिये भी मिल गई कि पिछले प्रभारी बने आदिवासी मन्त्री जयसिंह मरावी प्रभार मिलने के बाद से एक बार भी क्षेत्र में नहीं आये थे। गौरी शंकर क्यों प्रयास रहे थेर्षोर्षो इसे लेकर भी कई चर्चायें सियासी हल्कों में चल रहीं हैं। भाजपाइयों ने ही केवलारी में भाजपा की हार के छीण्टे भाऊ के दामन पर भी उछाले थे। वैसे एक बात तो सभी मानते हैं कि हरवंश और गौरीशंकर बिसेन दोनों ही राजनीति के मैदान के हरफन मौला खिलाड़ी हैं। कौन किस पर कब भारी पड़ जायेर्षोर्षो इसे कोई भी दावे से नहीं कह सकता हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में गौरीशंकर अपनी पत्नी रेखा बिसेन को लोस की टिकिट दिलाना चाहते थे। पैनल में पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन का नाम भी था। गौरी भाऊ किसी भी कीमत पर डॉ. बिसेन को नहीं चाहते थे। इसलिये अन्त में उन्होंने के. डी. देशमुख के नाम पर अपनी सहमति देकर उन्हें टिकिट दिला दी थी। अब उनकी पत्नी जिला पंचायत का चुनाव भी हार चुकीं है। सियासी हल्कों में यह चर्चा है कि कांग्रेस इस बार बालाघाट लोस से हरवंश सिंह को भी चुनाव लड़ा सकती हैं। इसे भाम्प कर हरवंश सिंह ने भी बालाघाट में अपनी आमद रफ्त बढ़ा दी हैं। राजनैतिक कार्यक्रमों के अलावा वे शादी विवाह में हाजिर हो रहें हैं। इसीलिये शायद गौरी भाऊ हरवंश सिंह पर दवाब बनाने के लिये प्रभार लेना चाहते थे। वे डम्पर कांड़ और धारा 307 के मुकदमे का खेल भी देख चुके हैं। अपने अपने फन में माहिर ये दोनों नेताओं में गोदे में कौन किसे चित करेगा? यह तो वक्त ही बतायेगा।

पुच्छल तारा-शिवराज की जगह आये प्रभारी मन्त्री के कार्यक्रम में बोथिया में पंड़ाल का उड़ना और हरवंश सिंह का कार्यक्रम में शामिल होने बजाय रेस्ट हाउस में बैठे रहना सियासी हल्कों में चर्चित हैं। राजनीति में हर विधाओं का उपयोग करना आज कल आम बात हो गई हैं। ऐसे में इस घाटना को लेकर तरह तरह की चर्चायें होना स्वभाविक ही हैं। यह तो ईश्वर की कृपा ही हैं कि सिर्फ दो लोग घायल हुये और कोई बड़ी दुघZटना होने से बच गई।





नगर विकास का पैसा लील रही है सफेद हसफेद हाथी साबित हो चुकी भीमगढ़ जलावर्धन योजना

13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये बिजली बिल बकाया

विकास के 20 लाख काट रही है प्रदेश सरकार

सिवनी।महत्वाकांक्षी भीमगढ़ जलावर्धन योजना सफेद हाथी साबित हो चुकी है।नगर विकास के लिये मिलने वाले बीस लाख रुपये सरकार काट कर बिजली बिल में समायोजित करा रही है। 30 अप्रल 2011 तक इस योजना का बिजली का पालिका पर 13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये बकाया हैं। पालिका अध्यक्ष, विधायक, सांसद और सरकार सभी भाजपा के हैं लेकिन ना तो वे इस घटिया योजना की जांच ही करा रही हैं और ना ही अनुदान देकर पालिका को राहत पहुंचा रही है।

कांग्रेस शासनकाल में बनी महत्वाकांक्षी भीमगढ़ जलावर्धन योजना शुरूसे घटिया पाइप लाइन उपयोग में लाये जाने के कारण दुगनी बिजली खपत के बाद भी आधा पानी देने के लिये विवादों में रही हैं। कई बार मांग उठने के बाद भी ना तो कांग्रेस सरकार और ना ही भाजपा सरकार इसकी जांच कराने का साहस जुटा पायी हैं। इसी कारण यह योजना सफेद हाथी साबित हो चुकी हैं।

इस योजना का बिजली का बिल 30 अप्रेल 2011 तक सरचार्ज मिला कर 13 करोड़ 76 लाख 10 हजार रुपये हो गया हैं। इसमें श्रीवनी का बकाया 6 करोड़ 17 हजार रु. है जबकि सुआखेड़ा का 7 करोड़ 75 लाख 93 हजार रु. बकाया है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हे कि इस योजना की कुल लागत 18 करोड़ 15 लाख रु. है।

करोड़ों के बकाया बिल में पालिका हाई कोर्ट के निर्देश के बाद मात्र 5 लाख रु. प्रतिमाह पटा रही थी। जिली बोर्ड के दवाब के चलते प्रदेश सरकार जून 2010 से नगर विकास के लिये मिलने वाली राशि में से प्रतिमाह 20 लाख रु. काटकर बिजली बिल में समायोजित कर रही हैं। इस तरह मई 2011 तक 2 करोड़ 40 लाख रु. बिजली बिल में समायोजित हो चुकें है जो नगर विेकास में लगते तो मुख्यमन्त्री के चुनाव के समय दिखाये गये कुछ सपने तो पूरे हो सकते थे।

यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नगर के लिये बनायी गई इस योजना से मार्च 1999 से 16 गांवों को भी पानी दिया जा रहा है। गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने का काम पी.एच.ई. विभाग का हैं। लेकिन इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों को जो पानी दिया जा रहा है उसमें बिजली के बिल का 8.40 प्रतिशत हिस्सा पंचायतों द्वारा वहन किया जाना था। योजना का हर महीने 31 लाख 17 हजार रु. बिल आ रहा है।इस तरह 12 साल तीन महीने में पंचायतों को देने वाली बिजली बिल की राशि 38 लाख 48 हजार 7 सौ 54 रु. होती हैं जो कि आज तक वसूल नहीं की गई हैं।

पालिका चुनाव के दौरान रोड़ शो करने आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह ने जनता को बहुत सब्ज बाग दिखाये थे लेकिन शिव की नगरी सिवनी को कुछ देने के बजाय जो मिल रहा था उसी में कटोती करके जनता के साथ क्रूर मजाक कर रहें हैं।



Tuesday, May 17, 2011

Political Dairy of Seoni Disst. of M.P.


शशि और हरवंश सिंह के बजाय हालोन बान्ध की स्वीकृति का असली श्रेय परिसीमन अयोग को जाता है 
जिले के धनोरा विकास क्षेत्र में लम्बे समय से पेंड़िग पड़ी हॉलोन जलाशय योजना पर अब श्रेय लेने की होड़ लग गई हैं। सबसे पहले भाजपा विधायक शशि ठाकुर का आभार मानने की विज्ञप्ति अखबारों में प्रकाशित हुयी और अब ब्लाक कांग्रेस धनोरा ने विज्ञप्ति जारी कर विधानसभा उपाध्यक्ष एवं केवलारी के विधायक हरवंश सिंह और सांसद बसोरी सिंह का आभार मानने वाली विज्ञप्ति छपी। मोगी उत्सव में आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह का दौरा इस बार विवादित रहा। गौगपा और मीडिया ने उन्हेेंं आरोप लगाकर कठघरे में खड़ा कर दिया हैं।जिले को ना तो मन्त्री तथा ना ही कोई बड़ी सौगात देने के बावजूद भी जब 2008 के चुनाव में भाजपा जिले में 4 में से तीन सीटें जीत गईं तो भला वहां कुछ करने या देने का क्या मतलब हैंर्षोर्षो लेकिन यदि शिव की नगरी के साथ ऐसा ही खिलवाड़ होता रहा तो तो सकता है कि इस बार शिव का तीसरा नेत्र खुल जाये और भाजपा जिले में भस्म होकर रह जाये। क्षेत्रीय आवश्यक्ता को देखते हुये इस साल वहां स्वामी नारायणानन्द जी को आमन्त्रित किया गया था। लेकिन उसी दिन शंकराचार्य के सिवनी में रहने के कारण खुद हरवंश ही वैनगंगा महोत्सव में शामिल नहीं हुये। युवा इंका के चुनावों के बाद अखबारों में जारी किये गये विज्ञापनों के माध्यम से भी शायद राजनीति ही खेली गई।  अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मिले वोटों के इस फर्क को क्या माना जायेर्षोर्षो इसे लेकर राजनैतिक विश्लेषकों में अलग अलग मत हैं।
हॉलोन बान्ध का असली श्रेय परिसीमन आयोग को -जिले के धनोरा विकास क्षेत्र में लम्बे समय से पेंड़िग पड़ी हॉलोन जलाशय योजना पर अब श्रेय लेने की होड़ लग गई हैं। सबसे पहले भाजपा विधायक शशि ठाकुर का आभार मानने की विज्ञप्ति अखबारों में प्रकाशित हुयी और अब ब्लाक कांग्रेस धनोरा ने विज्ञप्ति जारी कर विधानसभा उपाध्यक्ष एवं केवलारी के विधायक हरवंश सिंह और सांसद बसोरी सिंह का आभार मानने वाली विज्ञप्ति छपी। वास्तव में यदि देखा जाये तो इस बान्ध की स्वीकृति के लिये असली आभार तो परिसीमन आयोग का मानना चाहिये। जिसने घंसौर विस क्षेत्र समाप्त कर केवलारी क्षेत्र को सामान्य कर धनोरा ब्लाक के एक हिस्से को केवलारी और दूसरे हिस्से को लखनादौन विस क्षेत्र में शामिल  किया। लगभग 40 करोड़ की इस योजना की लम्बे समय से मांग चल रही थी। भाजपा विधायक शशि ठाकुर और इंका विधायक हरवंश सिंह दोनो ही धनोरा ब्लाक का पहली बार प्रतिनिधित्व कर रहें हैं। भाजपा विधायक होने के नाते उनके समर्थकों ने अपनी सरकार की उपलब्धि पर जब श्रेय लेने की  मोहर लगा दी तो फिर इस खेल में माहिर हरवंश सिंह भला कैसे पीछे रह सकते हैं। उन्होंने मीडिया को पूरी लिखा पढ़ी के दस्तावेजों के साथ कांग्रेस की विज्ञपित भिजवा दी आर श्रेय लेने की कोशश की हैं। कांग्रेस की विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया हें कि जब वे इस क्षेत्र के विधायक भी नहीं थे तब भी उन्होंने 2007 में दस हजार लोंगों साथ इस बान्ध के लिये आन्दोलन किया था। इसका अर्थ यह है कि वे बिना स्वार्थ के भी जिले के विकास के लिये समर्पित रहतें हैं। लेकिन यह दावा अत्यन्त हास्यासपद हैं। यदि ऐसा होता तो प्रदेश सरकार में दससाल तक मन्त्री रहते उन्होंने हॉलोन बान्ध की सुध क्यों नहीं ली थीर्षोर्षो तब वे अपने क्षेत्र की पेंच परियोजना का लाली पाप दिखा कर चुनाव जीतने की जुगत जमाते रहते थे जो कि आज तक किसानों के खेत में पानी नहीं दे पायी हैं और वे उस इलाके से चार चुनाव जीत थे। परिसीमन में जब धनोरा क्षेत्र का एक हिस्सा केवलारी क्षेत्र में जुड़वाने में सफल हो गये तब उसके बाद ही उन्हें हॉलोन बान्ध की सुध आयी और उसे सहारा बना का चुनाव जीतने की जुग त उन्होंने जमाना प्रारम्भ कर दिया था। अब देखना यह हैं पेंच के समान हॉलोन बान्ध भी उन्हें तीन चार चुनाव जिताता हैं या फिर अगली बार ही दगा दे देता हैं।
तीसरा नेत्र खुला तो जिले में भस्म हो जायेगी भाजपा  -मोगली उत्सव में शामिल होने आये मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा विवादों में रहा। पहले तो गौगपा ने उन्हें कठघरे में खड़ा करते हुये यह आरोप लगा दिया कि भाजपा विधायक एवं प्रदेश महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीता पटेरिया की पुत्री और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के अनुज के 11 मई को होने वाले विवाह समारोह में आने के लिये कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ायी गई और प्रदेश भर के छोटे बच्चों को भरी गर्मी में परेशान किया गया। इस बार मीडिया ने भी उनकी घोषणायें पूरी ना होने के कारण कठघरे में खड़ा किया    और यह लिखा कि शिव की नगरी सिवनी शिव के राज में ठगी सी रह गई। इनमें शिवराज द्वारा अपने पिछले प्रवासों में की गई लगभग सभी घोषणाओं का जिक्र किया गया था। लेकिप प्रदेश भर में घोषणावीर मुख्यमन्त्री के नाम से ख्याति अर्जित कर चुके शिवराज ने इसके बाद भी घोषणा करने से कोई परहेज नहीं किया और टुरिया में अगले सत्र से हायर सेकेन्डरी स्कूल चालू करने की घोषणा कर डाली। वैसे भी शिवराज ऐसे पहले मुख्यमन्त्री हैं जिन्होंने सत्ता पक्ष के तीन तीन विधायक होने के बाद भी जिले से किसी को मन्त्री नहीं बनाया वरना आजादी के बाद से कभी ऐसा नहीं हुआ था कि सत्ता पक्ष के विधायक रहते हुये जिला मन्त्री विहीन रहा हो। अपने पहले कार्यकाल जिले को ना तो मन्त्री तथा ना ही कोई बड़ी सौगात देने के बावजूद भी जब 2008 के चुनाव में भाजपा जिले में 4 में से तीन सीटें जीत गईं तो भला वहां कुछ करने या देने का क्या मतलब हैंर्षोर्षो वैसे भी जिले में भाजपा का यह आलम है कि जितने नेता हैं उतने ही गुट हैं। गुटबाजी का राजरोग गली चौराहों और पान के ठेलों और चाय की होटलों तक खुल आम देखा जा सकता हैं। लेकिन यदि शिव की नगरी के साथ ऐसा ही खिलवाड़ होता रहा तो सकता है कि इस बार शिव का तीसरा नेत्र खुल जाये और भाजपा जिले में भस्म होकर रह जाये। 
वैनगंगा महोत्सव में क्यों नहीं शामिल हुये हरवंश?  -तामझाम से पिछले चुनाव के पहले वैनगंगा महोत्सव की शुरूआत इंका विधायक हरवंश सिंह ने जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी की उपस्थिति में करायी थी। वैसे तो चुनाव जीतने के बाद यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से होता रहा हैं लेकिन अब 2013 में होने वाले चुनावों को देखते हुये इस साल इस वृहद रूप देने की योजना बनायी गई थी। क्षेत्रीय आवश्यक्ता को देखते हुये इस साल वहां स्वामी नारायणानन्द जी को आमन्त्रित किया गया था। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में स्वमी नारायणानन्द जी के भक्तों की संख्या अत्यमिधक हैं। जिस दिन इस उत्सव में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को शामिल होना था उसी दिन जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी सरस्वती भी अपने पुराने शिष्य परिवार के सदस्य सञ्जय भारद्वाज के वन निर्मित मकान के गृह प्रवेश के अवसर पर सिवनी में ही थे। यदि हरवंश सिंह वैनगंगा महोत्सव में शामिल होते और जगतगुरू शंकराचार्य जी से नहीं मिलते तो विषम स्थिति बन जाती। इसलिये हरवंश सिंह ने उस दिन भोपाल में ही रहना उचित समझा ताकि धर्माचार्यों के आपसी विवाद से बचा जा सके। अभी चुनाव में दो साल बाद बाकी है। इसीलिये अन्त मे भी विशाल वैनगंगा महोत्सव आयोजित कर धर्म प्रमी जनता को लुभाया जा सकता हैं। 
क्या युवा इंका के विज्ञापनों में भी खेली गई राजनीति?-युवा इंका के चुनावों के बाद अखबारों में जारी किये गये विज्ञापनों के माध्यम से भी शायद राजनीति ही खेली गई। इन विज्ञापनों में सिवनी विस क्षेत्र के विजयी नेताओं को बधायी देते हुये हरवंश सिंह के साथ पूर्व इंका प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना के साथ ही युवा नेता राजा बघेल की फोटो तो प्रमुखता से छापी गई लेकिन पूर्व विधायक नेहा सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम ऐसे छापे गये मानो उन्हें बेइज्जत करना ही उद्देश्य रहा हो। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हें कि पप्पू खुराना कमलनाथ समर्थक माने जाते हैं और जिले की राजनीति में उन्हें हरवंश सिंह विरोधी माना जाता हैं।  अखबारों में प्रकाशित इन समाचारों से यह सन्देश भी देने का प्रयास किया गया कि हरवंश - पप्पू खुराना ने मिल कर चुनाव लड़ा और जीता। वास्तविकता क्या हैर्षोर्षो यह तो चुनाव का नेजा सम्हाने वाले नेता ही जानते होंगें लेकिन चुनाव परिणाम तो ऐसा सन्देश दे रहें हैं कि या तो समझोता हुआ ही नहीं था या फिर वोटिंग में यह समझोता कायम नहीं रह पाया। उल्लेखनीय हैं कि सिवनी विस के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार शिव सनोड़िया को 51, उपाध्यक्ष शाहिद खॉन, जो पप्पू समर्थक थे, उन्हें मात्र 27, महामन्त्री द्वय आनन्द पञ्जवानी को 20 तथा आसिफ इकबाल को 18 को 18 वोट मिले थे। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को मिले वोटों के इस फर्क को क्या माना जायेर्षोर्षो इसे लेकर राजनैतिक विश्लेषकों में अलग अलग मत हैं।          


सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण राजनैतिक हलचल रही युवक कांग्रेस के चुनाव की। कांग्रेस के महासचिव और युवक कांग्रेस के प्रभारी राहुल गान्धी कांग्रेस से युवाओं को जोड़ने के लिये नये प्रयोग कर रहें हैं। इन प्रयोगों में से एक ये चुनाव भी हैं। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लिंगदोह के मार्ग दर्शन और देख रेख में ये चुनाव हो रहें हैं। मध्यप्रदेश में इन चुनावों का दूसरा चरण समाप्त हो गया हैें और अब तीसरे चरण में लोकसभा क्षेत्र एवं प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना हैं। इन चुनावों के माध्यम से राहुल गान्धी युवा इंका की कमान ऐसे नेतृत्व के हाथों में सौम्पना चाहते हैं जो कि ना केवल नया हो वरन उसका कांग्रेस का कोई बड़ा नेता Þकेअर आफÞ भी ना हो। जिमें के बालाघाट लोस में आने वाले सिवनी और बरघाट विस क्षेत्रों के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों का चुनाव 3 मई को हो गया जिसमें सिवनी से शिव सनोड़िया और बरघाट से देवेन्द्र ठाकुर अध्यक्ष चुन लिये गये हैं।सिवनी से चुने गये शिव सनोड़िया का नाम कांग्रेस की छात्र और युवा राजनीति में नया नहीं हैं। वे पिछले कुछ सालों से जिला एन.एस.यू.आई. के अध्यक्ष पद कार्य कर रहें हैं और आज भी अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल यदि प्रशंसनीय नहीं रहा तो निन्दनीय भी नहीं कहा जा सकता हैं। छात्र संघों के चुनावों के दौरान इनकी सक्रियता देखी जाती रही हैं। अब देखना यह हैं कि पिछले पांच चुनावों से जिन सिवनी और बरघाट क्षेत्रों से कांग्रेस चुनाव हारती चली आ रही हैं वहां राहुल गान्धी की मंशा के अनुसार ये दोनो युवा नेता पार्टी को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं या जिले की पिछले पन्द्रह सालों से चली आ रही कांग्रेस की परम्परा के अनुसार गुटबाजी में व्यस्त रह कर कांग्रेस के बजाय नेता विशेष को मजबूत करतें हैं। 
चुनव हो तो हथकंड़े भी होंगं ही-जहां चुनाव हों वहां चुनावी हथकंड़े ना अपनाये जाये इसकी तो कल्पना ही नहीं करनी चाहिये। ऐसा ही सब कुछ युवक कांग्रेस के चुनावों में भी हुआ। राहुल गान्धी चाहते थे कि इन चुनावों के जरिये हर विधान सभा की प्रत्येंक ग्राम पंचायत और हर वार्ड में युवा इंका की निर्वाचित इकाई हो। लेकिन ऐसा नही हो पाया। चुनाव होने के लिये जितनी इकाइयां आवश्यक थी उतनी इकाइयां बनायीं गईं और शेष को छोड़ दिया गया। उदाहरण के लिये सिवनी विधानसभा क्षेत्र में शहर के सभी वाडोZं के अलावा मात्र चालीस पंचायतों में ही इकाइयों का गठन किया गया जबकि इस क्षेत्र में सौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। रहा सवाल चुनावी हथकंड़ों के अपनाने का तो इसके बारे में तो अध्यक्ष पद एक प्रत्याशी आसिफ इकबाल ने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर इसका खुलासा किया हैं। वैसे तो चुनावों में ऐसा ही रहता हैं कि जो जीता वही सिकन्दर कहलाता है। लेकिन इन चुनावों में हार का गम कम करने की व्यवस्था की गई है। जिन पांच पदाधिकारियों को चुना था उसमें नियमानुसार सबसे अधिक मत पाने वाना अध्यक्ष उससे कम वोट पाने वाला उपाध्यक्ष और फिर उनसे कम मत पाने वाले तीन प्रत्याशी महामन्त्री चुने गये हैं।
भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नही रह गया है भाजपा के लिये -अत्याचार ना भ्रटाचार हम देंगें अच्छी सरकार के नारे पर भाजपा ने प्रदेश की सरकार पर आज से सात साल पहले अपना कब्जा किया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा कितनी गम्भीर हैं ये प्रदेश की जनता बखूबी देख चुकी है। आज लगभग एक दर्जन मन्त्री लोकायुक्त की जांच में के दायरे में हैं। जो जहां चुनकर आया उसमें से अधिकांश भाजपा नेता भ्रष्टाचार के एक सूत्री कार्यक्रम को लेकर चलना अपना ही सब कुछ समझने लगे हैं। भ्रष्टाचार के प्रमाणिक मामलों में भी अपने कार्यकत्ताZओं को बचाव करना भाजपा नेता अपना कत्तZव्य मानते हैं। पिछले दिनो भाजपा की प्रदेश सरकार ने ही सिवनी नगर पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती पार्वती जंघेला को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाते हुये उनसे ना केवल तीन लाख रुपये की वसूली के आदेश दिये हैं वरन पांच साल के लिये चुनाव लड़ने के लिये भी अयोग्य घाषित कर दिया हैं। पार्वती जंघेला जिला महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा ने महंगायी और केन्द्र शासन के तमाम घोटालों और गलत नीतियों के खिलाफ आन्दोलन किया। मीडिया में इस बात को लेकर कमेण्ट भी किये गये लेकिन भाजपा नेतृत्व पर इसका कोई असर नहीं हुआ और उनके ही नेतृत्व में जिले के तमाम वरिष्ठ नेताओं पैदल मार्च भी किया। और और उनके बचाव भी यह कहा गया कि अभी उनके लिये आदालत के दरवाजे खुले हुये हें और हो सकता है कि वे वहां से निर्दोष साबित हो जायें। उनके बचाव में कही गई यह बात भाजपा चाल चरित्र और चेहरे के दावे को बेनकाब कर देता हें और इससे यह भी साबित होता  है कि भाजपा का यह मानना हैं कि अपना यदि कोई करे तो शिष्टाचार हो और दूसरा कोई करे तो भ्रष्टाचार। जिले में यदि संगठन के प्रमुख पदों पर भी यदि भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने वाले नेताओं को पद बनाये रखा जायेगा तो प्रदेश में भाजपा की सरकार रहते जिले में भ्रष्टाचार समाप्त होने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
मोगली उत्सव पर सवाल खड़े कर गौगपा ने भाजपा को कठघरे में किया खड़ा- गोंड़वाना गणतन्त्र पार्टी ने मोगली उत्सव पर सवाल उठाते हुये भाजपा और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया हैं। पहले तो एक विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन द्वारा प्रेस के प्रवेश निषेघ किये जाने की आलोचना की गई थी। फिर एक अन्य विज्ञप्ति में यह सवाल उठाया गया था कि विधायक श्रीमती नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के यहां विवाह समारोह में आने के लिये मुख्यमन्त्री और अन्य भाजपा नेताओं के कारण भीषण गर्मी में बच्चों को परेशान किया गया और उसकी तारीख 9 से 11 मई रखी गया है। उल्लेखनीय है कि दोनों ही विवाह समारोह 11 मई को होने वाले हैं। वैसे भी इस बार मोगली महोत्सव प्रारम्भ से ही विवादों में घिर गया था। प्रदेश की भाजपा सरकार ने यह घोषणा की थी हर साल मोगली उत्सव पेंच नेशनल पार्क में मनाया जायेगा। लेकिन इस साल सरकार ने इस उत्सव को पन्ना नेशनल पार्क में मनाने का फैसला कर लिया था। वैसे भी शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने कुछ दिया तो नहीं लेकिन छिन बहुत कुछ गया था। इसर तर्ज पर इस बार मोगली उत्सव भी छिन रहा था। लेकिन बाद में फिर स्थान परिवर्तित कर पेंच नेशनल पार्क तो कर दिया गया लेकिन आयोजन की तिथि बझ़ा कर एक नये विवाद को पैदा कर दिया हें। लेकिन आजकल तो राजनेताओं की यह प्रवृत्ति हो गई हैं कि कोई कुछ बोलता रहे     हमें जो करना हैं वह हम करते रहेंगें भले ही वह गलत ही क्यों ना हो।          

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गेंहूं खरीदी में किसाना ेके शोषण का नायाब तरीका ढूंढ निकाला निगम और समितियों ने  
हर बोरी पर आधा किलो अधिक मांगता हैं   निगम : समिति में खाता खोलने बाध्य किया जाता हैं  किसान : प्रति िक्वं. किसान से  पच्चीस और कुचिया व्यापारी से पचास रु. लेने की चर्चा : अकेले नहीं होने का दावा : कहीं भी शिकायत करने की चुनौती 
सिवनी। गेहूं खरीदी में जिले के किसानों के शोषण के नायाब तरीके नागरिक आपूर्ति निगम और सहकारी समितियों ने तलाश लिये हैं। जहां एक ओर निगम समितियों से एक िक्वण्टल पर एक किलो गेहूं अधिक ले रहा है तो वहीं दूसरी ओर सहकारी समितियां किसान द्वारा खाते से पैसा निकालते समय 25 रु. प्रति िक्वण्टल के हिसाब से नगदी काटकर पैसा दे रहें हैं। जिले पांच मई तक 5 लाख 76 हजार 18 िक्वण्टल गेहूं खरीदा जा चुका हैं। शिकायत करने की बात कहने वाले किसानों को यह कह कर टाल दिया जाता हैं कि कहां कहां शिकायत करोगे सभी जगह पैसा जाता हैं कोई हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता हैं।
किसानों के हितों के लिये गेहूं खरीदी में इस बार सरकार ने कई एतिहातन कदम उठाये थे। लेकिन तुम डाल डाल हम पान्त पान्त की तर्ज पर निगम और समितियों ने तरीके खोज लिये हैं। नागरिक आपूर्ति निगम वाल सहकारी समितियों पर दवाब डाल कर हर पचास किलो की बोरी पर आधा किलो गेहूं अधिक मांगते हैं। जिसे उनकी भाषा में यह कहा जाता है कि आधा किलो ज़िन्दा तौल चाहिये। इस तरह नागरिक आपूर्ति निगम के कारण किसानों  का हर िक्वण्टल पर एक किलो ज्यादा गेहूं ज्यादा गेहूं जा रहा हैं। प्रशानिक अधिकारी यदि जांच करना चाहें तो भंड़ारण किये गये किसी भी गोदाम में बोरियां तुलवा कर इस तथ्य की पुष्टि कर सकतें हैं। जानकार सूत्रों कायह भी दावा है कि जब यही बोरियां पी.डी.एफ. के लिये उन्हीं सहकारी समितियों को दी जातीं हैं तो उन बोरियों में बमुश्किल 49 किलो गेहूं ही निकलता हैं। इस तरह हर िक्वण्टल पर तीन किलो बचाया हुआ गेंहू आखिर कहां जाता है और बन्दर बाण्ट में कौन कौन शामिल हैंर्षोर्षो यह एक शोध का विषय बना हुआ है।   
ऐसा नहीं है कि सरकार ने शोषण रोकने के कोई उपाय ना किये हों। सरकार ने किसानों के खातों में सीधे भुगतान की राशि जमा करने के निर्देश दिये थे। लेकिन खरीदी करने वाली सहकारी समितियों ने इसकी भी नायाब बोड़ ढूंढ निकाली हें। केवलारी विस क्षेत्र की अधिकांश समितियों के बारे में किसानों ने बताया हैं कि यदि वे किसी बैंक खाते का अपना नम्बंर बतातें है तो उन्हें बाध्य किया जाता हैं कि वे समिति में ही अपना खाता खोलें नहीं तो उनका गेंहू नहीं खरीदा जायेगा। फिर जब किसान अपना खाता खुलवा लेता है तो निगम भुगतान का पैसा किसान के खाते में जमा करा देता हैं। किकसान जब विड्राल फार्म भर कर पैसा निकालने जाता हैं तब उससे 25 रु. प्रति िक्वण्टल की रकम देने को बाध्य किया जाता हैं। जो किसान रकम देने में आना कानी करता हैं उसका पैसा ही नहीं निकाला जाता हैं। पलारी क्षेत्र के कई किसान ऐसे भरे विड्राल लेकर चक्कर काट रहें हैं। कई किसानों ने तो यह भी दावा किया हैं कि उन्हें 25 रु. प्रति िक्वण्टल पैसा समिति वालों को देने के बाद ही भुगतान प्राप्त हुआ हैं। यह भी बताया जाता हैं कि यदि कोई किसान शिकायत करने की बात करता हैं तो उसे यह भी सुना दिया जाता हैं कि इतना सब कुछ हम अकेले ही थोड़ी कर रहें हैं। जहां चाहो वहां शिकायत कर दो हमारा कुछ नहीं बिगड़ने वाला हैं।
जानकार सूत्रों का यह भी दावा हैं कि कुचिया व्यापारियों से भी बेधड़क खरीदी की जा रही हैं लेकिन उनका रेट 50 रु. प्रति िक्वण्टल हैं। ये व्यापारी किसान से एक हजार रुपये से 11 सौ िक्वण्टल के हिसाब से घर में ही माल खरीद लेते हैं। फिर उनसे आवश्यक सभी दस्तावेज जैसे बही,परिचय पत्र,खाता नम्बंर ले लेते हैं। फिर उनके विड्राल पर भी साइन करा लेते हैं। इसलिये कानूनन तरीके से पूरी औपचारिकता करने के बाद वे माल समितियों में तुलवा देते हैं और जब 1270 रु. िक्वण्टल की दर से पैसा मिल जाता हैं तब 50 रु. प्रति िक्वण्टल समिति वालों को देने के बाद किसान को पैसा दे देते हें और लगभग 100 से 150 रु. प्रति िक्वण्टल के भाव से कमायी कर लेते हैं। ऐसा नहीं हैं कि खरीदी करने वाले कुचिया व्यापारियों को पहचानते नहीं हैं लेकिन रेट दुगना होने के कारण उन्हें रोकने की कोशिश नहीं करते हैं। ऐसा नहीं हैं कि यह गोरख धन्धा सभी सहकारी समितियों में चल रहा हो लेकिन केवलारी विस क्षेत्र, जो कि जिले का सबसे बड़ा गेंहू उत्पादक इलाका हैं, वहां जरूर यह गोरख धन्ध खूब फल फूल रहा हैं।  
किसनों का शोषण करने वाले निगम और समितियों ने ऐसा नायाब तरीका ढूंढ निकाला हैं जिसमें नियमानुसार सभी दस्तावेज भी रिकार्ड में रहते हैं और पैसे की निकासी भी खुद किसान के नाम से ही होती हैं।       
बताया तो यह भी जा रहा हैं कि पलारी इलाके कुछ किसानों ने जिला कलेक्टर से इसकी शिकायत भी की हैं। सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि एक किसान पुत्र मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह के राज में दूसरे किसान पुत्र विस उपाध्यक्ष इंका विधायक हरवंश सिंह के क्षेत्र किसान खुले आम लूटा जा रहा हैं और किसान पुत्रों का ना तो इस ओर ध्यान जा रहा हैं और ना ही किसानों की कोई जाजय सुनवायी ही हो रही हैं।            

Sunday, May 8, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

राहुल गान्धी की मंशानुसार युवा इंका के चुनावों के बाद इंकाई राजनीति में कोई परिवर्तन आयेगा या पुराना ढ़र्रा ही चलेगा?

सिवनी और बरघाट विस क्षेत्रों के युवा इंका के चुनावों में शिव सनोड़िया और देवेन्द्र ठाकुर अध्यक्ष चुन लिये गये हैं। राहुल गान्धी युवा इंका की कमान ऐसे नेतृत्व के हाथों में सौम्पना चाहते हैं जो कि ना केवल नया हो वरन उसका कांग्रेस का कोई बड़ा नेता Þकेअर आफÞ भी ना हो। जहां चुनाव हों वहां चुनावी हथकंड़े ना अपनाये जाये इसकी तो कल्पना ही नहीं करनी चाहिये। ऐसा ही सब कुछ युवक कांग्रेस के चुनावों में भी हुआ। वैसे तो चुनावों में ऐसा ही रहता हैं कि जो जीता वही सिकन्दर कहलाता है। लेकिन इन चुनावों में हार का गम कम करने की व्यवस्था की गई है। अत्याचार ना भ्रटाचार हम देंगें अच्छी सरकार के नारे पर भाजपा ने प्रदेश की सरकार पर आज से सात साल पहले अपना कब्जा किया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा कितनी गम्भीर हैं ये प्रदेश की जनता बखूबी देख चुकी है। भाजपा का यह मानना हैं कि अपना यदि कोई करे तो शिष्टाचार हो और दूसरा कोई करे तो भ्रष्टाचार। गोंड़वाना गणतन्त्र पार्टी ने मोगली उत्सव पर सवाल उठाते हुये भाजपा और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया हैं। एक विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन द्वारा प्रेस के प्रवेश निषेघ किये जाने की आलोचना की गई थी। फिर एक अन्य विज्ञप्ति में यह सवाल उठाया गया था कि विधायक श्रीमती नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के यहां विवाह समारोह में आने के लिये मुख्यमन्त्री और अन्य भाजपा नेताओं के कारण भीषण गर्मी में बच्चों को परेशान किया गया

सिवनी और बरघाट विस क्षे के चुने गये युवा इंका के अध्यक्ष -इस सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण राजनैतिक हलचल रही युवक कांग्रेस के चुनाव की। कांग्रेस के महासचिव और युवक कांग्रेस के प्रभारी राहुल गान्धी कांग्रेस से युवाओं को जोड़ने के लिये नये प्रयोग कर रहें हैं। इन प्रयोगों में से एक ये चुनाव भी हैं। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लिंगदोह के मार्ग दर्शन और देख रेख में ये चुनाव हो रहें हैं। मध्यप्रदेश में इन चुनावों का दूसरा चरण समाप्त हो गया हैें और अब तीसरे चरण में लोकसभा क्षेत्र एवं प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना हैं। इन चुनावों के माध्यम से राहुल गान्धी युवा इंका की कमान ऐसे नेतृत्व के हाथों में सौम्पना चाहते हैं जो कि ना केवल नया हो वरन उसका कांग्रेस का कोई बड़ा नेता Þकेअर आफÞ भी ना हो। जिमें के बालाघाट लोस में आने वाले सिवनी और बरघाट विस क्षेत्रों के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों का चुनाव 3 मई को हो गया जिसमें सिवनी से शिव सनोड़िया और बरघाट से देवेन्द्र ठाकुर अध्यक्ष चुन लिये गये हैं।सिवनी से चुने गये शिव सनोड़िया का नाम कांग्रेस की छात्र और युवा राजनीति में नया नहीं हैं। वे पिछले कुछ सालों से जिला एन.एस.यू.आई. के अध्यक्ष पद कार्य कर रहें हैं और आज भी अध्यक्ष हैं। उनका कार्यकाल यदि प्रशंसनीय नहीं रहा तो निन्दनीय भी नहीं कहा जा सकता हैं। छात्र संघों के चुनावों के दौरान इनकी सक्रियता देखी जाती रही हैं। अब देखना यह हैं कि पिछले पांच चुनावों से जिन सिवनी और बरघाट क्षेत्रों से कांग्रेस चुनाव हारती चली आ रही हैं वहां राहुल गान्धी की मंशा के अनुसार ये दोनो युवा नेता पार्टी को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं या जिले की पिछले पन्द्रह सालों से चली आ रही कांग्रेस की परम्परा के अनुसार गुटबाजी में व्यस्त रह कर कांग्रेस के बजाय नेता विशेष को मजबूत करतें हैं।

चुनव हो तो हथकंड़े भी होंगं ही-जहां चुनाव हों वहां चुनावी हथकंड़े ना अपनाये जाये इसकी तो कल्पना ही नहीं करनी चाहिये। ऐसा ही सब कुछ युवक कांग्रेस के चुनावों में भी हुआ। राहुल गान्धी चाहते थे कि इन चुनावों के जरिये हर विधान सभा की प्रत्येंक ग्राम पंचायत और हर वार्ड में युवा इंका की निर्वाचित इकाई हो। लेकिन ऐसा नही हो पाया। चुनाव होने के लिये जितनी इकाइयां आवश्यक थी उतनी इकाइयां बनायीं गईं और शेष को छोड़ दिया गया। उदाहरण के लिये सिवनी विधानसभा क्षेत्र में शहर के सभी वाडोZं के अलावा मात्र चालीस पंचायतों में ही इकाइयों का गठन किया गया जबकि इस क्षेत्र में सौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। रहा सवाल चुनावी हथकंड़ों के अपनाने का तो इसके बारे में तो अध्यक्ष पद एक प्रत्याशी आसिफ इकबाल ने बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर इसका खुलासा किया हैं। वैसे तो चुनावों में ऐसा ही रहता हैं कि जो जीता वही सिकन्दर कहलाता है। लेकिन इन चुनावों में हार का गम कम करने की व्यवस्था की गई है। जिन पांच पदाधिकारियों को चुना था उसमें नियमानुसार सबसे अधिक मत पाने वाना अध्यक्ष उससे कम वोट पाने वाला उपाध्यक्ष और फिर उनसे कम मत पाने वाले तीन प्रत्याशी महामन्त्री चुने गये हैं।

भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नही रह गया है भाजपा के लिये -अत्याचार ना भ्रटाचार हम देंगें अच्छी सरकार के नारे पर भाजपा ने प्रदेश की सरकार पर आज से सात साल पहले अपना कब्जा किया था। लेकिन भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा कितनी गम्भीर हैं ये प्रदेश की जनता बखूबी देख चुकी है। आज लगभग एक दर्जन मन्त्री लोकायुक्त की जांच में के दायरे में हैं। जो जहां चुनकर आया उसमें से अधिकांश भाजपा नेता भ्रष्टाचार के एक सूत्री कार्यक्रम को लेकर चलना अपना ही सब कुछ समझने लगे हैं। भ्रष्टाचार के प्रमाणिक मामलों में भी अपने कार्यकत्ताZओं को बचाव करना भाजपा नेता अपना कत्तZव्य मानते हैं। पिछले दिनो भाजपा की प्रदेश सरकार ने ही सिवनी नगर पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती पार्वती जंघेला को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाते हुये उनसे ना केवल तीन लाख रुपये की वसूली के आदेश दिये हैं वरन पांच साल के लिये चुनाव लड़ने के लिये भी अयोग्य घाषित कर दिया हैं। पार्वती जंघेला जिला महिला मोर्चे की अध्यक्ष हैं। उनके नेतृत्व में भाजपा ने महंगायी और केन्द्र शासन के तमाम घोटालों और गलत नीतियों के खिलाफ आन्दोलन किया। मीडिया में इस बात को लेकर कमेण्ट भी किये गये लेकिन भाजपा नेतृत्व पर इसका कोई असर नहीं हुआ और उनके ही नेतृत्व में जिले के तमाम वरिष्ठ नेताओं पैदल मार्च भी किया। और और उनके बचाव भी यह कहा गया कि अभी उनके लिये आदालत के दरवाजे खुले हुये हें और हो सकता है कि वे वहां से निर्दोष साबित हो जायें। उनके बचाव में कही गई यह बात भाजपा चाल चरित्र और चेहरे के दावे को बेनकाब कर देता हें और इससे यह भी साबित होता है कि भाजपा का यह मानना हैं कि अपना यदि कोई करे तो शिष्टाचार हो और दूसरा कोई करे तो भ्रष्टाचार। जिले में यदि संगठन के प्रमुख पदों पर भी यदि भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होने वाले नेताओं को पद बनाये रखा जायेगा तो प्रदेश में भाजपा की सरकार रहते जिले में भ्रष्टाचार समाप्त होने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

मोगली उत्सव पर सवाल खड़े कर गौगपा ने भाजपा को कठघरे में किया खड़ा- गोंड़वाना गणतन्त्र पार्टी ने मोगली उत्सव पर सवाल उठाते हुये भाजपा और प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया हैं। पहले तो एक विज्ञप्ति जारी कर प्रशासन द्वारा प्रेस के प्रवेश निषेघ किये जाने की आलोचना की गई थी। फिर एक अन्य विज्ञप्ति में यह सवाल उठाया गया था कि विधायक श्रीमती नीता पटेरिया और नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के यहां विवाह समारोह में आने के लिये मुख्यमन्त्री और अन्य भाजपा नेताओं के कारण भीषण गर्मी में बच्चों को परेशान किया गया और उसकी तारीख 9 से 11 मई रखी गया है। उल्लेखनीय है कि दोनों ही विवाह समारोह 11 मई को होने वाले हैं। वैसे भी इस बार मोगली महोत्सव प्रारम्भ से ही विवादों में घिर गया था। प्रदेश की भाजपा सरकार ने यह घोषणा की थी हर साल मोगली उत्सव पेंच नेशनल पार्क में मनाया जायेगा। लेकिन इस साल सरकार ने इस उत्सव को पन्ना नेशनल पार्क में मनाने का फैसला कर लिया था। वैसे भी शिव की नगरी सिवनी को शिवराज ने कुछ दिया तो नहीं लेकिन छिन बहुत कुछ गया था। इसर तर्ज पर इस बार मोगली उत्सव भी छिन रहा था। लेकिन बाद में फिर स्थान परिवर्तित कर पेंच नेशनल पार्क तो कर दिया गया लेकिन आयोजन की तिथि बझ़ा कर एक नये विवाद को पैदा कर दिया हें। लेकिन आजकल तो राजनेताओं की यह प्रवृत्ति हो गई हैं कि कोई कुछ बोलता रहे हमें जो करना हैं वह हम करते रहेंगें भले ही वह गलत ही क्यों ना हो।



ये क्या होता जा रहा है शिव की नगरी सिवनी को



ना जाने ये क्या होता जा रहा ह ैशिव की नगरी सिवनी कोर्षोर्षो एक दौर ऐसा भी था जबकि सन 1962 में जिले से लगे हुये जबलपुर में ऊषा भार्गव कांड़ के रूप में भयंकर साम्प्रदायिक दंगा हुआ था। इसकी चपेट में सम्भाग के कई जिले आ गये थे। लेकिन उसकी आग की लपटें सिवनी को छू भी नहीं पायीं थीं। लेकिन इसी सिवनी में तीस साल बाद 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराये जाने से हुयी अशान्ति के चलते लगभग 19 दिन का कफ्Zयू लगाना पड़ा था। आज प्रदेश में साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों की सूची में सिवनी का नाम काफी ऊंंची पायदान पर हैं। जहां 1962 में जिले में कहीं कुछ नहीं हुआ था वहां अब कहां और कब क्या हो जायेर्षोर्षो इसके बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता हैं।

कभी देश में मध्यप्रदेश शान्ति का टापू माना जाता था। उसमें सिवनी जिला तो ऐसा था कि उसने सन 1967 के मेजर पेर सिंह - गौतम इंस्पेक्टर कांड़ के पहले अश्रु गेस के गोले तक नहीं देखे थे। पहली बार जब 1971 के दंगें में शहर में कफ्Zयू लगा था तब गांव के कुछ भोले भाले लोग तो सर्कस के समान कफ्Zयू देखने शहर आ गये थे और पुलिस की गिरफ्त में आ गये थे जिन्हें पुलिस ने भी नादान समझ कर छोड़ दिया था। आज उसी शिव की नगरी सिवनी में गैंगवार जैसी घटनायें भी होने लगीं हैं।

सिवनी में घोड़ी पर सवार दूल्हे पर कभी गोली चल जायेगी और शहनायी की गूञ्ज चीत्कारों में बदल जायेगी। मेंहदी हाथों में सजाकर वैवाहिक जीनव में प्रवेश करने के सपने सञ्जोयी दुल्हन को फेरों का इन्तजार करते रह जाना पड़ेगा। ऐसा तो कभी सोचा भी नहीं था। लेकिन आशीष नगपुरे के साथ ऐसा ही हो गया। इतना ही नहीं वरन गोली की घटना से आक्रोशित बरातियो द्वारा हमलावर एक युवक सतीश कुचबुन्दिया को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वह भी मौत से संघर्ष कर रहा हैं। व्यवसायिक प्रतिद्वन्दिता की यह खूनी परिणिति बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देती हैं।

आज के दौर में राजनीति इतनी ज्यादा प्रभावशाली हो गई हैं कि वह समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। राजनेताओं को इतना भी परहेज नहीं रह गया है कि उनके द्वारा आपराधिक तत्वों को दिया जाने वाला संरक्षण कभी कभी ना केवल उनके लिये ही घातक हो जाता हैं वरन शहर के अमन चैन को भी नाश करके रख देता हैं। अधिकारियों को भी नेताओं की हर सिफारिश को मान कर सिर्फ अपनी सुविधा का ध्यान रखने के बजाय अपने कत्तZव्यों को भी याद रखना चाहिये। यदि ऐसा सब नहीं होता हैं तो फिर अमन चैन के लिये मशहूर इस शहर का भगवान ही मालिक होगा।









Monday, May 2, 2011

plitical dairy of seoni disst. of M.P.

चलो बुलावा आया है की तर्ज पर शिवराज के बुलावे पर हरवंश का जाना इस बार महंगा साबित हुआ?

राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले में केन्द्र सरकार को कदम कदम पर घेरने का प्रयास कर रही भाजपा के साथ जिले में बिल्कुल उल्टा ही हो रहा हैं। केन्द्र सरकार के घोटालों और भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्वती जंघेला के नेतृत्व में चलाया जा रहा अभियान मजाक का पात्र बन कर रह गया हैं। चलो बुलावा आया है की तर्ज पर कहीं भी चले जाना कभी कभी बहुत महंगा पड़ जाता हैं। ऐसा ही कुछ बीते दिनों विधानसभा उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते विधायक हरवंश सिंह के साथ हुआ। राजा भेज की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के विरोध के बावजूद भी हरवंश सिंह शिवराज के बुलावे पर चले गये थे जो अब उन्हें महंगा पड़ रहा हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने पिछले दिनों अपने विधानसभा क्षेत्र के उगली अंचल में कुछ कार्यक्रमों में सांसद बसोरी सिंह के साथ भाग लिया। पूर्वमें सांसद निधि से बने और बहे पुल पर हरवंश सिंह की टिप्पणियों से सवाल उठ खड़े हुये हैं। भाजपा के नेता जो निगम या मंड़ल के जरिये लाल बत्ती की आस लगाये दो साल से बैठे हैं वे अब निराश होने लगे हैं। आम सहमति ना बनने या आला कमान से हरी झंड़ी नहीं मिल पाने से मामला बार बार पेंड़िग हो जाता हैं। अब देखना यह हैं कि कब ये दावेदार लालबत्तीधारी बन पाते हैं।भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार होता हैं। वो केन्द्रीय या प्रादेशिक नहीं होता। लेकिन भाजपा ने यह विभाजन कर दिया हैं। भाजपा का युवा मोर्चा सम्भागीय मुख्यालयों पर केन्द्रीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध मेराथन दौड़ का आयोञ्जन किया हैं।

दूध की तकवारी बिल्ली के हवालेर्षोर्षो-राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के मामले में केन्द्र सरकार को कदम कदम पर घेरने का प्रयास कर रही भाजपा के साथ जिले में बिल्कुल उल्टा ही हो रहा हैं। कुछ दिनों पहले जिला भाजपा कार्यालय में महिला मोर्चे की जिले की बैठक पूर्व पालिका अध्यक्ष पार्वती जंघेला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी। इसमतें यह तय किया गया कि मंहगायी,भ्रष्टाचार और केन्द्र सरकार के घोटालों के खिलाफ जिले में चरणबद्ध आन्दोलन चलाया जायेगा। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि हाल ही में नगर की दुगनी लागत में बनी घटिया सड़कों के मामले में राज्य शासन ने तत्कालीन नपा अध्यक्ष पावर्ती जंघेला को 5 सालों के लिये चुनाव लड़नें के लिये अपात्र घोषित करने के साथ ही तीन लाख रुपये की वसूली के आदेश जारी किये हैं। ऐसे में जिलमे ें पार्वती जंघेला के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह अभियान मजाक का पात्र बन गया हैं और लोग यह कहने में कोई संकोच नहीं कर रहें हैं कि भाजपा ने तो दूध की तकवारी बिल्ली के हवाले कर दी हैं।

बुलावा महंगा पड़ गया इस बार-चलो बुलावा आया है की तर्ज पर कहीं भी चले जाना कभी कभी बहुत महंगा पड़ जाता हैं। ऐसा ही कुछ बीते दिनों विधानसभा उपाध्यक्ष एवं जिले के इकलौते विधायक हरवंश सिंह के साथ हुआ। शिवराज सिंह के बुलावे पर कहीं भी चले जाना हरवंश सिंह की आदत में शुमार हो गया था। बीते दिनों प्रदेश की भाजपा सरकार ने राजधानी भोपाल में शहर का नाम बदल कर भोजपाल रखने के लिये राजा भोज की स्मृति में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित किया था। प्रदेश सरकार के नाम बदलने की इस कार्यवाही का प्रदेश विरोध कर रही थी। कार्यक्रम में कांग्रेस की उपस्थिति दिखाने की गरज से बताया जाता हैं कि मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह ने विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को आमन्त्रित किया और वे उस कार्यक्रम में शामिल भी हो गये। बताया जाता हैं कि इसे प्रदेश कांग्रेस ने गम्भीरता से लिया और मामले का आलाकमान तक पहुचाया था। शायद इसी सन्दर्भ के चलते नव नियुक्त नेता प्रतिपक्ष ने पिछले दिनों प्रदेश के हजारों कार्यकत्ताZओं की उपस्थिति में हरवंश सिंह को कठघरे में खड़ा करते हुये खुले आम यह कह दिया था कि प्रदेश में सरकार तो हम बना लेंगें बशर्ते ठाकुर साहब शिवराज को सपोर्ट करना बन्द कर दें। इन तमाम तथ्यों को देखते हुये यह कयासलगाये जा रहें हैं कि विस उपाध्यक्ष पद जाने के बाद हरवंश सिंह को क्या जवाबदारी मिलने वाली हैं। कभी मीडिया में छपता हैं कि प्रदेश कांग्रेस का मिोट कण्ट्रोल हरवंश सिंह के हाथ में होगा, तो कभी यह छपता हैं कि वे कार्यकारी अध्यक्ष या प्रभारी महामन्त्री बनेंगें तो कभी यह छपता हैं कि आला कमान प्रदेश के वरिष्ठ दस नेताओं की समन्वय समिति बनायेगी और उसमें हरवंश सिंह भी शामिल होगें। इन तमाम खबरों से यह अन्दाजा तो लगाया ही जा सकता हैं कि उन्हें क्या मिलेगार्षोर्षो यह तय नहीं हैं। सियासी हल्कों में यह भी चर्चा हैं कि हो सकता कि अब शेष कार्यकाल उन्हें सिर्फ इंका विधायक रह कर ही गुजारना पडे़।

भ्रष्टाचार में बह गया पुल देखते रहे हरवंश-विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने पिछले दिनों अपने विधानसभा क्षेत्र के उगली अंचल में कुछ कार्यक्रमों में सांसद बसोरी सिंह के साथ भाग लिया। इन कार्यक्रमों में एक बरगुल नाले पर बनने वाले पुल का शिलान्यास कार्यक्रम भी शामिल था। इस अवसर पर मौजूद लोगों को सम्बोधित करते हुये हरवंश सिंह ने कहा कि क्षेत्र की पूर्व भाजपा सांसद ने भी इस काम के लिये तेरह लाख रुपये सांसद निधि से मञ्जूर किये थे लेकिन वे भ्रष्टाचार और कमीशन बाजी की भेण्ट चढ़ गये और पुल पहली बरसात में ही बह गया। उनके इस भाषण से एक सवाल सहज ही पैदा हो जाता हैं कि यदि उनके विधानसभा क्षेत्र में विपक्षी पार्टी भाजपा की सांसद की सांसद निधि से भ्रष्टाचार और बन्दर बाण्ट हो रही थी तब वे चुप क्यों रहेंर्षोर्षो इसकी जांच कर दोषियों से राशि वसूल करने की मांग क्यों नहीं की थीर्षोर्षोक्या वे पुल के बहने और उसी पुल के लिये दूसरी बार राशि मञ्जूर करा कर अब किन्हीं अपने वालों को बन्दरबाण्ट करने का मौका देना चाह रहें हैंर्षोर्षो ना तो यह मुद्दा जांच के लिये उठाया गया और ना ही यह मुद्दा चुनाव में उठार्षोर्षो ऐसे में ही तो उन पर भाजपा नेताओं के साथ नूरा कुश्ती खेलने के आरोप जिले से अब तो भोपाल तक में लगने लगे हैं।

निराश हो रहे हैं लाल बत्ती के दावेदार- भाजपा के नेता जो निगम या मंड़ल के जरिये लाल बत्ती की आस लगाये दो साल से बैठे हैं वे अब निराश होने लगे हैं। भाजपा में फैलने वाले सम्भावित असन्तोष के डर से ना तो वे मन्त्री मंड़ल का विस्तार कर रहें हैं और ना ही निगम और मंड़लों में नियुक्ति ही कर रहें हैं। कुछ राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना हैं कि प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा और शिवराज की अनबन के चलते आम सहमति नहीं बन पाने के कारण भी यह काम रुका पड़ा हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा हैं कि भाजपा आला कमान की मर्जी के बाबजूद भी उमा भारती के पार्टी प्रवेश में शिवराज द्वारा लगाये जा रहे अड़ंगे से आला कमान नाराज हैं और उन्हें इसीलिये हरी झंड़ी नहीं मिल रही हैं। बार बार मन्त्रीमंड़ल विस्तार एवं निगमों की नियुक्तियों को चर्चे होते हैं और फिर मामला लटक जाता हैं। इसे लोग ऐसा मान रहें हैं कि शिवराज सिंह की पकड़ ऊपर कमजोर हो गई हैं। इसीलिये हर बार किसी ना किसी बहाने इन नियुक्तियों को टाला जा रहा हैं। भाजपा में दावेदार माने जाने वाले नेता इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर कब तक और कैसे अपने समर्थकों को समझायें कि बस अब लाल बत्ती आने ही वाली हैं। उन्हें इस बात का डर भी सता रहा हैं कि बहुत ज्यादा विलम्ब होने से उनके समर्थक टूट कर दूसरे पाले में ना चलें जाये और फिर उनका दावा ही कमजोर हो जाये। अब देखना यह हैं कि कब ये दावेदार लालबत्तीधारी बन पाते हैं।

भ्रष्टाचार को भ्रष्टाचार रहने दे केन्द्रीय या प्रादेशिक ना बनाये मोर्चा -भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार होता हैं। वो केन्द्रीय या प्रादेशिक नहीं होता। लेकिन भाजपा ने यह विभाजन कर दिया हैं। भाजपा का युवा मोर्चा सम्भागीय मुख्यालयों पर केन्द्रीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध मेराथन दौड़ का आयोञ्जन किया हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं को जागृत करना एक प्रशसनीय काम हैं जो कि मोर्चा कर रहा हैं। लेकिन यह निन्दनीय है कि वह केन्द्रीय और प्रादेशिक भ्रष्टाचार में फर्क करना युवाओं को सिखा रही हैं। इससे क्या ऐसा सन्देश युवाओं में नहीं जायेगा कि अपना करे तो शिष्टाचार और दूसरा करे तो भ्रष्टाचारर्षोर्षो इसलिये युवा मोर्चे को चाहिये कि वह या तो इसी मेराथन दौड़ में प्रादेशिक भ्रष्टाचार को भी जोड़ें या फिर इसके लिये अलग से कोई दौड़ आयोजित कर निष्पक्षता से भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगायें और युवाओं में जागृति लाने का काम करें।