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Monday, September 27, 2010

संगठन चुनाव के नाम पर जिले में मात्र हरवंश सिंह के केवलारी क्षेत्र में मजबूत कांग्रेस को ही और मजबूत करने का काम किया गया है

प्रभात झॉ के कार्यक्रम में केवलारी का जुड़ना एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि वैसे तो डॉ. बिसेन ने अच्छा चुनाव लड़ा था लेंकिन हमारी ही कुछ कसर रह गई। लेकिन इस बार आपको कोई चूक नहीं करना हैं। वैसे शायद प्रभात झॉ जी इस तथ्य वाकिफ ही होंगें कि इंका भाजपा की नूरा कुश्ती में ही केवलारी सीट भाजपा हारती आ रही हैं बदले में उसे शेष सभी सीटों पर जीत दिलायी जाती हैं। कांग्रेस के संगठन चुनावों के नाटक का समापन हो गया हैं। विगत दिनों कांग्रेस के जिला निर्वाचन अधिकारी वालुजकर सिवनी दोबारा आये थे। जिला प्रतिनिधियों की सूची गोपनीय रखी गई थी। इसको मीडिया को भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। बैठक में पहुंचे वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और संजय भारद्वाज आदि ने इस बात पर आपत्ति उठायी कि जिला प्रतिनिधियों की सूची को गोपनीय क्यों रखा गयार्षोर्षो चुनाव के नाम पर औपचारिकता करके किसी नेता की मनमानी थोपी जा रही हैं। अयोध्या विवाद पर आने वाले फैसले को लेकर जिले में अमन चैन बनाये रखने के लिये ऐतिहात के तौर पर कई कार्य किये गये। जिले के प्रशासनिक अमले के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। विगत 23 सितम्बर को प्रशासन की पहल पर जिले के सभी घर्म गुरुओं,राजनैतिक दलों के नेता,सामाजिक कार्यकत्ताZ और प्रशानिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से शान्ति मार्च का आयोजन किया।



प्रभात झा के दौरे में केवलारी का रहना चर्चित- लंबे समय बाद जिले में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झॉ का नगरागमन हुआ। उन्होंने जिले के सभी मंड़लों के कार्यकत्ताZओं से तीन सम्मेलनों में मुलाकात की और उन्हें मार्गदर्शन दिया। सिवनी,केवलारी और लखनादौन में उनकें सम्मेलन हुये। प्रभात झॉ के कार्यक्रम में केवलारी का जुड़ना एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना मानी जा रही हैं। उल्लेखनीय हैं कि केवलारी क्षेत्र कांग्रेस के हरवंश सिंह विधायक हैं जो इन दिनो विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर आसीन हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय हैं कि विस उपाध्यक्ष रहते हुये भी जब हरवंश सिंह ने कांग्रेस के निर्णय के साथ सदन के बहिष्कार का निर्णय लिया था और यह बयान दिया था कि पार्टी मेरे लिये पहले हैं और उपाध्यक्ष पद बाद मे हैं। तब सदन के अन्दर और बाहर भारी बवाल मचा था। नये प्रदेशाध्यक्ष बन प्रभात झॉ ने पूर्व मुख्यमन्त्री कैलाश जोशी और कप्तान सिंह के साथ राज्यपाल से भेंट कर श्री हरवंश सिंह के संवैधानिक पद पर रहते हुये सदन के बहिष्कार को आपत्तिजनक बताते हुये आवयक कार्यवाही करने की मांग की थी। लेकिन भाजपा की गुटबाजी और इंका भाजपा की नूरा कुश्ती के चलते हरवंश सिंह के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुयी थी। इसलिये प्रभात झॉ के जिले के दौरे में केवलारी के सम्मलिम होने को लेकर तरह तरह की अटकलें लगायी जा रहीं हैं। उनके इस प्रवास में भाजपा के केवलारी से रहे पूर्व मन्त्री डॉ. ढ़ालसिंह बिसेन भी साथ थे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि वैसे तो डॉ. बिसेन ने अच्छा चुनाव लड़ा था लेंकिन हमारी ही कुछ कसर रह गई। लेकिन इस बार आपको कोई चूक नहीं करना हैं और पिछले चार बार बदला लेकर इस बार यह सीट जीतना ही हैं। वैसे शायद प्रभात झॉ जी इस तथ्य वाकिफ ही होंगें कि इंका भाजपा की नूरा कुश्ती में ही केवलारी सीट भाजपा हारती आ रही हैं बदले में उसे शेष सभी सीटों पर जीत दिलायी जाती हैं। भाजपा यदि सन 1993 के पहले चुनाव से लेकर आज तक की अपनी हार की समीक्षा करे तो सारे तथ्य वैसे ही उजागर हो जायेंगें लेकिन सब कुछ ओपन सीक्रेट की तरह साफ हैं फिर भी आज तक अनुशासन के जानी जाने वाली भाजपा ने कभी भी किसी के भी खिलाफ भीतरघात के आरोप में कोई कार्यवाही करना उचित नहीं समझा।

केवलारी क्षेत्र को केन्द्र बना कर हुये इंका के चुनाव- कांग्रेस के संगठन चुनावों के नाटक का समापन हो गया हैं। विगत दिनों कांग्रेस के जिला निर्वाचन अधिकारी वालुजकर सिवनी दोबारा आये थे। उन्होंने मालू भवन में एक बैठक में भाग लिया। इस बैठक में प्रवेश नियन्त्रित किया गया था। केवल पासधारी लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी। जिला प्रतिनिधियों की सूची गोपनीय रखी गई थी। इसको मीडिया को भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। बैठक में पहुंचे वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा, राजकुमार पप्पू खुराना,प्रसन्न मालू और संजय भारद्वाज आदि ने इस बात पर आपत्ति उठायी कि जिला प्रतिनिधियों की सूची को गोपनीय क्यों रखा गयार्षोर्षो चुनाव के नाम पर औपचारिकता करके किसी नेता की मनमानी थोपी जा रही हैं। जिले के एकमात्र विधायक हरवंश सिंह के विश्वास पात्र हीरा आसवानी के नाम पर आम सहमति की बात की गई। यहां यह उल्लेखनीय हैं कि व्यवहार कुशल व्यवसायी हीरा आसवानी की केवलारी विधानसभा क्षेत्र में शुगर मिल रही हैं एवं पिछले तीन चुनावों से वे पलारी के आस पास के पोलिंग बूथों का प्रभार कुशलता के साथ सम्भालते रहें हैं। जिले में कांग्रेस संगठन के चुनाव ही मात्र केवलारी विधानसभा क्षेत्र जीतने के ही हिसाब से कराये गये हैं जो कि हरवंश सिंह का क्षेत्र हैं जहां से वे चार बार से चुनाव जीत रहें हैं। पिछले पांच चुनावों से सिवनी और बरघाट एवं दो बार से लखनादौन क्षेत्र में कांग्रेस हारती आ रही हैं। लेकिन इन क्षेत्रों को जीत कर कांग्रेस को मजबूत करने के कोई प्रयास संगठन चुनावों में नहीं किये गये है।सिवनी,बरघाट और लखनादौन क्षेत्रसे भी जिन नेताओं का चयन किया गया हें उनमें से अधिकांश हरवंश सिंह के पसन्दीदा उम्मीदवार ना आने पर अपने क्षेत्र में भीतरघात और केवलारी में हरवंश सिंह का चुनावी काम करते रहे हैं। अधिकांश प्रदेश प्रतिनिधियों और जिला प्रतिनिधियों का चयन इसी आधार पर किया गया हैं। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में सम्पूर्ण केवलारी ब्लाक के अलावा सिवनी ग्रामीण,छपारा एवं धनोरा ब्लाक के कुछ हिस्से आते है।इन तीनों ब्लाकों के प्रदेश प्रतिनिधि केवलारी क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। इसी तरह इन तीन ब्लाकों के 18 जिला प्रतिनिधियों में से 13 जिला प्रतिनिधि केवलारी क्षेत्र के निवासी हैं जबकि इन तीन ब्लाकों में सिवनी एवं लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के बड़े हिस्से शामिल हैं। इस तरह यह तो कहा ही जा सकता हैं कि इन संगठन चुनावों से जिले में कांग्रेस मजबूत नहीं होगी और सोनिया और राहुल की मंशा पर पानी फेर दिया गया है ैंऔर संगठन चुनाव के नाम पर जिले में मात्र केवलारी में मजबूत कांग्रेस को ही और मजबूत करने का काम किया गया हैं।।

अयोध्या विवाद:शान्ति मार्च का हुआ असर- अयोध्या विवाद पर आने वाले फैसले को लेकर जिले में अमन चैन बनाये रखने के लिये ऐतिहात के तौर पर कई कार्य किये गये। जिले के प्रशासनिक अमले के साथ ही विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। विगत 23 सितम्बर को प्रशासन की पहल पर जिले के सभी घर्म गुरुओं,राजनैतिक दलों के नेता,सामाजिक कार्यकत्ताZ और प्रशानिक अधिकारियों ने संयुक्त रूप से शान्ति मार्च का आयोजन किया जो कि शहर के भेरौगंज इलाके से शुरू होकर विभिन्न इलाकों का भ्रमण करते हुये स्थानीय थाने के सामने वाले उर्दू स्कूल में समाप्त हुआ। शान्ति मार्च के समापन के अवसर पर उपस्थित धर्म गुरुओं,प्रमुख नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने शान्ति और अमन चैन बनाये रखने की अपील की थी। जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक ने जिले ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर शान्ति बनाये रखने की अपील की थी। सभी कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को जिला पुलिस अधीक्षक शपथ भी दिलाते थे। इन सब प्रयासों से जिले में एक वातावरण बन गया था। सभी आश्वस्त दिख रहें थे कि बीते कुछ सालों में जिले के अमन चैन और शान्ति के स्विर्णम इतिहास पर लगे बदनुमा दागों को धो लेंगें। लेकिन 24 सितम्बर को होने वाला फैसला टल गया। अब 28 सित. को सुप्रीम कोर्ट में पेशी रहेगी जिसके बाद ही कुछ तय हो पायेगा। वैसे यही उम्मीद की जा रही है कि जिले में अमन चैन बना रहेगा।

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