Friday, October 28, 2016

आतंकवाद रूपी अंधकार को मिटाने के लिये राजनैतिक नफा नुकसान  की चिंता किये बगैर सेना के हौसले बुलंद करें
अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व है दीपावली। अंधकार तो एक कमरे में भी होता है, व्यक्ति के अंदर भी हो सकता है और देश में भी हो सकता है। कमरे का अंधकार तो बिजली का एक बटन दबाने मात्र से दूर हो सकता है। लेकिन अपने अंदर के अधंकार को दूर करने के लिये खुद को ही आत्म संयम के साथ कठिन प्रयास करने पड़ते है और अपने अंदर की बुराइयों को दूर करना पड़ता है। लेकिन देश के अंदर अंधकार फैलना उस समय प्रारंभ होता है जब आसुरी प्रवृत्तियां अपना सिर उठाना प्रारंभ कर देती है। फिर चाहें वो मजहबी या धार्मिक उन्माद के रूप में सामने आये या जातीय और क्षेत्रीय उन्माद के रूप में आयें। इन उन्मादों कारण ही आजादी के बाद देश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित दो पूर्व प्रधानमंत्रियों की शहादत देकर इसकी कीमत चुकायी है। आजादी के बाद देश ने 62, 65 और 71 में तीन तीन युद्धों का सामना भी किया जिसमें हमारे देश की सेनाओं ने विश्व की महाशक्तियों से भी अपने शौर्य का लोहा मनवा लिया था। आज देश सीमापर के आतंकवाद रूपी अंधकार में डूब रहा है। हमारा पड़ोसी देश पिछले दो सीधे युद्धों में मुंह की खाने के बाद लगातार आतंकवादी ताकतों को ट्रेनिंग और रसद देने का काम करते आ रहा है।  इनका ही परिणाम था कि बाम्बे में 26/11 और उरी में सेना के कैम्प पर आतंकी हमले हुये जिन्होंने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। पिछले कई साल से जारी आतंकी हमलों से देश के कई निरीह नागरिकों सहित सेना के कई जांबाज जवान भी शहीद हो गये थे। पड़ोसी देश की सेनाओं ने देश के जवानों के सिर काट कर ले जाने जैसा वीभत्स काम भी कर डाला था। आतंकवाद से निपटने और पड़ोसी देश को सबक सिखाने के लिये देश की सरकार से देशवासियों की अपेक्षायें बहुत ज्यादा बढ़ गयीं थी। इसीलिये जब सितम्बर माह में सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकवादी ठिकानों को तबाह करने के साथ ही कई आतंकवादियों मार गिराया था तब समूचा देश सरकार और सेना के साथ एक जुट होकर खड़ा हो गया था। समूचे विश्व को देश ने यह संदेश दिया था कि बस अब बहुत हो चुका यदि आतंकी गतिविधियां रोकी नहीं गयीं तो भारत अब चुप नहीं रहेगा। सेना के इस शैर्य का ना तो किसी राजनैतिक दल को श्रेय लेने का अधिकर था और ना ही किसी को आलोचना और सवाज करने का अधिकार था। लेकिन ना केवल ऐसा हुआ वरन सेना के इस शौर्य को चुनावी मुद्दा तक बनाने की घोषणा कर डाली गयी। तो आइये आज दीपावली के पावन पर्व पर हम सब इस बात का संकल्प लें कि आतंकवाद के अंधकार को समूल नष्ट करने के लिये हम राजनैतिक नफा नुकसान की चिंता किये बगैर भारतीय सेना के हौसले बुलद करेंगें। यही दीप पर्व पर हमारी शुभकामनायें है।        

Friday, January 22, 2016

आपसी भाई चारे और अमन चैन के बिना विकास संभव नहीं  
आज हम गणतंत्र दिवस की 66 वीं सालगिरह मनाने जा रहें है। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था। आज जो हिन्दुस्तान,पाकिस्तान और बंगला देश है वो पूरा भारत था। आजादी के पहले इस देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा था। आजाद भारत में कई जाति,धर्म और भाषा भाषी लोग निवास करते है। हमारे देश के महान नेताओं ने संविधान बनाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा था। इसीलिये संविधान में इस देश ने धर्म निरपेक्षता क ेसिद्धान्त को अंगीकार किया था। इसके अनुसार देश में रहने वाले हर नागरिक को अपना अपना धर्म मानने की आजादी दी गयी थी। आजादी के बाद से लेकर आज तक सबसे अधिक विवाद धर्मनिरपेक्षता को लेकर ही हो रहा है। धर्म निरपेक्षकता को मानने वाले अपने आप को सभी धर्मो का हित रक्षक होने का दावा करते हैं तो वहीं दूसरी ओर यह कहने वालों की भी कमी नहीं है कि ये धर्मनिरपेक्ष ताकतें नहीं हैं वरन इसकी आड़ में  तुष्टीकरण कर एक वर्ग विशेष को संरक्षण देकर देश के बहुसंख्यकों के हितो की अनदेंखी करती है। हमारे प्रजातांत्रिक देश में वोटों की राजनीति के चलते शुरू से ही धार्मिक आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति प्रारंभ हो गयी थी। दो समुदायों की धार्मिक कट्टरता के चलते देश में कई बार सांप्रदायिक दंगों का दंश भी झेलना पड़ा है। देश के बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक में यह आग फैल गयी है। आज छोटी छोटी बातों पर या छोटी छोटी व्यक्तिगत घटनाओं को भी सांप्रदायिक रंग देकर फिजा बिगाड़ने की कोशिशें आपसी भाई चारे और गंगा जमुनी संस्कृति को कलंकित कर रहीं है। ऐसी घटनायें देश के विकास में बाधक बन रहीं है। इन घटनाओं के कारण सरकार की बहुत सारी ताकत इन्हें रोकने में बेकार हो जाती है। आज जरूरत इस बात की है कि हमारे देश के महान नेताओं ने संविधान में जो धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है उसे पूरी ईमानदारी से साकार करने के प्रयास करें। धार्मिक उन्माद फैला कर और वोटों का ध्रुवीकरण करके सरकार तो जरूर बनायी जा सकती है लेकिन बिना आपसी भाईचारे और अमन चैन के देश के विकास को गति दे पाना मुश्किल ही नहीं वरन नामुमकिन है। इसलिये सर्वधर्म समभाव और वसुदैव कुटुम्बकः की हमारी संस्कृति को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सच्चे मन से अपनाना पड़ेगा तभी हमारा देश विश्व गुरू बन पायेगा। तो आइये आज के इिन हम यह संकल्प लें कि हम आपसी भाई चारे को बनाये रखेंगें और इन्हें खंड़ित करने वाली सांप्रदायिक ताकतों का पूरी मुस्तैदी से सामना कर उन्हें सफल नहीं होने देंगें।         
आशुतोष वर्मा
सिवनी
9425174640

Monday, January 4, 2016

भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र का आवरण जनता के सामने आखिर तार तार हो गया जिला भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में 
  इस बार कुछ ऐसा माहौल बनाया गया था कि भाजपा पूरी तरह से आंतरिक लोकतंत्र को मानती है और इसका खुलासा उसके संगठन के चुनाव में सभी के सामने हो जायेगा। रायशुमारी की प्रक्रिया की जिसमें जिले भर के लगभग एक हजार कार्यकर्त्ताओं और नेताओं ने अपनी राय बतायी। लेकिन प्रदेश भाजपा से 41 अध्यक्षों के नामो की सूची ऐसे जारी हो गयी मानो वो तो पहले ही बनी बनायी रखी थी। इस सूची में सिवनी जिले से नीता पटेरिया को अध्यक्ष को घोषित किया गया। प्रदेश नेतृत्व ने जिस तरीके से नीता पटेरिया का ताजपोशी की है उसके चलते यह कहना सही नहीं होगा कि नीता जी की राह आसान होगी। भगत द्वारा छिंदवाड़ा में प्रेस कांफ्रेंस में संभाग के मामले में अपने नैतिक ामर्थन देे ने संबंधी बयान से जिले की राजनीति में भूचाल आ गया था। आननफानन में उन्होंने पत्रकारवार्ता आयोजित कर अपने उस बयान का खंड़न किया और सिवनी को ही संभाग बनाने के लिये प्रयत्न करने की बात कही और यह भी कहा कि वे इसके एक प्रतिनिधि मंड़ल के साथ शिवराज सिंह से भेंट करेगें। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नेताओं को लाल बत्ती बांटने का काम चालू कर सकते हैं। अभी तक मंत्रीमंड़ल का विस्तार एवं निगम और मंड़लों में अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला अटका पड़ा है। 
भाजपा के चुनाव में रायशुमारी की पिटी भद्दः-बीते दिनों जिला भाजपा के हुये संगठनात्मक चुनावों को लेकर राजनैतिक क्षेत्रों में चटखारे लेकर बहुत सारी चर्चायें होती रहीं। भाजपा  अभी तक सबसे अलग होने का दावा करती रही है। इस बार कुछ ऐसा माहौल बनाया गया था कि भाजपा पूरी तरह से आंतरिक लोकतंत्र को मानती है और इसका खुलासा उसके संगठन के चुनाव में सभी के सामने हो जायेगा। इसके लिये जिले के अध्यक्ष के चुनाव के पहले प्रदेश भाजपा द्वारा नियुक्त किये गये निर्वाचन अधिकारियों ने दो दिनों बैठकें और रायशुमारी की प्रक्रिया की जिसमें जिले भर के लगभग एक हजार कार्यकर्त्ताओं और नेताओं ने अपनी राय बतायी। इस दौरान भाजपा कार्यकर्त्ताओं और मीडिया में यह सामने आता रहा कि इस बार किसी नये नेता को अध्यक्ष बनाना चाहिये जो अब तक अध्यक्ष ना बना हो। ऐसे नेताओं में संतोष अग्रवाल,राकेशपाल सिंह,ज्ञानचंद सनोड़िया और प्रेम तिवारी आदि के नाम चर्चाओं में थे। जिन बड़े नेताओं से सलाह लेकर पैनल बनाना था उनमें डॉ ढ़ालसिंह बिसेन, नरेश दिवकार और नीता पटेरियो के अलावा दोनों सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते,बोध सिंह भगत और विधायक कमल मर्सकोले शामिल किये गये थे। लिा भाजपा अध्यक्ष के लिये यह भी चर्चा में था कि एक बार अध्यक्ष रह चुके सुजीत जैन को कमान सौंप दी जाये। यह भी चर्चा थी कि यदि ज्यादा घमासान मची तो वर्तमान अध्यक्ष वेदसिंह ठाकुर की भी एक बार फिर से ताजपोशी की जा सकती है। इन्हीं तमामा अटकलों के बीच 28 दिसम्बर को रात 7 8 बजे तक रायशुमारी की धमाचौकड़ी मची रही और इसके कुछ घंटों बाद ही प्रदेश भाजपा से 41 अध्यक्षों के नामो की सूची ऐसे जारी हो गयी मानो वो तो पहले ही बनी बनायी रखी थी। इस सूची में सिवनी जिले से नीता पटेरिया को अध्यक्ष को घोषित किया गया। इससे पूरी भाजपा में हैरानी इस बात को लेकर हुयी कि जिसका नाम तक रायशुमारी में शामिल नहीं था उसे कैसे अध्यक्ष बना दिया गया? प्रदेश नेतृत्व ने जिस तरीके से नीता पटेरिया का ताजपोशी की है उसके चलते यह कहना सही नहीं होगा कि नीता जी की राह आसान होगी। यदि यही करना था तो प्रदेश नेतृत्व रायशुतारी के पहले ही अपनी राय उजागर कर देना था ताकि कार्यकर्त्ता मांसिक रूप से इस बात के लिये तैयार हो जाते।राजनैतिक क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि इस संगठन चुनाव ने भाजपा के कथित आंतरिक   लोकतंत्र के दावे को जनता के बीच तार तार कर दिया है।
संभाग मामले में फंसे भगत,तत्काल किया खंड़न:-सांसद बोधसिंह भगत द्वारा छिंदवाड़ा में प्रेस कांफ्रेंस में संभाग के मामले में अपने नैतिक ामर्थन देे ने संबंधी बयान से जिले की राजनीति में भूचाल आ गया था। जिले के भाजपा के तमाम नेता भी सांसद के इस बयान से आश्चर्यचकित थे।आननफानन में उसी दिन सांसद सिवनी आये और उन्होंने पत्रकारवार्ता आयोजित कर अपने उस बयान का खंड़न किया और सिवनी को ही संभाग बनाने के लिये प्रयत्न करने की बात कही और यह भी कहा कि वे इसके एक प्रतिनिधि मंड़ल के साथ शिवराज सिंह से भेंट करेगें और सिवनी को संभाग बनाने की बात करेंगें। उन्होंने इसी दौरान यह भी खुलासा किया कि वे शासकीय मेडिकल कालेज के लिये भी प्रयास कर रहें है और इस संबंध उनकी केन्द्र के स्वास्थ्य मंत्री से बात भी हो चुकी है। अब राज्य सरकार की सहमति के लिये वे मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगें। इसी दौरान जिला कांग्रेस ने अध्यक्ष हीरा आसवानी सहित लगभग एक दर्जन नेताओं के नाम से एक विज्ञप्ति जारी हुयी जिसमें सांसद के बयान को सिवनी के मतदाताओं के साथ विश्वासघात बताया गया और विरोध करने की बात भी कही गयी। इसी के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशुतोष वर्मा ने एक विज्ञप्ति जारी कर सांसद के छिंदवाड़ा के बयान की तांे निंदा की लेकिन सिवनी को संभाग बनवाने के लिये प्रयास करने और प्रतिनिधि मंड़ल ले जाकर मुख्यमंत्री से मिलने की बात को देर आये दुरुस्त आये की तर्ज पर स्वीकार करने योग्य भी बताया। इंका नेता वर्मा ने विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री ने सदन में छिंदवाड़ा को संभाग मुख्यालय बनाने में भले ही असमर्थता व्यक्त कर दी हो लेकिन इसका आशय यह नहीं होता कि प्रस्तावित सतपुड़ा संभाग बने ही नहीं। उन्होंने यह मांग भी की है कि प्रदेश सरकार इस संबंध में अगस्त 2008 में आमंत्रित आपत्तियों का निराकरण करें एवं उसमें दिये गये तथ्यों को स्वीकार करते हुये इस संभाग का मुख्यालय सिवनी में बनाने की घोषणा करें ताकि जन भावनाओं के अनुरूप शीघ्र ही सतपुड़ा संभाग बन सके और लोगों को सुविधायें मिलना प्रारंभ हो जायें। अब देखना यह है कि कब सांसद जी प्रतिनिधिमंड़ल को मुख्यमंत्री जी से मिलवाते है? और कब सिवनी को संभाग की सौगात दिलवाते है? इतना तो तय है कि बिना राजनैतिक दवाब बनाये संभाग बनना संभव नहीं है। 
क्या लाल बत्ती सिवनी में देंगें शिवराज?:-भाजपा के संगठनात्मक चुनावों के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नेताओं को लाल बत्ती बांटने का काम चालू कर सकते हैं। अभी तक मंत्रीमंड़ल का विस्तार एवं निगम और मंड़लों में अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला अटका पड़ा है। जिले के इकलौते भाजपा विधायक कमल मर्सकोले भी मंत्री बन कर लाल बत्ती पर सवार होने का सपना देख रहें हैं। दो पूर्व लाल बत्तीधारी डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन और नरेश दिवाकर भी इस लाइन में शामिल माने जा रहे हैं। पूर्व विधायक शशि ठाकुर भी प्रयास में लगी हुयी है। कुछ नये नेता भी इसी की जुगाड़ लगाने में लगे है। लेकिन सवाल यह है कि शिव की नगरी सिवनी को शिवराज लाल बत्ती देंगें भी या नहीं ? वैसे तो ना जाने क्यों शिवराज सिवनी के साथ इस मामले में न्याय ना जाने क्यों नहीं कर ना रहें हैं ? शिवराज के मुख्यमंत्री रहते सिवनी में पार्टी के तीन तीन विधायक होने के बाद भी उन्होंने अपने मंत्री मंड़ल में अब तक किसी को शामिल नहीं किया है। अब जब जिले में भाजपा का सिर्फ एक ही विधायक है तब भी क्या वे सिवनी की उपेक्षा ही करेंगें या इस बार मंत्री बनायेंगें ? यह तो वक्त ही बतायेगा। “मुसाफिर” 
साभार 
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी 
05 जनवरी 2015