Tuesday, July 30, 2013

क्या जिला भाजपा में होगा नेतृत्व परिवर्तन?
क्या सुजीत या वेदसिंह ठाकुर होगें जिला भाजपा के नये अध्यक्ष
सिवनी। क्या जिला भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है? यदि ऐसा हुआ तो किसके हाथ में आयेगी कमान?ये सवाल इन दिनों जिले के राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित है।
विधानसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर जहां एक ओर सभी राजनैतिक दल अपने अपने प्रत्याशी चयन और चुनावी बिसात बिछाने में लगे हुये हैं वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा में जिले में नेतृत्व परिर्वतन की खबरें चल रहीं हैं। नेतृत्व परिर्वतन की बात करने वाले नेता इस आधार पर यह बात कर रहें हैं कि इसीलिये भाजपा जिले में अभी तक प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर रही है। जबकि कांग्रेस के एक राष्ट्रीय और एक प्रादेशिक पर्यवेक्षक जिले की चारों विधानसभा सीटों का दौरा कर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को चालू कर चुके हैं। 
वर्तमान में जिला भाजपा की कमान सिवनी के पूर्व विधायक एवं महाकौशल विकास प्राधिकरण के कबीना मंत्री का दर्जा प्राप्त कद्दावर भाजपा नेता के हाथों में हैं। फिर आखिर ऐसे क्या कारण है कि चुनाव के चंद महीनों पहले प्रदेश का भाजपा नेतृत्व जिले में नेतृत्व परिवर्तन की सोच रहा है।
यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि भाजपा के संगठन चुनाव के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष सुजीत जैन की दोबारा ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन उस वक्त नरेश दिवाकर ने अपने ही समर्थक सुजीत जैन के बजाय वरिष्ठ महिला नेत्री एवं लगातार चार बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाली गोमती ठाकुर का नाम आगे कर दिया था। लेकिन काल चक्र कुछ ऐसा घूमा कि नरेश भले ही सुजीत को रोकने में तो सफल हो गये पर गोमती ठाकुर के बजाय उन्हें खुद ही जिला भाजपा अध्यक्ष बनना पड़ा।
यह बात भी एक ओपन सीक्रेट है कि सिवनी से दो बार विधायक रहे नरेश दिवाकर अपनी टिकिट कटने का दंश भूल नहीं पाये थे और मविप्रा का अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने ताबड़ तोड़ सिवनी विस क्षेत्र के दौरे भी चालू कर दिये थे। भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया और नरेश दिवाकर के इसी कारण मनमुटाव समय समय पर जगजाहिर होते रहें हैं। अभी नरेश दिवाकर इस बात के लिये जी तोड़ मेहनत कर रहें कि आगामी चुनाव में भाजपा से उन्हें ही विस की टिकिट मिले।
राजनैतिक विश्लेषकों का दावा है कि इसी कारण प्रदेश भाजपा का नेतृत्व जिले में परिवर्तन के बारे में विचार कर रहा हैं। प्रदेश के नेताओं का ऐसा मानना है कि प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया ऐसे हालात में चालू करना उचित नहीं हैं जब जिले का अध्यक्ष स्वयं ही टिकिट का दावेदार हो।
भाजपायी हल्कों में चल रही चर्चाओं के अनुसार नरेश दिवाकर ने अध्यक्ष पद के लिये उन्हीं सुजीत जैन का नाम आगे बढ़ा दिया है जिसे उन्होंने ही दूसरी पारी नहीं खेलने दी थी। जिला भाजपा अध्यक्ष पद के लिये दूसरे सबसे ताकतवर दावेदार के रूप में दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ नेता वेदसिंह ठाकुर का नाम सामने आया हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इन दिनों भाजपा में कार्यकर्त्ताओं का एक खेमा लगातार बैठकें करके ब्राम्हण और जैन ेनताओं को भाजपा में मिल रहे अत्यधिक महत्व को लेकर उनके विरोध में लामबंद हो रहा है और प्रदेश नेतृत्व से यह मांग कर रहा है अन्य वर्ग के नेताओं को भी महत्व मिलना आवयक है अन्यथा उनमें उभर रहा असंतोष भाजपा के लिये नुकसानदायक होगा।
ऐसे हालात में प्रदेश भाजपा नेतृत्व जिले में नेतृत्व परिवर्तन करेगा या नही? और करेगा तो कमान किसे देगा? और नरेश दिवाकर सिवनी विस क्षेत्र से टिकिट ला पायेंगें या नहीं? यह सब कुछ तो फिलहाल भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है?
सा. दर्पण झूठ बोले, सिवनी से साभार   
चुनावी साल में  वृक्षारोपण के शासकीय कार्यक्रम में  किसी शाही पर्यावरण मित्र  का अतिथि बनना सियासी हल्कों में  हुआ चर्चित
जिला मुख्यालय के पांच बार से जीतने वाले सिवनी विस क्षेत्र में इस बार एक नयी पहल प्रारंभ हुयी है। अपने आप को भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्त्ता बताने वाले कई नेता बैठकों का दौर कर रहें हैं कि इस बार पार्टी का उम्मीदवार किसी भी ब्राम्हण या बनिये को नहीं बनाना चाहिये। कांग्रेस में भी नजारा  कुछ अलग नहीं है। सिवनी विस क्षेत्र के 38 में से 22 और बरघाट विस क्षेत्र से 19 में से 18 टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं।  सिवनी में ये सभी टिकटार्थी स्वयं को ग्रामीण परिवेश का बता रहें हैं और उनका कहना है कि पार्टी पांच बार से यहां से चुनाव हार रही है और पांचों बार शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था।  लेकिन कोई भी चुनाव जीत नहीं पाया।बरघाट के टिकटाथियों का कहना है कि पार्टी के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ चुके अर्जुन काकोड़िया को प्रत्याशी नहीं बनाया जाना चाहिये। चुनावी साल में वृक्षारोपण के किसी शासकीय कार्यक्रम में कोई शाही पर्यावरण मित्र अतिथि बने और सियासी हल्कों में कोई चर्चा ना हो ये भला कैसे हो सकता है? ऐसा ही कुछ बीते दिनों इस जिले में हुआ है। अब देखना यह है कि ये सूबे के शहंशाह के नजदीकी शाही पर्यावरण मित्र चुनावी साल में अपनी आमद से कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण समाप्त करेंगें।
भाजपा में खुला ब्राम्हण बनिया विरोधी मोर्चा-आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा में भी गतिविधियां तेज हो गयीं है। जिला मुख्यालय के पांच बार से जीतने वाले सिवनी विस क्षेत्र में इस बार एक नयी पहल प्रारंभ हुयी है। अपने आप को भाजपा का निष्ठावान कार्यकर्त्ता बताने वाले कई नेता बैठकों का दौर कर रहें हैं कि इस बार पार्टी का उम्मीदवार किसी भी ब्राम्हण या बनिये को नहीं बनाना चाहिये। इन नेताओं का यह कहना है कि भाजपा में पार्टी के जिला अध्यक्ष एवं सिवनी विस क्षेत्र के अधिकांश उम्मीदवार अभी तक इन दो वर्गों से ही रहे है। भाजपा के इस धड़े का यह भी कहना है कि स्व. पं. महेश शुक्ला,प्रमोद कुमार जैन कंवर साहब,स्व. चक्रेश जैन,सुदर्शन बाझल,सुजीत जैन और अब नरेश दिवाकर पार्टी के जिलाध्यक्ष है। पार्टी में अब तक सिर्फ दो बार वेदसिंह ठाकुर,कीरत सिंह बघेल और डॉ. ढ.ालसिंह बिसेन ही अन्य ऐसे नेता है जिन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह सिवनी विस क्षेत्र से 85 में प्रमोद कुमार जैन,90 और 93 में स्व0 महेश शुक्ला, 98 और 2003 में नरेश दिवाकर और 2008 में नीता पटेरिया को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया और जनता ने पांच बार यह सीट भाजपा की झोली में डाली है। भाजपा के इन नेताओं का यह कहना है कि इन कारणों से जनता में यह संदेश जा रहा है कि भाजपा ब्राम्हणों और बनियों की पार्टी बन कर रह गयी है। इससे पार्टी के अन्य कार्यकर्त्ताओं में अब उपेक्षा की भावना घर करने लगी है। इसलिये इस बार पार्टी को सिवनी से किसी अन्य वर्ग के नेता को पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिये। चुनाव के पहले भाजपा में उठ रही यह असंतोष की लपटें कितना नुकसान पहुंचाने वाली साबित होंगी? यह कहा जाना अभी संभव नहीं हैं। 
सिवनी और बरघाट में भी कांग्रेस के टिकटार्थी हुये लामबंद-कांग्रेस में भी नजारा कुछ अलग नहीं है। सिवनी विस क्षेत्र के 38 में से 22 और बरघाट विस क्षेत्र से 19 में से 18 टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं। सिवनी में ये सभी टिकटार्थी स्वयं को ग्रामीण परिवेश का बता रहें हैं और उनका कहना है कि पार्टी पांच बार से यहां से चुनाव हार रही है और पांचों बार शहरी क्षेत्र के उम्मीदवारों को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 90 में स्व. ठा. हरवंश सिंह, 93 और 98 में आशुतोष वर्मा, 2003 में राजकुमार पप्पू खुराना और 2008 में प्रसन्न मालू को उम्मीदवार बनाया था और कोई भी जीत नहीं पाया था इसलिये इस बार ग्रामीण क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया जाये। इसी तरह बरघाट विस क्षेत्र में भी कांग्रस पांच बार से चुनाव हार रहीं है। लेकिन परिसीमन के बाद पिछले चुनाव से जिले की यह सीट आदिवासी वर्ग के लिये आरक्षित हो गयी है। लेकिन इस सीट से भी कांग्रेस की टिकिट के लिये 19 नेताओं ने आवेदन दिया है। इनमें से अर्जुन काकोड़िया को छोड़कर शेष 18  टिकटार्थी लामबंद हो गये हैं कि उनके अलावा 19 में से किसी को भी पार्टी टिकिट दे क्योंकि वे पार्टी के खिलाफ दो बार इसी क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। 
केवलारी क्षेत्र में शाही पर्यावरण मित्र की आमद हुयी चर्चित-हर साल बारिश आती है। बारिश में हर साल वृक्षारोपण होता है। हर शासकीय या अशासकीय वृक्षारोपण के कार्यक्रम में कोई ना कोई अतिथि पर्यावरण मित्र भी होता है। लेकिन जब चुनावी साल में वृक्षारोपण के किसी शासकीय कार्यक्रम में कोई शाही पर्यावरण मित्र अतिथि बने और सियासी हल्कों में कोई चर्चा ना हो ये भला कैसे हो सकता है? ऐसा ही कुछ बीते दिनों इस जिले में हुआ है। जी हां हम बात कर रहें है छपारा के एक शासकीय कार्यक्रम में उपस्थित हुये एक शाही पर्यावरण मित्र की उपस्थिति की जो कि अखबारों की सुर्खी बना था। केवलारी विस क्षेत्र के छपारा कस्बे में आयोजित एक शासकीय वृक्षारोपण कार्यक्रम में  चुनावी मौसम में अचानक ही प्रगट हुये एक शाही पर्यावरण मित्र अपने आप को सूबे के शहंशाह के किचिन केबिनेट के खास मेम्बर का रिश्तेदार बता रहें हैं। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में सूबे के शहंशाह से नजदीकी बता कर आमद देने वाले पर्यावरण मित्र किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण दूर करेंगें और किसमें प्रदूषण फैलायेंगें? इसे लेकर क्षेत्र के सियासी हल्कों में तरह तरह की चर्चायें होने लगीं हैं। वैसे भी जिले का केवलारी विस क्षेत्र कांग्रेस का एक ऐसा मजबूत गढ़ है जहां से कांग्रेस सिर्फ दो चुनाव,1962 और 1990 में,ही हारी है। अन्यथा 1967 से 1985 तक के पांच विस चुनाव कांग्रेस की कु. विमला वर्मा और 1993 से 2008 तक के चार विस चुनाव कांग्रेस के स्व. हरवंश सिंह चुनाव जीते है। आगामी विस चुनाव में स्व. हरवंश सिंह के ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह कांग्रेस के प्रबल दावेदार है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सूबे के शहंशाह स्व. हरवंश सिंह को एक शासकीय समारोह के सार्वजनिक मंच से स्व. हरवंश सिंह को एक शानदार और जानदार राजनेता बता चुके हैं। अब देखना यह है कि ये सूबे के शहंशाह के नजदीकी शाही पर्यावरण मित्र चुनावी साल में अपनी आमद से कांग्रेस या भाजपा में से किस पार्टी का राजनैतिक प्रदूषण समाप्त करेंगें।
और अंत में -जिले के राजनैतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहा केवलारी विस क्षेत्र इस बार भी महत्वपूर्ण ही रहेगा। यहां से इस बार कांग्रेस के विधायक रहे स्व0 हरवंश सिंह के ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह टिकटि के प्रबल दावेदार हैं। इनके अलावा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष डॉ. वसंत तिवारी,जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष शक्ति सिंह,ब्लाक इंका के पूर्व अध्यक्ष दिलीप दुबे, जिला इंका के उपाध्यक्ष जकी अनवर और क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रदेश प्रतिनिधि मो. शफीक पटेल के पुत्र अतीक पटेल ने भी टिकिट की दावेदारी की हैं। हालांकि कांग्रेस में किसी भी विस क्षेत्र टिकिट मांगने वालों की यह संख्या सबसे कम हैं लेकिन सियासी हल्कों में यह इसलिये चर्चित हैं कि 20 साल में पहली बार इस क्षेत्र से टिकिट की मांग अन्य नेताओं ने भी की हैं। क्षेत्री विधायक रहे स्व. हरवंश सिंह के निधन के चंद महीनों बाद ही उनके गृह क्षेत्र में नेताओं की आवाज मुखर होना महत्वपूर्ण माना जा रहा हैंमु।”साफिर”
सा. दर्पण झूठ ना बोले
30 जुलाई 13

Monday, July 8, 2013

अत्यंत घिनौने कृत्य के आरोप में स्तीफा देने वाले  वित्त मंत्री राघवजी का पुतला जलाया कांग्रेसियों ने 
 बीते दिनों जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक बरघाट में सम्पन्न हुयी। इस बैठक में राहुल गांधी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पल्लब लोचनदास भी उपस्थित थे। राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के दौरान ब्लाक और जिला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कोई अधिकार नहीं होने की शिकायत की थी। कांग्रेस आला कमान द्वारा प्रत्याशी चयन जैसे महत्वपूर्ण को में ब्लाक और जिला कांग्रेस कमेटियों को यह अधिकार दिया गया था। लेकिन एक दूसरे से बुराई ना होने के चक्कर में संगठन ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा। इन दिनों प्रदेश का राजनैतिक तापमान एकदम से बढ़ गया हैं। इसकी तपिश ने प्रदेश के 80 वर्षीय बुजुर्ग वित्त मंत्री राघवजी की बलि ले ली हैं। राजधानी के हबीबगंज थाने में उनके एक नौकर रामकुमार दांगी ने उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुये शपथ पत्र दिया। इसके बाद पटेरिया,ताजकुमार के पिता और उसके भाई के बयान आदि केस को कमजोर करने वाले साबित होंगें। नपा उपाध्यक्ष राजिक अकील के साथ अन्य युवा कांग्रेसियों ने भी राघवजी का पुतला जलाया।गौगपा के रोको,टोको और ठोंको अभ्यिान का पहला शिकार मुनमुन राय हो गये हैं। सिवनी विस क्षेत्र के एक गांव से उन्हें गौगपा के कार्यकर्त्ताओं ने गांव में घुसने नहीं दिया और बेरंग वापस जाने के लिये मजबूर कर दिया। यह समाचार अखबारों में सुर्खियों में इसलिये आ गया क्योंकि पिछले विस चुनाव में मुनमुन ने लगभग 30 हजार वोट लेकर कांग्रेस को तीसरे नंबंर पर ढ़केल दिया था।
जिला कांग्रेस ने अलाकमान को किया अधिकृत-बीते दिनों जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक बरघाट में सम्पन्न हुयी। इस बैठक में राहुल गांधी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक पल्लब लोचनदास भी उपस्थित थे। यह बैठक आगामी विधानसभा चुनाव के लिये कि जिले के चारों विस क्षेत्रों के लिये कांग्रेस के प्रत्याशियों के चयन के लिये रखी गयी थी। बताया जा रहा था कि इस बैठक में हर विस क्षेत्र से तीन तीन उम्मीदवारों का पैनल बनाना था। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के भोपाल प्रवास के दौरान ब्लाक और जिला संगठन के पदाधिकारियों द्वारा कोई अधिकार नहीं होने की शिकायत की थी। बताया जा रहा है कि इसी को ध्यान में रखते हुये कांग्रेस आला कमान द्वारा प्रत्याशी चयन जैसे महत्वपूर्ण को में ब्लाक और जिला कांग्रेस कमेटियों को यह अधिकार दिया गया था। लेकिन एक दूसरे से बुराई ना होने के चक्कर में संगठन ने ऐसा करना मुनासिब नहीं समझा। जिला कांग्रेस कमेटी की इस बैठक मे सख्ती के साथ इस बात का ध्यान रखा गया था कि जिले के पदाधिकारियों के अलावा अन्य नेता बैठक में शामिल ना हों। इसीलिये सिवनी नगर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री संतोष उर्फ नान्हू पंजवानी से जिला इंका अध्यक्ष हीरा आसवानी ने अधिकृत नेताओं के नामों की सूची को पढ़वाया। बैठक में सिवनी के पूर्व प्रत्याशी राजकुमार पप्पू खुराना और प्रसन्न मालू भी शामिल हो गये थे लेकिन पर्यवेक्षक द्वारा उन्हें बाद में मिलकर अपनी बात रखने को कहा और वे बैठक से बाहर चले गये। वैसे जिला इंकाध्यक्ष ने जिले के सभी पूर्व प्रत्याशियों को बरघाट आमंत्रित किया था और कहा था कि बैठक के बाद पर्यवेक्षक आपसे चर्चा करेंगें। कांग्रेसी हल्कों में चर्चा है कि जब दो पूर्व प्रत्याशियों को बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया तो फिर एक दर्जन से अधिक जिला कांग्रेस के महामंत्री होने के बाद भी पदाधिकारियों की सूची नगर कांग्रेस के महामंत्री से क्यों पढ़वायी गयी जबकि वे इस बैठक में शामिल होने की पात्रता भी नहीं रखते थे।  राहुल गांधी और आला कमान के निर्देश और गाइड लाइन भले ही पूरे प्रदेश के लिये लागू हो लेकिन जिले में इसको धता बताने में किसी को संकोच नहीं हुआ। इतनी महत्वपूर्ण बतायी जाने वाली इस बैठक में एक मात्र दो लाइन का प्रस्ताव पास करके सभी आवेदन कांग्रेस आला कमान को भेज दिया गया तथा जिला कांग्रेस की ओर से उन्हें अधिकृत कर दिया गया। बैठक के बाद पर्यवेक्षक से मिलकर पूर्व प्रत्याशी आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और नपा अध्यक्ष के पूर्व प्रत्याशी संजय भारद्वाज ने चर्चा कर राजनैतिक स्थिति से अवगत कराया।
अत्यंत घिनौने आरोप में नप गये राघवजी-इन दिनों प्रदेश का राजनैतिक तापमान एकदम से बढ़ गया हैं। इसकी तपिश ने प्रदेश के 80 वर्षीय बुजुर्ग वित्त मंत्री राघवजी की बलि ले ली हैं। राजधानी के हबीबगंज थाने में उनके एक नौकर रामकुमार दांगी ने उन पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुये शपथ पत्र दिया और साथ में एक सी.डी. भी पुलिस को सौंप दी हैं। उसने अपने शपथपत्र में कहा है कि यह सी.डी. उसके दोस्त ने बनायी है। मूल दस्तावेज लेने वो जो गया है तो उसका पता नही है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश पर राघवजी का स्तीफा मंजूर हो गया है।स्तीफे के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और विदिशा के ही भाजपा नेता एवं प्रदेश के पूर्व निगम अध्यक्ष शिवशंकर पटेरिया ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस लेकर यह दावा किया कि यह सी.डी. उन्होंने बनवायी है और वे भाजपा से गंदगी साफ करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने 22 सी.डी. बनवायीं हैं। प्रदेश भाजपा ने पटेरिया को निलंबित कर दिया है। इसके बाद दो दिनों से लापता राजकुमार के पिता ने मीडिया को यह बयान देकर सबको चौंका दिया है कि उनका पुत्र मांसिक रूप से बीमार है और उसने पहले भी एक बुजुर्ग आदमी पर ऐसा इल्जाम लगाकर उसके पैसा वसूला था। उसके पिता ने यह प्रमाणपत्र भी दे डाला कि राघवजी उसके पुत्र को बेटे की तरह रखते थे। इसके साथ ही राजकुमार के भाई ने विदिशा जिले के कुरवायी थाने में यह रिपोर्ट दर्ज करायी है कि मांसिक रूप से बीमार उसका भाई तीन महीनों से लापता हैं। अब यहां एक सवाल यह उठना स्वभाविक ही है कि यदि राजकुमार तीन तहीनों से लापता था तो भोपाल में राघवजी के खिलाफ शपथपत्र देने और दो दिनों से लापता होने के बाद ही उसके भाई के द्वारा यह रिपोर्ट क्यों दर्ज करायी गयी? अब राजकुमार ने खुद मीडिया के सामने आकर यह बयान दिया है कि उसके पिता और भाई को धमकी देकर यह सब कराया जा रहा हैं। विधि के विशेषज्ञों का यह मानना है कि थाने में शपथपत्र के साथ राजकुमार द्वारा आवेदन देने के बाद ऐसे तमाम बयान केस को कमजोर करने वाले साबित होंगें और भाजपा तथा प्रदेश सरकार अपने बुजुर्ग नेता राघवजी को बचाने के लिये ये सारे दांव पेंच खेल रही है। राघवजी के विरोध में पूरे प्रदेश में कांग्रेसी उनके पुतले जलाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग कर रहें हैं। इसी क्रम में नपा उपाध्यक्ष राजिक अकील के साथ अन्य युवा कांग्रेसियों ने भी राघवजी का पुतला जलाया। मुख्य प्रश्न तो यह है कि आखिर राजनीति के शिखर में बैठे ऐसे जिम्मेदार नेता ही ऐसा आचरण और अपना चरित्र पेश करेंगें तो उनके अनुयायी और युवा पीढ़ी आखिर किस बात के लिये प्रेरित होंगें?
गौगपा ने मुनमुन को गांव में घुसने नहीं दिया-गौगपा के रोको,टोको और ठोंको अभ्यिान का पहला शिकार मुनमुन राय हो गये हैं। सिवनी विस क्षेत्र के एक गांव से उन्हें गौगपा के कार्यकर्त्ताओं ने गांव में घुसने नहीं दिया और बेरंग वापस जाने के लिये मजबूर कर दिया। यह समाचार अखबारों में सुर्खियों में इसलिये आ गया क्योंकि पिछले विस चुनाव में मुनमुन ने लगभग 30 हजार वोट लेकर कांग्रेस को तीसरे नंबंर पर ढ़केल दिया था। उल्लेखनीय है कि मुनमुन इस बार फिर कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाने लिये चुनाव लड़ना चाह रहें हैं। अभी यह कहना मुश्किल हैं कि मुनमुन की सेंधमारी उन्हें जिताने लायक साबित होती हैं या फिर भाजपा को जिताने में मददगार होती है? गौगपा के ऐसे तीखे तेवरों से यह अंदेशा हो रहा है कि पिछले चुनाव में छपारा ब्लाक की 34 पंचायतों में मुनमुन ने आदिवासियों के काफी वोट ले लिये थे वो अब संभव हो पायेगा या नही? आदिवासी और मुस्लिम वोटों के भरोसे इस बार मुनमुन कितनी सेंधमारी कर पायेंगें? यह कहना फिलहाल संभव नहीं हैं। “मुसाफिर“

साप्ताहिक दर्पण झूठ ना बोले 
09 जुलाई 2013 से साभार 
पांच बार से हारने वाले सिवनी विस क्षेत्र के इंका ग्रामीण पृष्ठभूमि के बाईस टिकटार्थी हुये लामबंद
जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह की पहल लायी रंग
सिवनी।जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष ठा. धर्मेन्द्र सिंह की पहल पर ग्रामीण क्षेत्र के इंका के टिकटार्थियों की एक बैठक संपन्न हुयी जिसमें उनमें से किसी को भी टिकिट देने का प्रस्ताव पास किया गया।
सिवनी विधानसभा क्षेत्र्ा के लिय्ो कांग्रेस पार्टी केे ३८ नेताओं ने टिकिट की मांग की है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि पार्टी हाईकमान द्वारा उनका आग्रह न माने जाने की स्थिति में जिस किसी भी व्य्ाक्ति को पार्टी का उम्मीदवार बनाय्ाा जाय्ोगा उसे विजय्ाी बनाने के लिय्ो जीतोड मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोडी जावेगी।
इस बैठक में ३८ में से जो २२ दावेदार एकत्र्ाित हुय्ो थे वे सभी मूलतः ग्रामीण परिवेश से जुडे हुय्ो हैं। उनके पैतृक घर और कारोबार सभी कुछ गांव पर निर्भर हैं। य्ाद्यपि इनमें से कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने बाल बच्चों के भविष्य्ा को ध्य्ाान में रखकर नगरीय्ा परिवेश में भी निवास करते हैं। किंतु है वे मूलतः ग्रामीण ही और इसी आधार पर य्ो सभी लोग इन २२ में से किसी एक को पार्टी की टिकिट दिय्ो जाने की मांग को लेकर आगामी १२ जुलाई को केन्द्रीय्ा मंत्र्ाी कमलनाथ से मिलने छिंदवाडा पहंुचने वाले हैं।
आज की बैठक में ग्रामीण परिवेश से जुडे जो २२ लोग एकमत होकर शामिल हुय्ो थे उनमें सर्वश्री रमेश जैन,आरिफ  खान, गुलाब साहू, श्रीमती फ रिदा अंसारी, धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर, चंद्रभान सिंह बघेल, बसीर खान, बहादुर सनोडिय्ाा, पदम सनोडिय्ाा, शिवराम सनोडिय्ाा, आशा सनोडिय्ाा, कविता कहार, कीरतसिंह बघेल, आदित्य्ा सिंह, मृत्य्ाुंजय्ा सेंगर, मोहन चंदेल, सेवकराम चंद्रवंशी, श्रीमती रंजीता बघेल, जय्ादीप सिंह बैस व ओम प्रकाश तिवारी का समावेश है। ३८ में से कुल ग्रामीण परिवेश के २४ दावेदार हैं। जिनमें दिलीप बघेल और प्रदीप राय के आने का उल्लेख किया गया हैं।
बैठक में उपस्थित इन २२ लोगों ने आपस में विचार विमर्श करने के बाद जिन तथ्य्ाों को पार्टी के हाईकमान और वरिष्ठ नेताओं को अवगत कराने का निर्णय्ा लिय्ाा है उसके अनुसार सिवनी विधानसभा क्षेत्र्ा में ७॰ से ८॰ प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्र्ा के हैं और इसी आधार पर वे य्ाह चाहते हैं कि इस बार पार्टी की टिकिट ग्रामीण परिवेश से जुडे व्य्ाक्ति को ही दी जाय्ो। बैठक में यह भी बताया गया कि 1985 में ग्रामीण परिवेश के रमेश जैन को टिकिट देने और उनके जीतने के बाद भी सन 1990 से सभी नगरीय क्षेत्र से प्रत्याशी बनाये गये और कांग्रेस तभी से चुनाव हार रही हैं। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 1990 में स्व. हरवंश सिंह को टिकिट दी थी और वे चुनाव हार गये थे। 
इन्हें नहीं माना गया ग्रामीण परिवेश का
सिवनी। जिला कांग्रेस में सिवनी विस क्षेत्र के लिये टिकिट मांगने वाले नेताओं को ग्रामीण परिवेश का नहीं माना गया। इनमें श्रीमती पुष्पा रमेशचंद जैन,जकी अनवर खान, राजकुमार खुराना, राजा बघेल,हाजी सोहेल पाशा, संजय ारद्वाज, मो.असलम खान,घनश्याम जड़ेजा,श्रीमती नेहा सिंह,अजय पेशवानी,सुश्री हेमलता जैन, श्रीमती अल्पना राणा, खुमान सिंह,जयकिशोर वर्मा,विजय चौरसिया के नाम शामिल हैं। इस बैठक को लेकर कांग्रेस से टिकिट मांगने वाले नेताओं के बीच इस बात को लेकर जमकर चर्चायें जारी हैं कि गांव और शहर की बात चलने के पीछे आखिर कारण क्या है,इसे कौन शह दे रहा हैं और अंततः इससे किसको लाभ होगा?  
बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि उनके इस आग्रह के बाद भी य्ादि पार्टी किसी अन्य्ा व्य्ाक्ति को अपना उम्मीदवार बनाती है तो भी य्ो सभी २२ लोग उसे विजय्ाी बनाने में अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं रहने देंगे। उपस्थित दावेदारों ने कहा है कि पार्टी को विजय्ाी बनाने का संकल्प लेने ही आज वे मातृधाम में अपनी इस बैठक को आय्ाोजित किय्ो हैं और माता राजराजेश्वरी के सामने संकल्पबद्घ हो गय्ो हैं।
साप्ताहिक दर्पण झूठ ना बोले 
09 जुलाई 2013 से साभार