Monday, March 29, 2010

गुरूवाणी में हुये बिटिया की बिदायी के बिदायी के भावनात्मक चित्रण से हुयी हजारों आंखें नम
,राष्ट्र सन्त तरुण सागर जी महाराज के कड़वे प्रवचनों के अन्तिम दिन भारी जन समूह उमड़ पड़ा धर्म सभा में
सिवनी 29 मार्च। जनसन्त तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचनों के अन्तिम दिन प्रवचन स्थल में आये हजारो श्रृद्धालुओं की आंखे आज उस समय नम हो गईं जब महाराज श्री ने भावनात्मक रूप से बिटिया की बिदायी का चित्रण किया। प्रवृति,विकृति और संस्कृति का उल्लेख करते हुये महाराज श्री ने कहा कि भूख लगने पर भोजन करना प्रकृति हैं, भूख ना लगने पर भी भोजन करना विकृति हैं और किसी भूखे को खिलाकर भोजन करना संस्कृति हैं।गुरूवर ने कहा कि पीकर पिलाने का मजा कुछ और हैं। घर आये अतिथि को भोजन के लिये पूछा। भोजन के लिये ना पूछो तो कम से कम पानी के लिये पूछो। पानी के लिये भी ना पूछो तो दो मीठे बोल बोलो। दोमीठे बोल भी ना बोल पाओ तो कम से कम मुस्कुरा दो। चेहरे पर यदि मुस्कान भी ना ला सको तो चुल्लू भर पानी में डूब मरो। अब सोचेंगें कि छ: फुटा आदमी भला चुल्लू भर पानी में कैसे डूब मरेगा। लेकिन ऐसा व्यक्ति तो छुद्र कीड़े के समान होता हैं और उसे डूब मरने के लिये चुल्लू भर पानी काफी होता हैं। महाराज श्री ने कहा कि आज के युग में मोबाइल से ज्यादा स्माइल की जरूरत हें। मोबादल तो सिर्फ पैसे वालों के पास होता हें लेकिन इस्माइल हर व्यक्ति के पास होती हैं। इसलिये आप अपने चेहरे पर हमेशा इस्माइल बनाये रखिये ताकि फोटोग्राफर को इस्माइल प्लीज ना कहना पड़े। यदि आप हंसते हैं तो ईश्वर की आराधना करतें हैं और यदि आप किसी की आंखों के आंसू पांछकर उसे हंसाते हैं तो ईश्वर आपकी आराधना करते हैं। इसलिये निवेदन है कि आप हंसते रहें और रोते हुओं को हंसाते रहें। गुरूवर ने आगे कहा कि सीधे और सरल रास्तों पर चलने वालों का कोई इतिहास नहीं बनता है। सीधे सरल रास्तों पर चल कर आप अपने जीवन का सफर तो आसानी से तय कर सकते हैं लेकिन चुनोतियों को स्वीकार किये बिना जीवन अधूरा हैं। जो चुनोतियों को स्वीकार करते हैं, जो टेढ़े मेढ़े रास्तो पर चलकर सफलता की मंजिल पाते हैं इतिहास उन्हीं का बनता हैं। मुनिवर ने धर्म सभा को संबोधित करते हुये कहा कि अपने आप पर भरोसा करना सीखो। अपने आप पर भरोसा नहीं करोगे तो राम भरोसा भी तुम्हारे साथ नहीं होगा। अपने आत्म विश्वास का उल्लेख करते हुये महाराज श्री ने कहा कि यदि तुम्हारे घर से प्रवचन सुनने कोई नहीं आ रहा हें तो एक बार लाने का काम तुम्हारा है। रोज रेाज बुलाने का काम तरुण सागर का है। आपने चुटकी लेते हुये कहा कि एक बार भी लाने का काम तुम्हारा इसलिये हें क्योंकि मुझे तुम्हारे घर का पता नहीं मालूम है। आपने कहा कि विश्वनाथ और पाश्र्वनाथ के राज में कोई अनाथ नहीं होता हैं। महाराज श्री ने नसीहत देते हुये कहा कि अपने आप को कमजोर मत समझो। आपने चिड़िया का एक किस्सा सुनाते हुये कहा कि एक चिडिय़ा अपनी चोंच में पानी भरकर आती थी और जहां आग लगी थी उसे बुझाने के लिये पानी डालकर फिर पानी लेने चली जाती थी। उसे किसी ने टोका कि तुम्हारे चोंच भर पानी से तो आग का एक शोला भी बुझने वाला नहीं हैं। फिर तुम क्यों ऐसा कर रही होर्षोर्षो चिड़िया ने कहा कि भले ही मेरे चांच भर पानी से आग ना बुझे लेकिन जब इस घटना इतिहास लिखा जायेगा तो मरा नाम आग बुझाने वालों में शामिल होगा। आग लगाने वालों में नहीं।हिंसा और बुराइयों के खिलाफ ताल ढ़ोंकना पड़ेगा। इनसे समाज को मुक्त कराना होगा। राष्ट्र सन्त तरुण सागर जी महाराज ने धर्म सभा में आगे कहा कि एक ही झाड़ से निकली सीघी लकड़ी का तो फर्नीचर बनाने में उपयोग होता हैं लेकिन टेढ़ी मेढ़ी लकड़ी को आग में झोंक दिया जाता हैं।इसकिलये आप सीधे सरल और धर्ममय बने ताकि समाज में आपका सदुपयोग हो सके। अपाने एक उदाहरण देते हुये बताया कि जब एक मित्र ने अपने यहां लड़के के होने की तारीख बतायी तो मित्र ने कहा अरे उस दिन तो इतवार की छुट्टी थी। लेकिन जन्म और के लिये जो दिन निर्धारित होता हें वह तय हैं। महाराज श्री ने कहा कि जन्म मृत्यु के दफ्तर में कभी कोई छुट्टी नहीं होती हैं। गुरुवर ने समाज में फैले बेइमान चरित्र की चर्चा करतें हुये कहा कि जिन्हें चोरी करने का, बेइमानी करने का मौका मिला वे चोर और बेइमान हो गये और जिन्हें चोरी करने और बेइमानी करने का मौका नहीं मिला वे ईमानदार हो गये। ऐसी ईमानदारी कोई काम की नहीं हैं। समाज में बेइमान चरित्र हो गया हैं। यदि हमें ईमानदार बनना हैं तो हम मन से बनें, स्वभाव से बनें,संस्कार से बनें,चरित्र से बनें। तभी समाज को आपकी ईमानदारी का लाभ मिलेगा अन्यथा बेईमानी का मौका नहीं मिलने से ईमानदार बने लोग समाज में बोझ ही बनें रहेंगें और उनकी ऐसी ईमानदारी समाज के लिये उपयोगी नहीं होगी। इसी सन्दर्भ में महाराज श्री ने मारवाड़ी,बनिया और चोर का रोचक किस्सा सुनाया। आपने कहा कि भगवान ने मारवाड़ी,एक बनिये और चोर को अलग अलग बुलाकर पूछा कि बताओ तुम्हें क्या चाहियेर्षोर्षो मारवाड़न ने एक करोड़ रूपये और एक आलीशान मकान मांगा भगवान ने तथास्तु कह दिया। फि बनिये ने भी भगवान से यही मांग लिया। भगवान ने उसे भी तथास्तु कह दिया। फिर जब भगवान ने चोर से पूछा कि अब तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिये तो चोर ने भगवान से कहा कि मुझे उन दोनों का पता बता दीजिये। महाराज श्री ने कहा कि आदमी के चेहरे पे चेहरे चढ़ें हैं। लोग अंधें और बहरे हैंं।इसलिये आप अपना असली चेहरा पहचानिये। धर्म सीाा को संबोधित करते हुये मुनिवर ने कहा कि धर्म क्या हैर्षोर्षो जा व्यवहार हमें खुद अच्छा ना लगे वह दूसरों के साथ नही करो। यही धर्म हैं।जा हम अपने लिये चाहते हैं वही दूसरों के लिये भी चाहें।गुरूवर ने कहा कि इस लोक को सुधारने के लिये मदिरा का त्याग करें और परलोक को सुधारने के लियें मांसाहार का त्याग करें। पक्षी और जानवरों के पास भले ही जुबान हो लेकिन जान तो उनके पास भी रहती हैं। महारज श्री ने कहा कि नेता अपके पास वोट मांगने आते हैं,नोंट मांगने आते हैं,सपोर्ट मांगने आते हैं लेकिन मैं तुम्हारे पास तुम्हारी खोट मांगने आया हूंं। इसलिये इस पंड़ाल से आज एक बुराई झोड़कर जाने का संकल्प लें तो मैं समझूंगा कि मुझे गुरुदक्षिणा मिल गई और मेरा पसीना बहाना सार्थक हो गया। आज के हालात की ओर इशारा करते हुये मुनिवर ने कहा कि पंड़ाल से उठकर जब लोग जाते हैं तो कहते कि महाराज ने बहुत अच्छा बोला पर यदि कोई पूछता हैं कि क्या बोलर्षोर्षो तो फट से कह देता पता नहीं। लो गई ना भैंस पानी में।कहते हैं कि कुत्ते की पूंछ को बारह साल तक भी पोंगली में भरकर तो भी टेढ़ी निकली। ऐसा ही हाल श्रोताओं का हो गया हैं। वे कहते हैं कि महाराज का काम कहने का है और अपना काम सुनने का है।जैन सन्त तरुण सागर जी महाराज कि आप दुनिया के बदलने की रास्ता मत देखिये। दुनिया नहीं बदलेगी आपको अपने आप को बदलना होगा। आप यदि अपने आप को बदलेंगें तो इसका समाज में दस गुना फर्क पड़ता हैं। मुनि श्री ने नसीहत देते हुये कहा कि घर में बहू लाना बहूरानी नहीं।बहू आयेगी तो संस्कार लेकर आयेगी,बुलाने पर सर के बल चली आयेगी पर बहूरानी आयेगी तो कार लेकर आयेगी और अपनी सरकार चलायेगी। बहू लाओगी तो बेटे को अच्दे पाठ पढ़ायेगी और जीवन स्वर्ग बना देगी पर बहूरानी लाओगी तो बेटे को रोज उल्टी सीधी पट्टी पढ़ायेगी और जीते जी मर जाओगी। इसलिये आप बेटियों को संस्कारित बनायें ताकि वे बहू बन सकें बहूरानी नहीं।आप जोड़ने काम करिये तोड़ने का नहीं। कैंची काटने का काम कमरती हें इसलिये दर्जी के पैरों के पास पड़ी रहती हैं और सुई जोड़ने को काम करती हैं इसलिये दर्जी के दिल में कमीज मे टंकी रहती है।। गुरुवर ने दहेज पर प्रहार करते हुये कहा कि आप कमाई सबसे अच्छी होती हें, बाप कमाई उससे कम अच्छी होती हैं और ससुर कमाई सबसे घटिया कमाई होती हैं।डाकू तो रात के अंधेरे में डाका डालते हैं लेकिन ये दहेज लोभी डाकू दिन दहाड़े आते हें और लूट के ले जाते हैं।इसलिये आप ऐसे परिवार में बेटी मत दीजिये जहां दहेज के लोभी रहते हैं।बेटी वहां दीजिये जहां दुल्हन को ही दहेज मानते हों। बहू को बेटी के समान सम्मान दें। बेटे के पिता को भी नसीहत देते हुये महाराज श्री ने कहा कि आप भी संकल्प लें कि आप बेटे का विवाह तो करेंगें लेकिन उसे बेंचेंगें नहीं। उसकी बोली नहीं लगायेंगें। जो लोग विवाह को दो दिलों के मिलन से ज्यादा उसे आमदनी का जरिया मानतें हों वहां अपनी बेटी मत दीजिये।दहेज हत्याओं पर कटाक्ष करते हुये मुनिवर ने कहा कि स्टोव फटा और बहू जलकर मरी। ये किस्से आये दिन सुनने को मिल रहें हैं लेकिन एक भी किस्सा ऐसा सुनने को नहीं मिलता हें कि स्टोव फटा और सास जलकर मरी।ऐसा लगता है कि मानो स्टोव यह पहचानता हो कि कौन सास हैं और कौन बहूर्षोर्षो मुनिवर ने कन्या भ्रूण हत्या का जिक्र करते हुये कहा कि इसके लिये प्रेरित करने वाला पति, भ्रूण हत्या कराने वाली उसकी पत्नी और डॉक्टर तीनों ही हत्यारे हैं।इसे रोकन के लिये सभी के द्वारा उपाय किये जाने चाहिये। सरकार निर्णय ले कि जिसकी बेटी नहीं उसे नौकरी नहीं, चुनाव लड़ने का हक नहीं। सन्त मुनि यह तय करें कि जिसके यहां बेटी नहीं उसके यहां आहार नहीं लेंगें।समाज तय करें कि जिसके यहां लड़की नहीं उसके घर लड़की नहीं देंगें।महाराज श्री ने एक किस्सा बताया कि उनके पास एक उदास मन आया और बताया कि मेरे यहां लड़की हुयी हैं। मैंने कहा अच्छा हैं लक्ष्मी आयी। वह बोला कि दो और पहले से हें मैंने कहा कि यह तो और अच्छा हैं अब तुझे और क्या चाहिये तेरे यहां तो दुगाZ,सरस्वती और लक्ष्मी तीनों हो गईं। फिर उसने कहा कि मेरे वंश का क्या होगार्षोर्षोमैंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि वंश का अंश परमहंस ही हो।वह कंस भी हो सकता हैं। मुनिश्री ने गुजारिश की कि स्वभाव बदलिये। बेटी और बेटे में फर्क करना बन्द करें। बेटी के महत्व को प्रतिपादित करते हुये गुरुवर ने कहा कि बेटों से ज्यादा बेटियां मां बाप का ध्यान देती हें। बेटा तो एक कुल में ध्यान रखता हैं लेकिन बेटी दो कुलों में ध्यान रखती हैं।सुसराल में वह अपनी कितनी भी बुराई सुन लेती हैं लेकिन बाप की बुराई बर्दाश्त नहीं करती। मां ना रहे तो बेटी को ज्यादा दुख होता हैं। क्योंकि मां ना रहे तो मायका नहीं रहता वह भाई भाभी का घर हो जाता हैं।धर्मात्मा सास वह होती हें जो बहू और बेटी में फर्क नहीं समझती है।।वो घर भाग्यशाली होता हैं जिस घर से बेटी भरे हाथों बिदा होती हैं। बेटी की बिदाई का अत्यन्त भावनात्मक चित्रण करते हुये राष्ट्र सन्त तरुण सागर जी ने कहा कि मां बेटी को बिदा करती हैं। गले से लगा लेती हैं।उसका माथा चूमती हैं।आशीZवाद देती हैं। जा बेटा तेरा सुहाग बना रहे।बेटी लिपट कर आंसू बहाने लगती हेंमां भी रोना शुरू कर देती हें।दूर खड़ा बाप भी उदास हो जाता हें।उसके भी आंसू आ जाते हें।मां तो बेटी के बिदा का दुख सहन कर लेती हैं क्योंकि उसे बिदा का अनुभव होता हें। लेकिन बाप बेटी की बिदा को सहन हनीं कर पाता हें। सबसे ज्यादा दुख बाप को होता हें। बाप पूरे परिवार की चिन्ता करता हें लेकिन बाप की चिन्ता करने वाली सिर्फ बेटी ही होती हें।बेटी जब बाप के गले से लिपट कर यह पूछती हैं किे उसका क्या अपराध हें जो उसे आज घर से भेजा जा रहा हैं तो बाप के पास सिवाय रोने के और कोई जवाब ही नहीं होता हैं।एक बिना मां की बेटी और एक विधवा मां की बेटी की बिदायी का चित्रण करते हुये महाराज श्री ने कहा कि जब वह बेटी को उसकेे मृत पिता की फोटो के पास आशीZवाद दिलाने लाती हें तो पिता के फोटो से भी झर झर आंसू गिरने लगते हें। बेटी के महत्व पर यह लाइने कहते हुये महाराज श्री ने आज के प्रवचन समाप्त किये कि ओस की एक बून्द सी होती हें बेटियां। तकलीफ मां बाप को हो तो रोनी हैं बेटियां। रोशन करेगा बेटा तो एक कुल की शान को।दो कुलों की शान होती हैं बेटियां। कोई नहीं है कम एक दूसरे से,हीरा हैं बेटा तो मोती हें बेटियां। मुनिवर के इस भावनात्मक बिदायी चित्रण ने धर्म में उपस्थित हजारों आंखों को नम कर दिया।
धर्म सत्ता के द्वार पहुची राज सत्ता
सिवनी। जिले की इस पावन धरा पर आज यह दृश्य दिखायी देने लगा कि मानो राज सत्ता धर्म सत्ता के द्वार पहुच गई हो । ऐसी अनुभूति तब हुयी जब जिले की बेटी और हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल उर्मिला सिंह राष्ट्र सन्त तरुण सागर जी की धर्म सभा में पहुची और उन्हें मुनिवर ने अपना आशीZवाद दिया। हजारों धर्म प्रमियों के बीच महामहिम ने उनके श्री चरणों में नमन किया और उनकी कृपा बनाये रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि महावीर के सत्य और अहिंसा के दो शब्दों से गांधी ने देश को आजादी दिलायी थी। आज तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन देश के युवाओं को दिशा दे रहें हैं। बाक्स

Sunday, March 28, 2010

मैंने राजनीति नहीं हमेशा जन सेवा की हैं: उर्मिला सिंह
ऐतिहासिक गरिमामय सम्मान समारोह में किया गया महामहिम का सर्व दलीय सम्ममान

सिवनी। अपने राजनैतिक जीवन में मैंने कभी राजनीति नहीं की ब्लकि उसे हमेशा जन सेवा का माध्यम माना हैं। इसीलिये शायद ईश्वर ने मुझे उस हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया हैं जिसमें कई सिद्ध देव स्थान हैं। आपने जिस अपनेपन से मेरा इतना अधिक गरिमामय स्वागत किया हैं कि उसका आभार व्यक्त करने के लिये मेरे पास शब्द ही नहीं हैं।
उक्ताशय के विचार व्यक्त करते हुये हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती उर्मिला सिंह इतनी अधिक भावुक हो गईं थीं कि उनकी आवाज थरथरा गई थी। आपने अपने भाषण में आगे कहा कि आप सभी ने आज इतना अधिक स्नेह और अपना पन दिया हैं कि मुझे ऐसा महसूस ही नही हो रहा हैं कि मैं किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हंूं ब्लकि मैं ऐसा महसूस कर रहीं हंूं कि कई दिनों बाद मैं अपने घर में हूंं। मैं इस जिले की बेटी हंूं,बहन हंूं आप सभी की भावनाओं को समझती हंूं।मैं आप सभी को स्नेह भरा आमन्त्रण भी देती हूंं कि आप देव दर्शन के लिये हिमाचल प्रदेश आयें। मेरा विश्वास हैं कि आपके जिस स्नेह और आशीZवाद ने मुझे जीवन में सफलता की जिस मंजिल तक पहुंचाया हैंं वह हमेशा मेरे साथ बना रहेगा। जिले की बेटी हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल महामहिम श्रीमती उर्मिला सिंह का पदभार ग्रहण करने के बाद जिले की सीमा खवासा में दोपहर लगभग 2 बजे आगमन हुआ जहां सम्मान समारोह आयोजन समिति के सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल एवं राजकुमार पप्पू खुराना ने उनकी आगवानी कर स्वागत की शुरुआत की थी। उसके बाद में कुरई में नागरिकों ने उनका स्वागत किया। कलबोड़ी स्थित राम मन्दिर में आपने पूजा अर्चना की। शामलगभग चार बजे उनका काफिले ने सिवनी नगर में प्रवेश किया जहां गंज,छिन्दवाड़ा चौक,भारद्वाज लॉज,शंकर मढ़िया,नगरपालिका,बस स्टेन्ड,जनपर पंचायत और रानी दुगाZचती प्रतिमा के सामने आपका भावभीना स्वागत किया गया। सम्मान समिति द्वारा आयोजित समारोह में स्वागत भाषण देते हुये प्रदेश विधान सभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ने कहा कि श्रीमती उर्मिला सिंह जे इस पद पर पहुंच कर जिले को गौरवािन्वत किया हैं। आपने विभिन्न पदों पर रहते हुये जन सेवा की हैं। उन्हें राज्यपाल बनाये जाने के लिये उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति,प्रधानमन्त्री और सोनिया गांधी के प्रति आभार भी व्यक्त किया। प्रदेश के पूर्व मन्त्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन ने अपने संबोधन में कहा कि जब आयोजन समिति के लोग मुझे बुलाने आये तो मैंने उनसे यह कहा कि आप नहीं भी बुलाते तो मैं अवश्य आता क्योंकि उर्मिला सिंह जी की यह उपलब्धि उनकी नहीं वरन समूचे जिले की हैं। इससे वे अकेली नहीं वरन समूचा जिला गौरवािन्वत हुआ हैं। आपने श्रीमती सिंह को बधायी देते हुये उनके उज्जवल भविष्य की कामना भी की हैं। ऐसे गरिमामय गैरदलीय आयोजन के लिये उन्होंने आयोजन समिति की भी तारीफ करते हुये आभार व्यक्त किया। इंका नेता आशुतोष वर्मा ने स्वतन्त्रता संग्राम में आपके पारिवार की भूमिका पर प्रकाश डालते हुये कहा कि गांव की चौपाल से भोपाल और दिल्ली के गलियारों तक में पहुचकर भी उर्मिला सिंह जी के स्वभाव में कभी कोई अन्तर नहीं आया इसलिये आज वे राज्पाल जैसे संवैधानिक पद पर पहुंची हैं। वैसे तो कई राजनेताओं ने राजनीति में ऊंंचाइयों को छुआ हें लेकिन वहां पहुंचकर उन्हें नीचे दिखना ही बन्द हो जाता हैं। आपने कहा कि उर्मिला सिंह की निष्ठा,समर्पण,लगन और आरोपहीन लंबा राजनैतिक जीवन हम लोगों के लिये प्रेरणा स्त्रोत है। जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चन्देल ने अपने उदबोधन में कहा कि आपने समूचे जिले को ऐसा गौरव प्रदान किया है जिससे जिला आज तक महरूम था। आपने जिला पंचायत की ओर अभिनन्दन करते हुये कहा कि इससे ना केवल जिला वरन समूचा प्रदेश गौरवािन्वत हुआ हैं। इंका नेता राजकुमार खुराना ने कहा कि श्रीमती उर्मिला सिंह ने इन ऊंचाइयों तक पहुंच कर यह साबित कर दिया हैं कि प्रतिभायें संसाधनों की मोहताज नहीं होती हैं। आपने उन्हें बधायी देतें हुये उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। पूर्व विधायक नरेश दिवाकर ने अपने उदबोधन में कहा कि उर्मिला सिंह की सादगी उनके व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आपने जिले को जो गौरव दिलाया हें उसके लिये हम उन्हें बधाई देते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र गुप्त ने कहा कि सन 1977 में हम लोगों ने साथ ही चुनाव लड़ा था। उन्होंने अपने मातृ संगठन में वापस जाकर अपना जो राजनैतिक सफर शुरू किया तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज उन्होंने जिले की माटी को यह गौरव हासिल कराया हैं। आयोजन समिति की ओर से महामहिम उर्मिला सिंह जी को शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह दिया गया। अभिनन्दन पत्र का वाचन समिति के सदस्य प्रसन्न मालू ने किया जिसे संजय भारद्वाज,प्रदीप राय और संजय बघेल ने उन्हें भेंट किया। महामहिम उर्मिला सिंह जी को विभिन्न राजनैतिक दलों,सामाजिक,व्यापारिक,शासकीय कर्मचारी संगठनों और जातीय संगठनों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने शाल और श्रीफल से सम्मानित किया।इनमें डॉं. ढ़ालसिंह बिसेन पूर्व मन्त्री,श्री नरेश दिवाकर पूर्व विधायक, हजारीलाल हेडाउ, सचिव जिला भा.क.पा., सोहन पटेल, सचिव जिला मा.क.पा., सैयद मजहर अली, महासचिव सदभाव,श्री सुदशZन बाझल, अध्यक्ष जिला भाजपा एवं दिगंबर जैन पंचायत, वेद सिंह ठाकुर जिला किरार समाज, पण्डित महेश प्रसाद त्रिवारी अध्यक्ष जिला बहम्रण समाज,डॉ. प्रमोद राय, अध्यक्ष जिला हैहय कलचुरी समाज, हरदास मल दूदानी, मुखी, सिंधी पंचायत, अरविन्द सिंह राजपूत, अध्यक्ष जिला राजपूत समाज,विनोद यादव,विजय अग्रवाल,आशीष अग्रवाल,जिला अग्रवाल समाज, अध्यक्ष जिला यादव महा सभा,,मुकेश चीकू सक्सेना, अध्यक्ष जिला कायस्थ समाज,अर्जुन ककोडिया,,यशपाल भलावी,अशोक सिरसाम,मेहतलाल बरकड़े, जिला आदिवासी समाज,गोविन्द कश्यप, अध्यक्ष मछुआ समाज,िशवराम वेन, अध्यक्ष बंसकार समाज,मोतीलाल वास्त्री, सेटिया धोबी समाज,मनोज मर्दन त्रिवेदी, नगर अध्यक्ष श्रमजीवी पत्रकार संघ,संजय सिंह जिला प्रेस क्लब,डी.बी. नायर, अध्यक्ष उपभोक्ता काग्रेस,एल.एस. सिसोदिया, जिला कुर्मी समाज,एन.के वर्मा पेंशनर एसोसियेशन, अखिलेश यादव, अनुराग अग्रवाल, अध्यक्ष समाजिक कल्याण एवं विधिक जन चेतना समिति, शंकर लाल सोनी महावीर व्यायाम शाला,के.के यादव अध्यक्ष पिछडा वर्ग संगठन,प्रकाश नामदेव म.प्र. कर्मचारी काग्रेस, विपनेश जैन अध्यक्ष जिला राज्य अध्यापक संघ, प्रदीपराय प्रंातीय सचिव म.प्र. िशक्षा काग्रेस,सुरेश दुबे, अध्यक्ष जिला िशक्षक काग्रेस,महेन्द्र पण्डया, अध्यक्ष तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ,विजय शुक्ला, अध्यक्ष जिला िशक्षक संघ,,जी.एम. ठाकरे, संभागीय अध्यक्ष वन कर्मचारी संघ, समीर वर्मा, अध्यक्ष वन कर्मचारी संघ, सन्तोष शर्मा, अध्यक्ष बिजली कर्मचारी महा संघ, आसदुल्ला खान, अध्यक्ष निशक्तजन बिजली कर्मचारी संघ,नरेश मिश्रा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट,ऊधवदास आसवानी, अध्यक्ष किराना व्यापारी संघ,चन्द्रभान सिंह ठाकुर,बस आरेटर संघ,अनिल सिघानिया,गल्ला व्यापारी संघ,विनोद कुमार रवलानी, कपडा व्यापारी संघ,गौरी शंकर शर्मा, अध्यक्ष सर्व व्यापारी संघ बुधवारी बाजार, बब्बू पहलवान अध्यक्ष मछवारा समिति,मो. असलम भाई,लीला त्रिवारी लखंनादौन,श्याम अग्रवाल,महानेद राहंगडाले,पवन दिवाकर,महेन्द्र मिश्र,आलो बाजपेयी, चित्रलेखा नेताम अध्यक्ष जनपद पंचयात घंसौर,रवीन्द्र सिंह कालरा,करतार सिंह बघेल अध्यक्ष भूमि विकास बैंक,जवाहरलाल राय,आसिफ इकबाल,नारायणी चीकू सक्सेना, नब्गू भाई पार्षद,जीवनलाल गौर,बहादुर सनोड़िया,अशोक सनोड़िया,अशोक ठाकुर,लल्ू बघेल, देवीसिंह चौहान,राकेश चौहान,अजय माना ठाकुर,ओ.पी.सिहारे,विनोद नामदेव,आदि शामिल हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन समिति के सदस्य जकी अनवर ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वश्री अनिल चौरसिया,राजिक अकील, किरण अवधिया,सुनील अग्रवाल,मजहर अली,आजम अली,रमा ठाकुर,रवीन्द्र भारद्वाज,जयदीप बैस,रघुवीर बेदी, राकेश अग्रवाल,गोविन्द कश्यप, नरेश अग्रवाल,अरविन्द करोसिया, शिवराम बैन,अनन्त यादव,अजय भारद्वाज,प्रदीप बघेल, बाबा तिवारी,सुनील बघेल,राजा भारद्वाज, सुहेल अनवर,हर्ष अग्रवाल आदि का विशेष योगदान रहा।

Wednesday, March 24, 2010

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भाजपा के सत्रह में से ग्यारह मंड़लों चुनाव हुये
अधिकृत घोषणा नहीं : गेन्द संगठन मन्त्री त्यागी के पाले में : चार मंड़लों में बनी सर्व सम्मति
सिवनी। जैसी संंभावना व्यक्त की गई थी वैसा ही कुछ हो रहा हैं भाजपा के संगठन चुनावों में। चुनावों के नाम मनोनयन का खेल खेला जा रहा हें। जिन मंड़लों में एक से ज्यादा नाम आए उनकी सूची चुनाव अधिकारियों से संगठन मन्त्री द्वारा बुलवा ली गई हैं।जिनकी अधिकृत घोषणा जिला मुख्यालय से की जायेगी। उललेखनीय हें कि जिले में भाजपा के 17 मंड़ल हैं। जिनमें से 11 मंड़लों के चुनाव होने का दावा किया जा रहा हैं। बताया जाता है कि इनमें से मात्र चार मंड़लों के चुनाव परिणामों की घोषणा की गई हें जिनमें गंगेरुआ,धारना,केवलारी और उगली मंड़लों सर्वसम्मति बनने का दावा किया जा रहा है। भाजपा के जिला संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी के निर्देशानुसार किसी भी वर्तमान मंड़ल अध्यक्ष को दोबारा चुनाव नहीं लड़ना हैं। जिन ग्यारह मंड़लों में चुनाव हुये है उनमें से सात मंड़लों में सर्वसम्मति नही बन पायी हैं। सभी चुनाव अधिकारियों ने इनकी सूची संगठन मन्त्री को सौंप दी है। अब वे जिले के भाजपा नेताओं की सलाह से इसका निर्णय करेगें तब सभी नामों की अधिकृत घोषणा की जायेगी। भाजपा के शेष बचे 6 मंड़लों के चुनाव क्यों रुके हेंर्षोर्षो और कब इनका चुनाव होगार्षोर्षो इसकी जानकारी अभी किसी को भी नहीं हैं। भाजपा कार्यकत्ताZओं में इस तरह से चुनाव कराने को लेकर तरह तरह की चर्चायें हो रहीं हें और उनका यह मानना हैं कि संगठन को जेबी संगठन बनाने की यह नेताओं की चाल हैं ताकि वे संगठन पर अपना कब्जा बनाये रख सकें।
सदभाव का कवि सम्मेलन और मुशायरा 23 अप्रेल को
देश के ख्याति प्राप्त शायर और कवि आंमत्रित : लाफ्टर चेलेज विनर एहसान कुरैशी भी शामिल होंगेंं
सिवनी। प्रति वषाZनुसार इस वर्ष भी सदभाव का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा होने जा रहा हैं। इस हेतु देश के ख्याति प्राप्त कवियों और शायरो को आमन्त्रित किया गया हैं। सदभाव के प्रचार सचिव अवधेश तिवारी ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया हैं कि जिले की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था सदभाव द्वारा आगामी 23 अप्रेल को एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया जा रहा हैे। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि सन 1998 से सदभाव हर साल एक ही मंच से देश की गंगा जमुनी संस्कृति के अनुसार एक ही मंच से हिन्दी गीतो और उर्दू गजलों की रस वषाZ करते आ रही हैे। इस साल इस आयोजन में देश के ख्याति प्राप्त शायरों और कवियों को आमन्त्रित किया गया हैं। इनमें नज़र बिजनोरी बाम्बे,,यशपाल शर्मा ÞयशÞ फिरोजाबाद, राज इलाहाबादी इलाहाबाद,अर्जुन सिंह चान्द झांसी, कैफ काकोरबी,मुन्नवर आजमी सागर,मोहतरमा रुखसार बलरामपुरी,सुश्री प्रज्ञा विकास रायबरेली,मोहतरमा परवीन नूरी कानपुर, सुश्री संगीता सरल, भोपाल,त्रिपाठी मुजअवर मालेगांव को संस्था ने आमन्त्रित किया है। इस आयोजन में सदभाव के मंच से लाफ्टर चेलेंज तक का सफर तय करके देश में जिले का नाम रोशन करने वाले एहसान कुरैशी भी शामिल होंगें।

Monday, March 22, 2010

मलारा पुल पर शुरू हुयी श्रेय लेने की होड़-
जिला भाजपा के महामन्त्री डॉ. प्रमोद राय ने प्रेस केा जारी एक विज्ञप्ति में जिले के इकलौते इंका विधायक और प्रदेश काग्रेस के उपाध्यक्ष हरवंश सिह पर आरोप लगाया हैं कि वे केवल श्रेय लेने की राजनीति करते हैं। बैनगंगा नदी के जिस मलारा घाट के पुल बनने के लिये स्वीकृत के लिये मिले 239 करोड़ की रुपये की राशि की स्वीकृति का श्रेय वे हरिवंश सिंह ले रहें हैं उसे मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने 2008 में जन आशीZवाद रैली में घोषित किया था। यहां डॉ. प्रमाद राय भी यह परहेज गये कि इस पुल की मांग भाजपा के पूर्व मन्त्री एवं केवलारी क्षेत्र के संभावित भाजपा प्रत्याशी डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन अपने भाघण में कही थी और यह भी उल्लेख किया था कि बरसात में केवलारी टापू बन जाता हैं। प्रमोद राय ने अपनी विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया हैं कि दस साल तक दिग्गी दरबार में हरवंश सिंह की गिनती प्रमुख मन्त्रियों में हुआ करती थी। इसी के चलते बिना स्वीकृति के ही मलारा में शिलान्यास भी कर दिया था।उल्लेखनीय है कि हाल ही में स्वीकृति के बाद हरवंश सिंह ने आभार व्यक्त करने के साथ साथ पी.डबल्यू.डी. मन्त्री को शिलान्यास करने के लिये आन्त्रमित भी किया हैं। ऐसी परिस्थिति में यदि वे शिलान्यास के लिये आते हैं तो इशारे पर ही इसका विरोध हो सकता हैं कि कांग्रेस सरकार में इसका शिलान्यास तो हो चुका था फिर भाजपा सरकार दोबारा शिलासन्यास क्यों करा रही हैंर्षोर्षोदृढ़ इच्छा शक्ति की बात का उल्लेख करते हुये यह भी कहा गया हैं कि इसी के चलते पूर्व मन्त्री विमला वर्मा ने भीमगढ बांध बनवाया और आज यह क्षेत्र मिनी पंजाब कहलाता है लेकिन हरवंश सिंह में इसकी कमी है।इसी कारण वे झूठी वाह वाही लूटने के लिये ऐसी हरकतें करते रहते हैं।़ इसके लिये वे जनता से माफी मांगे।

Sunday, March 21, 2010


भाजपा पदाधिकारी कार्यकत्ताZओं की राय के बजाय नेताओं की जेब से आयेंगें-
हमने अपने पिछले अंक में ही यह आशंका व्यक्त की थी कि भाजपा में इस बार चुनाव के बजाय मनोनयन की आहटें सुनायी दे रहीं हैं। जिले में मंड़ल के चुनाव होना था। सभी मंड़लों के चुनाव अधिकारी अपने अपने मंड़लों में पहुच कर चुनाव करा चुके हैं और बताया जाता हैं कि सभी परिणाम संगठन मन्त्री सन्तोष त्यागी के पास दे दिये गये हैं। भाजपायी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी किसी भी मंड़ल के चुनाव परिणाम की अधिकृत घोषणा नहीं की जा सकी हैं। राजरोग से ग्रस्त भाजपा में भी इस बार भारी गुटबन्दी हैं। जिलें में भाजपा भी कई गुटों में विभाजित हैं और एक दूसरे को कोई भी फूंटीं आंख नहीं सुहा रहा हैं। सिद्धान्तिक रूप से संगठन मन्त्री ने यह भी तय कर दिया हैं कि किसी भी वर्तमान मंड़ल अध्यक्ष को दोबारा रिपीट नहीं किया जायेगा। इसलिये वर्तमान मंड़ल अध्यक्षों में भी चुनाव में प्रति रुचि नहीं के बराबर हैं। इस बार यह भी तय कर लिया गया है कि यदि मंड़ल के चुनाव में एकमतेन निर्णय नहीं होता तो विवाद जिले में चन्द नेताओं के साथ बैठकर संगठन मन्त्री निपटायेेंंगें। इसी तरह यदि जिले में एकमतेन फेसला नहीं होता तो मामला प्रदेश में चला जायेगा। इसलिये इस बार भाजपा में कार्यकत्ताZओं के बीच यह चर्चा आम हो गई हैं कि संगठन के अधिकांश पदाधिकारी कार्यकत्ताZओं की राय के बजाय नेताओं की जेब से आयेंगें।कई भाजपा नेता तो यह कहने में भी कोई संकोच नहीं कर रहें कि इस बार भाजपा के चुनाव कांग्रेस की उसी तर्ज पर होने वाले हें जिसकी भाजपा हमेशा आलोचना किया करती थी। अपने मतभेदों को सड़क पर आने से बचने के लिये भाजपा ने जो ये रणनीति बनायी हैं वो दीघZकाल में उसके लिये लाभदायक होगी या नहीं र्षोर्षो यह तो वक्त ही बतायेगा।

Saturday, March 20, 2010


अब हर हफ्ते क्यों नहीं आ रहें हैं के.डी.-
जिले में माला पहनने ही आते हैं के.डी.। याने आधे जिले के सांसद। आजकल ये खबर अखबारों की सुखीZ बनी हुयी हैं।लोक सभा चुनाव के दौरान अपने भाषण में वे कहा करते थे कि सप्ताह में तीन दिन वे सिवनी में रहा करेंगें। लेकिन जीतने के बाद नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही निकला। हर सप्ताह ना उन्हें आना था और ना ही वे आये। इस बीच दो बार बजट और रेल बजट पेश हो चुका,फोर लेन का मामला उलझा रह, बड़ी रेल का मामला अटका रहा लेकिन सांसद के रूप में के.डी.देशमुख की कहीं भी कोई प्रभावी भूमिका नहीं दिखी। केन्द्र में कांग्रेस और प्रदेश में भाजपा की सरकार रहने के कारण यहां के जनप्रतिनिधि कुछ करने के बजाय एक दूसरे के पाले में गेन्द डालकर अपने कत्तZव्यों की इतिश्री कर लेते हैं।यदि घोखे से कुछ मिल गया तो श्रेय लेने की ऐसी होड़ मचती है कि बस देखते ही बनती हैं। अभी भी वक्त है कि सांसद नये बने इस संसदीय क्षेत्र में इस जिले की विधानसभाओं पर भी ध्यान दें जहां से उन्हें भारी बढ़त मिली थी। ऐसा ही हाल इंका प्रत्याशी रहे विश्वेश्वर भगत का भी हैं जिन्होंने चुनाव के बाद एक बार भी पलट कर सिवनी की ओर देखा तक नहीं हैं। इन सब कारणों से लोक सभा क्षेत्र समाप्त होने का दुख लोगों का और बढ़ जाता हैं।
-विधानसभा के चालू सत्र में जिले से सम्बंधित प्रश्न अन्य विधायकों द्वारा उठाया जाना यहां के विधायकों के लिये क्या शर्म का विषय नहीं हैं
नप के भ्रष्टाचार से सम्बंधित मामला इंका विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने उठाया तो आदिवासियों के जंगल से सम्बंधित मामला भाजपा विधायक प्रेम नारायण ठाकुर ने उठाया हैं। इस सत्र में सदन रेल्वे से सम्बंधित कई अशासकीय विधेयक भी विधायकों ने पेश किये जिनमें नई रेल लाइनों के भी प्रस्ताव थे। लेकिन जिले के किसी भी विधायक ने श्रीधाम (गोटेगांव) से रामटेक नई रेल लाइन के लिये कोई अशासकीय संकल्प पेश करने की जेहमत नहीं उठायी जो कि जिले के विकास के लिये एक अति महत्वांकांक्षी परियोजना हैं। इस परियोजना की घोषणा तत्कालीन कांग्रेसी प्रधानमन्त्री स्व. पी.व्ही.नरसिंहाराव ने 6 जनवरी 1996 को झोतेश्वर में जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानन्द जी सरस्वती महाराज की उपस्थिति में एक आम सभा में की थी। इसके लिये सालों कई आन्दोलन भी हुये। लेकिन इन जन आन्दोलनों को भी विधायकों ने नज़र अन्दाज कर दिया। जिले के तीन भाजपा विधायकों नीता पटेरिया,शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले ने अन्य विधायकों की तरह अशासकीय संकल्प सदन में पेश करना क्यों नहीं जरूरी समझार्षोर्षो यह समझ से परे हैं।

Thursday, March 18, 2010

breaking news

उच्च न्यायालय ने आज जारी किया स्थगन आदेश
सदन में की गई थी सी.एम.ओ. मकबूल खॉन के निलंबन की घोषणा

सिवनी। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकार मकबूल खॉन के विधानसभा में घोषित किये गये निलंबन आदेश पर स्थगन आदेश पारित कर दिया हैें।
न्यायमूर्ति राजेन्द्र मैनन ने आज उनके समक्ष प्रस्तुत की गई एक याचिका पर निर्णय सुनाते हुये सिवनी नगरपालिका के सी.एम.ओ. मकबूल खॉन के निलंबन आदेश पर स्थगन दे दिया हैं।

उल्लेखनीय हैं कि दुगनी कीमत पर शहर की तीन घटिया सड़के बनाने की प्रमाण सहित श्िाकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने लगभग तीन साल पहले की थी। लोकायुक्त ने जांच प्रतिवेदन सरकार के पास कार्यवाही हेतु भेजा था। राज्य शासन ने भाजपा शासित पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष पार्वती जंघेला, उपाध्यक्ष सन्तोष उर्फ नान्हू पंजवानी तथा सी.एम.ओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बताया जाता हें कि खॉन के जवाब के बाद यह नोटिस निरस्त कर दिया गया था एवं पूर्ववर्ती सी.एम.ओ. को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई थी। इसके बाद राज्य शासन के निर्देश पर जिला कलेक्टर ने परिषद के सत्रह पार्षदों को पद से पृथक करने हेतु नोटिस भेजा था जिस पर कार्यवाही उनके न्यायालय में लंबित हैं। विगत दिनों सांची के कांग्रेस विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने विधानसभा में इस सन्दर्भ में एक प्रश्न पूछा कि सब कुछ प्रमाणित होने के बाद शासन ने अभी तक क्या कार्यवाही की हैर्षोर्षो इस पर नगरीय निकाय मन्त्री बाबूलाल गौर ने सदन में यह घोषित किया था कि सरकार विनी नगरपालिका के सी.एम.ओ. मकबूल खॉन को निलंबित कर दिया है। इस निलंबन आदेश के विरुद्ध मकबूल खॉन ने हाई कोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत कर नियम विरुद्ध जारी किये गये इस आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने विद्वान अधिवक्ताओं के तर्कों को स्वीकार करते हुये आज प्रारंभिक सुनवायी के बाद इस आदेश पर स्थगनादेश जारी कर दिया हैं। श्री खॉन की ओर से पी.एन.दुबे,ए.एम.लाल और सुधीर सक्सेना ने पैरवी की थी।

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आपबीती
हम तीन लोगों ने मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में कांग्रेस को मजबूत बनाने का बीड़ा उठाया। हम तीनों याने मैं, आशुतोष वर्मा,राजकुमार पप्पू खुराना और प्रसन्न मालू। हम तीनों भी कोई तोपचन्द नहीं हैं। तीनों ही सिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं। हार के दर्द का एहसास तीनों को ही हैं। तीनों ही यह भी जानते हैं कि हमारी हार का कारण क्या हैर्षोर्षो
कांग्रेस के हम तीनों लोंगों ने आपसी मतभेदों को दूर कर यह निर्णय लिया कि हार के दर्द सें अब कांग्रेस को मुक्त कराना हैं। नगर पालिका सिवनी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये संजय भारद्वाज को उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। टिकिट मिलने के पहले से ही चन्द कांग्रेसी यह प्रचारित करने लगे कि तीन हारे हुये नेताओं के प्रत्याशी हैं संजय भारद्वाज। हम तीन के अलावा अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष जकी अनवर भी हमसफर बने हुये थे। संजय भारद्वाज को टिकिट भी मिली। शहर में कांग्रेसी एकता का सन्देश भी गया क्योंकि जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह भी चुनाव प्रचार में गलियों में घूमे। वातावरण भी अच्छा बना। लेकिन कांग्रेस को मजबूत बनाने की योजना धरी की धरी रह गई ब्लकि चुनाव हारने वालों में एक नाम संजय भारद्वाज का और जुड़ गया। पिछले कई सालों से कांग्रेसियों के बीच में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ हैं कि यहां चुनाव लड़ने के लिये जो आशीZवाद दिया जाता हैं उसमें भी दोनों हाथों का उपयोग शरीर में अलग अलग जगह पर किया जाता हैं जिसका पता चुनाव के परिणाम आने के बाद ही लगता हैं। दोनों हाथों से आशीZवाद पाकर भुगतने वाले कांग्रेसियों की संख्या की अब जिले में बहुत अधिक हो चुकी हैं।
यहां यह बताना भी जरूरी हैं कि कांग्रेस को जिले में मजबूत करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ीर्षोर्षो एक जमाना था जब 1977 की जनता लहर में भी कांग्रेस ने जिले की पांचों विधानसभा सीटें जीत कर समूचे उत्तर भारत में एक रिकार्ड बनाया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों से कांग्रेस लगातार हार रही हैं। जिले की पांच में से दो,सिवनी और बरघाट,क्षेत्र में पिछले पांच चुनावों से, लखनादौन में दो चुनावों से,सिवनी नगर पालिका के अध्यक्ष पद में एक उप चुनाव छोड़कर सीधे तीनों चुनावों में भी कांग्रेस को हार का मुह देखना पड़ा हैं। ऐसा नहीं हैं कि कांग्रेस सिर्फ हारती ही रही। जनता से सीधे होने वाले चुनावों में हारने के बाद सदस्यों से होने वाले चुनावों में कांग्रेस को जीतने की महारत हासिल हैं तभी तो लगातार चौथी बार जिला पंचायत तथा तीसरी बार नगपपालिका सिवनी में उपाध्यक्ष बनाने में नेता सफल रहें हैं। सिर्फ केवलारी एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र हैं जहां से लगातार चौथी बार कांग्रेस के हरवंश सिंह चुनाव जीतेें हैं जो आज विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं।1990 के चुनाव में सिवनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हारने वाले हरवंश सिंह ने 1993 का चुनाव सिवनी के बजाय केवलारी विधानसभा क्षेत्र से लड़कर जीता था।
नगर पालिका का चुनाव हारने के बाद हम सभी ने सोचा कि अब जिले में कांग्रेस को मजबूत करने लिये योजना बनानी चाहिये। हमने पूरे जिले में उस कांग्रेस को तलाशना शुरू किया जिसे हम मजबूत बनाना चाहते थे। जिले के आठों ब्लाकों में हमने कांग्रेस को बहुत तलाश किया लेकिन कांग्रेस हमें कहीं मिली ही नहीं। हॉं कांग्रेस नेता और उनके समर्थक जरूर मिले जिन्हें मजबूती देने कही कोई जरूरत ही नहीं दिख रही थी। वे तो सभी अपने आप में इतने मजबूत थे कि लोक सभा और विधानसभा चुनाव वाले महीनों में भी कांग्रेसी ही रहते तो कांग्रेस के कमजोर होने सवाल ही पैदा नहीं होता। कांग्रेस के बजाय ढ़ूढ़ने पर कहीं हमें भैया,तो कहीं भागीरथ,तो कहीं किसान पुत्र,तो कहीं विकापुरुष,तो कहीं दादा, तो कहीं दादा ठाकुर तो अधिकांश जगह साहब ही दिखे। कांग्रेस तो मानो जैसे कहीं गुम हो गई हो। लेकिन हम लोगों का यह भी विश्वास था कि कांग्रेस कभी और कहीं भी खत्म तो हो ही नहीं सकती हैं। इसलिये जब और बारीकी से उसे तलाश किया तो पता चला कि जिले में समूची कांग्रेस ही कांग्रेस नेता में समाहित हो गई थी। नेता तो राजनैतिक रूप से जीवित हैं लेकिन कांग्रेस मृतप्राय हो चुकी हैं और आज भी उसके आस पास ही भटक रही हैं।
हमारे जिले में नीबू वाले बाबा के नाम से मशहूर तो कोई और हैं लेकिन नीबू का रस किसी और का असर करता हैं। दूध में नीबू का रस डाल तो दूध फटना तो आम बात हैं लेकिन हमारे यहां का मशहूर नीबू का रस ऐसा है कि वो फटे दूध में भी असर दिखाता हैं।ऐसा ही कुछ कमाल बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के प्रवास के दौरान देखने को मिला। कांग्रेस के अन्दर ही शिकारी भी हैं और शिकार भी। कई तो ऐसे उदाहरण भी हैं कि एक ही शिकारी से एक ही शिकार कई बार शिकार हो चुकने के बाद एक बार फिर शिकार होने के लिये तैयार खड़ा दिखायी दे रहा हैं। अब देखना यह हैं कि शिकारी और शिकार की यही परंपरा आगे भी चलती रहेगी या फिर कांग्रेस को मजबूत करने के हम लोगों द्वारा उठाये बीड़े को सफल बनाने के लिये कांग्रेसी आगे आयेंगें।आशुतोष वर्मासिवनी म.प्र.09425174640
उच्च न्यायालय ने आज जारी किया स्थगन आदेश
सदन में की गई थी सी.एम.ओ. मकबूल खॉन के निलंबन की घोषणा

सिवनी। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकार मकबूल खॉन के विधानसभा में घोषित किये गये निलंबन आदेश पर स्थगन आदेश पारित कर दिया हैें। न्यायमूर्ति मैनन ने आज उनके समक्ष प्रस्तुत की गई एक याचिका पर निर्णय सुनाते हुये सिवनी नगरपालिका के सी.एम.ओ. मकबूल खॉन के निलंबन आदेश पर स्थगन दे दिया हैं। उल्लेखनीय हैं कि दुगनी कीमत पर शहर की तीन घटिया सड़के बनाने की प्रमाण सहित श्िाकायत इंका नेता आशुतोष वर्मा ने लगभग तीन साल पहले की थी। लोकायुक्त ने जांच प्रतिवेदन सरकार के पास कार्यवाही हेतु भेजा था। राज्य शासन ने भाजपा शासित पालिका की तत्कालीन अध्यक्ष पार्वती जंघेला, उपाध्यक्ष सन्तोष उर्फ नान्हू पंजवानी तथा सी.एम.ओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद राज्य शासन के निर्देश पर जिला कलेक्टर ने परिषद के सत्रह पार्षदों को पद से पृथक करने हेतु नोटिस भेजा था जिस पर कार्यवाही उनके न्यायालय में लंबित हैं। विगत दिनों सांची के कांग्रेस विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी ने विधानसभा में इस सन्दर्भ में एक प्रश्न पूछा कि सब कुछ प्रमाणित होने के बाद शासन ने अभी तक क्या कार्यवाही की हैर्षोर्षो इस पर नगरीय निकाय मन्त्री बाबूलाल गौर ने सदन में यह घोषित किया था कि सरकार विनी नगरपालिका के सी.एम.ओ. मकबूल खॉन को निलंबित कर दिया है। इस निलंबन आदेश के विरुद्ध मकबूल खॉन ने हाई कोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत कर नियम विरुद्ध जारी किये गये इस आदेश को निरस्त करने की मांग की थी। जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने विद्वान अधिवक्ताओं के तर्कों को स्वीकार करते हुये आज प्रारंभिक सुनवायी के बाद इस आदेश पर स्थगनादेश जारी कर दिया हैं। श्री खॉन की ओर से पी.एन.दुबे,ए.एम.लाल और सुधीर सक्सेना ने पैरवी की थी।

Wednesday, March 17, 2010

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मजबूत करने के लिये मिली ही नहीं कांग्रेस
हम तीन लोगों ने मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में कांग्रेस को मजबूत बनाने का बीड़ा उठाया। हम तीनों याने मैं, आशुतोष वर्मा,राजकुमार पप्पू खुराना और प्रसन्न मालू। हम तीनों भी कोई तोपचन्द नहीं हैं। तीनों ही सिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं। हार के दर्द का एहसास तीनों को ही हैं। तीनों ही यह भी जानते हैं कि हमारी हार का कारण क्या हैर्षोर्षो कांग्रेस के हम तीनों लोंगों ने आपसी मतभेदों को दूर कर यह निर्णय लिया कि हार के दर्द सें अब कांग्रेस को मुक्त कराना हैं। नगर पालिका सिवनी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये संजय भारद्वाज को उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। टिकिट मिलने के पहले से ही चन्द कांग्रेसी यह प्रचारित करने लगे कि तीन हारे हुये नेताओं के प्रत्याशी हैं संजय भारद्वाज। हम तीन के अलावा अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष जकी अनवर भी हमसफर बने हुये थे। संजय भारद्वाज को टिकिट भी मिली। शहर में कांग्रेसी एकता का सन्देश भी गया क्योंकि जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह भी चुनाव प्रचार में गलियों में घूमे। वातावरण भी अच्छा बना। लेकिन कांग्रेस को मजबूत बनाने की योजना धरी की धरी रह गई ब्लकि चुनाव हारने वालों में एक नाम संजय भारद्वाज का और जुड़ गया। पिछले कई सालों से कांग्रेसियों के बीच में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ हैं कि यहां चुनाव लड़ने के लिये जो आशीZवाद दिया जाता हैं उसमें भी दोनों हाथों का उपयोग शरीर में अलग अलग जगह पर किया जाता हैं जिसका पता चुनाव के परिणाम आने के बाद ही लगता हैं। दोनों हाथों से आशीZवाद पाकर भुगतने वाले कांग्रेसियों की संख्या की अब जिले में बहुत अधिक हो चुकी हैं। यहां यह बताना भी जरूरी हैं कि कांग्रेस को जिले में मजबूत करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ीर्षोर्षो एक जमाना था जब 1977 की जनता लहर में भी कांग्रेस ने जिले की पांचों विधानसभा सीटें जीत कर समूचे उत्तर भारत में एक रिकार्ड बनाया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों से कांग्रेस लगातार हार रही हैं। जिले की पांच में से दो,सिवनी और बरघाट,क्षेत्र में पिछले पांच चुनावों से, लखनादौन में दो चुनावों से,सिवनी नगर पालिका के अध्यक्ष पद में एक उप चुनाव छोड़कर सीधे तीनों चुनावों में भी कांग्रेस को हार का मुह देखना पड़ा हैं। ऐसा नहीं हैं कि कांग्रेस सिर्फ हारती ही रही। जनता से सीधे होने वाले चुनावों में हारने के बाद सदस्यों से होने वाले चुनावों में कांग्रेस को जीतने की महारत हासिल हैं तभी तो लगातार चौथी बार जिला पंचायत तथा तीसरी बार नगपपालिका सिवनी में उपाध्यक्ष बनाने में नेता सफल रहें हैं। सिर्फ केवलारी एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र हैं जहां से लगातार चौथी बार कांग्रेस के हरवंश सिंह चुनाव जीतेें हैं जो आज विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं।1990 के चुनाव में सिवनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हारने वाले हरवंश सिंह ने 1993 का चुनाव सिवनी के बजाय केवलारी विधानसभा क्षेत्र से लड़कर जीता था। नगर पालिका का चुनाव हारने के बाद हम सभी ने सोचा कि अब जिले में कांग्रेस को मजबूत करने लिये योजना बनानी चाहिये। हमने पूरे जिले में उस कांग्रेस को तलाशना शुरू किया जिसे हम मजबूत बनाना चाहते थे। जिले के आठों ब्लाकों में हमने कांग्रेस को बहुत तलाश किया लेकिन कांग्रेस हमें कहीं मिली ही नहीं। हॉं कांग्रेस नेता और उनके समर्थक जरूर मिले जिन्हें मजबूती देने कही कोई जरूरत ही नहीं दिख रही थी। वे तो सभी अपने आप में इतने मजबूत थे कि लोक सभा और विधानसभा चुनाव वाले महीनों में भी कांग्रेसी ही रहते तो कांग्रेस के कमजोर होने सवाल ही पैदा नहीं होता। कांग्रेस के बजाय ढ़ूढ़ने पर कहीं हमें भैया,तो कहीं भागीरथ,तो कहीं किसान पुत्र,तो कहीं विकापुरुष,तो कहीं दादा, तो कहीं दादा ठाकुर तो अधिकांश जगह साहब ही दिखे। कांग्रेस तो मानो जैसे कहीं गुम हो गई हो। लेकिन हम लोगों का यह भी विश्वास था कि कांग्रेस कभी और कहीं भी खत्म तो हो ही नहीं सकती हैं। इसलिये जब और बारीकी से उसे तलाश किया तो पता चला कि जिले में समूची कांग्रेस ही कांग्रेस नेता में समाहित हो गई थी। नेता तो राजनैतिक रूप से जीवित हैं लेकिन कांग्रेस मृतप्राय हो चुकी हैं और आज भी उसके आस पास ही भटक रही हैं। हमारे जिले में नीबू वाले बाबा के नाम से मशहूर तो कोई और हैं लेकिन नीबू का रस किसी और का असर करता हैं। दूध में नीबू का रस डाल तो दूध फटना तो आम बात हैं लेकिन हमारे यहां का मशहूर नीबू का रस ऐसा है कि वो फटे दूध में भी असर दिखाता हैं।ऐसा ही कुछ कमाल बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के प्रवास के दौरान देखने को मिला। कांग्रेस के अन्दर ही शिकारी भी हैं और शिकार भी। कई तो ऐसे उदाहरण भी हैं कि एक ही शिकारी से एक ही शिकार कई बार शिकार हो चुकने के बाद एक बार फिर शिकार होने के लिये तैयार खड़ा दिखायी दे रहा हैं। अब देखना यह हैं कि शिकारी और शिकार की यही परंपरा आगे भी चलती रहेगी या फिर कांग्रेस को मजबूत करने के हम लोगों द्वारा उठाये बीड़े को सफल बनाने के लिये कांग्रेसी आगे आयेंगें।आशुतोष वर्मासिवनी म.प्र.09425174640

मजबूत करने के लिये मिली ही नहीं कांग्रेस
हम तीन लोगों ने मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में कांग्रेस को मजबूत बनाने का बीड़ा उठाया। हम तीनों याने मैं, आशुतोष वर्मा,राजकुमार पप्पू खुराना और प्रसन्न मालू। हम तीनों भी कोई तोपचन्द नहीं हैं। तीनों ही सिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार चुके हैं। हार के दर्द का एहसास तीनों को ही हैं। तीनों ही यह भी जानते हैं कि हमारी हार का कारण क्या हैर्षोर्षो कांग्रेस के हम तीनों ने आपसी मतभेदों को दूर कर यह निर्णय लिया कि हार के दर्द सें अब कांग्रेस को मुक्त कराना हैं। नगर पालिका सिवनी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये संजय भारद्वाज को उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। टिकिट मिलने के पहले से ही चन्द कांग्रेसी यह प्रचारित करने लगे कि तीन हारे हुये नेताओं के प्रत्याशी हैं संजय भारद्वाज। हम तीन के अलावा अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष जकी अनवर भी हमसफर बने हुये थे। संजय भारद्वाज को टिकिट भी मिली। शहर में कांग्रेसी एकता का सन्देश भी गया क्योंकि जिले के इकलौते इंका विधायक हरवंश सिंह भी चुनाव प्रचार में गलियों में घूमे। वातावरण भी अच्छा बना। लेकिन कांग्रेस को मजबूत बनाने की योजना धरी की धरी रह गई ब्लकि चुनाव हारने वालों में एक नाम संजय भारद्वाज का और जुड़ गया। यहां यह बताना भी जरूरी हैं कि कांग्रेस को जिले में मजबूत करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ीर्षोर्षो एक जमाना था जब 1977 की जनता लहर में भी कांग्रेस ने जिले की पांचों विधानसभा सीटें जीत कर समूचे उत्तर भारत में एक रिकार्ड बनाया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों से कांग्रेस लगातार हार रही हैं। जिले की पांच में से दो,सिवनी और बरघाट,क्षेत्र में पिछले पांच चुनावों से, लखनादौन में दो चुनावों से,सिवनी नगर पालिका के अध्यक्ष पद में एक उप चुनाव छोड़कर सीधे तीनों चुनावों में भी कांग्रेस को हार का मुह देखना पड़ा हैं। ऐसा नहीं हैं कि कांग्रेस सिर्फ हारती ही रही। जनता से सीधे होने वाले चुनावों में हारने के बाद सदस्यों से होने वाले चुनावों में कांग्रेस को जीतने की महारत हासिल हैं तभी तो लगातार चौथी बार जिला पंचायत तथा तीसरी बार नगपपालिका सिवनी में उपाध्यक्ष बनाने में नेता सफल रहें हैं। सिर्फ केवलारी एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र हैं जहां से लगातार चौथी बार कांग्रेस के हरवंश सिंह चुनाव जीतेें हैं जो आज विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं।1990 के चुनाव में सिवनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हारने वाले हरवंश सिंह ने 1993 का चुनाव सिवनी के बजाय केवलारी विधानसभा क्षेत्र से लड़कर जीता था। नगर पालिका का चुनाव हारने के बाद हम सभी ने सोचा कि अब जिले में कांग्रेस को मजबूत करने लिये योजना बनानी चाहिये। हमने पूरे जिले में उस कांग्रेस को तलाशना शुरू किया जिसे हम मजबूत बनाना चाहते थे। जिले के आठों ब्लाकों में हमने कांग्रेस को बहुत तलाश किया लेकिन कांग्रेस हमें कहीं मिली ही नहीं। हॉं कांग्रेस नेता और उनके समर्थक जरूर मिले जिन्हें मजबूती देने कही कोई जरूरत ही नहीं दिख रही थी। वे तो सभी अपने आप में इतने मजबूत थे कि लोक सभा और विधानसभा चुनाव वाले महीनों में भी कांग्रेसी ही रहते तो कांग्रेस के कमजोर होने सवाल ही पैदा नहीं होता। कांग्रेस के बजाय ढ़ूढ़ने पर कहीं हमें भैया,तो कहीं भागीरथ,तो कहीं किसान पुत्र,तो कहीं विकापुरुष,तो कहीं दादा, तो कहीं दादा ठाकुर तो अधिकांश जगह साहब ही दिखे। कांग्रेस तो मानो जैसे कहीं गुम हो गई हो। लेकिन हम लोगों का यह भी विश्वास था कि कांग्रेस कभी और कहीं भी खत्म तो हो ही नहीं सकती हैं। इसलिये जब और बारीकी से उसे तलाश किया तो पता चला कि जिले में समूची कांग्रेस ही कांग्रेस नेता में समाहित हो गई थी। नेता तो राजनैतिक रूप से जीवित हैं लेकिन कांग्रेस मृतप्राय हो चुकी हैं और आज भी उसके आस पास ही भटक रही हैं। हमारे जिले में नीबू वाले बाबा के नाम से मशहूर तो कोई और हैं लेकिन नीबू का रस किसी और का असर करता हैं। दूध में नीबू का रस डाल तो दूध फटना तो आम बात हैं लेकिन हमारे यहां का मशहूर नीबू का रस ऐसा है कि वो फटे दूध में भी असर दिखाता हैं।ऐसा ही कुछ कमाल बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के प्रवास के दौरान देखने को मिला। कांग्रेस के अन्दर ही शिकारी भी हैं और शिकार भी। कई तो ऐसे उदाहरण भी हैं कि एक ही शिकारी से एक ही शिकार कई बार शिकार हो चुकने के बाद एक बार फिर शिकार होने के लिये तैयार खड़ा दिखायी दे रहा हैं। अब देखना यह हैं कि शिकारी और शिकार की यही परंपरा आगे भी चलती रहेगी या फिर कांग्रेस को मजबूत करने के हम लोगों द्वारा उठाये बीड़े को सफल बनाने के लिये कांग्रेसी आगे आयेंगें।

Monday, March 15, 2010

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मनोनयन की आहटें सुनायी दे रहीं हैं भाजपा के संगठन चुनावों में
सिवनी। जिला भाजपा के संगठन चुनावों में भी इस मनोनयन होने की आहटें सुनायी देने लगी हैं। भाजपा के आन्तरिक लोकतन्त्र की दबी जुबान से विपक्षी दल भी तारीफ करते थे।इससे संगाथान में चुनाव लड़कर काम करने वाले नेताओं के मन में निराशा होने लगी हैं तथा उन्हें ऐसा लगने लगा है कि नेता अपने समर्थकों को पिछले दरवाजे से संगठन पर काबिज कराने में सफल हो जावेंगें। जिला भाजपा में संगठन के चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं। सम्भवत: 16 मार्च के बाद मंड़ल के चुनावों का कार्य प्रारंभ हो जावेगा। चुनाव जीतकर संगठन में काम करने के इच्छुक नेताओं ने पूरी सक्रियता के साथ सदस्यता अभियान चलाया था। लंबे समय सें चुनाव की तैयारियां चल रहीं है। लेकिन भाजपा के आला नेताओं का ऐसा मानना हैं कि यदि पूर्ववत संगठन के चुनाव हुये तो भाजपा के आन्तरिक मतभेद खुलकर सड़क पर आ जायेंगें जिससे भाजपा की प्रदेश स्तरीय फजीहत होने की आशंका थी। भाजपायी सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार संगठन मन्त्री के स्तर से ऐसे निर्देश मिल चुकें हैं कि यदि किसी मंड़ल में आपसी समन्वय और सर्वसम्मति ना बने तो प्रकरण को जिले में भेज दिया जाये जहां सें इसका निपटारा किया जायेगा। ऐसा माना जा रहा हैं कि इन विवादों का निपटारा जिला स्तर के चन्द नेताओं और संगठन मन्त्री के बीच तालमेल बिठा कर ही किया जायेगा। दूसरे शब्दों में यदि कहा जाये तो चुनाव के नाम पर मनोनयन की तैयारियां अन्दर ही अन्दर चल रहीं हैं। भाजपा में आन्तरिक लोकतन्त्र की प्रशंसा हमेशा से होती रही हैं। निर्धारित समय पर बाकायदा चुनाव होते थे और निर्वाचित पदाधिकारी संगठन के कार्य करते थे। भाजपा की इस व्यवस्था की अन्य विपक्षी दल भी अन्दर ही अन्दर तारीफ किया करते थे। लेकिन सत्ता के साथ आने वाले राजरोगों के कारण अब वैसी स्थिति नहीं रह गई है। आज भाजपा में हर स्तर पर भारी गुटबाजी चरम पर हैं। ऐसे में यदि पूर्व की तरह चुनाव होते हें तो एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिये नेतागण किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। इस फजीहत से बचने के लिये ही शायद भाजपा नेताओं ने मनोनयन के इस दूसरे स्वरूप का उपयोग करना उचित समझा हैं।
पालिका में हुये भ्रष्टाचार के अन्य दोषियो को बचाने के प्रयास निन्दनीय: आशुतोष
अध्यक्ष,उपाध्यक्ष एवं तकनीकी अमले को भी दंड़ित करें: ठेकेदार को ब्लेकलिस्ट करे: पालिका की आर्थिक क्षति की रिकवरी हो

सिवनी। नगरपालिका सिवनी में दुगनी लागत में बनायी गई घटिया सड़कों की मेरी शिकायत पर लगभग तीन साल बाद मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निलंबित करने की घोषणा सदन में की गई हैं। लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष और निर्माण कार्य में धांधली के लिये जवाबदार तकनीकी अमले को बचाने के प्रयास हो रहें हैं। इसके साथ ही ना तो ठेकेदार के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गई और ना ही परिषद को हुई आर्थिक हानि की रिकवरी के लिये किसी पर जवाबदारी निर्धारित की गई हैं। इससे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपके द्वारा चलाये जा रहे प्रदेश व्यापी अभियान की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया हैं। उक्ताशय का कथन करते हुये जिला इंका नेता आशुतोष वर्मा ने मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान और नगरीय निकाय मन्त्री श्री बाबूलाल गौर को भेजे गये एक फ्ेक्स भेजा है। अपने पत्र में आगे उल्लेख किया है कि लगभग तीन साल पहले बिना टैंड़र बुलाये 90 प्रतिशत अधिक दर बनायी गईं शहर की तीन प्रमुख सड़के बनायी गईं थीं। इनकी शिकायत जिला कलेक्टर के साथ ही राज्य शासन को भी की गई थी। तत्कालीन जिला कलेक्टर ने शहरी विकास अभिकरण से इसकी जांच करायी थी लेकिन कोई कार्यवाही करने के बजाय प्रतिवेदन को राज्य शासन को कार्यवाही हेतु भेज दिया था।इसके बावजूद भी शासन स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में इंका नेता वर्मा ने कहा है कि इसके पश्चात जब लोकायुक्त का जांच प्रतिवेदन कार्यवाही के लिये शासन को भेजा गया तब शासन ने भाजपा शासित पालिका के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और मु.न.पा.अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस दौरान जनप्रतिनिधियों को बचाने के लिये पालिका के कार्यवाही विवरण में हेर फेर भी गई थी। हाल ही में हुये पालिका चुनावों के महीनों पहले जारी किये गये इन नोटिसों पर कोई कार्यवाही ना होना उन्हें संरक्षण देना नहीं तो और क्या हैर्षोर्षो विज्ञप्ति में आगे लिख गया हे कि वैसे तो यह प्रकरण पूर्व में दो बार विधानसभा में उठाया जा चुका था। जिसके जवाब में सरकार ने यह कह दिया था कि जांच चल रही हैं एवं दोषियों पर कार्यवाही की जायेगी। अभी तीसरी बार जब यह मामला सदन में उठा तो सी.एम.ओ. को निलंबित करने की घोषणा कर शासन ने इस बात पर चुप्पी साध ली कि भाजपा शासित पालिका के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गईर्षोर्षो निर्माण कार्यों मे नाप करने,एम.बी.भरने और बिल बनाने का काम करने वाले तकनीकी अमले को क्यों बख्श दिया गयार्षोर्षो दोषी ठेकेदार को ब्लेक लिस्टेड करने की कार्यवाही क्यों नहीं की गईर्षोर्षो पालिका को हुई आर्थिक हानि की क्षतिपूर्ति के लिये रिकवरी की कार्यवाही क्यों नहीं की गईर्षोर्षो अपने पत्र में इंका नेता वर्मा ने उल्लेख किया हे कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाये प्रदेश व्यापी अभियान के दौरान जनता को इन सवालों का जवाब यदि नहीं मिलता तो यह अभियान एक बेमानी बनकर ही रह जायेगा।पत्र में इंका नेता ने विश्वास व्यक्त किया हे कि आप शीघ्र ही अन्य दोषियों के विरुद्ध भी कठोर कार्यवाही करेंगें ताकि ना तो जनप्रतिनिधि और ना ही अधिकारी ऐसा दुस्साहस दोबारा करने की हिम्मत नहीं जुटा पायेंगें।

Sunday, March 14, 2010

political dairy of seoni dist of m.p.

कांग्रेसी, कांग्रेसियों के साथ राजनैतिक चाले चलना बन्द कर सारी चाले यदि भाजपाइयों के साथ चलें तो ही जिले में कांग्रेस का उद्धार होगा
21 तारीख की रात 1 बजे आया फोन किसका था
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जिला पंचायत चुनाव का एक राज आज भी कांग्रेसी तलाश रहें हैं कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि प्रदेश इंका के उपध्यक्ष हरवंश सिंह ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिये मोहन चन्देल तथा अनिल चौरसिया के नाम पर अपनी सहमति दे डालीर्षोर्षो वैसे भी भाजपा ने जिले के इन चुनावों का प्रभार पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को दिया था तभी से सियासी हल्कों में यह चर्चा जोरों से थी कि परिसीमन सें प्रारंभ हुई नूरा कुश्ती इस चुनाव में भी जारी रहेगी। परिणाम इन आशंकाओं की पुष्टि भी करते हैं। मंड़ला और डिण्डोरी जिला पंचायत में भाजपा और सिवनी में कांग्रेस का कब्जा हुआ। जिले की आठ जनपदों में से कुरई और बरघाट में आजादी के बाद पहली बार भाजपा ने अपना कब्जा जमाया हैं तो केवलारी में भाजपायी रणनीतिकार जीतने की उम्मीद के बाद भी हार गये और हरवंश सिंह के विस मुख्यालय की जनपद पर उनका वर्चस्व कायम रहा। वैसे तो इस चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था। 19 में से सिर्फ चार सदस्य चुनाव जीते थे। 14 सदस्य जीतने का दावा कांग्रेस कर रही थी। कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर भारी मारामरी थी। अध्यक्ष पद के जितने भी दावेदार वे गोपनीय तरीके से भाजपा के प्रभारी कुलस्ते से संपर्क में थे। हर कांग्रेसी ने गोपनीयता बनाये रखने की पूरी पूरी कोशिश की थी। मिलने जाने वाले भले ही पर्दानशीं थे लेकिन जिनसे मिलना था जब वे ही बेपर्दा हों तो भला कोई चीज छिप कैसे सकती हैं। ऐसा ही कुछ होने का दावा राजनीति के जानकार कर रहें हैं। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा हैं कि चुनाव के दिन की एक रात पहले लगभग 1 बजे इंकाई शहंशाह अपने राजमहल के तख्ते ताऊस पर जब विराजमान थे कि तभी मोबाइल की घंटी घनघनायी और वे उठकर कुछ दूर चले गये। दूसरी तरफ से कौन क्या कह रहा है यह तो कोई नहीं जानता था लेकिन वहीं खड़े कुछ इंकाइयों ने बड़े चौंकने वाले अन्दाज में आका को यह रिपीट करते सुना कि क्या मोहन और अनिल भीर्षोर्षो बस इसके बाद ही खतरे की घंटी बजने लगी और सोच भी बदलने लगी। सुबह होते होते सारे पांसे पलट चुके थे। अध्यक्ष पद के लिये मोहन चन्देल और उपाध्यक्ष पद के लिये अनिल चौरसिया के नामों पर मोहर लग गई। रामगोपाल जैसवाल बागी हाकर चुनाव में कूद गये और कांग्रेस 8 के मुकाबले 11 से चुनाव जीत गई। यदि बागी रामगोपाल सिर्फ दो वोट और ले लेते तो बाजी ही पलट जाती। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना हैं कि शायद इसी कारण पहली बार हरवंश सिंह ने योग्यता का पैमाना बदला हैं। जनता ने कांग्रेस को 14 क्षेत्र में जीत दिलायी और कांग्रेस को अध्यक्ष चुनाव में सिर्फ 11 वोट ही मिल पाये फिर भी आशीZवाद परंपरानुसार हरवंश सिंह का ही चल रहा हैं।
बीमार अस्पताल के आयोजन में अतिथि बनने हुई मारामारी-
बीमार अस्पताल में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेले में अतिथि बनने के लिये जिस तरह जन प्रतिनिधियों में मारा मारी चली उतनी यदि अस्पताल को स्वस्थ बनाने में होती तो जनता का भी कुछ भला होता। सी.एम.ओ. द्वारा जो पहले कार्ड बटवाये गये थे उनमें मुख्यअतिथि नीता पटेरिया और अध्यक्षता नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी की थी। विधायक कमल मर्सकोले और शशि ठाकुर विशिष्ठ अतिथि थी। सांसद द्वय के.डी.देशमुख और बसोरी सिंह,विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और जिपं अध्यक्ष मोहन चन्देल का नामोनिशान तक नहीं था।दर किनार किये गये चार प्रतिनिधियों में सम तीन कांग्रेस के थे। इसका जब भारी विरोध हुआ तो कलेक्टर के हस्तक्षेप से छोड़ दिये गये जनप्रतिनिधियों को शामिल कर नये सिरे कार्ड छपवाये गये और कार्यक्रम संपन्न हुआ। अपने हक के लिये जनप्रतिनिधियों का लड़ना उचित हैं लेकिन जिस अस्पताल में यह शिविर लगाया गया वह खुद ही सालों से अस्वस्थ्य हैं। आधे से अधिक डॉक्टरों के पद रिक्त हैं,रोगी कल्याण समिति द्वारा बनाया गया राजीव गांधी गहन चिकित्सा कक्ष्र शोभा की सुपारी बन कर रह गया हैं इसकी कुछ महंगी मशीनें तो ऐसी हैं जिनका आज तक एक बार भी उपयोग नहीं हो पाया हैं,सांसद पटेरिया की निधि से बना बर्न यूनिट ईंट गारे का भवन भर बन कर रह गया हैं।ये हालात आज के नहीं हैं कांग्रेस सरकार में भी ऐसे ही थे और भाजपा की सरकार में भी ऐसे ही हैं। अब भी समय रहते दलगत भावना से दूर होकर इस अत्यन्त महत्वपूर्ण मुद्दे पर जिले के सभी जनप्रतिनिधि सरकार पर सामूहिक दवाब बनायें तो उस आम आदमी को राहत मिलेगी जिसके वोटों ने उन्हें राजसिंहासन पर बिठाया हैं।
संशोधन के साथ पप्पू की नसीहत पर अमल करें कांग्रेसी -
समय से तीन घंटे पहले आये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी का कार्यक्रम इस बार बहुत कुछ सन्देश दे गया। उन्हें रिसीव करने से लेकर बिदा करने तक हर मुकाम पर जिले के इंकाइयों को कुछ नया दिखा। पचौरी प्रसन्न मालू, राजकुमार पप्पू खुराना और पूर्व केन्द्रीय मन्त्री विमला वर्मा के घर गये लेकिन गोरखपुर जाते वक्त रास्ते में पड़ने वाले हरवंश सिंह के घर नहीं गये। लेकिन यह भी शोध का विषय है कि हरवंश ने पचौरी को आने के लिये आमन्त्रित करने में या पचौरी ने उनके घर जाने में परहेज किया। स्वागत के लिये प्रकाशित विज्ञापन,पत्रकार वार्ता ,सम्मेलन के लिये बने पंड़ाल की सजावट,उसमें लगे स्थानीय इंका नेताओं के फोटो युक्त बैनर, भाषण देने वालों की सूची,संचालन और पूरा माहौल ही बदला बदला सा लगा। ऐक भी वक्ता ऐसा नहीं था जिसने इशारों इशारों में कांग्रेस की दुर्गति के लिये हरवंश सिंह पर फब्ती ना कसी हो। भाषणों की श्रृंखला जिला इंकाध्यक्ष महेश मालू से शुरू होकर राजिक अकील,ओ.पी.तिवारी,श्याम अग्रवाल,पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू से होते हुये हरवंश सिंह और सुरेश पचौरी तक पहुंची। आभार प्रदर्शन संजय भारद्वाज और संचालन जकी अनवर ने किया। पप्पू खुराना का भाषण अखबारों की सुखीZ बना। उन्होंने कांग्रेसियों को यह नसीहत दे डाली थी कि अब बहुत हो चुका कांग्रेसी राजनैतिक चालें चलना बन्द कर दें। पप्पू की इस नसीहत को सभी कांग्रेसी इस संशोधन के साथ अमल में लाने लगे कि कांग्रेसी, कांग्रेसियों के साथ राजनैतिक चाले चलना बन्द कर दें और सारी राजनैतिक चाले यदि भाजपाइयों के साथ चलें तो ही जिले में कांग्रेस का उद्धार होगा। वरना नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही निकलेगा क्योंकि राजनैतिक चाले चलने वाले चेहरे बदलते रहेंगें और आपस में लड़ लड़ कर कांग्रेसी भाजपाइयों को हमेशा की तरह लाभ मिलते जायेगा।अब देखना यह है कि प्रदेश इंकाध्यक्ष के इस दौरे से जिले के कांग्रेसी क्या सीख लेते हें और कितना पार्टी का भला करने के लिये प्रयास करते हैंर्षोर्षो

Thursday, March 11, 2010

जिला इंका भंग कर पप्पू को अध्यक्ष बनाने की मांग
सिवनी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के सामने जिला कांग्रेस कमेटी को भंग कर राजकुमार पप्पू खुराना को अध्यक्ष बनाने की बाात कुछ कार्यकत्ताZओं ने भेंट के दौरान उठायी हैं।
जितनी चाबी भरी राम ने उतना चले खिलोना की तर्ज पर चल रही जिला कांग्रेस की गतिविधयों से इंकाइयों में भारी जनाक्रोश व्याप्त हैं। जिले में पार्टी लाइन पर लिये गये कई निर्णय तो इतने हास्यास्पद रहें हैं कि एक चुनाव में कमेटी उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित करती हैं तो अगले ही चुनाव में उन्हें पर्यवेक्षक बना कर उन्हें ऐसे पुरुस्कृत कर देती हैं मानो कांग्रेस को हराने का इनाम कांग्रेस ही खुद उन्हें दे रही हो। जिन्हें पार्टी टिकिट मांगने पर किसी बड़े नेता के कारण टिकिट नहीं देती और निर्दलीय चुनाव लड़ने पर उसे छ: साल के लिये पार्टी सें निष्कासित कर देती हैं जीतने के बाद उन्हें ही ससम्मान पार्टी की सदस्यता दे देती हैं। जब जिससे जितने समय काम निकालना होता हैं उतनी देर उसके अनुसार चल कर निर्णय लेने वाली जिला कांग्रेस कुछ ही समय बाद दूसरों से काम निकालने के लिये अपने के पहले के फैसले के खिलाफ जाने में भी कोई संकोच नहीं करती हैं। इन्हीं सब कारणों से कार्यकत्ताZओं में व्याप्त आक्रोश इस रूप में निकला है कि जिला कांग्रेस को भंग करने की मांग खुले आम हरवंश सिंह की उपस्थिति में प्रदेश अध्यक्ष के सामने उठी। बरघाट क्षेत्र के कुछ कार्यकत्ताZओं ने राजकुमार उर्फ पप्पू खुराना को अध्यक्ष बनाने की मांग भी की हैं।

Tuesday, March 9, 2010

political

जिपं अध्यक्ष चुनाव में
पचौरी तक पहुंची हरवंश की यह बात कि मुस्लिम और आदिवासी नहीं चाहिये
इंकाई मुस्लिम नेता जिन हरवंश सिंह को कौम का रहनुमा और मसीहा मानते थे जिला पंचायत चुनाव के दौरीान अपने कान से सुनी हरवंश की बातों को सुनकर ना सिर्फ भौंचक रह गये हैं वरन उन्होंने बाकायदा इसकी शिकायत भी प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी को भी की हैं।
बताते हैं कि हुआ यूं था जिला पंचायत अध्यक्ष पद के एक सशक्त दावेदार के निकटस्थ रिश्तेदार एक मुलिम नेता के साथ 21 तारीख की रात को हरवंश सिंह के गृह ग्राम बर्रा गये थे। इस दौरान यहां जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद की बिसात बिछायी जा रही थी। बताया जाता हैं कि हरवंश सिंह ने आवश्वस्त कर दिया था कि जिला पंचायत का ताज इस बार उनके ही सिर होगा। लेकिन जब उन्होंंने प्रत्याशी के रिश्तेदार को यह समझाया कि अब उनकी बात नहीं मानी जा सकती तो उन्होंने मुस्लिम या आदिवासी कार्ड खेलने का सुझाव दे डाला। इस पर हरवंश सिंह ने यह कह डाला कि मुस्लिम और आदिवासी नहीं चाहिये। ऐसा बोलते वक्त शायद वे ये भूल गये थे कि उनके केवलारी विस क्षेत्र में व्यापक असर रखने वाले मुस्लिम नेता भी वहां मौजूद है। जैसे ही उन्होंने हरवंश सिंह की बात सुनी वैसे ही जोर से चिल्लाते हुये उन्होंने कहा कि चलो बहुत हो चुकी । काफी देर तक तीखी नोंक झोंक होने के बाद ये सभी नेता एक बार फिर धोखा खाकर वापस लौट आयें।
बात यहीं तक रहती तो ठीक थी लेकिन आक्रोशित एक निर्वाचित मुस्लिम नेता ने विगत दिनों दौरे पर आये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी को पूरी दास्तान सुना डाली और कहा कि जो वर्ग, मुस्लिम और आदिवासी, कांग्रेस का वोट बैंक हैं उसके बारे में जिले के इकलौते इंका नेता हरवंश सिंह का ऐसा कहना कहां तक उचित हैंर्षोर्षो हम लोग बड़ी मुश्किल से इन चुनावों में अपनों (कांग्रेसियों)से भी लड़कर जीत कर आते हैं लेकिन फिर हमें नकार दिया जाता हें तो ऐसे में भला कांग्रेस कैसे मजबूत होगीर्षोर्षोयह सुनकर पचौरी भी भौंचक रह गये।