Friday, July 30, 2010

कृपापात्र और कुपात्र में फर्क करना मुश्किल हैं क्योंकि हरवंश के अधिकांश कृपापात्र कांग्रेस के लिये कुपात्र ही साबित हुये हैं
कांग्रेस चुनावों को लेकर अखबारों ये समाचार सुर्खियों में रहें कि कांग्रेस में चुनाव की सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की जा रही हैं। सुपात्र,अपात्र और कृपापात्र को लेकर भी अटकलें लगायी जा रहीं हैं। कृपापात्रों की ताजपोशी की संभावनाये हैं। वैसे भी कृपापात्र और कुपात्र में फर्क करना आसान नहीं हैं क्योंकि हरवंश सिंह के अधिकांश कृपापात्र पार्टी के लिये कुपात्र ही साबित होते रहें हैं। कांग्रेसी हल्कों में इन दिनों एक चर्चा ऐसी भी हैं कि जिला इंका अध्यक्ष महेश मालू के पारिवारिक वारसानों ने उनसे यह आग्रह किया हैं कि यदि इस बार कोई पीले चांवल लेकर भी आयें तो अध्यक्ष बनने की सहमति नहीं देना। शिवराज के बयान पर जिले की इंकाईचुप्पी और हरवंश सिंह के आरोपी बनने पर भाजपा की सदन में चुप्पी सियासी हल्कों की चर्चाओं में आकर्षण का केन्द्र बनी हुयी है। कई दिनों से तो आलम यह है कि इंकायी और भाजपा खेमे में खुलआम नूरा कुश्ती के चर्चे होते हें और छोटे कार्यकत्ताZ यह मानने लगे हैं कि मरना तो अपना ही हैं बड़े नेता तो बुरे वक्त में एक दूसरे का साथ देकर बचा ही लेते हैं। चाहें फिर वह मुख्यमन्त्री का डंपर मामला हो या हरवंश सिंह का जमीन घोटाले मामले में मुिल्जम बनना हो। वैसे तो मामले में दोषी केन्द्र की कांग्रेस सरकार भी हें और प्रदेश की भाजपा सरकार भी हैं। इसलिये जनमंच का आक्रमण दोनों ही दिशा में बराबर रहना आवयक हें अन्यथा राजनैतिक भेद भाव से बचना मुश्किल हो जावेगा।
सुपात्र,अपात्र और कृपापात्र के चर्चे हो रहें हैं इंकाई चुनाव में -
जिले में कांग्रेस के चुनाव होने की औपचारिकता पूरी होने लगी हैं।सबसे पहले जिले के चुनाव अधिकारी उस समय आकर चले गये जब ब्लाक कमेटियों ने जिला प्रतिनिधियों का भी चुनाव नहीं किया था। बाद में ब्लाक कमेटियों के चुनाव अधिकारी आये और अपना काम करके चले गये। जिले सहित किसी भी ब्लाक के चुनाव अधिकारी के आने या बैठक लेने कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई तथा ना ही सभी सुपात्रों को सूचित किया गया जो कि जो कि चुनाव लड़ने की पात्रता रखते हैं। इसे लेकर अखबारों में भी ये समाचार सुर्खियों में रहें कि कांग्रेस में चुनाव की सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की जा रही हैं। सुपात्र,अपात्र और कृपापात्र को लेकर भी अटकलें लगायी जा रहीं हैं। सुपात्र तो कांग्रेस आलाकमान की देन हैं जिसके लिये बाकायदा कार्यकत्ताZओं से फोटो सहित फार्म भराया गया हैं और जिनकी सूची बनायी गई हैं। अपात्रों को पात्र जिले इंकाई महाबली हरवंश सिंह और उनकी अंध समर्थक जिला इंका ने बनायी हैं। जिला इंका ने ही अपात्र बनायी थी और फिर ना जाने कैसे और कब जिला इंका ने ही उन्हें पात्र बना दिया। वैसे अपात्र बनाने की तो बाकायदा विज्ञप्ति प्रकाशित की गईं थीं लेकिन वे पात्र कब और कैसे बन गये इसका पता ही किसी को नहीं चला हैं। अपात्र से पात्र बने ये इंकाई यदि कृपापात्र भी बन गये तो ताज इन्हीं के सिर पर पहना दिया जाये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये। इंकाई हल्कों में तो लोग चटखारे लेकर यह भी कहने से नहीं चूक रहें कि आलाकमान के सुपात्र भले ही एक कौने में चलें जायें लेकिन हरवंश के कृपापात्र को दरकिनार करना असम्भवा सा ही हैं। वैसे भी कृपापात्र और कुपात्र में फर्क करना आसान नहीं हैं क्योंकि हरवंश सिंह के अधिकांश कृपापात्र पार्टी के लिये कुपात्र ही साबित होते रहें हैं।
जिनसे गाली खाओ उन्हीं को टीका लगाओं संस्कृति से त्रस्त- कांग्रेसी हल्कों में इन दिनों एक चर्चा ऐसी भी हैं कि जिला इंका अध्यक्ष महेश मालू के पारिवारिक वारसानों ने उनसे यह आग्रह किया हैं कि यदि इस बार कोई पीले चांवल लेकर भी आयें तो अध्यक्ष बनने की सहमति नहीं देना। उनके परिजन इस बात से दुखी हैं कि जब देखो तब कोई भी गाली गलौच कर के चला जाता हैं। फिर यह भी एक अजीब मजबूरी रहती हैं कि जिससे गाली खाओ उसी का किसी के कहने पर टीका लगाकर सम्मान करो। वैसे भी जिला इंका अध्यक्ष महेश मालू का परिवार स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों का परिवार रहा हैं। ऐसे में जिले के कांग्रेसियों द्वारा उनके परिजनों के साथ ऐसा व्यवहार करना सर्वथा अनुचित हैं। इसीलिये इस बार उनके परिजनों ने विशेषकर वारसानों ने उनसे कहा है कि अब वे उन सब झंझटों से मुक्त हो जायें। अब होता क्या हैं र्षोर्षो यह तो भविष्य ही बतायेगा।
प्रदेश में इंका भाजपा में नूरा कुश्ती के चर्चे आम-
प्रदेश और जिले के रानजैतिक पटल पर इन दिनों दो महत्व पूर्ण घटनायें हुयी हैं। वषाZकालीन सत्र के पहले मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवपुरी जिले के एक गांव में यह बयान देकर सनसनी फैला दी कि उन्हे हटाने के लिये संगठित प्रयास किये जा रहे हैं और भू माफिया इसके लिये पैसा इकट्ठा कर रहा हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने दो दिनो तक सदन में हंगामा मचाया और सथगन प्रस्ताव पर चर्चा के बिना माने नहीं। जिले के राजनैतिक पटल पर एक जमीन घोटाले में इंका विधायक एवं विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह पर कोर्ट के निर्देश से धोखा धड़ी का मामला दर्ज हो गया और अब पुलिस उसमें जांच कर रही हैं। पहले ऐसी उम्मीद थी कि 20 जुलाई की पेशी में मामला समाप्त हो जायेगा लेकिन पुलिस ने जांच के लिये समय ले लिया और अब अगली पेशी 19 अगस्त को होगी। इस पर जिले में भाजपा और उनके नेताओं ने काफी हल्ला मचाया लेकिन प्रदेश भाजपा और सदन में इस मामले में भाजपायी चुप्पी सियासी हल्कों में चर्चित हैं। कांग्रेस द्वारा सदन में मुख्यमन्त्री को घेरने के बावजूद भी हरवंश सिंह के मामले में भाजपायी चुप्पी लोगों के गले के नीचे नहीं उतर नहीं हैं। जबकि इस मामले को राजनैतिक रूप से प्रताड़ना का मामला भी नहीं कहा जा सकता हैं क्योंकि यह मामला कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने कायम किया हैं। ब्लकि इस मामलें में पुलिस की आलोचना तो इस बात पर हुई है कि कोर्ट के तीन बार निर्देश दने के बाद बमुश्किल पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया था अन्यथा परिवादी के 156(3) के तहत दर्ज किये गये परिवाद में मेन्डेटरी प्रावधानों के बावजूद भी पुलिस ने अपने प्रतिवेदन में बिना अपराध कायम किये यह प्रतिवेदन में लिख दिया था कि आरेपी क्र. 2 और 3 , रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह के खिलाफ कोई साक्ष्य ना होने से अपराध दर्ज नहीं किया गया एवं परिवादी के भाई नियाज अली के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया हैं। इसलिये इस मामले में भाजपा की राज्य सरकार या उसकी जिला पुलिस पर राजनैतिक विद्वेष के कारण फर्जी मामला दर्ज करने का आरोप तो कांग्रेस चस्पा ही नहीं कर सकती थी। लेकिन इसके बावजूद भी सदन में कांग्रेस के द्वारा सरीकार को कठघरे में खड़ा किये जाने के बाद भी भाजपा की विस उपाध्यक्ष पर दर्ज मुकदमे पर भाजपा की चुप्पी समझ से परे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के प्रवक्ताओं की शिवराज के बयान पर चुप्पी भी सियासी हल्कों में चर्चित हैं। राजनैतिक खांसी और झींक में फर्क बताने में दो दो पेज की विज्ञप्तियां जारी करने में महारथ रखने वाले महारथी इतने संवेदनशील मामले में चुप्पी क्यों साधे रहेर्षोर्षो जबकि जिले के मुद्दों को छोड़ प्रदेश और राष्ट्रीय मुद्दों पर जिले के लोगों ने प्रवक्ताओं का लंबा विज्ञप्ति युद्ध भी देखा हैं। इन सबके चलते कई दिनों से तो आलम यह है कि इंकायी और भाजपा खेमे में खुलआम नूरा कुश्ती के चर्चे होते हें और छोटे कार्यकत्ताZ यह मानने लगे हैं कि मरना तो अपना ही हैं बड़े नेता तो बुरे वक्त में एक दूसरे का साथ देकर बचा ही लेते हैं। चाहें फिर वह मुख्यमन्त्री का डंपर मामला हो या हरवंश सिंह का जमीन घोटाले मामले में मुिल्जम बनना हो।
फोर लेन के लिये जनमंच की बैठक संपन्न-
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन नार्थ साउथ कॉरीडोर का मामला एक बार फिर गर्मा गया हैं। बीते दिनों जनमंच की आयोजित बैठक में कई सुझाव आये और कुछ निर्णय भी लिये गये। 1 अगस्त से आन्दोलन की फिर शुरुआत की जा रही हैं। इसके स्वरूप को लेकर रणनीति बनाने के लिये फिर बैठक होगी। वैसे तो मामले में दोषी केन्द्र की कांग्रेस सरकार भी हें और प्रदेश की भाजपा सरकार भी हैं। जनमंच की एक अपील कमिश्नर के यहां लंबित हैं जो कलेक्टर के उस आदेश को निरस्त करने के लिये लगी हैं जिसके कारण काम रोका गया हैं। और एक केस सुप्रीम कोर्ट में लगा हैं जिसमें केन्द्र सरकार के दो विभागों में समन्वय नहीं हो पा रहा हैं। इसलिये जनमंच का आक्रमण दोनों ही दिशा में बराबर रहना आवयक हें अन्यथा राजनैतिक भेद भाव से बचना मुश्किल हो

Wednesday, July 21, 2010

शिवराज के बयान से उपजा सवाल
क्या माफिया या पैसे के बल पर भाजपा में मुख्यमन्त्री बनते या बदलते हैं?
मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा शिवपुरी जिले के कोटानाका गांव में दिये गये बयान से उठा राजनैतिक तूफान थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं। मुख्यमन्त्री का बयान भी आइने के माकिफ था जिसमें उनकी पीड़ा साफ साफ दिखायी दे रही थी। प्रदेश का प्रमुख विपक्षी दल इस सदन में चर्चा कराना चाहता है जिसे लेकर सदन की कार्यवाही चल ही नहीं सकी। मुख्यमन्त्री ने अपने बयान में यह कहा था कि कुछ लोग उनको हटाने की कोशिश कर रहें हैं और भू माफिया इसके लिये धन एकत्रित कर रहा हैं। हालांकि उन्होंने पूछने पर यह खुलासा नहीं किया कि ऐसे लोग कौन हैं र्षोर्षोक्या राजनैतिक शक्तियां हैं या कोई अन्यर्षोर्षो प्रदेश की सरकार के मुखिया के ऐसे बयान से पूरे सूबे की सियासत में तूफान आ गया हैं। सत्ता दल और विपक्ष में इस बयान के अर्थ तलाशे जा रहे हैं।
वैसे तो यदि देखा जाये तो मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह की छवि विवादास्पद बयान देने वाले नेता की नहीं रही हैं। उनकी छवि ऐसी भी नहीं हैं कि जबान फिसलने से कोई गलत बयानी हो गई हो। शिवराज का एक बयान और विवादास्पद हुआ था जो उन्होंने सतना में दिया था। उन्होंने औद्योगिक विकास को लेकर कहा था कि मध्यप्रदेश इसमें भी अग्रणी रहेगा लेकिन इनमें बिहारियों को नहीं घुसने दिया जायेगा। अपने मध्यप्रदेश के लोगों को ही रोजगार दिलाया जायेगा। इस बयान पर भी काफी तूफान मचा था और कुछ लोगों ने तो यह भी मान लिया था कि जबान फिसनले से ऐसा हो गया होगा। लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना था कि उन्होंने जानबूझ ऐसा बयान दिया हैं क्योंकि वे मुख्यमन्त्री की कुर्सी छोड़कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनना चाहते थे। इस बयान पर बिहार की तीखी प्रतिक्रिया के बाद अध्यक्ष पद की दौड़ से उनका नाम ही बाहर हो गया था। उनकी ऐसी कार्यप्रणाली को भाजपा में भी कई नेता समझते हैं। तभी तो भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमन्त्री सुन्दरलाल पटवा ने कहा हैं कि शिवराज ने जो कुछ कहा है सोच समझ कर कहा होगा।
मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर शिवराज सिंह द्वारा दिये गये इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं। पहला और अहम सवाल तो यही हैं कि क्या भाजपा या संघ में मुख्यमन्त्री बनाने और हटाने के लिये पैसे चलने लगे हैं?यदि पैसे चलने लगे हैं तो पैसे ले कौन रहा हैं? क्या शिवराज सिंह खुद भी इसी तरीके से मुख्यमन्त्री बने थे? क्या भाजपा या संध के राजनैतिक निर्णय राजनैतिक कारणों के बजाय भू माफिया या खनन माफिया के प्रभाव में लिये जाते हैं? क्या मुख्यमन्त्री खुद को अपनी ही सरकार में असुरक्षित महसूस कर रहें हैं? क्या मुख्यमन्त्री ने दागियों कें लामबन्द होने और उमा भारती की वापसी की चर्चा से ध्यान हटाने के लिये जानबूझ कर ऐसा बयान दिया हैं और पार्टी में अपने विरोधियों को पैसे के खेल और माफिया के मेल के आरोपो के कठघरे में खड़ा कर दिया हैं?
अब इसमें सच्चायी क्या है? यह तो शिवराज सिंह ही जानते हैं। लेकिन एक बात जरूर हैं कि, Þअत्याचार ना भ्रष्टाचार, हम देगें अच्छी सरकारß का नारा बुलन्द करके सरकार में आने वाली भाजपा यदि आज खुद अपना मूल्यांकन करे तो वह उन कसौटियों पर खुद को खरा नही पायेगी जिन पर जनता का विश्वास हासिल किया था। आज दागी मन्त्री के नाम मन्त्रियों हटाने का सिलसिला भी भाजपा ने ही अपनी कार्यकारिणी की बैठक में लेकर शुरू किया था। इस अभियान की शुरुआत पूर्व प्रधानमन्त्री अटलबिहारी बाजपेयी जी के भांजे अनूप मिश्रा को मन्त्री मंड़ल से हटा कर की गई थी। इस कदम से अचानक ऐसा राजनैतिक सन्देश भाजपा में गया कि शिवराज बहुत ज्यादा ताकतवर हो गयें हें जो उन्होंने अटल जी के भांजे को हटवाने में सफलता पा ली हैं। फिर क्या था मन्त्री मंड़ल के बागियों ने भी लामबन्द होना चालू कर दिया और यह सवाल भी उछाल दिया कि लोकायुक्त जांच में डंपर कांड़ के दागी शिवराज भला दूसरे दागियो से कैसे स्तीफा मांग सकते हैंंर्षोर्षो दागी मन्त्रियों के समूह नें यह आवाज भी बुलन्द की है कि सिर्फ सरकार के ही क्यों संगठन के दागियों से भी स्तीफे लिये जायें। इस तरह प्रदेश भाजपा के संगठन और सत्ता के केन्द्र एकदम अलग अलग और विपरीत दो ध्रुवों पर खड़े नज़र आने लगे।तभी तो दागियों के खिलाफ कार्यवाही करने की दास्तान अनूप से चालू होकर अनूप पर ही खत्म हो गई हैं।
इसी बीच विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी सदन में सरकार को घेरने की घोषणा कर दी थी। इस सत्र में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी निभाने वाले चौधरी राकेश सिंह ने भ्रष्टाचार और दागी मन्त्रियों को लेकर सरकार को घेरने की घोषणा पत्रकार वार्ता में कर दी थी। लेकिन कांग्रेस भी इस मामले में धर्म संकंट में पड़ गई हैं। कांग्रेस के सिवनी जिले के विधायक एवं विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह एक जमीन घोटाले में कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुये एक धोखाधड़ी के मामले में अपने पुत्र सहित आरोपी बन गये हैं। हालांकि कोर्ट के दो बार निर्देश देने के बाद भी पुलिस ने हरवंश सिंह और उनके पुत्र के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध नहीं किया था लेकिन तीसरे बार निर्देश मिलने पर मामला दर्ज कर जांच में ले लिया गया हैं। हरवंश सिंह का ऐसा मानना था कि 20 जुलाई को पेशी में अन्तिम प्रतिवेदन पेश हो जावेगा और वे आरोपों से बरी हो जावेंगें। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और कोर्ट में इस मामले की तारीख 19 अगस्त के लिये बढ़ गई हैे। इस तरह अब वषाZकालीन सत्र समाप्त होने के पहले इस मामले के समाप्त होने की गुजाइश खत्म हो गई हैं। वैसे भी डंपर कांड़ की जांच के लिये कांग्रेस आलाकमान के द्वारा गठित की गई जांच समिति के अध्यक्ष बनने के बाद से भाजपायी हल्कों में यह चर्चा भी यदा कदा सुनने को मिल जाती हैं कि मुख्यमन्त्री और हरवंश सिंह के बीच इन दिनों सब कुछ ठीक ठाक चल रहा हैं। तभी तो पिछले विशेष सत्र में कांग्रेस के बहिष्कार के निर्णय का ना केवल हरवंश सिंह ने साथ दिया वरन यह बयान भी दिया था कि पार्टी उनके लिये पहले हैं फिर विधानसभा उपाध्यक्ष का पद। इस पर काफी बबाल मचा था और प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा तो राज्यपाल का दरवाजा भी खटखटा आये थे। लेकिन ना तो मुख्यमन्त्री ने इस सम्बंध में कुछ किया और ना ही सदन में संसदीय कार्य मन्त्री के मामला उठाने बाद भी कोई व्यवस्था दी गई।
वैसे तो आजकल ऐसे अंर्तदलीय राजनैतिक समीकरण मिलना कोई नयी और आश्चर्य चकित कर देने वाली बात नहीं रह गई हैं जिनमें अपनी ही पार्टी के दलीय हितों की कुबाZनी देकर अपने स्वयं के हित साधे जाते हैं । इसकी निन्दा करने के बजाय आजकल राजनैतिक हल्कों में इसे एक अच्छा सा नाम दे दिया गया हैं और लोग बड़ी शान से कहते देखे जा सकते हैं कि फलां नेता का Þपोलिटिकल मेनेजमेंटß बहुत अच्छा हैं। विधानसभा का वषाZकालीन सत्र कैसे भी पूरा हो जाये या यह पूरा का पूरा मामला कैसे भी निपट जाये र्षोर्षोयह एक अलग बात होगी। लेकिन मुख्यमन्त्री के बयान से एक अहम सवाल तो सामने आ ही गया हैं कि शुचिता और संस्कार की बाते करने वाली भाजपा में क्या माफिया और पैसे के बल पर मुख्यमन्त्री बनते या बदलतें हैं र्षोर्षो
आशुतोष वर्मा
मो. 09425174640

Monday, July 19, 2010

नार्थ साउथ कॉरीडोर मामले में जनप्रतिनिधियों और इंका भाजपा के रुख से जनाका्रेश
सिवनी । जिले से होकर गुजरने वाले फोरलेन कॉरीडोर मामले में जनप्रतिनिधियों और इंका तथा भाजपा निराशाजनक रुख अब जनाक्रोश का कारण बनता जा रहा हैं।मुख्यमन्त्री ने डंके की चोट पर नगर पालिका चुनाव के दौरान आम सभा में कहा था कि सूरज चाहे पूर्व की बजाय पश्चिम दिशा से ऊगन लगे लेकिन कॉरीडोर सिवनी से ही जायेगा। लेकिन अब जब कभी वन मन्त्री जयराम रमेश भोपाल आते हैं या शिवराज दिल्ली जाते हैं तो उनके ऐजेन्डे में कॉरीडोर का मामला शामिल ही नहीं रहता। जनमंच के जब पिछले साल 21 अगस्त को बन्द का आयोजन किया था जो कि ऐतिहासिक रहा था उसी दिन जिले के भाजपा के तमाम नेता भोपाल रवाना हो गये थे और सर्वदलीय के बजाय खुद ही मामले का हल निकालने का दावा कमरने लगे थे। इस पन्तिनिधिमंड़ल में सांसद के.डी.देशमुख,विधायक नीता पटेरिया,कमल मर्सकोले, शशि ठाकुर,पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुर्दशन बाझल शामिल थे। भोपाल प्रवास के बाद जारी विज्ञप्ति में दावा किया गया था मुख्यमन्त्री ने आवश्वस्त किया हैं कि फोर लेन रोड़ सिवनी से होकर ही जायेगा। आनन फानन में कांग्रेस का भी एक प्रतिनिधिमंड़ल जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह के नेतृत्व में दिल्ली गया था जिसमें विधायक विश्वेश्वर भगत, तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीता ठाकुर, जिला इंकाध्यक्ष महेश मालू, राजकुमार पप्पू खुराना,ओ. पी. तिवारी सहित 35 सदस्य शामिल थे। इस प्रतिनिधि मंड़ल ने केन्द्रीय भू तल परिवहन मन्त्री कमल नाथ और वन एवं पर्यावरण मन्त्री जयराम रमेश से भेंट कर जिले का पक्ष रखा था। जिला कांग्रेस के द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में यह दावा किया गया था कि वन मन्त्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि अगले सप्ताह वन्य प्राणी विशेषज्ञ राजेश गोपाल और सी.ई.सी. के सदस्य फिर सिवनी आयेंगें और जल्द ही इस मामले का हल निकल जायेगा। सितम्बर 2009 के पहले सप्ताह मे जारी की गई इस विज्ञप्ति के बाद आज ना तो जिला इंका ने और ना ही प्रतिनिधि मंड़ल में शामिल नेताओं ने इस बात की सुध ली कि सी.ई.सी. के सदस्य आये कि नहीं। जिले के जन प्रतिनिधियों और केन्द्र राज्य में सत्तासीन इंका और भाजपा के ऐसे निराशा जनक व्यवहार से भारी जनक्रोश फैल रहा हैं। नेताओं के राजनैतिक स्वार्थों के चलते जिला वैसे ही बहुत कुछ खो चुका हैं।पहले लोकसभा और घंसौर विधान सभा गई, बड़ी रेल लाइन आयी नहीं और संभाग भी सिवनी के बजाय छिन्दवाड़ा बनना प्रसतावित हो गया हैं। यदि अभी भी नेता चेते नहीं तो यह जनाक्रोश किस रूप में सामने आयेगा इस पर कुछ भी कहना सम्भव नहीं हैं।
आमानाला जमीन घोटाले की निर्णायक पेशी आज
क्या आरोप सिद्ध होंगें हरवंश एवं अन्य आरोपियों के विरुद्ध?
लखनादौन। न्यायायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के कोर्ट में पेश किये गये परिवाद पत्र में आज सुनवायी होना हैं। उल्लेखनीय है कि फरियादी मो. शाह ने पारिवारिक जमीन बिक्री को लेकर एक परिवाद पत्र पेश किया हैं जिसमें उसका भाई नियाज एवं म.प्र.विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह आरोपी हैं जिनके विरुद्ध मामला पंजीबद्ध कर पुलिस जांच कर रही हैं। पुलिस को आज कोर्ट में अन्तिम प्रतिवेदन प्रस्तुत करना हें। जिसके आधार पर कोर्ट को अपना निर्णय सुनाना हैं। धारा 156 (3) के तहत मेन्डेटरी प्रावधान होने के बाद भी कोर्ट के तीन बार निर्देश देने पर बमुश्किल पुलिस ने हरवंश सिंह एवं उनके पुत्र रजनीश सिह के विरुद्ध मामला कायम किया था। ऐसी परिस्थिति में पुलिस के उसी स्टाफ के द्वारा की जाने वाली जांच और उसके परिणामों को लेकर भारी उत्सुकता व्याप्त हैं।
शंकराचार्य जी 21 से झोतेÜवर में
सिवनी । ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीÜवर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी महाराज का इस वर्ष चातुमाZस्य उनकी तपोभूमि परमहंसी धाम झोतेÜवर मेें होगा। जगद्गुरू शंकराचार्य जी अपने निर्धारित कार्यक्रमानुसार 18 जुलाई को भोपाल पहुंचकर झरनेÜवर आश्रम में 20 जुलाई तक रहेंगे। स्वामी जी 21 जुलाई को वहां से प्रस्थान कर जबलपुर होते हुये झोतेÜवर पहुंचेंगे। फोटो स्वरूपानन्द जी

Sunday, July 18, 2010

संगठन चुनावों की सोनिया और राहुल की धारणा को पलीता लगा रही हैं जिला इंका और हरवंश सिंह
जिला कांग्रेस के चुनाव अधिकारी डॉ. अविनाश जावड़ेकर सिवनी आये और चले भी गये। अब चुनाव तक आयेंगें या नहीं या सीधे अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जायेगीर्षोर्षो इस पर कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। जावड़ेकर के आने की ना तो विज्ञप्ति प्रकाशित की गई और ना ही सार्वजनिक सूचना दी गई। और तो और जिले के कम से कम दो हजार से अधिक उन सुपात्रों को भी इसकी खबर नहीं दी गई जो कि चुनाव लड़ने के लिये पात्र सदस्य हैं। जिले के कांग्रेस के पट्ठेदार हरवंश सिंह अपनों से रायशुमारी करने में लगे हैं। वर्तमान में जिन नामों पर रायशुमारी वे कर रहें हैं उनमें जिला इंका के महामन्त्री द्वय हीरा आसवानी और असलम भाई शामिल है।यदि 20 जुलाई को हरवंश सिंह और उनके पुत्र सेवादल के अध्यक्ष रजनीश सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कोर्ट में खत्म हो जाता हैं तो रजनीश की ताजपोशी इस पद पर हो जाये तो कोई बड़ी बात नही होगी। जानने वालों का तो यह भी मानना हैं कि यदि सामान्य वर्ग से अन्य कोई वरिष्ठ और जुझारू नेता दावेदारी ठोंकता हैं तो हरवंश सिंह आरक्षण के हथियार का उपयोग कर सकते हें। ऐसे में आदिवासी होने पर पूर्व विधायक बेनी परते और महिला होने पर श्रीमती आशा सनोड़िया को जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता हैं। अन्यथा टेस्टेड ओ.के. महेश मालू तो हैं ही। वैसे तो हर वन मन्त्री पेड़ लगाने की अपील करता हें लेकिन यह सरदार सरताज सिंह की असरदार अपील का ही असर हैं कि पूरी जिला भाजपा तन,मन,धन से पेड़ लगाने में लगी हुयी हैं।
चुपचाप आये और गये कांग्रेस चुनाव अधिकारी-
जिला कांग्रेस के चुनाव अधिकारी डॉ. अविनाश जावड़ेकर सिवनी आये और चले भी गये। अब चुनाव तक आयेंगें या नहीं या सीधे अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जायेगी? इस पर कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। कई दिनों से चुनाव अधिकारी के आगमन का इन्तजार करते कांग्रेसियों को निराश होना क्योंकि जब आम कांग्रेसी को यह पता चला कि चुनाव अधिकारी ने बैठक ली तब तक वे सिवनी से जा चुके थे। जावड़ेकर के आने की ना तो विज्ञप्ति प्रकाशित की गई और ना ही सार्वजनिक सूचना दी गई। और तो और जिले के कम से कम दो हजार से अधिक उन सुपात्रों को भी इसकी खबर नहीं दी गई जो कि चुनाव लड़ने के लिये पात्र सदस्य हैं। कांग्रेस के इस चुनाव को लेकर आमतौर पर काफी आशायें बंधीं हुयी थी क्योंकि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी बार बार यह दावा कर रहें थे कि चुनाव और निष्पक्ष होगें। कहीं कहीं तो चुनाव अधिकारियों ने ऐसे भाषण भी दे डाले थे कि अब पदाधिकारी नेताओं के जेब से नहीं वरन कार्यकत्ताZओं के बीच से आयेगेंं। लेकिन सिवनी के हाल देखकर तो ऐसा नहीं लगता कि यह सब कुछ होगा। वैसे तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी कांग्रेस के चेहरे और चाल को बदलने की पूरी कोशिश कर रहें हैं लेकिन कांग्रेस के खोड़ ऐसा होने नहीं देना चाहते क्योंकि इससे उनकी बादशाहत पर उल्टा असर पड़ सकता हैं। आलाकमान के निर्देशों के बाद भी जाहं जिसकी चल रही हैं वह सुधरना ही नहीं चाहता हैं। जिले के एकमात्र इंका विधायक,प्रदेश कांग्रेस और विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह पूरे समय मीटिंग में उपस्थित रहें। फिर निष्पक्षता दिखाने के लिये चुनाव अधिकारी को एक अलग कमरे में बैठा दिया गया। फिर ब्लाक वार अपने ही लोगों को उनसे अलग अलग बुलाकर चर्चा करायी गई। इस चर्चा के दौरान भी जिला इंकाध्यक्ष महेश मालू पूरे समय मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी से ही इस बात का अन्दाज लगाया जा सकता हैं कि कितनी निष्पक्षता बरती गई हैं। कांग्रेसियों के बीच जारी चर्चा को यदि सही माना जाये तो चुनाव अधिकारी से मिलने वाले सभी हरवंश समर्थकों ने यह कह दिया हैं कि जिसे हरवंश सिंह चाहेंगें उसे हम अध्यक्ष स्वीकार करेंगें। समान्य तौर पर कांग्रेस में अभी तक ऐसे प्रस्ताव संसदीय दल या विधायक दल की बैठक में पास होते थे कि नेता के चयन का अधिकार सोनिया गांधी या राहुल गांधी को सौंपते हैं। लेकिन संगठन के चुनावों में ऐसे प्रयास की पहल ना केवल ऐतिहासिक हैं वरन अपने आप उन्हीं के समतुल्य मान लेने के मुगालते पाल लेने के समान
- जिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिये कुछ नाम अब हवा में तैरने लगे हैं। जिले के कांग्रेस के पट्ठेदार हरवंश सिंह अपनों से रायशुमारी करने में लगे हैं। वर्तमान में जिन नामों पर रायशुमारी वे कर रहें हैं उनमें जिला इंका के महामन्त्री द्वय हीरा आसवानी और असलम भाई शामिल है। इनके बारे में काफी लोगों से पूछताछ की गई हैं जिसकी जानकारी भी इन दोनों तक पहुच चुकी हैं। ये दोनों भी बनने के लिये कितने आश्वस्त होगेंर्षोर्षो यह उनके अलाव कोई दूसरा नहीं जान सकता। वैसे तो पहले भी कई मामलों में इनके बारे में राय शुमारी की जाती रही हैं लेकिन वह वहीं तक सीमित रह गई हैं इन्हें मिला कुछ भी नहीं हैं। ऐसा ही यदि इस बार भी हो जाये तो शायद किसी को भी कोई आश्चर्य नहीं होगा। और ऐसे में यदि 20 जुलाई को हरवंश सिंह और उनके पुत्र सेवादल के अध्यक्ष रजनीश सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कोर्ट में खत्म हो जाता हैं तो यदि रजनीश की ताजपोशी इस पद पर हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। जानने वालों का तो यह भी मानना हैं कि यदि सामान्य वर्ग से अन्य कोई वरिष्ठ और जुझारू नेता इस पद के लिये आगे आता हैं या दावेदारी ठोंकता हैं तो हरवंश सिंह आरक्षण के अधिकार का उपयोग कर सकते हें। ऐसे में आदिवासी होने पर पूर्व विधायक बेनी परते और महिला होने पर श्रीमती आशा सनोड़िया को जिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा सकता हैं। दोनों ही हरवंश सिंह के हलये सुविधाजनक रहेंगें। यदि मामला बहुत उलझ गया और कोई रिस्क लेना सम्भव नहीं रहा तो टेस्टेड ओ.के. महेश मालू के सिर पर एक बार फिर ताज पहनाया जा सकता है। हरवंश सिंह की भरसक कोशिश यही रहेगी कि जिला कांग्रेस उनके बाहर ना जाये क्योंकि उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों पर पर्दा डालने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। वर्तमान हालात में सब कुछ इस बात पर निर्भर करीेगा कि 20 जुलाई को कोर्ट में क्या फैसला होता हैं? और उसके पूर्व 19 तारीख से प्रारंभ होने वाले विधानसभा सत्र में हरवंश सिंह के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने पर भाजपा क्या रुख अिख्तयार करती हैंर्षोर्षो
तन,मन,धन से झाड़ गड़ाने जुटी भाजपा
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वैसे तो बरसात में वन विभाग वन महोत्सव मनाकर वृक्षारोपण करता हैं। वन मन्त्री हर आदमी से एक झाड़ लगाने की अपील करते है। ऐसा लगता हैं कि वन मन्त्री सरताज सिंह की अपील का सबसे अधिक असर जिला भाजपा पर ही हुआ हैं। तभी तो कार्यक्रम चाहे स्कूल चलें हम का हो या स्कूल के उदघाटन का या कार्यशाला हो कोई ना कोई भाजपा नेता की झाड़ जरूर गाड़ देता हैं जिसकी फोटो अखबारों में छपी दिखती हैं। वैसे जन जागृति के लिये ऐसे आयोजन राजनैतिक दलासें द्वारा किया जाना प्रशंसनीय होता हैं लेकिन अखबारों में प्रकाशित फोटो में तो सिर्फ नेता जी झाड़ गाड़ते दिखते हें कार्यक्रम में उपस्थित जन तो दिखायी ही नहीं देते जिन्हें जागृत करने का प्रयास किया जाता है। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन अपने हर कार्यक्रम में पेड़ लगाने का कार्यक्रम रख लेते हैं। कार्यक्रम चाहे स्कूल चलें हम का हों या किसी स्कूल के उदघाटन का या किसी कार्यशाला का भाजपा ने झाड़ जरूर गाड़े हैं। मन्त्री गौरी शंकर बिसेन, विधायक नीता पटेरिया, पूर्व मन्त्री डॉ. बिसेन, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर एवं जिला अध्यक्ष सुजीत जैन के झाड़ गाड़ते फोटो अखबारों में प्रकाशित हुये हैे। ऐसा ही एक बडा़ समारोह केवलारी विधानसभा क्षेत्र में भी हुआ जिसमें जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन के अलावा केवलारी से विधानसभा का चुनाव लड़कर हारने वाले डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन भी झाड़ गाड़ने गये थे। वहां काफी भाजपा कार्यकत्ताZ भी उपस्थित थे। अब यह तो डॉ. बिसेन ही जानते होगें कि उन चेहरों में कितने चेहरे ऐसे थे जिन्होंने चुनाव में भाजपा के झाड़ में खाद पानी देने का काम किया था और कितने चेहरे ऐसे हैं जिन्होंने भाजपा के झाड़ का जड़ों में मट्ठा डालने का काम किया था। इस झाड़ लगाने वाले चुनाव में मट्ठा ना डालने का संकल्प ही ले लें तो बहुत होगा। वैसे तो हर वन मन्त्री पेड़ लगाने की अपील करता हें लेकिन यह सरदार सरताज सिंह की असरदार अपील का ही असर हैं कि पूरी जिला भाजपा तन,मन,धन से पेड़ लगाने में लगी हुयी हैं।


Saturday, July 17, 2010

उत्तर दक्षिण कारीडॉर मामले में प्रधानमन्त्री से हस्तक्षेप की मांग
सिवनी।सुप्रीम कोर्ट में लंबित उत्तर दक्षिण कॉरीडोर के मामले में केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सुप्रीम कोर्ट में एक राय पेश करवा कर मामले का शीघ्र निराकरण होने का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह इंका नेता आशुतोष वर्मा ने पंप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी,प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं इंका महासचिव राहुल गांधी से किया हैं।, इंका नेता वर्मा ने फ्ेक्स में लिखा हैं कि समूचे देश में चारों महानगरो और चारों दिशाओं को न्यूनतम लंबाई के मार्गों को जोड़कर ईंधन एवं समय की बचत के लिये प्रधानमन्त्री स्विर्णम चतुर्भुज योजना के तहत एक्सप्रेस हाई वे बनाये जा रहे हैं। इसके तहत कन्याकुमारी से काश्मीर तक बनने वाला उत्तर दक्षिण कॉरीडोर मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से होकर नागपुर से कन्याकुमारी तक बन रहा हैं। यह मार्ग सिवनी जिले में कुरई विकासखंड़ में स्थित पेंच नेशनल पार्क की सीमाओं के बाहर से जा रहा हैं। जिले में यह कॉरीडोर मार्ग लगभग 80 किलोमीटर बन चुका हैं और मात्र तीस किलो मीटर बनना शेष हैं। पत्र में आगे उल्लेख किया गया हैं कि इस कारीडोर के निर्माण को रोकने के लिये एक एन.जी.ओं. वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंड़िया दिल्ली द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उक्त याचिका क्र. 2687-2688/09 दर्ज की गई हैं जो कि विचाराधीन हैं। कोर्ट में प्रस्तुत इस याचिका में भारत शासन के अलावा सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग, राष्ट्रीय राजामर्ग विकास प्राधिकरण एवं नेशनल टाइगर कंजरवंशन अर्थारिटी को पक्षकार बनाया गया हैं एवं कोर्ट में इन सभी के अलग अलग वकील अपना पक्ष रखते हैं। इस याचिका के जवाब में संप्रग शासनकाल के प्रथम कार्यकाल में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण ने शपथ पत्र के साथ जो जवाब दिया था उसमें प्रथम आप्शन के रूप में फ्लाई ओवर(एलीवेटेड हाई वे) और आप्शन दो में वर्तमान एन.एच. के चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया था। सी.ई.सी. की रिपोर्ट के बाद सिवनी के जनमंच नामक संगठन की ओर से इंटरवीनर बनने का आवेदन लगाया गया। इस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एमाइकस क्यूरी श्री साल्वे को यह निर्देश दिया कि वे सी.ई.सी. और एन.एच.ए.आई. के साथ बैठक कर एलीवेटेड हाई वे सहित अन्य विकल्प तलाशने का प्रयास करें। एक बैठक के बाद एन.एच.ए.आई. ने 9 अक्टूबर 2009 को एक शपथ पत्र देकर बैठक में सी.ई.सी. द्वारा आप्शन दो के बारे में सुझाये गये संशोधनों पर अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी हैं लेकिन आप्शन एक के बारे में शपथपत्र में कुछ भी नहीं कहा हैं। इसके बाद संप्रग शासन के दूसरे कार्यकाल में दिनांक 6 नवम्बर 2009 को श्री साल्वे ने कोर्ट में जो अपना नोट प्रस्तुत किया है उसमें यह उल्लेख किया है कि एन.एच.ए.आई. आप्शन एक, जो कि एलीवेटेट हाइ वे का था, के लिये सहमत नहीं हैं क्योंकि उसमें लगभग 900 करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। जबकि ईंधन और समय की बचत के मूल मन्त्र को लेकर बनायी जा रही परियोजना में निर्माण लागत का प्रश्न उठाना ही नहीं चाहिये। इंका नेता वर्मा ने पत्र में अनुरोध किया हैं कि प्रधानमन्त्री कार्यालय से इसमें समन्वय बनाने के लिये निर्देश दिये जाने चाहिये। केन्द्र सरकार के सभी विभागों में राष्ट्रहित को देखते हुये एकमतेन निर्णय लिया जाना चाहिये तथा उसे ही सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार के पक्ष के रूप में रखा जाना चाहिये। कोर्ट में केन्द्र शासन के अलग अलग विभागों की अलग अलग राय होने से सरकार की छवि प्रभावित हो रही हैं।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक बनने वाले इस महामार्ग का निर्धारण क्षेत्रीय कारणो से किया जाना उचित नहीं होगा। इंका नेता ने अनुरोध किया है कि आप ऐसा निर्णय लेने का कष्ट करें ताकि इस कॉरीडोर के मार्ग में कोई परिवर्तन ना हो तथा समय और ईंधन को बचाने के मूल मन्त्र का पालन हो सके।

Wednesday, July 14, 2010

सम सामयिक लेख



जिस सदन का नेता और उपाध्यक्ष ही दागी हो उस सदन के दागी सदस्यों को दंड़ित करने से भला क्या होगा?
दागी और नैतिकता ये दो शब्द इन दिनों मध्यप्रदेश की राजनीति में बहुत अधिक चर्चित हैं। सत्तादल और विपक्ष अपने दाग छिपाने और दूसरे को नैतिकता का पाठ पढ़ाने में व्यस्त हैं। प्रदेश की पूर्व मुख्यमन्त्री उमा भारती की वापसी की राजनैतिक आहटों ने दागियों को मुख्यमन्त्री के खिलाफ एक प्रेशर ग्रुप बनाने की मौका जरूर दे दिया हैं।
हाल ही में प्रदेश के स्वास्थ्य मन्त्री और अटलबिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा के स्तीफे से दागियों को दंड़ित करने की शुरूआत भाजपा में हुयी हैं। लेकिकन इसी आधार पर भाजपा विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह से स्तीफा मांगने या उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात प्रदेश भाजपा के नेता नहीं कह पा रहें हैं जबकि उनके खिलाफ घोखधड़ी जैसे संगीन आरोप में अदालत के निर्देश पर मामला पंजीबद्ध हो चुका हैं। इसमें एक कारण तो यह भी है कि मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह खुद लोकायुक्त के मामले में फंसे हुये हें और भाजपा में भी अनूप मिश्रा के स्तीफे के बाद हाहाकार मचा हुआ हैं। दागियों को खदेड़ने की मुहिम खुद ही लड़खड़ा गई हैं। दागियों को सत्ता से दूर करना प्रारंभ ही राजनैतिक कठनाइयों से भरा दिखायी दे रहा हैं। संभावित दागी मन्त्री भी उमा भारती की वापसी की आड़ में प्रेशर ग्रुप बनते दिखायी देनेेे लगें हैं।
हाल ही में नगरीय प्रशासन मन्त्री एवं पूर्व मुख्यमन्त्री बाबूलाल गौर की विश्वास ना हो तो स्तीफा ले लेने की पेशकश ने प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में हलचल मचा दी हैं। मन्त्री कैलाश विजयवर्गीय और सांसद सुमित्रा महाजन भी उमा समर्थन में खुल कर आ गईं हैं। वैसे भी मन्त्री मंड़ल में दागियों की लंबी चौड़ी फौज हैं। सत्ता में बैठे दागियों का यह कहना भी जायज हैं कि दागियों के विरुद्ध ऐसी ही कार्यवाही संगठन में बैठे दागियों के खिलाफ भी की जाये।
दरअसल उमा भारती के समर्थन में खुल कर की जा रही बयान बाजी उमा का समर्थन कम अपनी कुर्सी बचाने की कवायत अधिक दिखायी दे रही हैं। रतलाम की कार्यकारिणी की बैठक में प्रभारी महासचिव अनन्त कुमार के दिये गये निर्देश के मन्त्री अनूप मिश्रा के स्तीफे के बाद आज तक कोई और स्तीफा लेने में संगठन या सत्ता को सफलता नहीं मिल पायी हैं। इसी दौरान कांग्रेस को भी अपने विधायक एवं विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह के खिलाफ कोर्ट के निर्देश पर धारा 420 सहित कई आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज हो जाने के कारण अपना आक्रामक रुख अिख्तयार करने में कठिनाई हो रही हैं। सिवनी किजले की लखनादौन की एक अदालत में पेश किये जमीन घोटाले के परिवाद में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह उनके पुत्र जिला कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष रजनीश सिंह चपेट में आ गये हैं और दोनों के खिलाफ कोर्ट के निर्देश पर थाने में प्रकरण दर्ज हो गया हैं।
बीते दिनों जब कांग्रेस ने विधानसभा के विशेष सत्र के बहिष्कार का निर्णय लिया था और उसमें विधानसभा उपाध्यक्ष रहते हुये भी हरवंश सिंह ना केवल शामिल हुये थे वरन उन्होंने पूछने पर मीडिया को यह जवाब भी दिया था कि पार्टी उनके लिये पहले हैं फिर उपाध्यक्ष का पद। इस पर भाजपा ने भारी बवाल मचाया था और संसदीय कार्य मन्त्री नरोत्तम मिश्रा ने सदन के यह बात उठाते हुये अध्यक्ष से व्यवस्था की मांग की थीलेकिन विस अध्यक्ष ईश्वादास रोहाणी ने कोई भी व्यवस्था नही दी थी। इसी बीच नव निर्वाचित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा के साथ पूर्व मुख्यमन्त्री कैलाश जोशी और पूर्व प्रदेश संगठन मन्त्री कप्तान सिंह सौलंकी ने राज्पाल से मिल कर विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की थी। इस समूचे प्रकरण में मुख्यमन्त्री शिवराजसिंह चौहान की चुप्पी भी सियासी हल्कों में चर्चा का विषय बनी रही थी। डंपर मामले में लोकायुक्त की चपेट में मुख्यमन्त्री के फंसे रहने के कारण भाजप को दागियों को खदेड़ने में तकलीफ होना स्वभाविक ही हैं। कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमन्त्री के डंपर घोटाले की जांच और प्रदेश व्यापी आन्दोलन चलाने की तवाबदारी हरवंश सिंह पर सौंपी थी। उस पर कांग्रेस आलाकमान को क्या जांच रिपोर्ट पेश की गई यह तो आजतक किसी कों भी पता नहीं हैं लेकिन सम्बंधों में बदलाव कई जगह नोट जरूर किया गया हैं। विस उपाध्यक्ष के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला कोर्ट के निर्देश पर बनने के बाद भी भाजपा में प्रदेश स्तर चुप्पी बनी रही। मुख्यमन्त्री जी इस बार भी चुप रहें और प्रदेश अध्यक्ष झा ने भी इस मामले में इस बार कुछ कहना ठीक नहीं समझा हैं। दागियों के खिलाफ अपनी पार्टी में मुहिम चलाने वाली भाजपा ना जाने विपक्ष के बागी के खिलाफ कुछ बोलने या करने में परहेज कर रही हैं।
कुल मिलकार इन दिनों मध्यप्रदेश में राजनैतिक हालात यह हैं कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने दागियों के दाग छिपाने और दूसरे के दाग दिखाने में मशगल हैं। सभी को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से तो कोई चूक ही नहीं रहा हैं।
आशुतोष वर्मा
मो. 09425174640
09713347840

Monday, July 12, 2010

हरवंश पुलिस और आमानाला का रोचक त्रिकोण
एक आमानाला कांड़ में चालान पेश नहीं : दूसरे में बमुश्किल दर्ज हुआ मामला
सिवनी । एक आमानाला गांव में तत्कालीन सांसद एवं वर्तमान विधायक नीता पटेरिया के साथ उदघाटन को लेकर हुये विवाद में बण्डोल थाने में भाजपा के धरने के बाद इंका विधायक हरवंश सिंह के खिलाफ धारा 307 का मामला पंजीबद्ध किया गया था जिसका आज तक चालान कोर्ट में पेश नहीं हो पाया हैं। एक आमानाला गांव में अभी हाल ही में हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ परिवाद पत्र पेश हुआ जिसमें कोर्ट के तीन बार निर्देश देने के बाद पुलिस ने मामला पजीबद्ध कर जांच में लिया हैं। आमानाला नाम का गांव, इंका विधायक हरवंश सिंह और पुलिस के बीच एक रोचक त्रिकोण बन गया हैं। दोनों ही मामले भाजपा सरकार के कार्यकाल के हैं। आमानाला सिंचाई परियोजना के उदघाटन को लेकर तत्कालीन क्षेत्रीय सान्द एवं विधायक नीता पटेरिया और हरवंश सिंह में अनबन हो गई थी। घोड़े पर सवार हरवंश सिंह को झांसी की रानी बनी नीता पटेरिया ने खूब खरी खोटी सुनायी थी। घटना में हुये पथराव में सांसद की गाड़ी का कांच टूट गये थे जिसमे उनका बेटा बैठा हुआ था। वाहन के चालक को भी चोटें आयीं थीं।सांसद जब बंड़ोल थाने पहुचीं और थाने में वाहन चालक के नाम से रिपोर्ट दर्ज कराने की बात की तो वह आना कानी करने लगा। नीता पटेरिया के फोन पर समूची भाजपा ने बंड़ोल थाने में धरना दिया तब कहीं जाकर अपनी ही सरकार रहते मामला पंजीबद्ध करवा पाये थे। पुलिस ने अपराध क्र. 226/07 धारा 307, 147,148 और 506/बी 34 के अंर्तगत दिनांक 26 दिसम्बर 2007 को दर्ज किया गया था। उस दौरान प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान लोकायुक्त जांच में डम्पर कांड़ में उलझे हुये थे। कांग्रेस आलाकमान ने इसकी जांच और आन्दोलन चलाने के लिये हरवंश सिंह की अध्यक्षता में एक समिति बनायी थी। जिले में भी आन्दोलन हुआ था और कांग्रेसी नेता पप्पू खुराना के डंपर में सवार होकर इंकाइयों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था।बंड़ोल थाने में हरवंश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने जिले में एक संभाग स्तरीय न्याय रैली निकाली जिसमें संभाग के हजारों लोगों ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया था। इसी रैली को डंपर काण्ड के संभागीय आन्दोलन का नाम आलाकमान के सामने दे देने की खबरें भी चर्चित थीं। वैसे भी यह कांड़ विधानसभा चुनाव के पहले का था। 2008 के विधानसभा चुनाव में नीता पटेरिया भी केवलारी क्षेत्र से हरवंश सिंह के विरुद्ध संभावित भाजपा प्रत्याशी थी। लेकिन उन्हें सिवनी से टिकिट मिला और वे जीत भी गईं। विस चुनाव में कुछ ऐसे राजनैतिक समीकरण बने कि आमानाला कांड़ की सुध लेने वाला ही कोई नहीं बचा। दिसम्बर 2007 के मामाले का अभी तक कोर्ट में कोई चालान पेश नहीं हो पाया हैं। भाजपा के नेता भी हाल ही में हरवंश सिंह के खिलाफ जारी विज्ञप्तियों में इस मामले का उल्लेख कर आलोचना तो करते हैं लेकिन वे शायद यह भूल जाते हैं कि प्रदेश में सरकार उनकी ही हैं जिनके इशारों पर ही सब कुछ होता हैं। हाल ही हुये आमानाला गांव के जमीन घोटाले में भी एक परिवाद में हरवंश सिंह और उनके पुत्र आरोपी बन गये हैं। मई 2010 में पेश किये गये इस परिवाद में कोर्ट के धारा 156 (3) के आदेश के बावजूद भी पुलिस ने हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया। कोर्ट के आदेश और मेन्डेटरी प्रावधान होने के बावजूद भी पुलिस ने मामला नहीं बनाया। जब तीसरी बार कोर्ट ने निर्देश दिये तब जाकर पुलिस मामलजा दर्ज कर जांच में लिया हैं। भाजपा ने इस मामले में पूरे जिले को सर पर उठा लिया लेकिन अपनी ही सरकार के रहते पुलिस का ऐसा रवैया क्यों रहा या जिसने कोर्ट के निर्देयाों की अवहेलना की उसे अपने ही राज मेंं सजा नहीं दिला पाये। इस मामले में पुलिस को 20 जुलाई 2010 को कोर्ट में अपना अन्तिम प्रतिवेदन पेश कराना हैं। पिछले तीन सालों में आमनाला गांव पुलिस और हरवंश सिंह के बीच एक रोचक त्रिकोण बना दिखा जिसमें चौथे कोण के रूप में भाजपा मौजूद तो रही लेकिन अपनी सरकार के रहते हुये भी पुलिस से नियमानुसार कार्यवाही तक नहीं करवा पायी हैं। वैसे भी भाजपा और हरवंश सिंह के बीच सांठ गांठ की बात केोई नयी नही हैं। ऐसे हालातों में यदि पुलिस का पलड़ा कहीं झुका दिखायी दे तो भला आश्चर्य का क्या बात हें। सख्ती और निष्पक्षता दिखाने के लिये पूरा जिला जो पड़ा है।
कार्यकारिणी में केवलारी की उपेक्षा राजनैतिक संकेत हैं कि भाजपा की जीतने के लिये कोई रणनीति नहीं
आजकल ऐसा भी होता हैं। पहले अखबारों में यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री फलां स्कूल में बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन करेंगें फिर यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री ने बच्चों के साथ फलां स्कूल में मध्यान्ह भोजन किया और उसकी प्रशंसा की। हमारी मन्त्री जी से अपेक्षा हैं कि अगले प्रोग्राम में वे फिर यही आयोजन रखें लेकिन स्कूल का नाम ऐन वक्त पर बतायें और फिर देखें कि आपके प्रभार के जिले में नौनिहालों को कैसा भोजन मिल रहा हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने प्रदेशाध्यक्ष के अनुमोदन के बाद इस सूची को जारी कर दिया हैं। संख्या के हिसाब से जारी यह कार्यकारिणी हैं तो जम्बो जेट लेकिन इसे सन्तुलित नहीं माना जा रहा हैं। भाजपायी हल्कों में इस कार्यकारिणी को क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरण के हिसाब से असन्तुलित माना जा रहा हैं। आदिवासी वर्ग में दो,हरिजन में 1 नेता को ही पदाधिकारी बनाया गया हैं जबकि अल्पसंख्यक वर्ग से एक भी पदाधिकारी ना बनाया जाना इन वर्गों के प्रति भाजपा की मांसिकता को ही उजागर करता हैं। बहुचर्चित जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। कोर्ट ने एक बार फिर निर्देश देकर पिछली पेशी में सभी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने एवं प्रतिवेदन कोर्ट में देने के लिये 20 जुलाई की पेशी दे दी थी।
मन्त्री जी का चर्चित मध्यान्ह भोजन-
आजकल ऐसा भी होता हैं। पहले अखबारों में यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री फलां स्कूल में बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन करेंगें फिर यह छपता हैं कि प्रभारी मन्त्री ने बच्चों के साथ फलां स्कूल में मध्यान्ह भोजन किया और उसकी प्रशंसा की। होता पहले भी यही था लेकिन स्कूल का नाम पता नहीं होता था। वह मन्त्री जी अचानक तय करके प्रशासन को बताते थे कि आज वे फलां स्कूल में बच्चों के साथ भोजन करेंगें और जब अचानक वहां जाकर भोजन करते थे तो यह पता चलता था कि बच्चों को कैसा भोजन परोसा जा रहा हैं। लेकिन पहले से पता होने पर सब कुछ प्रायोजित हो जाता हैं। हमारा यह कहने का आशय बिल्कुल भी नहीं हैं कि साल भर बच्चों को घटिया भोजन ही परोसा जाता हैं। लेकिन चेकिग करने का यह तरीका तो बिल्कुल भी सही नहीं कहा जा सकता हैं। ऐसा ही इस बार प्रभारी मन्त्री के भ्रमण के दौरान हुआ। अखबारों में समाचार छपा कि मन्त्री जी बच्चों के साथ आमाझिरिया स्कूल में मध्यान्ह भोजन करेंगें। मन्त्री जी ने लाव लश्कर के साथ जाकर वहां भोजन भी किया। उसका भी समाचार प्रकाशित हुआ और मामला खत्म हो गया। हमारी मन्त्री जी से अपेक्षा हैं कि अगले प्रोग्राम में वे फिर यही आयोजन रखें लेकिन स्कूल का नाम ऐन वक्त पर बतायें और फिर देखें कि आपके प्रभार के जिले में नौनिहालों को कैसा भोजन मिल रहा हैं।
भाजपा कार्य.:जम्बोजेट पर बेलेंस नहीं-
जिले की बहुप्रतीक्षित भाजपा कार्यकारिणी की घोषणा अन्तत: हो ही गई। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन ने प्रदेशाध्यक्ष के अनुमोदन के बाद इस सूची को जारी कर दिया हैं। संख्या के हिसाब से जारी यह कार्यकारिणी हैं तो जम्बो जेट लेकिन इसे सन्तुलित नहीं माना जा रहा हैं। भाजपायी हल्कों में इस कार्यकारिणी को क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरण के हिसाब से असन्तुलित माना जा रहा हैं। इसके चयन का आधार योग्यता या वरिष्ठता ना होकर नेताओं के समर्थकों के हिसाब से किया गया हैं। इससे नेता भले ही सन्तुष्ट हो जाये लेकिन जमीनी तौर असन्तोष के स्वर सुनायी देने लगे हैं। चूंकि भाजपा के अधिकांश नेताओं का रहना सिवनी नगर में ही हो रहा हैं इसलिये इसमें नगर की भरमार हैं। लगभग 150 नेताओं की घोषित कार्यकारिणी में 63 शहर के नेता शामिल हैं। अध्यक्ष सहित 8 उपाध्यक्षों में से 2,तीन महामन्त्रियों में से 1, मन्त्रियों में 7 में से 2, कोषाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी के अलावा 71 कार्यकारिणी सदस्यों में से 33 तथा आमन्त्रित सदस्यों में 59 में से 21 नेता शहर के रहने वाले हैं। मुस्लिमों की संख्या भी अगुलियों में गिनने लायक हैं।भाजपा के वोट बैंक मानी जाने वाली जातियों को भी उचित अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया हैं। जिले के विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से भी कार्यकारिणी असन्तुलित ही नज़र आ रही हैं। जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से सिर्फ केंवलारी क्षेत्र में भाजपाप हारी थी जहां से विस उपाध्यक्ष हरवंश सिह लगातार चौथी बार जीते हैं। इस कार्यकेारिणी से भी ऐसा राजनैतिक सन्देश नहीं जा रहा हें कि भाजपा इस क्षेत्र से चुनाव जीतने की कोई गम्भीर रणनीति बना रही हैं। केवलारी क्षेत्र के महामन्त्री रहे डॉ. प्रमोद राय को भी सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया हैं। किसी नये नेता को भी महामन्त्री बनाया गया होता तो बात कुछ और होती। भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर हरवंश से सांठ गांठ के आरोप लगाते रहें हैं। पर इस सबसे भाजपा नेताओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता हैं। तभी तो नव घोषित कार्यकारिणी में केवलारी क्षे से 1 उपध्यक्ष,3 मन्त्री सहित कुल 29 नेता शामिल किये गये हैं। जबकि सबसे अधिक सिवनी विस के नेताओं का ही बोलबाला हैं। लगातार पांच बार से जीतने वाले इस क्षेत्र से भाजपा ने 2 उपाध्यक्ष,1 महामन्त्री,3 मन्त्री सहित कुल 72 नेताओं को लिया गया हैं। वैसे भी आग्रामी विस चुनाव लड़ने का सपना भी सबसे अधिक इसी क्षेत्र से भाजपा नेता पाले हुए हैं क्योंकि इस क्षेत्र से पिछले चुनाव में भाजपा ने अपने विधायक नरेश दिवाकर की टिकिट काट कर एक मिसाल पेश कर दी हैं। इसलिये नेताओं की आस अभी से बढ़ी दिखायी दे रही हैं इसी का परिणाम यह हैं कि इस क्षेत्र के अपने समर्थकों को हर भाजपा नेता ने कार्यकारिणी में शामिल करवाया हैं।पांच बार से जीतने वाले बरघाट विस क्षेत्र से भी भाजपा ने 2 उपाध्यक्ष, 2 महामन्त्री सहित 20 नेताओं को शामिल किया हैं जबकि दो बार से लगातार जीतने वाले लखनादौन विस क्षेत्र से भाजप की कार्यकारिणी में 3 उपध्यक्ष, 2 मन्त्री सहित 28 नेताओं को शामिल किया गया हैं। पदाधिकारियों के रूप में
आदिवासी,हरजिन एवं अल्पसेंख्यक वर्ग की उपेक्षा भी दिखायी दे रही हैं। आदिवासी वर्ग में दो,हरिजन में 1 नेता को ही पदाधिकारी बनाया गया हैं जबकि अल्पसंख्यक वर्ग से एक भी पदाधिकारी ना बनाया जाना इन वर्गों के प्रति भाजपा की मांसिकता को ही उजागर करता हैं। भाजपा की यह कार्यकारिणी युवा ऊर्जावान नेतृत्व से तो लबालब भरी हैं लेकिन इन सारी विसंगतियों के साथ भारी गुटबाजी के रहते हुये संगठनात्मक गतिविधियों को चलाना अध्यक्ष सुजीत जैन के लिये चुनोती ही साबित होगी।
जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में -
बहुचर्चित जमीन घोटाले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। कोर्ट ने एक बार फिर निर्देश देकर पिछली पेशी में सभी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने एवं प्रतिवेदन कोर्ट में देने के लिये 20 जुलाई की पेशी दे दी थी। पेशी बढ़ने के बाद पुलिस ने उसी दिन विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह एवं उनके पुत्र रजनीश सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करके दूसरे ही दिन कोर्ट में जांच करने की अनुमति का आवेदन लगाकर अनुमति ले ली हैं। इस तरह इस मामले में गेन्द एक बार फिर पुलिस के पाले में आ गई हैं। जनचर्चा में अब यही हैं कि कैसी पुलिस जांच होगी और क्या मामला बनेगा इसे लेकर अटकलें लगायी जा रहीं हैं। यह भी चर्चा है कि कोर्ट के निर्देश और मेन्डेटरी प्रावधान हाने के बाद भी जिस चौकी प्रभारी ने मामला दर्ज नहीं किया था उसके खिलाफ इस संवेदनशील मामलें में भी कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई हैं और वह अभी भी वहीं चौकी प्रभारी हैं।इसके बाद हरवंश सिंह ने पत्रकार वार्ता में जो प्रेस विज्ञप्ति बांटी हैं उसमें यह लिखा हुआ हैं कि,Þअन्वेषण में जो भी तथ्य आवेंगें उनके अनुसार पुलिस को न्यायालय में आरोप पत्र खारिजी अथवा खात्मा प्रस्तुत करना होगा।ß उनका यह कथन इस बात का प्रमाण हैं कि खारिजी या खात्मे केे लिये वे जांच शुरू होने से पहले ही आश्वस्त हैं। ऐसा क्यों हैं यह तो वे स्वयं ही जानते होंगें। वैसे भी अभी तक पूर्व में हरवंश सिंह पर धोखा धड़ी के जो दो आरोप उन पर लगे थे उनमें वे किसी भी मामले में कोर्ट द्वारा दोष मुक्त नहीं हो पाये थे। एक मामला फरियादी की मौत के कारण खत्म हो गया था और एक मामले का पता ही नहीं हैं कि वह कहां गया?

Monday, July 5, 2010

मीडिया को मिस गाइड किया हरवंश ने ?
सिवनी। आमानाला जमीन घोटाले में अपना पक्ष रखने के लिये विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह द्वारा बुलायी गई प्रेस वार्ता और वितरित किये गये दस्तावेज इन दिनों मीडिया में चर्चा का विषय बने हुये हैं कि हरवंश सिंह ने मीडिया को मिसगाइड किया हैं। प्रेस कांफ्रेंस में इंका विधायक द्वारा बांटे गये दस्तावेजों भ्रामक बताया जा रहा हैं। उन्होंने अपना पक्ष जो लिखित में रखा हैं उसमें भले ही इस बात का उल्लेख हो कि कोर्ट ने शपथ पूर्वक लिये गये परिवादी के कथ को निरस्त कर दिया हैं लेकिन उनकी पूरी सफायी उसी बयान के आधार पर दी गई हैं। हालांकि परिवादी ने हरवंश सिंह द्वारा उल्लेखित किये गये तथ्यों के अलावा भी बहुत कुछ बोला हैं जो हरवंश सिंह द्वारा पेश की गई सफायी की धज्जियां उठा देता हैं। परिवादी ने बयान में तीसरे पेज की कंड़िका 7 में यह भी कहा हैं कि Þमैंने अभियुक्त हरवंश सिंह और रजनीश सिंह को कभी नहीं देखा।मैंने अभियुक्त हरवंश सिंह और रजनीश सिंह को सामाजिक सम्मेलन में देखा हैं।मेरी अभियुक्तगणों से कभी व्यक्तिगत बात या बैठक नहीं हुयी। मेरी हरी महाराज ने टेलीफोन पर अभियुक्त क्रमांक 2 रजनीश सिंह से बात करायी थी। मेरी बात हरी महाराज ने लखनादौन न्यायालय के प्रांगण में मोबाइल से बात करायी थी। हरी महाराज ने फोन लगाकर मुझे कहा था कि रजनीश सिंह से बात कर लो उसी आधार पर बता रहा हूंं कि मेरी रजनीश सिंह से बात हुयी हैं।ß यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि हरी महाराज ना केवल विवादास्प्द जमीन का खरीददार हैं वरन हरी महाराज का भाई भी है जो कि हरवंश सिह के यहां काम करता हैं। परिवादी ने पेज क्र. 4 की कंड़िका 8 में यह भी बोला हैं कि,Þरजनीश सिंह ने मुझसे कहा था कि बैठकर फैसला कर लेते हैेंं। रजनीश सिंह ने मुझसे कहा था कि अन्य सभी सह खातेदारों के बैठकर बात कर लो। ऐसा करते करते लगभग तीन माह गुजर गये।किन्तु कोई भी सह खातेदार ने मेरे साथ बैठक नहीं की। ß परिवादी से खरीददार के भाई के मार्फत रजनीश सिंह की यह बातचीत तथा मूामला निपटा लेने की बात कहना क्या यह प्रमाणित नहीं करता हैं कि इस जमीन के सौदे और उसमें चल रहें विवादों से हरवंश सिंह और उनके परिवार का गहरा सम्बंध हैं। विवादास्यद जमीन का खरीददार हरवंश सिंह के यहां कार्यरत कर्मचारी का भाई हैं। हरवंश सिंह का कर्मचारी विवाद सुलझाने के लिये रजनीश सिंह से परिवादी की बात कराता हैं। रजनीश मामला निपटा देने का आश्वासन देते हैं। परिवादी तीन माह तक रास्ता देखता है। फिर परिवादी का नाश्ता करने बर्रा जाना अपने आप में ही बहुत कुछ कह जाता हैं। ऐसी परिस्थिति में हरवंश सिंह का यह दावा करना कि उनका या उनके परिवा का इस मामले में कोई लेना देना नहीं हैंर्षोर्षो समझ से परे हैं। इन्हीं सब तथ्यों को लेकर मीडिया में इन दिनो यह चर्चा हो रही हैं कि हरवंश सिंह ने मीडिया को मिस गाइड किया हैं।
इन सवालों के जवाब देगा कौन?
1 क्या फरियादी ने अपने बयान में यह नहीं कहा है कि उसकी फोन पर हरी महाराज ने रजनीश से बात करायी थी और रजनीश ने सभी खातेदारों को साथ बिठाल कर मामला निपटा देने की बात कही थी?
2 क्या तीन महीने तक रजनीश के मामला ना निपटा पाने के बाद परिवादी ने परिवाद पेश किया हैं?
3 क्या परिवादी ने जब हरवंश सिंह के यहां नाश्ता किया था तो इस सौदे या केस के बारे में कोई बात नहीं हुयी थी?
4 क्या विवादास्पद जमीन खरीदने वाला हरवंश सिंह के स्टाफ के कर्मचारी का रिश्तेदार हैं?
5 क्या चार लाख रूपये से अधिक की जमीन खरीदने की आर्थिक स्थिति क्रेता रविनारायण शर्मा की है?
6 क्या हरवंश सिंह ने मीडिया को गुमराह करने के लिये फरियादी के उस बयान की प्रति बांटी हैं जिस बयान को कोर्ट खुद निरस्त कर चुकी हैं?
7 क्या इस तथ्य को छिपाने के लिये ही हरवंश सिंह ने 18 जून की कोर्ट की आर्डर शीट की कापी प्रेस को नहीं दी जिसमें यह उल्लेख हैं कि कोर्ट फरियादी के बयान को निरस्त करती हैं?
8 हरवंश सिंह ने कहा कि धारा 156(3) में अपराध पजीबद्ध करने के बाद जांच हो पाती हैं तो क्या बिना अपराध दर्ज किये सुनवारा चौकी प्रभारी द्वारा कोर्ट में दिया गया प्रतिवेदन अमान्य है?
9 भाजपा के राज में चौकी प्रभारी द्वारा नियम विपरीत प्रतिवेदन किसके प्रभाव में दिया गया जिसमें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह को निर्दोष बताया गया है?
10 क्या हरवंश सिंह का यह कहना कोर्ट की अवमानना नहीं हैं कि,Þइस तरह मैं यह कह सकता हूं कि मेरे विरुद्ध विपक्ष द्वारा साजिश की गई है और मुझे राजनीतिक रूप से क्षति पहुचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही करायी गई हैं।ß

Sunday, July 4, 2010

धारा 420 के रजिस्टर्ड आरोपी बन नगरागमन पर हरवंश सिंह के स्वागत होने को आखिर क्या कहा जा सकता हैं?
जिले में भाजपा के संगठनात्मक चुनाव हुये काफी समय बीत गया हैं लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाये हैं। कहा जा रहा है कि सिवनी विधायक नीता पटेरिया के प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हीं की आपत्ति पर इस सूची को अनुमोदन नहीं मिल पा रहा हैं। प्रदेश की भाजपायी राजनीति में मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की आंख की किरकिरी बन चुके प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगना शुरू हो गई हैं। शिवराज के राजनैतिक गुरू सुन्दरलाल पटना की अनुयायी राज्यसभा सदस्या आदिवासी नेत्री अनुसुइया उइके के दौरे लगना चालू हो गये हैं।जिले और प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में इन दिनों आमानाला जमीन घोटाले के चर्चे हैं जिसमें विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह लपेटें में आ गये हैं। इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस लेने जब हरवंश सिंह धारा 420 के आरोपी बन कर सिवनी शहर में आये तो उनके समर्थकों ने ढ़ोल बाजे, आतिशबाजी, फूलमालाओं से उनका ऐसा स्वागत किया मानो वे कोई ऐसी जंग जीत कर आयें हों जिससे समूचे जिले की छाती गर्व से फूल गई हो।भाजपा यदि आरोपियों के चुंगल से सही में संवैधानिक पदो को बचाना चाहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपाध्यक्ष के विरुद्ध संसदीय कार्यमन्त्री अविश्वास प्रस्ताव लायें और सदन में कार्यवाही करें जो कि वैधानिक मंच हैं। अन्यथा इस बयानबाजी और राज्यपाल को ज्ञापन देने से कुछ होने वाला नहीं हैं।
जिला कार्यकारिणी की घोषणा में विलंब चर्चित-
जिले में भाजपा के संगठनात्मक चुनाव हुये काफी समय बीत गया हैं लेकिन जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन अपनी कार्यकारिणी नहीं बना पाये हैं। बताया तो यह जा रहा हैं कि वे अपनी कार्यकारिणी की सूची भोपाल भेज चुके हैं लेकिन वहां से अभी मंजूरी नहीं मिल पायी हैं। कहा जा रहा है कि सिवनी विधायक नीता पटेरिया के प्रदेश महिला मोर्चे के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हीं की आपत्ति पर इस सूची को अनुमोदन नहीं मिल पा रहा हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष सुजीत जैन भाजपा की स्थानीय राजनीति में पूर्व विधायक नरेश दिवाकर के खेमे के माने जाते हैं।नीता नरेश सम्बंध जग जाहिर हैं कि दोनो एक दूसरे को फंटी आंख भी नहीं सुहाते हैं। हालांहिक अभी अख्बारों में ऐसे समाचार भी प्रकाशित हुये हैं कि जिले की सूची को अनुमोदन मिल चुका है लेकिन अभी वह सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसका क्या कारण है यह तो अभी कहा नहीं जा सकता लेकिन यदि नीता का ज्यादा हस्तक्षेप हो गया होगा तो उसे ठीक कराने के प्रयास अवश्य ही किये जायेंगें।कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में अनुसुइया के दौरों की चर्चा- प्रदेश की भाजपायी राजनीति में मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान की आंख की किरकिरी बन चुके प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता फग्गनसिंह कुलस्ते के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगना शुरू हो गई हैं। शिवराज के राजनैतिक गुरू सुन्दरलाल पटना की अनुयायी राज्यसभा सदस्या आदिवासी नेत्री अनुसुइया उइके के दौरे लगना चालू हो गये हैं। भाजपाइयों का ही कहना हैं कि पहले कभी भी उनको आमन्त्रित करते थे तो वे टाल जातीं थीं लेकिन अभी हाल ही में उन्होंने सिवनी और लखनादौन का दौरा कर सभी को चौंका दिया हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि अनुसुइया उइके और फगग्न सिंह के भाई रामप्यारे दोनों ही पहले लखनादौन से भाजपा की टिकिट पर विधानसभा चुनाव लड़कर हार चुके हैं। वैसे तो भाजपा आलाकमान ने कुलस्ते को अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया हैं लेकिन वे पहले भी इस पद पर रह चुकें हें और उनकी अपेक्षा कुछ और थी जो पूरी नहीं हुयी हैं। इसके विपरीत शिवराज समर्थक नरेन्द्र तोमर को राष्ट्रीय महामन्त्री बना दिया गया हैं। कुलस्ते जैसे वरिष्ठ आदिवासी नेतृत्व की अनदेखी को वे और उनके समर्थक बरदाश्त नहीं कर पा रहें हैंं।
हरवंश सिंह के आरोपी बनने से सियासी हल्कों में हलचल
जिले और प्रदेश के राजनैतिक हल्कों में इन दिनों आमानाला जमीन घोटाले के चर्चे हैं जिसमें विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह लपेटें में आ गये हैं। इलाके के जमीन्दार मरहूम फैलकूस मोहम्मद साहब ने फकीर को खैरात में कुछ जमीन दी थी। कुछ जमीन फकीर परिवार ने मेहनत करके खरीदी थी। इसी फकीर परिवार के वारसानों में से कुछ ने इस जमीन में से लगभग 21 एकड़ जमीन 4 लाख 50 हजार रुपये में बेच दी थी। इसी फकीर परिवार के एक वारसान मो. शाह ने अपने भाई नियाज अली और हरवंश सिंह तथा उनके पुत्र रजनीश सिंह के विरुद्ध परिवाद पेश किया था। कोर्ट ने एक महीने का समय देकर भा.दं.प्र.सं. की धारा 156 (3) के आदेश पारित कर पुलिस को निर्देश दिये थे। मामला धनौरा थाने की पुलिस चौकी सुनवारा के अंर्तगत था जो कि हरवंश सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता हैं। चौकी प्रभारी ने एक महीने बाद एक आरोपी नियाज अली के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया हैं तथा शेष दो आरोपियों,हरवंश सिंह और रजनीश सिंह, के विरुद्ध साक्ष्य ना होने से मामला दर्ज नहीं किया गया। जबकि 156(3) के अंर्तगत दिये गये आदेश में पहले मामला पंजीबद्ध करना पड़ता फिर जांच कर प्रतिवेदन में खात्मा करने या फिर मामला चलाने की बात की जाती हैं लेकिन सुनवारा चौकी प्रभारी नें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह के खिलाफ बिना मामला दर्ज किये जांच प्रतिवेदन सौंप दिया था। इस पर फरियादी के बयान भी कोर्ट में दर्ज कर लिये गये थे। लेकिन जब यह पाया गया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन किये बिना चौकी प्रभारी ने जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया हैं वह अन्तिम प्रतिवेदन नहीं हैं अत: कोर्ट ने स्वयं ही परिवादी के दर्ज किये गये बयान को निरस्त कर दिये। और दस दिन बाद अन्तिम प्रतिवेदन पेश करने को कहा था। इसके बाद भी धनौरा थाने ने शेष दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज ना करके मात्र डायरी में नाम शामिल कर जांच के लिये कोर्ट से 20 जुलाई तक का समय मांगां था। पुलिस का यह कदम विधिमान्य प्रक्रिया के अनुसार नहीं था। इससे ऐसा लगा था कि मानो प्रभावशाली आरोपियों को न्यायालयीन राहत लेने के लिये समय दिलाने के प्रयास का एक हिस्सा समझा जा रहा हैं। फिर ना जाने ऐसा क्या हुआ कि रातों रात उसी दिन पुलिस ने ना केवल मामला दर्ज कर लिया वरन जिला पुलिस अधीक्षक ने भी मीडिया में इसे स्वीकार किया कि हरवंश सिंह के खिलाफ मामला पंजीबद्ध हो गया हैं। मामला दर्ज होने की पुष्टि होते ही मानो बवाल आ गया। तमाम भाजपा नेताओं ने नैतिकता के आधार पर विस उपाध्यक्ष पद से स्तीफा मांगना चालू कर दिया। इलेक्ट्रानिक और पिं्रट मीडिया में मामले के तूल पकड़ लेने के कारण हरवंश सिंह ने अपना पक्ष रखने के लिये प्रेस कांफ्रेंस बुलायी। प्रेस कांफ्रेंस लेने जब हरवंश सिंह धारा 420 के आरोपी बन कर सिवनी शहर में आये तो उनके समर्थकों ने ढ़ोल बाजे, आतिशबाजी, फूलमालाओं से उनका ऐसा स्वागत किया मानो वे कोई ऐसी जंग जीत कर आयें हों जिससे समूचे जिले की छाती गर्व से फूल गई हो। वैसे इस केस में कुछ चीजे तो वास्तव में देखने लायक हुयी हैं। कोर्ट के तीन तीन बार निर्देश देने के बाद भी पुलिस ने हरवंश और उनके पुत्र के विरुद्ध प्रकरण दर्ज नहीं किया जो कि कानूनन करना चाहिये था। पुलिस की लचर कार्यवाही के सूत्र सुनवारा चौकी से जुड़े हैं या धनौरा थाने से,जिले से जुड़े हैं या कमिश्नरी और राजधानी से यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन सूत्रों का कहना हैं कि हरवंश सिंह के समर्थक यह दावा कर रहें हैं कि उनके नेता का इस मामले में बाल भी बांका नहीं होगा। इस मामले में यदि वे पूरी तरह आश्वस्त नहीं होते तो उपाध्यक्ष पद के साथ साथ विधायक पद से भी स्तीफा देने की घोषणा वे कभी नहीं करते। उनके समर्थको का तो यह भी दावा हैं कि हरवंश सिंह की भाजपा सरकार में तूती बोलती हें उनके खिलाफ पुलिस प्रतिवेदन आ ही नहीं सकता। पुलिस को यदि मन से सही जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करना होता तो क्या पहले से ऐसी कार्यवाही की जातीर्षोर्षो अदालतें तो फैसला अपने सामने आने वाले तथ्यों पर ही निर्णय देतीं है। भाजपा यदि आरोपियों के चुंगल से सही में संवैधानिक पदो को बचाना चाहती हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपाध्यक्ष के विरुद्ध संसदीय कार्यमन्त्री अविश्वास प्रस्ताव लायें और सदन में कार्यवाही करें जो कि वैधानिक मंच हैं। अन्यथा इस बयानबाजी और राज्यपाल को ज्ञापन देने से कुछ होने वाला नहीं हैं।

आरोप सिद्ध होने पर ही इस्तीफा दूंगा-हरवंश सिंह
. न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद से मेरा व मेरा पुत्र कोई लेना देना नहीं .
. सामाजिक राजनैतिक क्षति पहुंचाने रची गई एक सोची समझी साजिश.
सिवनी । न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी लखनादौन के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में मुझ पर एवं मेरे पुत्र पर जो आरोप लगाये गये हैं वे पूर्णत: निराधार एवं सौ प्रतिशत झूठे हैं। यदि न्यायालय में दोष सिद्Ëा हो जाता है तो म्ौं विधानसभा उपाध्यक्ष पद से ही नहीं विधायक पद से भी इस्तीफा दे दूंगा।
प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष ठा. हरवंश सिंह ने यह घोषणा माननीय न्यायालय में उनके व उनके पुत्र के विरूद्Ëा प्रस्तुत परिवाद पर अपना स्पष्टीकरण देने आयोजित पत्रकार वाताZ में करते हुये कहा कि समाचार पत्र और इलेक्टिªॉनिक मीडिया में मेरे और मेरे पुत्र द्वारा जमीन खरीदी के मामले में उल्लेख करते हुये तरह तरह के समाचार प्रकाशित हो रहे हैंं इस सम्बंध में न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपियों के आधार पर यह जानकारी देना चाहता हूं कि 18 जून को ग्राम आमाना निवासी मोह. शाह आत्मज इिम्तयाज खान ने माननीय न्यायालय श्री ए एस सिसोदिया न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी लखनादौन के समक्ष एक मिथ्या एवं आधारहीन परिवाद नियाज अली तथा मेरे एवं मेरे पुत्र रजनीश सिंह के विरूद्Ëा प्रस्तुत किया। परिवाद के आधार पर श्रीमान न्याियक दण्डाधिकारी द्वारा अन्वेषण का आदेश पुलिस थाना धनौरा को दियाग या और रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु 18 जून 2.1. की तिथि निर्धारित की गई, चूंकि माननीय न्याियक दण्डाधिकारी के द्वारा अन्वेषण के लिये जो परिवाद भेजा गया था उसमें घटना स्थल, घटना का समय एवं दिनांक इत्यादि का विवरण नहीं था कारण जिस दस्तावेज के सम्बंध में धोखा देना कहा गया था वह संलगन् नहीं था इसलिए विशिष्टियां एकत्र करने के लिये पुलिस ने प्रारंभिक जांच की। पुलिस की प्रारंभिक जांच एवं शिकायतकताZ के कथनों में यह पाया कि मोह. शाह और उनके भाई नियाज अली के साथ विवाद एवं मारपीट हुई है, परन्तु पुलिस जांच में मेरे और मेरे पुत्र रजनीश सिंह का इस अपराध में कहीं कोई समावेश होना नहीं पाया गया तथा चौकी प्रभारी सुनवारा के द्वारा 18 जुन 2.1. को न्यायालय के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
श्री सिंह ने बताया कि माननीय न्याियक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी के द्वारा शिकायत कताZ मोह. शाह से शपथ पर लंबी पूछताछ की गई तथ्ज्ञा उसके कथन लिपिबद्Ëा किये गये। मोह शाह ने अपने शपथ पर दिये गये न्यायालयीन कथनों में यह स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके और अन्य सहखातेदारों के बीच जमीन का बंटवारा हो गया है और वह 5 एकड भूमि के अलग कब्जे में है, उसने यह भी स्वीकार किया है कि उसने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद मेंं किसी इकरारनामें का जिक्र नहीं किया है अपने बयान में उसने यह स्पष्ट किया है कि उसका विवाद उसके भाई नियाज अली से है न कि मुझसे या मेरे पुत्र रजनीश सिंह से है।
शिकायतकताZ मोह शाह के अनुसार उसका वाद विवाद एवं लडाई झगडा व मारपीट उसके भाई नियाज अली के साथ हुआ था जिसकी रिपोर्ट मोह शाह द्वारा पुलिस चौकी सुनवारा में दजZ की गई। मोह शाह ने अपने न्यायालयीन कथनों में यह भी स्पष्ट किया है कि मुझसे व मेरे पुत्र रजनीश से कभी भी उसकी कोई व्यक्तिगत बातचीत नहीं हुई और न कभी भी म्ौंने और मेरे पुत्र ने उसे कभी भी कोई धमकी दी है उसने यह भी स्वीकार किया है कि उसने मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा कोई पुलिस रिपोर्ट नहीं की है। मोह शाह के बयान के अनुसार म्ौंने और मेरे पुत्र रजनीश सिंह ने मोह शाह को छोड उसके अन्य सह खातेदारों से न तो कोई इकरारनामा लिखाया है और न ही कोई भूमि का विक्रय पत्र लिखवाया है।
शिकायतकताZ मोह शाह के न्यायालय में दिये गये कथनों से स्पष्ट है कि हमारे द्वारा कोई विक्रय पत्र इकरारनामा या कोई भी रसीद नहीं लिखाई गई है और नही हमने कोई सौदा किया है जब कोई रजिस्ट्री इकरारनामा या रसीद ही अिस्तत्व में नहीं है तो धोखा देने का कोई प्रÜान् ही उत्पé नहीं होता है और यदि जन सामान्य के पास एैसा कोई दस्तावेज या कोई मौखिक साक्ष्य उपलब्ध हो तो वह उसे प्रकट कर सकता है। पूर्व में पुलिस द्वारा की गई विवेचना और मोह शाह के न्यायालयीन कथनों से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्Ëा विपक्ष द्वारा सिाजश की गई है और मेरे विरूद्Ëा राजनैतिक रूप से क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही कराई गई है। म्ौंने और मेरे पुत्र ने मोह शाह को न तो कोई धोखा दिया है और न ही उनको कभी डराया धमकाया गया है जो जमीन की खरीदी बिक्री बताई जा रही है उससे भी मेरा और मेरे परिवार का कोई लेना देना नहीं है उक्त परिवाद के तथ्य मिथ्या व झूठे हैं मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा विरोधियों द्वारा तोड मरोडकर मिथ्या तथ्य आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का हमेशा की तरह किया गया कुित्सत प्रयास है जिससे कि मेरी राजनैतिक एवं सामाजिक छवि धूमिक की जा सके।
पुलिस ने न्यायालय के द्वारा दिये गये आदेश 18 मई 2.1. के परिपालन में प्रारंभिक जांच की और इस जांच में पुलिस ने यह पाया कि मेरे और मेरे पुत्र रजनीश के विरूद्Ëा कोई अपराध नहीं बनता है तथा नियाज अली के विरूद्Ëा प्रथम दृष्टया अपराध पाये जाने पर पुलिस ने नियाज अली के विरूद्Ëा अपराध पंजीबद्Ëा किया तथा न्यायालय में 18 जून 2.1. को अन्तिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया इस प्रतिवेदन के अवलोकन के उपरान्त माननीय न्यायालय द्वारा शिकायतकताZ मोह शाह को सुना गया और उसके कथन लेखबद्Ëा किये गये इस प्रक्रम में माननीय न्यायालय ने यह पाया कि अन्तिम प्रतिवेदन न्यायालय के आदेशानुसार नहीं है इसलिये उन्होंने मोह शाह के कथन निरस्त कर पुलिस थाना धनौरा को सभी आरोपियों के विरूद्Ëा प्राथमिकी दजZ कर अन्वेषण उपरान्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश दिये गये तब मुझे समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ कि पुलिस ने न्यायालयीन आदेश के परिपालन में मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा प्रकरण पंजीबद्Ëा कर विवेचना में लिया है। विदित हो कि परिवाद प्रकरणों में पुलिस को जो अपराध दजZ कर अन्वेषण के आदेश दिये जाते हैं उसके पूर्व माननीय न्यायालय द्वारा कोई जांच नही ंकी जाती है बल्कि अपराध पंजीबद्Ëा होने के बाद पुलिस द्वारा विवेचना की जाती है और पुलिस थाना धनौरा ने इस न्यायालयीन आदेश के परिपालन में ही अपराध पंजीबद्Ëा कर अन्वेषण प्रारंभ किया गया है। अन्वेषण में जो भी तथ्य आवेंगे उनके अनुसार पुलिस को न्यायालय में आरोप पत्र खारिजी अथवा खात्मा प्रस्तुत करना होगा। मेरे और मेरे पुत्र के विरूद्Ëा जो तथ्य अभी तक आये हैं उनसे स्पष्ट है कि हम लोग पूर्णत: निर्दोष हैं।
श्री सिंह ने बताया कि मामला अभी न्यायालयीन प्रक्रिया में है और मुझे सम्मानीय न्यायालय और न्यायालयीन प्रक्रिया पर पूर्ण रूपेण विÜवास है भविष्य में आम जनता के समक्ष इस प्रकरण की सारी सच्चाई सामने आ जायेगी। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों के लोग मुझसे जो त्यागपत्र की मांग कर रहे हैं उसका एक मात्र उद्देश्य मुझे बदनाम करना और बयानबाजी कर अपने आप को सुर्खियों में लाना है। यदि न्यायालय द्वारा मुझे दोषी करार दिया जाता है तो म्ौं घोषणा करता हूं कि म्ौं ना केवल विधानसभा के उपाध्यक्ष पद वरन विधायक पद से भी इस्तीफा दे दूंगा। म्ौंने कभी कोई एैसा काम नहीं किया जिससे जिले को नीचा देखना पडा हो मेरे 42 साल के राजनैतिक व सामाजिक जीवन में विभिé पदों पर रहते हुये म्ौंने जो भी काम किया उससे जिले का नाम ऊंचा ही हुआ है।
आलाकमान को आशु ने किया ईमेल
सिवनी। प्राप्त जानकारी अनुसार जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वमाZ ने ईमेल के मार्फत अ भा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी, प्रदेश प्रभारी वी के हरिप्रसाद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को आमानाला जमीन घोटाले के सम्बंध में सभी तथ्यों की जानकारी भेजी है साथ ही आज इस संंबंध में 420 का प्रकरण दर्ज होने के बाद पत्रकार वाताZ लेने सिवनी आये इंका विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष ठा.हरवंश सिंह के आगमन पर उनके स्वागत में जिस तरह से जगह-जगह आतिशबाजी ढोल धमाका और फूल मालाओं का प्रदर्शन किया गया उसकी भी जानकारी भेजते हुये आग्रह किया है कि पार्टी हित में आवश्यक कार्यवाही व उचित निर्देश जारी करें ताकि पार्टी की छवि पर कभी कोई विपरीत प्रभाव ना पड सके।
होशियार कौन स्वागत करने या कराने वाले?
सिवनी। कोर्ट के आदेश पर धारा 420 के आरोपी बन कर पहली बार नगर में प्रवेश कर पत्रकार वार्ता को संबोधित करने आये इंका विधायक हरवंश सिंह का बाजे गाजे ढ़ोल धमाके फूलमालाओं और आतिशबाजी से किया गया स्वागत राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं। हरवंश समर्थक कांग्रेसियों ने ना केवल स्वागत किया वरन बड़े चाव से प्रदेश इंका के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने स्वागत कराया भी हैं।राजनैतिक क्षेत्रों में चटखारों के साथ इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा हें कि स्वागत करने की योजना बनाकर स्वागत करने वाले ज्यादा होशियार हैं या स्वागत कराने वाले वरिष्ठ इंका नेता हरवंशर्षोर्षोइस सवाल का जवाब तो कुछ दिनों बाद ही मिलेगा या समझ मे आयेगा।
इन सवालों के जवाब देगा कौन?
1 क्या विवादास्पद जमीन खरीदने वाला हरवंश सिंह के स्टाफ के कर्मचारी का रिश्तेदार हैं?
2 क्या चार लाख रूपये से अधिक की जमीन खरीदने की आर्थिक स्थिति क्रेता रविनारायण शर्मा की है?
3 क्या हरवंश सिंह ने मीडिया को गुमराह करने के लिये फरियादी के उस बयान की प्रति बांटी हैं जिस बयान को कोर्ट खुद निरस्त कर चुकी हैं?
4 क्या इस तथ्य को छिपाने के लिये ही हरवंश सिंह ने 18 जून की कोर्ट की आर्डर शीट की कापी प्रेस को नहीं दी जिसमें यह उल्लेख हैं कि कोर्ट फरियादी के बयान को निरस्त करती हैं?
5 हरवंश सिंह ने कहा कि धारा 156(3) में अपराध पजीबद्ध करने के बाद जांच हो पाती हैं तो क्या बिना अपराध दर्ज किये सुनवारा चौकी प्रभारी द्वारा कोर्ट में दिया गया प्रतिवेदन अमान्य है?
6 भाजपा के राज में चौकी प्रभारी द्वारा नियम विपरीत प्रतिवेदन किसके प्रभाव में दिया गया जिसमें हरवंश सिंह एवं रजनीश सिंह को निर्दोष बताया गया है?
7 क्या हरवंश सिंह का यह कहना कोर्ट की अवमानना नहीं हैं कि,Þइस तरह मैं यह कह सकता हूं कि मेरे विरुद्ध विपक्ष द्वारा साजिश की गई है और मुझे राजनीतिक रूप से क्षति पहुचाने के उद्देश्य से मिथ्या कानूनी कार्यवाही करायी गई हैं।ß

मालगुजार ने खैरात में फकीर को दी थी जमीनभोपाल। बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में विवादित जमीन के बारे में बताया जाता हैं कि यह जमीन अंजनिया के मालगुजार मरहूम जनाब फेलकूस मोहम्मद खॉन ने विक्रेता के पूर्वजों को, जो कि फकीर थे, खैरात में जमीन दी थी। अपनी मेहनत के कमा कर उन फकीरों ने मालगुजार से कुछ और जमीन बाद में खरीदी थी। मालगुजार द्वारा खैरात में फकीर को दी गई जमीन बिक्री के विवाद में जिले के इकलौते इंका विधायक ठा. हरवंश सिंह का नाम आने से लोगों के बीच तरह तरह की चर्चायें व्याप्त हैं।धारा 420 का पहला आरोप नहीं हैं हरवंश सिंह परभोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हरवंश पर धोखा दने के आरोप लगने का यह कोई पहला मामला नहीं हैं। आज से 26 साल पहले पिछड़े वर्ग की एक विधवा महिला ने अपने वकील हरवंश सिंह पर जमीन हड़प लेेने का अरोप लगाते धारा 420 के तहम परिवाद पत्र प्रस्तुत किया था।सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने बकोड़ा सिवनी सहकारी समिति के आदिवासियों को डीजल पंप सप्लायी ना कर धोखा दने के आरोप को सही पाते था सिवनी को फर्म के पार्टनर हरवंश सिहं के विरुद्ध धारा 420 का मामला दर्ज कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे।प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री सुन्दरलाल पटवा ने झूठे शपथपत्र देकर प्रदेश के जिन मन्त्रियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में जनहित याचिका लगयाी थी उनमें भी हरवंश सिंह शामिल थे। माननीय उच्च न्यायालय ने भी सरकार को जांच कर कार्यवाही रिने के निर्देश दिये थे।इंका विधायक हरवंश सिंह के विरुद्ध वर्तमान धोखाधड़ी का मामला न्यायलय के निर्देश पर कायम किया गया हैं।बाजार मूल्य से आधी कीमत पर खरीदी गई हैं जमीनभोपाल। घंसौर तहसील के ग्राम आमानाला पटवारी हल्का नंबंर 54/41 की 10.47 हेक्टेयर याने लगभग 21 एकड़ विवादित जमीन की रजिस्ट्री सादक सिवनी निवासी रवि नारायण शर्मा के नाम हुयी हें। उन्होंने यह जमीन विक्रेता नियाज अली एवं अन्य से 4 लाख 50 हजार रुपये में खरीदी हैं। इस जमीन का बैनामा 21 जनवरी 2010 को लखनादौन में हुआ हैं। इस जमीन का कलेक्टर द्वारा निर्धारित कीमत 9 लाख 24 हजार रुपये है। बाजारू कीमत से लगभग आधी कीमत पर एक अनजान व्यक्ति शर्मा के नाम जमीन के बैनाम को हो जाने से तरह तरह की चर्चाओ में एक चर्चा यह भी हें कि कहीं यह बेनामी सौदा तो नहीं हैं।

Thursday, July 1, 2010

घोखाधड़ी हरवंश के स्वभाव में शामिल: डॉ. बिसेन
प्रदेश की जनता को शर्मसार ना होना पडे,. . पद की गरिमा बनाये रखने उचित निर्णय का भरोसा .

सिवनी । ठा. हरवंश Çसह के विरूद्Ëा धोखाधडी का अपराधिक प्रकरण मेरे लियें कोई आÜचर्य की बात नहीं है। पूर्व में भी उनके द्वारा किये एैसे कई मामले इस बात के गवाह हैं कि एैसे कृत्य उनके स्वभाव में ही निहित हैं किन्तु प्रदेश के उच्च संव्ौधानिक पद पर रहते हुये कोई भी व्यक्ति यदि एैसा कोई कार्य करता है तो उससे जिले को ही नहीं पूरे प्रदेश की जनता को शर्मसार होना पडता है।
आमानाला जमीन घोटाले में न्यायालय के आदेश पर विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के विरूद्Ëा दजZ किये गये धोखाधडी के अपराधिक प्रकरण पर उक्ताशय की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश के पूर्व मन्त्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ढालसिंह बिसेन ने कहा है कि धोखा देना हरवंश Çसह के स्वभाव में शामिल एक एैसी फितरत है जिसके कई प्रमाण पहले भी देखने को मिल चुके हैं। सबसे पहले इन्होंने एक वकील के रूप में अपनी मुविक्कल पिछडे वर्ग की विधवा महिला कुडोपार निवासी गंगाबाई के साथ किया था, गंगाबाई की शिकायत पर न्यायालय में उसकी जमीन हडप लेने के सम्बंध में चार सौ बीसी का मामला कायम हुआ था और उच्च न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन रहते हुये ही उसकी मृत्यु हो गई थी। इसी तरह एक व्यवसाियक फर्म के पार्टनर के रूप में हरवंश सिंह आदिवासियोें के साथ धोखाधडी करने से भी बाज नहीं आये थे। इस फर्म ने ब्ौंक से पैसा तो ले लिया था लेकिन गरीब आदिवासियों को सिंचाई के लिये डीजल पंप सप्लाय नहीं किये थे। उपपंजीयक सहकारी संस्था ने आरोप सही पाते हुये थाना सिवनी को धारा 42. के तहत अपराध पंजीबद्Ëा कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। कांग्रेस की सरकार रहने के कारण मामला दब गया था तब बालाघाट जिले की लांजी विधानसभा में मामला उठाया था जिसका जवाब देते हुये तत्कालीन कृषि मन्त्री शिवभानुसिंह सोलंकी ने यह स्वीकार किया था कि प्रकरण पुलिस ने दजZ कर लिया है जांच उपरान्त आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ ढालसिंह बिसेन ने कहा है कि इसीलिये ही मुझे आमानाला जमीन काण्ड की खबर का आÜचर्य नहीं हुआ किन्तु पहले और अब में हालात बदले हुये हैं। श्री सिंह आज विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे गरिमामय संव्ौधानिक पद पर आसीन हैं और इतिहास गवाह है कि एैसे पदों पर आसीन रहे नेताओं ने नैतिकता की मिसाल पेश की है डॉ बिसेन ने कहा है कि अब एैसी परिस्थिति में श्री सिंह को क्या करना चाहिये इसका निर्णय स्वयं करना है। मुझे विÜवास है कि श्री हरवंश सिंह एैसा निर्णय करेंगे जिससे जिले व प्रदेश की जनता को शर्मसार न होना पडे।
डॉ बिसेन ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान स्विर्णम मप्र बनाने प्राण प्रण से जुटे हुये हैं। इसीलिये प्रदेश के हर नागरिक का ये नैतिक दाियत्व हो जाता है कि उसका कृत्य इस प्रयास में कोई बदनुमा दाग न साबित हो। सरकारी मशीनरी से भी अपेक्षा है कि वे अपनी कार्यप्रणाली एैसी रखें कि प्रत्येक फरियादी को एैसा महससू हो कि इस सरकार म्ों सबको न्याय मिलता है।

bjp demands for regignation from the post of dy speaker

भाजपा नेताओं ने नैतिकता के आधार पर विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह से इस्तीफा मांगा
.जिला भाजपा अध्यक्ष एवं नगर भाजपा अध्यक्ष ने संव्ौधानिक पद की गरिमा का दिया हवाला.
सिवनी। आमानाला भूमि प्रकरण में प्रदेश विस उपाध्यक्ष हरवंश िंसह पर धोखाधडी के मामले में 420 जैसी गम्भीर धाराओं पर प्रकरण दजZ हो जाने के पश्चात् उन्हें नैतिकता के आधार पर तत्काल विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिये। जिला भाजपा की ओर से जिलाध्यक्ष सुजीत जैन, सांसद के डी देशमुख, राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य डॉ ढालसिंह बिसेन, सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं विधायक श्रीमती शशि ठाकुर, पूर्व विधायक नरेश दिवाकर, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले, सहकारी ब्ौंक अध्यक्ष अशोक तेकाम, नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एवं पार्टी पदाधिकारियों द्वारा इस आशय की मांग हरवंश सिंह से की जाने के साथ ही प्रदेश के महामहिम राज्यपाल महोदय को फैक्स भेजकर हरवंश सिंह को तत्काल विधानसभा उपाध्यक्ष पद से मुक्त करने की मांग भी की गई।
भाजपा जिलाध्यक्ष सुजीत जैन द्वारा सिह से इस्तीफे की मांग करते हुये कहा गया है कि विधानसभा उपाध्यक्ष जैसे संव्ौधानिक पद लोगों के आदर्श होते हैं सिंह इस उच्च पद पर विराजमान हैं और उन पर एैसे प्रकरण पहली बार दजZ नहीं हये हैं इसके पूर्व भी वे मारपीट एवं जानलेवा हमले के मामलों में धारा 307 के आरोपी रह चुके हैं आमानाला प्रकरण में जमीन खरीदी के मामले में उन पर धोखाधडी का प्रकरण दजZ हुआ था जो कि एक गम्भीर अपराध है। अत: उन्हें इस प्रकरण के निराकरण होने तक अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिये ताकि न्याय प्रक्रिया बिना किसी दबाव के पूरी हो सके।
भाजपा मीडिया प्रभारी द्वारा कहा गया है कि संव्ौधानिक पद की गरिमा का उल्लंघन करते हुये हरवंश सिंह इसके पूर्व भी प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार कर चुके हैं कि उनके लियेे पार्टी इस संव्ौधानिक पद से बडी है उनके इस बयान पर आपत्ति जताते हुये जिला भाजपा द्वारा उनसे नैतिकता के नाते इस्तीफे की मांग की गई थी तब श्री सिंह ने घोषणा की थी कि वे भाजपा जिलाध्यक्ष सुजीत जैन से नैतिकता का पाठ पढेंगे। श्री सिंह ने अपनी घोषणा के बाद कभी भी नैतिकता का पाठ सीखने की कोशिश नहीं की। यदि अपनी घोषणा के अनुरूप उन्होंने नैतिकता का पाठ सीख लिया होेता तो आज उनसे पुन: इस्तीफा मांगने की आवश्यक्ता नहीं पडती।
पार्टी की विज्ञिप्त में कहा गया है कि श्री सिंह ने नैतिकता का पाठ भाजपा जिलाध्यक्ष से सीखने की घोषणा की थी तभी सिद्ध हो गया था कि कांग्रेसियों में नैतिकता पूर्णतया समाप्त हो गई है। इसी वजह से उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष से नैतिकता का पाठ सीखने की आवश्यकता पड गई थी। श्री सिंह के एैसे बयानों से यह भी प्रमाणित हो गया है कि अपने लंबे राजनैतिक जीवन में उन्होंने कभी भी ना तो नैतिकता सीखी ना ही कभी उसका पालन किया।
इसी तारतम्य में नगर भाजपा अध्यक्ष प्रेम तिवारी ने जारी विज्ञिप्त में कहा है कि पूर्व में प्रदेश की तीन-तीन विभागों के मन्त्री रह चुके और वर्तमान में मप्र विधानसभा के उपाध्यक्ष जैसे गरिमामय पूर्ण संव्ौधानिक पद पर रहते हुये उनके विरूद्ध धोखाधडी तथा मारपीट और जान से मारने की धमकी जैसे गम्भीर अपराध का दजZ होना संव्ौधानिक पद एवं जनप्रतिनिधि की गरिमा के विपरीत है। एैसी स्थिति में ठा. हरवंश सिंह को स्वयं नैतिकता के आधार पर संव्ौधानिक पद से त्याग पत्र दे देना चाहिये। श्री तिवारी ने कहा है कि इस मामले के पूर्व भी श्री सिंह के विरूद्ध वर्तमान भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया की रिपोर्ट पर बण्डोल थाने में एक प्रकरण दजZ कराया गÄ(ाा था जिसका चालान भी आज तक पेश नहीं हो सका है। श्री तिवारी ने प्रदेश के राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमन्त्री,नेता प्रतिपक्ष के अलावा प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में संव्ौधानिक पद की गरिमा बनाये रखने हेतु उचित कार्यवाही की मांग की है।